भराड़ीसैंण। उत्तराखंड की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले खानपुर के निर्दलीय विधायक उमेश कुमार के इस्तीफे की घोषणा से हलचल तेज हो गई है। विधानसभा सत्र के दौरान उमेश कुमार ने विधायक पद छोड़ने का ऐलान करते हुए विपक्ष पर किसानों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर साथ नहीं देने का आरोप लगाया। उन्होंने साफ कहा कि वह न भाजपा में शामिल होंगे और न ही कांग्रेस में जाएंगे।
उमेश कुमार के मुताबिक, खानपुर की जनता ने उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विधानसभा पहुंचाया था। उन्होंने पिछले साढ़े चार वर्षों में भ्रष्टाचार, किसानों की समस्याओं और क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को उठाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें विपक्ष से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
किसानों के मुद्दों पर विपक्ष को घेरा
विधायक उमेश कुमार ने हरिद्वार जिले के किसानों की समस्याओं का उल्लेख करते हुए इकबालपुर शुगर मिल से जुड़े बकाया भुगतान का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि किसानों का करीब 118 करोड़ रुपये का भुगतान लंबे समय से लंबित है।
उन्होंने वर्ष 2023 की आपदा से प्रभावित किसानों की समस्याओं का भी जिक्र किया। उमेश कुमार ने आरोप लगाया कि किसानों को आर्थिक नुकसान के बाद भी पर्याप्त राहत नहीं मिली और उन्हें कर्ज तथा बिजली बिलों जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
उमेश कुमार ने कहा कि उन्होंने कई मौकों पर विपक्ष के साथ मिलकर जनहित के मुद्दे उठाए, लेकिन जब उन्हें अपने क्षेत्र और किसानों से जुड़े मामलों में समर्थन की जरूरत पड़ी, तब विपक्ष उनके साथ मजबूती से खड़ा नहीं हुआ।
भाजपा और कांग्रेस में जाने से किया इनकार
इस्तीफे की घोषणा के साथ उमेश कुमार ने अपनी आगामी राजनीतिक रणनीति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वह भाजपा या कांग्रेस में शामिल नहीं होंगे। उनके बयान के बाद 2027 के विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका और राजनीतिक संगठन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उमेश कुमार ने भविष्य में अपने साथ अन्य लोगों के भी चुनावी मैदान में उतरने की संभावना जताई है। उनकी पत्नी सोनिया शर्मा द्वारा जन निर्माण पार्टी का गठन किए जाने के बाद इस संगठन की चुनावी भूमिका को लेकर भी चर्चा हो रही है।
हालांकि, आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी और उम्मीदवारों को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
2027 के चुनाव से पहले बढ़ सकती है राजनीतिक हलचल
उत्तराखंड में 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में खानपुर के निर्दलीय विधायक की इस्तीफे की घोषणा और अलग राजनीतिक राह अपनाने के संकेतों को राज्य की चुनावी राजनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है।

