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बड़ी ख़बरः देहरादून-मसूरी हाईवे खुला, 48 घंटों में बेली ब्रिज बनकर तैयार

भारी बारिश के कारण देहरादून-मसूरी राजमार्ग पर शिव मंदिर के पास पुल टूट जाने से यातायात बाधित हो गया था, जिससे कई पर्यटक और स्थानीय लोग फंस गए थे। हालांकि, लोक निर्माण विभाग (PWD) ने रिकॉर्ड समय में एक बेली ब्रिज का निर्माण कर दिया है, जिससे अब छोटे वाहनों के लिए मार्ग खोल दिया गया है। इससे फंसे हुए लोगों को बड़ी राहत मिली है।

युद्धस्तर पर चला बेली ब्रिज का निर्माण कार्य

जब पुल ढह गया, तो जिलाधिकारी सविन बंसल ने अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि मसूरी मार्ग एक महत्वपूर्ण मार्ग है और इसे जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए। इसके बाद, लोनिवि की टीम ने ऋषिकेश से लाए गए बेली ब्रिज को स्थापित करने के लिए युद्धस्तर पर काम शुरू किया। मंगलवार की देर रात शुरू हुआ यह काम बुधवार की देर रात तक पूरा हो गया।

क्यों बना बेली ब्रिज?

बेली ब्रिज एक प्रकार का अस्थायी और पोर्टेबल पुल होता है, जिसे विशेष रूप से आपातकालीन स्थितियों में जल्दी से स्थापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। चूंकि मुख्य पुल पूरी तरह से टूट चुका था और एक नया पुल बनाने में काफी समय लगता, ऐसे में बेली ब्रिज सबसे तेज़ और सबसे प्रभावी समाधान साबित हुआ।

पर्यटकों और स्थानीय लोगों को मिली राहत

पुल टूटने के बाद, कई पर्यटक मसूरी में ही फंस गए थे। इसके अलावा, स्थानीय लोगों के लिए भी दैनिक आवागमन बहुत मुश्किल हो गया था। बेली ब्रिज के शुरू होने से अब छोटे वाहन आसानी से आ-जा सकते हैं, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली है।

जिलाधिकारी ने किया निरीक्षण

निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लेने के लिए बुधवार शाम को जिलाधिकारी सविन बंसल स्वयं मसूरी रोड पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों को काम में तेजी लाने का निर्देश दिया और कहा कि यातायात को जल्द से जल्द बहाल करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

अब होगी नए पुल की शुरुआत

बेली ब्रिज भले ही अस्थायी समाधान है, लेकिन इसने तुरंत यातायात को सुचारु कर दिया है। अब लोनिवि बेली ब्रिज के नीचे से एक नए स्थायी पुल के निर्माण की योजना बनाएगा। इस नए पुल के बनने के बाद, मसूरी मार्ग पर आवागमन पूरी तरह से सामान्य हो जाएगा और भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचा जा सकेगा।

भीषण भूस्खलन की चपेट में आने से बाल-बाल बचे सांसद अनिल बलूनी

देहरादून: उत्तराखंड में आई भीषण आपदा के बीच प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने पहुंचे सांसद अनिल बलूनी और विधायक विनोद कंडारी बाल-बाल बच गए। देवप्रयाग में आपदा से हुए नुकसान का जायजा लेने जाते समय उनका वाहन भूस्खलन की चपेट में आ गया, जिससे वे मलबे में फंस गए। हालांकि, गनीमत रही कि इस घटना में कोई भी घायल नहीं हुआ।

देवप्रयाग के पास हुआ हादसा

सांसद अनिल बलूनी और विधायक विनोद कंडारी देवप्रयाग डिग्री कॉलेज के पास से गुजर रहे थे, तभी अचानक पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा गिर गया। उनका सरकारी वाहन इस मलबे में फंस गया। यह दृश्य इतना भयावह था कि सांसद ने खुद इसे सोशल मीडिया पर साझा करते हुए उत्तराखंड की वर्तमान स्थिति को ‘भीषण प्राकृतिक आपदा’ बताया।

सुरक्षित बाहर निकले और जारी रखा दौरा

हादसे के बाद सांसद बलूनी को तहसीलदार के वाहन से देवप्रयाग तक पहुंचाया गया। उन्होंने अपने तयशुदा सभी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और प्रभावितों से मुलाकात की। सभी कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद वे एक निजी वाहन से देहरादून के लिए रवाना हुए। इस बीच, एनएच प्रशासन ने उनके सरकारी वाहन को मलबे से निकालने का काम शुरू कर दिया था।

राहत कार्यों की सराहना और लोगों से अपील

सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि इस साल उत्तराखंड में भारी बारिश और भूस्खलन ने जो गहरे घाव दिए हैं, उन्हें भरने में काफी समय लगेगा। उन्होंने बाबा केदारनाथ से सभी लोगों की सुरक्षा और खुशहाली की कामना की। उन्होंने आपदा की इस घड़ी में दिन-रात राहत कार्यों में जुटे अधिकारियों, एनडीआरएफ-एसडीआरएफ के जवानों, प्रशासन और सड़क से मलबा हटाने वाले कर्मचारियों के सेवाभाव की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह समय एकजुट होकर इस आपदा का सामना करने का है।

चमोली में बादल फटा: नंदानगर क्षेत्र में भारी तबाही, 10 लोग लापता, यहां देखें सूची

चमोली, उत्तराखंड: उत्तराखंड के चमोली ज़िले में कुदरत का कहर जारी है। बुधवार देर रात नंदानगर विकासखंड में बादल फटने से भारी तबाही मची। इस आपदा में अब तक 10 लोगों के लापता होने की खबर है, जबकि एक शव बरामद हुआ है। पुलिस-प्रशासन, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार बचाव और राहत कार्यों में जुटी हुई हैं।

रात में घरों पर कहर बनकर गिरा मलबा

रात करीब 1 बजे फाली लगा कुंतरी, सैंती लगा कुंतरी, धुर्मा और सेरा गांवों में भारी बारिश और बिजली गिरने के बाद लोगों के घरों पर मलबा आ गया। सबसे ज़्यादा प्रभावित गांव कुंतरी लगा फाली है, जहाँ से 8 लोग लापता हैं और 15-20 घर और गौशालाएं पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गईं हैं। रात के अंधेरे में जब मलबा घरों में घुसा, तो लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों से बाहर भागे। पुलिस और डीडीआरएफ की टीमों ने मलबे से दो महिलाओं और एक बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला।

लापता लोगों के नाम

इस आपदा में अब तक 10 लोगों के लापता होने की सूचना है। इनमें से 8 लोग कुंतरी लगा फाली गांव के हैं, जिनके नाम इस प्रकार हैं:

  • कुंवर सिंह (42 वर्ष)
  • कांता देवी (38 वर्ष)
  • विकास (10 वर्ष)
  • विशाल (10 वर्ष)
  • नरेंद्र सिंह (40 वर्ष)
  • जगदंबा प्रसाद (70 वर्ष)
  • भागा देवी (65 वर्ष)
  • देवेश्वरी देवी (65 वर्ष)

इसके अलावा, धुरमा गांव से दो लोग लापता हैं:

  • गुमान सिंह (75 वर्ष)
  • ममता देवी (38 वर्ष)

सड़कें और पुल भी बहे, संपर्क टूटा

भारी बारिश के कारण कई जगह सड़कें बंद हो गई हैं और गांवों का संपर्क कट गया है। मोक्ष गाड़ गदेरा में उफान आने से सेरा गांव के कई मकान बह गए। नंदप्रयाग-नंदानगर मोटर पुल भी खतरे की जद में आ गया है। इसके अलावा, पेट्रोल पंप और पुराने बाजार को जोड़ने वाला पुल भी बह गया है। थराली क्षेत्र और सोल घाटी के आसपास के गांवों में भी जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

बचाव कार्य जारी

जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने बताया कि एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं। बचाव कार्य तेजी से चलाया जा रहा है। मेडिकल टीमें और एंबुलेंस भी प्रभावित क्षेत्रों में भेज दी गई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस घटना पर दुख जताते हुए ट्वीट किया है कि वह स्वयं स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और स्थानीय प्रशासन लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है।

रूट डायवर्ट को लेकर बड़ी ख़बरः जानिए भारी बारिश के बीच कहां डायवर्ट किया गया ट्रैफिक!

देहरादून और उसके आसपास के क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश ने सामान्य जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। विशेष रूप से मसूरी की ओर जाने वाले मार्ग और सहस्रधारा क्षेत्र में कई जगहों पर भूस्खलन और जलभराव की समस्या सामने आई है। जिला प्रशासन ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों से अपील की है कि वे अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, आज यात्रा करने से बचें।

मसूरी मार्ग पर यातायात अवरुद्ध

देहरादून से मसूरी की ओर जाने वाला मुख्य मार्ग तेज बारिश के कारण बंद हो गया है। प्रेम नगर क्षेत्र में, नंदा की चौकी के पास एक पुल के क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली है, जिसके चलते यातायात को मोड़ दिया गया है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे इस मार्ग पर यात्रा करने से बचें।

सहस्रधारा रोड पर बादल फटने से जलभराव

सहस्रधारा रोड पर कई स्थानों पर जलभराव और बादल फटने जैसी घटना की खबरें आई हैं। इसके कारण सड़क पर यातायात में आंशिक रुकावट आई है। प्रशासन ने इस क्षेत्र में भी अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है।

नेपाली फार्म-देहरादून के बीच पुल क्षतिग्रस्त

नेपाली फार्म और देहरादून के बीच भी कुछ स्थानों पर पुलों को नुकसान पहुंचा है। इससे इस मार्ग पर आवागमन में बाधा आई है। प्रशासन स्थिति को सामान्य करने के लिए काम कर रहा है।

प्रशासन की यात्रियों से खास अपील

इन गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए, देहरादून के एसपी ट्रैफिक ने एक विशेष अपील जारी की है। इसमें देहरादूनवासियों और बाहर से आए पर्यटकों से कहा गया है कि वे यथासंभव अपने निवास स्थानों पर ही रहें। केवल अति आवश्यक परिस्थितियों में ही बाहर निकलें।

इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर जारी

किसी भी आपातकालीन स्थिति या जानकारी के लिए प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। आप देहरादून पुलिस कंट्रोल रूम से 112 और ट्रैफिक कंट्रोल रूम से 7579278154 पर संपर्क कर सकते हैं। प्रशासन स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है और सभी जरूरी कदम उठा रहा है।

आसन नदी में जलप्रलय: ट्रैक्टर-ट्रॉली समेत 14 लोग बहे, 6 की मौत, लापता लोगों की तलाश जारी

देहरादून: उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश के बाद आसन नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। परवल गांव के पास नदी में अचानक आई बाढ़ में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सवार 14 लोग बह गए। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। इस घटना में अब तक एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 12 लोग अभी भी लापता हैं। बचाव दल और पुलिसकर्मी लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं।

कैसे हुआ हादसा?

यह दुखद घटना सुबह के समय हुई, जब सभी लोग एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सवार होकर नदी पार कर रहे थे। अचानक से नदी का जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि वे संभल नहीं पाए और बाढ़ के तेज बहाव में बह गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी बारिश के कारण नदी पहले से ही उफान पर थी, लेकिन इतनी तेजी से जलस्तर का बढ़ना अप्रत्याशित था। ट्रैक्टर चालक की इस हादसे में मौत हो गई है और उसका शव नदी से बरामद कर लिया गया है। वहीं, एक अन्य व्यक्ति को घायल अवस्था में बचाया गया है।

बचाव कार्य में चुनौतियाँ

घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुँच गए। हालांकि, नदी के तेज बहाव और लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण बचाव कार्य में काफी दिक्कतें आ रही हैं। पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय लोग मिलकर लापता 12 लोगों की तलाश कर रहे हैं। इस दुखद घटना ने पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल बना दिया है, और हर कोई अपने लापता परिजनों के सकुशल लौटने की कामना कर रहा है।

प्रशासन ने की अपील

इस घटना के बाद, स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे भारी बारिश के दौरान नदी-नालों के पास जाने या उन्हें पार करने से बचें। प्रशासन का कहना है कि मौसम विभाग ने अभी और बारिश की चेतावनी जारी की है, ऐसे में सभी को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। स्थानीय प्रशासन इस आपदा से निपटने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है और लापता लोगों की तलाश जारी है।

आम आदमी को राहतः Mother Dairy के दूध के दामों में बदलाव, जानिये अब कितनी हुई कीमत!

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Mother Dairy ने अपने ग्राहकों को बड़ी राहत देते हुए दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती का ऐलान किया है। कंपनी ने यह फैसला हाल ही में जीएसटी काउंसिल द्वारा पैकेज्ड दूध पर लगाए जाने वाले 5% टैक्स को खत्म किए जाने के बाद लिया है। इस कटौती का सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा।

22 सितंबर से मिलेंगे सस्ते उत्पाद

कंपनी ने बताया है कि दूध की नई दरें 22 सितंबर से प्रभावी होंगी। दूध के साथ-साथ Mother Dairy के अन्य उत्पादों के दाम भी कम होंगे। यह कदम जीएसटी में हुई कटौती का लाभ सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए उठाया गया है, जिससे रोजमर्रा के खर्चों में कुछ बचत हो सकेगी।

जीएसटी काउंसिल का ऐतिहासिक फैसला

हाल ही में हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में कई रोजमर्रा की चीजों पर टैक्स दरों में कमी की गई है। इस बैठक में सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक पैकेज्ड दूध पर लगने वाले 5% टैक्स को हटाकर शून्य करना था। इस फैसले के बाद अब पैकेज्ड दूध पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।

टैक्स कटौती का सीधा असर

जीएसटी में हुई इस कटौती के बाद कई खाद्य पदार्थों और रसोई के सामानों को 5% के स्लैब में लाया गया है। वहीं, पैकेज्ड दूध को पूरी तरह से टैक्स फ्री कर दिया गया। इसी फैसले का पालन करते हुए मदर डेयरी ने तुरंत दूध की कीमतों में कमी का ऐलान किया है, जिससे ग्राहकों को इसका लाभ मिल सके।

देहरादून: जलभराव के कारण देवभूमि इंस्टीट्यूट में फंसे 200 छात्र, ऐसे किया गया रेस्क्यू

देहरादून: पौंधा स्थित देवभूमि इंस्टीट्यूट परिसर में अचानक हुए जलभराव ने लगभग 200 छात्र-छात्राओं को संकट में डाल दिया। इस घटना की सूचना तुरंत SDRF को दी गई, जिसके बाद SDRF की एक टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

SDRF ने चलाया तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन

जलभराव की सूचना मिलते ही SDRF वाहिनी मुख्यालय से एक रेस्क्यू टीम तुरंत देवभूमि इंस्टीट्यूट के लिए रवाना हुई। टीम ने घटनास्थल पर पहुंचते ही बिना देरी किए रेस्क्यू अभियान शुरू किया। जलमग्न परिसर में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन SDRF टीम ने अपनी सूझबूझ और तेजी से काम करते हुए स्थिति को संभाला। टीम ने नावों और रस्सियों का उपयोग करके ए क-एक छात्र को सुरक्षित बाहर निकाला।

सभी छात्र सुरक्षित

SDRF टीम की त्वरित कार्रवाई और कुशलता की बदौलत सभी 200 छात्र-छात्राओं को सुरक्षित रूप से बाहर निकाल लिया गया और उन्हें एक सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया गया। SDRF उत्तराखंड ने इस चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। इस सफल ऑपरेशन के लिए SDRF की सराहना की जा रही है।

देहरादूनः धाकड़ सीएम धामी जेसीबी से आपदा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने पहुंचे

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को देहरादून के मालदेवता और केसरवाला क्षेत्र में अतिवृष्टि से हुए नुकसान का स्थलीय निरीक्षण किया। इन क्षेत्रों में भारी बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राहत और बचाव कार्यों में तेज़ी लाने और प्रभावित नागरिकों को हरसंभव सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री धामी ने दिए राहत कार्य तेज़ करने के निर्देश

निरीक्षण के दौरान, मुख्यमंत्री ने देखा कि भारी बारिश के कारण राज्य के कई हिस्सों में सड़कें, पुल और सरकारी संपत्ति बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर बंद पड़ी सड़कों को खोलने, और प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द बिजली और स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति बहाल करने के लिए कहा। उनका मानना है कि इन सेवाओं की बहाली से आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी।

सरकार और प्रशासन की सक्रियता

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार और प्रशासन की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय हैं। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ राहत, बचाव और पुनर्वास के कामों को अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए, आपदा प्रबंधन के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वे लगातार राज्य आपदा परिचालन केंद्र और विभिन्न जिलों की स्थितियों की समीक्षा कर रहे हैं, और सभी जिलाधिकारियों के साथ नियमित रूप से संपर्क में हैं।

नागरिकों की समस्याओं का तत्काल समाधान

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि प्रभावित क्षेत्रों में प्रत्येक नागरिक की समस्याओं को तत्काल प्राथमिकता के साथ हल किया जाए। उन्होंने कहा कि लोगों की सहायता करना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री के साथ विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’, गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

देहरादूनः भारी बारिश से बहे पुल, टूटा हाईवे का हिस्सा, पढ़िये कहां-कहां बारिश ने मचाई तबाही!

देहरादून में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है, जिसके चलते एसएसपी देहरादून ने दून पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा है। पुलिस हर परिस्थिति की लगातार निगरानी कर रही है और राहत एवं बचाव कार्यों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।

बारिश के कहर के चलते दून पुलिस अलर्ट मोड पर

जनपद में लगातार हो गया रही भारी बारिश के कारण एसएसपी देहरादून द्वारा दून पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा गया है, साथ ही हर परिस्थिति किसान मॉनिटरिंग करते हुए लगातार उसे दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं। रात्रि में सहस्त्रधारा क्षेत्र के कारलीगाढ़ में घरों के पास अचानक अत्यधिक पानी आने की सूचना पर पुलिस द्वारा एनडीआरएफ/ एसडीआरएफ तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर राहत एवं बचाव कार्य चलाया जा रहा है।

कारलीगाढ़ में राहत और बचाव कार्य

रात के समय सहस्त्रधारा क्षेत्र के कारलीगाढ़ में अचानक अत्यधिक पानी आने की सूचना मिली, जिससे कई घरों के पास जल स्तर बढ़ गया। सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस की मुस्तैदी से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा रहा है।

देहरादून-हरिद्वार राजमार्ग पर यातायात प्रभावित

भारी बारिश का असर देहरादून-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी देखने को मिला है। लालतप्पड़ क्षेत्र में सीमा डेंटल कॉलेज के पास पुलिया का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। इस कारण पुलिस ने इस मार्ग पर यातायात को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। देहरादून से हरिद्वार जाने वाले और आने वाले वाहनों को भानियावाला और नेपाली फार्म से डायवर्ट किया जा रहा है, ताकि लोगों को परेशानी न हो।

प्रमुख मार्गों पर भूस्खलन और जलभराव

बारिश के कारण देहरादून के कई प्रमुख मार्गों पर भूस्खलन और जलभराव की समस्या सामने आई है। रायपुर क्षेत्र में मालदेवता चौकी से आगे केशरवाला मार्ग पर नदी का जलस्तर बढ़ने से सड़क का लगभग 70-80 मीटर हिस्सा बह गया है, जिससे यातायात पूरी तरह से रुक गया है। इसके अलावा, देहरादून-मसूरी मार्ग पर कुठाल गेट सहित कई स्थानों पर मलबा आने से रास्ता बाधित हुआ था, जिसे पुलिस द्वारा जेसीबी की मदद से खुलवाया जा रहा है।

पुलिस की टीमों का नदियों के किनारे गश्त

भारी बारिश के खतरे को देखते हुए, सभी थाना क्षेत्रों में पुलिस की अलग-अलग टीमें रात से ही सक्रिय हैं। ये टीमें नदी और नालों के किनारे तथा संवेदनशील स्थानों पर लगातार गश्त कर रही हैं। लोगों को सतर्क किया जा रहा है और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए उन्हें नदियों के पास न जाने की हिदायत दी जा रही है। पुलिस का यह प्रयास लोगों को सुरक्षित रखने और किसी भी अप्रिय घटना से बचाने के लिए है।

जलभराव वाले क्षेत्रों में बचाव अभियान जारी

शहर के कुछ हिस्सों में जलभराव की सूचना मिलने के बाद पुलिस लगातार बचाव कार्य में जुटी हुई है। पुलिस की टीमें संवेदनशील स्थानों से लोगों को हटाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुँचा रही हैं। इस दौरान सावधान रहने और अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की अपील भी की गई है। पुलिस की मुस्तैदी से इस प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

Dehradun Cloudburst: देहरादून से बड़ी ख़बर सहस्त्रधारा में फटा बादल, भारी नुकसान

देहरादून के सहस्त्रधारा में देर रात 11 बजे बादल फटने की ख़बर है। बादल फटने से कई बड़े होटल और दुकानों में भारी नुकसान हुआ है।

कार्डीगाड़ में बादल फटने से देर रात मलबा आ गया जिसने भारी तबाही मचाई। बता दें कि इस वजह से 2-3 बड़े होटल और मेन मार्केट में स्थित 6-7 दुकानें धवस्त हो गईं। राहत और बचाव का काम जोरों पर चल रहा है। बादल फटने के कारण करीब 100 लोग फंस गए थे जिन्हें काफी मशक्कत के बाद गांव वालों ने उन्हें सकुशल रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया था। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि कुछ लोग लापता हो सकते हैं जिनकी तलाश की जा रही है।

हालांकि SDRF और फायर की टीम देर रात मौके के लिए रवाना हो गई थी लेकिन भारी मलबा आने के कारण वो तुरंत घटनास्थल पर नहीं पहुंच सकी। लोकनिर्माण की जेसीबी ने मौके पर पहुंच कर रास्ता खुलवाने में काफी मदद की। बादल फटने की इस घटना के बाद आईटी पार्क में काफी मलबा आ गया और सॉन्ग नदी का जलस्तर भी काफी बढ़ गया है।

आसपास रहने वाले लोगों के लिए पुलिस ने चेतावनी जारी कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा है। आईटी पार्क में भारी मात्रा में मलबा आने के कारण रास्ता बंद हो गया था जिसे SDRF और NDRF की टीम ने मौके पर पहुंचकर रास्ता खुलवाने का काम किया।

घटना की सूचना मिलते ही देहरादून के डीएम सविन बंसल ने कमान थामी और रेस्क्यू अभियान को और तेजी मिली। जिला प्रशासन ने आसपास के लोगों को रात में ही सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने का काम किया। फिलहाल NDRF, SDRF और लोकनिर्माण विभाग की मदद से रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है।