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उत्तराखंड कैबिनेट में आज क्या फैसले हुए, यहां पढ़िए पूरी रिपोर्ट

उत्तराखंड कैबिनेट में आज कई फैसलों पर मुहर लगाई गई है। धामी कैबिनेट ने आवास विकास विभाग, कार्मिक विभाग समेत हेल्थ डिपार्टमेंट से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी है। आइए देखते हैं उत्तराखंड कैबिनेट में आज के फैसलों को प्वाइंटर्स के तौर पर।

उत्तराखंड कैबिनेट के आज क्या फैसले हुए

  • विधानसभा सत्र के लिए मुख्यमंत्री को किया गया अधिकृत, देहरादून में होगा सत्र
  • महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग में मिनी आंगनबाड़ी बंद होने के बाद 40% कार्यकत्री भी पूर्ण आंगनबाड़ी में सम्मिलित होंगे
  • आवास विकास विभाग के तहत विधानसभा परिसर में फ्रिज जोन के लिए घर बनाने की दी गई अनुमति
  • चिकित्सा स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य कार्यकर्ता एवं पर्यवेक्षक 5 साल का सेवा पूर्ण होने पर एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण अनुमति होगी, जूनियर पोस्ट पर रहेंगे
  • समान नागरिक संहिता में ऑनलाइन माध्यम से आधार कार्ड से आवेदन किया जाता था, अब नेपाली और भूटानी, तिब्बती शादी होने के लिए नागरिक हेतु प्रमाण पत्र 182 दिन से ज्यादा रहने वाले जारी किया गया पहचान पत्र भी वैलिड होगा।
  • कार्मिक विभाग में किसी कर्मचारी की किसी पद पर 50% की सेवा पूर्ण हो चुकी है, तो एक सेवा से दूसरी सेवा में जाना चाहते है तो उनको लिए 3 साल  के लिए शीतलीकरण मिल पाएगा
  • वित्त विभाग में पब्लिक सेंटर 100% टेकिंग है, विशुद्ध मुनाफा का 15% राज्य सरकार को देना होगा

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धामी ने आलोचकों के मुंह पर फिलहाल लगा दिया टेप, बेरोजगार संघ के युवाओं से मुलाकात के दूरगामी हो सकते हैं परिणाम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अब धीरे धीरे एक परिपक्व राजनीतिज्ञ के तौर पर नजर आने लगे हैं। कई बार उनमें एक मुख्यमंत्री कम और मित्र अधिक दिखता है। हाल ही में पुष्कर सिंह धामी उस वक्त आलोचनाओं के निशाने पर आ गए थे जब UKSSSC परीक्षा लीक मामले में सरकार पर हीलाहवाली का आरोप लगा। बेरोजगार संघ के बैनर तले युवा धरने पर बैठ गए। हालांकि बाद में सीएम ने खुद धरना स्थल पर जाकर उनकी मांग मानने का ऐलान कर दिया। इसके बाद अब सीएम धामी ने Uttarakhand Berojgar Sangh के मौजूदा अध्यक्ष राम कंडवाल और उनके अन्य साथियों से मुलाकात की है। माना जा रहा है कि सीएम धामी की इस मुलाकात के दूरगामी असर होंगे।

Uttarakhand Berojgar Sangh के युवाओं ने परीक्षा रद्द होने पर जताया आभार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड बेरोजगार संघ व तकनीकी डिप्लोमा प्राप्त छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से भेंट की। इस अवसर पर प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया कि राज्य सरकार ने युवाओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायतों पर गंभीरता से संज्ञान लिया और संबंधित परीक्षा को निरस्त करने का निर्णय लिया।

Uttarakhand Berojgar Sangh के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार द्वारा परीक्षा की पारदर्शिता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदम युवाओं में विश्वास और आशा का संचार करते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जिस तत्परता और संवेदनशीलता के साथ इस मुद्दे पर कार्रवाई की, वह युवाओं के हित में एक ऐतिहासिक निर्णय है।

धामी ने फिर दोहराया, परीक्षा में नकल पर जीरो टॉलरेंस

मुख्यमंत्री धामी ने प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार योग्यता और पारदर्शिता पर आधारित भर्ती प्रक्रिया के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार का स्पष्ट संदेश है कि उत्तराखंड में किसी भी भर्ती परीक्षा में भ्रष्टाचार, नकल या अनुचित साधनों के लिए शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं की मेहनत और प्रतिभा के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने नकल विरोधी कानून लागू कर परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में सशक्त कदम उठाया है। इस कानून के लागू होने से अब कोई भी व्यक्ति या संगठन परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास करेगा तो उसके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार लगातार इस दिशा में कार्य कर रही है कि हर पात्र युवक-युवती को निष्पक्ष अवसर मिले और राज्य के सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता और विश्वास का माहौल स्थापित हो। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं की मेहनत, लगन और ईमानदारी ही राज्य के भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है, और सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर है।

परीक्षाओं को और पारदर्शी बनाने की जरूरत

Uttarakhand Berojgar Sangh संघ के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि भविष्य की परीक्षाओं में नकल-रोधी प्रावधानों को और अधिक सुदृढ़ किया जाए तथा भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से संचालित किया जाए। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधियों के सुझावों की सराहना करते हुए कहा कि पारदर्शी भर्ती ही सुशासन की पहचान है, और राज्य सरकार इसी दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

धामी ने विपक्ष के हाथों से मुद्दा छीना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मुलाकात से कई निशाने साध लिए हैं। एक तो उन्होंने युवाओं की अनदेखी के आरोपों को सिर के बल खड़ा कर दिया है। वहीं नकल या पेपर लीक करने वाले नेटवर्क को तोड़ने की अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहरा दिया है। इसके साथ ही सीएम धामी ने विपक्ष के हाथों से भी फिलहाल मुद्दा छीन लिया है क्योंकि न सिर्फ सीबीआई जांच के आदेश हो चुके हैं बल्कि परीक्षा भी रद्द कराके तीन महीने के भीतर फिर से कराने के आदेश दे दिए गए हैं।

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Big Breaking : उत्तराखंड में अधिकारियों के तबादले, कई जिलों के डीएम बदले गए, हुआ बड़ा फेरबदल

उत्तराखंड में सरकार ने बड़े पैमाने पर अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। कई जिलों के डीएम भी बदल दिए गए हैं। नैनीताल, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी बदल दिए गए हैं। वहीं कई पीसीएस अफसरों के भी तबादले किए गए हैं।

कई जिलों के डीएम बदले गए

राज्य सरकार ने कई जिलों के डीएम का तबादला कर दिया है। नैनीताल में लंबे समय से टिकीं वंदना सिंह का तबादला कर दिया गया है। अब ललित मोहन रयाल को नैनीताल का डीएम बनाया गया है। वहीं पिथौरागढ़, चमोली, बागेश्वर और अल्मोड़ा में भी डीएम के तबादले किए गए हैं। हाल ही में अल्मोड़ा के डीएम बनाए गए आलोक पांडेय को आईटीडीए का निदेशक बनाकर वापस देहरादून बुलाया गया है। वहीं चमोली के डीएम संदीप तिवारी का तबादला हो गया है। अब गौरव कुमार को चमोली का डीएम बनाया गया है।

वहीं सरकार ने कई पीसीएस अफसरों के भी तबादले किए हैं। पूरी लिस्ट यहां देखिए –

Idli Google Doodle: गूगल को पसंद आई इडली! आज खास डूडल से मनाया साउथ इंडियन स्वाद का जश्न

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आज गूगल ने अपने होमपेज पर एक बेहद स्वादिष्ट और दिलचस्प डूडल शेयर किया है, जो पूरी तरह इडली (Idli) को समर्पित है। “Celebrating Idli” नामक इस डूडल के जरिए गूगल ने यह दिखाया है कि उसे भारत की इस पारंपरिक और हेल्दी डिश से कितना लगाव है।

साउथ इंडियन फूड की बात आते ही इडली का नाम सबसे ऊपर आता है। इसका कारण है — यह टेस्टी, हल्की और हेल्दी डिश है जिसे दिन के किसी भी वक्त खाया जा सकता है।

डूडल में क्या खास दिखाया गया है?

गूगल ने अपने लोगो को केले के पत्ते (banana leaf) पर सजाया है — जो दक्षिण भारत की पारंपरिक परोसने की शैली को दर्शाता है। डूडल के हर अक्षर में इडली की कहानी छिपी है:

  • “G” अक्षर चावल के दानों से बना है।
  • पहला “O” इडली-बैटर (घोल) को दिखाता है जो फर्मेंटेशन प्रक्रिया को दर्शाता है।
  • दूसरा “O” इडली स्टैंड या मोल्ड को दिखाता है जिसमें इडली स्टीम होती है।
  • “G” और “L” अक्षर गोल इडली और मेंदू वडा जैसी डिश के रूप में बने हैं।
  • “E” अक्षर में चटनी, सांभर और इडली की प्लेट दिखाई गई है।

यह डूडल न सिर्फ एक आर्टवर्क है, बल्कि भारत के फूड कल्चर की सराहना भी है।

इडली का पोषण और स्वास्थ्य लाभ

इडली (Idli) सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि सेहत का भी खजाना है। यह चावल और उरद दाल के मिश्रण से बनती है जिसे फर्मेंट किया जाता है।

  • फर्मेंटेशन से यह हल्की, पाचक और स्वादिष्ट बनती है।
  • इसमें कम फैट, हेल्दी कार्ब्स और पर्याप्त प्रोटीन होता है।
  • फर्मेंटेशन से पोषक तत्वों की जैव उपलब्धता (bioavailability) बढ़ जाती है।
  • यह ग्लूटेन-फ्री, एनर्जी-रिच और हर उम्र के लिए उपयुक्त है।

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इडली रेसिपी: घर पर बनाएं सॉफ्ट और फूली-फूली इडली

सामग्री:

  • 1 कटोरी उरद दाल
  • 3 कटोरी चावल
  • 1 चम्मच मेथी दाना
  • नमक स्वादानुसार

विधि:

  1. चावल और दाल को अलग-अलग धोकर रातभर भिगो दें।
  2. सुबह इन्हें पीसकर एक बड़े बर्तन में मिक्स करें।
  3. इसे ढककर किसी गर्म जगह पर 6–8 घंटे फर्मेंट होने दें।
  4. जब बैटर फूल जाए, तो इडली सांचों में भरकर 10–12 मिनट स्टीम करें।
  5. चेक करने के लिए टूथपिक डालें — अगर साफ निकल आए, तो इडली तैयार है।

इडली को नारियल चटनी, टमाटर चटनी या सांभर के साथ परोसें और साउथ इंडिया का असली स्वाद लें।

क्यों पूरी दुनिया को पसंद आ रही है इडली?

इडली अब सिर्फ साउथ इंडिया की नहीं, बल्कि ग्लोबल फूड लवर्स की फेवरेट बन चुकी है।
इसकी लोकप्रियता के पीछे कारण हैं:

  • आसान पाचन
  • कम तेल में बनना
  • हर उम्र के लिए उपयुक्त
  • पौष्टिकता और सादगी का मेल

गूगल का यह डूडल इस बात का प्रतीक है कि भारतीय व्यंजन सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि संस्कृति और सेहत का संगम है।

धामी सरकार का बड़ा फैसला: दुर्गम क्षेत्रों में तैनात वन कर्मियों को अब ‘हाउसिंग अलाउंस’

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के वन कर्मियों के हित में एक महत्वपूर्ण और संवदेनशील निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने वन विभाग के अंतर्गत दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों को अब आवासीय भत्ता (Housing Allowance) देने की घोषणा की है। यह निर्णय उन वन कर्मियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो प्रदेश की वन संपदा और वन्यजीवों की सुरक्षा में कठिन परिस्थितियों में अपना योगदान देते हैं।

वन कर्मियों की कठिनाई को समझा सरकार ने

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस निर्णय के पीछे की मंशा स्पष्ट करते हुए कहा कि वनकर्मी दिन-रात कठिन परिस्थितियों में बहुमूल्य वन संपदा और वन्यजीवों की रक्षा करते हैं। दूरस्थ और दुर्गम चौकियों पर तैनाती के कारण उन्हें अक्सर अपने परिवार से दूर रहना पड़ता है।

उन्होंने जोर दिया कि:

  • इन वन कर्मियों के लिए अपने परिवार हेतु अलग से आवास की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती होती है।
  • सरकार ने इस कठिनाई को समझते हुए यह निर्णय लिया है।

किन क्षेत्रों में मिलेगा आवासीय भत्ता?

यह आवासीय भत्ता विशेष रूप से दुर्गम क्षेत्रों में तैनात वन कर्मियों को अनुमन्य किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि:

  • यह सुविधा उन दुर्गम क्षेत्रों में लागू होगी जहां स्वास्थ्य एवं शिक्षा जैसी सामान्य नागरिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
  • शासन द्वारा वित्त विभाग की सहमति से ऐसे दुर्गम क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जिसके बाद यह सुविधा वहाँ लागू की जाएगी।

वन कर्मियों ने जताया आभार

मुख्यमंत्री के इस निर्णय का वन विभाग के कर्मचारियों ने दिल से स्वागत किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और वन मंत्री सुबोध उनियाल का विशेष आभार व्यक्त किया।

वन कर्मियों ने कहा कि:

  • सरकार के इस कदम से उन्हें अपने परिवारों की देखभाल करने में सहूलियत मिलेगी।
  • इससे वे राज्य की वन संपदा की रक्षा के कार्य में और अधिक मनोयोग से जुट सकेंगे।

देहरादूनः अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पर CM धामी और कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने 326 टॉपर बालिकाओं को दिए स्मार्टफोन

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने शनिवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर आयोजित ‘बालिका शिक्षा प्रोत्साहन कार्यक्रम’ में भाग लिया।बता दं कि महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मेधावी बालिकाओं को पुरस्कृत और प्रोत्साहित किया गया।

326 मेधावी बालिकाओं को मिले स्मार्टफोन

कार्यक्रम के दौरान 326 मेधावी बालिकाओं को स्मार्टफोन प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद स्तर पर हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा की प्रथम तीन टॉपर बालिकाओं और विकासखण्ड स्तर पर टॉपर बालिकाओं को भी पुरस्कृत किया। यह पहल बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने और उन्हें डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

बोर्ड परीक्षाओं में बालिकाओं का शानदार प्रदर्शन

मुख्यमंत्री ने सभी को अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए बोर्ड परीक्षाओं में बालिकाओं के अद्भुत प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने आँकड़े साझा करते हुए बताया:

  • हाईस्कूल परीक्षा: कुल 90 प्रतिशत विद्यार्थी सफल हुए, जिसमें बालिकाओं का सफलता प्रतिशत 93 प्रतिशत से अधिक रहा।
  • इंटरमीडिएट परीक्षा: कुल 83 प्रतिशत विद्यार्थी सफल रहे, जिनमें बालिकाओं का सफलता प्रतिशत 86 प्रतिशत से अधिक रहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सफलता बालिकाओं के परिश्रम, प्रतिभा और संकल्प का परिणाम है।

नारी शक्ति राज्य के विकास का आधार: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि समाज की तरक्की नारी शक्ति से होती है और यदि किसी राज्य की नारी शक्ति प्रगति कर रही है, तो उस राज्य के विकास को कोई भी ताकत नहीं रोक सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि बेटियों के शिक्षित होने से आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी संवरता है।

महिला सशक्तिकरण हेतु राज्य सरकार की प्रमुख योजनाएँ

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से राज्य सरकार ने नारी शक्ति के उत्थान हेतु कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:

  • सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को प्रदान किया गया।
  • मुख्यमंत्री नारी सशक्तिकरण योजना, मुख्यमंत्री महालक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना, नंदा गौरा योजना जैसी योजनाएँ प्रारम्भ की गई हैं।
  • महिला छात्रावास का निर्माण, मुफ्त साइकिल योजना और ‘बालिका शिक्षा प्रोत्साहन कार्यक्रम’ जैसी पहलें बालिकाओं को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इन योजनाओं से प्रदेश की बेटियाँ सरकारी सेवाओं में चयनित हो रही हैं, और स्वयं सहायता समूहों, स्टार्टअप्स और लघु उद्योगों के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं।

केंद्र सरकार की पहलें और नकल-विरोधी कानून

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना, बालिका समृद्धि योजना, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, उज्ज्वला योजना, लखपति दीदी योजना जैसी पहलों का भी उल्लेख किया।

सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही प्रदेश की बेटियों के सपनों को साकार करने के लिए, मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में देश का सबसे कठोर नकल-विरोधी कानून लागू किया गया है। इसके परिणामस्वरूप, पिछले 4 वर्षों में लगभग 25 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी पाने में सफलता प्राप्त हुई है।

लिंगानुपात में सुधार: रेखा आर्या

महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और प्रदेश में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों से महिला सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। उन्होंने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस अभियान के बाद राज्य में बेटियों के लिंगानुपात में भी सुधार हुआ है, जो इस दिशा में हो रहे कार्यों की सफलता को दर्शाता है।

CM धामी ने दी 840 स्कूलों को ‘Virtual Classes’ शिक्षा की सौगात

देहरादून: शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड ने आज एक और मील का पत्थर स्थापित कर दिया! मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को राजीव गांधी नवोदय विद्यालय, ननूरखेड़ा में आयोजित भव्य समारोह में, राज्य के 840 राजकीय विद्यालयों को ‘डिजिटल लर्निंग’ से जोड़ते हुए हाइब्रिड मोड में संचालित होने वाली वर्चुअल एवं स्मार्ट कक्षाओं के अत्याधुनिक केन्द्रीयकृत स्टूडियो का शानदार शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर वर्चुअल माध्यम से सीधे विद्यार्थियों से संवाद कर, उन्हें भविष्य के लिए प्रेरित किया।

अब किताबें ही नहीं, स्क्रीन भी बनेगी टीचर!

मुख्यमंत्री धामी ने इस पहल को “शिक्षा व्यवस्था को मजबूती देने वाली ऐतिहासिक पहल” बताते हुए कहा कि यह प्रदेश के बच्चों का भविष्य उज्ज्वल करेगी। उन्होंने कहा, “आधुनिक युग में शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है। अब डिजिटल तकनीक, वर्चुअल प्लेटफॉर्म और स्मार्ट कक्षाएं ज्ञान के अनंत द्वार खोल रही हैं।” ये नवाचार न केवल पाठ्यक्रम को रोचक और सरल बनाएंगे, बल्कि दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों के बच्चे भी अब देश के सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञों और शिक्षकों से सीधे जुड़कर पढ़ सकेंगे। यह सचमुच ज्ञान की एक नई गंगा है!

घर-घर पहुँची ‘उत्तराखंड वर्चुअल लर्निंग ऐप’ की सौगात

राज्य में डिजिटल शिक्षा को गति देते हुए मुख्यमंत्री ने कई बड़ी घोषणाएं की:

  • वर्चुअल क्रांति का विस्तार: 500 विद्यालयों में पहले से चल रही वर्चुअल कक्षाओं के साथ अब यह संख्या और तेज़ी से बढ़ेगी।
  • PM श्री विद्यालय: प्रदेश में 226 विद्यालयों को केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी पीएम श्री विद्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है।
  • ज्ञान का खजाना, आपके हाथ में: मुख्यमंत्री ने ‘उत्तराखंड वर्चुअल लर्निंग एप्लीकेशन’ का ज़िक्र किया। इस ऐप के ज़रिए छात्र घर बैठे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं और अपना मूल्यांकन भी कर सकते हैं। यह ऐप देश और राज्य के नामी शिक्षकों से सीधे पढ़ने का मौका देगा।
  • 5-पीएम ई-विद्या चैनल: दूरस्थ क्षेत्रों तक ऑनलाइन शिक्षा पहुँचाने के लिए 5-पीएम ई-विद्या चैनल भी लगातार संचालित किए जा रहे हैं।

मेधावी छात्रों का सम्मान, हुनरमंद छात्रों को रोज़गार

सीएम ने कहा कि सरकार शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रख रही है, बल्कि उसे रोज़गार से जोड़ रही है:

  • मेधावी छात्रों का प्रोत्साहन: कक्षा 6 से 12 तक के मेधावी छात्रों को मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना का लाभ दिया जा रहा है।
  • भारत भ्रमण: हर विकासखंड के 10वीं और 12वीं के टॉपर्स को भारत भ्रमण पर भेजा जा रहा है, ताकि उनका विज़न और बड़ा हो सके।
  • रोज़गारोन्मुख शिक्षा: माध्यमिक विद्यालयों में 8 ट्रेडों में व्यावसायिक शिक्षा शुरू की गई है, जिससे 42 हज़ार से अधिक छात्र लाभान्वित हो रहे हैं।
  • सफलता की कहानी: 12वीं के व्यावसायिक छात्रों के लिए पहली बार रोज़गार मेला आयोजित किया गया, जिसमें 146 छात्रों का प्रतिष्ठित कंपनियों में चयन हुआ! केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने भी इस अनूठी पहल की तारीफ़ की है।

विरासत का संरक्षण, नई पीढ़ी का निर्माण- CM Dhami

उत्तराखंड शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने के साथ-साथ अपनी संस्कृति को भी बचा रहा है:

  • उत्तराखंड, पथ-प्रदर्शक: उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने बुनियादी शिक्षा के लिए राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा तैयार की है।
  • बस्तारहित दिवस: विद्यालयों में ‘बस्तारहित दिवस’ को शामिल किया गया है, ताकि बच्चे तनावमुक्त होकर रचनात्मक गतिविधियों में भाग ले सकें।
  • मातृभाषा को सम्मान: गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी भाषाओं में पुस्तकें तैयार की गई हैं। थारू, बोक्सा और रवांल्टी भाषाओं में भी शब्दकोश बनाए जा रहे हैं।
  • ‘हमारी विरासत’: कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को भारत की संस्कृति, लोक परंपरा और महान विभूतियों के बारे में बताने के लिए ‘हमारी विरासत’ पुस्तक पाठ्यक्रम में शामिल की गई है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य है। इसी के तहत 2022 में ‘बाल वाटिका’ की शुरुआत की गई। उन्होंने बताया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सभी सरकारी विद्यालयों में एन.सी.ई.आर.टी. की पाठ्यपुस्तकें अनिवार्य की गई हैं, जो कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।

Zoho mail: क्यों बन रहा है यह Gmail का दमदार विकल्प और कैसे करें स्विच?

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तकनीकी दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बना चुकी भारतीय कंपनी Zoho ने हाल ही में Arattai (अरट्टई) के बाद अपने नए Zoho mail प्लेटफॉर्म के साथ एक बार फिर सबका ध्यान खींचा है। यह प्लेटफॉर्म उन यूज़र्स के बीच तेजी से लोकप्रियता हासिल कर रहा है जो Gmail के लिए एक प्राइवेट, एड-फ्री और ज्यादा कंट्रोल वाली भारतीय ईमेल सेवा की तलाश में हैं। Zoho Mail न केवल एक क्लीन और सुरक्षित ईमेल अनुभव प्रदान करता है, बल्कि अपनी यूनीक फीचर्स के साथ छोटे व्यवसायों और प्रोफेशनल्स के लिए एक बेहतरीन समाधान भी पेश कर रहा है।

प्राइवेसी और एड-फ्री अनुभव: Zoho Mail की सबसे बड़ी खासियत

Zoho Mail की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका पूरी तरह से एड-फ्री होना है। इसका मतलब है कि यूज़र्स को कोई पॉप-अप ऐड, टारगेटेड विज्ञापन या किसी तरह का डिस्ट्रैक्शन देखने को नहीं मिलेगा। यह सुविधा यूज़र्स को बेहतर प्राइवेसी और एक साफ-सुथरा इनबॉक्स प्रदान करती है, जो आज के डिजिटल युग में एक बड़ी राहत है। यह प्लेटफॉर्म मजबूत एन्क्रिप्शन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है ताकि यूज़र का डेटा किसी भी थर्ड पार्टी की अनऑथराइज्ड एक्सेस से सुरक्षित रहे।

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प्रोफेशनल्स और बिज़नेस के लिए कस्टम डोमेन और टूल्स

Zoho Mail विशेष रूप से प्रोफेशनल्स और छोटे व्यवसायों (Small Businesses) के लिए एक शक्तिशाली टूल है। यह उन्हें अपने खुद के कस्टम डोमेन नेम का उपयोग करने की सुविधा देता है, जैसे you@yourcompany.com। इसके अतिरिक्त, इसमें शेयर कैलेंडर, नोट्स और टास्क जैसे कई उपयोगी उत्पादकता उपकरण (productivity tools) भी मिलते हैं। ये उपकरण टीमों को Zoho इकोसिस्टम के भीतर अधिक कुशलता से और संगठित तरीके से काम करने में मदद करते हैं।

मेड इन इंडिया’ का विश्वास और बढ़ती लोकप्रियता

Arattai के बढ़ते उपयोग ने यह स्पष्ट कर दिया था कि भारतीय यूज़र्स लोकल ऐप्स और सेवाओं को सपोर्ट करने के लिए तैयार हैं। Zoho Mail भी इसी भावना का प्रतीक है। ‘मेड इन इंडिया’ की विश्वसनीयता के साथ, यह उन यूज़र्स के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है जो अपने ईमेल प्रबंधन को अधिक सुरक्षा, सरलता और नियंत्रण के साथ संभालना चाहते हैं। यह प्लेटफॉर्म भरोसेमंद और प्राइवेसी-फोकस ईमेल सेवा चाहने वालों के लिए एक उत्कृष्ट विकल्प है।

क्यों है Zoho Mail, Gmail का बेहतर विकल्प?

अगर हम तुलना करें, तो Zoho Mail यूज़र को एक ऐसा वातावरण प्रदान करता है जहाँ डेटा की सुरक्षा और प्राइवेसी को सर्वोपरि रखा गया है। जहाँ Gmail जैसे प्लेटफॉर्म विज्ञापन प्रदर्शित करने के लिए यूज़र के डेटा का विश्लेषण करते हैं, वहीं Zoho Mail इस प्रथा से पूरी तरह दूर रहता है। क्लीन इनबॉक्स, कोई विज्ञापन नहीं, मजबूत एन्क्रिप्शन और व्यावसायिक सुविधाओं का मिश्रण इसे एक रिलायबल और प्राइवेसी-फोकस ईमेल सर्विस के रूप में स्थापित करता है।

Gmail से Zoho Mail पर स्विच करने की आसान गाइड

यदि आप Zoho Mail पर शिफ्ट होने की योजना बना रहे हैं, तो प्रक्रिया काफी सीधी है:

  • साइन अप करें: सबसे पहले Zoho Mail की वेबसाइट पर जाएँ और अपनी ज़रूरत के अनुसार (फ्री या पेड) प्लान चुनकर एक अकाउंट बनाएँ।
  • IMAP ऑन करें: अपने पुराने Gmail अकाउंट में जाएँ और Settings → Forwarding and POP/IMAP पर जाकर IMAP को ऑन करें। यह Zoho को आपके ईमेल को सुरक्षित रूप से एक्सेस करने की अनुमति देगा।
  • डेटा इंपोर्ट करें: अब Zoho Mail में अपनी Settings → Import पर जाएँ और Migration Wizard का उपयोग करें। यह टूल आपके कॉन्टैक्ट्स, फोल्डर्स और सभी पुराने ईमेल्स को आसानी से Zoho में ले आएगा।
  • ईमेल फॉरवर्डिंग सेट करें: ट्रांज़िशन के दौरान कोई महत्वपूर्ण मैसेज मिस न हो, इसके लिए Gmail में ईमेल फॉरवर्डिंग सेट करें ताकि सभी नए ईमेल सीधे आपके नए Zoho अकाउंट पर आ सकें।

Big Breaking: 21 सितंबर वाली UKSSSC स्नातक स्तरीय परीक्षा रद्द, देखिए आदेश

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) ने बड़े नकल और धांधली प्रकरण के चलते 21 सितंबर को आयोजित स्नातक स्तरीय परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। राज्यभर के लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की संस्तुति भेज दी है, ताकि पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश हो सके।

देहरादून: नकल प्रकरण के बाद UKSSSC स्नातक स्तर की परीक्षा रद्द; अब होगी CBI जांच

यहां पढ़िए मुख्य बातें:

  • परीक्षा रद्द: UKSSSC ने 21 सितंबर को आयोजित स्नातक स्तर की परीक्षा रद्द की।
  • कारण: परीक्षा के दौरान नकल और गड़बड़ी के संगठित प्रयास।
  • युवाओं की मांग: राज्यभर के युवाओं द्वारा लगातार परीक्षा रद्द करने की मांग की जा रही थी।
  • जांच: फिलहाल SIT (विशेष जांच दल) कर रही है जांच।
  • मुख्यमंत्री का फैसला: सीएम पुष्कर सिंह धामी ने मामले की CBI जांच के लिए संस्तुति भेज दी है।
  • आयोग का बयान: जांच पूरी होने तक नई परीक्षा तिथि घोषित नहीं होगी; पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता।

परीक्षा की शुचिता पर सवाल, UKSSSC ने लिया बड़ा फैसला

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा 21 सितंबर को आयोजित स्नातक स्तर की परीक्षा को आयोग ने रद्द कर दिया है। यह फैसला परीक्षा के दौरान नकल और बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के मामले सामने आने के बाद लिया गया है। राज्यभर के अभ्यर्थी लगातार परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए इसे रद्द करने की मांग कर रहे थे।

बता दें कि जारी आदेश के मुताबिक निरस्त की गई परीक्षा को 3 माह के भीतर पुनः आयोजित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने दिलाया न्याय का भरोसा, CBI जांच की संस्तुति

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया था। उन्होंने कहा था कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। इसी क्रम में, मुख्यमंत्री धामी ने अब इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए सीबीआई (CBI) जांच की संस्तुति भेज दी है। फिलहाल, इस मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) द्वारा की जा रही है।

नई परीक्षा तिथि पर संशय

आयोग का स्पष्ट कहना है कि परीक्षा की शुचिता और पारदर्शिता उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जब तक नकल प्रकरण की जांच पूरी नहीं हो जाती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो जाती, तब तक नई परीक्षा की तिथि घोषित नहीं की जाएगी। इस घटनाक्रम से राज्य के लाखों अभ्यर्थियों में जहां निराशा है, वहीं सीबीआई जांच के फैसले से कई युवा अब न्याय और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न होने की उम्मीद जता रहे हैं।

क्या है प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY): PM मोदी ने आज किया शुभारंभ, जानिए किसे मिलेगा इसका लाभ!

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज “प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना” का शुभारंभ किया। यह योजना केंद्र और राज्य सरकारों के 11 विभागों की 36 योजनाओं को आपस में जोड़कर (समन्वित करके) शुरू की गई है। बता दें कि यह योजना वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट 2025-26 में घोषित की गई थी और इसे 16 जुलाई 2025 को मंजूरी मिली थी।

योजना का मुख्य उद्देश्य

इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य कृषि क्षेत्र में समग्र सुधार लाना और किसानों की आय को बढ़ाना है। इसके पांच मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  1. कृषि उत्पादकता को बढ़ाना: उन्नत तकनीकों और संसाधनों के उपयोग से उपज में वृद्धि करना।
  2. फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि: किसानों को विभिन्न प्रकार की फसलें उगाने और पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
  3. भंडारण क्षमता में वृद्धि: पंचायत और ब्लॉक स्तर पर फसल-उपरांत भंडारण क्षमता (Post-harvest storage capacity) को मजबूत करना।
  4. सिंचाई बुनियादी ढांचे में सुधार: विश्वसनीय जल पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाना।
  5. कृषि ऋण तक पहुंच: किसानों के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक कृषि ऋण प्राप्त करना आसान बनाना।

किसे और क्या लाभ मिलेगा?

  • लाभार्थी: इस योजना के तहत 1.7 करोड़ किसानों को सीधे मदद मिलेगी।
  • लक्ष्य क्षेत्र: इस योजना को मुख्य रूप से कम उपज वाली जगहों (कम प्रदर्शन वाले कृषि जिलों) पर शुरू किया जाएगा।
  • कवरेज: योजना का लक्ष्य 6 वर्षों के भीतर 100 कम प्रदर्शन वाले कृषि जिलों को शामिल करना है।
  • क्रियान्वयन: यह योजना राज्यों के साथ मिलकर चलाई जाएगी।
  • वित्तीय परिव्यय: इस योजना के लिए 6 वर्षों तक 24,000 करोड़ रुपये का वार्षिक परिव्यय निर्धारित किया गया है।

योजना की मुख्य विशेषताएं

विशेषताविवरण
शुभारंभकर्ताप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रारंभ तिथिआज (दिए गए संदर्भ के अनुसार)
समन्वित योजनाएं11 विभागों की 36 योजनाएं
बजट घोषणाबजट 2025-26
मंजूरी16 जुलाई 2025
वार्षिक परिव्यय₹24,000 करोड़ (6 वर्षों के लिए)

सरकार की प्रतिबद्धता

यह योजना केंद्र सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है जिसके तहत वह कई लाभकारी और कल्याणकारी योजनाओं को चलाकर करोड़ों किसानों को लाभ पहुंचा रही है। यह समन्वित योजना किसानों के जीवन को बेहतर बनाने और भारतीय कृषि को अधिक टिकाऊ एवं उत्पादक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।