राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की खबरों के बीच अब उत्तराखंड में बद्रीनाथ मंदिर में भी चढ़ावा चोरी की खबरें आ रही हैं। शुरुआती जांच में इसे लेकर सबूत भी मिले हैं। BKTC के एक कर्मचारी प्रमोद नौटियाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई है। जांच में प्रमोद नौटियाल के खिलाफ सबूत मिलने की सूचना है।
पुलिस को दी गई तहरीर, शुरुआती जांच में मिले सबूत
दरअसल प्रमोद नौटियाल जुलाई के शुरुआती दिन में ही रडार पर आ गए थे। बीकेटीसी की अंदरूनी जांच में प्रमोद नौटियाल के जरिए भेंट थाल गणना में गलत तरीकों से पैसों को उठाने की पुष्टि हुई। इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी हो गई थी। सात जुलाई को जैसे ही शासन ने प्रमोद नौटियाल को निलंबित किया उसके बाद उनके खिलाफ बद्रीनाथ थाने में तहरीर दी गई। पुलिस ने आठ जुलाई की तारीख में प्रमोद नौटियाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।
प्रमोद नौटियाल खासे प्रभावशाली बताए जा रहे हैं। मिली जानकारी के मुताबिक वो बीकेटीसी अध्यक्ष के व्यक्तिगत सहायक के पद पर कार्यरत थे हालांकि बीकेटीसी अध्यक्ष ने इससे इंकार किया है कि प्रमोद उनके निजी सहायक के तौर पर काम कर रहे थे। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की ओर से जारी आदेश के अनुसार नौटियाल के विरुद्ध पदीय दायित्वों के निर्वहन में प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आने पर तीन जुलाई 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
कौन हैं प्रमोद नौटियाल ?
वर्तमान में प्रमोद नौटियाल बीकेटीसी के अध्यक्ष के पर्सनल सेक्रेटरी का पद संभाल रहे हैं। साल 2014 में प्रमोद नौटियाल ने बीकेटीसी में इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के पद पर नियुक्ति पाई। चूंकि इस पद पर भविष्य में कोई प्रमोशन होने की उम्मीद नहीं थी लिहाजा उन्हे 2018 में सीधी भर्ती वाले व्यक्तिगत सहायक के पद पर समायोजित किया गया। 2023 में नियमावली में एक संशोधन के जरिए प्रमोद नौटियाल को जनसंपर्क विशेष अधिकारी के पद पर तैनाती दे गई। हैरानी इस बात की है कि प्रमोद नौटियाल गणना कार्य के कार्मिक थे ही नहीं लेकिन उन्हे चढ़ावा गणना कार्य में लगाया गया।
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) में अनियमितिताओं की खबरों और खास तौर पर बद्रीनाथ में चढ़ावा चोरी के आरोपों के बीच सख्त कार्रवाई की गई है। आरोपी कर्मचारी को सस्पेंड कर दिया है और इस मामले में पांच सदस्यों की एक समिति गठित कर जांच बैठा दी है।
BKTC अध्यक्ष का व्यक्ति सहायक सस्पेंड
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने अनुशासन एवं प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
समिति द्वारा जारी आदेश के अनुसार, प्रमोद नौटियाल के विरुद्ध पदीय दायित्वों के निर्वहन में प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आने पर 03 जुलाई 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। साथ ही मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच के लिए चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया।
शुरुआती जांच में आरोप सही
प्राप्त स्पष्टीकरण एवं जांच समिति की प्रारंभिक आख्या का परीक्षण करने पर आरोप प्रथम दृष्टया पुष्ट पाए गए। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की है। समिति ने यह भी माना कि कर्मचारी को वर्तमान पद पर बनाए रखने से जांच प्रभावित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इन्हीं तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए जांच की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से श्री प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन-निर्वाह भत्ता देय होगा। साथ ही उन्हें बीकेटीसी कार्यालय, जोशीमठ (जनपद चमोली) से संबद्ध किया गया है। इस अवधि में सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी तथा उन्हें जांच एवं अनुशासनात्मक कार्यवाही में अपेक्षित सहयोग देना अनिवार्य होगा।
बीकेटीसी ने स्पष्ट किया है कि समिति प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता के मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उच्चस्तरीय कमेटी करेगी जांच
श्री बदरीनाथ धाम में दान-चढ़ावे आदि के संबंध में प्राप्त कथित अनियमितताओं की शिकायतों एवं प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तराखण्ड शासन ने मामले की गहन जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।
समिति के अध्यक्ष आयुक्त गढ़वाल मंडल होंगे। समिति में प्रबंध निदेशक, एनएचएम संदीप तिवारी तथा कार्यालय महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक (वित्त) जगत सिंह चौहान सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं।
15 दिन में रिपोर्ट
सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल द्वारा जारी आदेश के अनुसार समिति मंदिर में प्राप्त होने वाले दान-चढ़ावे से संबंधित कथित अनियमितताओं की विस्तृत जांच करेगी तथा 15 दिनों के भीतर अपनी जांच आख्या एवं संस्तुतियां शासन को प्रस्तुत करेगी।
जांच के दौरान आवश्यकता पड़ने पर समिति किसी भी अधिकारी, विशेषज्ञ अथवा अन्य संबंधित व्यक्ति का सहयोग एवं परामर्श प्राप्त कर सकेगी। साथ ही समिति दान-चढ़ावे के प्रबंधन तंत्र को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी एवं प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपायों एवं सुझावों से भी शासन को अवगत कराएगी।
उत्तराखंड में एक ऐसे पुल का लोकार्पण हो गया है जिसके बनने से उत्तराखंड के गढ़वाल – कुमाऊं के बीच सफर न सिर्फ आसान हो जाएगा बल्कि वर्षभर बना भी रह सकेगा। सीएम धामी ने रविवार को धनगढ़ी नाले के ऊपर बने पुल का उद्घाटन कर दिया है।
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-121 (नया राष्ट्रीय राजमार्ग-309) पर धनगढ़ी नाले के ऊपर 29.65 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस 220.90 मीटर लंबे प्री-स्ट्रेस्ड गर्डर सेतु (धनगढ़ी पुल) का प्रयोग अब जनता कर पाएगी।
गढ़वाल- कुमाऊं के बीच सफर होगा आसान
यह राष्ट्रीय राजमार्ग काशीपुर-रामनगर-मार्चुला-बुवाखाल मार्ग पर स्थित है, जो कुमाऊँ एवं गढ़वाल मंडलों को जोड़ने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। यह विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान का प्रमुख प्रवेश द्वार होने के साथ-साथ नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चम्पावत तथा पौड़ी गढ़वाल सहित लाखों लोगों के दैनिक आवागमन, व्यापार, पर्यटन एवं आवश्यक सेवाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
धनगढ़ी पुल के बनने से मार्ग नहीं होगा बाधित
धनगढ़ी नाले में बरसात के दौरान जलस्तर बढ़ जाने से मार्ग अक्सर बाधित हो जाता था, जिससे आमजन, पर्यटकों तथा आपातकालीन सेवाओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नव निर्मित सेतु के निर्माण से इस समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित होगा। साथ ही, वन क्षेत्र में यातायात सुचारु होने से वन्यजीव संरक्षण एवं पर्यावरणीय संतुलन को भी बढ़ावा मिलेगा।
सरकार ने प्राथमिकता पर कराया निर्माण
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि धनगढ़ी सेतु का लोकार्पण केवल एक पुल का उद्घाटन नहीं, बल्कि क्षेत्रवासियों के वर्षों के संघर्ष, धैर्य और अपेक्षाओं की सार्थक परिणति है। उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान धनगढ़ी नाले में जलस्तर बढ़ने से मार्ग अवरुद्ध हो जाता था, जिससे जनजीवन, व्यापार, पर्यटन और आपातकालीन सेवाएं प्रभावित होती थीं। इसी समस्या के स्थायी समाधान के उद्देश्य से राज्य सरकार ने इस परियोजना को प्राथमिकता देते हुए समयबद्ध ढंग से पूरा कराया है।
क्षेत्रीय विकास को मिलेगी नई गति
मुख्यमंत्री ने कहा कि धनगढ़ी सेतु सम्पूर्ण उत्तराखण्ड का महत्वपूर्ण पुल है, जो कुमाऊँ एवं गढ़वाल मंडलों को सुदृढ़ रूप से जोड़ता है। इस सेतु के निर्माण से दोनों मंडलों के बीच आवागमन अधिक सुरक्षित एवं सुगम होगा तथा पर्यटन, व्यापार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने “सेवा, सुशासन और विकास” के पाँच वर्ष पूर्ण करते हुए प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र तक विकास पहुँचाने का कार्य किया है। सरकार की प्राथमिकता अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाना रही है। इसी सोच के अनुरूप राज्य में आधुनिक सड़कें, मजबूत पुल, विस्तृत रेल नेटवर्क, रोपवे, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन तथा सीमांत क्षेत्रों के विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं।
पनौद पुल का काम भी लगभग पूरा
मुख्यमंत्री ने बताया कि धनगढ़ी सेतु के निकट लगभग 18.43 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 175.60 मीटर लंबे पनौद पुल का निर्माण कार्य भी लगभग पूर्ण हो चुका है। वर्तमान में इस पुल पर यातायात संचालित हो रहा है तथा डामरीकरण का अंतिम कार्य शीघ्र पूर्ण कर इसे भी जनता को समर्पित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि धनगढ़ी सेतु और पनौद पुल इस पूरे क्षेत्र के विकास की मजबूत आधारशिला सिद्ध होंगे तथा संतुलित विकास, सुरक्षित आवागमन और जनकल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के सशक्त प्रतीक हैं।
वन खत्तों को सीएम धामी का आश्वासन
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में रामनगर क्षेत्र के वन खत्तों में निवासरत परिवारों की समस्याओं पर भी उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी अवगत कराया कि रामनगर-रानीखेत मोटर मार्ग सहित अन्य महत्वपूर्ण मोटर मार्गों के चौड़ीकरण हेतु सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार में प्रस्ताव प्रेषित किए जा चुके हैं तथा आवश्यक कार्यवाही प्रगति पर है।
इस अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कहा कि धनगढ़ी सेतु के निर्माण से वर्षभर सुरक्षित एवं निर्बाध यातायात सुनिश्चित होगा। बरसात के दौरान मार्ग अवरुद्ध होने की समस्या समाप्त होगी तथा दुर्घटनाओं की संभावना में कमी आएगी। उन्होंने कहा कि यह सेतु कुमाऊँ और गढ़वाल के बीच संपर्क को और अधिक सुदृढ़ करने के साथ-साथ व्यापार, कृषि, पर्यटन, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को भी नई गति प्रदान करेगा। चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं तथा जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को भी इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि लगभग 18.43 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पनौद पुल का निर्माण कार्य भी अंतिम चरण में है।
अनिल बलूनी ने भी जताई खुशी
धनगढ़ी पुल के निर्माण के लिए सांसद अनिल बलूनी ने खासे प्रयास किए। पुल के लोकार्पण पर भी भले ही वो मौजूद नहीं रहे लेकिन सोशल मीडिया में पोस्ट के जरिए अनिल बलूनी ने अपनी ये खुशी जाहिर की। अनिल बलूनी ने लिखा कि, आज का दिन मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता और संतोष का अविस्मरणीय दिन है। रामनगर के निकट धनगढ़ी नाले पर जल स्तर के उफान के कारण कई दुर्घटनायें होती थी। इस नाले पर पुल का सपना हम सभी देख रहे थे, आज उसका लोकार्पण होकर वह सपना साकार हुआ है।
अनिल बलूनी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि इस पुल की मांग गढ़वाल और कुमाऊँ दोनों क्षेत्रों की जनता लंबे समय से करती आ रही थी। वर्ष 2019 में धनगढ़ी नाले में हुई दर्दनाक दुर्घटना में कई लोगों ने अपनी जान गंवाई थी, उसी दिन मैंने संकल्प लिया था कि इस पुल के निर्माण हेतु मैं हर संभव प्रयास करता रहूँगा। यही संकल्प मेरी निरंतर प्रेरणा बना रहा।
आज यह ऐतिहासिक धनगढ़ी पुल जनता को समर्पित हुआ है, तो यह केवल एक पुल का उद्घाटन नहीं, बल्कि लाखों लोगों की वर्षों पुरानी आकांक्षाओं, सुरक्षित आवागमन और क्षेत्र के विकास के नए युग का शुभारंभ है। यह पुल क्षेत्र में पर्यटन को भी नई गति देगा, जिससे स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
धनगढ़ी पुल (धनगढ़ी सेतु) FAQ: खास बातें
Q. धनगढ़ी पुल कहाँ स्थित है? A. यह राष्ट्रीय राजमार्ग-309 (पूर्व में एनएच-121) पर रामनगर-मार्चुला-बुवाखाल मार्ग में धनगढ़ी नाले के ऊपर स्थित है। यह कुमाऊँ और गढ़वाल मंडलों को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क सेतु है।
Q. धनगढ़ी पुल का उद्घाटन कब हुआ? A. 5 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुल का लोकार्पण कर इसे जनता को समर्पित किया।
Q. पुल के निर्माण पर कितनी लागत आई? A. धनगढ़ी सेतु का निर्माण लगभग 29.65 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है।
Q. पुल की लंबाई कितनी है? A. यह 220.90 मीटर लंबा प्री-स्ट्रेस्ड गर्डर सेतु है।
Q. इस पुल की सबसे बड़ी आवश्यकता क्यों थी? A. बरसात में धनगढ़ी नाले का जलस्तर बढ़ने से राष्ट्रीय राजमार्ग कई बार बंद हो जाता था, जिससे आम लोगों, पर्यटकों और आपातकालीन सेवाओं को परेशानी होती थी। नया पुल इस समस्या का स्थायी समाधान माना जा रहा है।
Q. किन क्षेत्रों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा? A. रामनगर, काशीपुर, मार्चुला, पौड़ी गढ़वाल के साथ-साथ नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चम्पावत जाने वाले यात्रियों को वर्षभर सुगम आवागमन का लाभ मिलेगा।
Q. पर्यटन पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? A. यह मार्ग जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान का प्रमुख प्रवेश मार्ग है। पुल बनने से पर्यटकों की आवाजाही आसान होगी और कॉर्बेट के साथ कुमाऊँ-गढ़वाल के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
Q. स्थानीय लोगों को क्या फायदा होगा? A. व्यापार, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच आसान होगी। बारिश में सड़क बंद होने की समस्या कम होगी और यात्रा का समय भी घटेगा।
Q. क्या आपातकालीन सेवाओं को भी लाभ मिलेगा? A. हाँ। एम्बुलेंस, पुलिस, अग्निशमन और अन्य आपातकालीन सेवाएँ अब बरसात के दौरान भी निर्बाध रूप से संचालित हो सकेंगी।
Q. क्या यह पुल वन क्षेत्र में स्थित है? A. हाँ। यह कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निकट वन क्षेत्र में स्थित है। सरकार का कहना है कि व्यवस्थित यातायात से वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को भी मदद मिलेगी।
Q. धनगढ़ी पुल के पास कौन-सा दूसरा पुल बन रहा है? A. निकट ही पनौद पुल का निर्माण लगभग 18.43 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। इसकी लंबाई 175.60 मीटर है और निर्माण अंतिम चरण में है।
Q. धनगढ़ी पुल को क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है? A. क्योंकि यह कुमाऊँ और गढ़वाल के बीच सालभर सुरक्षित संपर्क सुनिश्चित करेगा, राष्ट्रीय राजमार्ग-309 की विश्वसनीयता बढ़ाएगा और पर्यटन व स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति देगा।
आज की व्यस्त जीवनशैली में अधिकांश लोग देर रात तक जागते हैं और सुबह देर से उठते हैं। इसका असर मानसिक स्वास्थ्य, ऊर्जा और काम करने की क्षमता पर दिखाई देने लगता है। हिंदू धर्म में सुबह जल्दी उठने की आदत को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। विशेष रूप से ब्रह्म मुहूर्त को दिन का सबसे पवित्र और सकारात्मक समय बताया गया है। बहुत से लोग जानना चाहते हैं कि ब्रह्म मुहूर्त क्या है, ब्रह्म मुहूर्त का क्या महत्व है ?, इसका सही समय क्या है और सुबह जल्दी उठने के क्या फायदे हैं? इस लेख में हम इन्हीं सभी विषयों को विस्तार से समझेंगे।
ब्रह्म मुहूर्त क्या होता है ?
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटे पहले का समय माना जाता है। हिंदू धर्म, योग और आयुर्वेद में इस समय को मानसिक शांति, एकाग्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है।
यह समय वातावरण की शांति और सकारात्मकता के कारण विशेष माना जाता है। इस दौरान मन अपेक्षाकृत शांत रहता है और व्यक्ति अधिक स्पष्टता के साथ सोच पाता है।
ब्रह्म मुहूर्त का क्या महत्व है ?
हिंदू धर्म में ब्रह्म मुहूर्त को साधना, ध्यान और पूजा के लिए सबसे शुभ समय माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इस समय सकारात्मक ऊर्जा अधिक सक्रिय रहती है और मन जल्दी एकाग्र होता है।
कई धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि ऋषि-मुनि और साधक ब्रह्म मुहूर्त में ही ध्यान और साधना किया करते थे। इस समय मंत्र जाप और प्रार्थना करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है।
सुबह जल्दी उठने के फायदे
आज आधुनिक विज्ञान भी सुबह जल्दी उठने की आदत को स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानता है। सुबह जल्दी उठने वाले लोग अधिक अनुशासित और सक्रिय माने जाते हैं।
मानसिक शांति मिलती है
सुबह का वातावरण शांत होता है, जिससे तनाव कम महसूस होता है और मन स्थिर रहता है।
एकाग्रता बेहतर होती है
ब्रह्म मुहूर्त में पढ़ाई या ध्यान करने से concentration बेहतर होता है क्योंकि उस समय आसपास का वातावरण शांत रहता है।
समय का बेहतर उपयोग
सुबह जल्दी उठने वाले लोगों के पास दिन की योजना बनाने के लिए अधिक समय होता है। इससे productivity बढ़ती है।
शरीर में ऊर्जा बनी रहती है
जल्दी उठने और नियमित दिनचर्या अपनाने से शरीर अधिक सक्रिय और ऊर्जावान महसूस करता है।
ब्रह्म मुहूर्त में क्या करना चाहिए ?
अगर आप सुबह जल्दी उठने की आदत विकसित करना चाहते हैं, तो इस समय कुछ अच्छी आदतें अपनाकर अपने दिन को बेहतर बना सकते हैं।
भगवान का स्मरण करें
सुबह उठते ही सकारात्मक विचारों के साथ ईश्वर का स्मरण करना शुभ माना जाता है। इससे मन शांत रहता है।
पानी पीएं
सुबह खाली पेट पानी पीना शरीर के लिए लाभकारी माना जाता है। यह शरीर को hydrate रखने में मदद करता है।
योग और ध्यान करें
ब्रह्म मुहूर्त ध्यान और योग के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है। इससे मानसिक और शारीरिक संतुलन बेहतर होता है।
सूर्य को अर्घ्य दें
सूर्य को जल अर्पित करना भारतीय परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।
ब्रह्म मुहूर्त में क्या नहीं करना चाहिए
सुबह उठते ही कुछ आदतों से बचना चाहिए क्योंकि उनका असर पूरे दिन पर पड़ सकता है।
उठते ही मोबाइल फोन का उपयोग न करें
नकारात्मक बातें सोचने से बचें
आलस्य और देर तक बिस्तर पर पड़े रहने की आदत न रखें
सुबह की शुरुआत तनाव या बहस से न करें
क्या ब्रह्म मुहूर्त सफलता से जुड़ा है
बहुत से सफल लोग सुबह जल्दी उठने की आदत को अपनी सफलता का महत्वपूर्ण कारण मानते हैं। सुबह का समय व्यक्ति को मानसिक स्पष्टता और अनुशासन प्रदान करता है।
जब व्यक्ति दिन की शुरुआत सकारात्मक सोच और योजना के साथ करता है, तो उसका प्रभाव उसके काम और निर्णयों पर भी दिखाई देता है।
सुबह की सही दिनचर्या क्यों जरूरी है
आज के समय में तनाव और मानसिक दबाव तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में सुबह की अच्छी आदतें व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।
सुबह जल्दी उठना, ध्यान करना और सकारात्मक सोच रखना मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है। इससे व्यक्ति दिनभर अधिक focused और productive महसूस करता है।
सुबह उठकर सबसे पहले क्या करें ?
अगर आप सुबह की सही दिनचर्या के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो हमारा यह लेख भी पढ़ सकते हैं:
इस लेख में सुबह की अच्छी आदतों और दैनिक नियमों को विस्तार से समझाया गया है।
ब्रह्म मुहूर्त केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। सुबह जल्दी उठने की आदत व्यक्ति को अधिक अनुशासित, शांत और ऊर्जावान बना सकती है।
अगर आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं, तो सुबह जल्दी उठने और अच्छी दिनचर्या अपनाने की शुरुआत आज से ही करें।
देहरादून में निहंग सिखों का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार की रात निहंग सिख देहरादून में घुस गए और हंगामा। ये निहंग सिख हेमकुंड साहिब जाने की जिद लिए हुए थे। हालांकि बाद में पुलिस ने उन्हे वापस लौटा दिया।
पहले से तय था कार्यक्रम
अपने पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत निहंग सिखों ने 25 जून को देहरादून की ओर कूच किया। देहरादून और हिमाचल की सीमा पर स्थित पांवटा साहिब गुरुद्वारे में इन निहंग सिखों ने पहले डेरा डाला। वहां जब इनकी संख्या अधिक हो गई उसके बाद ये निहंग सिख उत्तराखंड की सीमा में देहरादून से दाखिल होने के लिए आगे बढ़े। रात करीब 10 बजे के आसपास इन निंहग सिखों ने देहरादन के कुल्हाल बार्डर चेकपोस्ट पर डेरा डाल दिया और देहरादून में घुसने की कोशिश करने लगे।
जवान खड़े देखते रह गए
कुल्हाल सीमा पर पहले से ही पुलिस और आईटीबीपी के जवानों ने मोर्चा संभाल रखा था। निहंग सिखों को रोकने के लिए बैरिकेड्स भी लगाए गए थे। हालांकि कुछ देर तक बातचीत और नारेबाजी करने के बाद निहंग सिखों ने अपना धैर्य खो दिया और वो बैरिकेड्स को हटाने के दम लगाने लगे। कई निहंग सिखों ने बैरिकेड्स हटा दिए और तलवारें लहराते हुए वो देहरादून की सीमा में प्रवेश कर गए। इस दौरान वहां मौजूद पुलिस और आईटीबीपी के जवान कुछ नहीं कर पाए।
निहंगों के घुसने की खबर से हड़कंप
वहीं निहंग सिखों के देहरादून में घुसने की खबर मिलते ही हड़कंप मच गया। स्थानीय पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के हाथ पांव फूलने लगे। आनन – फानन में डीएम और एसएसपी निहंगों को रोकने के लिए और उनसे बातचीत के लिए निकले। इसी बीच कुछ निहंग सिख पुलिस और इंटेलीजेंस को चकमा देकर शहर के बीच स्थित एक गुरुद्वारे तक पहुंच गए। आनन फानन में अधिकारी वहां पहुंचे और बात मुलाकात का दौर शुरू हुआ।
अधिकारियों को मिली सफलता
काफी देर तक समझाने और मान मनौवल के बाद निहंग सिख देहरादून से वापस लौटने को तैयार हुए। इनमे से कई निहंग सिख ऐसे थे तो ऋषिकेश के रास्ते हेमकुंड की ओर जाना चाहते थे लेकिन आखिरकार प्रशासन ने उन्हे रोक लिया और वापस भेजने में सफल रहे।
पांवटा साहिब में रुकने की खबर
वहीं 26 जून की सुबह निहंग सिखों के फिर एक बार पांवटा साहिब गुरुद्वारे में रुके होने की खबर आई। इसके चलते पुलिस ने एहतियात बरतते हुए पांवटा से आने वाले वाहनों को सीमा पर ही रोकना शुरू किया। यात्रियों को यहां रुकने के बाद देहरादून की सीमा में पैदल प्रवेश और वहां से दूसरे वाहनों से आगे रवाना होना पड़ा। इससे लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मौके पर खुद डीएम और एसएसपी हालात का जाएजा लेते रहे। भारी पुलिस बल भी तैनात रखा गया है।
क्यों नाराज हैं निहंग ?
दरअसल निहंग सिखों की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह कर्णप्रयाग में स्थानीय व्यापारियों और कुछ निहंग सिखों के बीच हुई हिंसक झड़प है। इस झड़प के बाद पुलिस ने चार निहंग सिखों को अरेस्ट कर लिया था। इसी बात से नाराज कुछ निहंग सिख नगरासु गुरुद्वारे में कब्जा करके बैठ गए थे। निहंग सिखों की मांग है कि गिरफ्तार किए गए निहंग सिखों को तुरंत रिहा किया जाए।
लोकल इंटेलिजेंस पर सवाल
इस घटना के बाद फिर एक बार लोकल इंटेलिजेंस सवालों के घेरे में है। कैसे इतनी बड़ी संख्या में देहरादून की सीमा पर निहंग एकत्र होते रहे और किसी को पता ही नहीं चला। हालात ये तक हो गए निहंग सिख मुख्य रास्ता छोड़कर बदले हुए रास्ते से शहर के बीच स्थित गुरुद्वारे तक पहुंच गए और लोकल इंटेलिजेंस देखता रह गया। इससे पहले भी नगरासु की घटना को लेकर भी खुफिया तंत्र पर सवाल उठ चुका है।
भारतीय नौसेना में अधिकारी बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए शानदार अवसर आया है (Indian Navy SSC Officer Recruitment 2027)। Indian Navy ने Short Service Commission (SSC) Officer के विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती अभियान के तहत Executive, Education और Technical Branch में कुल 275 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 25 जून 2026 से 27 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
भारतीय नौसेना द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार चयनित अभ्यर्थियों को जून 2027 से भारतीय नौसेना अकादमी (INA), एझिमाला, केरल में प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह भर्ती उन युवाओं के लिए सुनहरा अवसर है जो भारतीय सशस्त्र बलों में अधिकारी के रूप में करियर बनाना चाहते हैं।
Indian Navy SSC Officer Recruitment 2027 Highlights
भारतीय नौसेना ने विभिन्न शाखाओं में कुल 275 पदों की घोषणा की है।
शाखा
पद
Executive Branch
172
Education Branch
13
Technical Branch
90
कुल पद
275
Educational Qualification
इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय में BE/B.Tech, M.Tech, MBA, MCA, M.Sc, MA या अन्य निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होनी चाहिए।
Executive Branch के कई पदों के लिए BE/B.Tech में न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक आवश्यक हैं। Education Branch के लिए संबंधित विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन तथा Technical Branch के लिए निर्धारित इंजीनियरिंग स्ट्रीम में डिग्री मांगी गई है।
अंतिम वर्ष के छात्र भी आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते वे प्रशिक्षण शुरू होने से पहले अपनी डिग्री पूरी कर लें।
Age Limit
विभिन्न एंट्री के लिए आयु सीमा अलग-अलग निर्धारित की गई है। अधिकांश एंट्री के लिए उम्मीदवार का जन्म 02 जुलाई 2002 से 01 जनवरी 2008 के बीच होना चाहिए। कुछ पदों के लिए अलग आयु सीमा निर्धारित की गई है। उम्मीदवार आवेदन से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन अवश्य पढ़ें।
Application Fee
इस भर्ती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसी भी वर्ग के उम्मीदवार से आवेदन शुल्क नहीं लिया जाएगा।
वर्ग
शुल्क
General
₹0
OBC
₹0
EWS
₹0
SC
₹0
ST
₹0
महिला उम्मीदवार
₹0
Selection Process
Indian Navy SSC Officer Recruitment 2027 में उम्मीदवारों का चयन निम्न चरणों के आधार पर किया जाएगा:
आवेदन पत्रों की शॉर्टलिस्टिंग
SSB Interview
मेडिकल परीक्षण
मेरिट सूची
उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग उनकी शैक्षणिक योग्यता में प्राप्त अंकों के आधार पर की जाएगी। इसके बाद चयनित उम्मीदवारों को SSB इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा।
Salary and Benefits
चयनित उम्मीदवारों को प्रशिक्षण के बाद Sub Lieutenant के पद पर नियुक्त किया जाएगा। भारतीय नौसेना द्वारा जारी जानकारी के अनुसार Sub Lieutenant का प्रारंभिक Gross Salary Package लगभग ₹1.20 लाख प्रतिमाह से शुरू होता है।
इसके अलावा उम्मीदवारों को निम्न सुविधाएं भी मिलेंगी:
सैन्य सेवा भत्ता
चिकित्सा सुविधाएं
आवास सुविधा
यात्रा सुविधाएं
बीमा कवर
करियर ग्रोथ के अवसर
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Online Apply Process
Indian Navy SSC Officer Recruitment 2027 के लिए आवेदन करने हेतु निम्न चरणों का पालन करें:
भारतीय नौसेना में अधिकारी के रूप में करियर बनाना लाखों युवाओं का सपना होता है। SSC Officer Entry के माध्यम से उम्मीदवारों को नेतृत्व क्षमता विकसित करने, आधुनिक तकनीक के साथ काम करने और देश सेवा का अवसर मिलता है। साथ ही आकर्षक वेतन, भत्ते और प्रतिष्ठित करियर इस भर्ती को और भी खास बनाते हैं।
Indian Navy SSC Officer Recruitment 2027 युवाओं के लिए शानदार अवसर लेकर आई है। यदि आप भारतीय नौसेना में अधिकारी बनकर देश सेवा करना चाहते हैं तो अंतिम तिथि का इंतजार न करें और समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।
FAQ
Indian Navy SSC Officer Recruitment 2027 में कुल कितने पद हैं?
इस भर्ती में कुल 275 पदों पर भर्ती की जाएगी।
आवेदन की अंतिम तिथि क्या है?
ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 27 जुलाई 2026 है।
क्या आवेदन शुल्क देना होगा?
नहीं, किसी भी वर्ग के उम्मीदवार से आवेदन शुल्क नहीं लिया जाएगा।
चयन प्रक्रिया क्या होगी?
शॉर्टलिस्टिंग, SSB इंटरव्यू, मेडिकल परीक्षण और मेरिट सूची के आधार पर चयन होगा।
चयनित उम्मीदवारों को कितना वेतन मिलेगा?
Sub Lieutenant के रूप में नियुक्त उम्मीदवारों को लगभग ₹1.20 लाख प्रतिमाह का प्रारंभिक Gross Salary Package मिलेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि चारधाम एवं हेमकुंट साहिब यात्रा पर आने वाले सभी श्रद्धालुओं की सुख-सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशभर में आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों का देवभूमि उत्तराखण्ड में हार्दिक स्वागत है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड आस्था, संस्कृति और प्रकृति की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों से अपील की कि वे देवभूमि उत्तराखण्ड के शांत वातावरण में अपनी यात्रा का पूर्ण आनंद लें तथा किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें।
सरकार कर रही अपना काम, दोषियों के खिलाफ होगी कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्णप्रयाग और नगरासू में सामने आई घटनाओं के संबंध में सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार, प्रशासन एवं पुलिस आवश्यक कार्रवाई कर रहे हैं। जांच में जो भी दोषी पाया गया है, उसके विरुद्ध कार्रवाई की गई है तथा सभी तथ्यों के आधार पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में चारधाम यात्रा के साथ-साथ हेमकुंट साहिब यात्रा भी सुचारु रूप से संचालित हो रही है। चारधाम यात्रा में अब तक 40 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। वहीं, हेमकुंट साहिब यात्रा के शुरुआती दिनों में ही श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 25 हजार अधिक दर्ज की गई है।
सभी का सम्मान परंपरा का हिस्सा
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में सिख गुरुओं द्वारा स्थापित तीन प्रमुख पवित्र स्थल—हेमकुंट साहिब, रीठा साहिब और नानकमत्ता साहिब—स्थित हैं, जहां प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि सभी का सम्मान करना देवभूमि उत्तराखण्ड की संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना के अनुरूप यहां आने वाले सभी लोगों का स्वागत एवं सत्कार किया जाता है।
अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं प्रसारित करने वालों से अपील की कि वे समाज और समुदायों को बांटने का प्रयास न करें। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के लोगों ने मिल-जुलकर देश को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रामक और भड़काऊ खबरें फैलाने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
संवाद से निकलेगा समाधाना का रास्ता
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे सभी धार्मिक स्थल आस्था, श्रद्धा और प्रेरणा के केंद्र हैं, जहां से समाज को सकारात्मक मार्गदर्शन प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट रुख है कि देवभूमि उत्तराखण्ड में ऐसा कोई कृत्य स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिससे किसी व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचे या किसी धर्म एवं आस्था को नुकसान पहुंचे। उन्होंने कहा कि संवाद, सद्भाव और सौहार्दपूर्ण वातावरण के माध्यम से ही सभी समस्याओं का समाधान संभव है।
इस अवसर पर बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, हेमकुंट साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेन्द्रजीत सिंह बिन्द्रा, समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
देहरादून में एक भीषण हादसा हुआ है। सिटी बस ने कई लोगों को रौंद दिया है। ये हादसा देहरादून के पटेलनगर के लालपुल इलाके में हुआ है। यहां अनियंत्रित सिटी बस ने कई लोगों को रौंद दिया।
अचानक अनियंत्रित हुई बस
मिली जानकारी के मुताबिक मंगलवार सुबह तकरीबन साढ़े दस बजे के आसपास पटेलनगर थाना क्षेत्र के लालपुल इलाके में बड़ी संख्या में दिहाड़ी मजदूर काम की तलाश में खड़े थे। इसी बीच एक सिटी बस आईएसबीटी की तरफ से तेजी से आई और फुटपाथ पर खड़े मजदूरों और अन्य लोगों को रौंदते हुए एक होटल के गेट पर जाकर रुक गई।
इस हादसे के बाद मौके पर चीख पुकार मच गई। हादसे में कम से कम छह लोग बस के नीचे रौंद दिए गए। इसके बाद स्थानीय लोगों ने बस के नीचे फंसे लोगों को निकाला और ऑटो और अन्य साधनों से अस्तपाल पहुंचाया।
बस के ड्राइवर को आया दौरा
बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त सिटी बस के ड्राइवर की तबीयत बस चलाते समय अचानक खराब हुई और उसका स्टीयरिंग पर से नियंत्रण हट गया। इसी वजह से बस बेकाबू हो गई और मजदूरों को रौंदते हुए चली गई। हादसे के बाद मौके पर अफरातफरी मच गई और आसपास के लोग दौड़ पड़े। मौके पर पहुंची पुलिस ने हादसे के बाद सिटी बस के ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया है।
देहरादून में सोमवार को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य में भूमि घोटालों और भू माफिया को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए सचिवालय का घेराव किया है। कांग्रेस ने भूमि घोटालों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा सर्वोपरी
उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्य में पिछले दस वर्षों के दौरान हुए भूमि आवंटनों, सरकारी भूमि के हस्तांतरणों, भूमि उपयोग परिवर्तन तथा विभिन्न भूमि घोटालों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि उत्तराखंड जैसे सीमित भौगोलिक संसाधनों वाले पर्वतीय राज्य में भूमि और प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
हरिद्वार भूमि घोटाले का किया जिक्र
गणेश गोदियाल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य में भूमि संबंधी अनेक ऐसे प्रकरण सामने आए हैं, जिन्होंने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली तथा सरकारी संसाधनों के संरक्षण को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। वर्ष 2025 में हरिद्वार नगर निगम द्वारा की गई भूमि खरीद के मामले में उठे सवालों के बाद हुई जांच में अनियमितताओं की पुष्टि हुई तथा कई अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई हुई। इस प्रकरण ने स्पष्ट कर दिया कि भूमि संबंधी मामलों में व्यापक स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता है।
जार्ज एवरेस्ट की भूमि पर भी सवाल
गणेश गोदियाल ने कहा कि मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट क्षेत्र की भूमि के आवंटन को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। डाकपत्थर क्षेत्र में जल विद्युत निगम की लगभग 180 एकड़ भूमि के हस्तांतरण का मामला भी विवादों में रहा है। नैनीताल जनपद के रामगढ़ क्षेत्र में सरकारी भूमि को निजी हाथों में सौंपे जाने के आरोप भी व्यापक रूप से सामने आए हैं।
अदालतों के चक्कर काटने को विवश
उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय पशुपालकों और ग्रामीण समुदायों द्वारा वर्षों से उपयोग में लाई जा रही चरागाह एवं सामुदायिक भूमि भी संकट में है। प्रतापनगर सहित टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग, नैनीताल तथा अन्य जनपदों में ग्रामीण समुदाय अपनी पारंपरिक एवं पंचायती भूमि को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और अनेक स्थानों पर न्यायालयों तथा सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को विवश हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यदि समय रहते इन मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो भविष्य में राज्य को भूमि संकट, पर्यावरणीय असंतुलन और सामाजिक असंतोष जैसी गंभीर परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।
प्रदेश कांग्रेस ने मांग की है कि—
पिछले दस वर्षों में हुए सभी प्रमुख भूमि आवंटनों, खरीद-फरोख्त, भूमि हस्तांतरणों एवं भूमि उपयोग परिवर्तन की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
विभिन्न विभागों की भूमि के हस्तांतरण एवं निजी संस्थाओं को किए गए आवंटनों की समीक्षा के लिए स्वतंत्र जांच आयोग गठित किया जाए।
सरकारी भूमि पर हुए नियम-विरुद्ध कब्जों तथा संदिग्ध हस्तांतरणों की पहचान कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जांच पूरी होने तक विवादित भूमि आवंटनों एवं हस्तांतरणों पर रोक लगाने पर विचार किया जाए।
राज्य की सामुदायिक, पंचायती एवं चरागाह भूमि के संरक्षण के लिए स्पष्ट एवं कठोर नीति बनाई जाए। गणेश गोदियाल ने कहा कि उत्तराखंड की जनता की भावनाओं तथा प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर विषय को प्रदेश कांग्रेस लगातार उठाती रहेगी। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल महामहिम राज्यपाल से भेंट कर इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करने तथा राज्य के भूमि संसाधनों की सुरक्षा हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग करेगा।
लखनऊ में सोमवार को हुए एक दर्दनाक अग्निकांड में अभी तक 14 लोगों की मौत की खबर आ रही है। हताहतों की संख्या बढ़ने की भी आशंका है। ये हादसा लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए है। यहां एक कम्प्यूटर एनिमेशन कोचिंग में आग लग गई और इस आग की चपेट में आने से 14 लोग मारे गए। कुछ के बिल्डिंग में फंसे होने की आशंका है।
धुआं उठा और फिर दिखी विकराल आग
लखनऊ के अलीगंज में पुरनिया इलाके में सोमवार को एक बिल्डिंग में बने कोचिंग सेंटर में धुआं उठता देखा गया। इसके बाद अचानक ही विकराल आग ने पूरे कोचिंग सेंटर को अपनी चपेट में ले लिया। आग की लपटें कोचिंग के सड़क वाले हिस्से से बाहर आने लगीं। स्थानीय लोगों ने तत्काल फायर ब्रिगेड को फोन किया। सूचना मिलते ही मौके पर फायर ब्रिगेड ने मोर्चा संभाला और आग बुझाने की कोशिश शुरू की। हालांकि बेहद विकराल थी लिहाजा आग पर काबू पाने में दमकल कर्मियों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। काले धुएं की वजह से भी फायर ब्रिगेड कर्मियों को दिक्कतें पेश आईं।
धुएं और आग से हुई मौतें
इस अग्निकांड में तेरह लोगों की मौत की सूचना आ रही है। बताया जा रहा है कि जिस समय ये आग लगी अंदर क्लासेज चल रही थीं। बच्चे क्लास में थे। अचानक आग और धुएं के चलते उन्हे बाहर का रास्ता नहीं मिला होगा और वो दम घुटने और झुलसने से मौत के मुंह में समा गए होंगे।
वहीं जान बचाने के लिए एक शख्स कोचिंग की पहली मंजिल से नीचे कूद पड़ा। ऐसे में चाहरदीवारी की रेलिंग से टकराने के चलते वो गंभीर रूप से घायल भी हो गया। स्थानीय लोगों ने उसे उठाकर बाहर निकाला और इलाज के लिए भेजा।
मौके पर पहुंचे डिप्टी सीएम
घटना की भयावहता को देखते हुए यूपी के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक खुद ही मौके पर पहुंचे और राहत कार्यों की निगरानी करते रहे। डिप्टी सीएम बृजेश पाठक वहीं खड़े होकर रेस्क्यू कार्यों को देखते रहे। उनके साथ मौके पर ही पुलिस के कई बड़े अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी डटे रहे।
सीएम योगी ने जताया दुख
वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में हुई आग की घटना में मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। इसके साथ ही सीएम योगी ने अपने सभी दौरे रद्द कर दिए हैं और लखनऊ के लिए रवाना हो गए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित परिवारों से संपर्क स्थापित करने, हर संभव सहायता प्रदान करने और घायलों के लिए उचित चिकित्सा उपचार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
तीन मंजिल की बिल्डिंग, छत से तोड़ी दिवार, फिर घुसे
दरअसल जिस बिल्डिंग में हादसा हुआ वो तीन मंजिल की बताई जा रही है। पहली मंजिल पर एक पेट शॉप है जबकि ऊपर की दो मंजिलों पर कम्प्यूटर एनिमेशन सिखाने वाला कोचिंग है। इस बिल्डिंग में जब आग लगी उस समय कितने लोग अंदर थे इस बारे में कोई सही आंकड़ा नहीं मिल पा रहा है। काले धुएं ने दमकल कर्मियों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी की। राहत और बचाव में जवानों ने दूसरी बिल्डिंग के छत के रास्ते से इस बिल्डिंग की दीवार को तोड़ा और फंसे लोगों को निकाला।
बिल्डिंग के अंदर दमकल कर्मी गीले कंबल और शव रखने वाले बैग्स लेकर जाते दिखे। पेट शॉप में फंसे कुछ जानवरों को भी जवानों ने बचाने में सफलता पाई