देहरादून गोलीकांड: SSP का सच से सामना, लोग सुनाते रहे, अधिकारी चुप खड़े सुनते रहे

देहरादून के मालसी - जोहड़ी मार्ग पर हुए गोलीकांड में रिटायर्ड ब्रिगेडियर की मौत के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है वहीं लोगों की नाराजगी भी चरम पर है। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल के सामने ही नाराजगी जाहिर की। लोग बोलते रहे और एसएसपी खड़े सुनते रहे।

सीने पर लगी गोली से गई जान

मिली जानकारी के मुताबिक तकरीबन सुबह 6.30 के आसपास रिटायर्ड ब्रिगेडियर वीके जोशी मार्निंग वॉक कर रहे थे। इसी बीच पास से फार्च्यूनर और स्कार्पियो एन गाड़ियां बेहद तेजी से गुजरीं। स्कार्पियो एन में सवार लोगों ने जो गोली फार्च्यूनर के टायर पर मारी वो पास से गुजर रहे वीके जोशी को जाकर लगी। आनन फानन में स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और वीके जोशी को पास के अस्पताल ले गए। वहां डाक्टरों ने उन्हे मृत घोषित कर दिया। उन्हे अस्पताल ले जाने वाले लोगों की माने तो वीके जोशी को सीने में गोली लगी थी और वहां से खून निकल रहा था।

कोई पुलिस वाला झांकने नहीं आता

रिटायर्ड ब्रिगेडियर वीके जोशी को घायल अवस्था में लेकर पास के अस्पताल ले जाने वाले स्थानीय लोगों से मिलने के लिए एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल भी अस्पताल में पहुंचे। यहां उन्हे स्थानीय लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने एसपी और एसएसपी के सामने ही पुलिस की पोल खोल कर रख दी। हॉस्पिटल में चश्मदीदों और पुलिस अधिकारियों के बीच का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इस वीडियो में स्थानीय लोगों की नाराजगी साफ देखी जा सकती है। चश्मदीद बताते हैं कि पूरे इलाके में कभी भी कोई पुलिस वाला नहीं आता। कुछ समय पहले तक एक इंस्पेक्टर आया करते थे लेकिन उनके ट्रांसफर के बाद कोई नहीं दिखा। न ही कोई पिकेट है और न ही कोई जांच होती है।

खुलेआम बिकता है ड्रग्स, दस साल से सत्यापन नहीं

स्थानीय लोगों की माने तो पूरे इलाके में पुलिस की सक्रियता शून्य है। हालात ये हैं कि पूरे इलाके में खुले आम ड्रग्स बेची जा रही है लेकिन पुलिस रोक नहीं पा रही है। यही नहीं चश्मदीद ने एक ऐसी बात बोली कि पुलिस के दावे सिर के बल खड़े हो गए। दरअसल स्थानीय लोगों की माने तो पूरे देहरादून में सबसे अधिक अपार्टमेंट्स उसी इलाके में हैं लेकिन पुलिस ने कोई पिछले दस साल से कोई सत्यापन अभियान ही नहीं चलाया। न ये पता करने की कोशिश की उस इलाके में कौन रह रहा है कौन नहीं।

जिसे चीन की गोली का डर नहीं था वो घर के पास मारा गया

स्थानीय लोगों की माने तो रिटायर्ड ब्रिगेडियर वीके जोशी पीएमओ में भी अपनी सेवाएं दे चुके थे। वो चीन सीमा पर भी तैनात रहे। आर्मी इंटेलीजेंस में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दीं लेकिन कभी उनका बाल बांका नहीं हुआ लेकिन आखिरकार घर के पास ही वो मनबढ़ युवकों की गोली का शिकार हो गए।

Alka Tiwari

अलका तिवारी पिछले तकरीबन बीस वर्षों से पत्रकारिता से जुड़ी हैं। इलेक्ट्रानिक मीडिया के साथ ही अलका तिवारी प्रिंट मीडिया में भी लंबा अनुभव रखती हैं। बदलते दौर में अलका अब डिजिटल मीडिया के साथ हैं और खबरदेवभूमि.कॉम में प्रमुख भूमिका निभाती हैं।

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