रुद्रप्रयाग/चमोली: उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने पदभार ग्रहण करने के बाद पहली बार केदारनाथ और बदरीनाथ धाम पहुंचकर दर्शन-पूजन किया। इस दौरान उन्होंने देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। राज्यपाल ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से देवभूमि की स्वच्छता बनाए रखने, नशामुक्त उत्तराखंड के प्रयासों में सहयोग देने और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की अपील भी की।
बाबा केदारनाथ के दर्शन कर की सुख-समृद्धि की कामना
राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने केदारनाथ धाम में बाबा केदारनाथ के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने प्रदेशवासियों और देशवासियों के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना करते हुए कहा कि देवभूमि की पवित्रता बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने उत्तराखंड की आध्यात्मिक पहचान का उल्लेख करते हुए श्रद्धालुओं और पर्यटकों से धार्मिक स्थलों की मर्यादा का पालन करने तथा धामों को स्वच्छ रखने में योगदान देने का आह्वान किया।
बदरीनाथ धाम में भी किए दर्शन
केदारनाथ के बाद राज्यपाल ने बदरीनाथ धाम पहुंचकर भगवान बद्री विशाल के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। उन्होंने प्रदेश की उन्नति, जनकल्याण और निरंतर सुख-शांति की कामना की।
इस दौरान उन्होंने बदरीनाथ यात्रा की व्यवस्थाओं और बदरीनाथ महायोजना से जुड़े कार्यों की जानकारी भी ली। उन्होंने श्रद्धालुओं से उत्तराखंड की धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने की अपील की।
स्वच्छता और नशामुक्ति पर दिया जोर
राज्यपाल ने कहा कि देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों पर पहुंचते हैं। ऐसे में इन स्थलों की पवित्रता, स्वच्छता और प्राकृतिक वातावरण बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ और ‘नशामुक्त भारत’ के संकल्प का उल्लेख करते हुए प्रदेश को स्वच्छ और नशामुक्त बनाने के प्रयासों में जनभागीदारी की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देना जरूरी है।
सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का आह्वान
राज्यपाल ने उत्तराखंड की आध्यात्मिक परंपराओं, धार्मिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान को अमूल्य धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि इन परंपराओं को सहेजना केवल सरकार ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
दौरे के दौरान राज्यपाल की पत्नी भानुमति बिसेन सहित संबंधित जिलों के अधिकारी और मंदिर समिति के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।



