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उत्तराखंड ने रचा कीर्तिमान: लक्ष्य से डेढ़ साल पहले ही पूरा हुआ सोलर रूफटॉप मिशन

यूपीसीएल ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में रचा नया कीर्तिमान। अब तक, पूरे प्रदेश में 42,000 से अधिक सोलर रूफटॉप संयंत्र सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं

हरित ऊर्जा में उत्तराखंड अग्रणी: 42,000 से ज़्यादा सोलर प्लांट स्थापित

उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यूपीसीएल ने भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय द्वारा निर्धारित 40,000 सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित करने के लक्ष्य को निर्धारित समय सीमा से लगभग डेढ़ साल पहले ही पूरा कर लिया है। यह लक्ष्य मार्च 2027 तक हासिल किया जाना था, जिसे यूपीसीएल ने अगस्त 2025 में ही पूरा कर दिखाया है।

लक्ष्य से भी आगे ‘पीएम सूर्य-घर योजना’ में मिली ऐतिहासिक सफलता

यूपीसीएल ने केवल लक्ष्य को पूरा ही नहीं किया, बल्कि इसे पार भी कर लिया है। अब तक, पूरे प्रदेश में 42,000 से अधिक सोलर रूफटॉप संयंत्र सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं। इन संयंत्रों की कुल उत्पादन क्षमता लगभग 156 मेगावाट है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि ने उत्तराखंड को देश के उन अग्रणी राज्यों की श्रेणी में ला खड़ा किया है, जो हरित ऊर्जा उत्पादन और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। इस पूरे अभियान का नेतृत्व मुख्य अभियंता आशीष अरोड़ा ने नोडल अधिकारी के रूप में किया।

नेतृत्व और समर्पण का परिणाम

यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार ने इस सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रेरणादायी नेतृत्व और प्रमुख सचिव (ऊर्जा) के निरंतर मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना ‘पीएम सूर्य-घर मुफ्त बिजली’ को प्रदेश के हर घर तक पहुँचाना उनके लिए गर्व का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि यह उपलब्धि यूपीसीएल परिवार की प्रतिबद्धता और उपभोक्ताओं के सहयोग का ही परिणाम है।

सीएम धामी ने दी बधाई

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूपीसीएल की इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न को डेढ़ साल पहले ही हासिल करना पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि उत्तराखंड न केवल स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में तेज़ी से बढ़ रहा है, बल्कि आने वाले समय में यह ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण में भी एक अग्रणी राज्य बनेगा। उन्होंने राज्य सरकार की ओर से हर संभव सहयोग देने का वादा किया ताकि उत्तराखंड हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश को एक नई दिशा दे सके।

यूपीसीएल का अभूतपूर्व कदम

यूपीसीएल ने यह साबित कर दिया है कि समय पर और उससे पहले लक्ष्यों को हासिल करना संभव है। इस सफलता से मिली प्रेरणा के साथ, यूपीसीएल भविष्य में भी इसी उत्साह और प्रतिबद्धता के साथ काम करता रहेगा, ताकि उत्तराखंड को हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित किया जा सके। यह उपलब्धि न केवल ऊर्जा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर है, बल्कि यह प्रधानमंत्री के ‘हर घर को स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा’ देने के संकल्प को भी मजबूती प्रदान करती है।

उत्तराखंड को केंद्र सरकार का ₹547.83 करोड़ का तोहफा, अब कम गुल होगी बिजली, जानिये कैसे!

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निरंतर प्रयासों के कारण केंद्र सरकार ने राज्य को ₹547.83 करोड़ की महत्वपूर्ण धनराशि आवंटित की है। इस राशि का उपयोग ऋषिकेश में विद्युत वितरण और भूमिगत केबलिंग कार्यों के साथ-साथ देहरादून में एक उन्नत SCADA (Supervisory Control and Data Acquisition) प्रणाली स्थापित करने के लिए किया जाएगा। इन परियोजनाओं का उद्देश्य दोनों शहरों में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक मजबूत, सुरक्षित और कुशल बनाना है।

ऋषिकेश और देहरादून को मिलेगा सीधा फायदा

इस योजना से ऋषिकेश और देहरादून के लाखों निवासियों को सीधा फायदा मिलेगा। ऋषिकेश में भूमिगत केबलिंग से न केवल शहर की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि यह बिजली के खंभों और तारों से होने वाले हादसों को भी रोकेगा। इसके अलावा, देहरादून में SCADA प्रणाली लागू होने से बिजली आपूर्ति की निगरानी और नियंत्रण अधिक प्रभावी होगा, जिससे बिजली गुल होने की घटनाओं में कमी आएगी और मरम्मत कार्य भी तेजी से हो सकेगा।

मुख्यमंत्री ने जताया आभार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस महत्वपूर्ण परियोजना को मंजूरी देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड को केंद्र सरकार से लगातार सहयोग मिल रहा है, जिससे राज्य के विकास को गति मिली है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर प्रदेश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं।

किच्छा में बनेगा अंडरपास

विद्युत परियोजनाओं के अलावा, मुख्यमंत्री धामी के अनुरोध पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किच्छा में एक महत्वपूर्ण अंडरपास के निर्माण की भी पहल की है। यह अंडरपास महाराणा प्रताप चौक के पास मुख्य रेलवे क्रॉसिंग पर बनेगा, जिससे स्थानीय लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होगी और यातायात सुगम होगा। इस संबंध में अधिकारियों को जल्द से जल्द साइट का निरीक्षण करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

बड़ी ख़बरः देहरादून से सीधी उड़ान लेकर जा सकेंगे बेंगलुरु, जानिये कितनी मिलेगी छूट!

देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को देहरादून के जौलीग्रांट हवाई अड्डे से एयर इंडिया एक्सप्रेस की देहरादून-बेंगलुरु सीधी उड़ान सेवा का उद्घाटन किया। इस नई सेवा को राज्य के समग्र विकास और हवाई संपर्क में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

हवाई संपर्क को मिला बढ़ावा

इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि देहरादून और बेंगलुरु के बीच सीधी हवाई सेवा उत्तराखंड के युवाओं, उद्यमियों, आईटी पेशेवरों, छात्रों और पर्यटकों के लिए बेहद सुविधाजनक साबित होगी। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु देश की तकनीकी राजधानी है, जहाँ उत्तराखंड के हजारों युवा शिक्षा, सेवा और स्टार्टअप क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इस उड़ान से उन्हें आने-जाने के लिए एक सुरक्षित, समयबद्ध और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा।

उत्तराखंड में हवाई सेवाओं का विस्तार

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने हवाई संपर्क को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। पिथौरागढ़, चिन्यालीसौड़, गौचर और नैनीसैनी जैसे क्षेत्रीय हवाई अड्डों को सक्रिय किया जा रहा है। साथ ही, जौलीग्रांट हवाई अड्डे को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। उन्होंने पंतनगर हवाई अड्डे के विस्तार कार्य को भी महत्वपूर्ण बताया, जो कुमाऊं क्षेत्र के लिए एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम साबित होगा।

“टेल्स ऑफ इंडिया” और “बुक डायरेक्ट” पहल

एयर इंडिया एक्सप्रेस के प्रबंध निदेशक आलोक सिंह ने कहा कि देहरादून उनका 58वां स्टेशन है। उन्होंने यह भी बताया कि इस महीने अहमदाबाद और चंडीगढ़ के बाद देहरादून तीसरा नया स्टेशन है। देहरादून से बेंगलुरु की यह उड़ान पूरे भारत में 18 अन्य शहरों के लिए सुविधाजनक वन-स्टॉप कनेक्शन भी प्रदान करेगी। इस मौके पर एयर इंडिया एक्सप्रेस ने अपनी ‘टेल्स ऑफ इंडिया’ पहल के तहत, उत्तराखंड की पारंपरिक लोककला ‘ऐपण’ से प्रेरित एक टेल आर्ट वाले बोइंग 737-8 विमान को पहली उड़ान के लिए तैनात किया।

एयरलाइन ने ‘बुक डायरेक्ट’ अभियान भी शुरू किया है, जिसके तहत यात्री सीधे एयरलाइन की वेबसाइट या मोबाइल ऐप से बुकिंग करके कई तरह के लाभ उठा सकते हैं। www.airindiaexpress.com पर जाकर सीधे बुकिंग कर सकते हैं। इनमें प्रोमो कोड और बैंक ऑफ़र के साथ 20% तक की छूट, नेट बैंकिंग पर शून्य सुविधा शुल्क, छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष छूट, और गर्म भोजन पर 50% तक की छूट शामिल है।

सचिवालय में व्यवस्था सुधारने की कवायद: मुख्य सचिव ने दिए सख्त निर्देश

देहरादून: उत्तराखंड सचिवालय में कार्यप्रणाली को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सोमवार को परिसर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने फाइलों के अंबार और अनुभागों की अव्यवस्थित स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।

फाइलों की छंटनी (Weeding) प्रक्रिया में तेज़ी लाने का आदेश

निरीक्षण के दौरान, मुख्य सचिव ने पाया कि कई अनुभाग पुरानी और अनावश्यक फाइलों से भरे हुए हैं। उन्होंने सभी विभागों को एक महीने के भीतर फाइलों की ‘वीडिंग’ (छंटनी) प्रक्रिया को पूरा करने का आदेश दिया। इस प्रक्रिया के नियम फिर से प्रसारित किए जाएंगे ताकि अनुपालन सुनिश्चित हो सके। उनका मानना है कि इससे न केवल कार्यस्थल व्यवस्थित होगा बल्कि महत्वपूर्ण फाइलों को खोजने में भी आसानी होगी।

रिकॉर्ड रूम की स्थापना का निर्देश

मुख्य सचिव ने सचिवालय प्रशासन के सचिव को तुरंत रिकॉर्ड रूम के लिए जगह चिन्हित करने और उसे तैयार करने का निर्देश दिया। इस रिकॉर्ड रूम में, छंटनी के बाद बची हुई सभी आवश्यक फाइलों को व्यवस्थित रूप से रखा जाएगा। यह कदम दस्तावेजों के सुरक्षित और सुव्यवस्थित रखरखाव के लिए उठाया गया है।

अनुभागों के लिए पोटा केबिन की व्यवस्था

कुछ अनुभागों में एक ही कमरे में कई विभागों के संचालन पर चिंता जताते हुए, मुख्य सचिव ने तत्काल 10-12 अनुभागों के लिए पोटा केबिन की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। इन पोटा केबिनों में अनुभागों को स्थानांतरित किया जाएगा, जिससे कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण मिल सके।

नियमित निरीक्षण और मूलभूत सुविधाओं पर जोर

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को अपने अनुभागों का निरीक्षण करने के लिए रोस्टर फिर से जारी करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी अधिकारी निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने-अपने अनुभागों का अनिवार्य रूप से निरीक्षण करें। इसके साथ ही, उन्होंने सचिवालय परिसर के सभी भवनों में मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं।

उत्तराखंड में मॉरीशस के प्रधानमंत्री का सम्मान

देहरादून, मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीन रामगुलाम ने अपनी देवभूमि उत्तराखंड यात्रा को सफलतापूर्वक संपन्न किया। जौलीग्रांट एयरपोर्ट से प्रस्थान करने से पहले, उनका गर्मजोशी से सम्मान किया गया। इस अवसर पर उन्हें उत्तराखंड की संस्कृति और परंपराओं की स्मृति में विशेष उपहार भेंट किए गए।

भावपूर्ण भेंट और सम्मान

विदाई समारोह के दौरान, डॉ. नवीन रामगुलाम को चारधाम का पवित्र प्रसाद भेंट किया गया, जो उत्तराखंड की आध्यात्मिक पहचान का प्रतीक है। इसके अलावा, उन्हें राज्य के विशेष ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के उत्पाद भी स्मृति चिन्ह के रूप में दिए गए। इन उपहारों ने हिमालयी क्षेत्र के प्राकृतिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाया।

आतिथ्य सत्कार की सराहना

डॉ. रामगुलाम ने उत्तराखंड के लोगों की मेहमाननवाजी और गर्मजोशी की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की आतिथ्य परंपरा अत्यंत सराहनीय है, जिसने उनकी यात्रा को और भी यादगार बना दिया।

भारत-मॉरीशस संबंध हुए और मजबूत

यह यात्रा भारत और मॉरीशस के बीच सांस्कृतिक और द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा की भी इस दौरान चर्चा हुई। डॉ. रामगुलाम की यात्रा ने दोनों देशों के बीच संबंधों को गहरा और प्रगाढ़ बनाने की प्रतिबद्धता को दोहराया है। यह यात्रा न केवल राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देगी, जिससे दोनों देशों के लोग एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।

उत्तराखंड BJP की नई टीम घोषित: 2027 चुनाव पर फोकस, क्या होगी जीत की ‘हैट्रिक’!

लंबे मंथन के बाद, BJP ने उत्तराखंड के लिए अपनी नई प्रदेश कार्यकारिणी की टीम की घोषणा कर दी है। इस टीम में कुल 42 पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। भाजपा ने 2027 के विधानसभा चुनावों में लगातार तीसरी बार जीत हासिल करने के लक्ष्य के साथ इस टीम का गठन किया है।

BJP की नई टीम में युवा नेतृत्व और महिला शक्ति पर जोर

BJP की इस नई टीम में युवा चेहरों को प्राथमिकता दी गई है, जिन्हें 2027 के चुनावों में ‘हैट्रिक’ बनाने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। पदाधिकारियों की औसत उम्र 40 से 50 के बीच है, जो यह दर्शाता है कि पार्टी भविष्य के लिए युवा नेतृत्व तैयार कर रही है।

इसके अलावा, पार्टी ने संगठन में महिलाओं को भी बड़ी जिम्मेदारी दी है। पहली बार, दीप्ति रावत को महिला महामंत्री के पद पर नियुक्त किया गया है। उनके साथ ही, दो महिला नेताओं को मंत्री और दो को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे संगठन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है।

अनुभवी और नए चेहरों का मिश्रण BJP की नई कार्यकारिणी

BJP की नई कार्यकारिणी में अनुभव और युवा जोश का संतुलन देखने को मिला है। मनवीर सिंह चौहान (प्रदेश मीडिया प्रभारी) और पुनीत मित्तल (प्रदेश कोषाध्यक्ष) जैसे पुराने और अनुभवी चेहरों पर पार्टी ने तीसरी बार भरोसा जताया है। इन नेताओं ने पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

इसके साथ ही, कई ऐसे नए चेहरों को भी शामिल किया गया है, जो राष्ट्रीय स्तर पर संगठन के साथ जुड़े थे। इससे यह साफ है कि BJP ने राज्य स्तर पर राष्ट्रीय अनुभव का लाभ उठाने की रणनीति अपनाई है।

BJP की नई टीम में क्षेत्र और समीकरणों का संतुलन

नई टीम में पहाड़ और मैदान, दोनों क्षेत्रों का खास ध्यान रखा गया है। हरिद्वार और देहरादून जैसे मैदानी जिलों से कई नेताओं को जगह मिली है, वहीं पर्वतीय जिलों जैसे गढ़वाल और कुमाऊं को भी उचित प्रतिनिधित्व दिया गया है। हरिद्वार से पूर्व विधायक स्वामी यतीश्वरानंद को उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि दीप्ति रावत, डॉ. स्वराज विद्वान और नेहा जोशी जैसे नेताओं को भी अहम जिम्मेदारी दी गई है।

BJP की नई कार्यकारिणी में सांसदों की भागीदारी

इस सूची में सांसदों के करीबी नेताओं को भी जगह दी गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि नई टीम के चयन में उनकी राय और भागीदारी भी शामिल है। अहम पदों पर उनके करीबियों को मौका देना पार्टी में आंतरिक संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

क्या मिशन 2027 के लिए तैयारी!

प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने इस टीम के चयन को मिशन 2027 की जीत का एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका कहना है कि युवा, महिला और अनुभवी पदाधिकारियों की यह टीम आगामी विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। लगातार दो बार सत्ता में रहने के बाद, भाजपा के लिए तीसरी बार जीतना एक बड़ी चुनौती है, जिसे इस नई टीम के जरिए साधने की कोशिश की गई है।

UPI Payment के नियमों में आज 15 Sep से हुए ये बड़े बदलाव, जानिए पूरी डिटेल

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UPI Payment को लेकर आज से बड़े बदलाव हुए हैं जिसका सीधा असर UPI Payment यूज़ करने वाले आम लोगों पर पड़ेगा. बता दें कि आज से NPCI ने UPI Payments को लेकर कई अहम और बेहद बड़े बदलाव किए हैं. NPCI के ये बड़े नियन आज से यानि 15 सितंबर से लागू हो रहे हैं.

किन लेन-देनों पर लागू होंगे नए नियम?

यह बदलाव मुख्य रूप से पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यानी किसी व्यापारी या संस्थान को किए जाने वाले भुगतान पर लागू होंगे। इसका मतलब है कि जब आप किसी दुकान, कंपनी, या सर्विस प्रोवाइडर को पेमेंट करेंगे, तभी ये नई लिमिट काम करेंगी। पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने की सीमा में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वह पहले की तरह ही प्रतिदिन 1 लाख रुपये रहेगी।

UPI Payment: कौन सी कैटेगरी में बढ़ी है लेन-देन की सीमा?

NPCI ने कुछ विशेष कैटेगरी में UPI Payment (भुगतान) की सीमा को बढ़ाया है। ये बदलाव उन लोगों के लिए फायदेमंद हैं जो अक्सर बड़ी राशि का भुगतान करते हैं।

  • बीमा प्रीमियम और कैपिटल मार्केट निवेश: अब आप एक बार में 5 लाख रुपये तक का UPI Payment कर सकते हैं, जबकि पहले यह सीमा 2 लाख रुपये थी। 24 घंटे में अधिकतम 10 लाख रुपये तक का ट्रांजेक्शन किया जा सकेगा।
  • लोन और EMI कलेक्शन: इस कैटेगरी में अब प्रति ट्रांजेक्शन 5 लाख रुपये तक का भुगतान किया जा सकता है। दैनिक सीमा 10 लाख रुपये तय की गई है।
  • क्रेडिट कार्ड बिल: क्रेडिट कार्ड के बिल का भुगतान अब एक बार में 5 लाख रुपये तक किया जा सकता है। इसकी दैनिक सीमा 6 लाख रुपये रखी गई है।
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क्या है P2P और P2M लेन-देन में अंतर?

P2P (पर्सन-टू-पर्सन) लेन-देन: जब आप अपने किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को पैसे भेजते हैं, तो वह P2P लेन-देन कहलाता है। इसकी सीमा पहले की तरह ही 1 लाख रुपये प्रतिदिन है।

P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) लेन-देन: जब आप किसी दुकान पर QR कोड स्कैन करके, या किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सामान या सर्विस के लिए पेमेंट करते हैं, तो वह P2M लेन-देन कहलाता है। नए नियम इसी प्रकार के लेन-देन पर लागू होंगे।

बैंकों की जोखिम नीति का क्या होगा असर?

NPCI ने यह भी स्पष्ट किया है कि भले ही UPI Payment की अधिकतम सीमा बढ़ा दी गई हो, लेकिन बैंक अपनी जोखिम नीति (Risk Policy) के आधार पर कम लिमिट भी तय कर सकते हैं। इसलिए, यह जानना ज़रूरी है कि आपका बैंक किस तरह की सीमाएं लागू करता है।

इन बदलावों से किसे होगा फायदा?

यह कदम उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है जिन्हें अक्सर बड़े भुगतान करने होते हैं, जैसे कि इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम भरना, शेयर मार्केट में निवेश करना, या लोन की EMI चुकाना। इससे अब उन्हें बार-बार छोटे-छोटे ट्रांजेक्शन करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी और उनका काम और भी आसान हो जाएगा।

ज्वेलरी और विदेशी मुद्रा भुगतान पर बढ़ी सीमा

ज्वेलरी खरीदने वाले और विदेशी मुद्रा भुगतान करने वाले लोगों के लिए भी खुशखबरी है। NPCI ने इन दोनों कैटेगरी में भी UPI लेन-देन की सीमा को बढ़ा दिया है। अब आप एक बार में 1 लाख रुपये की बजाय 2 लाख रुपये तक की ज्वेलरी खरीद सकते हैं। इसके अलावा, इसकी दैनिक सीमा को भी बढ़ाकर 6 लाख रुपये कर दिया गया है। यह उन लोगों के लिए एक बड़ी राहत है जो अक्सर बड़ी रकम की ज्वेलरी खरीदते हैं।

इसके साथ ही, विदेशी मुद्रा भुगतान (Forex) के लिए भारत बिल पेमेंट सिस्टम (BBPS) के जरिए भी अब आप 5 लाख रुपये तक का ट्रांजेक्शन कर सकते हैं।

बैंकिंग सेवाओं में भी बड़े बदलाव

डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देते हुए, NPCI ने टर्म डिपॉजिट (Term Deposits) के लिए डिजिटल ऑनबोर्डिंग पर लेन-देन की सीमा को भी बढ़ा दिया है। अब आप इस सेवा के जरिए 5 लाख रुपये तक का ट्रांजेक्शन कर सकते हैं। इससे डिजिटल रूप से फिक्स्ड डिपॉजिट या अन्य टर्म डिपॉजिट खोलना और भी आसान और सुविधाजनक हो जाएगा।

टीईटी अनिवार्य किए जाने के ‘सुप्रीम’ फैसले पर शिक्षक उठाएंगे ये बड़ा क़दम

टीईटी अनिवार्य किए जाने के ‘सुप्रीम’ फैसले पर शिक्षकों ने बड़ा क़दम उठाने की तैयारी कर ली है. शिक्षकों का कहना है कि सभी के लिए TET की अनिवार्यता ठीक नहीं. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी शिक्षों के लिए टीईटी को आनिवार्य किए जाने का फैसला सुनाया है. इस मामले पर शिक्षकों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से लाखों शिक्षक प्रभावित होंगे और सेवा में बने रहने के लिए टीईटी की बाध्यता आवश्यक कर देने से ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ टीचर्स ऑर्गेनाइजेशन ने एक बड़ा क़दम उठाने की तैयारी कर ली है.

सभी शिक्षकों को सेवा में बने रहने के लिए टीईटी की बाध्यता को लेकर अब शिक्षक पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की तैयारी में हैं. ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ टीचर्स ऑर्गेनाइजेशन (AIFTO) ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का कड़ा विरोध किया है, जिसमें शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य किया गया है. संगठन का कहना है कि इस फैसले से लाखों शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं, जिनमें से कई ऐसे हैं जिनकी सेवा 20 साल या उससे भी अधिक हो चुकी है। फेडरेशन का मानना है कि टीईटी की बाध्यता ऐसे अनुभवी शिक्षकों के लिए उचित नहीं है और यह उन्हें पदोन्नति से वंचित कर सकती है.

टीईटी न पास करने वाले शिक्षकों को पदोन्नति न देने और सेवा में बने रहने के लिए टीईटी को अनिवार्य करने की बाध्यता को संगठन ने अनुचित बताया है. ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ टीचर्स ऑर्गेनाइजेशन ने साफ किया है कि वे सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे। संगठन का कहना है कि वे इस मामले में न्याय के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

संगठन का तर्क है कि TET का उद्देश्य नई नियुक्तियों के लिए गुणवत्ता सुनिश्चित करना है, न कि उन शिक्षकों को परेशान करना जो पहले से ही वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ये शिक्षक पहले से ही अनुभवी हैं और उनके पास वर्षों का शिक्षण अनुभव है, जो किसी भी परीक्षा से अधिक महत्वपूर्ण है। इस फैसले से शिक्षकों के मनोबल पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

केदारनाथ यात्रा से जुड़ी बड़ी ख़बर, आज से दोबारा शुरु हुई हेली सेवाएं, पढ़िये पूरी जानकारी

केदारनाथ धाम के लिए यात्रा करने वाले हेली यात्रियों के लिए बड़ी ख़बर सामने आई है. दरअसल आज से केदारनाथ यात्रियों के लिए दोबारा हेली सेवाओं का आगाज़ हो गया है. इससे उन यात्रियों को काफी राहत महसूस हो रही होगी जिन्हें हेली सेवाओं का उपयोग करके बाबा केदार के दर्शनों के लिए जाना था।

केदारनाथ के लिए हेली सविर्सेज़ शुरु करने के बाद यात्रा के लिए 22 सितंबर तक ही टिकटों की बुकिंग की गई है. इस बाबत 10 कंपनियों को हेली सेवाओं के लिए परमीशन दी गई है. इसके साथ ही इस बात पर भी ज़ोर दिया गया है कि अनुभवी पायलट ही होली सेवाओं के लिए हेलीकॉप्टर उड़ाएंगे.

यात्रा के प्रथम चरण में हुई हेली दुर्घटनाओं को देखते हुए इस बार कड़े नियम लागू करने की बात कही गई है. बता दें कि दूसरे चरण की हेली सेवाओं के लिए इस बार 10 कंपनियों को अनुमति देने की बात कही गई है. हेली सेवाओं की ये सुविधाएं सिरसी, गुप्तकाशी और फाटा से शुरू हो रही हैं जो केदारनाथ जाने वाले यात्रियों के लिए उपलब्ध होंगी. फिलहाल बताया गया है कि 22 सुतंबर तक के लिए बुकिंग पूरी हो चुकी है.

CM धामी ने पास किया 136.68 करोड़ का बजट, विकास परियोजनाओं का रास्ता साफ

CM Pushkar Singh Dhami ने प्रदान की 136.68 करोड़ की विभिन्न विकास योजनाओं की वित्तीय स्वीकृति

देहरादून – उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में विभिन्न विकास योजनाओं के लिए कुल 136.68 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। इस धनराशि से राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और पर्यटन को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है। स्वीकृत योजनाओं में कृषि, शहरी विकास, स्वास्थ्य और पर्यटन से संबंधित परियोजनाएं शामिल हैं।

जिलेवार विकास योजनाओं को मिली CM धामी की मंजूरी

इस वित्तीय स्वीकृति में चम्पावत, देहरादून, बागेश्वर और टिहरी जिलों में विभिन्न परियोजनाओं को प्रमुखता दी गई है। चम्पावत में मुडियानी में एक नया उद्यान फार्म बनाने के लिए 37.51 लाख रुपये और अमोड़ी में ‘हाऊस ऑफ हिमालयाज’ के विपणन केंद्र की स्थापना के लिए 49.82 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

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देहरादून के धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में वार्ड 86, सेवला कलां में पुरानी और जीर्ण-शीर्ण पाइप लाइनों को बदलने के लिए 60 लाख रुपये का अनुमोदन दिया गया है। इसी प्रकार, बागेश्वर के कपकोट विधानसभा क्षेत्र में शिखर मूल नारायण परिसर और आसपास के कई मंदिरों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए 58.64 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इसके अलावा, टिहरी के धनौल्टी में यात्रियों के लिए एक विश्राम गृह के निर्माण हेतु 60 लाख रुपये की धनराशि का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

स्वास्थ्य और शहरी निकायों के लिए भी वित्तीय सहायता

CM धामी ने 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और शहरी निकायों के लिए भी महत्वपूर्ण धनराशि अवमुक्त करने का अनुमोदन दिया है। ग्रामीण पीएचसी और उपकेंद्रों को स्वास्थ्य और आरोग्य केंद्रों में बदलने की योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 35.50 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। साथ ही, समस्त शहरी स्थानीय निकायों को अनाबद्ध/अनिर्दिष्ट अनुदान के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 की पहली किस्त के रूप में 39.41 करोड़ रुपये और आबद्ध/निर्दिष्ट अनुदान के तहत 59.11 करोड़ रुपये की पहली किस्त भी जारी करने का अनुमोदन दिया गया है।

समग्र विकास पर ध्यान

यह वित्तीय आवंटन दर्शाता है कि राज्य सरकार प्रदेश के समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इन योजनाओं से न केवल स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि पर्यटन और कृषि क्षेत्रों को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त, शहरी और ग्रामीण निकायों को मिलने वाले अनुदान से स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों में तेजी आएगी, जिससे नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार होगा।