Kharmas 2026: हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में समय की गणना का विशेष महत्व है। इन्हीं गणनाओं में से एक है 'खरमास', जिसे मलमास भी कहा जाता है। साल 2026 में खरमास का आगाज़ होने वाला है, जिसके साथ ही सभी मांगलिक कार्यों पर कुछ समय के लिए विराम लग जाएगा। इस लेख में खरमास 2026 की तिथियों, नियमों और इसके पीछे की पौराणिक कथा का विस्तृत विवरण दिया गया है:
Kharmas 2026: थमेंगे मांगलिक कार्य, जानें नियम और पौराणिक रहस्य
भारतीय संस्कृति में किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले 'शुभ मुहूर्त' देखने की प्राचीन परंपरा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहों की स्थिति हमारे जीवन और कार्यों की सफलता को गहराई से प्रभावित करती है। साल 2026 में 15 मार्च से एक ऐसी अवधि शुरू हो रही है, जिसे शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है। इसे हम 'खरमास' या 'मलमास' के नाम से जानते हैं।
Kharmas 2026: मुख्य तिथियां और समय
इस वर्ष मार्च के महीने में सूर्य अपनी राशि परिवर्तन करेंगे, जिससे खरमास का प्रारंभ होगा।
- प्रारंभ तिथि: 15 मार्च, 2026
- समाप्ति तिथि: 13 अप्रैल, 2026
- कुल अवधि: पूरे 30 दिन
- 13 अप्रैल को जब सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे (जिसे मेष संक्रांति कहा जाता है), तब खरमास समाप्त होगा और पुनः विवाह व अन्य मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त शुरू होंगे।
साल में दो बार लगता है खरमास का 'ब्रेक'
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य देव जब भी बृहस्पति की राशियों—धनु और मीन—में प्रवेश करते हैं, तब खरमास लगता है। पूरे एक वर्ष में दो बार ऐसा मौका आता है:
- प्रथम खरमास: यह मध्य दिसंबर से शुरू होकर मध्य जनवरी (मकर संक्रांति) तक रहता है।
- द्वितीय खरमास: यह मध्य मार्च से शुरू होकर मध्य अप्रैल (मेष संक्रांति) तक रहता है।
मांगलिक कार्यों पर प्रतिबंध: क्या न करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरमास (Kharmas) के दौरान सूर्य की स्थिति कमजोर और 'मलिन' हो जाती है, इसलिए इस अवधि में किए गए मांगलिक कार्य शुभ फल प्रदान नहीं करते। इस दौरान निम्नलिखित कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है:
- विवाह और सगाई: Kharmas की इस अवधि में विवाह करना वर्जित है क्योंकि माना जाता है कि इससे वैवाहिक जीवन में भावनात्मक और शारीरिक सुख की कमी रह सकती है।
- गृह निर्माण और प्रवेश: नए घर की नींव रखना या नए घर में प्रवेश (Griha Pravesh) करना इस महीने में अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसे घर में रहने वालों को सुख-शांति नहीं मिल पाती।
- मुंडन और संस्कार: बच्चों के मुख्य संस्कार जैसे मुंडन, नामकरण और यज्ञोपवीत (जनेऊ) Kharmas में नहीं किए जाते।
- व्यापार और निवेश: नए व्यापार का आरंभ या बड़े वित्तीय निवेश के लिए Kharmas का समय उपयुक्त नहीं है।
- संपत्ति और वाहन खरीद: नई कार, जमीन या सोने-चांदी की बड़ी खरीदारी से बचना चाहिए।
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क्यों रुक जाते हैं शुभ कार्य? (ज्योतिषीय विश्लेषण)
देवगुरु बृहस्पति को शुभ कार्यों का मुख्य कारक माना जाता है। जब सूर्य अपने मित्र गुरु की राशि (मीन या धनु) में आते हैं, तो वे गुरु के प्रभाव को दबा देते हैं। इसे 'गुरु का आदित्य दोष' भी कहा जाता है। इस स्थिति में सूर्य का स्वभाव उग्र हो जाता है और उनकी सकारात्मक ऊर्जा कम हो जाती है। चूंकि किसी भी शुभ कार्य के लिए सूर्य और गुरु दोनों का मजबूत होना अनिवार्य है, इसलिए खरमास में इन कार्यों पर पाबंदी लग जाती है।
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साधना और पूजा का विशेष महत्व
भले ही kharmas का यह समय मांगलिक कार्यों के लिए ठीक न हो, लेकिन आध्यात्मिक प्रगति के लिए यह महीना सर्वश्रेष्ठ है। शास्त्रों में कहा गया है कि Kharmas में की गई पूजा का फल कई गुना बढ़कर मिलता है।
- सूर्य उपासना: इस पूरे माह में सूर्य देव को तांबे के पात्र से जल (अर्घ्य) देना अत्यंत लाभकारी होता है।
- मंत्र जाप: 'ओम सूर्याय नमः' या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से कुंडली में सूर्य मजबूत होता है।
- दान-पुण्य: जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र और गुड़ का दान करना चाहिए।
Kharmas की पौराणिक कथा: सूर्य के रथ और गधों का रहस्य
खरमास के पीछे एक बहुत ही रोचक पौराणिक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि भगवान सूर्य देव अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड की निरंतर परिक्रमा करते हैं। सूर्य को कहीं भी रुकने की अनुमति नहीं है।
एक बार निरंतर दौड़ने के कारण उनके घोड़े थक गए और प्यास से व्याकुल हो गए। घोड़ों की दयनीय हालत देख सूर्य देव का मन द्रवित हो गया। वे उन्हें एक तालाब के किनारे ले गए, लेकिन उन्हें यह आभास हुआ कि यदि रथ रुक गया तो सृष्टि में अनहोनी हो जाएगी। तभी उन्होंने देखा कि तालाब के पास दो खर (गधे) खड़े थे। सूर्य देव ने घोड़ों को विश्राम के लिए छोड़ा और रथ में उन गधों को जोड़ दिया।
गधों की गति घोड़ों जैसी नहीं थी, जिस कारण रथ की रफ्तार बहुत धीमी हो गई। पूरे एक माह तक गधों ने रथ खींचा और इस दौरान घोड़ों ने अपनी थकान मिटाई। गधों के कारण रथ की इस धीमी और सुस्त गति की अवधि को ही 'खरमास' कहा गया। जब एक माह बाद चक्र पूरा हुआ, तो घोड़े पुनः रथ में लौटे और सूर्य की गति फिर से तेज हो गई।
खरमास का महीना हमें रुकने, सोचने और आत्म-चिंतन करने का अवसर देता है। यह बाहरी चमक-धमक और उत्सवों के बजाय आंतरिक शुद्धि और ईश्वर भक्ति का समय है। 15 मार्च से 13 अप्रैल 2026 तक संयम का पालन करना और सूर्य देव की आराधना करना सुखद भविष्य की नींव रख सकता है।
