गैरसैंण। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट को विकसित और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। मंगलवार को गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक उत्तराखंड को विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य बनाना है। इसी उद्देश्य से बजट में विकास योजनाओं, जनकल्याण और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, अनुपूरक बजट में कुल 7,844.18 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें 4,164.32 करोड़ रुपये पूंजीगत मद और 3,679.86 करोड़ रुपये राजस्व मद के लिए रखे गए हैं। सरकार ने स्थानीय निकायों, किसानों, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, युवाओं और आगामी कुंभ की तैयारियों के लिए भी बजट में धनराशि प्रस्तावित की है।
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में वृद्धि का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) वर्ष 2022 में लगभग 2.55 लाख करोड़ रुपये था, जिसके वित्तीय वर्ष 2026-27 में बढ़कर करीब 3.82 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। इसी अवधि में प्रति व्यक्ति आय लगभग 1.95 लाख रुपये से बढ़कर 2.74 लाख रुपये तक पहुंचने की बात कही गई।
उन्होंने बताया कि राज्य में स्टार्टअप की संख्या 702 से बढ़कर 1,978 हो गई है, जबकि एमएसएमई इकाइयों की संख्या लगभग 60 हजार से बढ़कर एक लाख तक पहुंची है। मुख्यमंत्री ने इन उपलब्धियों को प्रदेशवासियों की मेहनत, जनभागीदारी और सरकार के प्रयासों का परिणाम बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि नीति आयोग के एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2023-24 में उत्तराखंड ने 79 अंकों के साथ संयुक्त रूप से देश में पहला स्थान हासिल किया।
स्थानीय निकायों को 721 करोड़ रुपये
मुख्यमंत्री ने बताया कि छठे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के अनुसार स्थानीय निकायों की राज्य के कर राजस्व में हिस्सेदारी 10.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसके लिए 721 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
सरकार के मुताबिक, इस प्रावधान से ग्रामीण और शहरी निकायों को स्थानीय विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन मिल सकेंगे।
किसानों और बुनियादी ढांचे के लिए बजट
अनुपूरक बजट में किसानों और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े कई प्रावधान किए गए हैं। मुख्यमंत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार:
- 1,100 करोड़ रुपये: अन्नपूर्ति योजना के तहत धान और गेहूं की खरीद।
- 500 करोड़ रुपये: आधारभूत ढांचे के विकास के लिए विशेष सहायता योजना।
- 300 करोड़ रुपये: जल जीवन मिशन।
- 122 करोड़ रुपये: गैरसैंण जलापूर्ति बांध परियोजना।
- लगभग 290 करोड़ रुपये: आगामी दिव्य कुंभ की व्यवस्थाओं और अवस्थापना सुविधाओं के लिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नंदा राजजात यात्रा और हरिद्वार-गंगा कॉरिडोर से जुड़े कार्यों को भी बजट में ध्यान में रखा गया है।
स्वास्थ्य और शिक्षा पर भी जोर
मुख्यमंत्री के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए अटल आयुष्मान योजना में 100 करोड़ रुपये और कर्मचारियों की गोल्डन कार्ड योजना के लिए 125 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
पिथौरागढ़ और रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज सहित चिकित्सा शिक्षा से जुड़े कार्यों के लिए लगभग 160 करोड़ रुपये तथा विद्यालयी और उच्च शिक्षा में डिजिटल लर्निंग के लिए 200 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
सरकार ने युवाओं की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, खेल सुविधाओं, महिला स्पोर्ट्स कॉलेज, खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और छात्रवृत्ति योजनाओं को भी प्राथमिकता देने की बात कही है।
महिला कल्याण, पोषण और सामाजिक सुरक्षा पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला एवं बाल कल्याण, पोषण अभियान, भोजन माताओं के मानदेय, किसान पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को भी बजट में महत्व दिया गया है। सरकार का प्रयास है कि विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि बजट तैयार करने की प्रक्रिया में किसानों, महिलाओं, युवाओं, उद्यमियों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से सुझाव लिए गए हैं। सरकार ने वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और सार्वजनिक धन के बेहतर उपयोग पर जोर दिया है।
आपदा प्रबंधन और आईटी क्षेत्र में निवेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन और सुरक्षित अवस्थापना का विकास सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। जोशीमठ सहित भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्रों में काम, आपदा रोधी निर्माण और सड़क तथा हेली सेवाओं से जुड़ी सुविधाओं के विकास पर ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने देहरादून में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया (STPI) परिसर की स्थापना को आईटी और स्टार्टअप क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे युवाओं के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
2047 तक विकसित उत्तराखंड का लक्ष्य
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नई योजनाएं शुरू करना नहीं, बल्कि उनका लाभ समय पर जनता तक पहुंचाना भी है। उन्होंने विकास के साथ राज्य की विरासत और संस्कृति के संरक्षण, स्थानीय रोजगार, गुणवत्तापूर्ण निवेश और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, विकसित और आत्मनिर्भर उत्तराखंड का निर्माण जनभागीदारी, सुशासन और निरंतर विकास से संभव होगा।

