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UKSSSC Paper Leak : CBI की बड़ी कार्रवाई, पेपर लीक मामले में असिस्टेंट प्रोफेसर गिरफ्तार

UKSSSC पेपर लीक (Paper Leak) मामले में CBI पूरे एक्शन में आ चुकी है। CBI ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक महिला को गिरफ्तार किया है। महिला एक डिग्री कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर है। महिला पर आरोप है कि उसने लीक हुए पेपर के कुछ प्रश्न हल करने में मदद की थी।

मोबाइल की जांच के बाद बढ़ा शक, हो गई गिरफ्तारी

इस मामले की जांच हाथ में लेने के बाद सीबीआई लगातार एक्टिव मोड में हैं। ऐसे में कड़ियां जोड़ते हुए सीबीआई ने अगरोर, टिहरी के हंसा धनाई राजकीय डिग्री कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई। सीबीआई ने सुमन के मोबाइल फोन की गहन जांच की। इसके साथ ही कुछ और घटनाक्रमों और सबूतों को साथ मिलाया। ऐसे में कड़ियां जोड़ते हुए सीबीआई को सुमन की भूमिका संदिग्ध लगी। इसके बाद सीबीआई ने सुमन को अरेस्ट कर लिया है। अब तक की जांच से पता चला है कि असिस्टेंट प्रोफेसर ने परीक्षा के दौरान अपनी बहन के ज़रिए मिले प्रश्न पत्र के कुछ हिस्से को हल करने में आरोपी प्राइवेट व्यक्ति की मदद की थी और उत्तर को परीक्षा में बैठे आरोपी प्राइवेट व्यक्ति को भेजा था।

दो पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार

आपको बता दें कि इस मामले में सीबीआई के आने से पहले उत्तराखंड पुलिस ने दो अन्य आरोपियों मोहम्मद खालिद और उसकी बहन सबीहा को गिरफ्तार किया जा चुका है। जब मामला सीबीआई को ट्रांसफर हुआ उसके बाद सीबीआई ने अब सुमन को गिरफ्तार किया है। उधर सीबीआई ने खालिद और सबीहा को पहले ही अपनी गिरफ्त में ले रखा है। ऐसे में जांच बेहद तेजी से चल रही है।

पत्रकारों की समस्याओं का हो त्वरित समाधान, सोशल मीडिया पेजों पर दें तथ्यात्मक जानकारी – डीजी सूचना

महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी ने जिला सूचना अधिकारियों को सरकार की जन-कल्याणकारी कार्यक्रमों एवं योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहॅुंचाने के लिए प्रभावी संचार रणनीति बनाकर पेशेवर दक्षता के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मीडिया से बेहतर समन्वय बनाए रखने और पत्रकारों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने के भी निर्देश दिए।

दें तथ्यात्मक, संतुलित और सकारात्मक जानकारी

सूचना निदेशालय में आयोजित बैठक में महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी प्रचार-प्रसार को सुनिश्चित करना विभाग की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। सभी अधिकारी और कर्मचारी समन्वित रूप से कार्य करें तथा यह सुनिश्चित करें कि योजनाओं से संबंधित सभी सूचनाएँ स्पष्ट, सटीक और समय पर जनता तक पहुँचें। उन्होंने निर्देश दिए कि सोशल मीडिया के माध्यम से सरकारी कार्यक्रमों और उपलब्धियों की जानकारी व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुँचाई जाय। सरकारी योजनाओं से जुड़ी सक्सेस स्टोरीज और रोचक लेखों का नियमित रूप से प्रकाशन सुनिश्चित किया जाय। विभागीय सोशल मीडिया पेजों पर प्रकाशित की जाने वाली सामग्री पूर्णतः तथ्यात्मक, संतुलित और सकारात्मक हो तथा किसी भी अपुष्ट जानकारी के प्रसारण से पूरी तरह बचा जाए।

समयबद्ध कवरेज तय हो, बने SOP

बैठक में सूचना महानिदेशक ने यह भी कहा कि जिला सूचना कार्यालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए जिला स्तर पर मीडिया से समन्वय को और अधिक मजबूत किया जाए। उन्होंने निर्देशित किया कि जिला सूचना अधिकारी सभी सरकारी कार्यक्रमों और जनहितकारी गतिविधियों की समयबद्ध कवरेज सुनिश्चित करें तथा स्थानीय स्तर पर सकारात्मक संचार वातावरण तैयार करने में सक्रिय भूमिका निभाएँ। आपदा सहित अन्य महत्वपूर्ण की घटनाओं की कवरेज की व्यवस्थाओं के संबंध में एसओपी तैयार की जाय। प्रेस सेवा पोर्टल एवं फिल्म शूटिंग की अनुमति के लिए सिंगल विंडो सिस्टम से संबंधित कार्य भी समयबद्ध ढंग से संपादित किए जांय।

खाली पदों को भरने के लिए भेजा गया अधियाचन

सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने कहा कि नए दौर की संचार आवश्यकताओं के अनुरूप विभागीय कार्यों की दक्षता बढाने हेतु आवश्यक सुविधाओं से लैस करने के साथ ही विभाग को सशक्त बनाने के लिए भी ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। विभागीय पुनर्गठन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। खाली पदों को भरने के लिए अधियाचन भेजा गया है। उन्होंने जिला सूचना कार्यालयों के कार्यों की प्रगति एवं व्यावहारिक समस्याओं की जानकारी लेते हुए कहा कि कार्यालयों को शासकीय कार्यों के संपादन के लिए बजट की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने जिला सूचना कार्यालयों के भवन निर्माण के लिए भूमि तलाश करने के भी निर्देश दिए। बैठक में संयुक्त निदेशक के.एस. चौहान, डॉ. नितिन उपाध्याय, वरिष्ठ वित्त अधिकारी श्रीमती शशि सिंह, उप निदेशक रवि बिजारनियां, मनोज श्रीवास्तव, सहित जिला सूचना अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

Dehradun news : देहरादून में हाथी का हमला, मां-बाप के बीच से बच्चे को खींचा, पटक कर मारा, भयावह हादसे से पसरा मातम

देहरादून में आपने शायद ही आज से पहले हाथी के हमले की ऐसी भयावह घटना सुनी होगी। देहरादून के कालू सिद्ध मंदिर के करीब एक हाथी ने एक बच्चे को उसके मां-बाप के सामने ही पटक कर मौत के घाट उतार दिया। हाथी ने स्कूटी से जा रहे मां-बाप के बीच में बैठे बेटे को खींचा और पटक कर मार डाला।

देहरादून में हाथी का ऐसा हमला पहले नहीं सुना

देहरादून के बाहरी इलाकों में हाथियों के हमले की खबरें आती रहती हैं लेकिन जिस तरह से हाथी ने इस बार हमला किया ऐसा पहले कभी सुना नहीं गया। बताया जा रहा है कि शाम चार बजे के आसपास थानो फॉरेस्ट रेंज के कोठारी मोहल्ला के रहने वाले कमल थापा अपनी पत्नी नीलम और 12 साल के बेटे कुणाल के साथ अपनी स्कूटी से कालू सिद्ध मंदिर के करीब से घर की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान एक मोड़ पर जैसे ही उन्होंने टर्न लिया उनके सामने हाथी आ गया। जबतक कमल कुछ समझ पाते इतने में हाथी ने हमला कर दिया और स्कूटी पर मां-बाप के बीच बैठे कुणाल को अपनी सूंड से खींच कर गिरा दिया। इसके बाद हाथी ने कुणाल को पटक कर वहीं मार दिया। कमल और नीलम इस अचानक हुए हमले से स्तब्ध रह गए और चाह कर भी अपने बेटे को बचाने के लिए कुछ नहीं कर पाए।

पत्नी का दुपट्टा जलाया तब भागा हाथी, फिर उठा पाए बेटे को

हमले के बाद भी हाथी वहां से हटने को तैयार नहीं था। कमल और नीलम ने लाख कोशिश की लेकिन जब हाथी वहां से नहीं हटा तो आखिरकार कमल ने अपनी पत्नी नीलम का दुपट्टा लिया और माचिस से उसे जला दिया। इसके बाद आसपास की घासफूस भी रखी और आग को थोड़ा और बढ़ाया। इसके बाद हाथी वहां से वापस जंगल में लौटा। हाथी जब जंगल में लौट गया उसके बाद कमल और नीलम अपने बेटे को उठाकर अस्पताल पहुंचे। लेकिन वहां डाक्टरों ने जवाब दे दिया। डाक्टरों ने कुणाल को मृत घोषित कर दिया।

12 साल से करा रहे थे इलाज, ठीक होने लगा तो होनी ने छीना

बताते हैं कि कमल और नीलम का बेटा कुणाल मानसिक रूप से कुछ बीमार था। स्कूल में बच्चों से कम बोलता, गुमसुम रहता। इसी वजह से कमल अपने बेटे का बचपन से ही इलाज करा रहे थे। लगातार चल रहे इलाज के बाद अब बेटा ठीक होने लगा था। स्कूल में भी उसका व्यवहार सामान्य बच्चों की तरह होने लगा था। लेकिन शायद होनी को कुछ और ही मंजूर था।

शार्टकट लेना पड़ गया भारी

बताया जा रहा है कमल और नीलम अपने बेटे कुणाल को लेकर घर लौट रहे थे। अगल वो हाईवे से जाते तो उन्हे लंबा रास्ता तय करना पड़ता। इसीलिए उन्होंने तकरीबन आठ किलोमीटर की दूरी कम नापने के उद्देश्य से कालू सिद्ध मंदिर वाली सड़क लेने का फैसला लिया। इससे उनका घर बेहद कम दूरी पर पड़ता है। यही शार्टकट लेना उन्हे जिंदगी भर के लिए भारी पड़ गया। अचानक मोड़ पर आए हाथी ने उनके बच्चे की जान ले ली।

Nainital news : मार्निंग वॉक करते सीएम धामी को देख चौंके लोग, खिंचवाने लगे फोटो

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गुरुवार को सुबह नैनीताल में थे। इस दौरान सीएम धामी हमेशा की तरह सुबह सुबह टहलने निकल गए। इस दौरान अचानक सीएम धामी को देखकर नैनीताल के लोग चौंक गए। इस दौरान सीएम धामी के साथ लोगों ने फोटो भी खिंचवाई।

टहलने निकलने सीएम धामी, चाय भी पी

गुरुवार की सुबह सीएम धामी नैनीताल में थे। आमतौर पर सीएम धामी जब देहरादून से बाहर रात्रि विश्राम करते हैं और सुबह उनके पास वक्त होता है तो वो अक्सर ही सुबह की सैर पर आम लोगों की तरह निकल जाते हैं। गुरुवार को भी सीएम धामी कुछ इसी तरह मॉल रोड पर टहलने निकल गए। बिना किसी लाव – लश्कर सीएम धामी बिल्कुल आम नागरिकों की तरह मॉल रोड पर टहलने निकले। इस दौरान नैनीताल के लोग सीएम धामी को अपने बीच पाकर एक बारगी चौंक गए। इसके बाद सीएम धामी खुद ही वहां खड़े कई लोगों के पास गए और उनका हालचाल लिया।

चाय भी पी और आग भी सेंकी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सुबह की सैर के दौरान ही वहीं एक टी स्टाल पर रुक गए और चाय का आर्डर दे दिया। इसके बाद सीएम धामी आम लोगों की ही तरह वहीं पास में जल रही आग सेंकते और चाय की चुस्कियों का आनंद लेते रहे। इस दौरान लोगों से भी बात करते रहे।

सीएम धामी को अपने बीच पाकर कई लोग उनके साथ फोटो खिंचवाने से खुद को रोक नहीं पाए। सीएम धामी ने भी लोगों को निराश नहीं किया। सीएम धामी ने बारी बारी से सबके साथ फोटो खिंचवाई।

मां नयना देवी मंदिर बनेगा और भव्य, सीएम ने दिए निर्देश

सुबह की सैर के दौरान ही मुख्यमंत्री ने मानस खंड मिशन के अंतर्गत नैना देवी मंदिर परिसर में चल रहे सौंदर्यीकरण कार्यों का भी निरीक्षण किया। सीएम धामी ने बताया कि मंदिर को और अधिक भव्य व आकर्षक स्वरूप देने हेतु ₹11 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है, जिसके तहत कई महत्वपूर्ण कार्य तेजी से प्रगति पर हैं। मां नयना देवी का मंदिर जल्द ही और भव्य स्वरूप में नजर आएगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने मिशन के अन्य विकास कार्यों—डीएसए मैदान के सुधार, वलिया नाला, एवं ठंडी सड़क पर भूस्खलन सुरक्षा कार्यों—की भी जानकारी अधिकारियों से ली और संबंधित विभागों को इन सभी कार्यों में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए।

Dhami Cabinet news : धामी कैबिनेट ने देहरादून के लिए ले लिया ये बड़ा फैसला, कुछ इतने प्रस्तावों पर लगा दी मुहर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को देहरादून में हुई कैबिनेट बैठक (Dhami Cabinet news) में कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगा दी गई है। सबसे अहम फैसला राज्य की अस्थाई राजधानी देहरादून को लेकर लिया गया है। देहरादून में नियो मेट्रो परियोजना को धामी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही कैबिनेट में राज्य में वन्य जीवों के हमले में मृत्यु होने पर मृतक के परिजनों को दस लाख रुपए की सहायता देने पर भी कैबिनेट ने मुहर लगाई है। आइए पढ़ते हैं धामी कैबिनेट के फैसले।

धामी कैबिनेट के फैसले विस्तार से

  1. विभाग का नामः-पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, उत्तराखण्ड शासन।

विषयः- उत्तराखण्ड जैव विविधता बोर्ड की वार्षिक रिपोर्ट-2024-25 के संबंध में।

उत्तराखण्ड जैव विविधता बोर्ड की वित्तीय वर्ष 2024-25 के क्रियाकलापों के संपूर्ण लेखे-जोखे को राज्य विधान मण्डल के पटल पर रखे जाने की स्वीकृति ।

  1. विभाग का नाम- अभियोजन विभाग, उत्तराखण्ड (गृह विभाग)।

विषयः- अभियोजन विभाग, उत्तराखण्ड में अभियोजन संवर्ग के ढ़ांचे के पुनर्गठन के सम्बन्ध में।

प्रस्ताव :- राज्य गठन के उपरान्त समय-समय पर अभियोजन विभाग में अभियोजन संवर्ग के कुल 142 पद के सापेक्ष सहायक अभियोजन अधिकारी के कुल 91 पद सृजित है। मा० न्यायालयों में वादों के सम्बन्ध में प्रभावी पैरवी किये जाने हेतु अभियोजन संवर्ग के ढाँचें को पुनर्गठित करते हुए प्रथम चरण में राज्य के चार जनपदों कमशः देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर एवं नैनीताल हेतु सहायक अभियोजन अधिकारी के कुल 46 अतिरिक्त पदों को सृजित किये जाने प्रस्ताव पर मंत्रिमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है।

  1. विभाग का नाम ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा विभाग, उत्तराखण्ड शासन।

विषय :- उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम लि० (यूजेवीएन लि०) के वर्ष 2022-23 के वार्षिक वित्तीय प्रतिवेदन को विधानसभा पटल पर प्रस्तुत किये जाने के सम्बन्ध में।

भारत सरकार के राजपत्र में प्रकाशित कम्पनी एक्ट-2013 की धारा-395 के अन्तर्गत उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम लि० (यूजेवीएन लि०) के वर्ष 2022-23 के वार्षिक वित्तीय प्रतिवेदन को विधानसभा पटल पर रखे जाने का प्राविधान है, जिसके अनुपालन में यूजेवीएन लि0 के वर्ष 2022-23 के वार्षिक वित्तीय प्रतिवेदन को आगामी विधानसभा सत्र में विधानसभा पटल पर रखे जाने सम्बन्धी प्रस्ताव पर मा० मंत्रिमण्डल का अनुमोदन प्राप्त किया गया।

  1. वि भाग का नामः- आवास विभाग (अनुभाग-2)

विषय : प्राधिकरण क्षेत्रान्तर्गत मानचित्र स्वीकृति की अनिवार्यता किये जाने के संबंध में। पुनः परीक्षण किए जाने का निर्णय किया गया।

  1. राज्य की दुकानों एवं स्थापनों में महिला कर्मकारों को रात्रि पाली (रात्रि 9.00 बजे से प्रातः 6.00 बजे तक) कार्य करने की सशर्त छूट प्रदान की गयी है, जिसमें महिला कर्मकारों की सुरक्षा का पर्याप्त प्रावधान किया गया है। इस प्रावधान से महिला कर्मकारों को कार्य करने के अधिक अवसर प्राप्त होगें तथा महिला कर्मकारों का आर्थिक सशक्तिकरण होगा। रात्रि पाली में महिला कर्मकारों को कार्य में तभी लिया जा सकता है जब उनके द्वारा इस संबंध में पूर्व में ही लिखित सहमति प्राप्त कर ली जाय। इससे महिला कर्मकारों को पुरूष कर्मकारों के समान कार्य करने के अवसर प्राप्त होगें तथा लैंगिक समानता की व्यवस्था भी प्रभावी होगी।
  2. उत्तराखण्ड दुकान और स्थापन (रोजगार विनियमन और सेवा-शर्त) (संशोधन) अध्यादेश, 2025 के माध्यम से उत्तराखण्ड दुकान और स्थापन (रोजगार विनियमन और सेवा-शर्त) अधिनियम, 2017 की धारा 1(2), 8, 9 एवं धारा 19 में संशोधन किया जा रहा है। इन संशोधनों से छोटे प्रतिष्ठानों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा और वे अपनी आर्थिक गतिविधि सुचारू रूप से संचालित कर सकेंगे जबकि बड़े प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मकारों को कानून के अन्तर्गत सभी लाभ प्राप्त होंगे। इससे निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, दुकानों एवं स्थापनों में काम करने के समय में लचीलापन आयेगा, प्रशासनिक बोझ कम होगा। उक्त के अतिरिक्त इससे दुकानों एवं स्थापनों की कार्यक्षमता बढ़ेगी एवं कर्मकारों को ज्यादा काम करने का अवसर मिलेगा, जिसके परिणामस्वरूप उनकी आर्थिकी में सुधार होगा।
  3. : देहरादून शहर में प्रस्तावित मेट्रो नियो परियोजना के सम्बन्ध में।

देहरादून को नियो मेट्रो की सौगात

उत्तराखण्ड मेट्रो रेल एवं शहरी अवस्थापना एवं भवन निर्माण निगम की सम्पन्न आहूत 34वीं बोर्ड बैठक के एजेण्डा बिन्दु संख्या-34/3 में पारित प्रस्ताव के अनुक्रम में देहरादून शहर में प्रस्तावित मेट्रो नियो परियोजना के प्रस्ताव पर आवासन एवं शहरी विकास मामलों के मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दिये गये परामर्श / सुझाव से मा० मंत्रिमण्डल को अवगत करने एवं मार्गदर्शन प्राप्त किये जाने का प्रस्ताव प्रस्तावित किया गया है।

वन्य जीवों के हमले में मृत्यु पर दस लाख रुपए की सहायता

  1. विषय- मानव वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण निधि (संशोधन) नियमावली, 2025 का प्रख्यापन।

वर्तमान में मानव वन्यजीव संघर्ष के प्रकरणों में प्रभावितों को अनुग्रह राशि का भुगतान “मानव वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण निधि नियमावली-2024” के प्रावधानों के अनुसार किया जाता है। उक्त नियमावली के प्रावधानों के अनुसार वर्तमान में मानव मृत्यु की दशा में रू0 6.00 लाख की धनराशि मृतक के आश्रितों को प्रदान किये जाने का प्रावधान है। मानव मृत्यु की संवेदनशीलता के दृष्टिगत समय-समय पर इस धनराशि को बढ़ाये जाने की मांग को देखते हुए, टाईगर कन्जर्वेशन फाउण्डेशन फॉर सी०टी०आर० की शासी निकाय की 10वीं बैठक में लिये गये निर्णय के क्रम में मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में मानव मृत्यु की दशा में अनुग्रह राशि की दर को रू0 6.00 लाख से बढ़ाकर रू0 10.00 लाख किये जाने हेतु मूल नियमावली के नियम-9 के उप नियम (1) में संशोधन करते हुए अब मानव मृत्यु की दशा में प्रति व्यक्ति रू0 10.00 की अनुग्रह राशि दी जायेगी। इस संबंध में मा० मुख्यमंत्री जी द्वारा वन्यजीव हमले में जनहानि पर मिलने वाली सहायता राशि को बढ़ाकर रू0 10.00 लाख किये जाने की घोषणा भी की गयी थी।

Tata Sierra 2025 Rivals: क्या यह Iconic SUV बाज़ार में अपने प्रतिद्वंद्वियों को मात दे पाएगी?

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टाटा मोटर्स (Tata Motors) ने अपनी प्रतिष्ठित SUV टाटा सिएरा (Tata Sierra) को एक बिल्कुल नए और आधुनिक अवतार में भारतीय बाज़ार में उतारकर धूम मचा दी है। यह केवल पुरानी मॉडल का अपग्रेड नहीं है, बल्कि एक नया इंजीनियरिंग चमत्कार है जो उन्नत सुरक्षा सुविधाओं और आधुनिक तकनीक से लैस है। ₹11.49 लाख (एक्स-शोरूम, इंट्रोडक्टरी) की शुरुआती कीमत के साथ, सिएरा ने मिड-साइज़ SUV सेगमेंट में अपनी जगह पक्की कर ली है।

यह सेगमेंट पहले से ही कड़े मुकाबले वाला है, जहां Hyundai Creta, Kia Seltos, Maruti Grand Vitara जैसे दिग्गज अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। ऐसे में, नई सिएरा किस तरह अपने प्रतिद्वंद्वियों को चुनौती देगी और खुद को सबसे आगे रखेगी, यह जानना दिलचस्प होगा।

Tata Sierra के Competitors की पूरी लिस्ट!

नई Tata Sierra का सीधा मुकाबला भारतीय बाजार की इन मजबूत मिड-साइज़ SUVs से होगा:

  • Hyundai Creta (हुंडई क्रेटा)
  • Kia Seltos (किआ सेल्टोस)
  • Maruti Grand Vitara (मारुति ग्रैंड विटारा)
  • Toyota Urban Cruiser Hyryder (टोयोटा अर्बन क्रूजर हायराइडर)
  • Honda Elevate (होंडा एलिवेट)
  • Volkswagen Taigun (फॉक्सवैगन टाइगन)
  • Skoda Kushaq (स्कोडा कुशाक)
  • MG Astor (एमजी एस्टोर)
  • Citroen C3 Aircross (सिट्रॉन सी3 एयरक्रॉस)

यह सूची स्पष्ट करती है कि Tata Sierra को सेगमेंट में अपनी जगह बनाने के लिए एक कठिन लड़ाई लड़नी होगी, लेकिन इसकी अनूठी विशेषताएं इसे एक मजबूत दावेदार बनाती हैं।

सेगमेंट में सबसे बड़े आयाम: Tata Sierra का ‘रोड प्रेजेंस’

नई Tata Sierra का एक बड़ा फायदा इसका विशाल आकार है, जो इसे सेगमेंट में एक शानदार ‘रोड प्रेजेंस’ देता है।

  • सबसे ऊंची SUV: 1,715mm की ऊँचाई के साथ, सिएरा मिड-साइज़ कैटेगरी में सबसे ऊंची SUV है।
  • सबसे लंबा व्हीलबेस: इसका 2,730mm का व्हीलबेस (Wheelbase) इसके सीधे प्रतिद्वंद्वियों में सबसे लंबा है। यह न केवल गाड़ी के लुक को दमदार बनाता है, बल्कि केबिन के अंदर यात्रियों के लिए बेहतर लेगरूम और स्पेस भी सुनिश्चित करता है।
  • विशाल बूट स्पेस: टाटा मोटर्स ने 622-लीटर का बूट स्पेस देने का दावा किया है, जो इसे सेगमेंट की सबसे विशाल मॉडलों में से एक बनाता है। लंबी यात्राओं और बड़े परिवारों के लिए यह एक बड़ा प्लस पॉइंट है।
  • मजबूत लुक: उच्च ग्राउंड क्लीयरेंस (High Ground Clearance) और 19-इंच के अलॉय व्हील (जो सेगमेंट में सबसे बड़े हैं) इसके मस्कुलर और रग्ड (Rugged) लुक को पूरा करते हैं, जो इसे ऑफ-रोड ड्राइविंग के लिए भी एक मजबूत विकल्प बनाते हैं।

ARGOS आर्किटेक्चर: भविष्य की तकनीक

Tata Sierra rivals

नई Tata Sierra की इंजीनियरिंग का एक महत्वपूर्ण आकर्षण इसका ARGOS आर्किटेक्चर है। इस मॉड्यूलर प्लेटफॉर्म को विशेष रूप से ICE (Internal Combustion Engine) और इलेक्ट्रिक (EV) दोनों संस्करणों को सपोर्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

  • भविष्य की तैयारी: यह वास्तुकला (Architecture) मज़बूती और भविष्य की लचीलेपन पर केंद्रित है। यह सिएरा को ऑल-व्हील-ड्राइव (AWD) क्षमता के साथ आने की संभावना भी देता है, जो इसे केवल पेट्रोल या डीज़ल इंजन के लिए बने प्रतिद्वंद्वी SUVs पर एक बड़ा लाभ देता है।
  • इंजन विकल्प: विविधता खरीदारों को एक और बड़ा कारण देती है। सिएरा तीन आंतरिक दहन इंजन (ICE) विकल्पों के साथ पेश की गई है:
    1. 1.5-लीटर टर्बो पेट्रोल (160hp, 255Nm)
    2. 1.5-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल (106hp, 145Nm)
    3. 1.5-लीटर डीजल (118hp, 260/280Nm)

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इंजनों की यह व्यापक श्रृंखला ग्राहकों को उनकी ड्राइविंग की आदतों और ईंधन प्राथमिकताओं के अनुसार चुनाव करने की स्वतंत्रता देती है। ख़ासकर, सेगमेंट में डीज़ल इंजन के विकल्प कम होने के बावजूद सिएरा में यह विकल्प मौजूद है, जो इसे Creta और Seltos के साथ सीधे प्रतिस्पर्धा में रखता है।

अत्याधुनिक फीचर्स और सुरक्षा

Tata Sierra को फीचर्स के मामले में भी काफी प्रीमियम बनाया गया है, जो सेगमेंट लीडर्स को कड़ी टक्कर देता है।

  • ट्रिपल स्क्रीन सेटअप: केबिन में एक शानदार ट्रिपल-स्क्रीन सेटअप (12.3-इंच सेंट्रल टचस्क्रीन, 12.3-इंच पैसेंजर डिस्प्ले, और 10.25-इंच डिजिटल इंस्ट्रूमेंटल क्लस्टर) दिया गया है, जो लक्ज़री SUV का एहसास कराता है। यह फीचर पहली बार किसी टाटा कार में दिया गया है।
  • ADAS Level 2: सुरक्षा के मामले में, सिएरा लेवल-2 ADAS (Advanced Driver-Assistance Systems) से लैस है, जिसमें एडेप्टिव क्रूज़ कंट्रोल, ऑटो इमरजेंसी ब्रेकिंग और लेन कीप असिस्ट जैसे फीचर्स शामिल हैं। यह क्रेटा, सेल्टोस और ग्रैंड विटारा जैसे प्रतिद्वंद्वियों को टक्कर देता है।
  • अन्य प्रीमियम फीचर्स: पैनोरमिक सनरूफ, डुअल-जोन ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, वेंटिलेटेड फ्रंट सीटें, 360-डिग्री कैमरा, और JBL साउंड सिस्टम जैसे फीचर्स इसे एक प्रीमियम और आधुनिक पैकेज बनाते हैं।

टाटा सिएरा 2025 एक मजबूत पैकेज के साथ बाज़ार में आई है। इसका विशाल आकार, भविष्य के लिए तैयार ARGOS आर्किटेक्चर, बहुमुखी इंजन विकल्प और प्रीमियम फीचर्स की लंबी सूची इसे मिड-साइज़ SUV सेगमेंट में एक formidable दावेदार बनाती है। यह न केवल क्रेटा, सेल्टोस और ग्रैंड विटारा जैसी SUVs को चुनौती देगी, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं को एक आइकॉनिक नाम में आधुनिकता, शक्ति और सुरक्षा का एक आकर्षक मिश्रण भी प्रदान करेगी।

देहरादून न्यूज। अचानक ISBT पहुंच गए सीएम धामी, गंदगी देख खुद ही उठानी पड़ गई झाड़ू, देखते रहे अफसर – अधिकारी

देहरादून ISBT का मर्ज अब तक सुलझाया नहीं जा सका है। हालात ये हैं कि आईएसबीटी परिसर बदहाली का शिकार है। गंदगी का आलम तो ये है कि सीएम पुष्कर सिंह धामी कई बार औचक निरीक्षण कर चुके हैं इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के कानों पर जूं नहीं रेंग रही है। मंगलवार को सीएम धामी जब एक बार फिर पहुंचे तो गंदगी देख नाराज हो गए और खुद ही झाड़ू उठाकर सफाई करने लगे। सीएम धामी ने इस दौरान सख्त हिदायत दी है कि अगली बार जब आएं तो गंदगी नहीं दिखनी चाहिए।

अचानक पहुंचे सीएम धामी तो खुली पोल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अचानक सचिवालय से निकले और सीधे आईएसबीटी देहरादून पहुंच गए। सीएम धामी ने पहुंचकर व्यवस्थाओं का औचक निरीक्षण शुरू किया। मुख्यमंत्री के अचानक पहुंचने से प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप की स्थिति बन गई। उन्होंने परिसर में स्वच्छता, यात्रियों की सुविधा, संचालन व्यवस्था और परिवहन प्रबंधन का बारीकी से निरीक्षण किया।

नाराज हो गए सीएम धामी, खुद उठा ली झाड़ू

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री कई स्थानों पर फैली गंदगी को देखकर नाराज हो गए। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से वहीं पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आईएसबीटी जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं झाड़ू उठाकर सफाई भी की और अधिकारियों को संदेश दिया कि स्वच्छता अभियान केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शीघ्र ही पूरे प्रदेश में जनसहभागिता आधारित एक व्यापक स्वच्छता अभियान शुरू करने जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि अगली बार निरीक्षण के दौरान आईएसबीटी की सभी व्यवस्थाएँ पूरी तरह दुरुस्त दिखनी चाहिए, अन्यथा जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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तत्काल बनाएं कार्ययोजना, लोगों को मिले धूल रहित वातावरण

मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग और एमडीडीए के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आईएसबीटी परिसर की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए, हर स्थान पर स्वच्छता संबंधी सूचना-पट लगाए जाएँ, यात्रियों को प्रदूषण, कचरा और धूल से मुक्त वातावरण मिले, यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी को विशेष रूप से निर्देश दिए कि आईएसबीटी में स्वच्छता और व्यवस्था सुधारने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर तत्काल क्रियान्वयन किया जाए।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने बसों की संचालन व्यवस्था, टिकट काउंटर, प्रतीक्षालय, पेयजल सुविधाओं, शौचालयों, दुकानों और सुरक्षा व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड एक प्रमुख पर्यटन एवं तीर्थ राज्य है, जहां प्रतिवर्ष करोड़ों की संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु आते हैं। इसलिए बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और परिवहन केंद्रों पर उच्च स्तरीय स्वच्छता और सुविधा व्यवस्था प्रदेश की प्राथमिकता है।

फर्जी स्थायी निवास प्रमाण पत्रों के मामले में सीएम सख्त, जिलाधिकारियों को दिए ये निर्देश, अब होगी तगड़ी जांच

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के जिलाधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वर्चुअल माध्यम से समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने बैठक में राज्य के विकास कार्यों की प्रगति, जनशिकायतों के त्वरित निस्तारण और प्रशासनिक सुधारों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने राज्य स्थापना की रजत जयंती पर सफल कार्यक्रम के आयोजन के लिए अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि माननीय राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री जी द्वारा राज्य के विकास के संबंध में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया गया। इसके साथ ही सीएम धामी ने राज्य में पिछले तीन सालों में बने स्थाई निवासी प्रमाण पत्रों की गहन जांच के निर्देश भी दिए हैं।

एक जिला, एक मेला अभियान पर हो काम

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने के विज़न पर जोर दिया और ‘एक जिला, एक मेला’ अभियान के महत्व को रेखांकित करते हुए स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाले मेलों के पर्यावरण-सम्मत और भव्य आयोजन की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि “एक जिला, एक मेला” अभियान के अंतर्गत चयनित मेलों को राजकीय मेला के रूप में घोषित किया जाएगा। जिन मेलों को यह मान्यता प्राप्त होगी, उन्हें विशेष संरक्षण, वित्तीय सहायता और प्रचार-प्रसार का लाभ मिलेगा। इन मेलों के आयोजक वही रहेंगे। राज्य सरकार केवल सहायता और आवश्यक सहयोग प्रदान करेगी। इस अभियान का उद्देश्य केवल स्थानीय संस्कृति, कला और शिल्प को बढ़ावा देना ही नहीं, बल्कि जनता के लिए मनोरंजन और सामुदायिक सहभागिता के अवसर भी प्रदान करना है। राजकीय मेला घोषित किए जाने से मेलों का स्वरूप और आकर्षण और बढ़ जाएगा तथा यह राज्य के सांस्कृतिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

विकसित होंगे आध्यात्मिक गांव

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को देश और दुनिया के लिए आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के दृष्टिकोण से यह आवश्यक है कि योग, आयुर्वेद और ध्यान के केंद्रों को जिलों और ब्लॉकों तक विस्तारित किया जाए। इसके लिए प्रत्येक ब्लॉक में एक गाँव को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना जा सकता है, जिसे “आध्यात्मिक गाँव” के रूप में विकसित किया जाएगा। इस पहल के तहत गाँव में योग प्रशिक्षण केंद्र, आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सुविधा, ध्यान और मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम तथा स्थानीय स्तर पर आध्यात्मिक शिक्षा के अवसर प्रदान किए जाएंगे। इससे न केवल स्थानीय लोगों का स्वास्थ्य और मानसिक शांति बढ़ेगी, बल्कि राज्य को पर्यटन और स्वास्थ्य से जुड़ी नई पहचान भी मिलेगी।

बारहमासी पर्यटन पर फोकस

मुख्यमंत्री ने वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत चिन्हित गांवों में होमस्टे, स्वरोजगार, उद्यानिकी, कृषि और सौर ऊर्जा संबंधी गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। मुख्यमंत्री ने सीमा से लगे गांवों को वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया और कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक सीमांत गांव को किस रूप में आकर्षण का केंद्र बनाया जाएगा। उन्होंने शीतकालीन चार धाम यात्रा और बारहमासी पर्यटन की तैयारियों को तेज करने के निर्देश दिए। इसके अंतर्गत, विशेषकर उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में होटलों, होमस्टे संचालकों और अन्य सेवा प्रदाताओं के साथ समन्वय स्थापित करना और यात्रियों को गुणवत्तापूर्ण सुविधाएँ उपलब्ध कराना शामिल है। मुख्यमंत्री ने राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने और अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से कुमाऊँ मंडल विकास निगम (केएमवीएन) तथा गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) को निर्देश दिए हैं कि वे आगामी शीतकालीन यात्रा सीज़न के लिए विशेष छूट पैकेज तैयार कर उन्हें लागू करें। उन्होंने कहा कि इन पैकेजों से न केवल पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होगी, बल्कि स्थानीय लोगों को भी रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को कहा कि सीएसआर फंड का उपयोग जनहित के कार्यों के लिए जिला स्तर पर व्यापक रूप से किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि इस फंड से ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाए, जिनसे आम जनता को सीधे लाभ मिल सके और स्थानीय विकास को गति मिले।

रैन बसेरा और बर्फ हटाने की बनाएं व्यवस्थाएं

मुख्यमंत्री ने प्रमुख स्थानों पर अलाव, रैन बसेरा और बर्फ हटाने की व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करने के साथ-साथ शीतकालीन चारधाम यात्रा के समापन के बाद यात्रा मार्गों और श्रद्धालुओं द्वारा छोड़े गए कचरे के उचित निस्तारण के निर्देश भी दिए। संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कचरे का प्रभावी प्रबंधन किया जाए और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाया जा सके। इस पहल का उद्देश्य न केवल यात्रियों की सुविधा बनाए रखना है, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक स्थलों की स्वच्छता भी सुनिश्चित करना है।

उत्पादों को बनाएं निर्यात योग्य

मुख्यमंत्री ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समग्र विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण पहलुओं एवं उनके व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जीआई टैग से संबंधित उत्पादों को निर्यात योग्य बनाने की दिशा में ठोस कार्य किए जाने की आवश्यकता है। इस संबंध में प्रत्येक जनपद को अपनी विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर लेनी चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने प्रत्येक जनपद और विकासखंड में पर्यटन स्थलों के विकास के लिए विशेष योजनाएँ तैयार करने की आवश्यकता पर भी बल दिया, जिससे न केवल स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शहरों और कस्बों की सुंदरता और स्वच्छता को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, इसलिए उद्यानिकी और हरित क्षेत्रों के विकास पर ध्यान देने के साथ-साथ बस-स्टैंड, रेलवे स्टेशन और प्रमुख मार्गों पर सफाई व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए, ताकि नागरिकों और पर्यटकों दोनों के लिए सुविधाजनक और आकर्षक वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।

सुरक्षा के लिए बढ़ाएं CCTV

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय और आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए जिला स्तर पर नियमित सत्यापन और निरीक्षण अभियान चलाने का निर्देश दिया। उन्होंने सीमा क्षेत्रों में विशेष निगरानी बनाए रखने और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही, शहरों और संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी कैमरों की पूरी व्यवस्था और उनकी रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा। सुरक्षा के लिए आवश्यक मैनपावर, तकनीक और अन्य संसाधनों की जरूरत होने पर तुरंत मुख्यालय और शासन को अवगत कराने का भी निर्देश दिया गया। नशा समस्या पर नियंत्रण के लिए संभावित क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना और डीजीपी के मार्गदर्शन में नशा मुक्ति अभियान के लिए समर्पित टीम बनाने की व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री ने सड़क पर घूमते बेसहारा पशुओं के प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं की सुचारू व्यवस्था, बागवानी के विकास और भूमि अतिक्रमण जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं का पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति अपनाएं संवेदनशील दृष्टिकोण

मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को अल्मोड़ा के द्वाराहाट क्षेत्र के द्रोणगिरी, चंपावत के श्यामलाताल-देवी धूरा और अन्य क्षेत्रों में स्पिरिचुअल इकोनॉमिक जोन विकसित करने की संभावनाओं का सर्वेक्षण कर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इसके साथ मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाएँ। जिलाधिकारी लगातार मॉनिटरिंग करें और सुनिश्चित करें कि स्वास्थ्य सुविधाएँ समय पर और प्रभावी रूप से जनता तक पहुँच रही हों। किसी भी समस्या या कमी की तुरंत पहचान कर उसके सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाएँ और समय-समय पर जिला अस्पतालों का औचक निरीक्षण करें। सीएम हेल्पलाइन की नियमित मॉनिटरिंग और बीडीसी बैठक, तहसील दिवस तथा जनसुनवाई चौपाल के माध्यम से जनता की समस्याओं के समय पर समाधान सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने राज्य के प्रमुख शहरों में बढ़ते यातायात जाम की समस्या को गंभीरतापूर्वक लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि जाम की समस्या का शीघ्र और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने राज्य की सभी सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य भर में क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत को प्राथमिकता के आधार पर किया जाए और मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने उन क्षेत्रों की पहचान करने का निर्देश भी दिया, जहां बार-बार सड़कों की स्थिति खराब होने और नागरिकों की शिकायतें अधिक आने की समस्या है। इन क्षेत्रों पर नियमित और विशेष निगरानी रखी जाए ताकि समय रहते सुधार किए जा सकें और जनता को सुगम एवं सुरक्षित मार्ग उपलब्ध हो सकें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से यह भी कहा कि मरम्मत कार्यों की निगरानी में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने बैठक में प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाने, कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने, आगामी शीतकालीन यात्रा की तैयारियों को तेज करने तथा सभी पर्यटक स्थलों पर सड़क, पेयजल, पार्किंग जैसी सुविधाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने राज्य की सभी सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर गड्ढ़ा मुक्त करने के निर्देश दिए।

स्थायी निवास प्रमाण पत्रों की होगी जांच

वहीं मुख्यमंत्री स्थाई निवास प्रमाण पत्र जारी करने के मसले पर सख्त नजर आए। सीएम ने जिलाधिकारियों को पिछले तीन साल में बने स्थाई निवासी प्रमाण पत्रों की जांच के निर्देश देते हुए गलत तरीके से बने प्रमाण पत्र में संलिप्त लोगों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। दरअसल कुछ दिनों पहले हल्दवानी में फर्जी तरीके से स्थाई निवास प्रमाण पत्र जारी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ था। इसके बाद से जांच एजेंसिया अलर्ट हैं। अब सीएम ने भी इस मसले पर संज्ञान लिया है।

Congress Performance Bihar 2025: बिहार में ‘पनौती’ बन गई कांग्रेस, महागठबंधन की हार के ये हैं पांच कारण

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Congress Performance Bihar 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे विपक्षी महागठबंधन के लिए एक बड़ा झटका साबित हुए हैं। सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) ने भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की है, जबकि महागठबंधन लगभग 40-50 सीटों पर सिमटता दिख रहा है।

इस करारी हार का सबसे बड़ा खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ा है। 2020 में जीती गई 19 सीटों के मुकाबले कांग्रेस इस बार 2-4 सीटें ही जीतती दिख रही है, जो पिछले प्रदर्शन से भी बदतर है। बिहार में अपना खोया वर्चस्व वापस पाने का सपना देख रही कांग्रेस के लिए ये नतीजे किसी ‘राजनीतिक सदमे’ से कम नहीं हैं।

आइए, समझते हैं महागठबंधन की इस शर्मनाक पराजय और Congress की दुर्दशा के पीछे क्या मुख्य कारण रहे।

1. आपसी ‘दोस्ताना’ लड़ाई का घातक वार

महागठबंधन की हार का सबसे प्रमुख कारण उसके घटकों के बीच तालमेल की कमी रही। कांग्रेस को इस बार 70 के मुकाबले 61 सीटें मिलीं, लेकिन इन सीटों में भी एकता नहीं दिखी।

  • 9 सीटों पर फ्रेंडली फाइट: कम से कम 9 सीटें ऐसी थीं जहाँ कांग्रेस के अलावा आरजेडी (RJD) या वाम दलों ने भी अपने उम्मीदवार उतार दिए।
  • वोटों का बिखराव: गठबंधन के दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतारकर विपक्ष के वोटों को सीधे तौर पर बिखेर दिया, जिसका सीधा फायदा सत्ताधारी एनडीए को मिला। जहाँ बीजेपी को हराना था, वहाँ महागठबंधन के दल आपस में ही लड़कर हार गए।

2. संगठन की कमजोरी और गलत उम्मीदवार चयन

Congress के वरिष्ठ नेताओं ने खुद इस खराब प्रदर्शन के लिए संगठनात्मक कमजोरी और गलत उम्मीदवार चयन को जिम्मेदार ठहराया है।

Congress, जो बिहार की राजनीति में दशकों तक एक मजबूत स्तंभ थी, अब जमीनी स्तर पर कमजोर हो चुकी है। पार्टी का कैडर और जमीनी कार्यकर्ता वोटरों तक पहुँचने में नाकाम रहा। साथ ही, कई योग्य और स्थानीय रूप से मजबूत उम्मीदवारों को नजरअंदाज कर बाहरी या कमज़ोर चेहरों को टिकट दिए गए। नतीजतन, पार्टी अपनी मिली हुई सीटों को भी जीत में नहीं बदल सकी।

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3. ‘यादव एकीकरण’ की महँगी रणनीति (आरजेडी फैक्टर)

महागठबंधन में सबसे बड़े घटक आरजेडी की रणनीति भी हार का एक कारण बनी। आरजेडी ने इस बार यादव उम्मीदवारों को टिकट देने में अत्यधिक जोर दिया।

  • आरजेडी ने 144 सीटों में से भारी संख्या में यादवों को टिकट दिए, जिससे यादव-केंद्रित राजनीति की छवि और मजबूत हुई।
  • गैर-यादव (सवर्ण, ईबीसी और ओबीसी का एक बड़ा हिस्सा) मतदाता वर्ग, जिसे बीजेपी और जेडीयू ने सफलतापूर्वक साधा, महागठबंधन से पूरी तरह दूर हो गया।
  • बीजेपी ने “यादव राज” के नैरेटिव को जमकर हवा दी, जिसने शहरी और मध्यम वर्ग के वोटरों को एनडीए की ओर धकेल दिया।

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4. एनडीए का मजबूत जातीय समीकरण और सुशासन की छवि

इसके विपरीत, एनडीए ने जातीय समीकरणों को साधने और विकास के मुद्दे पर सफलतापूर्वक वोट बटोरे।

  • जेडीयू ने महिलाओं और अति-पिछड़ों (EBC) के अपने पारंपरिक वोट बैंक को बरकरार रखा।
  • बीजेपी ने सवर्णों और शहरी मतदाताओं के साथ-साथ अब ओबीसी वर्ग में भी अपनी पैठ बढ़ाई।
  • नीतीश कुमार की ‘सुशासन’ की छवि और केंद्र सरकार की मुफ्त राशन और आवास जैसी कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ एनडीए को मिला।

5. Congress: बोझ बनी या भागीदार?

Congress के निराशाजनक प्रदर्शन ने महागठबंधन के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। 2020 के मुकाबले 9 सीटें कम (61 सीटें) मिलने के बावजूद, कांग्रेस ने अपने हिस्से की सीटों पर सिर्फ 5-7 जीत हासिल की।

कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी कम सफलता दर के बावजूद अधिक सीटें लेना महागठबंधन के लिए घाटे का सौदा साबित हुआ। जहाँ Congress कमजोर थी, वहाँ उसकी सीटों पर आरजेडी या वाम दलों के मजबूत उम्मीदवार जीत सकते थे। कांग्रेस, जो ‘इंडिया’ गठबंधन में एक केंद्रीय भूमिका निभाना चाहती है, बिहार में खुद ‘बोझ’ बनती दिखी।

बिहार की यह हार स्पष्ट संकेत है कि कांग्रेस को राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत वापसी के लिए पहले अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना होगा, अन्यथा वह सहयोगी दलों के लिए सबसे कमजोर कड़ी बनी रहेगी।

Bihar Election 2025: आखिर कांग्रेस को हर बार ‘धराशायी’ क्यों होना पड़ रहा है?

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Bihar Election 2025: महागठबंधन की करारी हार और कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन का पूरा विश्लेषण। सिर्फ 5 सीटें क्यों जीती कांग्रेस? जानें आपसी लड़ाई, कमजोर संगठन और RJD की रणनीति कैसे बनी हार की वजह।

बिहार चुनाव 2025: महागठबंधन धराशायी, कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका!

Bihar Election 2025 के नतीजों ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की एकतरफा जीत की तस्वीर साफ कर दी है। मतगणना पूरी होने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि एनडीए प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी कर रहा है, जबकि विपक्षी दलों का महागठबंधन करारी हार झेल रहा है। इस हार में सबसे करारा झटका कांग्रेस को लगा है, जिसका प्रदर्शन पिछले चुनाव से भी बदतर रहा है।

Bihar Election 2025: कांग्रेस का सबसे निराशाजनक प्रदर्शन: आधी सीटें भी नहीं जीत सकी

Bihar Election 2025: कांग्रेस, जो बिहार में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन तलाश रही थी, के लिए ये नतीजे किसी सदमे से कम नहीं हैं। पार्टी का प्रदर्शन 2020 के विधानसभा चुनाव से भी खराब रहा है।

  • 2020 विधानसभा चुनाव: कांग्रेस को महागठबंधन में 70 सीटें मिली थीं और उसने 19 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
  • Bihar Election 2025: इस बार कांग्रेस को केवल 61 सीटें मिलीं, जिनमें से वह मात्र 5 सीटें ही जीतती दिख रही है।

इसका सीधा मतलब है कि पिछले चुनाव के मुकाबले कांग्रेस आधी सीटें भी नहीं जीत सकी। अपनी पुरानी राजनीतिक विरासत वाले इस राज्य में यह प्रदर्शन कांग्रेस के लिए एक बहुत बड़ा झटका है और पार्टी के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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Bihar Election 2025: एनडीए की एकतरफा जीत: बहुमत का आँकड़ा पार

रुझानों के अनुसार, एनडीए एकतरफा जीत की ओर बढ़ रहा है और उसने बहुमत का आँकड़ा बड़े अंतर से पार कर लिया है।

दलसंभावित जीती गई सीटें
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)90
जनता दल यूनाईटेड (जेडीयू)79
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास)21
राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम)4
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम)4
एनडीए कुल~197

एनडीए की कुल 197 सीटों पर जीत की संभावना है, जो उसके मजबूत जनाधार और कुशल चुनावी रणनीति को दर्शाती है।

महागठबंधन की शर्मनाक पराजय: 40 सीटों पर सिमटा

दूसरी तरफ, विपक्षी दलों के महागठबंधन के लिए ये चुनाव बेहद निराशाजनक रहे हैं।

दलसंभावित जीती गई सीटें
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी)31
कांग्रेस5
सीपीआई-एमएल4
सीपीआई-एम1
महागठबंधन कुल~40

महागठबंधन लगभग 40 सीटों पर सिमटता दिखाई दे रहा है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), जो विपक्षी गठबंधन की अगुवाई कर रहा था, भी अपनी उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन करने में विफल रहा है।

Bihar Election 2025: आपसी लड़ाई ने किया महागठबंधन का बेड़ा गर्क

महागठबंधन की इस शर्मनाक पराजय का एक मुख्य कारण गठबंधन के दलों के बीच आपसी समन्वय की कमी और ‘फ्रेंडली फाइट’ भी रही।

कांग्रेस को इस बार पिछले चुनाव से 9 सीटें कम (61 सीटें) मिली थीं। लेकिन समस्या सिर्फ यहाँ तक नहीं रुकी। इन 61 सीटों में से कम से कम 9 सीटों पर कांग्रेस को अपने ही सहयोगी दलों – आरजेडी, सीपीआई और वीआईपी के उम्मीदवारों का सामना करना पड़ा।

बीजेपी को हराने के उद्देश्य से बने महागठबंधन के दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतारकर अपनी ही ताकत कम कर ली। इस आपसी लड़ाई का सीधा फायदा सत्ता पक्ष यानी एनडीए को मिला। वे बीजेपी को परास्त करने के बजाय खुद ही परास्त हो गए।

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस के लिए एक कड़ा सबक दिया है। पार्टी को अपनी रणनीति और गठबंधन धर्म को लेकर गंभीर आत्म-मंथन करने की आवश्यकता है, ताकि वह भविष्य में अपनी पुरानी राजनीतिक जमीन को फिर से हासिल कर सके।

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