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CM Dhami का एक्शन प्लानः आपदा प्रभावित परिवारों को तत्काल 5-5 लाख रुपये की सहायता

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देहरादून: CM Dhami ने हाल ही में उच्चाधिकारियों, समस्त जिलाधिकारियों और पुलिस विभाग के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में चल रहे आपदा राहत कार्यों की समीक्षा करना और उन्हें और अधिक प्रभावी बनाना था। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए।

आपदा प्रभावितों को तत्काल सहायता

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रभावितों के साथ हर कदम पर खड़ी है। CM Dhami ने बताया कि आपदा से प्रभावित परिवारों को तत्काल 5-5 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। इसके अलावा, अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि प्रभावित परिवारों को समय पर राशन और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं मिलती रहें।

सड़कें खोलने और नदियों की निगरानी के निर्देश

CM Dhami ने अधिकारियों को नदियों के जल स्तर की निरंतर निगरानी करने और भूस्खलन के कारण बंद पड़ी सड़कों को तुरंत खोलने के लिए कहा। CM Dhami ने विशेष रूप से स्यानाचट्टी के पास यमुना नदी पर जमा मलबे को हटाने के लिए मशीनों का उपयोग करने और मलबे का सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि बरसात का मौसम समाप्त होते ही सभी क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और सुधार कार्य में तेजी लाई जाए।

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चारधाम यात्रा की तैयारियां

CM Dhami ने 15 सितंबर के बाद चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को मौसम की चेतावनी को ध्यान में रखते हुए हमेशा अलर्ट मोड पर रहने के लिए भी कहा।

Dhami Cabinet का विस्तार जल्द, 2 मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाने की सुगबुगाहट तेज़

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मंत्रिमंडल का विस्तार जल्द होने की संभावना है। Dhami Cabinet का यह विस्तार पितृपक्ष के बाद कभी भी हो सकता है एसे कयास लगाए जा रहे हैं। बता दें कि पितृपक्ष 7 सितंबर से 21 सितंबर तक चलेगा। कैबिनेट में जगह पाने के लिए कई चेहरे जुगत में हैं लेकिन आलाकमान की हरी झंडी के बाद ही कुछ को सफलता मिलेगी। अभी लोगों के मिलने-मिलाने का सिलसिला जारी है।

नवरात्र में हो सकती है घोषणा

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री धामी नवरात्र के दौरान अपनी नई टीम की घोषणा कर सकते हैं। माना जा रहा है कि Dhami Cabinet विस्तार के संबंध में मुख्यमंत्री धामी की बीजेपी के आलाकमान से बातचीत हो चुकी है।

Dhami Cabinet में नए विधायकों को मिलेगा मौका!

Dhami Cabinet में नए विधायकों को जगह मिल सकती है। पिछले कुछ दिनों से मुख्यमंत्री कार्यालय और उनके कैंप ऑफिस में विधायकों की आवाजाही बढ़ी है, जिससे इन अटकलों को और बल मिला है।

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दो मंत्रियों को हटाने की सुगबुगाहट तेज़

यह भी चर्चा है कि दो मौजूदा मंत्रियों को सरकार से हटाकर उन्हें संगठन को मजबूत करने का काम सौंपा जा सकता है। यह कदम आगामी चुनावों को देखते हुए संगठन में नई ऊर्जा लाने के लिए उठाया जा सकता है।

उत्तराखंडः राज्य के युवाओं को कैसे जर्मनी में मिलेगा रोजगार! पढ़िये पूरी ख़बर

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उत्तराखंड सरकार ने युवाओं को विदेशी रोजगार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास पर उत्तराखंड सरकार और जर्मन स्थित इनोवेशन हब राइन-माइन के बीच एक लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य उत्तराखंड के कुशल युवाओं को जर्मनी में रोजगार और प्रशिक्षण के अवसर प्रदान करना है।

किन क्षेत्रों पर होगा फोकस?

यह समझौता उत्तराखंड के युवाओं को जर्मनी के विभिन्न क्षेत्रों से जोड़ेगा, जिनमें मुख्य रूप से:

  • स्वास्थ्य
  • ऑटोमोबाइल
  • व्यावसायिक प्रशिक्षण
  • हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी
  • नवाचार-आधारित स्टार्टअप

जैसे क्षेत्र शामिल हैं। यह पहल राज्य के युवाओं को विश्वस्तरीय कौशल और अनुभव प्राप्त करने का अवसर देगी।

मुख्यमंत्री ने जताई खुशी, कहा- “प्रतिभाओं की कमी नहीं”

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह पहल उत्तराखंड के युवाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में एक अच्छा कदम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान दे रही है और विभिन्न देशों की मांग के अनुसार उन्हें प्रशिक्षित कर रही है।

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मुख्यमंत्री ने बताया कि युवाओं को कौशल विकास के साथ-साथ विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, जिससे उन्हें विदेशों में नौकरी पाने में मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के बाद राज्य के कई युवा विदेशों में अच्छी नौकरी कर रहे हैं।

बैठक में वरिष्ठ अधिकारी और जर्मन प्रतिनिधिमंडल मौजूद

समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान, कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगौली, विनय शंकर पाण्डेय, और सी. रविशंकर मौजूद थे। जर्मन प्रतिनिधिमंडल की ओर से राउनहाइम शहर के मेयर डेविड रेंडल, जर्मनी के विदेशी निवेश प्रकोष्ठ के सलाहकार सौरभ भगत, और इनोवेशन हब राइन-माइन के सीईओ स्टीफन विट्टेकिंड भी उपस्थित रहे।

Education Department से आई बड़ी ख़बरः बाहरी सेवाओं और प्रतिनियुक्ति पर रोक

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Education Department ने उत्तराखंड में कार्मिकों के तबादलों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। यह आदेश उच्च शिक्षा अनुभाग-4 के तहत जारी किया गया है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक स्थिरता सुनिश्चित करना है।

2025 के लिए Education Department में तबादले की अब कोई नई प्रक्रिया नहीं

उच्च शिक्षा अनुभाग-4 के शासनादेश संख्या 287698, दिनांक 01.04.2025 के संदर्भ में यह निर्णय लिया गया है कि 2025 के लिए स्थानांतरण की कोई नई प्रक्रिया शुरू नहीं होगी। यह आदेश उन सभी कर्मचारियों पर लागू होगा जो बाहरी सेवाओं, प्रतिनियुक्ति, या सेवा स्थानांतरण के तहत पिछले 05 वर्षों से अधिक समय से कार्यरत हैं।

बता दें कि उत्तराखंड सरकार ने 2025 तक बाहरी सेवा, प्रतिनियुक्ति, और सेवा स्थानांतरण को रोकने का निर्णय लिया है।

कई बार आदेश के बावजूद मूल कार्यस्थल पर नहीं पहुंचते कर्मचारी

Education Department ने यह फैसला इसलिए लिया है क्योंकि ऐसा देखने में आया है कि कई मामलों में कर्मचारियों का बाहरी सेवाओं, प्रतिनियुक्ति, या सेवा स्थानांतरण के आदेशों के बावजूद वे अपने मूल कार्यस्थल पर वापस नहीं लौटते। इस वजह से कार्यालयों में स्टाफ की कमी हो जाती है।

ये भी पढ़ेंः Birth and Death registration: फर्जी पोर्टल पर नकेल कसने की तैयारी

5 साल से अधिक सेवा वाले कर्मचारी मूल विभाग में जाएंगे वापस

Education Department शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन कर्मचारियों का बाहरी सेवा, प्रतिनियुक्ति, या सेवा स्थानांतरण की अवधि 05 वर्ष या उससे अधिक हो गई है, उन्हें तत्काल प्रभाव से मूल विभाग में वापस भेजा जाए। सभी संबंधित अधिकारियों को ऐसे कर्मचारियों की बाह्य सेवा को समाप्त कर, उन्हें 01 सप्ताह के भीतर उनके मूल विभाग में कार्यभार ग्रहण कराने के आदेश दिए गए हैं।

अधिकारियों से यह भी कहा गया है कि वे इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें और शासन को इस संबंध में अवगत कराएं।

आदेश जारी करने वाले अधिकारी

डॉ. रणजीत कुमार सिन्हा, सचिव, उत्तराखंड शासन, के द्वारा एक पत्र जारी किया गया है। पत्र की एक प्रतिलिपि समस्त राज्य विश्वविद्यालय, उच्च शिक्षा विभाग, और निदेशक, उच्च शिक्षा विभाग को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री के निजी सचिवों को भी इस निर्णय से अवगत कराया गया है। यह फैसला राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और कार्यस्थलों पर स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए लिया गया है।

Birth and Death registration: फर्जी पोर्टल पर नकेल कसने की तैयारी

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सचिवालय में आज मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में Birth and Death registration से संबंधित एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में राज्य स्तरीय अन्तर्विभागीय समन्वय समिति के सदस्यों ने भाग लिया। मुख्य सचिव ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण की मौजूदा प्रक्रिया और उसमें आने वाली समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। उनका मुख्य जोर प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने पर था।

पंजीकरण की समय-सीमा और डिजिटलीकरण पर जोर

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि Birth and Death registration निर्धारित समय सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि Birth and Death registration से संबंधित पुराने दस्तावेजों का डिजिटलीकरण किया जाना चाहिए, ताकि रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जा सके और जरूरत पड़ने पर उन्हें आसानी से ढूंढा जा सके। इसके अलावा, उन्होंने रजिस्ट्रार कार्यालयों के बाहर एक सूचना पट लगाने का निर्देश दिया, जिस पर कार्यालय से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध हो।

जिला स्तरीय समन्वय समिति की सक्रियता सुनिश्चित

बैठक में यह भी तय किया गया कि जिला स्तर पर जिला रजिस्ट्रार या जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समन्वय समिति (DLCC) की बैठक साल में कम से कम एक बार अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। यह कदम जिला स्तर पर Birth and Death registration प्रक्रिया की निगरानी और समन्वय को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

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फर्जी पोर्टल पर लगाम लगाने के निर्देश

एक और महत्वपूर्ण मुद्दा जो बैठक में उठाया गया, वह था फर्जी पोर्टल/वेबसाइटों के माध्यम से होने वाला Birth and Death registratio. मुख्य सचिव ने इस तरह की धोखाधड़ी को रोकने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ-साथ आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस पहल का उद्देश्य जनता को इन फर्जी वेबसाइटों के प्रति जागरूक करना और उन्हें धोखा खाने से बचाना है।

बैठक में सचिव रविनाथ रामन, डॉ. आर. राजेश कुमार, निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव, अपर सचिव रंजना राजगुरू सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

रुद्रप्रयाग: ग्राउंड ज़ीरो पर DM Prateek Jain, तालजामण में हर कदम पर निगरानी

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रुद्रप्रयाग के DM Prateek Jain ने आज आपदा से प्रभावित तालजामण क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों की एक टीम के साथ दुर्गम और कठिन रास्तों से होते हुए ग्राउंड ज़ीरो तक पहुँचकर हालात का जायजा लिया। इस दौरान उनका मुख्य उद्देश्य प्रभावित लोगों को तत्काल राहत पहुँचाना और पुनर्वास की योजना बनाना था।

DM Prateek Jain ने किया ग्रामीणों से सीधा संवाद और राहत शिविर का निरीक्षण

मौके पर पहुँचकर DM Prateek Jain ने सबसे पहले ग्रामीणों से बातचीत की। उन्होंने उनकी समस्याओं और जरूरतों को गंभीरता से सुना। इसके बाद, उन्होंने राजकीय प्राथमिक विद्यालय, तालजामण में स्थापित राहत शिविर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि शिविर में खाद्यान्न, दूध और अन्य जरूरी सामानों की कोई कमी नहीं होनी चाहिए। बच्चों और प्रभावित लोगों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।

स्वास्थ्य और पशुधन पर विशेष ध्यान

आपदा के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को सुनिश्चित करने के लिए, DM Prateek Jain ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिया कि डॉक्टरों की टीम लगातार मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने स्वयं राहत शिविर में रात्रि विश्राम करने का फैसला लिया, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर निगरानी हो सके। इसके अलावा, उन्होंने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को मवेशियों के नुकसान का आकलन करने और घायल मवेशियों के इलाज की व्यवस्था करने का निर्देश भी दिया।

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DM Prateek Jain ने गठित की 5 टीमें

आपदा से हुई भौतिक क्षति का विस्तृत आकलन करने के लिए, DM Prateek Jain ने पाँच टीमों के गठन का आदेश दिया है। इन टीमों में इंजीनियर, पटवारी, कानूनगो और तहसील स्तरीय अधिकारी शामिल होंगे। ये टीमें जल्द ही क्षेत्र का सर्वेक्षण करेंगी और क्षति की पूरी रिपोर्ट तैयार करके प्रशासन को सौंपेंगी। इस रिपोर्ट के आधार पर ही पुनर्वास और मुआवजे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता- DM Prateek Jain

DM Prateek Jain ने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “प्रभावित परिवारों को त्वरित राहत पहुँचाना और पुनर्वास की ठोस कार्ययोजना पर काम करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।” इस दौरान विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल, पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रहलाद कोंडे, और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

Rescue Operations: रुद्रप्रयाग, चमोली और टिहरी में तबाही पर प्रशासन ने यूं संभाला है मोर्चा

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Rescue Operations Of Cloud Burst: उत्तराखंड में एक बार फिर भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने कहर बरपाया है। इस बार रुद्रप्रयाग, चमोली, और टिहरी जिलों के कुछ हिस्सों में बादल फटने से राज्य प्रशासन ने तत्काल और व्यापक प्रतिक्रिया शुरू कर दी है।

आपदा का केंद्र और Rescue Operations

बादल फटने की ये घटनाएं गुरुवार देर रात से शुक्रवार की सुबह तक हुईं। रुद्रप्रयाग में बसुकेदार तहसील के बड़ेथ डुंगर तोक और चमोली जिले के देवल गांव में बादल फटने की सूचना मिली है। इन घटनाओं के कारण भारी नुकसान हुआ है, जिसके बाद तत्काल बचाव और राहत अभियान शुरू कर दिए गए हैं।

प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुँचकर पीड़ितों को सहायता पहुँचाने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तेजी से Rescue Operations पर काम कर रही हैं।

चमोली में बादल फटने की घटना में कम से कम दो लोग लापता हैं और बड़ी संख्या में मवेशी मलबे में दब गए हैं। रुद्रप्रयाग में एक महिला की मौत हो गई है, जबकि प्रभावित गांवों में कई लोग लापता बताए जा रहे हैं।

जैसे ही बादल फटने की जानकारी मिली, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों से बात की और राहत तथा बचाव कार्यों को ( Rescue Operations) तुरंत तेज करने के निर्देश दिए।

जान-माल का नुकसान

उत्तराखंड में भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं ने कहर बरपाया है, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। चमोली जिले में कम से कम दो लोग लापता बताए जा रहे हैं। इसके अलावा, मलबे की चपेट में आने से बड़ी संख्या में मवेशी भी दब गए हैं, जिससे स्थानीय पशुपालकों को भारी क्षति पहुँची है।

रुद्रप्रयाग जिले में भी स्थिति गंभीर है, जहाँ एक महिला की मौत की पुष्टि हुई है। इसके अलावा, कई गाँवों में कई अन्य लोग भी लापता हैं, जिनकी तलाश में बचाव दल जुटे हुए हैं।

ये भी पढ़ेंः CM Dhami का आपदा पर कड़ा रुख: प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों में तेजी के निर्देश

मुख्यमंत्री ने दिए त्वरित कार्यवाही के निर्देश

आपदा की सूचना मिलते ही, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल कार्रवाई की। उन्होंने प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों से फोन पर बात की और राहत एवं बचाव कार्यों को ( Rescue Operations) युद्धस्तर पर संचालित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बचाव कार्यों में किसी भी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए और प्रभावित लोगों तक त्वरित सहायता पहुँचाई जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जोर देकर कहा कि प्रभावित निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने में कोई देरी नहीं होनी चाहिए। Rescue Operations को लेकर उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि सड़क, बिजली और पेयजल आपूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाओं को बिना किसी हिचकिचाहट के बहाल किया जाए।

अपने आवास पर आयोजित एक उच्च-स्तरीय आपदा प्रबंधन बैठक ( Rescue Operations) में, मुख्यमंत्री धामी ने पूरे मानसून सीजन के दौरान प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रभावित परिवारों को सभी आवश्यक संसाधन और मुआवजा तुरंत उपलब्ध कराया जाएगा।

रुद्रप्रयाग में भारी नुकसान

बादल फटने से रुद्रप्रयाग जिले के बसुकेदार क्षेत्र में मलबे के प्रवाह के कारण बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। इस प्राकृतिक आपदा ने पूरे इलाके में तबाही मचा दी है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

प्रशासन की त्वरित कार्रवाई

जिला प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल Rescue Operations की कार्रवाई शुरू कर दी है। जिला स्तरीय अधिकारियों को घटनास्थल पर भेजा गया है और आपदा नियंत्रण कक्ष से बचाव कार्यों का समन्वय किया जा रहा है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), लोक निर्माण विभाग (PWD) और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की टीमें अवरुद्ध रास्तों को साफ करने में जुटी हुई हैं। इसके अलावा, बचाव दलों को अलग-थलग पड़े गाँवों तक पहुँचने के लिए वैकल्पिक मार्गों से भेजा जा रहा है, ताकि पीड़ितों तक जल्द से जल्द मदद पहुँचाई जा सके।

राहत और बचाव टीमें, जिनमें राष्ट्रीय और राज्य आपदा राहत बल, स्थानीय पुलिस और राजस्व अधिकारी शामिल हैं, Rescue Operations के तहत घटनास्थल पर मौजूद हैं और पीड़ितों को निकालने और उनकी सहायता करने के लिए प्रयासरत हैं।

सरकार द्वारा जारी आपदा के जमीनी स्तर के प्रभाव का विवरण इस प्रकार है:

  1. स्यूर: एक मकान क्षतिग्रस्त हुआ है और एक वाहन बह गया है।
  2. बड़ेथ, बगडधार, तालजामनी: गाँवों के दोनों ओर के गदेरों (छोटी नदियों) में पानी और मलबा भर गया है।
  3. किमाणा: बड़े-बड़े बोल्डर और मलबा कृषि भूमि और सड़कों को प्रभावित कर रहे हैं।
  4. अरखुंड: मछली पालन और मुर्गी पालन का फार्म बह गया है।
  5. छेनागाड़ (बाजार क्षेत्र): बाजार में मलबा भर गया है और कई वाहन बह गए हैं।
  6. छेनागाड़ डुगर, जौला बड़ेथ: लोगों के लापता होने की सूचना मिली है; तलाश जारी है।

वर्तमान स्थिति और चेतावनी

शुक्रवार की सुबह, अधिकारियों ने अगले कुछ घंटों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। यह चेतावनी चंपावत, नैनीताल, और उधम सिंह नगर के देवीधुरा, सवाल, मंच, टनकपुर, बनबसा, खटीमा, और पंचेश्वर सहित आसपास के क्षेत्रों में अत्यधिक भारी वर्षा की आशंका को लेकर है।

इसी बीच, पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर में अलकनंदा नदी का जलस्तर सामान्य स्तर से ऊपर बह रहा है और लगातार बढ़ रहा है, जिससे नदी के किनारे बसी बस्तियों के लिए अतिरिक्त खतरा पैदा हो गया है। प्रशासन लोगों को सुरक्षित रहने और नदी से दूर रहने की सलाह दे रहा है।

Badrinath Highway पर यातायात ठप, धारी देवी मंदिर बंद

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(Badrinath Highway) श्रीनगर, पौड़ी: उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। जनपद पौड़ी के श्रीनगर स्थित बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) पर स्थिति गंभीर बनी हुई है। भारी बारिश के कारण सिरोबगड़ में दो जगहों पर भूस्खलन हुआ है, जिससे यातायात पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ही रोक दिया जा रहा है।

Badrinath Highway पर वाहनों की आवाजाही पर रोक

Badrinath Highway पर सिरोबगड़ में भूस्खलन के चलते, श्रीनगर से रुद्रप्रयाग की ओर जाने वाले सभी वाहनों को रोका जा रहा है। वाहनों को फरासू के पास सुरक्षित स्थानों पर रोक दिया गया है, ताकि वे भूस्खलन के खतरे से बच सकें। इसके अतिरिक्त, कुछ वाहनों को कालियासौड़ पुलिस चौकी पर भी रोका गया है।

यह कदम यात्रियों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है, क्योंकि सड़क पर मलबा आने से कभी भी कोई अप्रिय घटना हो सकती है। पुलिस और प्रशासन की टीमें स्थिति पर लगातार नजर रख रही हैं और रास्ता साफ करने का काम शुरू किया जा रहा है। हालांकि, लगातार बारिश के कारण यह कार्य धीमी गति से हो रहा है।

Badrinath Highway: अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ा, गोवा बीच जलमग्न

लगातार हो रही बारिश के कारण अलकनंदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। श्रीनगर के गोवा बीच क्षेत्र में नदी का पानी Badrinath Highway तक पहुंच गया है, जिससे सड़क का एक बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया है। इस कारण इस क्षेत्र में भी वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन ने लोगों को इस मार्ग का उपयोग न करने की सलाह दी है और उन्हें वैकल्पिक मार्गों की तलाश करने के लिए कहा है।

धारी देवी मंदिर बंद, सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम

अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ने से धारी देवी मंदिर क्षेत्र में भी खतरा बढ़ गया है। जलस्तर में भारी वृद्धि के कारण मंदिर को सुरक्षा की दृष्टि से बंद कर दिया गया है। मंदिर के आसपास प्रसाद और पूजा सामग्री की जो दुकानें थीं, उनमें भी पानी भर गया है, जिसके कारण उन्हें बंद करवा दिया गया है।

जल पुलिस और स्थानीय पुलिस की टीमें लगातार अनाउंसमेंट कर रही हैं और भक्तों तथा आसपास मौजूद अन्य लोगों को नदी के किनारों से दूर रहने और सतर्क रहने की सलाह दे रही हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी व्यक्ति जलस्तर बढ़ने के खतरे से अनजान न रहे और सभी सुरक्षित रहें।

प्रशासन का कहना है कि वे स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं और जैसे ही मौसम में सुधार होगा, रास्ते को तुरंत साफ किया जाएगा। हालांकि, यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे जब तक आवश्यक न हो, यात्रा से बचें।

CM Dhami का आपदा पर कड़ा रुख: प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों में तेजी के निर्देश

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CM Dhami ने रुद्रप्रयाग, चमोली और टिहरी जिलों के कुछ हिस्सों में बादल फटने की घटनाओं पर तुरंत संज्ञान लिया है। उन्होंने तत्काल इन जिलों के जिलाधिकारियों से फोन पर बात कर राहत और बचाव कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रभावित लोगों को बिना किसी देरी के सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जाए, ताकि जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।

उच्चस्तरीय बैठक और CM Dhami के निर्देश

शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में आपदा प्रबंधन की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए:

  • तत्काल मूलभूत सुविधाएं: प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, बिजली और पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाओं की बहाली को प्राथमिकता दी जाए। यदि ये सेवाएं बाधित हुई हैं, तो उन्हें तुरंत ठीक किया जाए।
  • वर्चुअल समीक्षा: मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रुद्रप्रयाग, चमोली और टिहरी के जिलाधिकारियों से सीधे बात की। उन्होंने उनसे बादल फटने की घटनाओं और चल रहे राहत कार्यों का विस्तृत ब्यौरा लिया।
  • आपदा राहत कार्यों में तेजी: मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राहत और बचाव कार्यों में और अधिक तेजी लाने का निर्देश दिया, ताकि हर प्रभावित व्यक्ति तक मदद पहुँच सके।

भविष्य की तैयारियों पर जोर

CM Dhami ने केवल वर्तमान आपदा पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि पूरे मानसून सीजन के लिए अलर्ट रहने का निर्देश भी दिया। उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन को अलर्ट मोड पर रहना चाहिए। CM Dhami ने जिलाधिकारियों को यह भी आश्वासन दिया कि आपदा राहत कार्यों के लिए जो भी संसाधन और सुविधाएं जरूरी होंगी, उन्हें तत्काल उपलब्ध कराया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, CM Dhami ने एक और महत्वपूर्ण निर्देश दिया कि प्रभावित परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुसार मुआवजा जल्द से जल्द दिया जाए। इससे पीड़ितों को आर्थिक सहायता मिलेगी और वे दोबारा से अपना जीवन शुरू कर पाएंगे।

बैठक में उपस्थित अधिकारी

इस महत्वपूर्ण बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, जिनमें प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, प्रमुख सचिव शैलेश बगोली, अपर पुलिस महानिदेशक ए. पी. अंशुमान, सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन, गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय, और विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते शामिल थे। सभी अधिकारियों ने मिलकर आपदा की स्थिति और भविष्य की रणनीति पर चर्चा की।

Cloud Burst In Rudraprayag: रुद्रप्रयाग में बादल फटने की घटना से भारी तबाही

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Cloud Burst In Rudraprayag: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित बसुकेदार तहसील के बड़ेथ डुंगर तोक क्षेत्र में बादल फटने की दुखद घटना ने क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण आए मलबे और पानी से कई गांवों में भारी नुकसान हुआ है। जिला प्रशासन ने इस आपदा से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं। इस घटना में कई घर और खेत क्षतिग्रस्त हुए हैं, और कुछ लोगों के लापता होने की भी खबरें हैं, जिसने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है।

Cloud Burst के बाद जिला प्रशासन की कार्रवाई

Cloud Burst की इस त्रासदी की सूचना मिलते ही, रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने तत्काल प्रभाव से आपदा नियंत्रण कक्ष से मोर्चा संभाल लिया है। वे लगातार अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं और प्रभावित क्षेत्रों में जिला स्तरीय अधिकारियों की तैनाती की जा रही है। जिलाधिकारी ने बचाव कार्यों को प्रभावी और तेज गति से संचालित करने के लिए सभी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

जिला आपदा नियंत्रण कक्ष में सभी जिलास्तरीय अधिकारी एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि राहत और बचाव कार्यों में समन्वय बना रहे। राष्ट्रीय राजमार्ग (NH), लोक निर्माण विभाग (PWD) और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की अलग-अलग टीमें सड़कों को खोलने के काम में जुटी हुई हैं, क्योंकि मलबे के कारण कई रास्ते बंद हो गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्गों की पहचान की जा रही है, ताकि राहत दल और आवश्यक सामग्री जल्द से जल्द पहुंचाई जा सके।

प्रारंभिक सूचनाओं के अनुसार Cloud Burst से हुए नुकसान का विवरण

विभिन्न गांवों से प्राप्त प्रारंभिक सूचनाओं के आधार पर, Cloud Burst से हुए नुकसान का अंदाजा लगाया जा सकता है:

  • स्यूर: इस गांव में एक मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है और एक वाहन (बोलेरो) मलबे के साथ बह गया है।
  • बड़ेथ, बगडधार और तालजामनी: इन गांवों के दोनों ओर के गदेरों (छोटी नदियों) में भारी मात्रा में पानी और मलबा आ गया है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
  • किमाणा: यहां खेती की जमीन और सड़क पर बड़े-बड़े बोल्डर और मलबा जमा हो गया है, जिससे आवाजाही और कृषि कार्य प्रभावित हुए हैं।
  • अरखुण्ड: इस गांव में एक मछली तालाब और एक मुर्गी फार्म पूरी तरह से बह गए हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
  • छेनागाड़ (बाजार क्षेत्र): बाजार में मलबा भर गया है और कुछ वाहन बह गए हैं, जिससे व्यापार और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
  • छेनागाड़ डुगर गांव और जौला बड़ेथ: इन दो गांवों से कुछ लोगों के लापता होने की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं, जो सबसे चिंताजनक है। प्रशासन उनकी तलाश में जुट गया है।

राहत और बचाव कार्यों का संचालन

जिला प्रशासन ने प्रभावित लोगों को तुरंत सहायता और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए हैं। एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), पुलिस और राजस्व विभाग की टीमें सक्रिय रूप से राहत और बचाव कार्यों में लगी हुई हैं। ये टीमें मलबे में फंसे लोगों को निकालने, चिकित्सा सहायता प्रदान करने और उन्हें सुरक्षित शिविरों में पहुंचाने का काम कर रही हैं।

Cloud Burst से प्रभावित गांवों में राहत दल और संबंधित राजस्व निरीक्षक को अन्य कर्मचारियों के साथ तत्काल भेजा गया है, ताकि वे मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले सकें और पीड़ितों को मदद पहुंचा सकें। जिला प्रशासन का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी प्रभावित लोगों को त्वरित और प्रभावी सहायता मिल सके और लापता लोगों का पता लगाया जा सके।