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Big Breaking : देहरादून। वरिष्ठ पत्रकार पंकज मिश्रा की मौत के मामले में दो गिरफ्तार, दोबारा कराया गया पोस्टमार्टम, SOG लगी

देहरादून में वरिष्ठ पत्रकार पंकज मिश्रा की मौत के मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने हिरासत में दोनों से लंबी पूछताछ की इसके बाद उन्हे गिरफ्तार कर लिया। इसके साथ ही पंकज मिश्रा का दोबारा पोस्टमार्टम भी कराया गया है।

हिरासत में लंबी पूछताछ, फिर हुई गिरफ्तारी

पंकज मिश्रा की मौत के बाद उनके परिजनों ने अमित सहगल और अन्य के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अमित सहगल व मुंबई निवासी पार्थोशील नामक व्यक्ति को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया। पुलिस ने इन दोनों से लंबी पूछताछ की। इसके बाद इन दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को बीएनएस की धारा 103, 304, 333, व 352 के गिरफ्तार किया गया है। दोनों पर पंकज मिश्रा के घर में घुसकर उनके साथ मारपीट करने, गाली गलौज करने, पंकज मिश्रा और उनकी पत्नी के मोबाइल फोन छीनने के साथ जान से मारने की नीयत से मारपीट करने के आरोप लगे हैं।

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पुलिस ने दोबारा कराया पोस्टमार्टम

पंकज मिश्रा की मौत के बाद पुलिस ने मंगलवार को उनका पोस्टमार्टम कराया था। पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद पंकज मिश्रा का बिसरा सुरक्षित रख लिया गया। हालांकि बाद में पत्रकार पंकज मिश्रा के परिजनों ने अंदरूनी चोटों से मौत और सोची समझी साजिश का हवाला देते हुए पुलिस से दोबारा पोस्टमार्टम कराने का अनुरोध किया। इसके बाद पुलिस ने परिजनों के अनुरोध को मानते हुए दोबारा पोस्टमार्टम कराया। डाक्टरों के पैनल ने दोबारा पोस्टमार्टम किया है। इसकी रिपोर्ट आनी बाकी है।

घर में गिरे पड़े मिले थे पंकज मिश्रा

16 दिसंबर को सुबह पुलिस को सूचना मिली थी कि पंकज मिश्रा अपने घर में फर्श पर गिरे पड़े हैं। सूचना पर पहुंची पुलिस ने पंकज मिश्रा को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया था जहां डाक्टरों ने उन्हे मृत घोषित कर दिया था। वहीं लखनऊ से आए पंकज मिश्रा के परिजनों ने उनकी हत्या किए जाने की आशंका व्यक्ति की। वहीं पुलिस ने इस मामले में अब साइबर सेल के साथ ही एसओजी को भी एक्टिवेट कर दिया है।

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Dehradun breaking news : वरिष्ठ पत्रकार पंकज मिश्रा की संदिग्ध हालात में मौत, दर्ज हुई FIR, इन पर लगा आरोप, फेसबुक पर पोस्ट से उलझी मौत की गुत्थी

देहरादून में वरिष्ठ पत्रकार पंकज मिश्रा की संदिग्ध हालात में मौत हो गई है। वो अपने घर के बाथरूम में गिरे हुए मिले। परिजनों ने उन्हे अस्पताल पहुंचाया जहां डाक्टरों ने उन्हे मृत घोषित कर दिया। इस मामले में पंकज मिश्रा के परिजनों ने FIR दर्ज कराई है। पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही है। पंकज मिश्रा मुख्यमंत्री धामी के करीबी बताए जाते थे।

घर के बाथरूम में गिरे मिले, अस्पताल में मृत घोषित

वरिष्ठ पत्रकार पंकज मिश्रा देहरादून के जाखन स्थित एक घर में किराए पर रहते थे। मंगलवार की अल सुबह पंकज मिश्रा अपने घर के ही बाथरूम में गिर गए। बताया जा रहा है कि उनकी पत्नी ने उन्हे अन्य लोगों की मदद से कुछ देर बाद अस्पताल पहुंचाया जहां डाक्टरों ने उन्हे मृत घोषित कर दिया।

पंकज मिश्रा के साथ हुई थी मारपीट

इस पूरे मामले में पंकज मिश्रा के परिजनों ने पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई है। परिजनों के मुताबिक पंकज मिश्रा की सोमवार की रात घर पर ही अमित सहगल नाम का एक व्यक्ति कुछ अन्य लोगों के साथ पंकज के घर पहुंचा था और उनसे मारपीट की थी। आरोप हैं कि पंकज के सीने और पेट पर लात घूंसे मारे गए। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि मारपीट के बाद आरोपियों ने न सिर्फ पंकज मिश्रा का मोबाइल छीन लिया बल्कि पुलिस को सूचना देने की कोशिश कर रहीं पंकज की पत्नी लक्ष्मी का मोबाइल भी छीन लिया और वहां से लौट गए। इसके कुछ देर बाद ही पंकज अपने घर के बाथरूम में दर्द से कराहते हुए गिर पड़े।

फेसबुक पर पोस्ट और मौत की गुत्थी

बताते हैं कि पंकज मिश्रा ने अपने फेसबुक वॉल पर कुछ दिनों पहले ही एक पोस्ट डाली थी जिसमें उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और कुछ अन्य लोगों को लेकर आपत्तिजनक बातें लिखीं थी। हालांकि ये पोस्ट बाद में उन्होंने डिलीट कर दी और इसके लिए फेसबुक पर ही माफी भी मांग ली। पंकज मिश्रा ने अपनी माफी वाली पोस्ट में इस बात कि जिक्र किया वो ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर के मरीज और रोज शराब पीते हैं। इसी शराब के नशे में कुछ लोगों ने उनसे ये पोस्ट डलवा दी। पंकज मिश्रा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि वो जल्द ही इस बात का खुलासा करेंगे कि वो कौन लोग हैं। पंकज मिश्रा ने लिखा कि ‘ मैं रोज ड्रिक करता हूं और शूगर, ब्लड प्रेशर ज्यादा बढा हुआ था और उसी का फायदा कुछ हमारे राजनीतिक मित्रों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित मेरे मित्रों और शहर के एसएसपी अजय सिंह सहित मेरे पत्रकार मित्रों के नाम के साथ राजनीतिक षडयंत्र के तहत मुझे शराब पिलाकर मेरे फोन से और मेरी फेसबुक से कई सम्मानित नेताओं और अधिकारियों के विरूद्ध अपशब्द और गलत तरीके से लिखा गया जिसके लिए मैं अपराध बोध और शर्मिदगी के साथ सबसे क्षमा मांगता हूं जिसमें हमारे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी हैं जो मेरे लिए सर्वोपरि है मेरी एक कमजोरी का कारण का फायदा उठाते हुए कुछ राजनीतिक विरोधी चरित्र के लोगों ने मेरा प्रयोग किया और मेरा सम्मान गिराया और अपना फायदा उठाया जल्द ही इस बात का खुलासा भी करूंगा मैं सभी मित्रों और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ जिन लोगों को मेरी इस अनजाने में की गयी गलती से उनके सम्मान को ठेस पहुंची है सबसे क्षमा मांगता हूं, मैं मुख्यमंत्री के बारे में कोई गलत बात कभी नहीं बोल सकता यह सब जानते हैं पर जो राजनीतिक षडयंत्र के तहत मेरे नशे का फायदा उठाकर अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं उनके बारे में जल्द ही खुलासा करूंगा एक बार पुनः सबसे क्षमा चाहता हूंं, क्योंकि मेरे सम्मान को भी ठेस पहुंची है और यह मेरा न स्वभाव है न किसी के प्रति दुर्भावाना!’

इसके बाद पंकज मिश्रा ने एक और पोस्ट लिखी जो उनकी मौत की गुत्थी को और उलझाती है। पंकज मिश्रा ने लिखा कि, कल न हम होंगे न कोई गिला होगा, सिर्फ सिमटी हुई यादों का सिलसिला होगा। जो लम्हे हैं चलो हंस कर बिता ले, जाने कल जिंदगी का क्या फैसला होगा।

पंकज मिश्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई, विसरा सुरक्षित

वहीं पंकज मिश्रा की मौत के बाद उनका पोस्टमार्टम कराया गया है। हालांकि पोस्टमार्टम में कोई प्रथम दृश्टया मौत की वजह सामने नहीं आई है। ऐसे में पंकज मिश्रा का विसरा सुरक्षित रखा गया है । विसरा जांच के बाद ही मौत की वजह सामने आ सकती है।

Bondi Beach Attack: निहत्थे होकर आतंकी को दबाच लिया! जानिये कौन हैं अहमद-अल-अहमद?

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Bondi Beach Attack: सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) के Bondi Beach पर आतंकी हमले से ऑस्ट्रेलिया के नागरिक सदमें में आ गए। इस हमले में अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है। लेकिन इस बीच सोशल मीडिया के अक वीडियो के माध्यम से उस शख्स की तस्वीर भी सामने आई जिसने अपनी जान जोखिम में डालकर अक भीषण नरसंहार होने से बचा लिया। इस शख्स की बहादुरी की चर्चा अब दुनियाभर में हो रही है। आइए आपको बताते हैं कि आख़िर कौन है ये Bondi Beach का हीरो! और असल ज़िंदगी में ये क्या करता है?

Bondi Beach Attack: अहमद अल अहमद ने बचाई कई जानें

सिडनी केBondi Beach पर हनुका उत्सव के दौरान हुए भीषण आतंकी हमले ने ऑस्ट्रेलिया को झकझोर कर रख दिया है। इस जानलेवा गोलीबारी में 15 निर्दोष लोगों की मौत की पुष्टि की गई है, जबकि जवाबी कार्रवाई में एक हमलावर भी मारा गया। इस दुखद घटना के बीच, एक आम नागरिक अहमद अल अहमद ने असाधारण साहस का परिचय देते हुए कई जिंदगियां बचाईं और ‘बोंडी बीच के हीरो’ के रूप में उभरे हैं।

आतंकियों की हुई पहचान

न्यू साउथ वेल्स पुलिस ने पुष्टि की है कि इस जानलेवा गोलीबारी के पीछे दो हमलावर शामिल थे। दोनों आतंकियों की पहचान एक पिता और बेटे के रूप में की गई है, जिनकी उम्र क्रमशः 50 और 24 साल है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि हमले में कोई तीसरा हमलावर शामिल नहीं था। अब यह पता चल रहा है कि ये दोनों आतंकी पाकिस्तान के रहने वाले थे।

हमले के दौरान सुरक्षा बलों की त्वरित कार्रवाई से एक आतंकी मारा गया, जबकि दूसरे आतंकी की स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

अहमद अल अहमद: जब जान जोखिम में डालकर छीनी बंदूक, देखिये वीडियो

भीषण गोलीबारी के बीच, 43 वर्षीय अहमद अल अहमद ने अपनी जान की परवाह न करते हुए बहादुरी का एक अविश्वसनीय कार्य किया।

  • साहसिक कार्य: सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में देखा गया कि काले कपड़े पहने एक बंदूकधारी आतंकी भीड़ पर राइफल ताने हुए था। तभी अहमद अल अहमद ने पीछे से हमलावर पर झपटते हुए उसकी राइफल छीन ली
  • परिणाम: बंदूक छीनने के बाद, अहमद ने वह राइफल हमलावर की ओर तान दी, जिससे वह आतंकी पीछे हटने पर मजबूर हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अहमद ने यह साहसिक कदम नहीं उठाया होता, तो मरने वालों का आंकड़ा और भी अधिक बढ़ सकता था।

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अहमद को भी लगी गोलियां, अब ऐसी है हालत

Bondi Beach पर इस साहसी प्रयास के दौरान अहमद को भी दो गोलियां लगीं और उन्हें तुरंत सेंट जॉर्ज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

  • पृष्ठभूमि: स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अहमद अल अहमद सिडनी के सदरलैंड शायर के रहने वाले हैं और वे दो बच्चों के पिता हैं। उनका पेशा फल बेचने का है।
  • परिवार का बयान: अहमद के चचेरे भाई, जिनकी पहचान मुस्तफा के रूप में हुई है, ने हॉस्पिटल के बाहर मीडिया को बताया, “वह 100 परसेंट हीरो हैं। हमें उम्मीद है कि वह ठीक हो जाएंगे।”

प्रधानमंत्री और मीडिया ने की प्रशंसा

अहमद अल अहमद की बहादुरी को दुनियाभर में सराहा जा रहा है।

  • मीडिया की प्रतिक्रिया: सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड ने अहमद को “एक हीरो जिसने कई जानें बचाईं” कहकर सम्मानित किया है।
  • प्रधानमंत्री का बयान: ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी उन ऑस्ट्रेलियाई लोगों के कार्यों की तारीफ की, जिन्होंने “दूसरों की मदद करने के लिए खतरे की तरफ दौड़ लगाई”। उन्होंने कहा, “ये ऑस्ट्रेलियाई हीरो हैं और उनकी बहादुरी ने कई जानें बचाई हैं।”

Bondi Beach पर अहमद के असाधारण साहस और निस्वार्थता ने सिडनी के लोगों को एक नई उम्मीद दी है, जो उन्हें इस त्रासदी से उबरने में मदद करेगी। पूरा देश उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहा है।

कौन हैं नितिन नवीन जिन्हे बीजेपी ने बनाया राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, बिहार की राजनीति से कैसे है नाता ?

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भारतीय जनता पार्टी ने नितिन नवीन (Nitin Nabin) को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की घोषणा की है। रविवार को इस बात की घोषणा की गई। माना जा रहा है कि जल्द ही नितिन नवीन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की जगह लेंगे और पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को संभालेंगे।

कौन हैं नितिन नवीन, जिन्हे बीजेपी ने सौंपी कमान

बीजेपी के नए कार्यकारी अध्यक्ष बने नितिन नवीन बिहार से आते हैं और फिलहाल बिहार सरकार में मंत्री हैं। बीजेपी के अब तक सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्षों में से एक नितिन नबीन पटना के बांकीपुर सीट से पांच बार से विधानसभा चुनाव जीत कर आते रहे हैं। नितिन नवीन को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा भाजपा के कद्दावर नेता हुआ करते थे। कायस्थ समाज से आने वाले नितिन नवीन मौजूदा बिहार सरकार में अकेले कायस्थ समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले मंत्री हैं।

जल्द बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे नितिन नवीन !

माना जा रहा है कि नितिन नवीन जल्द ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर पद संभाल लेंगे। आमतौर पर बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष ही बीजेपी के पूर्णकालिक अध्यक्ष पद को संभालते रहे हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी इस परंपरा को बनाए रखेगी और जल्द ही नितिन नवीन को बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर कमान सौंप सकती है।

पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं

नितिन नवीन को बीजेपी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर पीएम मोदी ने उन्हें बधाई दी है. पीएम मोदी ने लिखा- नितिन नवीन ने एक कर्मठ कार्यकर्ता के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। वे एक युवा और परिश्रमी नेता हैं, जिनके पास संगठन का अच्छा-खासा अनुभव है। बिहार में विधायक और मंत्री के रूप में उनका कार्य बहुत प्रभावी रहा है, साथ ही जनआकांक्षाओं को पूरा करने के लिए उन्होंने पूरे समर्पण भाव से काम किया है। वे अपने विनम्र स्वभाव के साथ जमीन पर काम करने के लिए जाने जाते हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि उनकी ऊर्जा और प्रतिबद्धता आने वाले समय में हमारी पार्टी को और अधिक सशक्त बनाएगी. भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष बनने पर उन्हें हार्दिक बधाई।

UPSC Recruitment 2025 : यूपीएसी ने निकाली बंपर भर्तियां, यहां देखिए पूरी जानकारी, लॉस्ट डेट भी

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यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन ने  एग्जामिनर ऑफ ट्रेडमार्क एंड ज्योग्राफिकल ज्योग्राफिकल इंडिकेशन और डिप्टी एग्जामिनर (एग्जाम रिफॉर्म) पदों पर भर्ती (UPSC Recruitment 2025) निकाली है। जिसके लिए आवेदन प्रक्रिया 13 दिसंबर से शुरू हो चुकी है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार ऑनलाइन ऑफिशियल वेबसाइट http://upsconline.nic.in पर जाकर फॉर्म भर सकते हैं। अंतिम तिथि 1 जनवरी 2026 है। कैंडिडेट्स को ऑनलाइन एप्लीकेशन पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा। जिसके बाद यूनिवर्सल रजिस्ट्रेशन नंबर जनरेट होगा। एप्लीकेशन फीस केवल 25 रुपये है।  महिला/एससी/एसटी/पीडब्ल्यूडी उम्मीदवारों को शुल्क भुगतान से छूट प्रदान की गई है।

रिक्त पदों की संख्या कुल 102 है। जिसमें से 100 पद एग्जामिनर ऑफ ट्रेड मार्क्स एंड ज्योग्राफिकल इंडिकेशन के लिए खाली हैं। जनरल के लिए 48, ईडब्ल्यूएस के लिए 9, ओबीसी के लिए 20, एससी के लिए 17, एसटी के लिए 6 और पीडब्ल्यूडी कैंडिडेट्स के लिए 8 पद रिजर्व किए गए हैं। वहीं डिप्टी डायरेक्टर के लिए दो वैकेंसी है। जिसमें से ओबीसी के लिए एक और ऐसी के लिए एक पद रिजर्व्ड हैं।

कौन भर सकता है फॉर्म?

दोनों पदों के लिए योग्यता अलग-अलग निर्धारित की गई है। एग्जामिनर पदों के लिए उम्मीदवारों के पास मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से लॉ में डिग्री होनी चाहिए। इसके अलावा कोर्ट/कानूनी मामलों को संभालने में 2 वर्ष का अनुभव होना भी जरूरी है। प्रोबेशन पीरियड 2 वर्ष का होगा। यह पोस्ट परमानेंट है। निर्धारित आयु सीमा अधिकतम 30 वर्ष है। ओबीसी को 3 वर्ष, एसटी/एससी को 5 वर्ष और पीडब्ल्यूडी उम्मीदवारों को 10 वर्ष की छूट दी जाएगी। सातवें सीपीसी के पे मैट्रिक्स लेवल 7 के तहत वेतन मिलेगा।

डिप्टी डायरेक्टर एग्जामिनेशन रिफॉर्म्स पद पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों के पास ह्यूमैनिटीज/ साइंस/कॉमर्स /इंजीनियरिंग या टेक्नोलॉजी और किसी भी प्रोफेशनल कोर्स जैसे कि लॉ या मैनेजमेंट या फाइनेंस या अकाउंट में निर्धारित आयु सीमा ओबीसी कैंडीडेट्सपीएचडी की डिग्री होनी चाहिए। इसके अलावा संबंधित क्षेत्र में 5 साल का अनुभव भी होगा। कंप्यूटर एप्लीकेशन में 1 वर्षीय डिप्लोमा भी होना चाहिए। ओबीसी के लिए निर्धारित आयु सीमा 43 वर्ष और एससी/एसटी के लिए 45 वर्ष है।

ऐसे करें आवेदन 

  1. सबसे पहले यूपीएससी ऑनलाइन एप्लिकेशन वेबसाइट पर जाएं।
  2. होमपेज पर यूनिवर्सल रजिस्ट्रेशन के लिंक पर क्लिक करें।
  3. जरूरी दिशा निर्देशों को पढ़ने के बाद पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करें।
  4. अकाउंट क्रिएट होने के बाद लॉगिन करें।
  5. शुल्क का भुगतान करें और आवेदन पत्र जमा करें।
  6. भविष्य के संदर्भ में कंफर्मेशन पेज को डाउनलोड जरूर कर लें।
  7. किसी भी प्रकार की समस्या के लिए हेल्प डेस्क का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए केवल 011-2404-1008 पर कॉल करना होगा।
  8. यह सुविधा सुबह 10:00 बजे से लेकर 5:30 बजे तक उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा upscsoap@nic.in पर ईमेल भी भेजा जा सकता है।

उत्तराखंड से बड़ी खबर। अचानक सभी जिलाधिकारियों को भेजा गया पत्र, सीएम धामी ने दे दिया ये निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रदेश में 17 दिसम्बर 2025 से 45 दिनों तक ‘‘जन जन की सरकार-जन जन के द्वार’’ अभियान संचालित किया जायेगा। इस अभियान के दौरान विभिन्न न्याय पंचायतों एवं ग्राम पंचायतों में कैंम्प लगाकर आम आदमी से जुडी योजनाओं का लाभ जन सामान्य तक उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित किया जायेगा। इस अभियान में राजस्व, ग्राम्य विकास, पंचायती राज, कृषि, समाज कल्याण सहित 23 विभाग शामिल रहेंगे। इस संबंध में सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट दिशा-निर्देश भी जारी किये गए हैं।

सभी जिलाधिकारियों को भेजा गया पत्र

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुपालन में सचिव सामान्य प्रशासन विनोद कुमार सुमन ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को प्रेषित पत्र में प्रदेश में केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार की योेजनाओं का व्यापक प्रचार प्रसार किये जाने एवं जरूरतमंदों लोगों को विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रदान किये जाने के निर्देश दिये गये है। उन्होंने बताया दिनांक 17 दिसम्बर, 2025 से आगामी 45 दिनों तक प्रदेश में ‘‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’’ अभियान के अन्तर्गत विभिन्न न्याय पंचायतों में कैम्प लगाये जाने तथा न्याय पंचायतों/ग्राम पंचायतों में विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रदान किये जाने हेतु ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण करते हुए जन सामान्य से आवेदन पत्र प्राप्त करते हुए उस पर कार्यवाही की जायेगी।

अधिकारियों को गांवों में करना होगा भ्रमण

विनोद सुमन ने बताया यह कार्यक्रम न्याय पंचायत के स्तर पर संचालित किया जायेगा तथा वहां पर बहुउद्देशीय शिविर/कैम्प का आयोजन किया जायेगा, यदि कोई न्याय पंचायत बहुत बड़ी हो तो उस न्याय पंचायत में दो भागों में गांव को विभक्त करते हुए कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा।

उन्होंने बताया इस अभियान के दौरान बहुउद्देशीय शिविर/कैम्प में उपस्थित लोगों को केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा संचालित की जा रही विभिन्न प्रकार की योजनाओं की जानकारी प्रदान की जायेगी तथा कैम्प में उपस्थित पात्र व्यक्तियों को विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित किया जायेगा। उन्होंने बताया कैम्प के उपरान्त निकट के किसी गांव में सभी अधिकारियों द्वारा भ्रमण किया जायेगा तथा उस गांव के सभी पात्र व्यक्तियों को केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार की योजनाओं से लाभान्वित किये जाने हेतु आवेदन पत्र भराये जायेंगे। उस ग्राम पंचायत के सभी निवासीगण केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार की सभी प्रकार की योजनाओं से पूरी तरह से लाभान्वित हो सके तथा कोई भी पात्र व्यक्ति योजना के लाभ से वंचित न रह सके, इस पर विशेष ध्यान दिया जायेगा।

जनता को मिले राहत, कैंप लगे जरूर

इस संबंध में उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिये है कि कैम्प लगाये जाने से पूर्व मीडिया के माध्यम से इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाने, जनपद में अधिकारियों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक सप्ताह में कम से कम 02 से 03 कार्य दिवसों में प्रत्येक तहसील की न्याय पंचायतों में यह कैम्प लगाया जाना सुनिश्चित किया जाय। प्रयास किया जाय कि प्रत्येक सप्ताह जनपद में जितनी तहसील है उनकी कम से कम एक-एक न्याय पंचायतों में यह आयोजन किया जायें। यह कार्यक्रम न्यूनतम 45 दिन तक अनिवार्य रूप से सभी न्याय पंचायतों में चलाया जाना है। यदि इस अभियान के दौरान सभी न्याय पंचायतें आच्छादित नहीं हो पाते है तो कार्यकम को तद्नुसार जनपद द्वारा आवश्यकतानुसार इसे आगे भी विस्तारित किया जा सकता है।

उन्होंने निर्देश दिये है कि ग्राम स्तर पर केन्द्र सरकार/राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के लाभ से संबंधित क्षेत्र/ग्राम पंचायत में कौन-कौन से लोग वंचित है, इसका पूर्व से ही विभिन्न विभागों के माध्यम से सर्वेक्षण करा लिया जाय तथा भ्रमण के दौरान इन कमियों को दूर किये जाने की कार्यवाही की जाय तथा सभी सम्बन्धित से आवेदन पत्र भराये जाएं।

DM भी रहेंगे मौजूद, मौके पर हो समाधान

पत्र के माध्यम से उन्होंने कहा है कि प्रत्येक सप्ताह आयोजित होने वाले किसी एक कैम्प में अनिवार्य रूप से जिलाधिकारी स्वयं उपस्थित रहें। अन्य कैम्पों कमशः मुख्य विकास अधिकारी अथवा अपर जिलाधिकारी अथवा उपजिलाधिकारी अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें। आयोजित होने वाले कैम्पों में नामित विभागों के अधिकारीगण कैम्पों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहे तथा कैम्प के दौरान यह प्रयास किया जाय कि आम जन मानस की समस्याओं का मौके पर ही समाधान सम्भव हो सके।

उन्होंने बताया कि कैम्प लगाये जाने के दो से तीन दिन पूर्व सभी प्रकार के आवेदन पत्र ग्राम स्तर पर उपलब्ध रहें, ताकि आवेदन पत्र भरे जाने में किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। उन्होंने जनपद स्तर पर न्याय पंचायतों में लगाये जाने वाले कैम्पों की रूप-रेखा/कार्य योजना एक सप्ताह में तैयार करते हुए शासन को उपलब्ध कराये जाने के निर्देश दिये है ताकि शासन स्तर के अधिकारियों द्वारा संचालित कैम्पों का औचक निरीक्षण किया जा सकें।

उन्हांेने कहा कि प्रत्येक कार्यक्रम के उपरान्त कार्यक्रम की सफलता/किये गये कार्यों का विवरण मीडिया को साझा किया जाय तथा प्रत्येक सप्ताह आयोजित होने वाले कार्यकमों की प्रगति आख्या अनिवार्य रूप से मा० मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव कार्यालय तथा सामान्य प्रशासन विभाग को उपलब्ध कराया जाए।

PRSI 47th Conference : बोले CM Dhami ‘संवाद औपचारिकता नहीं, विश्वास की नींव है’; DG Information बंशीधर तिवारी सम्मानित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को होटल एमरॉल्ड ग्रैण्ड, सहस्त्रधारा रोड, देहरादून में आयोजित 47वीं ऑल इंडिया पब्लिक रिलेशन कॉन्फ्रेंस–2025 में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्वलन कर सम्मेलन का शुभारंभ किया तथा कॉन्फ्रेंस स्थल पर आयोजित फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन करने के साथ ही विभिन्न हस्तशिल्प उत्पादों के स्टॉल का निरीक्षण कर स्थानीय कला एवं शिल्प को प्रोत्साहन दिया।

देहरादून में आयोजित हो रही है नेशनल कॉन्फ्रेंस

देहरादून 13 से 15 दिसंबर तक 47वीं ऑल इंडिया पब्लिक रिलेशंस कॉन्फ्रेंस की मेज़बानी कर रहा है, जिसमें देशभर के जनसंपर्क एवं कम्युनिकेशन प्रोफेशनल्स भाग ले रहे हैं। पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया (PRSI) द्वारा आयोजित यह सम्मेलन “विकसित भारत @2047: विकास भी, विरासत भी” थीम पर केंद्रित है।

सम्मेलन का उद्घाटन आज 13 दिसंबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया। तीन दिवसीय आयोजन में उत्तराखंड की 25 वर्ष की विकास यात्रा, मीडिया व जनसंपर्क की भूमिका, तकनीक, GST, AI, साइबर क्राइम, मिसइन्फॉर्मेशन और अंतरराष्ट्रीय जनसंपर्क जैसे विषयों पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित होंगे। रूस से आए प्रतिनिधियों की सहभागिता सम्मेलन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देगी। 15 दिसंबर को सम्मेलन का समापन होगा।

PR अत्यंत प्रासंगिक, राष्ट्र निर्माण का प्रभावी अंग भी – सीएम धामी

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने देशभर से आए जनसंपर्क विशेषज्ञों, प्रतिनिधियों एवं युवा प्रतिभाओं का स्वागत करते हुए कहा कि इस वर्ष की थीम “पीआर विजन फॉर–2047” विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि आज के समय में पब्लिक रिलेशन केवल सूचना संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण और प्रभावी अंग बन चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में, जहाँ एक ओर सूचना की प्रचुरता है, वहीं दूसरी ओर गलत सूचना की चुनौती भी गंभीर है। ऐसे में सरकार और जनता के बीच सही, समयबद्ध और भरोसेमंद संवाद स्थापित करना जनसंपर्क की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे प्राकृतिक आपदाओं एवं सामरिक दृष्टि से संवेदनशील राज्य में संवाद केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि विश्वास की बुनियाद है।

स्थापित हो साझेदारी और विश्वास का संबंध

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन, सुशासन, धार्मिक एवं पर्यटन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भविष्य की पीआर प्रणाली को तेज, तकनीकी रूप से सक्षम और जनभावनाओं के प्रति संवेदनशील बनाना होगा, ताकि सरकार और जनता के बीच आदेश का नहीं बल्कि साझेदारी और विश्वास का संबंध स्थापित हो सके।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पब्लिक रिलेशन संकट के समय एक सक्षम कमांड सेंटर की भूमिका निभाने के साथ-साथ, देश के लिए सकारात्मक नैरेटिव गढ़ने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड से निकला यह विजन विकसित भारत–2047 के निर्माण में सहायक सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में राज्य की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने बताया कि राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार वर्ष 2024–25 में लगभग 3.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचने जा रहा है तथा प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही राज्य में बजट में अभूतपूर्व बढ़ोतरी और बेरोजगारी दर में ऐतिहासिक कमी आई है।

उत्तराखंड को वैश्विक पहचान दिलाने की कोशिश

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, खेल, पेयजल, हवाई एवं रेल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में आधुनिक अवसंरचना का विकास तेज़ी से किया जा रहा है। धार्मिक पर्यटन, वेलनेस, एडवेंचर टूरिज्म, फिल्म शूटिंग एवं वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में उत्तराखंड को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में भी सरकार निरंतर प्रयासरत है।

उन्होंने बताया कि ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना, दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेस-वे, रोपवे परियोजनाएं तथा हवाई अड्डों के विस्तार जैसे कार्य राज्य के विकास को नई गति दे रहे हैं। साथ ही शीतकालीन यात्रा की पहल के माध्यम से वर्षभर पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने निवेश, उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से प्राप्त निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने में राज्य को उल्लेखनीय सफलता मिली है। सिंगल विंडो सिस्टम, नई औद्योगिक एवं स्टार्टअप नीतियों से उत्तराखंड निवेश के लिए एक उभरता हुआ केंद्र बनकर सामने आया है।

उन्होंने कहा कि “एक जनपद–दो उत्पाद”, हाउस ऑफ हिमालयाज, मिलेट मिशन, नई पर्यटन एवं फिल्म नीति जैसी योजनाएं स्थानीय आजीविका को मजबूती प्रदान कर रही हैं। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग्स में उत्तराखंड की उपलब्धियाँ राज्य के पारदर्शी, प्रभावी और जनभागीदारी आधारित शासन का प्रमाण हैं।

अन्य राज्यों के लिए बन रहे आदर्श

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों, जनसंख्या संतुलन और सामाजिक संरचना के संरक्षण के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की नीतियाँ और नवाचार आज देश के अन्य राज्यों के लिए आदर्श बन रहे हैं और विकसित भारत–2047 की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

देहरादून 13 से 15 दिसंबर तक 47वीं ऑल इंडिया पब्लिक रिलेशंस कॉन्फ्रेंस की मेज़बानी कर रहा है, जिसमें देशभर के जनसंपर्क एवं कम्युनिकेशन प्रोफेशनल्स भाग ले रहे हैं। पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया (PRSI) द्वारा आयोजित यह सम्मेलन “विकसित भारत @2047: विकास भी, विरासत भी” थीम पर केंद्रित है।

DG सूचना बंशीधर तिवारी को मिला सम्मान

इस अवसर पर अपर सचिव और सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी को पीआरएसआई द्वारा सुशासन में उत्कृष्टता हेतु राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया

कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, परमार्थ निकेतन से स्वामी चिदानंद मुनि, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, पीआरएसआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत पाठक, देहरादून चैप्टर के अध्यक्ष रवि बिजारनिया, रूसी प्रतिनिधि माइकल मस्लोव, सुश्री दाव्यदेंको यूलिया, सुश्री अन्ना तलानीना सहित देशभर से आए जनसंपर्क कार्मिक एवं कम्युनिकेशन प्रोफेशनल्स उपस्थित रहे।

Uttarakhand IPS Transfers : उत्तराखंड में आईपीएस अफसरों के तबादले, इस महिला अधिकारी को बनाया अपर सचिव गृह

उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर आईपीएस अफसरों के ट्रांसफर किए गए हैं। शासन ने अपर सचिव गृह के पद पर भी नए आईपीएस अफसर की तैनाती कर दी है। इसके साथ ही सीआईडी के आईजी के पद पर भी नए अफसर की तैनाती की है।

तृप्ति भट्ट को बनाया अपर सचिव गृह

उत्तराखंड में शासन ने शुक्रवार को 15 आईपीएस (Uttarakhand IPS Officers) की जिम्मेदारियों में फेरबदल कर दिया है। सचिव गृह शैलेश बगोली की ओर से जारी आदेश के मुताबिक अब आईपीएस तृप्ति भट्ट को अपर सचिव गृह और कारागार की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं आईजी कृष्ण कुमार वीके से सीआईडी की जिम्मेदारी लेकर तेज तर्रार अफसर माने जाने वाले आईजी अरुण मोहन जोशी को ये जिम्मेदारी सौंपी गई है।

वहीं पुलिस महानिरीक्षक विम्मी सचदेवा रमन से मुख्यालय का चार्ज हटाया गया है जबकि प्रोविजनिंग एवंड मॉर्डनाइजेशन बरकरार रखा गया है। पीएसी में तैनात आईपीएस नीरू गर्ग को अब आईजी फायर सर्विस की जिम्मेदारी दी गई है। पूरी लिस्ट नीचे देखिए –

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उत्तराखंड का वो पूर्व IPS जिसने व्यापारी को नंगा कर पीटा, नौकरी छोड़ने के बाद दोषी करार, कैसे होगी कार्रवाई ?

यूं तो उत्तराखंड पुलिस अपने आप को मित्र पुलिस के तौर पर पेश करती है। उत्तराखंड पुलिस के तमाम अधिकारी अपने मातहतों को इसी ‘मित्र पुलिस’ वाली लाइन पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। लेकिन इसी उत्तराखंड में तैनात रहे एक पूर्व आईपीएस ने एक ऐसी हरकत कर दी है जिसने समूची खाकी को दागदार कर दिया है। पूरी पुलिस फोर्स पर उसने सवाल उठा दिए हैं।

लोकेश्वर सिंह ने ग्यारह साल दी अपनी सेवाएं

दरअसल ये दास्तान है उत्तराखंड में तैनात पूर्व आईपीएस लोकेश्वर (IPS Lokeshwar Singh) सिंह की। युवा आईपीएस लोकेश्वर सिंह उत्तराखंड के पुलिस महकमें में काफी चर्चित अफसरों में शुमार रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के रहने वाले लोकेश्वर सिंह ने बतौर आईपीएस उत्तराखंड में ग्यारह साल अपनी सेवाएं दीं। इस दौरान वो अलग अलग जिलों में पुलिस कप्तान के तौर पर नियुक्त रहे। उनके सख्त रवैए और सीधा सपाट व्यवहार हमेशा चर्चाओं में रहा। यहां तक विभाग में भी उनके कामकाज के तरीके की खूब चर्चाएं होती रहती थीं। पुलिस सेवा के ग्यारह साल पूरे करने के बाद लोकेश्वर सिंह ने अपने पद से इस्तीफा भेज दिया और संयुक्त राष्ट्र में सेवाएं देने चले गए।

व्यापारी को नंगा करके पीटा, अंग्रेजों जैसा अत्याचार !

लोकेश्वर सिंह यूं तो राज्य के कई जिलों में पुलिस कप्तान के तौर पर रहे लेकिन जिस जिले में उन पर दाग लगा वो है पिथौरागढ़। दरअसल ये वाक्या दो साल पुराना है। उस वक्त लोकेश्वर सिंह पिथौरागढ़ के एसपी हुआ करते थे। साल 2023 की छह फरवरी को लोकेश्वर सिंह के दफ्तर में एक स्थानीय आरटीआई कार्यकर्ता और कपड़ों के व्यापारी लक्ष्मी दत्त जोशी पुलिस लाइंस परिसर के बाहर फैली गंदगी के बारे में बात करने पहुंचते हैं। आरोप हैं कि एसपी साहब यानी लोकेश्वर सिंह को पुलिस लाइंस के बाहर गंदगी की शिकायत चुभ गई। ये शिकायत इतनी चुभी कि लोकेश्वर सिंह के भीतर अंग्रेजों के जमाने वाला ‘पुलिसवाला’ जाग गया। लोकेश्वर सिंह आरटीआई कार्यकर्ता लक्ष्मी दत्त को अपने दफ्तर के पास बने एक कमरे में लेकर जाते हैं। ये ऐसा कमरा था जिसमें कोई सीसीटीवी नहीं था और वो किसी अन्य सीसीटीवी कैमरे की जद में भी नहीं आ रहा था। लक्ष्मी दत्त के आरोपों के मुताबिक लोकेश्वर सिंह ने उसे उस कमरे में बुलाने के बाद उनके कपड़े उतरवा दिए। इसके बाद लोकेश्वर सिंह ने लक्ष्मी दत्त की जमकर पिटाई की। यही नहीं छह अन्य पुलिसकर्मियों पर भी पिटाई का आरोप लगा। पिटाई के बाद लक्ष्मी दत्त को ये बात बाहर कहीं न कहने के लिए भी कहा गया। ऐसा न करने पर झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी भी दी गई।

पिटाई नहीं तोड़ पाई हौसला, दर्ज कराई शिकायत

पिटाई से टूट चुके लक्ष्मी दत्त का साहस नहीं टूटा था। वो लोकेश्वर सिंह के इस अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए तैयार थे। लक्ष्मी दत्त तुरंत ही सरकारी अस्पताल पहुंच गए और अपना मेडिकल कराया। मेडिकल में चोटों की पुष्टि हुई। एक्स रे रिपोर्ट भी तैयार हुई। इसी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर लक्ष्मी दत्त ने पुलिस शिकायत प्राधिकरण में शिकायत दर्ज कराई।

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तीन एफिडेविट वो भी विरोधाभाषी, खुद कभी आए नहीं

पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने इस मसले पर सुनवाई शुरू की। सुनवाई के लिए लोकेश्वर सिंह को भी बुलावा भेजा गया लेकिन वो सशरीर वहां नहीं पहुंचे। बल्कि उन्होंने शपथ पत्र के साथ अपना बयान दर्ज करा दिया। लोकेश्वर सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया। दो साल तक चले इस केस में लोकेश्वर सिंह एक बार भी प्राधिकरण के सामने नहीं पहुंचे। इस दौरान उन्होंने तीन एफिडेविट दिए। प्राधिकरण की जांच में पता चला कि तीनों ही एफिडेविट अलग अलग  और एक दूसरे के विरोधाभासी थे। यहीं से लोकेश्वर सिंह पर शिकंजा कसने लगा। वो अपने ही जाल में फंसने लगे। यहां तक कि उनके समर्थन में दो स्थानीय जिन्हे पत्रकार बताया जा रहा है उनके शपथ पत्र भी प्राधिकरण की जांच में खरे नहीं उतरे। दोनों में ही एक जैसी भाषा मिली। इसे प्राधिकरण ने पकड़ लिया। लक्ष्मी दत्त ने प्राधिकरण से पहले इसकी शिकायत स्थानीय कोतवाली में भी की थी। प्राधिकरण ने कोतवाली और एसपी दफ्तर की सीसीटीवी फुटेज मांगी। कोतवाली से सीसीटीवी फुटेज मिल गई लेकिन एसपी दफ्तर से सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद प्राधिकरण ने अपना 12 पन्नों का फैसला जारी किया। इस फैसले में लोकेश्वर सिंह दोषी करार दिए गए।

कैसे होगी कार्रवाई, छोड़ चुके हैं नौकरी ?

इस केस की सुनावाई के बाद पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने लोकेश्वर सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। राज्य के गृह विभाग को इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं। हालांकि यहां एक बड़ा सवाल ये है कि ये कार्रवाई होगी कैसे क्योंकि लोकेश्वर सिंह तो पुलिस सेवा से इस्तीफा दे चुके हैं और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े एक संगठन में कार्य कर रहे हैं।

पिटाई के आरोपी अब शांति स्थापना के काम में लगे !

दरअसल 2014 बैच के आईपीएस लोकेश्वर सिंह ने हाल ही में पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध एक संगठन को ज्वाइन किया। इस संगठन में लोकेश्वर सिंह शांति स्थापना, संस्थागत अखंडता और सतत विकास जैसे ग्लोबल उद्देश्यों के लिए काम कर रहे हैं। सुनने में ये हैरानी भरा लग सकता है कि लेकिन सच यही है कि मानवाधिकार उल्लंघन का दोषी अफसर अब दुनिया में शांति स्थापना जैसे काम कर रहा है।

एक क्लिक पर लीजिए उत्तराखंड सरकार की योजनाओं की जानकारी, सीएम धामी ने लॉन्च किया ये पोर्टल

अब आपको उत्तराखंड सरकार की योजनाओं की जानकारी महज एक क्लिक पर मिल सकेगी। सीएम धामी ने मेरी योजना पोर्टल उत्तराखण्ड (myscheme.gov.in) का लोकार्पण कर दिया है।

सीएम धामी ने किया लोकार्पण, ‘मेरी योजना’ पुस्तक से मिलेगी जानकारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम में राज्य के कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग, उत्तराखण्ड द्वारा तैयार की गई ‘मेरी योजना’ पुस्तकों पर विचार गोष्ठी में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने मेरी योजना पोर्टल उत्तराखण्ड (myscheme.gov.in) का लोकार्पण भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस महत्वपूर्ण योजना मार्गदर्शिका पुस्तक के “मेरी योजना”, “मेरी योजना- राज्य सरकार” तथा “मेरी योजना – केंद्र सरकार” तीनों संस्करणों के माध्यम से राज्य का प्रत्येक नागरिक केंद्र और राज्य सरकार की सभी योजनाओं की संपूर्ण जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकता है और उनका लाभ उठा सकता है। जिस उद्देश्य से इन पुस्तकों का प्रकाशन कराया गया है, उस दिशा में हमारे प्रयास सार्थक सिद्ध हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य योजनाओं का धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन के साथ ही उसका लाभ राज्य के प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक समयबद्ध रूप से पहुंचाना है। ये पुस्तकें लाभार्थियों को योजनाओं की संपूर्ण जानकारी प्रदान करने के साथ – साथ आवेदकों को आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज व पात्रता संबंधी जानकारी भी प्रदान करती है।

पीएम मोदी ने स्थापित की नई कार्यशैली – सीएम धामी

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में एक नई कार्य संस्कृति की स्थापना करते हुए पारदर्शिता, जवाबदेही और जनकेंद्रित नीतियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। आज जनता से जुड़ी योजनाओं का लाभ डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचाया जाता है। राज्य सरकार भी सरलीकरण, समाधान, निस्तारीकरण और संतुष्टि के मंत्र के साथ जनता की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा दी जाने वाली विभिन्न पेंशन योजनाओं की धनराशि लोगों के खाते में डीबीटी के माध्यम से प्रत्येक पात्र व्यक्ति के खाते में आ जाए, इसकी व्यवस्था की गई है।

विकसित उत्तराखंड का सपना साकार करने की दिशा में काम जारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में विभिन्न वर्गों को ध्यान में रखकर बनाई गई योजनाएं प्रभावी ढंग से संचालित की जा रही है। जहां एक ओर राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, खेल, पेयजल और हवाई कनेक्टिविटी जैसे सभी प्रमुख क्षेत्रों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं, वहीं, ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी पहलों के माध्यम से विकसित भारत एवं विकसित उत्तराखंड बनाने के स्वप्न को साकार करने की दिशा में भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। सरकार राज्य में स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर कार्य कर रही है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश जारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में ‘एक जनपद, दो उत्पाद’ योजना के माध्यम से स्थानीय आजीविका के अवसर बढ़ रहे हैं। ’हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से हमारे पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिल रही है। ‘स्टेट मिलेट मिशन’, ‘फार्म मशीनरी बैंक’, ‘एप्पल मिशन’, ‘नई पर्यटन नीति’, ‘नई फिल्म नीति’, ‘होम स्टे’, ‘वेड इन उत्तराखंड’ और ‘सौर स्वरोजगार योजना’ जैसी पहल के माध्यम से प्रदेश की स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के कार्य किये जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने सभी से अपील की कि राज्य के स्थानीय उत्पादों और लोगों की आजीविका को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों में प्रदान किये जाने वाले स्मृति चिन्ह राज्य में निर्मित उत्पादों के ही हों। इस प्रकार के छोटे-छोटे प्रयासों से हमारे कारीगरों, मातृ शक्ति, हस्तशिल्पियों को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि वे जब भी किसी कार्यक्रम में जाते हैं या देशभर में महानुभावों से भेंट के दौरान भी उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पाद ही भेंट करते हैं।

अंत्योदय की भावना का उदाहरण

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि लोगों को सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से यह एक सराहनीय प्रयास है। एकीकृत पोर्टल के माध्यम से पात्र लोगों को सरकार की सभी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल पायेगा। यह अंत्योदय की भावना का बड़ा उदाहरण है।

सेवाओं को सरल तरीके से लाभार्थियों तक पहुंचाना मकसद

सचिव कार्यक्रम क्रियान्वयन दीपक कुमार ने कहा कि कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग का मुख्य उद्देश्य योजनाओं और सेवाओं का सरल तरीके से लाभार्थियों तक पहुंचाना है। मेरी योजना के तीन संस्करणों के माध्यम से राज्य और केन्द्र सरकार की योजनाओं को लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। योजनाओं के लिए पात्रता और प्रक्रिया पर विशेष फोकस किया गया है।