मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे डॉ. ढाल सिंह बिसेन को 12 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया। भारतीय जनता पार्टी से जुड़े बिसेन विधायक, मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री और लोकसभा सांसद के रूप में अपनी भूमिका निभा चुके हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचने वाले बिसेन का राजनीतिक सफर कई दशकों की राजनीतिक यात्रा समेटे हुए है।
जन्म और प्रारंभिक जीवन
डॉ. ढाल सिंह बिसेन का जन्म 14 मई 1952 को मध्य प्रदेश के तत्कालीन सिवनी जिले के पिपरिया गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम सेवकराम बिसेन और माता का नाम सोनाबाई बिसेन था। उनका परिवार कृषि से जुड़ा रहा है। लोकसभा की आधिकारिक सदस्य-जीवनी में उनके पेशे के रूप में चिकित्सा और कृषि का उल्लेख मिलता है।
ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े बिसेन ने आगे चलकर स्थानीय राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की और धीरे-धीरे मध्य प्रदेश की राजनीति में अपनी पहचान बनाई।
शिक्षा और पेशेवर जीवन
डॉ. बिसेन ने सिवनी में प्रारंभिक उच्च शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्वेदिक कॉलेज से आयुर्वेद संबंधी चिकित्सा शिक्षा हासिल की। उनकी शैक्षणिक योग्यता में आयुर्वेद विज्ञानाचार्य तथा आधुनिक चिकित्सा, शल्य चिकित्सा, ट्रॉमा और बायोकेमिस्ट्री से संबंधित डिप्लोमा का उल्लेख मिलता है।
राजनीति में सक्रिय होने से पहले उनका पेशेवर जुड़ाव चिकित्सा और कृषि से रहा। यही पृष्ठभूमि उनके सार्वजनिक जीवन के परिचय का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पंचायत से विधानसभा तक राजनीतिक सफर
डॉ. ढाल सिंह बिसेन का राजनीतिक सफर स्थानीय स्तर से आगे बढ़ा। उपलब्ध जीवनी संबंधी विवरणों के अनुसार, उन्होंने पंचायत स्तर पर अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की और बाद में मध्य प्रदेश विधानसभा तक पहुंचे।
वर्ष 1990 से 2008 के बीच वे चार बार मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। यह उनके राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण दौर था, जिसमें उन्होंने राज्य की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाई।
उनकी राजनीतिक यात्रा का एक प्रमुख पहलू स्थानीय स्तर से राज्य और फिर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचना रहा।
मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी
डॉ. बिसेन ने मध्य प्रदेश सरकार में विभिन्न विभागों का दायित्व संभाला। वर्ष 2003-2004 के दौरान वे वन, परिवहन और खनन विभागों से जुड़े मंत्री पद पर रहे। इसके बाद वर्ष 2004-2005 में उन्होंने स्कूल शिक्षा और जेल विभाग की जिम्मेदारी भी संभाली।
मंत्रिमंडल में उनकी भूमिका ने उन्हें राज्य के प्रशासनिक और नीतिगत कामकाज का अनुभव दिया। बाद में वर्ष 2012-2013 में वे मध्य प्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष भी रहे।
बालाघाट से लोकसभा सांसद
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने डॉ. ढाल सिंह बिसेन को मध्य प्रदेश के बालाघाट संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने चुनाव जीतकर 17वीं लोकसभा में प्रवेश किया। यह उनका पहला लोकसभा कार्यकाल था।
सांसद के रूप में उन्होंने रेल संपर्क, सड़क और रेलवे ओवरब्रिज, स्वास्थ्य सुविधाओं, ग्रामीण विकास, कृषि तथा अन्य स्थानीय और राष्ट्रीय विषयों को संसद में उठाया।
PRS Legislative Research के उपलब्ध संसदीय रिकॉर्ड के अनुसार, 17वीं लोकसभा के दौरान उनकी उपस्थिति 99 प्रतिशत रही। इस अवधि में उन्होंने 73 बहसों में हिस्सा लिया और 189 प्रश्न पूछे। ये आंकड़े उनके संसदीय कार्यकाल के रिकॉर्ड को समझने का एक आधार देते हैं।
सामाजिक सरोकार और जनसेवा
डॉ. बिसेन के सार्वजनिक जीवन से जुड़े परिचय में कृषि, ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण, शिक्षा और स्थानीय रोजगार जैसे विषयों का उल्लेख मिलता है।
उनकी पेशेवर पृष्ठभूमि चिकित्सा और कृषि से जुड़ी रही है। संसदीय कार्यकाल के दौरान भी ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और कृषि से संबंधित विषयों पर उनकी सक्रियता दर्ज की गई।
उत्तराखंड के राज्यपाल नियुक्त
12 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्वारा की गई राज्यपाल नियुक्तियों की घोषणा में डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया। इस नियुक्ति के साथ उनका सार्वजनिक जीवन मध्य प्रदेश की राजनीति से आगे बढ़कर संवैधानिक पद तक पहुंचा है।
राज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका संविधान के प्रावधानों के अनुरूप राज्य सरकार के साथ संवैधानिक संबंधों, विधानसभा से जुड़े दायित्वों और अन्य निर्धारित जिम्मेदारियों से संबंधित होगी। राज्यपाल का पद राजनीतिक दल के संगठनात्मक पद से अलग एक संवैधानिक जिम्मेदारी है।
चुनावी साल में राजनीति के मंझे खिलाड़ी को भेजा
डॉ. ढाल सिंह बिसेन का राजनीतिक जीवन पंचायत स्तर से शुरू होकर मध्य प्रदेश विधानसभा, राज्य मंत्रिमंडल, राज्य वित्त आयोग और लोकसभा तक पहुंचा है। चार बार विधायक, पूर्व मंत्री और बालाघाट से पूर्व सांसद के रूप में उनका लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है। अक्टूबर 2026 में उत्तराखंड के राज्यपाल पद पर उनकी नियुक्ति उनके सार्वजनिक जीवन का नया अध्याय है।
ढाल सिंह बिसने राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं। उन्हे संगठन का भी खासा अनुभव है। आपको बता दें कि उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव करीब हैं ऐसे में ढाल सिंह बिसेन को राज्यपाल बनाकर भेजे जाना अपने आप में एक बड़ा कदम है।

