चंपावत से बड़ी खबर (Champawat news) आ रही है। पूरे राज्य में जिस सामूहिक दुष्कर्म मामले की गूंज सुनाई दे रही थी। पूरी सरकार जिस मामले में विपक्ष के निशाने पर आ गई थी। अब पुलिसिया जांच में ये पूरा मामला न सिर्फ बदले की भावना के तहत रची गई साजिश पाया गया है बल्कि मेडिकल जांच में नाबालिग के साथ किसी जोर जबरदस्ती की पुष्टि भी नहीं हुई है। यहां तक कि उसके पांवों में रस्सी को बांधे जाने से बनने वाले निशान भी नहीं मिले हैं।
चंपावत सामूहिक दुष्कर्म केस में खुलासा, जांच में खुली पोल
चंपावत सामूहिक दुष्कर्म केस में पुलिस की जांच और मेडिकल रिपोर्ट ने पूरा सच सामने लाकर रख दिया है। जिस नाबालिग लड़की के गैंगरेप के आरोप लगे थे उसके चिकित्सीय परीक्षण में किसी प्रकार की बाह्य अथवा आंतरिक चोट, संघर्ष अथवा जबरदस्ती के स्पष्ट चिकित्सीय संकेत प्राप्त नहीं हुए हैं। यहां तक कि लड़की जिस तरह से रस्सी से बंधी मिली थी ऐसे में उसके हाथ और पांव में रस्सियों के निशान पाए जाने चाहिए थे लेकिन ऐसा कोई निशान पीड़िता पर नहीं मिला।
वहीं पुलिसिया जांच में कुछ ऐसी बातें पता चली हैं जो पूरे मामले को सिर के बल खड़ा कर रही हैं। मसलन कुछ गवाहों के बयान तकनीकी एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से मेल नहीं खाते पाए गए, जिससे घटनाक्रम की सत्यता प्रमाणित नहीं होती है।
लड़की की सहेली का रोल भी संदिग्ध
चूंकि इस मामले के सामने आने के बाद पूरी सरकार पर सवाल उठ रहा था लिहाजा पुलिस ने पूरी ताकत लगा दी और इस मामले की जांच बेहद तेजी से की गई। ऐसे में पुलिस को पीड़ित लड़की के कई सीसीटीवी फुटेज मिले हैं जो उसकी कहानी पर सवाल खड़े करते हैं। जांच में पता चला है कि पीड़िता अपनी मर्जी से ही शादी समारोह में गई थी। इसके साथ ही कुछ गवाहों के बयान तकनीकी एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से मेल नहीं खाते पाए गए, जिससे घटनाक्रम की सत्यता प्रमाणित नहीं हो रही है।
वहीं पुलिस ने पीड़िता, उसकी एक सहेली और एक और इस मामले में पीड़िता की पैरवी कर रहे कमल रावत के बीच उस दिन बार बार फोन कॉल का होना पाया गया है। ऐसे में पुलिस ने कमल रावत को भी उठा लिया है। फिलहाल पुलिस की जांच में इस मामले में आरोपी विनोद सिंह रावत, नवीन सिंह रावत और पूरन सिंह रावत की इस मामले में कोई संलिप्तता नहीं मिली है।
तो कमल ने बदला लेने के लिए रची साजिश ?
पुलिस की माने तो कमल रावत द्वारा बदले की भावना से प्रेरित होकर एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत नाबालिक बालिका को झूठा प्रलोभन व बहला-फुसलाकर अपने बदले की पूर्ति हेतु घटनाक्रम रचा गया था। आरोपियों के परिजन पहले ही इस बात की आशंका जाहिर कर चुके थे।
सामूहिक दुष्कर्म का लगाया था आरोप
आपको बता दें कि चंपावत में एक नाबालिग लड़की के सामूहिक दुष्कर्म की खबर सामने आने के बाद पूरे राज्य में हंगामा मच गया था। पीड़िता के पिता ने पुलिस को तहरीर दी थी कि उसकी नाबालिग बेटी घर नहीं लौटी है। पुलिस ने तलाश की तो नाबालिग अपने घर के पास एक डेयरी में नग्न अवस्था में रस्सियों से बंधी हुई मिली थी। पुलिस की पूछताछ में लड़की ने बताया कि विनोद सिंह रावत, नवीन सिंह रावत और पूरन सिंह रावत ने उसके साथ चाकू की नोक पर रेप किया और कमरे में बंद करके चले गए।
ये मामला राजनीतिक रूप से चर्चित हो गया क्योंकि इस मामले में एक आरोपी पूरन सिंह रावत पूर्व में तल्लादेश का भाजपा मंडल उपाध्यक्ष रह चुका है। इसके अलावा वह पूर्व प्रधान भी रह चुका है। यही वजह रही कि विपक्ष ने आरोप लगाया की सत्ता पक्ष का आरोपी होने चलते पुलिस मुकदमा दर्ज करने में देरी कर रही है।
