कौन ले रहा है गणेश गोदियाल की ‘राजनीतिक सुपारी’ ? आखिर उत्तराखंड कांग्रेस में चल क्या रहा है ?

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उत्तराखंड कांग्रेस में क्या कोई बड़ा खेल चल रहा है ? पहले भावना पांडे का गणेश गोदियाल को लाखों रुपए देने का मामला और फिर वही भावना पांडे का कांग्रेस में टिकट पाने के लिए 25 लाख देने का दावा और अचानक इस मामले में एक ठग का पकड़ा जाना। और इसी बीच गणेश गोदियाल का एक बयान कि उनके खिलाफ साजिश रची जा रही थी। इन सभी घटनाओं को आपस में जोड़ें तो ऐसा लगता है मानों कांग्रेस किसी क्रासवर्ड पजल में उलझ गई है।

कांग्रेस में साजिश की खबरों को उस समय बल मिला जब भावना पांडे ने ठगी वाला बम फोड़ा। सबकुछ अचानक हुआ। भावना पांडे ने पुलिस में एक रिपोर्ट दर्ज कराई जिसमें शिकायत की गई कि उनसे कांग्रेस में टिकट दिलाने और प्रदेश अध्यक्ष पद दिलाने के नाम पर 25 लाख रुपए एक व्यक्ति ने ठग लिए। भावना पांडे की इस शिकायत पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और एक व्यक्ति को पकड़ भी लिया। इसके बाद खुलासा हुआ कि जो व्यक्ति भावना पांडे से राहुल गांधी का पीए बनकर पैसे ऐंठ रहा था वो कई और लोगों को भी फोन कर चुका था।

सुनने में ये कहानी बेहद सीधी लगती है लेकिन सवाल ये है कि क्या ये पूरी सच्चाई है या फिर सच का बड़ा हिस्सा अभी सामने आना बाकी है ? क्या भावना पांडे ने पूरी बात बता दी है ? फिलहाल ये जांच का विषय है।

गणेश गोदियाल के आंसू और साजिश को महसूस करते रहने का दुख

इस पूरे मामले को इतना तूल न मिलता अगर गणेश गोदियाल ये बयान न देते कि उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश रची जा रही थी। गणेश गोदियाल ने मीडिया के सामने ये माना कि उन्हे पता है कि उन्हे हटाने के लिए साजिश की गई। गणेश गोदियाल के बयान से ऐसा लगता है मानों वो अपने खिलाफ हो रहे राजनीतिक साजिश न सिर्फ बाखबर थे बल्कि बेचैन और लाचार उसे देख पाने से अधिक कुछ नहीं कर पा रहे थे। यही वजह है कि जब भावना पांडे का प्रकरण हुआ तो उसके बाद मीडिया के सामने वो लगभग रो ही पड़े। उनके ये आंसू सियासी तो नहीं कहे जा सकते लेकिन उनकी पीड़ा व्यक्तिगत जरूर थी।

राजनीतिक सुपारी लेने वाला कौन ? पार्टी या पार्टी के बाहर का कोई ?

गणेश गोदियाल जिस साजिश की बात कर रहे हैं उसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं हो रही हैं। सवाल ये भी है कि ये साजिश रचने वाले पार्टी के भीतर के हैं या फिर पार्टी के बाहर के। ये सवाल इसलिए भी अहम हो जाता है क्योंकि दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से ही गणेश गोदियाल ने पार्टी को सक्रिय बना दिया था। कार्यकर्ताओं से लेकर बड़े नेताओं तक सभी सक्रिय थे।

यहां तक कि अलग अलग गुटों से आने वाले नेता भी पार्टी के मंच पर एक साथ नजर आ रहे थे। ऐसे में अगर ये साजिश पार्टी के भीतर से हो रही है तो पार्टी आलाकमान के लिए भी ये खतरे की घंटी माना जा सकता है।

पार्टी कैसे करेगी सत्ता में वापसी ?

कांग्रेस आलाकमान ने जब दोबारा गणेश गोदियाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया तो ऐसा लगा कि पार्टी अब पूरे दमखम के साथ चुनावों की तैयारी में नजर आएगी। ऐसा होता दिखा भी। पार्टी के कार्यकर्ता – नेता सब सक्रिय नजर आने लगे। लेकिन इसी बीच दो ऐसे घटनाक्रम हुए जिसने पार्टी की सक्रियता को ठंडा कर दिया। पहला घटनाक्रम हरीश रावत का राजनीतिक अवकाश पर जाना रहा। दरअसल हरीश रावत न सिर्फ राजनीतिक अवकाश पर गए बल्कि अपने पीछे गुटबाजी का बम भी फोड़ गए। इसने पार्टी को खासा नुकसान पहुंचाया।

ऐसे में कांग्रेस का राज्य में राजनीतिक भविष्य चुनौतिपूर्ण दिखने लगा है। 2027 में सत्ता में वापसी की राह देख रही कांग्रेस के लिए ऐसी राजनीतिक सुपारी देने वाले माफिया से बचने के लिए शायद कोई बड़ा कदम उठाना होगा।

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