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SIR से ‘शुद्ध’ होगी वोटर लिस्ट! आज से शुरू हुई प्रक्रिया, 7 फरवरी 2026 तक का पूरा प्लान जानिए

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नई दिल्ली: बिहार में सफलतापूर्वक विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) का काम पूरा होने के बाद, चुनाव आयोग ने सोमवार को देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआइआर के दूसरे चरण की घोषणा की। यह महत्वपूर्ण कवायद मंगलवार, 28 अक्टूबर से शुरू हो गई है और अगले साल 7 फरवरी, 2026 तक चलेगी। इस कदम का उद्देश्य मतदाता सूची को ‘पूरी तरह से शुद्ध और पारदर्शी’ बनाना है।

SIR से 12 राज्यों में 51 करोड़ मतदाताओं की सूची होगी ‘शुद्ध’

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि इस चरण में उत्तर प्रदेश, बंगाल, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे बड़े राज्यों सहित कुल 12 क्षेत्र शामिल हैं, जिनकी मतदाता संख्या लगभग 51 करोड़ है।

  • सबसे अधिक मतदाता: अकेले उत्तर प्रदेश में 15.44 करोड़ मतदाता हैं।
  • अन्य प्रमुख राज्य: बंगाल (7.66 करोड़), तमिलनाडु (6.41 करोड़), मध्य प्रदेश (5.74 करोड़), राजस्थान (5.48 करोड़), और छत्तीसगढ़ (2.12 करोड़)।

SIR के दूसरे चरण में शामिल राज्य और केंद्र शासित प्रदेश

इस चरण में शामिल 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वे चार राज्य भी हैं, जहां 2026 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं:

  1. उत्तर प्रदेश
  2. बंगाल (2026 में चुनाव)
  3. मध्य प्रदेश
  4. छत्तीसगढ़
  5. तमिलनाडु (2026 में चुनाव)
  6. राजस्थान
  7. केरल (2026 में चुनाव)
  8. गुजरात
  9. गोवा
  10. पुडुचेरी (केंद्र शासित प्रदेश, 2026 में चुनाव)
  11. लक्षद्वीप (केंद्र शासित प्रदेश)
  12. अंडमान निकोबार (केंद्र शासित प्रदेश)

असम रहेगा बाहर: सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में चल रही नागरिकता जांच के कारण असम में एसआइआर बाद में कराने का फैसला लिया गया है।

SIR के दौरान मतदाता सूची में बदलाव पर तत्काल रोक

चुनाव आयोग ने घोषणा के साथ ही इन सभी 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की मतदाता सूची में तत्काल प्रभाव से किसी भी फेरबदल पर रोक लगा दी है। अब एसआइआर की प्रक्रिया पूरी होने तक न तो कोई नाम जोड़ा जा सकेगा और न ही हटाया जा सकेगा।

यह वीडियो देखें

मतदाताओं के लिए क्या है बदलाव?

बिहार के अनुभव के आधार पर, SIR की इस चरण में प्रक्रिया को और सरल बनाया गया है:

  • यूनिक फॉर्म: प्रत्येक मतदाता को एक यूनिक गणना फॉर्म दिया जाएगा, जिसमें पुराना पता और फोटो छपा होगा।
  • संशोधन का मौका: मतदाता निवास स्थान बदलने पर पते में संशोधन कर सकते हैं।
  • रंगीन फोटो पर ज़ोर: आयोग ने मतदाताओं से गणना फार्म में रंगीन फोटो लगाने का सुझाव दिया है, ताकि पहचान पत्रों में चेहरा साफ उभर सके।

मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) का कार्यक्रम (28 अक्टूबर 2025 से 7 फरवरी 2026)

यह विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) 1951 से 2004 के बीच आठवीं बार हो रहा है। इसका विस्तृत कार्यक्रम इस प्रकार है:

कार्यअवधि
गणना पत्रों की छपाई व बीएलओ को प्रशिक्षण28 अक्टूबर से 3 नवंबर तक
घर-घर जाकर पुनरीक्षण का काम4 नवंबर से 4 दिसंबर तक
मतदाता सूची के मसौदे का प्रकाशन9 दिसंबर
दावे और आपत्तियों का समय9 दिसंबर से 8 जनवरी 2026 तक
दस्तावेजों की जांच, सुनवाई, सत्यापन9 दिसंबर से 31 जनवरी 2026 तक
अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन7 फरवरी 2026

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SIR क्यों है ज़रूरी? आयोग ने बताई वजहें

मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में पारदर्शिता लाने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था। इसके मुख्य कारण हैं:

  1. बढ़ता शहरीकरण और विस्थापन: लोगों के तेजी से स्थान बदलने के कारण सूची में त्रुटियां आना।
  2. दोहरी प्रविष्टि: कई मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में दो-दो जगह दर्ज होना।
  3. मृतकों के नाम: मृत होने के बाद भी नाम न हटाया जाना।
  4. अवैध घुसपैठ: बड़ी संख्या में लोगों द्वारा गलत तरीके से नाम जुड़वाना।

एसआइआर के ज़रिए इन सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच और निवारण किया जाएगा।

‘सभी राज्य सरकारें सहयोग के लिए प्रतिबद्ध’

बंगाल में एसआइआर को लेकर राजनीतिक दलों की टिप्पणी पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि एसआइआर एक संवैधानिक प्रक्रिया है। संविधान के तहत, राज्य सरकारें चुनाव आयोग को हर तरह का सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि कानून-व्यवस्था राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी है और कोई असहयोग नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग का किसी भी राजनीतिक दल से कोई मनमुटाव नहीं है और बिहार में ज़मीनी स्तर पर दलों ने पूरा सहयोग किया था।

श्री कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेला: मुख्यमंत्री धामी ने किया 49वें मेले का शुभारम्भ, कई विकास योजनाओं की घोषणा

टिहरी गढ़वाल: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद टिहरी गढ़वाल पहुंचकर नौ दिवसीय 49वें श्री कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले का विधिवत ध्वजारोहण कर मेले के शुभारम्भ की घोषणा की। इस अवसर पर उन्होंने विकास प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, विभिन्न विभागों द्वारा स्थापित स्टालों का निरीक्षण किया तथा अमर शहीदों की मूर्तियों एवं स्वतंत्र संग्राम शहीद स्मारक पर माल्यार्पण भी किया।

मुख्यमंत्री ने की अनेक विकास परियोजनाओं की घोषणा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस दौरान क्षेत्र के विकास से संबंधित अनेक मांगों को मुख्यमंत्री घोषणाओं में सम्मिलित करने की बात कही। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • ढालवाला में अवशेष बाढ़-सुरक्षा कार्यों का निर्माण कार्य (लगभग 400 मीटर)।
  • कुम्भ मेला, 2027 के अन्तर्गत मुनिकीरेती में खारास्रोत गदेरे में सतह पार्किंग एवं एप्रोच रोड़ का निर्माण।
  • नरेन्द्रनगर में दैवीय आपदा से क्षतिग्रस्त नहरों का पुनर्निर्माण कार्य।
  • नगर पंचायत तपोवन में सामुदायिक भवन का निर्माण।
  • नरेन्द्रनगर में सब रजिस्ट्रार कार्यालय की स्थापना।
  • बाल्मिकी बस्ती में 6 आवासों का पुनर्निर्माण।
  • पावकी देवी (दोगी) में सामुदायिक भवन का निर्माण।
  • नरेन्द्रनगर कुम्हार खेड़ा में सामुदायिक भवन का विस्तार और सामुदायिक भवन तक मार्ग का पक्कीकरण।
  • नगर पालिका मुनि की रेती-ढालवाला में श्री पन्त की दुकान से चीनी गोदाम तक मार्ग का पुनर्निर्माण।
  • श्रीदेव सुमन उप जिला अस्पताल में एनेस्थिशिया वर्क मशीन (ऑटोमेटिक वैंटीलेटर) की स्वीकृति।
  • नरेंद्रनगर में एक ANM ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना।
  • भुवनेश्वरी देवी मंदिर हार्डीसेरा एवं पावली देवी मंदिर सौंदर्यीकरण के लिए उचित धनराशि की स्वीकृति।
  • गुल्लरबोगी में पार्किंग निर्माण।
  • ह्वेल नदी में मानसेरा, भगोड़ी, भैंतोला तोक में चेक डैम का निर्माण।

ऐतिहासिक मेले को बताया लोक आस्था का प्रतीक

सभी को मेले की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह ऐतिहासिक मेला लोक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 1974 से निरंतर आयोजित हो रहा यह मेला व्यापार, क्षेत्रीय विकास और पर्यटन को गति प्रदान करने वाला है। उन्होंने सनातन संस्कृति और जीवन मूल्यों को भारत की पहचान बताया।

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राज्य सरकार सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत और धरोहर को संवारने एवं सहेजने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने ज़ोर दिया कि राज्य सरकार भी उत्तराखंड के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध होकर धार्मिक स्थलों के संरक्षण एवं अपनी पहचान को बनाए रखने के लिए निरंतर काम कर रही है।

पलायन रोकने और अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने पर ज़ोर

पलायन को सबसे बड़ी समस्या बताते हुए मुख्यमंत्री ने इसे रोकने, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण योजनाओं पर कार्य किए जाने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ‘हाउस ऑफ हिमालय’ ब्रांड के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को देश-विदेश में व्यापक पहचान मिल रही है। फार्म मशीनरी बैंक, फिल्म नीति, एप्पल मिशन, होमस्टे आदि नीतियों के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने का कार्य किया जा रहा है।

उत्तराखंड को बताया देश का अग्रणी राज्य

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश में उत्तराखंड पहला राज्य है जिसने समान नागरिक संहिता कानून को लागू किया है। इसके साथ ही सशक्त नकल विरोधी कानून लाकर पिछले 4 सालों में 26 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शिता के साथ नियुक्तियां प्रदान की गई हैं। उन्होंने धर्मांतरण निवारण और अवैध अतिक्रमण ध्वस्तीकरण जैसे कार्यों का भी उल्लेख किया, जिससे राज्य को नया मुकाम और पहचान मिली है। उन्होंने राज्य सरकार की पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ उत्तराखंड को अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में अग्रसर होने की बात कही।

इस अवसर पर प्रदेश के वन, तकनीकी शिक्षा, भाषा एवं निर्वाचन एवं संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने भी मेले की सराहना की और इसे संस्कृति, परंपरा और विकास को आगे बढ़ाने वाला एक बड़ा मंच बताया।

भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग: CM Pushkar Singh Dhami ने शुरू किया सतर्कता अभियान

देहरादून: CM Pushkar Singh Dhami ने सोमवार को सचिवालय में “सतर्कता-हमारी साझा जिम्मेदारी” थीम पर आधारित जन जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ किया। यह अभियान प्रदेशभर में राज्य स्थापना दिवस 09 नवम्बर 2025 तक चलाया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा भी दिलाई।

सरदार पटेल का स्मरण और “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना

CM Pushkar Singh Dhami ने इस अवसर पर “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को साकार करने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि पटेल जी ने अपना जीवन भारत की एकता, अखंडता और सशक्त राष्ट्र के निर्माण के लिए समर्पित कर दिया। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह जागरूकता कार्यक्रम सरदार पटेल के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है।

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भ्रष्टाचार मुक्त भारत: प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प को धरातल पर उतारने का कार्य

CM Pushkar Singh Dhami ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भ्रष्टाचार मुक्त भारत का केवल संकल्प ही नहीं लिया, बल्कि उसे धरातल पर उतारने का कार्य भी किया है। उनके नेतृत्व में देश में नई कार्य संस्कृति विकसित हुई है, जिससे शासन-प्रशासन को पारदर्शी, उत्तरदायी और जन-केंद्रित बनाया गया है।

उत्तराखंड सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति-CM Pushkar Singh Dhami

CM Pushkar Singh Dhami ने जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ संकल्पित होकर कार्य कर रही है।

  • सफलतापूर्वक कार्रवाई: राज्य गठन के बाद सतर्कता विभाग द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए 339 भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।
  • हालिया गिरफ्तारियां: पिछले तीन वर्षों में सतर्कता विभाग द्वारा 78 भ्रष्टाचारियों के साथ ही अन्य मामलों में 27 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।

भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने हेतु टोल फ्री नंबर 1064

मुख्यमंत्री ने राज्य में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और शासन व्यवस्था को पारदर्शी एवं उत्तरदायी बनाने के उद्देश्य से टोल फ्री नंबर 1064 के संचालन की जानकारी दी।

  • शिकायतें: बीते तीन वर्षों में इसके माध्यम से दस हजार के करीब शिकायतें दर्ज की गईं।
  • कार्यवाही: इन शिकायतों में 62 शिकायतों में ट्रैप और 4 शिकायतों में खुली जांच की कार्यवाही की गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, जो भी भ्रष्टाचार करेगा वह सलाखों के पीछे होगा। उन्होंने सभी विभागों से इस अभियान का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार करने को कहा।

सत्यनिष्ठा, ईमानदारी और अनुशासन की आवश्यकता

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि समाज और प्रशासन की मजबूती के लिए सभी कार्मिकों का अपने कार्यों में सत्यनिष्ठ, ईमानदार और अनुशासित होना आवश्यक है। उन्होंने CM Pushkar Singh Dhami के मार्गदर्शन में पिछले चार वर्षों में भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिए किए गए सराहनीय प्रयासों की प्रशंसा की।

इस अवसर पर डीजीपी दीपम सेठ, प्रमुख सचिव एल. फैनई, निदेशक सतर्कता वी. मुरूगेशन, सचिवगण तथा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

देवभूमि के 25 साल: कैबिनेट मंत्री Rekha Arya की अध्यक्षता में आधी आबादी की उपलब्धियों और चुनौतियों पर होगा मंथन

देहरादून, 27 अक्टूबर। कैबिनेट मंत्री Rekha Arya की अध्यक्षता में हल्द्वानी के गौलापार स्टेडियम में एक कार्यक्रम का महत्वपूर्ण आयोजन किया जाएगा। बता दें कि उत्तराखंड की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में, प्रदेश की महिलाओं की उपलब्धियों, चुनौतियों और विकसित भारत (2047) के निर्माण में उनकी भावी भूमिका पर मंथन करने के लिए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने सोमवार को यमुना कॉलोनी स्थित कैंप कार्यालय में विभागीय अधिकारियों के साथ इस रजत जयंती आयोजन की तैयारियों की समीक्षा की।

8 नवंबर को हल्द्वानी में होगा आयोजन

कैबिनेट मंत्री Rekha Arya ने बताया कि यह महत्वपूर्ण आयोजन 8 नवंबर को हल्द्वानी के गौलापार स्टेडियम में होगा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रदेशभर की महिलाओं को एक मंच प्रदान करना है, जहाँ वे अपने अनुभवों को साझा कर सकें और भविष्य की दिशा तय कर सकें।

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कार्यक्रम का स्वरूप और विजन डॉक्युमेंट

कार्यक्रम को दो प्रमुख हिस्सों में विभाजित किया गया है:

  1. प्रथम हिस्सा: इसमें टॉक शो, ग्रुप डिस्कशन और महिलाओं के लिए भविष्य के विजन पर गहन चर्चा होगी।
  2. द्वितीय हिस्सा: इसमें झौड़ा, सांस्कृतिक नृत्य और गायन जैसे पारंपरिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल होंगे, जो उत्तराखंड की लोक संस्कृति को दर्शाएंगे।

मंत्री Rekha Arya ने बताया कि आयोजन में शामिल होने वाली हजारों महिलाएं अपने-अपने पारंपरिक परिधान में सुसज्जित होकर आएंगी, जो कार्यक्रम को विशिष्ट पहचान देगा।

विजन डॉक्युमेंट और सम्मान

आयोजन के दौरान, विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट कार्य करने वाली महिलाओं के साथ विचार विमर्श कर एक विजन डॉक्युमेंट तैयार करने की योजना है। इस डॉक्युमेंट का लक्ष्य महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए भविष्य की रूपरेखा तैयार करना होगा। साथ ही, समाज में विशेष योगदान देने वाली महिलाओं को इस अवसर पर सम्मानित भी किया जाएगा।

कैबिनेट मंत्री Rekha Arya ने विभागीय अधिकारियों को आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। बैठक में महिला सशक्तिकरण विभाग के निदेशक बंसीलाल राणा, उपनिदेशक विक्रम सिंह, अनुसचिव प्रभा आर्या, मोहित चौधरी और नीतू फुलेरा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

Shreyas Iyer Admitted In ICU: Internal Bleeding के चलते सिडनी में ICU में भर्ती हुए श्रेयस अय्यर, जानिए कितनी गंभीर है चोट!

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Shreyas Iyer Admitted in ICU: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुई वनडे सीरीज़ के बाद, टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज़ श्रेयस अय्यर को लेकर एक बहुत ही चिंताजनक खबर सामने आई है। सिडनी में खेले गए आखिरी वनडे मैच के दौरान फील्डिंग करते हुए उन्हें जो चोट लगी थी, वह उम्मीद से कहीं ज़्यादा गंभीर निकली है।

Shreyas Iyer के कैच लेने के बाद क्या हुआ?

सिडनी वनडे में श्रेयस अय्यर ने एलेक्स कैरी का एक बेहतरीन डाइविंग कैच लिया था। कैच लेते समय वे ज़मीन पर बुरी तरह गिरे, जिससे उनकी बाईं पसली में चोट लग गई। दर्द के कारण Shreyas Iyer को तुरंत मैदान से बाहर ले जाना पड़ा।

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चोट क्यों है इतनी गंभीर?

जांच में पता चला है कि Shreyas Iyer की यह चोट महज़ पसली की चोट नहीं है। Shreyas Iyer को चोट वाली जगह पर अंदरूनी रक्तस्राव (Internal Bleeding) हो रहा है।

  • ICU में भर्ती हुए Shreyas Iyer: हालत की गंभीरता को देखते हुए, श्रेयस अय्यर को सिडनी के एक अस्पताल के आईसीयू (Intensive Care Unit) में भर्ती कराया गया है।
  • जानलेवा हो सकती थी चोट: रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों ने कहा है कि बीसीसीआई की मेडिकल टीम ने तुरंत अस्पताल पहुंचाकर सही कदम उठाया, क्योंकि यह चोट जानलेवा भी हो सकती थी।
  • प्लीहा में चोट: बीसीसीआई ने बाद में पुष्टि की कि स्कैन में उनकी प्लीहा (Spleen) में चोट (Laceration) पाई गई है। हालांकि, उनकी हालत अभी स्थिर है और इलाज चल रहा है।

मैदान पर वापसी में लगेगा समय

गंभीर चोट के कारण श्रेयस अय्यर को अब क्रिकेट से लंबे समय तक दूर रहना पड़ सकता है।

  • एक हफ्ता अस्पताल में: उन्हें कम से कम एक हफ़्ते तक सिडनी के अस्पताल में ही निगरानी में रहना होगा ताकि रक्तस्राव पूरी तरह बंद हो जाए।
  • अफ्रीका दौरे पर संशय: इस चोट के कारण 30 नवंबर से शुरू होने वाली साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज़ में उनके खेलने की संभावना बहुत कम हो गई है। अंदरूनी रक्तस्राव के चलते उनकी रिकवरी में पहले सोचे गए समय से ज़्यादा लग सकता है।

Shreyas Iyer का परिवार सिडनी रवाना

इस गंभीर स्थिति में, श्रेयस अय्यर के माता-पिता ने भी उनसे मिलने के लिए सिडनी जाने के लिए तत्काल वीजा (Urgent Visa) के लिए आवेदन किया है। बीसीसीआई लगातार अय्यर की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और उनके परिवार को नवीनतम जानकारी से अवगत करा रहा है। फिलहाल, टीम इंडिया और उनके फ़ैन्स उनके जल्दी ठीक होने की दुआ कर रहे हैं।

Uttarakhand: Traffic Plan देखकर निकलें नैनीताल घूमने, पूर्व राष्ट्रपति के दौरे के लिए 27 और 28 अक्टूबर को कई रास्ते बंद!

नैनीताल/हल्द्वानी Traffic Plan: उत्तराखंड के नैनीताल जनपद में महामहिम पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द के दो दिवसीय (27 और 28 अक्टूबर 2025) भ्रमण कार्यक्रम के मद्देनजर जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। इस दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत ‘जीरो जोन’ (Zero Zone) लागू रहेगा, जिसके चलते हल्द्वानी, काठगोदाम, भीमताल और नैनीताल के कई मुख्य मार्गों पर यातायात प्रतिबंधित और डायवर्ट रहेगा।

जनता और पर्यटकों की सुविधा के लिए पुलिस ने विस्तृत Traffic Plan जारी किया है, जिसका पालन करना सभी वाहन चालकों के लिए अनिवार्य होगा।

27 अक्टूबर 2025: आगमन और हल्द्वानी-नैनीताल रूट पर खास व्यवस्था

पूर्व राष्ट्रपति के आगमन के दिन, यानी 27 अक्टूबर को, सुबह 11:00 बजे से फ्लीट के गुजरने तक पूरे वीवीआईपी रूट पर भारी मालवाहक वाहनों (Heavy Goods Vehicles) का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा।

हल्द्वानी और मैदानी क्षेत्र में Traffic Plan डायवर्जन

  • लालकुआँ की ओर से आने वाले वाहन: वीवीआईपी फ्लीट के हल्द्वानी की ओर प्रस्थान करते समय इन्हें लालकुआँ ओवरब्रिज से पहले रोका जाएगा।
  • हल्द्वानी से नैनीताल का रास्ता: हल्द्वानी शहर से ज्योलीकोट (नैनीताल) जाने वाले सभी ट्रैफिक को भीमताल तिराहा, काठगोदाम से भीमताल की ओर डायवर्ट किया जाएगा।
  • गोलापुल और तीनपानी क्षेत्र: फ्लीट के मोतीनगर और तीनपानी तिराहा (डिबेर कट) पास करने के दौरान, हल्द्वानी से लालकुआँ जाने वाले वाहन पुराना तीनपानी तिराहा पर रोके जाएंगे, और गोलापुल व अन्य कटों पर मुख्य मार्ग पर ट्रैफिक रोका जाएगा।
  • पर्वतीय क्षेत्र के लिए डायवर्जन: हल्द्वानी से पर्वतीय क्षेत्र को जाने वाले सभी वाहन भीमताल तिराहा से डायवर्ट होकर भीमताल, खुटानी बैण्ड/रामगढ़ तिराहा (भवाली) से मुक्तेश्वर व रामगढ़ होते हुए आगे जाएंगे।

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पहाड़ी क्षेत्रों के लिए Traffic Plan का विशेष रूट

  • नैनीताल से हल्द्वानी का Traffic Plan: नैनीताल से हल्द्वानी आने वाले वाहनों को कालाढूंगी मार्ग से भेजा जाएगा (रूसी-2 से रूसी-1, कालाढूंगी रोड)।
  • अल्मोड़ा/रानीखेत/बागेश्वर से हल्द्वानी: इन स्थानों से आने वाले वाहन क्वारब से रामगढ़, मुक्तेश्वर से खुटानी होते हुए भीमताल से अपने गंतव्य को जा सकेंगे।
  • भवाली और कैंचीधाम: ज्योलीकोट नं. 1 बैंड से भवाली की ओर आने वाले वाहनों को नैनीताल होते हुए भेजा जाएगा। वीवीआईपी फ्लीट के ज्योलीकोट पहुंचने पर भवाली क्षेत्र का संपूर्ण वीवीआईपी रूट जीरो जोन कर दिया जाएगा।

नैनीताल और राजभवन के रास्ते पर Traffic Plan की सख्ती

वीवीआईपी फ्लीट के नैनीताल में प्रवेश करने पर विशेष सख्ती बरती जाएगी: देखिए Traffic Plan

  • रूसी-2/रूसी-1 डायवर्जन: कालाढूंगी रोड से नैनीताल की ओर आने वाले ट्रैफिक को रूसी-1 से रूसी-2 (हल्द्वानी रोड) की ओर भेजा जाएगा।
  • शहरी नैनीताल में ठहराव: जो वाहन रूसी-1 कालाढूंगी रोड से नैनीताल की ओर निकल चुके होंगे, उन्हें कुछ समय के लिए सूखाताल पार्किंग पर रोका जाएगा।
  • राजभवन क्षेत्र जीरो जोन: रिक्शा स्टैंड मल्लीताल, घोड़ा स्टैंड, मस्जिद तिराहा से राजभवन तक पूर्व राष्ट्रपति के आगमन पर जीरो जोन लागू रहेगा।
  • बारापत्थर और मल्लीताल: बारापत्थर तिराहा से राजभवन की ओर आने वाले वाहनों को डाइवर्ट कर मन्नूमहारानी तिराहा होते हुए डांट तल्लीताल की तरफ भेजा जाएगा।

28 अक्टूबर 2025: राजभवन से द्वाराहाट के लिए प्रस्थान

दूसरे दिन, 28 अक्टूबर को, पूर्व राष्ट्रपति राजभवन से द्वाराहाट के लिए प्रस्थान करेंगे।

  • हल्द्वानी से पर्वतीय क्षेत्र: वीवीआईपी फ्लीट के राजभवन से निकलने पर हल्द्वानी से पर्वतीय क्षेत्र को जाने वाले वाहनों को वाया भीमताल भेजा जाएगा।
  • भवाली रूट: ज्युलिकोट से भवाली की ओर जाने वाले वाहन भूमियाधार में रोके जाएंगे, जबकि भीमताल से भवाली आने वाले वाहनों को नैनीबैंड-1 पर रोका जाएगा।
  • अल्मोड़ा/रानीखेत: इन स्थानों से आने वाले वाहनों को वाया रामगढ़ भेजा जाएगा।

यात्री ध्यान दें: Traffic Plan की कार्यवाही और डायवर्जन वीवीआईपी फ्लीट के गुजरने के 15 मिनट पहले शुरू कर दिया जाएगा। 29 अक्टूबर को भी वीवीआईपी फ्लीट के जनपद सीमा में प्रवेश करने पर यही ट्रैफिक प्लान लागू रहेगा। सभी नागरिकों और पर्यटकों से अनुरोध है कि वे असुविधा से बचने के लिए ट्रैफिक प्लान के अनुसार ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं।

Chhath Puja Geet Lyrics: छठ पूजा के Best पारंपरिक गीत पढ़िये यहां…”कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाये…”

Chhath Puja Geet Lyrics: कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तक मनाया जाने वाला यह चार दिवसीय महापर्व, लोकआस्था और कठोर तपस्या का प्रतीक है। सूर्य देव (भास्कर) और उनकी बहन षष्ठी देवी (छठी मैया) को समर्पित यह व्रत संतान की सुख-समृद्धि और आरोग्य के लिए किया जाता है।

चार दिन की कठिन साधना: आस्था की दिव्य यात्रा और Chhath Puja Geet

छठ पूजा का हर दिन अपने आप में विशेष है, जो व्रती को परम शुद्धता की ओर ले जाता है।

दिवसतिथि (2025)प्रमुख विधानमहत्व और भाव
पहला दिन25 अक्टूबर, शनिवारनहाय-खायपवित्रता का आरंभ: व्रती नदियों या पवित्र जल में स्नान कर, केवल शुद्ध और सात्विक भोजन (भात, कद्दू की सब्जी, सरसों का साग) ग्रहण करते हैं। यह व्रत की शारीरिक और मानसिक शुद्धता की पहली सीढ़ी है।
दूसरा दिन26 अक्टूबर, रविवारखरनाव्रत का आधार: इस दिन व्रती दिन भर निर्जला उपवास रखते हैं। शाम को गुड़ की खीर (रसिया), रोटी और फल का प्रसाद बनाकर छठ मइया को भोग लगाते हैं। इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है।
तीसरा दिन27 अक्टूबर, सोमवारसंध्या अर्घ्यमुख्य उपासना: यह छठ का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। व्रती और पूरा परिवार घाट पर पहुँचकर बाँस के सूप और दउरा में प्रसाद सजाकर अस्त होते सूर्य (सांझ के अरघ) को दूध और जल से अर्घ्य देते हैं। यह सूर्य की अंतिम किरणों को नमन करने का भाव है।
चौथा दिन28 अक्टूबर, मंगलवारप्रातःकालीन अर्घ्यव्रत का समापन: सप्तमी तिथि को उगते हुए सूर्य (भोर के अरघ) को अर्घ्य दिया जाता है। इस क्षण को सूर्य की नई ऊर्जा और जीवन शक्ति के रूप में पूजा जाता है। इसके बाद व्रती प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करते हैं और छठ महापर्व का समापन होता है।
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छठ पूजा का विशेष आकर्षण

  • अद्वितीय शुद्धता: प्रसाद बनाने में लहसुन, प्याज या किसी भी अपवित्र वस्तु का उपयोग वर्जित होता है।
  • प्रकृति से जुड़ाव: पूजा में बाँस के सूप, मिट्टी के चूल्हे और मौसमी फलों का उपयोग प्रकृति के प्रति सम्मान दर्शाता है।
  • लोकगीतों की गूँज: घाटों और घरों में “कांच ही बांस के बहंगिया,” और “उग हो सुरुज देव” जैसे पारंपरिक छठ गीतों की गूँज एक भक्तिमय और भावनात्मक वातावरण बनाती है।

छठ महापर्व न केवल एक अनुष्ठान है, बल्कि भारतीय संस्कृति का एक जीवंत प्रमाण है जो हमें प्रकृति की शक्तियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना सिखाता है।

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छठ पूजा के पारंपरिक गीत (Chhath Puja Geet)

“कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाये…”

कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाये
बहंगी लचकत जाये, हमार सुगवा धनुष भइलन
सुगवा धनुष भइलन, अस मनवा काहे डोले
कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाये।


“उग हो सूरज देव, भइल अर्घ के बेर…” Chhath Puja Geet

उग हो सूरज देव, भइल अर्घ के बेर
बहंगी के पिटारा, सजल डोलिया
उग हो सूरज देव, भइल अर्घ के बेर।


“केलवा के पात पर उगेलन सूरज देव…”

केलवा के पात पर उगेलन सूरज देव
मोरा मनवा में आनंद भईल
उगेलन सूरज देव।


“पटना के घाट पर, भोर के बेला…”

पटना के घाट पर, भोर के बेला
उग हो सूरज देव, छठी मैया की महिमा।

“हे छठी मैया, हम बानी तोहार पुजारी…”

हे छठी मैया, हम बानी तोहार पुजारी
अर्घ के दिनवा हम तोहके देहब
हे छठी मैया, हम बानी तोहार पुजारी।

छठ पूजा के आधुनिक गीत (Chhath Puja Geet)


“पार करो हे गंगा मइया…”

पार करो हे गंगा मइया, हमके पार करो
उगेला सुरज देव, हे माई, हमके तार दियो।

“छठी मईया आओ, अर्घ ले लो…”(Chhath Puja Geet)

छठी मईया आओ, अर्घ ले लो
हमार विनती सुन लो, हे मैया, जीवन धन्य करो।

“सूरज देव जी हे, आशीष दीजिये…”(Chhath Puja Geet)

सूरज देव जी हे, आशीष दीजिये
भक्त जनों का जीवन सुखमय कर दीजिये

Chhath Puja 2025: छठ पूजा में इस्तेमाल करें कौन सा सूप बांस या पीतल? पढ़िए छठ पूजा में क्यों जरूरी है सूप?

Chhath Puja 2025: लोकआस्था का महापर्व छठ, भारतीय संस्कृति में प्रकृति पूजा का एक अनूठा उदाहरण है, जो चार दिनों तक पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य देव और उनकी बहन छठी मइया (प्रकृति देवी) को समर्पित है, जिनके प्रति आभार व्यक्त कर व्रती संतान, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

छठ पूजा का हर दिन और हर सामग्री, चाहे वह पवित्र स्नान हो, ठेकुआ का प्रसाद हो या फिर बाँस का ‘सूप’, अपने आप में गहन धार्मिक महत्व रखता है। आज, पर्व के दूसरे दिन को खरना के रूप में मनाया जा रहा है, जो 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत का प्रतीक है, लेकिन इस पूरे अनुष्ठान में सूप की भूमिका किसी भी अन्य सामग्री से कम नहीं है।

Chhath Puja खरना: आत्मशुद्धि और निर्जला व्रत का आरंभ

Chhath Puja का दूसरा दिन खरना (आज, 26 अक्टूबर 2025, रविवार) कहलाता है। ‘नहाय-खाय’ से शुरू हुई शुद्धि की प्रक्रिया इस दिन आत्मिक स्तर पर पूरी होती है। खरना के दिन व्रती पूरे दिन उपवास (निर्जला व्रत) रखते हैं और शाम को मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से गुड़ की खीर (रसिया) और घी लगी रोटी तैयार करते हैं। सूर्य देव और छठी मइया को इस प्रसाद का भोग लगाने के बाद, व्रती स्वयं इसे ग्रहण कर 36 घंटे के कठोर निर्जला व्रत की शुरुआत करते हैं। यह प्रसाद केवल शुद्ध अन्न का नहीं, बल्कि आत्मसंयम और आत्मशुद्धि का प्रतीक है, जो व्रती को पर्व की कठिन तपस्या के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करता है।

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Chhath Puja में सूप का विशेष महत्व

Chhath Puja में पूजन सामग्री को सजाने और अर्घ्य देने के लिए सूप का प्रयोग अनिवार्य माना जाता है। यह केवल एक बर्तन नहीं, बल्कि श्रद्धा, पवित्रता और प्रकृति के साथ जुड़ाव का सशक्त प्रतीक है।

Chhath Puja में प्रकृति और शुद्धता का प्रतीक है बाँस का सूप

पारंपरिक रूप से सूप को बाँस या बेंत से बनाया जाता है। बाँस को भारतीय संस्कृति में अत्यंत शुभ और पवित्र माना गया है। यह तेजी से बढ़ने वाला और लचीला पौधा है, जो प्रकृति की तेजस्विता, सहनशीलता और स्थायित्व का संदेश देता है। चूंकि छठ महापर्व प्रकृति और सूर्य की पूजा का पर्व है, इसलिए बांस से बना सूप ही अर्घ्य और प्रसाद के लिए इस्तेमाल होता है, जो पूजा की सात्विकता और शुद्धता को बनाए रखता है। ऐसी मान्यता है कि बाँस का सूप घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लाता है।

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Chhath Puja में अर्घ्य एवं प्रसाद का पवित्र वाहक है सूप

छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण क्षण, डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देना है। इस दौरान, व्रती सूप में ही सभी पवित्र सामग्रियाँ सजाती हैं:

  • ठेकुआ और अन्य पकवान: छठ का विशेष प्रसाद।
  • मौसमी फल: जैसे केला, नारियल, ईख (गन्ना)।
  • दीप: ज्ञान और ऊर्जा के प्रतीक।
  • अनाज: समृद्धि और प्राकृतिक चक्र का प्रतीक।

सूप में अर्घ्य सामग्री रखकर सूर्यदेव को अर्पित करने से व्रती यह संदेश देती है कि उनका जीवन प्रकृति की कृपा पर निर्भर है। यह सूप सूर्यदेव के प्रति भक्ति और आभार प्रकट करने का माध्यम बन जाता है।

सूप के बिना अधूरी है Chhath Puja

धार्मिक मान्यता है कि सूप में अर्घ्य अर्पित करने से सूर्यदेव और छठी मइया तुरंत प्रसन्न होते हैं। सूर्य को अर्घ्य देने के बाद यही सूप पूजा के अंत में प्रसाद वितरण के लिए भी उपयोग होता है। व्रती इसी पवित्र सूप में प्रसाद रखकर छठी मइया से अपने बच्चों के स्वास्थ्य, लंबी आयु, संतान-सुख और परिवार की समृद्धि की प्रार्थना करती हैं।Chhath Puja का यह सूप परिवार के लिए दैवीय आशीर्वाद को धारण करने वाला एक पात्र बन जाता है, जिसके बिना छठ की पूजा अधूरी मानी जाती है।

Chhath Puja में कौन सा सूप करें इस्तेमाल! परंपरा बनाम आधुनिकता: बांस या पीतल?

हालांकि पारंपरिक रूप से Chhath Puja में बाँस का सूप ही प्रयोग किया जाता है, लेकिन आजकल कुछ व्रती पीतल के सूप का भी इस्तेमाल करने लगे हैं। शास्त्रों में पीतल को सूर्य देव का धातु माना गया है और इसका पीला रंग सूर्य का प्रतीक है। बाँस का सूप जहाँ परंपरा और प्रकृति का प्रतीक है, वहीं पीतल का सूप वैभव और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। लेकिन, परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन करने के लिए बाँस का सूप ही सबसे अधिक शुभ और पवित्र माना जाता है, क्योंकि यह पर्व को प्रकृति से जोड़ता है।

छठ पर्व और सूप का यह संबंध केवल एक कर्मकांड नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में शुद्धता, त्याग, प्रकृति प्रेम और अटूट आस्था का प्रमाण है। सूप, इस महापर्व का मूक, किन्तु सबसे महत्वपूर्ण अंग है।

Riwaba Jadeja Biography: कौन हैं रवींद्र जडेजा की पत्नी Riwaba Jadeja, जिन्हें गुजरात सरकार में मिली Important Responsibility

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टीम इंडिया के स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा की पत्नी Riwaba Jadeja ने राजनीति की पिच पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की युवा नेता रिवाबा ने जामनगर उत्तर सीट से गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 में न सिर्फ प्रचंड जीत हासिल की, बल्कि राजनीति में महज तीन साल के भीतर ही गुजरात सरकार में मंत्री पद की बड़ी जिम्मेदारी संभालकर सबको चौंका दिया। क्रिकेटर jadeja ki patni के नाम से शुरू हुआ उनका सफर अब एक मजबूत राजनेत्री का बन चुका है।

Riwaba Jadeja का इंजीनियरिंग से राजनीति तक का सफर

Riwaba Jadeja का जन्म 5 सितंबर, 1990 को हुआ था। उन्होंने गुजरात के राजकोट स्थित आत्मीय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। रिवाबा ने 17 अप्रैल, 2016 को भारतीय क्रिकेटर रवींद्र जडेजा से शादी की। यह शादी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ एक निजी समारोह में हुई थी, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं। रिवाबा का शैक्षणिक और व्यक्तिगत जीवन, उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत से पहले ही चर्चा में रहा है।

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Riwaba Jadeja का करणी सेना से भाजपा तक का राजनीतिक सफर

Riwaba Jadeja का राजनीतिक जुड़ाव नया नहीं है। वह राजपूत समुदाय के संगठन करणी सेना की सक्रिय सदस्य रही हैं और संगठन की महिला शाखा की प्रमुख की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं। राजनीतिक रूप से, रिवाबा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरि सिंह सोलंकी की रिश्तेदार हैं।

Riwaba Jadeja ने 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होकर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। जामनगर-सौराष्ट्र क्षेत्र में वह लगातार सक्रिय रही हैं, क्योंकि यह उनके पति रवींद्र जडेजा का गृहनगर है। 2022 के विधानसभा चुनावों में, रिवाबा को जामनगर (उत्तर) निर्वाचन क्षेत्र से पूर्व विधायक धर्मेंद्रसिंह जडेजा की जगह उम्मीदवार बनाया गया था।

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Riwaba Jadeja ने पहली चुनावी लड़ाई में 53 हजार से अधिक वोटों से शानदार जीत हासिल की थी

गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 में Riwaba Jadeja ने अपनी पहली चुनावी लड़ाई में ही शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने जामनगर उत्तर सीट से आम आदमी पार्टी के कैंडिडेट करसन करमूर को 53,570 वोटों के भारी अंतर से पराजित कर विधानसभा तक का सफर तय किया।

इस जीत में Riwaba Jadeja के पति रवींद्र जडेजा का समर्थन भी महत्वपूर्ण रहा। रवींद्र जडेजा ने चुनाव के दौरान अपनी पत्नी के लिए सक्रिय रूप से वोट मांगे और प्रचार किया, जिसका फायदा रिवाबा को मिला। रिवाबा की यह जीत बताती है कि वह केवल एक क्रिकेटर की पत्नी ही नहीं, बल्कि एक सशक्त जननेता के रूप में उभर रही हैं।

3 साल में Riwaba Jadeja को मिली बड़ी जिम्मेदारी

भाजपा में शामिल होने के महज़ तीन साल के भीतर ही रिवाबा को गुजरात की भूपेंद्र पटेल सरकार में मंत्री पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह उनकी युवा नेतृत्व क्षमता, सक्रियता और चुनावी सफलता पर पार्टी नेतृत्व के विश्वास को दर्शाता है। यह उपलब्धि रिवाबा जडेजा को उन युवा राजनेताओं की सूची में खड़ा करती है, जिन्होंने बहुत कम समय में राजनीतिक पटल पर एक ऊंचा मुकाम हासिल किया है।

रिवाबा का यह सफर न केवल गुजरात की राजनीति में एक नया अध्याय है, बल्कि यह देश की महिलाओं के लिए भी एक प्रेरणा है कि कैसे समर्पण और जनता से जुड़ाव के बल पर राजनीति में भी सफलता हासिल की जा सकती है।

Diwali Rangoli Easy Design: घर के आंगन में उतारें खुशहाली का इंद्रधनुष, ट्राई करें ये आसान रंगोली डिज़ाइन

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Diwali Rangoli Easy Design: दिवाली… यह सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भावनाओं, परंपराओं और रंगों का महासंगम है। इस पर्व का आगाज़ धनतेरस के शुभ दिन से हो जाता है, जब हम मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि (भगवान विष्णु के अवतार) का स्वागत करते हैं। इस दौरान घर को दीपों की रोशनी से सजाया जाता है, लेकिन एक परंपरा ऐसी भी है जो घर के आंगन में साक्षात सुख-समृद्धि को न्योता देती है – और वह है रंगोली

रंगोली, जिसे अलग-अलग क्षेत्रों में अल्पना, कोलम या चौक पूरण भी कहा जाता है, महज़ ज़मीन पर बनी एक कलाकृति नहीं है, बल्कि यह सकारात्मक ऊर्जा और खुशियों का प्रतीक मानी जाती है। ऐसा विश्वास है कि रंग-बिरंगी और सुंदर रंगोली देखकर धन और ऐश्वर्य की देवी मां लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होती हैं और उस घर में स्थाई रूप से निवास करती हैं।

Diwali Rangoli Easy Design- रंगोली क्यों है शुभ? – सुख-समृद्धि का प्रवेश द्वार

सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले रंगोली बनाने की सदियों पुरानी परंपरा है। इसे घर के मुख्य द्वार या आंगन में बनाने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं:

१. नकारात्मकता का निवारण: रंगोली के विभिन्न रंग और पैटर्न एक सकारात्मक ऊर्जा का घेरा बनाते हैं, जो घर से नकारात्मक शक्तियों को दूर भगाता है।

२. देवताओं का आवाहन: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रंगोली देवी-देवताओं को प्रसन्न करने का एक तरीका है। यह उनके स्वागत के लिए बिछाया गया एक कलात्मक कालीन है।

३. अतिथियों का स्वागत: यह घर में आने वाले अतिथियों के लिए स्वागत का प्रतीक है, जो उन्हें खुशी और उल्लास का अनुभव कराता है।

४. पारंपरिक और वैज्ञानिक महत्व: पारंपरिक रूप से रंगोली चावल के आटे, हल्दी और अन्य प्राकृतिक सामग्रियों से बनाई जाती थी, जिससे छोटे जीवों (चींटियों, पक्षियों) को भोजन मिलता था, जो सेवा भाव और ‘यम-नियम’ के पालन को दर्शाता था।

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ट्रेंडिंग और आसान रंगोली डिज़ाइन जो मिनटों में बनेंगी (Diwali Rangoli Easy Design)

हर कोई कुशल चित्रकार नहीं होता, लेकिन दिवाली पर रंगोली बनाना हर कोई चाहता है। चिंता न करें! इस दिवाली 2025 के लिए हम ऐसे आसान और ट्रेंडिंग डिज़ाइन (Diwali Rangoli Easy Design) लेकर आए हैं, जिन्हें बिगिनर्स भी आसानी से बना सकते हैं और जो आपके घर को एकदम मॉडर्न और ट्रेडिशनल लुक देंगे।

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लक्ष्मी चरण और कमल रंगोली (Diwali Rangoli Easy Design):

  • क्यों ट्रेंड में Diwali Rangoli Easy Design है: यह डिज़ाइन सीधे-सीधे मां लक्ष्मी के आगमन को दर्शाता है।
  • कैसे बनाएं Diwali Rangoli Easy Design: सबसे पहले मुख्य द्वार से घर के अंदर आते हुए मां लक्ष्मी के चरणों की आकृति (स्टैंसिल या चौक से) बनाएं। चरणों के चारों ओर कमल के फूल (जो मां लक्ष्मी को प्रिय हैं) या दीये का डिज़ाइन बनाएं। लाल, गुलाबी, और सफेद रंगों का प्रयोग करें, जो शुभ माने जाते हैं।

फूलों की फ्लोटिंग रंगोली (Floating Rangoli) Diwali Rangoli Easy Design:

  • क्यों ट्रेंड में है: यह सबसे सरल, सुगंधित और ईको-फ्रेंडली विकल्प है।
  • कैसे बनाएं: एक बड़ा मिट्टी या धातु का थाल लें, उसमें पानी भरें। अब गुलाब और गेंदे के फूलों की पंखुड़ियों को इस पानी में सावधानी से फैलाएं। बीच में तैरते हुए दीये (फ्लोटिंग कैंडल) या कुछ छोटे दीये किनारों पर रखें। यह रंगोली कम समय में शानदार लुक देती है।

दीयों वाली जियोमेट्रिक रंगोली (Geometric Diya Rangoli): Diwali Rangoli Easy Design

  • क्यों ट्रेंड में है: यह मॉडर्न और ट्रेडिशनल का बेहतरीन मिश्रण है।
  • कैसे बनाएं: चॉक की मदद से ज़मीन पर आसान ज्यामितीय आकार (वर्ग, वृत्त या त्रिकोण) का एक पैटर्न बनाएं। हर आकार को अलग-अलग गहरे रंगों (जैसे हरा, मैरून, नीला) से भरें। रंगोली के बाहरी किनारों और कोनों पर छोटे-छोटे दीये सजाएं। रोशनी में यह डिज़ाइन बेहद आकर्षक लगता है।

स्टैंसिल या डॉट रंगोली (Stencil or Dot Rangoli): Diwali Rangoli Easy Design

  • क्यों ट्रेंड में है: जिन्हें बिलकुल रंगोली बनानी नहीं आती, उनके लिए स्टैंसिल सबसे अच्छा विकल्प है।
  • कैसे बनाएं: बाज़ार में उपलब्ध रंगोली स्टैंसिल का उपयोग करें। इसे ज़मीन पर रखें और रंगों को ऊपर से डालकर आसानी से सुंदर डिज़ाइन बनाएं। वैकल्पिक रूप से, आप छोटे-छोटे डॉट्स (बिंदु) बनाकर उन्हें जोड़कर सरल फूल या स्वास्तिक का डिज़ाइन भी बना सकते हैं।

अनाज और दालों से बनी रंगोली (Eco-Friendly Rangoli):

  • क्यों ट्रेंड में है: यह पारंपरिक रंगोली का सबसे शुद्ध और ईको-फ्रेंडली रूप है।
  • कैसे बनाएं: विभिन्न प्रकार के रंगीन अनाज और दालों (जैसे, चावल, हल्दी वाला चावल, मूंग दाल, मसूर दाल, मेथी दाना) का उपयोग करें। इन अनाजों को सीधा या किसी प्लेट की मदद से गोल आकार में भरकर रंगोली का रूप दें। यह न केवल प्राकृतिक है, बल्कि एक अनोखा टेक्सचर भी प्रदान करती है।

एक बात का रखें ध्यान: वास्तु के अनुसार स्थान

वास्तु शास्त्र के अनुसार, रंगोली को हमेशा घर के मुख्य द्वार या पूजा स्थल पर ही बनाना सबसे शुभ माना जाता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश सुनिश्चित होता है। भूलकर भी ज्यादा भीड़-भाड़ वाली जगह पर या गंदे स्थान पर रंगोली न बनाएं, क्योंकि इससे शुभता का प्रभाव कम हो सकता है।

इस दीपावली, इन आसान और मनमोहक रंगोली डिज़ाइन को अपनाकर अपने घर के आंगन में खुशहाली और समृद्धि का स्वागत करें। आपकी रंगोली केवल सजावट न हो, बल्कि आपके घर में आने वाली सभी खुशियों का पहला न्योता बने। शुभ दीपावली!