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तीलू रौतेली पुरस्कार: 13 महिलाओं और 33 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को मिला Tilu Rauteli Award

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Tilu Rauteli Award: गुरुवार को देहरादून के सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय तीलू रौतेली एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार वितरण समारोह में, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 13 महिलाओं को तीलू रौतेली पुरस्कार और 33 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को उनके बेहतरीन सेवा कार्यों के लिए सम्मानित किया।

वीरांगना तीलू रौतेली को श्रद्धांजलि

Tilu Rauteli Award के इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने वीरांगना तीलू रौतेली को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने मात्र 15 वर्ष की आयु में ही अपने रण कौशल से विरोधियों को परास्त किया था। जिस उम्र में बच्चे खेलना-कूदना सीखते हैं, उसी उम्र में तीलू रौतेली ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया। मुख्यमंत्री ने उन्हें “उत्तराखंड की झांसी की रानी” कहकर संबोधित किया।

महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार की पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “नारी तू नारायणी” के मंत्र के साथ केंद्र सरकार महिलाओं के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण, ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान, उज्ज्वला योजना और लखपति दीदी योजना जैसी पहलों का उल्लेख किया। Tilu Rauteli Award के मौके पर उन्होंने कहा कि ट्रिपल तलाक जैसी कुप्रथा को समाप्त करके भी महिलाओं को सामाजिक रूप से मजबूत किया गया है।

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मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड सरकार भी मातृशक्ति के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में:

  • महिलाओं के लिए सरकारी सेवाओं में 30% आरक्षण लागू किया गया है।
  • देश में सर्वप्रथम “समान नागरिक संहिता” लागू करने का ऐतिहासिक कार्य किया गया है।
  • “मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना” और “उद्यमिता विकास कार्यक्रम” के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाया जा रहा है।
  • महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण दिया जा रहा है।
  • वर्ष 2023 से Tilu Rauteli Award राशि 31,000 रुपये से बढ़ाकर 51,000 रुपये और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार राशि 21,000 रुपये से बढ़ाकर 51,000 रुपये कर दी गई है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के योगदान और मानदेय में वृद्धि

मुख्यमंत्री ने बच्चों के प्रारंभिक विकास में आंगनबाड़ी केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि उनके दोनों बच्चों ने भी अपनी प्रारंभिक शिक्षा और संस्कार आंगनवाड़ी से ही प्राप्त किए हैं।

सरकार ने आंगनबाड़ी, मिनी आंगनवाड़ी बहनों और सहायिकाओं के मानदेय में वृद्धि की है:

  • आंगनबाड़ी बहनों का मानदेय 7,500 रुपये से बढ़ाकर 9,300 रुपये किया गया है।
  • मिनी आंगनबाड़ी का मानदेय 4,500 रुपये से बढ़ाकर 6,250 रुपये किया गया है।
  • सहायिकाओं का मानदेय 3,550 रुपये से बढ़ाकर 5,250 रुपये किया गया है।

इसके अलावा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सुपरवाइज़र के पद पर पदोन्नति का भी प्रावधान किया गया है।

महिलाओं की क्षमता और योग्यता का सम्मान

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की महिलाओं में क्षमता और योग्यता की कोई कमी नहीं है। महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए ‘हाउस ऑफ हिमालयाज़’ के उत्पाद बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भी टक्कर दे रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान को याद किया जिसमें उन्होंने कहा था कि 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड के नाम होगा और इसमें महिला समूहों की अहम भूमिका होगी।

आपदा के कारण समारोह का स्थगन

मुख्यमंत्री ने बताया कि यह कार्यक्रम पहले 8 अगस्त को आयोजित होना था, लेकिन आपदा के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य आपदाओं से जूझ रहा है और सरकार प्रभावितों तक हर संभव मदद पहुँचाने का प्रयास कर रही है, जिसमें केंद्र सरकार भी सहयोग कर रही है।

तीलू रौतेली पुरस्कार (Tilu Rauteli Award) प्राप्त करने वाली महिलाएँ

इस वर्ष जिन 13 महिलाओं को तीलू रौतेली पुरस्कार मिला, उनके नाम इस प्रकार हैं:

  • अल्मोड़ा: मीता उपाध्याय
  • बागेश्वर: अलिशा मनराल
  • चमोली: सुरभि
  • चम्पावत: अनामिका बिष्ट
  • देहरादून: शिवानी गुप्ता
  • हरिद्वार: रूमा देवी
  • नैनीताल: नैना
  • पौड़ी गढ़वाल: रोशमा देवी
  • पिथौरागढ़: रेखा भट्ट
  • रूद्रप्रयाग: हेमा नेगी करासी
  • टिहरी गढ़वाल: साक्षी चौहान
  • ऊधमसिंह नगर: रेखा
  • उत्तरकाशी: विजयलक्ष्मी जोशी

मानसून के बाद सड़कें होंगी गड्ढा-मुक्त, CM Dhami ने दिए सख्त निर्देश

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देहरादून: CM Dhami ने बुधवार को सचिवालय में एक उच्च स्तरीय बैठक की, जिसमें उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था, सड़कों की स्थिति, और जनहित से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों की समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनता को सुगम, सुरक्षित और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.

मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. उन्होंने संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों से नियमित निगरानी और राज्य की सीमाओं पर सघन चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश भी दिए. रात्रिकालीन गश्त को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया.

मानसून के बाद सड़कें होंगी गड्ढा-मुक्त, अभी से निविदा प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश

CM Dhami ने सड़कों की खराब हालत पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मानसून के बाद सड़कों को गड्ढा-मुक्त करने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जाएगा. उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस कार्य के लिए निविदा प्रक्रिया अभी से पूरी कर ली जाए, ताकि बरसात खत्म होते ही मरम्मत का काम तुरंत शुरू किया जा सके. इस कदम का उद्देश्य राज्य की सड़कों की स्थिति में सुधार लाकर आवागमन को सुगम बनाना है, जिससे आम जनता को राहत मिल सके.

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17 सितंबर से शुरू होगा ‘सेवा पखवाड़ा’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन, 17 सितंबर से लेकर 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) तक पूरे प्रदेश में ‘सेवा पखवाड़ा’ आयोजित किया जाएगा. इस दौरान सभी जिलों में सेवा, जन जागरूकता और जनहित से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. CM Dhami ने अधिकारियों को प्रत्येक जिले के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने और उसे समयबद्ध तरीके से लागू करने के निर्देश दिए हैं. CM Dhami ने यह भी घोषणा की कि वे स्वयं सड़क मार्ग से विभिन्न जिलों का भ्रमण कर इन व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे.

रेत मिश्रित नमक मामले की होगी जाँच, दोषियों पर होगी कार्रवाई

बैठक में मुख्यमंत्री ने रेत मिश्रित नमक की शिकायत को गंभीरता से लिया. उन्होंने तत्काल नमूना लेकर जाँच करने का आदेश दिया और यह स्पष्ट किया कि इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी. इस दौरान बैठक में मुख्य सचिव आर.के. सुधांशु, डीजीपी दीपम सेठ और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.

Gairsain में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं से हाहाकार: माँ और नवजात की मौत पर फूटा गुस्सा

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Gairsain में स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था की पोल खोलने लोग सड़कों पर उतरे हैं। भारी बारिश का अलर्ट होने के बाद भी जनमानस सरकार को कटघरे में रखकर लचर स्वास्थय व्यवस्था पर जवाब चाहता है। बता दें कि स्थानीय अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं के अभाव में एक महिला व नवजात की मौत के बाद आक्रोशित होकर लोग सड़कों पर रैली निकाल कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। क्या है पूरा मामला इस आर्टिकल में पढ़िये..

बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का शिकार Gairsain

उत्तराखंड के Gairsain क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की दयनीय स्थिति एक बार फिर सामने आई है. हाल ही में एक प्रसूता और उसके नवजात शिशु की उचित इलाज के अभाव में मौत हो जाने के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़क उठा है. यह घटना गैरसैंण की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती है, जहाँ मरीजों, खासकर गर्भवती महिलाओं को, आए दिन परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इस दुखद घटना के बाद से क्षेत्र में सरकार के प्रति भारी रोष व्याप्त है.

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आक्रोश में डूबा Gairsain, सड़कों पर उतरे लोग

माँ और नवजात की मौत के विरोध में Gairsain में शनिवार, 30 अगस्त को लोगों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया. भारी बारिश के बावजूद, हजारों की संख्या में लोग छाता लेकर सड़कों पर उतर आए. महिला मंगल दलों, क्षेत्रीय लोगों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और व्यापारियों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की. Gairsain के रामलीला मैदान से एक विशाल रैली निकाली गई, जिसने मुख्य बाजार से होते हुए तहसील का घेराव किया. लोगों ने स्वास्थ्य मंत्री और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

व्यापार संघ का भी मिला समर्थन

इस आंदोलन को गैरसैंण व्यापार संघ का भी पूरा समर्थन मिला. विरोध प्रदर्शन के प्रति एकजुटता दिखाते हुए, व्यापारियों ने दोपहर 2 बजे तक के लिए अपने प्रतिष्ठान बंद रखे. यह दिखाता है कि इस मुद्दे पर पूरे क्षेत्र में कितना गहरा आक्रोश है और लोग सरकार से तुरंत समाधान की उम्मीद कर रहे हैं. यह घटना केवल एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे समुदाय की चिंता का विषय बन गई है.

जानिए पूरा मामला

यह दुखद घटना गैरसैंण विकासखंड के दूरस्थ गांव फुलढुंगी (घनियाल) की है. 25 वर्षीय सुशीला देवी को प्रसव पीड़ा होने पर उनके परिजन गैरसैंण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर आए थे. यहाँ उन्होंने एक मृत शिशु को जन्म दिया. बच्चे की मौत की खबर सुनते ही सुशीला की हालत बिगड़ने लगी. उन्हें तुरंत हायर सेंटर रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया. सुशीला देवी के पति सेना में हैं और वर्तमान में करगिल में तैनात हैं. इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है.

विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की मांग

स्थानीय लोग इस घटना के बाद एक स्वर में गैरसैंण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को उप जिला-चिकित्सालय बनाने और वहाँ जल्द से जल्द विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि अगर यहाँ पर्याप्त और योग्य डॉक्टर होते, तो शायद यह दुखद घटना टाली जा सकती थी. लोगों का यह हुजूम और उनका विरोध यह स्पष्ट संदेश देता है कि वे अब और लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे और सरकार से तत्काल कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं.

क्या है उत्तराखंड आंदोलन का मसूरी गोलीकांड, जब निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर चली थीं गोलियां…

उत्तराखंड पृथक राज्य आंदोलन के दौरान हुआ मसूरी गोलीकांड उत्तराखंड के इतिहास का एक काला अध्याय है। इसी दिन अलग राज्य की मांग कर रहे आंदोलनकारियों पर पुलिस ने गोलियां चलाईं थीं जिसमें कई आंदोलनकारी शहीद हो गए थे।

मसूरी गोलीकांड – निहत्थे आंदोलनकारियों पर चली गोलियां

2 सितंबर, 1994, का दिन उत्तराखंड के इतिहास में एक काला अध्याय है। यह वो दिन था जब पहाड़ों की रानी मसूरी में उत्तराखंड राज्य के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने बेरहमी से गोलियां चलाईं। इस घटना को मसूरी गोलीकांड के नाम से जाना जाता है, जिसमें 6 बहादुर आंदोलनकारी शहीद हो गए और कई अन्य घायल हुए। यह गोलीकांड उत्तराखंड राज्य आंदोलन की सबसे क्रूर और दर्दनाक घटनाओं में से एक है, जिसने आंदोलन की आग को और भड़का दिया।

अचानक शुरू हो गई फायरिंग

खटीमा गोलीकांड के ठीक एक दिन बाद, उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर पूरे उत्तराखंड में गुस्सा और विरोध प्रदर्शन चरम पर था। इसी क्रम में, 2 सितंबर को मसूरी में भी आंदोलनकारी शांतिपूर्वक जुलूस निकाल रहे थे। प्रदर्शनकारियों का एकमात्र उद्देश्य उत्तराखंड को एक अलग राज्य का दर्जा दिलाना था, ताकि क्षेत्र का विकास हो सके और स्थानीय लोगों को उनका हक मिल सके।

जुलूस जैसे ही मसूरी के झूलाघर चौक के पास पहुंचा, पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने की कोशिश की। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई इस गोलीबारी से पूरे शहर में दहशत फैल गई। प्रदर्शनकारियों में भगदड़ मच गई, लेकिन पुलिस ने गोलियां चलाना जारी रखा।

मसूरी गोलीकांड में शहीद हुए ये वीर

इस बर्बर गोलीकांड में 6 लोगों ने अपनी जान गंवाई:

  • बलबीर सिंह नेगी
  • धनपत सिंह
  • राय सिंह बंगारी
  • मदन मोहन ममगाई
  • हंसा धनई
  • बेलमती चौहान

ये सभी शहीद उत्तराखंड के सपने को सच करने के लिए अपनी जान कुर्बान कर गए। उनकी शहादत ने आंदोलनकारियों के हौसले को और मजबूत किया और पूरे क्षेत्र में संघर्ष की भावना को और प्रज्वलित किया।

मसूरी गोलीकांड ने दी नई दिशा

मसूरी गोलीकांड ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन को एक नई दिशा दी। इस घटना ने न केवल लोगों के मन में आक्रोश भरा, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि अलग राज्य की मांग कितनी जायज और जरूरी है। इस घटना के बाद, पूरे उत्तराखंड में आंदोलन ने और भी उग्र रूप धारण कर लिया। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हुए, सड़कें जाम की गईं और सरकारी दफ्तरों में तालाबंदी कर दी गई।

इस गोलीकांड ने तत्कालीन सरकार पर भारी दबाव डाला और उत्तराखंड राज्य के गठन की प्रक्रिया में तेजी आई। 9 नवंबर, 2000 को उत्तराखंड को एक अलग राज्य का दर्जा दिया गया, जो इन शहीदों के बलिदान का ही नतीजा था।

आज भी याद आते हैं शहीद, देते हैं श्रद्धांजलि

आज भी, मसूरी में हर साल 2 सितंबर को इन शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है। झूलाघर चौक पर उनकी याद में एक शहीद स्मारक भी बनाया गया है, जो हमें हमेशा याद दिलाता है कि उत्तराखंड का निर्माण कितने संघर्षों और बलिदानों के बाद हुआ है। मसूरी गोलीकांड सिर्फ एक घटना नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के लोगों की अदम्य इच्छाशक्ति और न्याय के लिए उनके संघर्ष का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि अधिकारों के लिए खड़ा होना और बलिदान देना हमेशा सार्थक होता है।

मसूरी गोलीकांड के शहीदों को सीएम धामी ने दी श्रद्धांजलि, सपनों को पूरा करने का दोहराया संकल्प

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मसूरी गोलीकांड की 31वीं बरसी पर आयोजित कार्यक्रम में शहीद राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवारजनों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रदेश सरकार राज्य आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखंड बनाने के लिए कृतसंकल्प होकर कार्य कर रही है।

भविष्य के लिए वर्तमान लगाया दांव पर

मंगलवार को मसूरी स्थित शहीद स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान मसूरी में शहीद हुए आंदोलनकारी बलबीर सिंह नेगी, बेलमती चौहान, हंसा धनाई, धनपत सिंह, राय सिंह बंगारी और मदन मोहन ममगई को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राज्य आंदोलनकारियों ने हमारे बेहतर भविष्य के लिए अपना वर्तमान दांव पर लगाकर उत्तराखंड के निर्माण में अपना अद्वितीय योगदान दिया। उन्होंने कहा कि 2 सितंबर 1994 का दिन राज्य के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में अंकित रहेगा। इस दिन मसूरी की वीरभूमि पर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों को पुलिस की गोलियों का सामना करना पड़ा। यह घटना उस समय के सत्ताधारी दलों के दमनकारी रवैये का प्रतीक थी, जिन्होंने एक शांतिपूर्ण आंदोलन को निर्दयता के साथ कुचलने का प्रयास किया।

सरकार ने दिया क्षैतिज आरक्षण

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा राज्य आंदोलनकारियों के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हुए उनके और उनके आश्रितों के लिए सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया गया है। साथ ही शहीद आंदोलनकारियों के परिवारों के लिए 3000 रुपये मासिक पेंशन की सुविधा भी प्रारंभ की गई है। घायल और जेल गए आंदोलनकारियों को 6000 रुपये तथा सक्रिय आंदोलनकारियों को 4500 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है।

सरकार दे रही है और भी सुविधाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पूर्व की सरकारों के समय में राज्य आंदोलनकारियों के केवल एक आश्रित के लिए क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था थी, परंतु अब नए कानून के अंतर्गत चिह्नित आंदोलनकारियों की परित्यक्ता, विधवा और तलाकशुदा पुत्रियों को भी इस आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। यही नहीं, राज्य सरकार ने चिन्हित राज्य आंदोलनकारियों को पहचान पत्र जारी करने के साथ ही 93 आंदोलनकारियों को राजकीय सेवा में सेवायोजित भी किया है। इसी के साथ राज्य आंदोलनकारियों के बच्चों को स्कूलों और कॉलेजों में निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था और आंदोलनकारियों को सरकारी बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण भी लागू किया है।

सपने पूरे कर रही है सरकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों का सपना था कि एक ऐसा उत्तराखंड बने जहां हमारी संस्कृति, भाषा और परंपराओं का संरक्षण हो। इसी उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने “समान नागरिक संहिता” लागू कर राज्य में सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और कर्तव्य सुनिश्चित कर दिए हैं। वहीं, प्रदेश के युवाओं को पारदर्शिता के साथ रोजगार के समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए देश का सबसे प्रभावी नकल विरोधी कानून लागू किया गया और 100 से अधिक नकल माफियाओं को जेल भेजा गया। इसके बाद उत्तराखंड में 25 हजार से अधिक युवाओं ने सरकारी नौकरियां पाने में सफलता प्राप्त की है।

डेमोग्राफी बचाने के लिए कर रहे हैं काम

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार देवभूमि उत्तराखंड की डेमोग्राफी को बचाए रखने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसके लिए जहां एक ओर प्रदेश में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया, वहीं 9 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। इसके साथ ही प्रदेश सरकार ने दंगाइयों को सबक सिखाने के लिए सख्त दंगारोधी कानून बनाकर दंगों में होने वाले नुकसान की भरपाई भी उनसे ही करने का कार्य किया है। हाल ही में सरकार ने नया कानून लागू कर राज्य में मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस कानून के लागू होने के बाद एक जुलाई 2026 के बाद उत्तराखंड में केवल वही मदरसे संचालित हो पाएंगे, जिनमें सरकारी बोर्ड द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। राज्य में अवैध रूप से संचालित ढाई सौ से अधिक मदरसों को भी बंद करवाया गया है। प्रदेश सरकार राज्य में सनातन संस्कृति को बदनाम करने वाले पाखंडियों के विरुद्ध ‘ऑपरेशन कालनेमि’ के माध्यम से भी सख्त कार्रवाई कर रही है।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने गढ़वाल सभा भवन जल्द बनाने और सिफन कोर्ट का मामला जल्द हल करने की बात कही तथा मसूरी में वेंडर जोन की घोषणा सहित अन्य मांगों पर भी शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया। सीएम ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड आंदोलन के प्रमुख चेहरा रहे स्वर्गीय इंद्रमणि बड़ोनी के जन्मशताब्दी समारोह को भी भव्य तरीके से मनाएगी।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने मसूरी तहसील बनाने के लिए सीएम का आभार व्यक्त करने के साथ ही मसूरी की विभिन्न मांगों को मुख्यमंत्री के सामने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी, दर्जाधारी सुभाष बड़थ्वाल, पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, पूर्व पालिकाध्यक्ष मनमोहन मल्ल सहित राज्य आंदोलनकारियों एवं बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी शामिल हुए।

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उत्तराखंड में मौसम का अलर्ट। इन जिलों में स्कूलों की छुट्टी घोषित, कल सतर्क रहना है

उत्तराखंड में मौसम अगस्त के अंतिम दिनों और सितंबर की शुरुआत में भी लोगों की परीक्षा ले रहा है। मौसम विभाग ने राज्य में तीन दिनों के लिए कहीं रेड अलर्ट को कहीं ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है। ऐसे में मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए कई जिलों में स्कूलों की छुट्टी घोषित कर दी गई है।

इन जिलों में स्कूलों की छुट्टी घोषित

ये समाचार लिखे जाने तक नैनीताल, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, चमोली, उत्तरकाशी, हरिद्वार, उधम सिंह नगर और रुद्रप्रयाग में छुट्टी का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है। इन जिलों में एक सितंबर सोमवार को स्कूलों में कक्षा एक से 12 तक सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रो में छुट्टी रहेगी। अन्य जिलों में छुट्टी का आदेश आते ही हम उसे यहां अपडेट करने का प्रयास करेंगे।

सभी जिलों को सतर्क रहने के निर्देश

दरअसल मौसम विभाग ने सोमवार के लिए कहीं भारी तो कहीं कहीं भारी से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। लगभग पूरे राज्य में मौसम बिगड़ा रहेगा। ऐसे में किसी भी आपात स्थिती से निपटने के लिए अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को आपात हालात की आशंका के मद्देनजर सतर्क किया है। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी किसी आपदा की आशंका को देखते हुए रविवार को अधिकारियों के साथ बैठक की है और इंतजामों की समीक्षा की है।

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Uttarakhand: Social Media पर सीएम बदलने की अफवाह पड़ी महंगी, 3 फेसबुक पेजों पर FIR

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Social Media पर मन की बात लिखिये लेकिन इसमें सावधानी बरतनी भी ज़रूरी है नहीं तो पुलिसिया एक्शन आपके लिए परेशानी का सबब बन जाएगा। मौजूदा समय में पहाड़ी राज्य आपदा के संकट से गुज़र रहे हैं, राहत और बचाव कार्य जोरों पर है लेकिन इस बीच 3 फेसबुक पेजों के खिलाफ पुलिस ने एक्शन लिया है। दरअसल इन पेजों के खिलाफ राज्य के CM Pushkar Singh Dhami के बदले जाने संबंधी झूठी अफवाह फैलाने की शिकायत की गई थी।

Social Media पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ पुलिस का एक्शन, तीन पर FIR

उत्तराखंड पुलिस ने Social Media पर मुख्यमंत्री बदलने की भ्रामक और झूठी खबरें फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। आपदा राहत कार्यों के बीच इस तरह की अफवाहें फैलाने वाले तीन फेसबुक पेज संचालकों पर देहरादून पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। यह कार्रवाई भारतीय जनता पार्टी (BJP) के देहरादून जिलाध्यक्ष, श्री सिद्धार्थ अग्रवाल की शिकायत के बाद की गई है।

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आपदा के समय Social Media पर अफवाहों से बढ़ रही मुश्किलें

उत्तराखंड के बागेश्वर, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जैसे जिले इस समय भारी बारिश और भूस्खलन जैसी आपदाओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे नाजुक समय में मुख्यमंत्री बदलने जैसी अफवाहें न सिर्फ लोगों में भ्रम पैदा करती हैं, बल्कि बचाव और राहत कार्यों में भी बाधा डालती हैं। पुलिस के अनुसार, इस तरह की झूठी खबरें सरकारी कामकाज और प्रशासनिक व्यवस्था को भी प्रभावित करती हैं।

Social Media पर निगरानी और कानूनी कार्रवाई

जांच में पुलिस ने पाया कि ‘आई लव माय उत्तराखंड संस्कृति’, ‘उत्तराखण्ड वाले’ और ‘जनता जन आंदोलन इरिटेड’ नामक फेसबुक पेजों से मुख्यमंत्री के संबंध में झूठी पोस्ट साझा की गई थीं। इन पेजों के संचालकों के खिलाफ अब कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

पुलिस की अपील: अफवाहों से बचें

उत्तराखंड पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट या भ्रामक जानकारी को सोशल मीडिया पर शेयर करने से बचें। पुलिस ने कहा है कि Social Media पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और झूठी खबरें फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह कदम सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

NIVH परिसर से अतिक्रमण ध्वस्त, डीएम सविन बंसल के निर्देश पर प्रशासन की कड़ी कार्रवाई

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NIVH campus से अतिक्रमण ध्वस्त कर डीएम सविन बंसल ने सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण को एक झटके में हटा दिया।बता दें कि देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर सरकारी भूमि पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ जिला प्रशासन की कार्रवाई जारी है। इसी कड़ी में, नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर द विजुअली हैंडीकैप्ड (एनआईवीएच) की भूमि पर अवैध रूप से बनी एक मजार को आज ध्वस्त कर दिया गया। यह कार्रवाई तब की गई जब जिलाधिकारी के संज्ञान में आया कि यह निर्माण दृष्टिबाधित बच्चों के लिए बनाए गए रास्ते और पार्क में बाधा डाल रहा था।

दृष्टिबाधित बच्चों के रास्ते में रुकावट बनी मजार

यह मजार NIVH परिसर के अंदर, ठीक उस जगह पर बनी थी जहाँ दृष्टिबाधित बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। शिकायत मिली थी कि यह अवैध निर्माण बच्चों के लिए बनाए गए पार्क के भीतर किया गया था, जिससे उनकी आवाजाही बाधित हो रही थी। इस गंभीर शिकायत को देखते हुए, जिलाधिकारी ने तुरंत नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

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त्वरित कार्रवाई से हटा अवैध निर्माण

जिलाधिकारी के आदेशों का पालन करते हुए, नगर मजिस्ट्रेट प्रत्युष सिंह और उप जिलाधिकारी सदर हरिगिरि के नेतृत्व में एक टीम ने मौके पर पहुंचकर NIVH का अतिक्रमण को ध्वस्त कर दिया। प्रशासन की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई से यह सुनिश्चित किया गया कि NIVH में पढ़ने वाले बच्चों को किसी भी तरह की असुविधा न हो।

सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ अभियान जारी

जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी भूमि पर किसी भी तरह के अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हाल के दिनों में प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए हैं और यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। यह कार्रवाई सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और सार्वजनिक उपयोगिता को बनाए रखने की प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

Relief Fund: पौड़ी में आपदा पीड़ितों को मिली ₹5 लाख की सहायता राशि

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Relief Fund की त्वरित कार्रवाई से मिली राहत। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जनपद में हाल ही में आई आपदा से प्रभावित परिवारों के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आर्थिक सहायता की घोषणा की थी, जिसका वितरण अब कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने 26 अगस्त को घोषणा की थी कि आपदा में पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए मकानों के मालिकों और मृतकों के परिजनों को ₹5 लाख की सहायता राशि दी जाएगी। यह सहायता राशि राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) और मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से दी गई है।

जिलाधिकारी के निर्देश पर वितरण

मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन करते हुए, जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया के निर्देशन में यह Relief Fund राहत राशि तुरंत वितरित की गई। तहसीलदार पौड़ी, दीवान सिंह राणा के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और लाभार्थियों को सहायता राशि के चेक सौंपे। इस त्वरित कार्रवाई से यह सुनिश्चित हुआ कि जरूरतमंदों तक मदद बिना किसी देरी के पहुंच सके।

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Relief Fund के लिए प्रभावित क्षेत्रों का विवरण

भारी बारिश और भूस्खलन के कारण पौड़ी तहसील के कई गांव बुरी तरह प्रभावित हुए थे। इनमें ग्राम सैंजी, बुराँसी, रैदुल, फलद्वाड़ी, क्यार्द, कलूण और मणकोली शामिल हैं। इन गांवों में कुल 22 घर पूरी तरह से ध्वस्त हो गए थे और 6 लोगों की मृत्यु हो गई थी। इस भयावह स्थिति के बाद, मुख्यमंत्री ने 7 अगस्त को स्वयं इन क्षेत्रों का दौरा किया था और प्रशासन को तुरंत राहत पहुँचाने के निर्देश दिए थे।

सरकार का संकल्प: पारदर्शिता और सहयोग

मुख्यमंत्री ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे कि Relief Fund का वितरण पारदर्शिता के साथ किया जाए और यह लाभार्थियों तक जल्दी पहुँचे। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुश्किल घड़ी में प्रभावित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है। यह कदम सरकार के इस संकल्प को दर्शाता है कि वह आपदा की स्थिति में नागरिकों को हर संभव सहायता प्रदान करेगी।

प्रभावितों ने जताया आभार

राहत राशि मिलने पर प्रभावित परिवारों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यह आर्थिक सहायता उन्हें अपने जीवन को फिर से शुरू करने में मदद करेगी। उन्होंने सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया और सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि इस कठिन समय में यह सहायता उनके लिए बहुत बड़ी राहत है।

Disaster Relief को लेकर सख़्त हुए सीएम धामी, आपदा प्रबंधन को दिए ये निर्देश

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Disaster Relief के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में प्रदेश में आपदा राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने आगामी दिनों के लिए मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए, आपदा प्रबंधन तंत्र को हमेशा तैयार रहने के निर्देश दिए।

आपदा प्रबंधन और बचाव कार्य

  • सीएम धामी ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों और अधिकारियों को आपदा प्रभावित क्षेत्रों में Disaster Relief कार्य तेज़ी से चलाने के निर्देश दिए।
  • उन्होंने कहा कि सभी विभागों को बेहतर तालमेल के साथ काम करना चाहिए ताकि प्रभावित लोगों तक तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।
  • उत्तरकाशी के स्यानाचट्टी क्षेत्र में नदी के बहाव को बनाए रखने के लिए मलबा हटाने और उसे सुरक्षित जगह पर रखने का निर्देश दिया गया है, ताकि बारिश में दोबारा रुकावट न हो।

Disaster Relief में पहले जरूरी है बुनियादी सुविधाओं की बहाली

  • मुख्यमंत्री ने कहा कि बाधित सड़कों, बिजली और पानी की आपूर्ति को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएं।
  • उन्होंने पशुपालन विभाग को घायल पशुओं के इलाज के लिए गांवों में डॉक्टरों की टीम भेजने का भी निर्देश दिया।

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Disaster Relief और चारधाम यात्रा की तैयारी

  • बारिश कम होने और त्योहारों का मौसम आने के साथ, चारधाम यात्रियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
  • इसके लिए, सड़कों की मरम्मत और अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने पर खास ध्यान देने का निर्देश दिया गया है।

नदियों और बांधों की निगरानी

  • सीएम धामी ने नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नदियों के जल स्तर पर लगातार निगरानी रखने का आदेश दिया।
  • खतरे की आशंका होने पर लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए।
  • सिंचाई विभाग के अधिकारियों को बांधों पर हर समय तैनात रहने और पानी छोड़े जाने से पहले जिला प्रशासन को सूचना देने को कहा गया है।

अधिकारियों को निर्देश

  • मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों से कहा कि अगर उन्हें राहत और बचाव कार्यों के लिए किसी भी तरह के सहयोग की जरूरत हो, तो वे शासन से बिना झिझक मांग करें।
  • उन्होंने सचिव आपदा प्रबंधन और पुनर्वास को जनपदों की मांगों पर तुरंत कार्रवाई करने और आवश्यक धनराशि जारी करने का निर्देश भी दिया।