Pithoragarh: पिथौरागढ़ का गांव अब ‘खूनी’ नहीं मिली ये नई पहचान

Alka Tiwari
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Pithoragarh: पिथौरागढ़ जिले के एक गांव के लोग गांव के नाम से इतने परेशान थे कि उन्होंने इसे बदलने की अर्जी सरकार को दे डाली। लंबे समय तक चली प्रक्रिया के बाद आखिरकार अब उन्हें सफलता मिल पाई और उनके गांव को एक नई पहचान मिली।

उत्तराखंड सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए, पिथौरागढ़ जिले में स्थित ‘खूनी’ गांव का नाम बदलकर ‘देवीग्राम’ कर दिया है। यह फैसला जन-जन की भावनाओं और लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इस संबंध में प्रदेश सरकार ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। बता दें कि  इस पूरी प्रक्रिया में सांसद अजय टम्टा का भी अहम योगदान रहा है, जिन्होंने गांव का नाम बदले जाने की अधिसूचना और जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की है।

खूनी गांव नाम के पीछे का किस्सा

इस गांव का नाम खूनी क्यों रखा गया इसके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है लेकिन ग्रामीण बताते हैं कि गांव का नाम खूनी पड़ने के पीछे कई कहानियां प्रचलित है। ग्रामीण बताते हैं कि उनके पूर्वजों ने बताया था कि आजादी से पहले जब अंग्रेज गांव आए थे तो उनकी गांव वालों से लड़ाई हुई थी। तब ग्रामीणों ने एकजुट हो कर अंग्रेजों को मार दिया था और उसी के बाद से गांव का नाम खूनी पड़ गया।

अंग्रेजों के जमाने से जुड़ी बात

वहीं एक कहानी यह भी प्रचलित है कि पहले गांव का नाम खोली था लेकिन अंग्रेज इस शब्द का ठीक सा उच्चारण नहीं कर पाये और खोली को खूनी बोलना शुरू कर दिया। जिसके बाद से इस गांव का नाम खूनी ही प्रचलित हो गया। हालांकि अब खूनी गांव का नाम बदलकर देवी ग्राम हो गया है और इससे ग्रामीणों में खुशी है।

यह गांव पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर विकासखंड विण की ग्राम पंचायत है। गांव का नाम खूनी होने के कारण ग्रामीण असहज थे तो वहीं गांव से निकलकर शहरों या अन्य राज्यों में जाने वाले लोग गांव का नाम लिखने और पढ़ने में भी असहज महसूस करते थे।

पिछले एक दशक से उठाई जा रही थी मांग

सांसद अजय टम्टा ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर इस गांव का नाम बदलने की अधिसूचना की जानकारी देते हुए लिखा है कि जन-जन की भावनाओं और लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए आज पिथौरागढ़ क्षेत्र में स्थित ग्राम खूनी का नाम परिवर्तित किए जाने की अधिसूचना प्रदेश सरकार ने जारी कर दी है। बता दें कि यह फैसला केंद्र सरकार की सहमति के बाद लिया गया है।

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अलका तिवारी पिछले तकरीबन बीस वर्षों से पत्रकारिता से जुड़ी हैं। इलेक्ट्रानिक मीडिया के साथ ही अलका तिवारी प्रिंट मीडिया में भी लंबा अनुभव रखती हैं। बदलते दौर में अलका अब डिजिटल मीडिया के साथ हैं और खबरदेवभूमि.कॉम में प्रमुख भूमिका निभाती हैं।
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