Holika Dahan 2025 Do’s and Don’ts: छोटी होली पर भूलकर भी ना करें ऐसी गलती वरना होगा बड़ा नुकसान

Alka Tiwari
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Holika Dahan 2025

Holika Dahan 2025 Do’s and Don’ts: फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होली का पर्व मनाया जाता है, पहले होलिका दहन होता है और फिर रंगों वाली होली खेली जाती है। ये पर्व बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है। होलिका दहन को छोटी होली कहकर भी संबोधित करते हैं।

ये पर्व 13 मार्च यानी कि गुरुवार को है जबकि 14 मार्च, शुक्रवार को रंगों वाली होली मनाई जाएगी। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक इस बार जैसे ही पूर्णिमा शुरू होगी , वैसे ही भद्राकाल प्रारंभ हो जाएगा इसलिए होलिका दहन की पूजा का बहुत कम वक्त मिलेगा।

भद्रा काल का समय

आपको बता दें कि भद्रा काल गुरुवार सुबह 10.35 से लेकर रात 11: 35 तक है इसलिए होलिका दहन इसके बाद ही होगा, जिसके लिए समय काफी कम है। अक्सर पूजा करते वक्त भक्त अनजाने में गलतियां कर जाते हैं। इसलिए उन्हें पूजा का उतना फल नहीं मिलता है, जितना की मिलना चाहिए उल्टा बड़ा नुकसान हो जाता है। चलिए विस्तार से जानते हैं कि छोटी होली पर क्या करें और क्या ना करें।

(Holika Dahan 2025) क्या करें

  • होलिका दहन से पहले भगवान विष्णु, प्रह्लाद और होलिका की पूजा करें। अग्नि को तिलक, रोली, चावल और फूल चढ़ाएं। होलिका दहन उत्तर-पूर्व दिशा में करना शुभ माना जाता है इसलिए इस दिशा में पूजा करें। होलिका के लिए गोबर से बनी मूर्ति का उपयोग करें।
  • होलिका दहन के समय हल्दी, नारियल और नई फसल (जैसे गेहूं की बालियां) अग्नि में अर्पित करें।
  • होलिका दहन के बाद इसकी सात बार परिक्रमा करें और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

क्या ना करें (Holika Dahan 2025)

  • होलिका दहन के समय स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें।
  • प्लास्टिक, रबर, केमिकल युक्त चीजें या मांसाहारी वस्तुएं अग्नि में न डालें।
  • होलिका दहन के दौरान क्रोध, झगड़ा और गाली-गलौज ना करें।
  • होलिका दहन के समय अग्नि जलाने के तुरंत बाद वहां से न हटें और पीठ न दिखाएं।

होलिका दहन करते वक्त करें इन मंत्रों का जाप (Holika Dahan 2025)

  • “ॐ होलिकायै नमः” ( शांति के लिए)
  • “जयन्ति मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥” (मां से मांगे सुख-शांति)
  • “असृक्पाभयभीतानां दुष्टानां पापनाशिनी। ( बुरी नजर से बचने के लिए)

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। khabardevbhoomi का यह लेख किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी बात को अमल में लाने से पहले किसी पंडित या ज्योतिषी से सलाह ज़रूर लें।

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अलका तिवारी पिछले तकरीबन बीस वर्षों से पत्रकारिता से जुड़ी हैं। इलेक्ट्रानिक मीडिया के साथ ही अलका तिवारी प्रिंट मीडिया में भी लंबा अनुभव रखती हैं। बदलते दौर में अलका अब डिजिटल मीडिया के साथ हैं और खबरदेवभूमि.कॉम में प्रमुख भूमिका निभाती हैं।
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