होम ब्लॉग पेज 29

UKSSSC कथित पेपर लीक। सीएम धामी ने मान ली युवाओं की बड़ी मांग

उत्तराखंड में बेरोजगार युवाओं की एक बड़ी मांग को आखिरकार धामी सरकार ने मान लिया है। धामी सरकार ने एसआईटी की निगरानी का जिम्मा रिटायर्ड जज यूसी ध्यानी को दे दिया है। पहले ये जिम्मा बीएस वर्मा के पास था। सरकार ने अब एसआईटी की निगरानी का जिम्मा रिटायर्ड जज ध्यानी को देने का फैसला किया है।

वक्त न होने का दिया हवाला

आपको बता दें कि पहले धामी सरकार ने प्रारंभ में यह जिम्मेदारी न्यायमूर्ति बी.एस. वर्मा (सेवानिवृत्त) को सौंपने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने समयाभाव और निजी कारणों से असमर्थता जताई। इसके बाद राज्य सरकार ने न्यायमूर्ति यू.सी. ध्यानी को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया।

राज्य सरकार ने स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा-2025 में कथित नकल के आरोपों की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति यू.सी. ध्यानी (उच्च न्यायालय, नैनीताल) की अध्यक्षता में एक एकल सदस्यीय जांच आयोग के गठन की घोषणा की है। यह निर्णय जनहित एवं लोक महत्व को ध्यान में रखते हुए सम्यक् विचारोपरांत लिया गया है।

ज्ञात हो कि 21 सितम्बर 2025 को आयोजित परीक्षा के दौरान नकल की शिकायतें सामने आई थीं। इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने जांच आयोग अधिनियम, 1952 की धारा 3 के तहत न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।

एक्सपर्ट की सलाह लेने की स्वतंत्रता

जारी आदेश के अनुसार, आयोग को अन्य अधिकारियों व विशेषज्ञों का सहयोग लेने की स्वतंत्रता होगी। आयोग का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण राज्य रहेगा तथा वह विभिन्न स्रोतों से प्राप्त शिकायतों, सूचनाओं और तथ्यों का परीक्षण करेगा।

इसके अतिरिक्त आयोग, 24 सितम्बर 2025 को गठित विशेष जांच दल (SIT) की आख्या का संज्ञान लेकर आवश्यकतानुसार उसे विधिसम्मत मार्गदर्शन भी प्रदान करेगा। सरकार ने अपेक्षा की है कि आयोग शीघ्रातिशीघ्र अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा।

सीएम धामी की दो टूक, नहीं बदलने देंगे देवभूमि का मूल स्वरूप, हरिद्वार को बनाएंगे भव्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को तीर्थ नगरी हरिद्वार से पवित्र छड़ी यात्रा को अधिष्ठात्री माया देवी मंदिर के प्रांगण से वैदिक विधि विधान और मंत्रोच्चार के साथ उत्तराखंड के चारों धामों के लिए रवाना किया। मुख्यमंत्री ने पवित्र छड़ी को रवाना करने से पूर्व पवित्र छड़ी का अभिषेक करते हुए माया देवी मंदिर में महामाया देवी की पूजा अर्चना भी की तथा सभी संतगणों का माल्यार्पण कर सम्मान किया तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री ने आदि गुरू शंकराचार्य द्वारा प्रारंभ की गई पवित्र छड़ी यात्रा में सम्मिलित होना अपना सौभाग्य बताया। उन्होंने कहा आठवीं शताब्दी में आदि गुरू ने संपूर्ण भारतवर्ष में अद्वैत वेदांत का संदेश फैलाने का जो महान कार्य किया, उसकी गूंज आज भी हमें अपनी जड़ों से जोड़ती है। उन्होंने कहा पवित्र छड़ी की पूजा-अर्चना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं बल्कि ये हमारी सनातन संस्कृति की व्यापकता का जीवंत प्रमाण है।

उत्तराखंड की विविधता का प्रतीक है छड़ी

मुख्यमंत्री ने कहा ये यात्रा उत्तराखंड की अद्भुत विविधता और एकता का भी प्रतीक है क्योंकि कुमाऊं से गढ़वाल तक, ऊंचे हिमालय से लेकर गंगा-यमुना के तराई क्षेत्रों तक, हर जगह यह पवित्र छड़ी हमें जोड़ती है। जब ये छड़ी हमारे पहाड़ों, वनों, नदियों और घाटियों से गुजरती है, तो ऐसा लगता है मानो स्वयं माता भगवती और भगवान शंकर हमारे साथ चल रहे हों। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 70 वर्ष पूर्व कतिपय कारणों से पवित्र छड़ी यात्रा का संचालन अवरूद्ध हो गया था, परन्तु 2019 में श्रीमहंत हरिगिरि महाराज के अथक प्रयासों से ये यात्रा पुनः प्रारंभ हुई।
उन्होंने कहा कि हमारे संतो का बद्री केदार क्षेत्र के साथ ही अन्य सीमांत क्षेत्रों में रोजगार, स्वरोजगार के साथ आर्थिक विकास की सोच को आगे बढाने के साथ ही समाज के समग्र विकास की चिन्ता करना, हर किसी के जीवन में बदलाव लाने की सोच रखना बडी बात है, जहां ऐसी सोच के साथ संत निवास करते है, उस समाज व देश को आगे बढने, नई पहचान दिलाने से कोई रोक नही सकता।

धर्म केवल अनुष्ठान तक सीमित नहीं

मुख्यमंत्री ने कहा आज देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास के साथ-साथ सनातन संस्कृति के संरक्षण और पुनरुत्थान का कार्य चल रहा है। उन्होंने कहा कि धर्म का अर्थ केवल अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि ये हमारे आचरण, हमारे कर्म और हमारी जीवनशैली में झलकना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में काशी विश्वनाथ, महाकाल लोक, बद्रीनाथ, केदारनाथ आदि धामों के पुनर्निमाण के साथ- साथ अयोध्या में भगवान राम के भव्य और दिव्य मंदिर का निर्माण इसका स्पष्ट प्रमाण है। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री ने ही प्रथम ध्वजवाहक बनकर आदि कैलाश यात्रा को पूरे विश्व में प्रसिद्धि दिलाने का काम भी किया है।

प्रधानमंत्री ने माणा के साथ देश के सीमांत गांवों को पहला गांव बनाया है। घोस्ट विलेजों के विकास के लिए वाइब्रेट विलेज योजना के माध्यम से विकास के नये द्वार खोले जा रहे है। प्रधानमंत्री जी ने 17500 फुट की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश की यात्रा कर इसे नई पहचान दिलाई है आज हजारों लोग यहां आ रहे हैं। 2014 से पहले तक तिब्बत से जुडे सीमांत क्षेत्रों में सड़क नहीं बनाई जाती थी। आज तिब्बत सीमा तक सड़कों का तेजी से निर्माण हो रहा है कैलाश के दर्शन भारत भूमि से हो रहे हैं। नाबीढांग, गुंजी, व्यास, चौंदास, दारमा, नेलांग, जादुंग क्षेत्रों का तेजी से विकास हो रहा है।

भव्य रूप में नजर आएगी हरिद्वार नगरी

उन्होंने कहा कि हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर के निर्माण के बाद धर्मनगरी हरिद्वार भी काशी और अयोध्या की भांति अपने भव्य स्वरूप में नजर आएगी। वर्ष 2027 में हरिद्वार में कुंभ का आयोजन भी होना है, इसकी अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुंभ को भव्य व दिव्य रूप से आयोजित किया जायेगा। इसके लिए सभी अखाड़ों के प्रतिनिधियों से सुझाव लिये जा रहे है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार के विकास की जो भी योजनायें बनाई जायेंगी उसमें स्थानीय लोगों की सहमति का ध्यान रखा जाएगा। हरिद्वार धर्म नगरी है इसके भव्य स्वरूप देश दुनिया के सामने आये इसके भी प्रयास किये जायेंगे।

जारी रहेगा अभियान, नहीं बिगड़ने देंगे देवभूमि का स्वरूप

उन्होंने कहा कि देवभूमि का मूल स्वरूप बना रहे इसके लिए ऑपरेशन कालनेमि जैसे धर्म के मार्ग को अवरूद्ध करने वाले कारणों को दूर करने का हमारा प्रयास जारी रहेगा। हमें देश में चलाए जा रहे लैंड जेहाद, लव जेहाद, थूक जेहाद, अवैध मजार जेहाद, नशा जेहाद, धर्मांतरण जेहाद, डेमोग्राफिक जेहाद, अवैध मदरसा जेहाद और वोट जेहाद जैसे षड्यंत्रों से सावधान रहना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा प्रदेश सरकार उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने के अपने ’’विकल्प रहित संकल्प’’ के साथ निरंतर कार्य कर रही है और इस संकल्प को पूर्ण करने के लिए आप सभी साधु-संतों, महंतों का आशीर्वाद इसी तरह बना रहना चाहिए।

इस अवसर पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री महन्त हरि गिरि ने बताया कि जूना अखाड़े से पवित्र छड़ी यमुनोत्री, गंगोत्री होते हुए केदारनाथ और बद्रीनाथ जाएगी। बद्रीनाथ से यह छड़ी कुमाऊं मंडल के विविध तीर्थ स्थलों से होते हुए हरिद्वार जूना अखाड़े में वापस आएगी और माया देवी के मंदिर में प्रतिष्ठित की जाएगी। इससे पहले यह छड़ी बागेश्वर कुमाऊं मंडल से चारों धामों के लिए निकलती थी और कई सालों से यह छड़ी यात्रा बंद थी। सन् 2021 में हरिद्वार में होने वाले कुंभ को देखते हुए इस छड़ी के मार्ग में बदलाव किया गया है।

बड़ी ख़बरः डोईवाला फ्लाईओवर पर भीषण आग का शिकार हुई एंबुलेंस

देहरादून: शनिवार को देहरादून के डोईवाला फ्लाईओवर पर एक बड़ा हादसा होते-होते बच गया, जब एक चलती एंबुलेंस में अचानक आग लग गई। यह एंबुलेंस पौड़ी के श्रीनगर बेस हॉस्पिटल से एक मरीज़ को लेकर देहरादून जा रही थी। आग इतनी तेज़ी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरी एंबुलेंस जलकर खाक हो गई। हालांकि, गनीमत रही कि इस दौरान कोई जनहानि नहीं हुई और मरीज़ को सुरक्षित बचा लिया गया।

मरीज़ को सुरक्षित निकाला गया

आग लगते ही एंबुलेंस के कर्मचारियों ने तुरंत समझदारी दिखाते हुए मरीज़ को पास चल रही एक दूसरी गाड़ी में सुरक्षित शिफ्ट कर दिया। इस त्वरित कार्रवाई से एक बड़ी त्रासदी टल गई। जब तक दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची, तब तक एंबुलेंस पूरी तरह आग की लपटों में घिर चुकी थी।

सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर से एंबुलेंस की सुरक्षा और रखरखाव से जुड़े मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह एक चिंता का विषय है कि मरीज़ों को जीवन-रक्षक सेवा देने वाली गाड़ियाँ खुद ही असुरक्षित हैं। अधिकारियों को इस बात की जांच करने की ज़रूरत है कि क्या एंबुलेंस का नियमित रखरखाव और सुरक्षा जांच सही तरीके से हो रही है। इस तरह की घटनाएँ भविष्य में न हों, इसके लिए सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।

यह हादसा बताता है कि आपातकालीन सेवाओं के वाहनों की फिटनेस और सुरक्षा जांच कितनी महत्वपूर्ण है। भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एंबुलेंस सुरक्षा प्रोटोकॉल को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

उत्तराखंड। आज की सबसे बड़ी खबर। हाकम सिंह फिर गिरफ्तार, कर रहा था बड़ी प्लानिंग, पुलिस ने ऐसे पकड़ा

उत्तराखंड से आज की सबसे बड़ी खबर आ रही है। पुलिस ने उत्तराखंड नकल विरोधी कानून के तहत नकल माफिया हाकम सिंह को फिर एक बार गिरफ्तार कर लिया है। हाकम फिलहाल बेल पर था।

हाकम सिंह को पुलिस ने किया गिरफ्तार

नकल माफिया हाकम सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। हाकम सिंह के साथ ही उसका एक साथी भी पुलिस के हत्थे चढ़ा है। दोनों के ऊपर परीक्षा में पास कराने के लिए प्रलोभन देने का आरोप है। पुलिस ने इन दोनों को नकल विरोधी कानून के तहत गिरफ्तार किया है।

हाकम की थी बड़ी प्लानिंग, लाखों में हो रही थी डील

पुलिस के मुताबिक हाकम सिंह ने बड़ी प्लानिंग की थी। हाकम सिंह ने एक गिरोह बना रखा था। ये गिरोह प्रतियोगी परीक्षा में बैठने वाले अभ्यर्थियों को पास कराने का प्रलोभन देता था। पुलिस के अनुसार हाकम सिंह ने अभ्यर्थियों को उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की परीक्षा में पास कराने का प्रलोभन दिया था। इसके एवज में 12 से 15 लाख रुपए में सौदा हो रहा था। हालांकि पुलिस को इस बारे में भनक मिल गई और हाकम पुलिस के हाथ लग गया।

अगर अभ्यर्थी खुद ही पास हुआ तो भी…

पुलिस सूत्रों के मुताबिक हाकम सिंह ने अपना काम काज का तरीका बदल लिया है। अब तो नकल कराने की जगह युवाओं को झांसा देने में लगा हुआ है। हाकम सिंह जिन अभ्यर्थियों को पास कराने के नाम पर 12 से 15 लाख रुपए ऐंठ रहा था अगर वो अभ्यर्थी खुद ही पास हो जाते तो हाकम सिंह उनके पैसे हड़प जाने की तैयारी में था।

माफिया है हाकम सिंह

आपको बता दें कि हाकम सिंह नकल माफिया के तौर पर पहचाना जाता है। UKSSSC की परीक्षाओं में उसने बड़े पैमाने पर नकल कराई है और पैसे लेकर अभ्यर्थियों को पास कराया है। इसके पहले भी हाकम सिंह पुलिस की गिरफ्त में आ चुका है। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद वो बेल पर बाहर था।

बड़ी ख़बरः मासूम से दुष्कर्म और हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करेगी उत्तराखंड सरकार

देहरादून: पिथौरागढ़ की एक मासूम के साथ 2014 में हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले में उत्तराखंड सरकार अब सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने जा रही है। सरकार ने कानूनी विशेषज्ञों के साथ गहन विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया है।

क्या था पूरा मामला?

यह घटना कांग्रेस शासनकाल के दौरान 20 नवंबर 2014 की है। पिथौरागढ़ की रहने वाली एक बच्ची हल्द्वानी के शीशमहल में रामलीला ग्राउंड में हो रही एक शादी समारोह से लापता हो गई थी। घटना के छह दिन बाद उसका शव गौला नदी से बरामद हुआ। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बच्ची के साथ दुष्कर्म और फिर हत्या की पुष्टि हुई। इस जघन्य अपराध ने लोगों को आक्रोशित कर दिया था। उस समय प्रदेश की कानून-व्यवस्था के खिलाफ जगह-जगह जोरदार प्रदर्शन हुए थे।

आरोपी को मिली थी फांसी की सजा

पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी अख्तर अली सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। मार्च 2016 में, स्पेशल कोर्ट ने मुख्य आरोपी अख्तर अली को फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद 2019 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा था।

सुप्रीम कोर्ट से बरी हुआ आरोपी

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्णय में आरोपी अख्तर अली को बरी कर दिया है, जिसके बाद सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। अब सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करके न्याय की लड़ाई जारी रखेगी।

ये वीडियो भी देखेंः

सतपाल महाराज ने दिए निर्देशः टपकेश्वर मंदिर में बनेगा फोल्डिंग ब्रिज, क्षतिग्रस्त इलाकों का किया दौरा

देहरादून में भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने से प्रभावित क्षेत्रों में हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए प्रदेश के लोक निर्माण और सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने लगातार दूसरे दिन भी दौरा किया। उन्होंने सड़कों और पुलों की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण किया और मरम्मत कार्यों में तेजी लाने के लिए अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए।

प्रमुख स्थानों का दौरा और आवश्यक निर्देश

निरीक्षण के दौरान, मंत्री सतपाल महाराज ने राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 07, उत्तरांचल यूनिवर्सिटी, झाझरा सेतु, और किमाड़ी-मसूरी रोड पर स्थित गजियावाला में क्षतिग्रस्त सिंचाई नहर का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य करने के निर्देश दिए ताकि प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन जल्द से जल्द बहाल हो सके।

टपकेश्वर मंदिर में पुल लगाने के निर्देश

मंत्री ने टपकेश्वर महादेव मंदिर में हुई क्षति का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को आगामी नवरात्रि से पहले तमसा नदी के दोनों ओर स्थित मंदिरों तक पहुँचने के लिए फोल्डिंग ब्रिज (अस्थायी पुल) लगाने की संभावना तलाशने और उस पर काम करने के निर्देश दिए। यह कदम भक्तों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

यातायात बहाली में मिली सफलता

मंत्री ने बताया कि विभाग ने क्षतिग्रस्त 8 सेतुओं में से 5 को स्थाई रूप से मरम्मत कर यातायात के लिए फिर से खोल दिया है। इसके अलावा, देहरादून-मसूरी मोटर मार्ग पर शिव मंदिर के पास क्षतिग्रस्त सेतु पर बेली ब्रिज बनाकर यातायात बहाल कर दिया गया है। इस दौरान लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता राजेश कुमार शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

जॉर्ज एवरेस्ट भूमि घोटाला: आचार्य बालकृष्ण को कौड़ियों के दाम भूमि देने का आरोप, कांग्रेस ने की CBI जांच की मांग

देहरादून: उत्तराखंड कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (अ.प्रा.) गुरमीत सिंह से मुलाकात की और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस ने मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट और हरिद्वार के वैरागी कैंप की भूमि में अनियमितताओं को लेकर तत्काल कार्रवाई की मांग की। इसके साथ ही, हाल की आपदा से निपटने में सरकार की विफलता पर भी सवाल उठाए। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने किया।

30 हजार करोड़ की ज़मीन 1 करोड़ रुपये के सालाना किराए पर देने का आरोप

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मसूरी में स्थित करीब 30 हजार करोड़ रुपये की 172 एकड़ भूमि को मात्र 1 करोड़ रुपये के सालाना किराए पर आचार्य बालकृष्ण की कंपनी को दे दिया गया है। कांग्रेस के अनुसार, इस सौदे में पारदर्शिता की कमी थी और टेंडर प्रक्रिया के अंतिम चरण में नियमों को बदलकर कंपनी को लाभ पहुंचाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि इस सौदे को तुरंत रद्द किया जाए और इसकी सीबीआई जांच किसी उच्च न्यायालय के सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए।

स्थानीय निवासियों और पर्यटकों की मुश्किलें

ज्ञापन में इस बात का भी उल्लेख किया गया कि इस भूमि के अधिग्रहण के बाद से स्थानीय निवासियों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लगभग 200 साल पुराने रास्ते बंद कर दिए गए हैं, जिससे लोगों की आवाजाही पर असर पड़ा है। इसके अलावा, पर्यटकों से मनमानी वसूली और बिना अनुमति के हेलीकॉप्टर संचालन की भी शिकायतें सामने आई हैं। इन सभी अनियमितताओं से स्थानीय लोग और पर्यटक दोनों ही परेशान हैं।

वैरागी कैंप पर भी सवाल

कांग्रेस ने हरिद्वार के वैरागी कैंप की भूमि को लेकर भी चिंता जाहिर की है। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को बताया कि इस भूमि को भी उसी कंपनी को देने की तैयारी चल रही है, जिसने जॉर्ज एवरेस्ट की जमीन ली है। कांग्रेस ने मांग की है कि वैरागी कैंप की टेंडर प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए ताकि इस तरह की और अनियमितताओं को रोका जा सके।

आपदा प्रबंधन पर सरकार की विफलता

प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में आई आपदा से निपटने में राज्य सरकार की अक्षमता पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि देहरादून समेत कई प्रभावित क्षेत्रों में तीन दिनों तक बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित रही। राहत और पुनर्वास कार्य भी ठप पड़े हैं, जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कांग्रेस ने चिंता व्यक्त की कि पीने के साफ पानी की कमी और ठप पड़ी स्वास्थ्य सेवाओं के कारण जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस तैयारी नहीं दिख रही है।

मुख्यमंत्री धामी ने किया मसूरी-किमाड़ी का दौरा, राहत कार्यों का लिया जायजा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को राज्य आपदा परिचालन केंद्र से प्रदेशभर में हुई भारी बारिश से उत्पन्न हुई स्थितियों की समीक्षा की। इसके बाद उन्होंने मसूरी रोड और किमाड़ी क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर राहत कार्यों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को मुख्य सड़कों की तत्काल मरम्मत करने और यातायात को सामान्य बनाने के निर्देश दिए।

युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य

मुख्यमंत्री धामी ने निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन को सामान्य बनाने के लिए सभी संबंधित विभाग युद्धस्तर पर काम करें। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को आपदा मानकों के अनुसार तुरंत आर्थिक सहायता और मूलभूत सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। लगातार हो रही बारिश को देखते हुए मुख्यमंत्री ने उन क्षेत्रों में वैकल्पिक मार्ग और राहत शिविर स्थापित करने के निर्देश दिए, जहाँ आवागमन बाधित हो गया है।

प्रभावितों को मिलेगी त्वरित सहायता

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार आपदा की इस घड़ी में पूरी संवेदनशीलता के साथ पीड़ितों के साथ खड़ी है। उन्होंने अधिकारियों को सुनिश्चित करने के लिए कहा कि हर प्रभावित परिवार तक शीघ्र आर्थिक सहायता और अन्य जरूरी मदद पहुंचे। उनका उद्देश्य है कि प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन जल्द से जल्द पटरी पर लौटे और लोगों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

मुख्यमंत्री के साथ मौजूद रहे कैबिनेट मंत्री और अधिकारी

इस मौके पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रोहिल्ला, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडेय, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल, एसएसपी अजय सिंह और जिला प्रशासन के अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। सभी ने मिलकर राहत कार्यों की प्रगति की समीक्षा की और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की।

Chamoli Cloudburst: कुदरत के कहर के बीच, एक्शन में सीएम धामी, राहत-बचाव पर रख रहे पैनी नज़र

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को आईटी पार्क स्थित राज्य आपदा परिचालन केंद्र से प्रदेश भर में अत्यधिक बारिश से प्रभावित क्षेत्रों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से चमोली जिले के नंदानगर क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित गांवों में बचाव और राहत कार्यों को तेजी से चलाने के निर्देश दिए।

चमोली में कुदरत का कहर, सरकार एक्शन में

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा परिचालन केंद्र से प्रदेश में हो रही भारी बारिश के कारण प्रभावित क्षेत्रों की समीक्षा की। इस दौरान उनका खास ध्यान चमोली के नंदानगर क्षेत्र पर रहा, जहां प्राकृतिक आपदा ने कहर बरपाया है। उन्होंने तुरंत राहत और बचाव कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए, ताकि प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द मदद पहुंचाई जा सके।

घायलों को तत्काल एयरलिफ्ट करने का आदेश

आपदा की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री ने चमोली के जिलाधिकारी संदीप तिवारी से हालात की जानकारी ली। उन्होंने गंभीर रूप से घायल लोगों को तुरंत बेहतर इलाज के लिए ऋषिकेश स्थित एम्स में एयरलिफ्ट करने का आदेश दिया। मुख्यमंत्री ने सुबह से ही लगातार जिला प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क बनाए रखा और राहत कार्यों की निगरानी करते रहे।

बुनियादी सुविधाएं बहाल करने की चुनौती

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भारी बारिश से प्रभावित इलाकों में सड़क, पानी, बिजली और नेटवर्क कनेक्टिविटी को जल्द से जल्द बहाल किया जाए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि प्रभावित लोगों के लिए रहने की जगह, भोजन, साफ पानी और अन्य जरूरी चीजों की सही व्यवस्था हो। साथ ही, हर प्रभावित क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में डॉक्टर और दवाइयां भी उपलब्ध रहें।

हर परिवार तक पहुंचेगी मदद

नंदानगर में घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस बल तुरंत हरकत में आए और बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। फिलहाल, राहत और बचाव कार्य पूरे तालमेल और तत्परता के साथ जारी हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि प्रभावित गांवों के हर परिवार तक राहत सामग्री बिना किसी देरी के पहुंचाई जाए।

देहरादून से बड़ी ख़बर: जानिए किसने लगाया सरकार को करोड़ों का चूना! नदी का रुख मोड़कर बना दिया रिसॉर्ट!

देहरादून में आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बहाली का काम युद्धस्तर पर जारी है। इसी क्रम में, जिलाधिकारी सविन बंसल ने मालदेवता क्षेत्र का दौरा किया, जहां उन्होंने आपदा से हुए नुकसान का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने किसनपुर बांडावाली में एक रिसॉर्ट मालिक द्वारा नदी का रुख मोड़ने और अनाधिकृत निर्माण करने का गंभीर मामला पाया, जिसके कारण सरकारी संपत्ति को करोड़ों का नुकसान हुआ है। जिला प्रशासन ने इस मामले में कठोर कार्रवाई करने का फैसला किया है।

करोड़ों का नुकसान: अनाधिकृत निर्माण से बह गई सड़क

जिलाधिकारी के निरीक्षण में यह सामने आया कि किसनपुर बांडावाली में एक रिसॉर्ट मालिक ने नदी की धारा को अवैध रूप से मोड़ दिया था। इस अनाधिकृत निर्माण की वजह से करीब 150 मीटर सड़क पूरी तरह से बह गई, जिससे लगभग 6 करोड़ रुपये की सरकारी संपत्ति का नुकसान हुआ है। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए, जिलाधिकारी सविन बंसल ने मामले की उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बहाल हो रही हैं जरूरी सुविधाएं

आपदा के बाद फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने के काम को पूरा करने के बाद, अब जिला प्रशासन का पूरा ध्यान प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं को बहाल करने पर है। जिलाधिकारी सविन बंसल और मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बुधवार को मालदेवता, द्वारा पुल, खैरी धनौला, किसनपुर बांडावाली और कोठालगेट जैसे क्षेत्रों का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने लोक निर्माण विभाग (PWD) को क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों की मरम्मत का काम जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

कोठालगेट पर वैली ब्रिज से मिली मसूरी को राहत

देहरादून-मसूरी मोटर मार्ग पर कोठालगेट के पास पुल के क्षतिग्रस्त होने से मसूरी का संपर्क कट गया था। इस समस्या को तुरंत हल करने के लिए, जिलाधिकारी ने युद्धस्तर पर वैली ब्रिज बनाने के निर्देश दिए थे। उनकी नियमित निगरानी और प्रयासों से अल्प समय में ही वैली ब्रिज का निर्माण पूरा हो गया है, जिससे हल्के वाहनों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है। इस कदम से मसूरी और उसके आसपास के निवासियों को बड़ी राहत मिली है।

सड़कों और पुलों की मरम्मत का काम जारी

जिला प्रशासन ने क्षतिग्रस्त हुई अन्य सड़कों और पुलों की मरम्मत के काम में भी तेजी लाई है। कुमाल्डा में द्वारा झूला पुल की एप्रोच ठीक करके यातायात बहाल कर दिया गया है। इसी तरह, मालदेवता केशरवाला में वॉसआउट हुए मोटर मार्ग को भी वायरक्रेट लगाकर ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी जगहों पर नदी को चैनलाइज़ करने और जल्द से जल्द सड़कों का पुनर्निर्माण करने के लिए PWD को सख्त निर्देश दिए गए हैं।