देहरादून। उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा ने संगठन को चुनावी मोड में लाने की कवायद तेज कर दी है। देहरादून स्थित प्रदेश भाजपा मुख्यालय में हुई संगठनात्मक बैठक में नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी राम माधव ने पार्टी के सामने ‘60 पार’ का लक्ष्य रखा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से सरकार के कामकाज और योजनाओं का संदेश जनता तक पहुंचाने के साथ संगठन को राजनीतिक भूमिका में सक्रिय करने पर जोर दिया।
राम माधव का उत्तराखंड भाजपा प्रभारी बनने के बाद यह पहला प्रमुख संगठनात्मक प्रवास है। भाजपा ने सितंबर 2026 में राम माधव को प्रदेश प्रभारी तथा बांसुरी स्वराज और अरविंद मेनन को सह प्रभारी नियुक्त किया था। यह बदलाव 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हुआ है।
60 पार के लक्ष्य के साथ चुनावी तैयारी
प्रदेश संगठनात्मक बैठक में राम माधव ने कहा कि पार्टी को केवल सामान्य बहुमत तक सीमित रहने के बजाय विधानसभा चुनाव में ‘हाईएस्ट मेजोरिटी’ यानी 60 से अधिक सीटों के लक्ष्य को ध्यान में रखकर राजनीतिक स्तर पर काम करना चाहिए।
उत्तराखंड विधानसभा में कुल 70 सीटें हैं। मौजूदा विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर 70 सदस्यों का उल्लेख है। ऐसे में 60 सीटों का लक्ष्य सामान्य बहुमत के आंकड़े से काफी अधिक है।
राम माधव ने पार्टी कार्यकर्ताओं से सरकार के विकास और जनकल्याण से जुड़े कामों को जनता के बीच ले जाने को कहा। उनके मुताबिक अब संगठनात्मक गतिविधियों के साथ राजनीतिक संवाद को भी प्राथमिकता देने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचकर पार्टी और सरकार के कामकाज की जानकारी लोगों तक पहुंचानी चाहिए।
‘सरकार के काम का संदेश जनता तक पहुंचाएं’
बैठक में राम माधव ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार के कामकाज का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार की उपलब्धियों का राजनीतिक संदेश जनता के बीच पहुंचाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि संगठन की गतिविधियों को बूथ स्तर से लेकर समाज के व्यापक वर्गों तक ले जाने पर ध्यान दिया जाए। साथ ही उन्होंने चुनावी तैयारियों में कार्यकर्ताओं से सक्रिय राजनीतिक भूमिका निभाने की बात कही।
राम माधव ने अपने संबोधन में उन राज्यों का भी उदाहरण दिया जहां भाजपा लगातार तीन बार सरकार बनाने में सफल रही है। उन्होंने उत्तराखंड को भी ऐसे राज्यों की सूची में शामिल करने के लक्ष्य के साथ काम करने की बात कही।
उत्तराखंड में BJP की नई टीम की पहली बड़ी बैठक
राम माधव के साथ भाजपा ने अरविंद मेनन और बांसुरी स्वराज को उत्तराखंड का सह प्रभारी बनाया है। नई टीम की नियुक्ति के बाद देहरादून में हुई संगठनात्मक बैठक में प्रदेश पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों, जिला प्रभारियों और सह प्रभारियों के साथ संगठन की तैयारियों पर चर्चा हुई।
नई टीम के सामने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय रखने और सरकार के कामकाज को चुनावी संवाद का हिस्सा बनाने की चुनौती है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक भाजपा की नई प्रभारी टीम के गठन का एक प्रमुख संदर्भ आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी है।
बांसुरी स्वराज ने उठाया ‘उम्र की राजनीति’ का मुद्दा
बैठक में सह प्रभारी बांसुरी स्वराज ने युवाओं को उम्र के आधार पर राजनीतिक रूप से बांटने की बात कही। उन्होंने विपक्षी राजनीति पर निशाना साधते हुए कई राजनीतिक समूहों और नेताओं को लेकर तीखी टिप्पणियां कीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म, क्षेत्र और जाति के बाद अब युवाओं को उम्र के आधार पर बांटने की राजनीति की जा रही है। उन्होंने कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के कुछ नेताओं पर वैचारिक आरोप भी लगाए।
महेंद्र भट्ट बोले- शहर से गांव तक पहुंचे विकास मॉडल की चर्चा
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं की भूमिका चुनाव के समय और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। उनके मुताबिक प्रदेश संगठन के फैसलों और कार्यक्रमों का प्रभाव बूथ स्तर तक दिखाई देना चाहिए और स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की समस्याओं का समाधान भी किया जाना चाहिए।
भट्ट ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं की जनता के बीच मौजूदगी बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने शहर से गांव तक उत्तराखंड के विकास मॉडल की चर्चा किए जाने की बात कही।
उनका बयान ऐसे समय में आया है जब भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सरकार के कामकाज को राजनीतिक संवाद का प्रमुख हिस्सा बनाने की दिशा में संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ा रही है।
‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ पर फोकस
बैठक में प्रदेश महामंत्री संगठन फणींद्रनाथ शर्मा ने बूथ स्तर के संगठन को चुनावी तैयारी का केंद्र बताया।
उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ और ‘बूथ जीता, चुनाव जीता’ जैसे संगठनात्मक मंत्रों पर फोकस करने की बात कही।
उन्होंने हाल में दूसरे राज्यों में भाजपा के चुनावी प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए उत्तराखंड में भी संगठन को उसी तरह सक्रिय करने की बात कही। उन्होंने कहा कि 2027 के चुनाव में बहुमत का आंकड़ा पार करने के साथ पार्टी के सामने अपनी सीटों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य है।
36 के बहुमत से 60 तक पहुंचने की रणनीति
उत्तराखंड विधानसभा में 70 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 36 सीटों का बहुमत जरूरी है। मौजूदा विधानसभा की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक सदन में 70 सदस्य हैं।
ऐसे में भाजपा की बैठक में रखा गया 60 पार का लक्ष्य सामान्य बहुमत से 24 सीट अधिक का लक्ष्य है। यही वजह है कि बैठक में बूथ प्रबंधन, संगठनात्मक संवाद और सरकार के कामकाज को जनता तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिखाई दिया।
भाजपा के लिए यह रणनीति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी 2022 के विधानसभा चुनाव में 70 में से 47 सीटों के साथ सत्ता में लौटी थी।
संगठन के कार्यक्रमों की रिपोर्ट भी रखी गई
बैठक में प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने 14 सितंबर 2025 से अब तक आयोजित संगठनात्मक कार्यक्रमों की रिपोर्ट प्रस्तुत की।
इसमें ‘मन की बात’ कार्यक्रम, बूथ सशक्तिकरण, कोर कमेटी और अन्य संगठनात्मक बैठकों, सेवा संकल्प अभियान, युवा संवाद, लखपति दीदी और लाभार्थी कार्यक्रमों सहित विभिन्न अभियानों की जानकारी दी गई।
इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर प्रदेश में चलाए गए विभिन्न अभियानों और कार्यक्रमों की प्रगति की जानकारी भी बैठक में रखी गई।
2027 से पहले BJP की रणनीति के तीन प्रमुख फोकस
बैठक में सामने आए बयानों और संगठनात्मक एजेंडे को देखें तो भाजपा की मौजूदा तैयारी में तीन प्रमुख बिंदु दिखाई देते हैं—
पहला, बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय रखना।
पार्टी नेतृत्व ने बूथ को चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बताया है।
दूसरा, सरकार के कामकाज को राजनीतिक संवाद में बदलना।
राम माधव ने सरकार की उपलब्धियों और जनकल्याण योजनाओं का संदेश जनता तक पहुंचाने पर जोर दिया।
तीसरा, 2027 के लिए बड़ा सीट लक्ष्य तय करना।
पार्टी नेतृत्व ने सामान्य बहुमत के बजाय 60 से अधिक सीटों का लक्ष्य सार्वजनिक रूप से सामने रखा है।
उत्तराखंड में अब चुनावी गतिविधियां होंगी तेज
2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए उत्तराखंड की राजनीति में संगठनात्मक गतिविधियां आने वाले महीनों में और तेज होने की संभावना है। भाजपा ने अपनी नई प्रदेश प्रभारी टीम के जरिए चुनावी तैयारियों को गति देने की शुरुआत कर दी है।
राम माधव, बांसुरी स्वराज और अरविंद मेनन की टीम के सामने संगठन, सरकार और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बनाए रखने के साथ-साथ चुनावी मुद्दों को बूथ स्तर तक ले जाने की जिम्मेदारी होगी।
वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सामने भाजपा के सरकार के कामकाज को लेकर किए जा रहे दावों का राजनीतिक जवाब देने और अपने चुनावी मुद्दों को जनता तक पहुंचाने की चुनौती होगी।
फिलहाल भाजपा की संगठनात्मक बैठक से एक बात स्पष्ट है कि पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए 60 पार के लक्ष्य को अपने राजनीतिक एजेंडे में प्रमुखता से सामने रखना शुरू कर दिया है। अब इस लक्ष्य को संगठन बूथ और विधानसभा स्तर पर किस तरह लागू करता है, यह आने वाले महीनों में देखने वाली बात होगी।