गैरसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में मंगलवार से विधानसभा का सत्र शुरू हो गया। इसके साथ ही वर्ष 2026 में यहां दूसरी बार विधानसभा सत्र आयोजित हो रहा है। इससे पहले मार्च में भराड़ीसैंण में बजट सत्र आयोजित किया गया था। राज्य गठन के बाद गैरसैंण में विधानसभा की कार्यवाही के इतिहास में एक ही वर्ष में दो सत्र आयोजित होने को महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में आयोजित हो रहे इस सत्र के साथ गैरसैंण की विधायी गतिविधियों में एक और अध्याय जुड़ा है। गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा मिलने के बाद यहां विधानसभा सत्रों का आयोजन पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं, विकास की जरूरतों और स्थानीय जनभावनाओं से जुड़े मुद्दों के लिहाज से अहम माना जाता रहा है।
2014 में शुरू हुआ था गैरसैंण में विधानसभा सत्रों का सिलसिला
गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। उस वर्ष यहां पहली बार तीन दिवसीय सत्र आयोजित किया गया। इसके बाद वर्ष 2015 और 2016 में दो-दो दिन तथा वर्ष 2017 में दो दिवसीय सत्र हुआ।
वर्ष 2018 में भराड़ीसैंण में विधानसभा की कार्यवाही छह दिन तक चली, जबकि वर्ष 2019 में यहां कोई सत्र आयोजित नहीं हुआ। वर्ष 2020 में पांच दिवसीय सत्र आयोजित किया गया। वर्ष 2021 में एक से छह मार्च तक छह दिवसीय बजट सत्र चला।
वर्ष 2022 में गैरसैंण में विधानसभा सत्र नहीं हुआ। इसके बाद वर्ष 2023 में चार दिन और वर्ष 2024 में तीन दिवसीय सत्र आयोजित किया गया। वर्ष 2025 में यहां बजट सत्र और मानसून सत्र आयोजित किए गए। वर्ष 2026 में मार्च के बजट सत्र के बाद अक्टूबर में एक बार फिर विधानसभा की कार्यवाही भराड़ीसैंण में हो रही है।
ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में गैरसैंण की भूमिका
गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने का महत्व केवल विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं है। पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों, सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं, पेयजल, रोजगार तथा स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाने के लिहाज से भी यह स्थान महत्वपूर्ण है।
भराड़ीसैंण में सत्रों का आयोजन ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में गैरसैंण की भूमिका को चर्चा में रखता है। हालांकि, राजधानी की भूमिका को और मजबूत बनाने के लिए नियमित सत्रों के साथ प्रशासनिक गतिविधियों, बुनियादी सुविधाओं और क्षेत्रीय विकास से जुड़े प्रयास भी महत्वपूर्ण होंगे।
जनभावनाओं और पर्वतीय विकास पर मुख्यमंत्री का जोर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि गैरसैंण उत्तराखंड की जनभावनाओं और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। सरकार का प्रयास है कि ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्रों के आयोजन के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं, जनअपेक्षाओं और विकास से जुड़े विषयों को प्राथमिकता मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गैरसैंण की भूमिका को सशक्त बनाना और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के संतुलित विकास को गति देना सरकार की प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनभावनाओं के अनुरूप विकास और सुशासन के संकल्प के साथ काम कर रही है।

