लखनऊ/नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए एक नया नारा बुलंद किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश में बढ़ती महंगाई का एकमात्र समाधान सत्ता परिवर्तन है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत की भूमिका की चर्चा करते हुए उन्होंने रूस के साथ भारत के पुराने संबंधों को याद किया।
आज ही LPG पर 60 रुपये और बढ़ गए- अखिलेश यादव
अखिलेश यादव ने अपने संबोधन की शुरुआत एक तुकबंदी वाले नारे से की— "जब जाएंगे भाजपाई, तभी घटेगी महंगाई।" उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने आम जनता की जेब पर डाका डाला है। उन्होंने कहा, “जहां सरकार एक तरफ टैक्स लगा रही है, वहीं दूसरी तरफ महंगाई बढ़ती चली जा रही है. आज ही LPG पर 60 रुपये और बढ़ गए. उन्होंने कहा कि कुछ परिस्थितियों की वजह से महंगाई करनी पड़ रही है, बाद में कम करेंगे, लेकिन एक बार जो चीज महंगी हो गई वह बाद में कम नहीं होती.”
- ईंधन की कीमतें: उन्होंने तर्क दिया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम आम आदमी की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं।
- खाद्य पदार्थ: दाल, तेल और सब्जियों की बढ़ती कीमतों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 'डबल इंजन' की सरकार मध्यम वर्ग और गरीबों की थाली से भोजन छीन रही है।
रूस के साथ ऐतिहासिक संबंधों की बात
विदेश नीति के मुद्दे पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने रूस (पूर्व सोवियत संघ) के साथ भारत के रिश्तों को एक नई दिशा में परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि रूस भारत का एक "पुराना और भरोसेमंद मित्र" है जिसने कठिन समय में हमेशा भारत का साथ दिया है।
"रिश्ते रातों-रात नहीं बनते, बल्कि दशकों के भरोसे पर टिके होते हैं। भारत और रूस की दोस्ती सामरिक और सांस्कृतिक रूप से बहुत गहरी है।"
विशेषज्ञों का मानना है कि अखिलेश का यह बयान उस समय आया है जब वैश्विक स्तर पर गुटबाजी तेज है और भारत अपनी 'स्वतंत्र विदेश नीति' पर कायम रहने की कोशिश कर रहा है। सपा प्रमुख ने संकेत दिया कि वर्तमान सरकार को ऐतिहासिक मित्रों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।
मौजूदा आर्थिक परिदृश्य और बेरोजगारी का मुद्दा
अखिलेश यादव ने केवल महंगाई ही नहीं, बल्कि बेरोजगारी को भी भाजपा की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि:
- पेपर लीक और भर्ती: उत्तर प्रदेश में हाल के समय में हुए पेपर लीक मामलों को उन्होंने युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया।
- औद्योगिक विकास: उन्होंने दावा किया कि निवेश के नाम पर केवल बड़े आयोजन हो रहे हैं, लेकिन धरातल पर कारखाने और रोजगार नजर नहीं आ रहे हैं।
विपक्ष की एकजुटता और 2027 की रणनीति
अखिलेश यादव का यह हमला केवल तात्कालिक नहीं है, बल्कि यह आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी का हिस्सा भी है। वे लगातार पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर जोर दे रहे हैं। उनका मानना है कि यदि सामाजिक न्याय और आर्थिक राहत को मुख्य मुद्दा बनाया जाए, तो भाजपा के "विकास के दावों" की हवा निकल जाएगी।
