देश के दिग्गज शूटर और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक विजेता जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन (Jaspal Rana death) हो गया है। उन्हे म्यूनिख से दिल्ली की फ्लाइट में असहज महसूस करने के बाद मैक्स अस्पताल में एडमिट कराया गया था जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
फ्लाइट में असहज महसूस करते रहे जसपाल राणा
मिली जानकारी के अनुसार जसपाल राणा हाल ही में ISSF वर्ल्ड कप में शामिल होने के लिए भारतीय शूटिंग टीम के साथ म्यूनिख गए थे। भारतीय टीम शानदार प्रदर्शन के बाद म्यूनिख से दिल्ली वापस लौट रही थी। इसी टीम के साथ जसपाल राणा भी मौजूद थे। जसपाल राणा ने फ्लाइट में ही कुछ असहज होने की शिकायत की थी। इसके बाद दिल्ली में फ्लाइट लैंड होते ही उन्हे मैक्स अस्पताल में एडमिट कराया गया।
जसपाल राणा ने डाक्टरों से छाती में दर्द की शिकायत की थी। इसके बाद उन्हे एडमिट किया गया और स्टंट डालने की प्रक्रिया की लेकिन इसके बावजूद उन्हे बचाया नहीं जा सका।
जसपाल राणा : भारत के ‘गोल्डन बॉय’ और महान शूटिंग कोच की कहानी
भारतीय खेलों के इतिहास में जब भी निशानेबाजी (Shooting) का जिक्र होगा, जसपाल राणा (Jaspal Rana) का नाम हमेशा स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। 1990 और 2000 के दशक में अपनी अचूक पिस्तौल से दुनिया भर में भारत का परचम लहराने वाले जसपाल राणा ने न सिर्फ बतौर खिलाड़ी देश को गौरवान्वित किया, बल्कि एक महान कोच के रूप में भारत को कई ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय चैंपियन भी दिए।
1. जसपाल राणा: एक नजर में (Quick Bio)
- पूरा नाम: जसपाल राणा
- जन्म तिथि: 28 जून 1976
- जन्म स्थान: उत्तरकाशी, उत्तराखंड
- खेल विधा: पिस्तौल निशानेबाजी (25 मीटर सेंटर-फायर पिस्टल, 10 मीटर एयर पिस्टल)
- प्रसिद्ध उपनाम: गोल्डन बॉय
- प्रमुख शिष्य: मनु भाकर, सौरभ चौधरी, अनीश भानवाला
- निधन: 12 जून 2026 (उम्र 49 वर्ष)
2. प्रारंभिक जीवन और परिचय (Early Life)
जसपाल राणा का जन्म 28 जून 1976 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी में हुआ था। उनके पिता नारायण सिंह राणा इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) में एक अधिकारी थे। जसपाल को निशानेबाजी विरासत में मिली थी। उनके पिता ही उनके पहले कोच बने और महज 10 साल की उम्र में उन्होंने जसपाल के हाथों में पिस्तौल और राइफल थमा दी थी।
शुरुआत में उन्होंने दोनों हथियारों से अभ्यास किया, लेकिन बाद में उन्होंने पिस्तौल शूटिंग को अपना मुख्य करियर चुना और इसी में महारत हासिल की।
3. शानदार खेल करियर (The Golden Career)
जसपाल राणा एक ‘वंडर किड’ (अद्भुत प्रतिभा) थे। महज 12 साल की उम्र में उन्होंने अहमदाबाद में आयोजित 31वीं राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में डेब्यू किया और रजत पदक जीतकर सबको चौंका दिया।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहली बड़ी गूंज (1994)
जसपाल राणा के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साल 1994 में आया। इटली के मिलान में आयोजित 46वीं विश्व शूटिंग चैंपियनशिप (जूनियर वर्ग) में उन्होंने ‘स्टैंडर्ड पिस्टल’ स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड स्कोर (569/600) के साथ स्वर्ण पदक जीता। इस जीत ने उन्हें रातों-रात भारतीय खेलों का नया सितारा बना दिया।
राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में दबदबा
जसपाल राणा कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) के इतिहास में भारत के सबसे सफल एथलीटों में से एक रहे हैं, जिन्होंने विभिन्न राष्ट्रमंडल खेलों में 9 स्वर्ण सहित कुल 15 पदक जीते। इसके साथ ही उन्होंने एशियाई खेलों (Asian Games) में भी 4 स्वर्ण पदक जीतकर एशिया में अपनी बादशाहत साबित की।
4. जसपाल राणा की प्रमुख उपलब्धियां और पदक (Major Achievements)
जसपाल राणा ने अपने करियर में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 600 से अधिक पदक जीते। उनके मुख्य पदक इस प्रकार हैं:
| प्रतियोगिता (Event) | स्वर्ण (Gold) | रजत (Silver) | कांस्य (Bronze) | कुल पदक |
|---|---|---|---|---|
| राष्ट्रमंडल खेल (Commonwealth Games) | 9 | 4 | 2 | 15 |
| एशियाई खेल (Asian Games) | 4 | 2 | 1 | 7 |
| विश्व शूटिंग चैंपियनशिप (World Championship – Jr) | 1 | 0 | 0 | 1 |
5. पुरस्कार और सम्मान (Awards & Honors)
खेल के मैदान पर देश का मान बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च खेल पुरस्कारों से नवाजा:
- अर्जुन पुरस्कार (1994): महज 18 साल की उम्र में उनकी असाधारण खेल प्रतिभा के लिए मिला।
- पद्मश्री (2002): भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया।
- द्रोणाचार्य पुरस्कार (2020): बतौर कोच भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए उन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
6. ‘द्रोणाचार्य’ के रूप में दूसरा जीवन: मनु भाकर के मेंटर
सक्रिय खेल से संन्यास लेने के बाद जसपाल राणा ने साल 2012 से कोचिंग की कमान संभाली। उन्होंने भारत के जूनियर राष्ट्रीय कार्यक्रम को इस तरह तैयार किया कि देश को वर्ल्ड-क्लास शूटरों की एक पूरी फौज मिल गई।
उनकी सबसे बड़ी कामयाबी मनु भाकर (Manu Bhaker) को तराशना रही। जसपाल राणा के मार्गदर्शन और उनकी कड़ी ट्रेनिंग की बदौलत ही मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक 2024 में इतिहास रचते हुए दो कांस्य पदक जीते। मनु भाकर ने खुद कई बार सार्वजनिक रूप से अपनी सफलता का श्रेय ‘जसपाल सर’ के कड़े अनुशासन और मार्गदर्शन को दिया है। मनु के अलावा उन्होंने सौरभ चौधरी और अनीश भानवाला जैसे दिग्गजों को भी कोचिंग दी।
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