उत्तराखंड में जमीन के दाखिल – खारिज से जुड़ी बड़ी खबर, राजस्व सचिव रंजना राजगुरू ने दिए ये निर्देश

1
उत्तराखंड में नामांतरण मामलों की समीक्षा करतीं राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव रंजना राजगुरु

देहरादून: उत्तराखंड में जमीन के दाखिल-खारिज से जुड़े मामलों के निस्तारण को लेकर राजस्व परिषद ने अधिकारियों को समय-सीमा का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद उत्तराखंड रंजना राजगुरु ने गुरुवार को प्रदेश के राजस्व न्यायालयों के कामकाज और नामांतरण मामलों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से लंबित मामलों का नियमों के अनुसार जल्द निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा।

बैठक में प्रदेश के सभी जिलों में असिस्टेंट कलेक्टर प्रथम श्रेणी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और अन्य संबंधित अधिकारियों द्वारा किए जा रहे राजस्व न्यायिक कार्यों की स्थिति की समीक्षा की गई।

उत्तराखंड में जमीन के दाखिल – खारिज में देरी पर अधिकारियों को निर्देश

रंजना राजगुरु ने अधिकारियों से कहा कि नामांतरण से जुड़े मामलों का निस्तारण केवल निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही नहीं, बल्कि तय समय-सीमा के भीतर भी किया जाना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाए और संबंधित लोगों को समय पर न्याय उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।

राजस्व न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि न्यायिक कार्यवाही नियमों के अनुरूप और समयबद्ध तरीके से संचालित की जाए।

क्या होता है नामांतरण?

नामांतरण, जिसे दाखिल-खारिज या म्यूटेशन भी कहा जाता है, भूमि के स्वामित्व में बदलाव के बाद राजस्व अभिलेखों में नए मालिक का नाम दर्ज करने की प्रक्रिया है।

जमीन की खरीद-बिक्री, विरासत या अन्य वैधानिक कारणों से स्वामित्व में बदलाव होने पर राजस्व रिकॉर्ड में उसका अपडेट होना महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में देरी होने पर संबंधित व्यक्ति को राजस्व अभिलेखों से जुड़े कामकाज में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

राजस्व न्यायालयों के रिकॉर्ड अपडेट रखने के निर्देश

समीक्षा बैठक में राजस्व न्यायालयों के अभिलेखों और आवश्यक पंजीकाओं को नियमित रूप से अपडेट रखने पर भी जोर दिया गया।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि न्यायालयों से संबंधित रिकॉर्ड व्यवस्थित और पूर्ण स्थिति में रखे जाएं, ताकि किसी मामले की वास्तविक स्थिति आसानी से पता चल सके और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में रिकॉर्ड के कारण अनावश्यक देरी न हो।

राजस्व परिषद ने निस्तारित मामलों की पत्रावलियों को भी नियमानुसार समय पर रिकॉर्ड रूम में जमा कराने को कहा है।

अपील की स्थिति में तुरंत मिलेगी मूल पत्रावली

अधिकारियों को बताया गया कि निस्तारित मामलों की मूल पत्रावलियां समय पर रिकॉर्ड रूम में जमा होना जरूरी है। इससे किसी मामले में अपील होने पर संबंधित अपीलीय न्यायालय को मूल रिकॉर्ड समय से उपलब्ध कराया जा सकेगा।

राजस्व परिषद के मुताबिक, रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने से न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में होने वाली अनावश्यक देरी को कम किया जा सकता है।

समन की तामील पर भी विशेष जोर

बैठक में राजस्व न्यायालयों द्वारा जारी किए जाने वाले समनों की समयबद्ध तामील सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।

विशेष रूप से हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में नामांतरण मामलों से संबंधित समनों की समय पर तामील सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि न्यायालय की कार्यवाही से संबंधित समन संबंधित पक्षों तक समय पर पहुंचें, ताकि मामलों की सुनवाई में अनावश्यक देरी न हो।

प्रदेश में शुरू होगा ‘नामांतरण दिवस’

राजस्व परिषद अब प्रदेश की सभी तहसीलों में ‘नामांतरण दिवस’ आयोजित करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए आगामी माह से अभियान शुरू किए जाने की तैयारी है।

राजस्व परिषद ने सभी तहसीलों के पीठासीन अधिकारियों को अभी से आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

‘नामांतरण दिवस’ के जरिए नामांतरण से जुड़े मामलों की समीक्षा और उनके निस्तारण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

सभी जिलों के राजस्व अधिकारियों की समीक्षा

समीक्षा बैठक में प्रदेश के सभी अपर जिलाधिकारियों ने भी प्रतिभाग किया। बैठक में राजस्व न्यायालयों में चल रहे मामलों, नामांतरण से जुड़े प्रकरणों, रिकॉर्ड के रखरखाव और न्यायालयी प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई।

बैठक में राजस्व परिषद के संयुक्त संचालक (चकबंदी) नरेश चन्द्र दुर्गापाल, उप राजस्व आयुक्त मीनाक्षी पटवाल और जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) नितिन वशिष्ठ सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

आम लोगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण जमीन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यों में शामिल है। ऐसे मामलों के समय पर निस्तारण से संबंधित लोगों को अपने भूमि रिकॉर्ड को अपडेट कराने में सुविधा मिल सकती है।

राजस्व परिषद की ओर से समय-सीमा में मामलों के निस्तारण, रिकॉर्ड अपडेट रखने और समनों की समय पर तामील पर जोर दिए जाने से आने वाले समय में तहसील स्तर पर नामांतरण मामलों की कार्यवाही को अधिक व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है।

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here