जसपाल राणा कौन थे ?, कैसे बने वंडर किड से गोल्डन ब्वॉय, शूटिंग में देश को दिलाई नई पहचान

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जसपाल राणा कौन थे, जसपाल राणा किस खेल से संंबंधित

देश के दिग्गज निशानेबाज और पद्मश्री से सम्मानित जसपाल राणा का निधन हो गया है। वो 49 वर्ष के थे। हाल ही में म्यूनिख से एक शूटिंग प्रतिस्पर्धा से लौटते समय उन्हे सीने में दर्द की शिकायत हुई थी जिसके बाद उन्हे अस्पताल में एडमिट कराया गया था। इलाज के दौरान ही जसपाल राणा की मौत हो गई।

जसपाल राणा कौन थे ? कैसे बने वंडर किड से गोल्डन ब्वॉय

भारत में जब भी निशानेबाजी के खेल का जिक्र होगा हर बार जसपाल राणा की चर्चा गोल्डन ब्वॉय के रूप में होगी। जसपाल राणा शूटिंग के खेल से संबंधित थे।

जसपाल राणा ने भारत में निशानेबाजी के खेल को नई पहचान और ऊंचाई दी । 1900 और 2000 के दशक में जसपाल राणा ने अपने शूटिंग पिस्टल से दुनिया में भारत का परचम लहरा दिया था। जसपाल राणा न सिर्फ एक बेहतर निशानेबाज थे बल्कि वो एक बेहतरीन कोच भी बने। उनकी कोचिंग में भारत को ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी मिले।

जसपाल राणा का जीवन परिचय –

  • पूरा नाम: जसपाल राणा
  • जन्म तिथि: 28 जून 1976
  • जन्म स्थान: उत्तरकाशी, उत्तराखंड
  • खेल विधा: पिस्तौल निशानेबाजी (25 मीटर सेंटर-फायर पिस्टल, 10 मीटर एयर पिस्टल)
  • प्रसिद्ध उपनाम: गोल्डन बॉय
  • प्रमुख शिष्य: मनु भाकर, सौरभ चौधरी, अनीश भानवाला
  • निधन: 12 जून 2026 (उम्र 49 वर्ष)

जसपाल राणा का प्रारंभिक जीवन और परिचय

जसपाल राणा का जन्म 28 जून 1976 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी में हुआ था। उनके पिता नारायण सिंह राणा इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) में एक अधिकारी थे। जसपाल को निशानेबाजी विरासत में मिली थी। उनके पिता ही उनके पहले कोच बने और महज 10 साल की उम्र में उन्होंने जसपाल के हाथों में पिस्तौल और राइफल थमा दी थी। शुरुआत में उन्होंने दोनों हथियारों से अभ्यास किया, लेकिन बाद में उन्होंने पिस्तौल शूटिंग को अपना मुख्य करियर चुना और इसी में महारत हासिल की।

जसपाल राणा – वंडर किड से गोल्डन ब्वॉय तक का सफर

जसपाल राणा एक ‘वंडर किड’ (अद्भुत प्रतिभा) थे। महज 12 साल की उम्र में उन्होंने अहमदाबाद में आयोजित 31वीं राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में डेब्यू किया और रजत पदक जीतकर सबको चौंका दिया। जसपाल राणा के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साल 1994 में आया। इटली के मिलान में आयोजित 46वीं विश्व शूटिंग चैंपियनशिप (जूनियर वर्ग) में उन्होंने ‘स्टैंडर्ड पिस्टल’ स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड स्कोर (569/600) के साथ स्वर्ण पदक जीता। इस जीत ने उन्हें रातों-रात भारतीय खेलों का नया सितारा बना दिया।

कॉमनवेल्थ खेलों में कमाल, एशियाई खेलों में चार गोल्ड

जसपाल राणा कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) के इतिहास में भारत के सबसे सफल एथलीटों में से एक रहे हैं, जिन्होंने विभिन्न राष्ट्रमंडल खेलों में 9 स्वर्ण सहित कुल 15 पदक जीते। इसके साथ ही उन्होंने एशियाई खेलों (Asian Games) में भी 4 स्वर्ण पदक जीतकर एशिया में अपनी बादशाहत साबित की।

जसपाल राणा को मिले सम्मान और पुरस्कार

  • खेल के मैदान पर देश का मान बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च खेल पुरस्कारों से नवाजा:
  • अर्जुन पुरस्कार (1994): महज 18 साल की उम्र में उनकी असाधारण खेल प्रतिभा के लिए मिला।
  • पद्मश्री (2002): भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया।
  • द्रोणाचार्य पुरस्कार (2020): बतौर कोच भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए उन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

बने एक बेहतरीन कोच

सक्रिय खेल से संन्यास लेने के बाद जसपाल राणा ने साल 2012 से कोचिंग की कमान संभाली। उन्होंने भारत के जूनियर राष्ट्रीय कार्यक्रम को इस तरह तैयार किया कि देश को वर्ल्ड-क्लास शूटरों की एक पूरी फौज मिल गई।

उनकी सबसे बड़ी कामयाबी मनु भाकर (Manu Bhaker) को तराशना रही। जसपाल राणा के मार्गदर्शन और उनकी कड़ी ट्रेनिंग की बदौलत ही मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक 2024 में इतिहास रचते हुए दो कांस्य पदक जीते। मनु भाकर ने खुद कई बार सार्वजनिक रूप से अपनी सफलता का श्रेय ‘जसपाल सर’ के कड़े अनुशासन और मार्गदर्शन को दिया है। मनु के अलावा उन्होंने सौरभ चौधरी और अनीश भानवाला जैसे दिग्गजों को भी कोचिंग दी।

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