Nagchandreshwar Mandir: उज्जैन स्थित प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर परिसर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर अतिप्राचीन और अत्यंत रहस्यमयी स्थल है, जो साल में केवल एक दिन यानि नागपंचमी (श्रावण शुक्ल पंचमी) पर ही श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुलता है। इस दिन आधी रात 12 बजे मंदिर के द्वार खोले जाते हैं और अगले 24 घंटों तक भक्तों को दर्शन की अनुमति होती है। इस बार मंदिर के पट 28 जुलाई की आधी रात 12 बजे खुलेंगे और 29 जुलाई की रात 12 बजे तक 24 घंटे खुले रहेंगे।
नागचंद्रेश्वर मंदिर उज्जैन की धार्मिक धरोहर की एक अद्वितीय परंपरा है जहाँ वर्ष में केवल एक दिन भगवंत की विशेष मूर्ति दर्शनीय होती है। यह मंदिर श्रद्धा, पौराणिक कथाओं और प्रशासनिक व्यवस्था का संगम है जो भक्तों को गहन आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है। इस दिन की महत्ता ना केवल धार्मिक बल्कि सांप्रदायिक एकता और भारतीय संस्कृति की जीवंतता को भी उजागर करती है।
Nagchandreshwar Mandir: पौराणिक मान्यता और मंदिर की स्थापना
मान्यता है कि सर्पराज तक्षक ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें अमरत्व का वरदान दिया और उसके बाद तक्षक उज्जैन के महाकाल मंदिर में निवास करने लगे, लेकिन बिना विघ्न के एकांत में रहने की इच्छा के कारण इस मंदिर को केवल एक दिन खुलने का निर्णय हुआ
परमार राजा भोज ने लगभग 1050 ईस्वी में इस मंदिर का निर्माण कराया था, और बाद में 1732 में महाराज राणोजी सिंधिया द्वारा इसका जीर्णोद्धार करवाया गया
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Nagchandreshwar Mandir की वास्तुकला व मूर्ति की खासियत
- यह मंदिर महाकालेश्वर मंदिर के तीसरी मंजिल पर स्थित है। नीचे महाकालेश्वर, बीच में ओंकारेश्वर, और ऊपर नागचंद्रेश्वर भगवान विराजित हैं।
- यहाँ एक अद्वितीय 11वीं शताब्दी की मूर्ति स्थापित है जिसमें नागराज सर्प की फन पर शिव–पार्वती विराजमान हैं, साथ ही गणेश, कार्तिकेय, सूर्य–चंद्र की आकृतियाँ भी हैं।
- कहा जाता है यह मूर्ति नेपाल से लाई गई थी और विश्व में इस तरह की प्रतिमा कहीं और नहीं है।
Nagchandreshwar Mandir: दर्शन प्रक्रिया और व्यवस्था
- नाग पंचमी की रात 12 बजे से प्रशासन एवं पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा की ओर से त्रिकाल पूजा-अर्चना के बाद दर्शन शुरू होते हैं, जो अगले 24 घंटों तक जारी रहते हैं ।
- दूसरे दिन दोपहर 12 बजे जिला प्रशासन द्वारा विशेष पूजा होती है और शाम को महाकालेश्वर मंदिर समिति द्वारा भी पूजा एवं आरती की जाती है।
- दर्शनार्थियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए व्यवस्थित कतार व्यवस्था, वरिष्ठ अधिकारी, सीसीटीवी कैमरे, और धार्मिक मार्गनिर्देशन जैसे प्रतिबन्ध लागू किए जाते हैं। अनुमानितः एक दिन में 10 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन करते हैं।
Nagchandreshwar Mandir: आस्था और धार्मिक महत्व
- यह माना जाता है कि मंदिर में दर्शन करने से कालसर्प दोष, सर्पदोष, और पितृदोष से मुक्ति मिलती है। भक्तों को आत्मिक शांति, भय निवारण और जीवन के बाधाओं से राहत मिलती है।
- श्रद्धालु इस दिन रात से जुटने लगते हैं ताकि मंदिर खुलते ही पहले दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर सकें। इस पवित्र अवसर को पाकर लोग अत्यंत भाग्यवान मानते हैं
Nagchandreshwar Mandir: दर्शन का समय-सारांश
आयोजन | विवरण |
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मंदिर खुलने का समय | नागपंचमी की रात 12 बजे |
पूजा व्यवस्था | त्रिकाल पूजा, जिला प्रशासन पूजा, समिति आरती |
दर्शन अवधि | खुलने के अगले 24 घंटे तक |
भीड़ नियंत्रण | प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा बूथ, अलग मार्ग, सीसीटीवी |
श्रद्धालुओं की संख्या | लगभग 10 लाख |
विशेष लाभ मान्यता | सर्पदोष मोक्ष, मंगल अपेक्षाएं पूर्ण होना |