उत्तराखंड में स्वतंत्रता दिवस भव्य रूप में मनाने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में 80वें स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के सम्बन्ध में बैठक सम्पन्न हुयी। बैठक में मुख्य सचिव ने प्रदेशभर में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन करते हुए, स्वतंत्रता दिवस का भव्य आयोजन किए जाने के निर्देश दिए।
रक्तदान और पौधारोपण के कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश
मुख्य सचिव ने स्वतंत्रता दिवस में आमजन की भागीदारी सुनिश्चित किए जाने पर भी जोर दिया। कहा कि राज्य एवं जनपद स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन के साथ ही ब्लड डोनेशन कैंप, हाई एल्टीट्यूड साहसिक गतिविधियां, मैराथन, साईकिल, बाईक या कार रैली जैसे विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। उन्होंने प्रदेशभर के मुख्य शहरों के महत्त्वपूर्ण स्थलों में पुलिस, आर्मी, पैरामिलिट्री और एनसीसी के बैण्ड द्वारा संगीतमय कार्यक्रम आयोजित किए जाने की भी बात कही।
उन्होंने प्रदेशभर में जल संरक्षण – संवर्द्धन के साथ ही वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि रक्तदान एवं वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रमों को बड़े स्तर पर आयोजित किया जाए।
ध्वजारोहण का समय तय
महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी ने बताया कि मा0 मुख्यमंत्री जी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त को सुबह 10 बजे परेड ग्राउंड में ध्वजारोहण किया जाएगा। मुख्य सचिव द्वारा सचिवालय में प्रातः 9 बजे ध्वजारोहण किया जाएगा। देहरादून को छोड़कर अन्य सभी जनपदों के जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रातः 9ः30 बजे ध्वजारोहण किया जाएगा। देहरादून स्थित सभी सरकारी, गैर सरकारी भवनों पर प्रातः 9 बजे विभागाध्यक्ष/कार्यालयाध्यक्ष द्वारा ध्वजारोहण किया जाएगा।
चौराहों पर बजेंगे देशभक्ति गीत, कवि सम्मेलनों का होगा आयोजन
महानिदेशक सूचना ने बताया कि प्रदेश मुख्यालयों/जनपद मुख्यालयों के प्रमुख चौराहों पर 14 अगस्त 2026 को सायं 6 बजे से रात्रि 9 बजे तक और 15 अगस्त को प्रातः 6 बजे से पूर्वान्ह 11 बजे तक देशभक्ति के गीत लाउडस्पीकर के माध्यम से बजाए जाएंगे। प्रदेश मुख्यालय पर 14 अगस्त 2026 को कवि सम्मेलन/मुशायरा का आयोजन किया जाएगा। सरकारी भवनों और ऐतिहासिक इमारतों को कम वोल्टेज के एलईडी बल्ब से प्रकाशमान किया जाएगा।
समस्त शिक्षण संस्थाओं द्वारा प्रातः 07.00 बजे प्रभात फेरी निकाली जाएगी। तदोपरान्त अपने शिक्षण संस्थानों एवं निर्धारित स्थानों पर झण्डारोहण, राष्ट्रगान, खेलकूद, विचार गोष्ठी प्रदर्शनी, वाद-विवाद एवं निबन्ध प्रतियोगिता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
बैठक में प्रमुख सचिव एल. फैनई, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव शैलेश बगौली, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, बृजेश कुमार संत, विनय शंकर पाण्डेय, विनोद कुमार सुमन, युगल किशोर पंत, रणवीर सिंह चौहान एवं जिलाधिकारी देहरादून आशीष चौहान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
देहरादून। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून द्वारा जारी नवीनतम मौसम पूर्वानुमान के अनुसार उत्तराखण्ड में 28 एवं 29 जुलाई को कई जनपदों में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना के मद्देनज़र ऑरेंज अलर्ट (Uttarakhand Weather alert) जारी किया गया है। इसे देखते हुए उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सभी जिला प्रशासनों को पूरी सतर्कता के साथ आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
भारी वर्षा के साथ बिजली गिरने का भी अलर्ट
आईएमडी के अनुसार 28 जुलाई को उत्तरकाशी, देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, ऊधम सिंह नगर, बागेश्वर, पिथौरागढ़ एवं नैनीताल जनपदों में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। इन जनपदों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली तथा अत्यंत तीव्र वर्षा के दौर भी पड़ सकते हैं। वहीं राज्य के अन्य जनपदों में भी कहीं-कहीं भारी वर्षा और तीव्र वर्षा के दौर की संभावना बनी हुई है।
देहरादून से लेकर बागेश्वर तक मौसम रहेगा खराब
इसी प्रकार 29 जुलाई को उत्तरकाशी, देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर एवं नैनीताल जनपदों में भारी से बहुत भारी वर्षा का पूर्वानुमान है, इसे देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा उत्तरकाशी, देहरादून, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़ एवं नैनीताल में आकाशीय बिजली चमकने तथा अत्यंत तीव्र वर्षा के दौर आने की भी संभावना व्यक्त की गई है। शेष जनपदों में भी कहीं-कहीं भारी वर्षा और गरज-चमक की संभावना बनी रहेगी।
फ्लैश फ्लड की भी आशंका, सतर्क रहने की अपील
वहीं दूसरी ओर आईएमडी के राष्ट्रीय फ्लैश फ्लड गाइडेंस बुलेटिन के अनुसार अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चम्पावत, देहरादून, पौड़ी, टिहरी, नैनीताल, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग एवं उत्तरकाशी जनपदों के कुछ जलग्रहण क्षेत्रों में अगले 24 घंटों के दौरान मध्यम फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़) का जोखिम बना हुआ है। लगातार वर्षा के कारण छोटे नदी-नालों में जलस्तर बढ़ने, निचले क्षेत्रों में जलभराव तथा संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका भी जताई गई है।
आपदा प्रबंधन विभाग ने की अपील
सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने प्रदेशवासियों एवं चारधाम यात्रियों से अपील करते हुए कहा कि मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों को गंभीरता से लें तथा अनावश्यक यात्रा से बचें। यदि यात्रा अत्यंत आवश्यक हो तो मौसम एवं सड़क की अद्यतन स्थिति की जानकारी प्राप्त करने के बाद ही यात्रा करें। उन्होंने कहा कि नदी-नालों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों एवं खड़ी ढलानों के आसपास जाने से बचें तथा जिला प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
सचिव आपदा प्रबंधन विनोद सुमन ने कहा कि ऑरेंज अलर्ट के दौरान भारी से बहुत भारी वर्षा, अत्यंत तीव्र वर्षा के दौर, भूस्खलन, चट्टान गिरने, सड़कों के अवरुद्ध होने, नदी-नालों के उफान, निचले क्षेत्रों में जलभराव तथा आकाशीय बिजली जैसी घटनाएं हो सकती हैं। ऐसे में नागरिक विशेष सतर्कता बरतें और किसी भी प्रकार का जोखिम उठाने से बचें। उन्होंने लोगों से अपील की कि खराब मौसम के दौरान नदी-नालों के किनारे न जाएं, उफनते जलस्रोतों को पार करने का प्रयास न करें तथा अफवाहों पर ध्यान न देकर केवल मौसम विभाग और प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं का ही पालन करें।
उन्होंने बताया कि राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) तथा सभी जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (DEOC) 24×7 सक्रिय हैं। सभी संबंधित विभागों एवं जिला प्रशासनों को अलर्ट मोड पर रहते हुए राहत एवं बचाव संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
नई दिल्ली। देश की राजनीति और शिक्षा जगत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। लंबे समय से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों और विपक्ष के लगातार हमलों के बीच आया यह फैसला केंद्र सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
विश्वास बनाए रखना बड़ी जिम्मेदारी है
धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि छात्रों का भविष्य किसी भी पद से अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि हाल के दिनों में देशभर में जिस तरह का माहौल बना, उसने उन्हें गहराई से चिंतित किया। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में छात्रों का विश्वास बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और इसी भावना के साथ उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया।
तेज हो गई थी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
बीते कुछ समय से देश के अलग-अलग राज्यों में छात्र संगठन और युवा बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर परीक्षा प्रणाली में सुधार, कथित पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग कर रहे थे। कई जगहों पर प्रदर्शन हुए, जिनमें विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरा और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज कर दी थी।
केंद्र बोला, पारदर्शिता के लिए कोशिश की
विपक्ष का आरोप था कि लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा गया। दूसरी ओर केंद्र सरकार का कहना रहा कि परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी एवं मजबूत बनाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को राजनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार अब शिक्षा मंत्रालय में नई नियुक्ति के साथ परीक्षा सुधारों की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ सकती है। आने वाले दिनों में नए शिक्षा मंत्री के नाम और शिक्षा मंत्रालय की नई कार्ययोजना पर सभी की नजर रहेगी।
कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर किया काम
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन, डिजिटल शिक्षा के विस्तार, उच्च शिक्षा संस्थानों के विकास और कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों पर काम किया। हालांकि, हाल के परीक्षा विवादों ने उनके कार्यकाल पर गंभीर सवाल भी खड़े किए और विपक्ष ने इसे सरकार की जवाबदेही से जोड़कर लगातार मुद्दा बनाए रखा।
अब देखना होगा कि केंद्र सरकार शिक्षा मंत्रालय की कमान किसे सौंपती है और छात्रों का भरोसा बहाल करने के लिए आगे कौन-कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं। देशभर के लाखों छात्र, अभिभावक और शिक्षा जगत से जुड़े लोग इस फैसले के बाद सरकार की अगली घोषणा का इंतजार कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर से भेंट कर उत्तराखण्ड की ऊर्जा आवश्यकताओं, जल विद्युत परियोजनाओं, पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) तथा पिटकुल की एडीबी (ADB) सहायतित पारेषण परियोजना सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की।
सेंट्रल पूल से मांगी अतिरिक्त बिजली
मुख्यमंत्री ने राज्य की विद्युत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भारत सरकार द्वारा समय-समय पर केंद्रीय पूल से अतिरिक्त विद्युत उपलब्ध कराने में दिए जा रहे सहयोग के लिए केंद्रीय विद्युत मंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमानों के अनुसार एल-नीनो की संभावित परिस्थितियों, वर्षा में कमी तथा जलाशयों में कम जलागम के कारण आगामी महीनों में जल विद्युत उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
वहीं चारधाम यात्रा एवं आगामी कांवड़ यात्रा के दौरान विद्युत मांग में और अधिक वृद्धि होने की संभावना है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने जुलाई 2026 की शेष अवधि के लिए 150 मेगावाट तथा अगस्त 2026 के लिए 200 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत केंद्रीय पूल से उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया।
मुख्यमंत्री ने राज्य में लगभग 10 गीगावाट पम्प्ड स्टोरेज क्षमता के विकास के लिए आगामी पांच वर्षों में 7,800 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता अथवा वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) उपलब्ध कराने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं और ग्रिड स्थिरता को देखते हुए बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की स्वीकृत क्षमता 500 मेगावाट आवर से बढ़ाकर 665 मेगावाट आवर किए जाने तथा उसके अनुरूप वायबिलिटी गैप फंडिंग उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया।
एडीबी सहायतित पारेषण परियोजना पर भी चर्चा
मुख्यमंत्री ने बैठक में पिटकुल की 3,638.26 करोड़ रुपये (US $425.78 मिलियन) लागत वाली एडीबी सहायतित पारेषण परियोजना के विषय पर भी चर्चा की। उन्होंने अनुरोध किया कि इस परियोजना के लिए मूल 80:20 एडीबी ऋण एवं राज्यांश (ADB Loan : Counterpart Funding) की वित्तीय व्यवस्था को यथावत रखा जाए। उन्होंने बताया कि परियोजना के अंतर्गत 2,910.61 करोड़ रुपये (US $340.62 मिलियन) का एडीबी ऋण प्रस्तावित है, जिसे उत्तराखण्ड जैसे विशेष श्रेणी के हिमालयी राज्य के लिए निर्धारित वित्तीय व्यवस्था के अनुरूप स्वीकृत किया जाना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) द्वारा परियोजना को तकनीकी रूप से उपयुक्त माना गया है तथा विद्युत मंत्रालय ने भी एडीबी सहायता पर कोई आपत्ति नहीं जताई है। हालांकि एडीबी हिस्सेदारी को 60 प्रतिशत तक सीमित करने का सुझाव दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि वित्तीय पैटर्न में परिवर्तन किया जाता है तो उत्तराखण्ड को विशेष श्रेणी राज्य के रूप में मिलने वाले वित्तीय लाभ प्रभावित होंगे। इसलिए मूल 80:20 वित्तीय व्यवस्था को बरकरार रखते हुए परियोजना को स्वीकृति प्रदान की जाए।
क्या आप भी उन लोगों में से हैं जिनके पास पैसा आता है और खर्च हो जाता है। क्या आप भी धन बढ़ाने के वास्तु नियम जानना चाहते हैं तो ये लेख आपके लिए ही है। भारतीय परंपरा में वास्तु शास्त्र को ऐसा विज्ञान माना गया है जो घर में ऊर्जा के संतुलन पर जोर देता है।
मान्यता है कि यदि घर की दिशाएं, वस्तुओं का स्थान और दैनिक आदतें संतुलित हों, तो सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और जीवन में सुख-समृद्धि आने की संभावना मजबूत होती है।
इस लेख में हम जानेंगे कि धन बढ़ाने के वास्तु नियम क्या हैं ? कौन-सी सामान्य गलतियां आर्थिक उन्नति में बाधा बन सकती हैं और किन आसान उपायों को अपनाकर घर का वातावरण अधिक सकारात्मक बनाया जा सकता है।
क्या वास्तव में वास्तु का धन से संबंध है?
वास्तु शास्त्र हजारों वर्षों पुरानी भारतीय स्थापत्य परंपरा का हिस्सा है। इसका उद्देश्य केवल भवन निर्माण नहीं, बल्कि प्रकृति के पांच तत्वों और दिशाओं के बीच संतुलन स्थापित करना माना जाता है।
हालांकि आधुनिक विज्ञान ने वास्तु के सभी दावों की पुष्टि नहीं की है, लेकिन यह भी सच है कि साफ-सुथरा, व्यवस्थित और संतुलित वातावरण व्यक्ति के व्यवहार, मानसिक स्थिति और निर्णय लेने की क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। यही कारण है कि आज भी लोग घर बनवाते समय या उसका इंटीरियर बदलते समय वास्तु सिद्धांतों का ध्यान रखते हैं।
धन बढ़ाने के वास्तु नियम क्यों महत्वपूर्ण माने जाते हैं?
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार घर में धन का आगमन केवल कमाई पर निर्भर नहीं करता, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा, अनुशासन और सही वातावरण भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यदि घर में लगातार तनाव, अव्यवस्था, गंदगी या टूट-फूट बनी रहती है, तो उसका असर परिवार के मानसिक माहौल और कार्यक्षमता पर पड़ सकता है। इसलिए वास्तु शास्त्र में ऐसे कई नियम बताए गए हैं जो घर को व्यवस्थित रखने और सकारात्मक वातावरण बनाने पर जोर देते हैं।
1. मुख्य द्वार हमेशा साफ और व्यवस्थित रखें
वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को घर की ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना गया है। यदि प्रवेश स्थान गंदा, अंधेरा या अव्यवस्थित हो, तो इसे शुभ नहीं माना जाता।
ध्यान रखें कि मुख्य द्वार के सामने कूड़ा-कचरा, टूटे हुए गमले या अनुपयोगी सामान न रखें। यदि संभव हो तो प्रवेश द्वार पर नियमित सफाई करें और शाम के समय हल्का प्रकाश अवश्य रखें।
यह केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी घर को अधिक स्वागतयोग्य और सकारात्मक बनाता है।
2. उत्तर दिशा को अवरुद्ध न करें
वास्तु मान्यताओं के अनुसार उत्तर दिशा का संबंध धन और अवसरों से जोड़ा जाता है।
इस दिशा में भारी कबाड़, बंद अलमारियां या अनुपयोगी वस्तुएं रखने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि यह स्थान खुला, साफ और व्यवस्थित रहेगा तो घर अधिक खुला और संतुलित महसूस होता है।
व्यावहारिक दृष्टि से भी घर में अनावश्यक सामान कम रखने से मानसिक तनाव कम होता है और कार्यक्षमता बढ़ती है।
3. तिजोरी या लॉकर की सही दिशा का रखें ध्यान
धन रखने की जगह को लेकर भी वास्तु में विशेष उल्लेख मिलता है।
पारंपरिक मान्यता के अनुसार तिजोरी या लॉकर ऐसी जगह रखना उचित माना जाता है जहां वह स्थिर और सुरक्षित रहे। कई वास्तु विशेषज्ञ दक्षिण या पश्चिम की दीवार के सहारे तिजोरी रखने की सलाह देते हैं ताकि उसका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर खुले।
हालांकि सुरक्षा के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तिजोरी ऐसी जगह हो जहां नमी, सीधी धूप या असुरक्षा की संभावना न हो।
4. टूटी हुई वस्तुओं को घर में जमा न होने दें
यह सबसे सामान्य लेकिन सबसे अधिक अनदेखा किया जाने वाला नियम है।
टूटी हुई घड़ी, खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान, टूटे कांच, चटक चुके बर्तन या वर्षों से बेकार पड़ा फर्नीचर घर की सुंदरता ही नहीं, बल्कि मानसिक स्थिति पर भी असर डाल सकता है।
अनुपयोगी वस्तुओं को हटाने से घर अधिक व्यवस्थित दिखता है और सकारात्मक वातावरण बनता है। यही कारण है कि वास्तु शास्त्र में समय-समय पर घर की सफाई और अव्यवस्था हटाने पर विशेष जोर दिया गया है।
5. घर के पूजा स्थान को हमेशा स्वच्छ रखें
भारतीय परंपरा में पूजा घर को केवल धार्मिक स्थान नहीं, बल्कि घर की सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना गया है। इसलिए इसकी साफ-सफाई और व्यवस्थित रखरखाव पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है।
पूजा स्थान पर अनावश्यक सामान जमा न होने दें। नियमित रूप से दीपक जलाना, सफाई करना और शांत वातावरण बनाए रखना घर में सकारात्मकता का अनुभव करा सकता है। कई लोग मानते हैं कि व्यवस्थित पूजा स्थान परिवार में मानसिक शांति और सौहार्द बनाए रखने में भी मदद करता है।
यदि घर में मंदिर की सही दिशा और स्थापना के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो हमारा लेख “घर में मंदिर कहाँ रखें” भी पढ़ सकते हैं।
6. धन आकर्षित करने वाले पौधे लगाने की परंपरा
भारतीय घरों में पौधों का विशेष महत्व रहा है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार कुछ पौधों को शुभ माना जाता है क्योंकि वे घर के वातावरण को स्वच्छ और सकारात्मक बनाए रखने में सहायक होते हैं।
तुलसी का पौधा लगभग हर भारतीय घर में देखने को मिलता है। इसे धार्मिक महत्व के साथ-साथ पर्यावरण की दृष्टि से भी उपयोगी माना जाता है। इसके अलावा कई लोग मनी प्लांट या बांस के पौधे भी लगाते हैं। हालांकि इन पौधों से धन आने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, लेकिन हरियाली मानसिक शांति और बेहतर वातावरण बनाने में निश्चित रूप से मदद करती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पौधों की नियमित देखभाल करें। सूखे या मुरझाए पौधों को लंबे समय तक घर में रखना उचित नहीं माना जाता।
7. घर में पर्याप्त रोशनी और हवा का प्रवेश होना चाहिए
वास्तु शास्त्र में प्राकृतिक प्रकाश और ताजी हवा को सकारात्मक ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत माना गया है।
यदि घर हमेशा अंधेरा रहता है या कमरों में हवा का उचित आवागमन नहीं होता, तो वातावरण भारी और असहज महसूस हो सकता है। सुबह खिड़कियां खोलना, सूर्य का प्रकाश घर में आने देना और नियमित वेंटिलेशन बनाए रखना न केवल स्वास्थ्य के लिए अच्छा है बल्कि घर को भी जीवंत बनाता है।
यह सलाह वास्तु के साथ-साथ आधुनिक वास्तुकला और स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी देते हैं।
8. आर्थिक अनुशासन भी धन वृद्धि का महत्वपूर्ण नियम है
अक्सर लोग धन बढ़ाने के उपाय खोजते हैं, लेकिन अपनी वित्तीय आदतों पर ध्यान नहीं देते।
यदि आय से अधिक खर्च किया जाए, बचत की योजना न हो और हर खरीदारी बिना सोच-समझकर की जाए, तो आर्थिक समस्याएं बढ़ सकती हैं।
इसलिए यदि आप वास्तव में घर में धन टिकाना चाहते हैं, तो इन आदतों को अपनाएं।
हर महीने बजट बनाएं।
अपनी आय का एक हिस्सा बचत के लिए अलग रखें।
अनावश्यक खर्चों की सूची बनाकर उन्हें कम करने का प्रयास करें।
आपातकालीन फंड तैयार करें।
वास्तु के साथ आर्थिक अनुशासन भी उतना ही आवश्यक है।
9. घर में तनाव और विवाद का माहौल कम करें
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार जिस घर में लगातार तनाव, क्रोध और विवाद का वातावरण रहता है, वहां सकारात्मक ऊर्जा कम हो जाती है।
भले ही इसका सीधा संबंध धन से सिद्ध न हो, लेकिन यह निश्चित है कि तनावपूर्ण माहौल व्यक्ति की कार्यक्षमता, निर्णय क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
घर में संवाद बनाए रखना, एक-दूसरे का सम्मान करना और सकारात्मक वातावरण तैयार करना परिवार की समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
10. नियमित सफाई और अव्यवस्था दूर करें
यदि किसी एक आदत को सबसे प्रभावशाली कहा जाए, तो वह है नियमित सफाई।
कई लोग वर्षों तक ऐसे सामान को घर में संभालकर रखते हैं जिनका कोई उपयोग नहीं होता। इससे घर में जगह भी घिरती है और अव्यवस्था बढ़ती है।
समय-समय पर घर की सफाई करें और बेकार वस्तुओं को हटाएं। इससे घर अधिक व्यवस्थित दिखता है और दैनिक जीवन भी आसान बनता है।
आजकल इसे “डिक्लटरिंग” कहा जाता है और आधुनिक मनोविज्ञान भी इसे मानसिक तनाव कम करने का एक प्रभावी तरीका मानता है।
क्या केवल वास्तु अपनाने से धन बढ़ सकता है?
यह समझना आवश्यक है कि वास्तु शास्त्र मेहनत, ईमानदारी और सही आर्थिक निर्णयों का विकल्प नहीं है।
यदि कोई व्यक्ति मेहनत नहीं करता, आय की योजना नहीं बनाता और केवल वास्तु उपायों पर निर्भर रहता है, तो उससे आर्थिक सफलता की उम्मीद करना उचित नहीं होगा।
वास्तु को सकारात्मक जीवनशैली, अनुशासन, स्वच्छता और मानसिक संतुलन के साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए। यही संतुलित दृष्टिकोण सबसे अधिक उपयोगी माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. धन बढ़ाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण वास्तु नियम क्या है?
घर को साफ और व्यवस्थित रखें, मुख्य द्वार स्वच्छ रखें और उत्तर दिशा में अनावश्यक सामान न रखें।
2. क्या वास्तु से धन में वृद्धि हो सकती है?
वास्तु शास्त्र के अनुसार सकारात्मक वातावरण आर्थिक उन्नति में सहायक माना जाता है। हालांकि सफलता के लिए मेहनत और सही वित्तीय योजना भी जरूरी है।
3. घर में धन टिकाने के लिए क्या करें?
नियमित बचत करें, अनावश्यक खर्च से बचें, घर में साफ-सफाई रखें और सकारात्मक माहौल बनाए रखें।
4. तिजोरी किस दिशा में रखनी चाहिए?
वास्तु के अनुसार तिजोरी को दक्षिण या पश्चिम की दीवार के सहारे रखना शुभ माना जाता है, ताकि उसका मुख उत्तर या पूर्व की ओर रहे।
5. क्या मनी प्लांट लगाने से धन बढ़ता है?
पारंपरिक मान्यताओं में मनी प्लांट को शुभ माना जाता है, लेकिन इसके आर्थिक लाभ का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
6. क्या घर में टूटी हुई चीजें रखना सही है?
वास्तु शास्त्र में टूटी या खराब वस्तुओं को लंबे समय तक घर में रखना उचित नहीं माना जाता।
7. घर में सकारात्मक ऊर्जा कैसे बढ़ाएं?
घर की नियमित सफाई करें, प्राकृतिक रोशनी आने दें और पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
8. क्या केवल वास्तु उपायों से आर्थिक समस्याएं दूर हो सकती हैं?
नहीं। आर्थिक सफलता के लिए मेहनत, अनुशासन, बचत और सही वित्तीय निर्णय सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं।
इन बातों के अलावा आपको याद रखना होगा कि आर्थिक समृद्धि केवल वास्तु नियमों पर निर्भर नहीं करती। सकारात्मक जीवनशैली, सुबह की अच्छी आदतें और अनुशासित दिनचर्या भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। यदि आप अपनी सुबह की शुरुआत सही तरीके से करना चाहते हैं, तो हमारा लेख “सुबह उठकर सबसे पहले क्या करें“ भी पढ़ सकते हैं। वहीं सुबह जल्दी उठने के लाभ जानने के लिए “ब्रह्म मुहूर्त का महत्व“ लेख अवश्य पढ़ें।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार 16 जुलाई को अल्मोड़ा स्थित वृद्ध जागेश्वर पहुंचकर भगवान शिव के पावन धाम में विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने देवाधिदेव महादेव से प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं खुशहाली की कामना करते हुए राज्य की निरंतर प्रगति और जनकल्याण के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने श्री वृद्ध जागेश्वर धाम में कन्याओं को प्रसाद वितरण भी किया।
संरक्षण और संवर्धन के लिए काम कर रही सरकार
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वृद्ध जागेश्वर धाम देश के प्रमुख एवं प्राचीन शिव धामों में से एक है, जो अपनी आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। साथ ही तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न विकास कार्य किए जा रहे हैं।
व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश
पूजा-अर्चना के उपरांत मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का भी अवलोकन किया तथा संबंधित अधिकारियों से श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा एवं मूलभूत व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने निर्देश दिए कि वृद्ध जागेश्वर मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो तथा सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध एवं सुव्यवस्थित ढंग से सुनिश्चित की जाएं।
इस अवसर पर विधायक जागेश्वर मोहन सिंह मेहरा, दर्जा राज्य मंत्री कुंदन लटवाल, जिला पंचायत सदस्य एवं जिलाध्यक्ष बीजेपी महेश नयाल, जिलाधिकारी अंशुल सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर आर घोड़के सहित जनप्रतिनिधिगण, प्रशासनिक अधिकारी, मंदिर समिति के पदाधिकारी तथा अन्य उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को विश्व प्रसिद्ध जागेश्वर धाम पहुंचकर पारंपरिक विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रावणी मेले का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने जागेश्वर धाम के दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं जन-कल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री ने श्रावणी मेले के सफल एवं सकुशल आयोजन की मंगलकामना करते हुए प्रदेशवासियों और देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं।
दिव्य ऊर्जा का केंद्र है जागेश्वर धाम
श्रावणी मेले के उद्घाटन अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पहचान को संरक्षित एवं संवर्धित करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि जागेश्वर धाम भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है और यहां आकर प्रत्येक व्यक्ति दिव्य ऊर्जा एवं आध्यात्मिक शांति का अनुभव करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें भी जागेश्वर धाम की पावन भूमि से सदैव नई ऊर्जा एवं प्रेरणा प्राप्त होती है। यही दिव्य ऊर्जा उन्हें प्रदेशवासियों की सेवा के लिए निरंतर कार्य करने की शक्ति प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य उत्तराखंड के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ते हुए उनकी मूल सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखना है।
147 करोड़ से संवेरगा जागेश्वर धाम
मुख्यमंत्री ने कहा कि जागेश्वर मास्टर प्लान के अंतर्गत लगभग 147 करोड़ रुपये की लागत से जागेश्वर धाम का सौंदर्यीकरण एवं आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। इस परियोजना में मंदिर परिसर की प्राचीन गरिमा एवं मूल स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इससे धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को नई गति मिलेगी, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा क्षेत्र की आर्थिकी को भी मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जागेश्वर धाम आगमन के बाद देशभर के श्रद्धालुओं में इस पवित्र धाम के प्रति विशेष आकर्षण बढ़ा है। इसका परिणाम है कि पिछले दो महीनों में चार लाख से अधिक श्रद्धालु जागेश्वर धाम पहुंच चुके हैं। आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ेगी, जिससे स्थानीय व्यापार, पर्यटन एवं स्वरोजगार को व्यापक लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ‘‘विकल्प रहित संकल्प’’ के मंत्र के साथ उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य कर रही है। डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से धार्मिक पर्यटन, आधारभूत ढांचे, कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनसहभागिता एवं प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखंड शीघ्र ही देश के अग्रणी एवं सर्वश्रेष्ठ राज्यों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा।
मुख्यमंत्री ने श्रावणी मेले में आए श्रद्धालुओं से आस्था, स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देवभूमि की पवित्रता, प्राकृतिक संपदा एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। श्रावणी मेला हमारी समृद्ध परंपराओं, लोक संस्कृति एवं सामाजिक समरसता का जीवंत उत्सव है, जिसे और अधिक भव्य एवं दिव्य स्वरूप प्रदान करने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है।
इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, कैबिनेट मंत्री डॉ धन सिंह रावत, विधायक जागेश्वर मोहन सिंह मेहरा, जिला पंचायत अध्यक्षा हेमा गैडा, मेयर अल्मोड़ा अजय वर्मा, जिलाधिकारी अंशुल सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर आर एस, जागेश्वर मंदिर समिति के पदाधिकारी सहित जनप्रतिनिधि, स्थानीय लोग एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रावणी मेला शुभारंभ के साक्षी बने।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित लोक संवर्धन पर्व के अंतर्गत हरेला उत्सव में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व केवल हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश ही नहीं देता, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, सामाजिक समरसता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भी प्रतीक है।
लोक परंपराओं का महापर्व है हरेला
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेला उत्तराखंड की लोक परंपराओं का ऐसा महापर्व है, जो समाज के सभी वर्गों को एक सूत्र में जोड़ता है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि प्रदेश का अल्पसंख्यक समाज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस पर्व में सहभागी बन रहा है। उन्होंने कहा कि यही उत्तराखंड की साझा सांस्कृतिक विरासत और “विविधता में एकता” की भावना का सबसे सशक्त उदाहरण है।
सामाजिक सरोकारों को दुनिया तक पहुंचाया
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक संवर्धन पर्व के माध्यम से राज्य की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं को नई पहचान मिल रही है। उन्होंने प्रसिद्ध लोकगायक एवं ‘गढ़ रत्न’ नरेंद्र सिंह नेगी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति, लोकजीवन, पर्यावरण, महिलाओं के संघर्ष और सामाजिक सरोकारों को देश-दुनिया तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
जिम्मेदारी का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेला केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का संकल्प है। हमारे पूर्वजों ने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के महत्व को बहुत पहले समझ लिया था। आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है, तब उत्तराखंड का हरेला पर्व पर्यावरण संरक्षण का वैश्विक संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि इसी भावना के अनुरूप राज्य सरकार ने इस वर्ष हरेला पर्व के अवसर पर पूरे प्रदेश में 10 लाख पौधे लगाने का संकल्प लिया है। उनका कहना था कि प्रत्येक पौधा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का प्रतीक है और विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण के संतुलन को बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच संतुलित विकास के मॉडल पर कार्य कर रही है।
उत्तराखंड में दो करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रहे ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान ने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया है। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी माता के सम्मान में एक पौधा अवश्य लगाए और उसके वृक्ष बनने तक उसकी देखभाल का संकल्प ले। उन्होंने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत उत्तराखंड में दो करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें अब तक लगभग 1 करोड़ 15 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। यह उपलब्धि जनभागीदारी और पर्यावरण के प्रति प्रदेशवासियों की जागरूकता का परिचायक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक संवर्धन पर्व राज्य के लोक कलाकारों, शिल्पकारों, बुनकरों, हस्तशिल्प विशेषज्ञों तथा पारंपरिक व्यंजनों से जुड़े कारीगरों को प्रोत्साहन देने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उनके अनुसार स्थानीय उत्पादों की खरीद केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और हजारों परिवारों की आजीविका को मजबूत करने का भी प्रभावी माध्यम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन लोक कलाकारों और उद्यमियों के लिए नए अवसरों का सृजन करेगा तथा उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
आईआरसीटीसी की वेबसाइट के नए लुक और अनुभव को आजमाने और इसके फीचर्स पर फीडबैक देने के लिए उसकी नई वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च कर दिया गया है। इसे https://www.irctc.co.in/eticket/ लिंक पर जाकर देखा जा सकता है। बीटा वर्जन का लिंक मौजूदा वेबसाइट के होमपेज पर भी दिया गया है।
ये सुधार मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमएनआईटी) के छात्रों ने रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के साथ बातचीत के दौरान सुझाए थे।
आईआरसीटीसी वेबसाइट पहली बार 2002 में लॉन्च की गई थी और अभी यह हर दिन औसतन लगभग 14.5 लाख टिकटों का काम संभालती है। नई वेबसाइट का यूजर इंटरफेस साफ-सुथरा है और यूजर अनुभव आसान बनाया गया है।
आईआरसीटीसी ने बीटा वर्जन में चार बड़े सुधार किए हैं:
1.कैप्चा: कोई अनावश्यक कैप्चा नहीं। कोई अनावश्यक पॉप-अप नहीं। कोई चमकते ग्राफिक्स नहीं। ध्यान भटकाने वाली कोई चीज नहीं।
2.सीटकीउपलब्धता: सभी क्लास में दिखाई देती है।
3.तेजचेकआउट: बुकिंग के लिए ज़रूरी स्टेप्स की संख्या कम की गई है।
4.आसानरिपीटबुकिंग: यात्री की जानकारी सेव रहती है।
डिजाइन की प्रक्रिया में छात्रों को भी शामिल किया गया था, जिन्होंने वेबसाइट के लुक और फील को बेहतर बनाने के लिए सुझाव दिए। प्राप्त फीडबैक के आधार पर, नई वेबसाइट ट्रायल के लिए तैयार है।
बीटा वर्जन से और सुधारों के लिए यूजर फ़ीडबैक मिल सकेगा, जिसे कस्टमर की संतुष्टि बढ़ाने के लिए भविष्य के वर्जन में शामिल किया जाएगा। बहुत जल्द, आईआरसीटीसी वेबसाइट को आने वाले नए पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन के साथ भी जोड़ा जाएगा। चूंकि पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन को भी साथ-साथ अपग्रेड किया जा रहा है, इसलिए पूरी तरह से काम करने वाला नया आईआरसीटीसी पोर्टल कुछ हफ्तों में उपलब्ध हो जाएगा।
इसके साथ ही, आईआरसीटीसी कई ट्रेन बुकिंग ऐप्स को चलाने वाले दशकों पुराने ‘पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन’ को अपग्रेड कर रहा है। इसके लिए बहुत ज्यादा काम करना पड़ा क्योंकि अपग्रेडेशन के दौरान भी सिस्टम को चालू रखना जरूरी था। नया ‘पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन’ जल्द ही लॉन्च किया जाएगा।
हम अपने यूजर्स से नए डिजाइन पर अपने कीमती सुझाव और फीडबैक देने का अनुरोध करते हैं, जिससे हमें आईआरसीटीसी वेबसाइट को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
देहरादून, 08 जुलाई 2026: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून और आस-पास के इलाकों में कल यानी 09 जुलाई 2026 को भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इसे देखते हुए देहरादून के जिलाधिकारी (DM) और जनपद आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण के अध्यक्ष ने सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा कदम उठाया है। कल जिले के सभी शैक्षणिक संस्थानों और आंगनवाड़ी केंद्रों में एक दिन का अवकाश (छुट्टी) घोषित कर दिया गया है।
मौसम विभाग और NDMA ने जारी किया ‘ऑरेंज अलर्ट’
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), देहरादून और नेशनल डिजास्टर अलर्ट पोर्टल (NDMA) द्वारा 08 जुलाई 2026 को जारी ताजा मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 09 जुलाई को देहरादून जिले में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा, आकाशीय बिजली चमकने और अत्यधिक तीव्र बारिश होने की संभावना है। मौसम की इस गंभीरता को देखते हुए विभाग ने ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
कक्षा 1 से 12वीं तक के सभी स्कूल रहेंगे बंद
आपदा न्यूनीकरण (Disaster Mitigation) और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, जिले के कक्षा 01 से 12 तक संचालित होने वाले सभी शासकीय, गैर-शासकीय (सरकारी) और निजी (Private) स्कूलों को 09.07.2026 को बंद रखने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही जिले के सभी आंगनवाड़ी केंद्र भी कल पूरी तरह बंद रहेंगे।
आदेश का कड़ाई से पालन करने के निर्देश
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान द्वारा जारी इस आदेश में मुख्य शिक्षा अधिकारी और जिला कार्यक्रम अधिकारी देहरादून को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी शिक्षण संस्थाओं और आंगनवाड़ी केंद्रों में इस आदेश का अनुपालन (Compliance) सुनिश्चित करवाएं।
प्रशासन की जनता से सतर्क रहने की अपील
मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने आम जनता से भी इस दौरान सतर्क रहने की अपील की है। भारी बारिश और बिजली कड़कने के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने तथा नदी-नालों और संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है।