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उत्तराखंड में दायित्वधारियों की लिस्ट जारी, देखिए किसको क्या बनाया ?

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लंबे इंतजार के बाद आखिरकार धामी सरकार ने दायित्वधारियों की लंबी लिस्ट जारी कर दी है। अब राज्य में दायित्वधारियों की लंबी चौड़ी फौज हो गयी है। इसके साथ ही बीजेपी नेताओं का लंबे समय से चला आ रहा इंतजार भी खत्म हो गया है। धामी सरकार ने अलग अलग जिलों से आने वाले बीजेपी नेताओं को दायित्व सौंपे हैं।

दायित्वधारियों की लिस्ट हुई जारी

धामी सरकार ने जिन लोगों को दायित्व सौंपे हैं उनमें हरक सिंह नेगी जनपद चमोली को उपाध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक कल्याण परिषद, सुश्री ऐर्श्वया रावत रूद्रप्रयाग को उपाध्यक्ष राज्य महिला आयोग,

श्रीमती गंगा विष्ट जनपद अल्मोडा को उपाध्यक्ष राज्य महिला उद्यमिता परिषद,

श्याम अग्रवाल जनपद देहरादून को उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड आवास सलाहकार परिषद,

शांति मेहरा जनपद नैनीताल को उपाध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक कल्याण परिषद,

भगवत प्रसाद मकवाना जनपद देहरादून को उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड सफाई कर्मचारी आयोग,

हेमराज विष्ट जनपद पिथौरागढ को उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड राज्य स्तरीय खेल परिषद,

रामचंन्द्र गौड जनपद चमोली को अध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक कल्याण परिषद,

पूरन चंद नैलवाल जनपद अल्मोडा को उपाध्यक्ष प्रवासी उत्तराखण्ड परिषद,

रामसुन्दर नौटियाल जनपद उत्तरकाशी उपाध्यक्ष भागीरथी नदी घाटी प्राधिकरण,

सायरा बानो जनपद ऊधम सिंह नगर उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग,

रेनू अधिकारी जनपद नैनीताल को अध्यक्ष राज्य महिला उद्यमिता परिषद,

रजनी रावत जनपद देहरादून उपाध्यक्ष समाज कल्याण योजनाएं अनुश्रवण समिति,

ओम प्रकाश जमदग्नि जनपद हरिद्वार उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड पारिस्थितिकीय पर्यटन सलाहकार परिषद,

भूपेश उपाध्याय जनपद बागेश्वर उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड जैविक उत्पाद परिषद,

कुलदीप कुमार जनपद देहरादून अध्यक्ष उत्तराखण्ड वन पंचायत सलाहकार परिषद,

ऋषि कण्डवाल जनपद पौडी उपाध्यक्ष सिंचाई सलाहकार समिति,

वीरेन्द्र दत्त सेमवाल जनपद टिहरी उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद,

अजय कोठियाल जनपद टिहरी अध्यक्ष उत्तराखण्ड राज्य पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार समिति,

श्याम नारायण पाण्डे जनपद नैनीताल उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड वन एवं पर्यावरण सलाहकार समिति का दायित्व सौंपा गया है।

धामी सरकार ने बदले कई स्थानों के नाम, देहरादून का मियांवाला अब हुआ…

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अब उत्तराखंड में भी नाम बदलने वाली सियासत शुरू हो गई है। सरकार ने एकसाथ ही कई जगहों के नाम बदल डाले हैं। देहरादून में भी कई स्थानों के नाम बदल दिए गए हैं।

देहरादून में मियांवाला अब हो गया रामजीवाला

धामी सरकार ने देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और नैनीताल में कई स्थानों के नाम बदल दिए हैं। हरिद्वार जिले में कुल पांच स्थानों के नाम बदले गए हैं। वहीं देहरादून में तीन, नैनीताल में दो और यूएस नगर में एक स्थान का नाम बदल दिया गया है।

देहरादून में सरकार ने तीन स्थानों का नाम बदला है। देहरादून में मियांवाला का नाम बदलकर रामजीवाला कर दिया गया है।विकासनगर ब्लाक के पीरवाला का नाम केसरी नगर कर दिया गया है। चांदपुर खुर्द का नाम बदलकर पृथ्वीराज नगर कर दिया गया है। वहीं सहसपुर ब्लाक के अब्दुल्लापुर को अब दक्षनगर के नाम से जाना जाएगा।

सीएम ने बताया जनभावना के मुताबिक

उत्तराखंड में कई स्थानों के नाम बदले जाने पर सीएम धामी ने कहा है कि अब जनभावना और भारतीय संस्कृति व विरासत के अनुरूप नामकरण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न स्थानों के नाम में परिवर्तन जन भावना और भारतीय संस्कृति व विरासत के अनुरूप किया जा रहा है। जिससे लोग भारतीय संस्कृति और इसके संरक्षण में योगदान देने वाले महापुरुषों से प्रेरणा ले सके।

मियांवाला का नाम बदला गया

त्रिवेंद्र आखिर क्यों ‘शेर’ बन रहे हैं, क्या उत्तराखंड बीजेपी में सब ठीक है ?

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उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों बड़ी हलचल है। सबकुछ शांती से ठीकठाक चल रहा था लेकिन अचानक ऐसा माहौल बन गया है मानों कुछ बड़ा होने वाला है। फिलहाल संसद में हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत के अवैध खनन वाले बयान और ‘शेर और कुत्ता’ वाले बयान ने उत्तराखंड की राजनीतिक में हंगामा मचा रखा है। हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जिस तरीके से राज्य के एक वरिष्ठ आईएएस को इशारों में कुत्ता बताया है उसे लेकर अफसरशाही भी नाराज है।

संसद में त्रिवेंद्र ‘शेर’ बन गए, अधिकारी को ‘कुत्ता’ बनाने के पीछे क्या ?

अपनी साफगोई और स्पष्ट बयानी के लिए चर्चित त्रिवेंद्र सिंह रावत इस बार संसद में ‘शेर’ बन गए हैं। हरिद्वार की नदियों में अवैध खनन पर चिंता जताते हुए और टास्क फोर्स की मांग करते हुए त्रिवेंद्र सिंह रावत ने संसद में जो कुछ कहा उसकी प्रतिक्रिया उत्तराखंड में बहुत तेज हुई। त्रिवेंद्र ने संसद में दिए अपने बयान में सीधे तौर पर धामी सरकार के कामकाज पर सवाल उठाया था। जाहिर था कि धामी सरकार इसपर प्रतिक्रिया देती। हुआ भी ऐसा ही और धामी सरकार ने खनन सचिव बृजेश संत से एक बयान जारी करवा दिया। इस बयान की स्क्रिप्ट जिसने भी लिखी उसने इसे एक ब्यूरोक्रेट के बयान से अधिक राजनीतिक बयान बना डाला। बृजेश संत ने भी यही बयान कैमरे पर पढ़ दिया। बृजेश संत ने इस बयान में त्रिवेंद्र सिंह रावत के अवैध खनन के आरोपों को खारिज किया।

जल्द ही ये बयान त्रिवेंद्र तक पहुंचा। मीडिया ने त्रिवेंद्र से इस बयान पर प्रतिक्रिया मांगी। बस फिर क्या था, त्रिवेंद्र का ‘शेर अवतार’ सामने आ गया। त्रिवेंद्र ने प्रतिक्रिया तो दी नहीं लेकिन न देने का जो कारण बताया वो दिल्ली से लेकर देहरादून तक चर्चाओं में आ गया।

अवैध खनन का रोग पुराना, त्रिवेंद्र जी को दिखा अब ?

भले ही देश की संसद में उत्तराखंड की नदियों में अवैध खनन का मसला अब उछला हो लेकिन सच ये है कि उत्तराखंड में अवैध खनन एक पुराना मर्ज है और सरकारें इस रोग का इलाज नहीं तलाश पाईं हैं। सरकार और सिस्टम खनन माफिया के साथ इतने सौहार्दपूर्ण माहौल में काम करते हैं कि पता करना मुश्किल हो जाता है कि माफिया कौन है ? ऐसा नहीं है कि त्रिवेंद्र सरकार में अवैध खनन नहीं हो रहा था। हो सकता है कि त्रिवेंद्र जब सीएम थे को उनकी सरकार में अवैध खनन मौजूदा सरकार में कुछ कम या अधिक हो रहा हो लेकिन हो रहा था इसमें दो राय नहीं है। फिर भी अगर वो राज्य में अवैध खनन को लेकर इतनी गंभीरता से उठा रहे हैं और वो भी अपनी ही पार्टी की सरकार में तो जाहिर है कि इसके पीछे कोई बड़ा कारण है।

पार्टी ने पल्ला झाड़ा, सरकार ने चुप्पी साधी

उधर त्रिवेंद्र ने शेर और कुत्ता वाला बयान देकर धामी सरकार के लिए जितनी असहज स्थिती पैदा की उतनी ही परेशानी में पार्टी को भी डाल दिया। अब पार्टी के नेताओं और प्रवक्ताओं को समझ नहीं आ रहा है कि कैसे इस हालत से निकलें। उधर कांग्रेस ने भी त्रिवेंद्र के बहाने अवैध खनन का आरोप लगाना शुरू कर दिया है। हालांकि इस बीच बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने एक लकीर खींचने की कोशिश की और साफ किया कि भले ही त्रिवेंद्र कुछ भी बोले लेकिन पार्टी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ खड़ी है। महेंद्र भट्ट ने बाकायदा एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर ये बताने की कोशिश की राज्य में अवैध खनन नहीं हो रहा है और वहीं राज्य में खनन से मिलने वाला राजस्व तेजी से बढ़ा है। उधर अवैध खनन रुका भी है और जो कर रहा है उसपर जुर्माना दबा कर हो रहा है। शनिवार को जब सीएम धामी ने इस मसले पर पूछा तो उन्होंने इस मसले पर अधिक तो कुछ नहीं कहा लेकिन ये जरूर कहा कि राज्य में अवैध खनन को लेकर जीरो टालरेंस की नीति अपनाई गई है। पार्टी और मुख्यमंत्री दोनों ही इस मसले पर एकराय हैं और त्रिवेंद्र अकेले पड़ते दिख रहे हैं।

अफसरों में भी पसरी नाराजगी

उधर त्रिवेंद्र सिंह रावत के इस बयान के बाद सूबे की ब्यूरोक्रेसी में भी नाराजगी पनपी है। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जिस तरह के शब्दों का प्रयोग किया है वो अधिकारियों को नागवार गुजरा है। इस संबंध में आईएएस लॉबी खासतौर पर नाराज दिख रही है। उत्तराखंड आईएएस एसोसिएशन ने इस मामले में अपनी नाराजगी लिखित रूप से दर्ज भी करा दी है। एसोसिएशन ने सीएम धामी को एक पत्र लिखकर ये साफ कर दिया है कि अधिकारियों की अपनी मर्यादा है और इसपर चोट स्वीकार नहीं है।

मंत्री रेखा आर्या ने समस्याओं का कराया ऑन द स्पॉट निराकरण, इन अधिकारियों से मांग लिया जवाब

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धामी सरकार के 3 साल पूरे होने के उपलक्ष में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने शनिवार को अपने विधानसभा क्षेत्र सोमेश्वर में जनसुनवाई एवं बहुउद्देशीय शिविर में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने सैकड़ो समस्याओं का निस्तारण कराया और कई मामलों में अधिकारियों को तुरंत तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए।

कैबिनेट मंत्री ने दे डाली सख्त चेतावनी

विकासखंड ताकुला के सोमदेव ग्राउंड में आयोजित बहुउद्देशीय शिविर में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि इस शिविर में मेरे समक्ष जो भी समस्याएं आई हैं उनके निस्तारण में परिणाम भी दिखना चाहिए। अगर दिए गए निर्देशों को परिणाम में नहीं बदला तो सरकार अधिकारियों को बदलने में देर नहीं लगाएगी। इस दौरान कैबिनेट मंत्री ने एक सड़क के लंबे समय से टूटे होने की शिकायत पर पीडब्ल्यूडी विभाग को कहा कि आज ही इसका निरीक्षण करके रिपोर्ट तैयार करिए। इसके अतिरिक्त शिविर में बिजली का बिल ज्यादा आने, नए खंबे लगवाने, बिजली के तारों के झूलने की समस्या, पेयजल आपूर्ति सही न होने की समस्या, पुल के निर्माण में दिक्कत, अस्पतालों में स्टाफ की कमी जैसी समस्याएं भी लोगों ने मंत्री के समक्ष उठाई, जिनका संबंधित विभाग के अधिकारी की मौजूदगी में निस्तारण किया गया। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या नें मौके पर मौजूद सभी विभागों के अधिकारियों से कहा की समस्याओं का निस्तारण एक निश्चित समय सीमा के अंदर होना चाहिए। वहीं शिविर में जल निगम के मुख्य अभियंता की जगह सहायक अभियंता के आने पर मंत्री ने मुख्य अभियंता का स्पष्टीकरण तलब किया है।

जरूरतमंदों को बांटी किट और अन्य उपकरण भी

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र, महिला, उद्यमी और किसानों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में मंत्री ने जरूरतमंद लोगों को व्हीलचेयर और किट वितरित की, साथ ही मरीजों को उपचार भी मुहैया कराया गया।

इस अवसर पर अल्मोड़ा नगर निगम मेयर अजय वर्मा, अल्मोड़ा जिला अध्यक्ष महेश नयाल, विधायक प्रतिनिधि भुवन जोशी, सोमेश्वर मंडल अध्यक्ष अंजलि, पूर्व जिला उपाध्यक्ष राजेंद्र कैड़ा और सभी विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

सीएम धामी का देहरादून में रोड शो, सरकार के तीन साल पूरे होने पर किया ये ऐलान

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को सर्वे स्टेडियम, देहरादून में राज्य सरकार के सेवा, सुशासन और विकास के तीन साल पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने जन समस्याओं के समाधान के लिए लगाए गए बहुउद्देशीय शिविर का अवलोकन किया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने हाथीबड़कला से सर्वे स्टेडियम तक भव्य रोड शो में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य स्थापना वर्ष के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में राज्य के शहरों में देवभूमि सिल्वर जुबली पार्क का निर्माण किया जायेगा। इस अवसर पर उन्होंने ग्राम्य विकास विभाग की स्वयं सहायता समूह को क्रेडिट कार्ड लिंकेज के चेक, लाभार्थियों को महालक्ष्मी किट और कृषि यंत्र भी वितरित किए।

राज्य का हो रहा समग्र विकास

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के समग्र विकास के लिए हर क्षेत्र में तेजी से कार्य किये जा रहे है। प्रदेश में शहरों से लेकर सुदूर गांवों तक सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है, वहीं ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का कार्य पूर्ण कर जल्द ही पहाड़ों में रेल का सपना साकार करने की दिशा में भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही, उड़ान योजना के माध्यम से देहरादून, अल्मोड़ा, उत्तराकाशी, गौचर और पिथौरागढ़ सहित प्रदेश के लगभग 12 नगरों के लिए हेली सेवाएँ प्रारंभ होने से राज्य की एयर कनेक्टिविटी मजबूत हुई।

फोरलेन एलिवेटेड रोड बनाने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे का कार्य तेजी से पूर्ण किया जा रहा है। साथ ही देहरादून में रिस्पना और बिंदाल नदी के ऊपर फोरलेन एलिवेटेड रोड का निर्माण करने की योजना भी तैयार की जा रही है। देहरादून में 1400 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य कर रहे हैं। शहर में स्मार्ट स्कूलों की स्थापना करने के साथ ही लैंसडाउन चौक पर 650 पाठकों की क्षमता वाली अत्याधुनिक लाइब्रेरी का निर्माण किया गया है। एक ओर जहां, शहर में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 30 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा रहा है, वहीं निजी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 11 स्थानों पर चार्जिंग स्टेशनों का निर्माण भी किया जा रहा है।

फैसले बन गए नजीर

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि आमजन के हित में सरकार के लिए गए फैसले देश में नजीर बन गए हैं। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में अनेकों जन कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के साथ ही इन योजनाओं को प्रदेश के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प लेकर कार्य किया है। इस संकल्प को पूरा करने के लिए विभिन्न जागरुकता अभियान चलाने के साथ ही हमने लगभग सभी योजनाओं की आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन किया है। साथ ही यह सुनिश्चित करने का प्रय़ास किया है कि प्रदेश वासियों को घर बैठे ही जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

कौन हैं आईएएस आनंद बर्धन, उत्तराखंड के अगले मुख्य सचिव के तौर पर संभालेंगे कार्यभार, जारी हो गया है आदेश

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वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आनंद बर्धन उत्तराखंड के नए मुख्य सचिव होंगे। शासन ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। आनंद बर्धन मौजूदा सीएस राधा रतूड़ी का स्थान लेंगे। अभी तक मिली जानकारी के अनुसार आनंद बर्धन 31 मार्च की शाम को कार्यभार ग्रहण करेंगे।

आनंद बर्धन पर सरकार ने जताया भरोसा, वरिष्ठता में भी सबसे ऊपर

उत्तराखंड की मौजूदा सीएस राधा रतूड़ी का कार्यकाल इसी 31 मार्च को खत्म हो रहा है। राधा रतूड़ी को धामी सरकार दो बार छह – छह महीने का कार्यकाल विस्तार पहले ही दे चुकी है। उधर राधा रतूड़ी पहले ही मुख्य सूचना आयुक्त के पद के लिए आवेदन कर चुकी हैं। ऐसे में राज्य के मुख्य सचिव पद के लिए आईएएस अफसरों में वरिष्ठता क्रम में सबसे ऊपर IAS आनंद बर्धन ही एक मात्र विकल्प के तौर पर थे। वो राज्य के 19वें मुख्य सचिव होंगे।

लंबा प्रशासनिक अनुभव, अब बनेंगे सबसे ताकतवर अफसर

आईएएस आनंद बर्धन (IAS Anand Bardhan) मौजूदा समय में उत्तराखंड कैडर के सबसे वरिष्ठ अफसर हैं। 1992 बैच के उत्तराखंड कैडर के आईएएस अधिकारी आनंद बर्धन अविभाजित उत्तर प्रदेश में भी कई बड़ी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। आनंद बर्धन कई जिलों के डीएम पद भी संभाल चुके हैं। रामपुर, इटावा, नैनीताल और हरिद्वार जैसे जिलों के डीएम रह चुके आईएएस अधिकारी आनंद बर्धन के पास लंबा प्रशासनिक अनुभव है। वो प्रमुख सचिव रहते हुए कई बड़े और महत्वपूर्ण विभागों को देखते रहे हैं। सीएम धामी के अतिरिक्त मुख्य सचिव का पद भी आनंद बर्धन संभाल चुके हैं।

फ्रांस से ली लोक प्रशासन में शिक्षा

आईएएस आनंद बर्धन ने दिल्ली विश्वविद्यालय से भौतिकी में बीएससी ऑनर्स किया और पूरे विश्वविद्यालय में द्वितीय स्थान पर रहे। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लीकेशन में मास्टर किया है। वहीं आनंद बर्धन ने फ्रांस से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया है।

उत्तराखंड में चार धाम यात्रा। तीर्थयात्रियों की हेल्थ और सेफ्टी पर अधिक रहेगा जोर, जुटी धामी सरकार

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उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2025 की तैयारियां जोरों पर हैं। गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट 30 अप्रैल को खुलेंगे, जिसके साथ यात्रा की विधिवत शुरुआत हो जाएगी। वहीं केदारनाथ धाम के कपाट 2 मई व बद्रीनाथ धाम के कपाट 4 मई को खुलेंगे। इस बार राज्य सरकार ने तीर्थयात्रियों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को पहले से बेहतर बनाने के लिए कई बडे़ कदम उठाए हैं। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के दिशा निर्देशों में चारधाम यात्रा 2025 को सुरक्षित और स्वास्थ्य-संबंधी दृष्टि से बेहतर बनाने की दिशा में कई बड़े कदम उठाए गए हैं, जो तीर्थ यात्रियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को सुनिश्चित करेंगे।

12 भाषाओं में चार धाम यात्रा की SOP जारी

स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि तीर्थयात्रियों की स्वास्थ्य सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। राज्य सरकार ने विभिन्न भौगोलिक और जलवायु संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए 12 भाषाओं में स्वास्थ्य परामर्श एवं एसओपी जारी कर दी है। डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि सभी राज्यों के स्वास्थ्य सचिवों को पत्र के माध्यम से आग्रह किया है कि यात्रा से पूर्व स्वास्थ्य जांच, सतर्कता और चिकित्सकीय तैयारियों पर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। विशेषकर, बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री एवं यमुनोत्री जैसे ऊँचे-चढ़ते क्षेत्रों में तीर्थयात्रियों को कठोर जलवायु, निम्न ऑक्सीजन स्तर एवं कठिन मार्ग स्थितियों का सामना करना पड़ता है, अतः तीर्थयात्री जरूरी स्वास्थ्य परीक्षण व आवश्यक तैयारियों के साथ आयें।

सुरक्षित, सुगम यात्रा का है इरादा

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि स्क्रीनिंग प्वाइंट, आपातकालीन सेवाएं और हेलीपैड जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर तीर्थयात्रियों की सहायता सुनिश्चित की जाएगी। इस व्यापक परामर्श को सभी राज्यों में पत्र भेजकर संभावित तीर्थयात्रियों तक आवश्यक जानकारी पहुँचाने का प्रयास किया गया है। राज्य सरकार की यह प्रतिबद्धता चारधाम यात्रा 2025 को सुरक्षित, सुगम एवं सफल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं सर्वोच्च प्राथमिकता

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देशों पर चारधाम यात्रा को पूरी तरह सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग प्रतिबद्ध है। यात्रियों की सुविधा और स्वास्थ्य की देखभाल सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए डॉक्टरों, मेडिकल स्टाफ, ऑक्सीजन सिलेंडर और दवाइयों की पूरी व्यवस्था की गई है। चारधाम यात्रा 2025 के दौरान किसी भी यात्री को स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी कोई परेशानी न हो, इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

तीर्थयात्रियों के लिए एडवाइजरी

यात्रा से पूर्व अनिवार्य स्वास्थ्य जांच कराएं।
कम से कम दो माह पूर्व पैदल चलने, प्राणायाम एवं हृदय संबंधी व्यायाम अपनाएं।
आवश्यक दवाइयों की पर्याप्त मात्रा साथ रखें।
स्वास्थ्य एवं पर्यटन पंजीकरण ऐप पर अनिवार्य पंजीकरण करें।
पर्याप्त जल, संतुलित आहार एवं हल्के गर्म पेय पदार्थों का सेवन करें।
स्क्रीनिंग केंद्र एवं चिकित्सा राहत पोस्ट का लाभ उठाएं।
हल्की परतों वाले कपड़े, गरम वस्त्र, दस्ताने एवं ऊनी सामग्री साथ रखें।

चिकित्सा विशेषज्ञों की स्वैच्छिक सेवा

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि इसके अतिरिक्त, राज्यों के स्वास्थ्य सचिवों से यह भी कहा गया है कि वे अपने राज्य से चिकित्सा विशेषज्ञों, विशेषकर हृदय रोग, आस्थि रोग, सर्जन जैसे चिकित्सकों को स्वैच्छिक रूप से चारधाम यात्रा मार्ग पर स्थित चिकित्सालयों में योगदान देने के लिए प्रेरित करें। विशेषज्ञों से अपेक्षित योगदान कम से कम 15 दिनों के लिए होगा, जिससे तीर्थयात्रियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें और चिकित्सकों को मानव सेवा का अवसर मिल सके।

जागरूकता अभियान के तहत प्रचार सामग्री

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने चारधाम यात्रा से संबंधित स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए क्या करें, क्या न करें और अन्य स्वास्थ्य देखभाल सामग्री भी तैयार की है। ये सामग्री सभी राज्यों में साझा की गई है, ताकि तीर्थ यात्री यात्रा के दौरान स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति जागरूक हो सकें। इसके अलावा, यात्रा मार्ग पर स्थित सभी जनपदों के जिलाधिकारियों को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे इस सामग्री को स्थानीय स्तर पर वितरित करें, ताकि आम तीर्थयात्री यात्रा के दौरान आवश्यक स्वास्थ्य सुरक्षा उपायों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।

यात्रा मार्गों पर स्क्रीनिंग प्वाइंट

स्वास्थ्य सचिव ने जानकारी देते हुए बताया कि चारधाम यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों की ब्लड प्रेशर, शुगर, ऑक्सीजन लेवल सहित 28 पैरामीटर की जांच के लिए स्क्रीनिंग प्वाइंट बनाए गए हैं। यह सभी प्वाइंट रजिस्ट्रेशन प्वाइंट के साथ जोड़े गए हैं ताकि यात्रा शुरू करने से पहले यात्रियों की पूरी स्वास्थ्य जांच हो सके। यात्रा मार्ग पर मेडिकल रिलीफ प्वाइंट की संख्या बढ़ाई गई है और वहां पर डॉक्टरों के साथ प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ और स्वास्थ्य मित्रों की तैनाती की जाएगी।

तीर्थयात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सलाह

स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि यात्रा से पहले स्वास्थ्य जांच कराएं और यात्रा की योजना कम से कम सात दिन पहले बनाएं। केदारनाथ और यमुनोत्री यात्रा के दौरान हर एक से दो घंटे में 5-10 मिनट का विश्राम करें। यात्रा के दौरान गर्म कपड़े, रेनकोट, छाता, पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर साथ रखें। हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, अस्थमा, मधुमेह से ग्रसित यात्री अपनी जरूरी दवाइयां और डॉक्टर का नंबर साथ रखें। यदि यात्रा के दौरान सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई, चक्कर या उल्टी महसूस हो तो तुरंत निकटतम मेडिकल रिलीफ प्वाइंट पर जाएं।

हेल्थ एटीएम और टेलीमेडिसिन की सुविधा

यात्रियों की स्वास्थ्य जांच को आसान बनाने के लिए यात्रा मार्गों पर हेल्थ एटीएम लगाए जाएंगे। यहां पर ब्लड प्रेशर, शुगर, ऑक्सीजन लेवल, वजन, लंबाई और शरीर का तापमान मापा जा सकेगा। साथ ही, टेलीमेडिसिन सेवा के तहत 24 घंटे विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श की सुविधा भी दी जाएगी।

केदारनाथ यात्रा मार्ग पर विशेष ध्यान

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि तीर्थयात्रियों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें केदारनाथ यात्रा मार्ग के दौरान आती हैं। इसलिए केदारनाथ यात्रा के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया गया है। यात्रा मार्ग पर 10 मेडिकल रिलीफ पोस्ट और दो पीएचसी सेंटर स्थापित किए गए हैं। गुप्तकाशी, फाटा, गौरीकुंड और नारायणकोटी में हेल्थ एटीएम लगाए जाएंगे, जहां यात्रियों की फ्री हेल्थ स्क्रीनिंग की जाएगी।

उत्तराखंड में चार धाम यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह, सरकार भी तैयारियों में लगी

उत्तराखंड में चार धाम यात्रा के लिए हर स्तर पर तैयारी तेज हो गई है वहीं श्रद्धालुओं में इस यात्रा को लेकर जबरदस्त उत्साह दिख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुखवा और हर्षिल आने के बाद से यात्रा के पक्ष में जबरदस्त माहौल बना है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार चार धाम यात्रा दस दिन पहले शुरू हो रही है। यानी कि इस बार यात्रा के लिए ज्यादा दिन उपलब्ध होंगे। यात्रियों के स्तर पर पंजीकरण के लिए दिखाए जा रहे उत्साह को देखते हुए सरकार ने भीड़ प्रबंधन को भी ध्यान में रखते हुए तैयारी शुरू कर दी है।

ग्रैंड प्रमोशन, देवभूमि है लोगों की पहली पसंद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मां गंगा के शीतकालीन गद्दी स्थल मुखवा और पर्यटन स्थल हर्षिल के दौरे से यात्रा के लिए अच्छा माहौल तैयार हुआ है। प्रधानमंत्री छह मार्च को उत्तराखंड आए थे। ऐसा पहली बार हुआ, जब कि चार धाम यात्रा शुरू होने से कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री का उत्तराखंड आना हुआ। भले ही औपचारिक कार्यक्रम शीतकालीन यात्रा को लेकर था, लेकिन प्रधानमंत्री ने चार धाम यात्रा की भी भरपूर ब्रांडिंग की। देश को यह तक बतलाया कि पिछले दस वर्षों में चार धाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कितना बड़ा अंतर आ गया है।

30 अप्रैल से यात्रा, इस बार ज्यादा दिन चलेगी

वर्ष 2024 में चार धाम यात्रा का शुभारंभ दस मई को हुआ था। इस बार उसकी शुरुआत 30 अप्रैल से हो रही है। वर्ष 2023 में यात्रा 22 अप्रैल को शुरू हो गई थी और रिकार्ड 56,18497 यात्री उत्तराखंड पहुंचे थे। वर्ष 2024 में कम दिन मिलने और प्राकृतिक आपदा की घटनाओं के बावजूद यात्री संख्या के आंकडे़ ने सबको चौंका दिया था। इस वर्ष यात्रा में कुल 48,04215 यात्री उत्तराखंड पहुंचे थे।

चार धाम यात्रा, कब कहां के कपाट खुलेंगे

30 अप्रैल को गंगोत्री-यमुनोत्री
02 मई को केदारनाथ धाम
04 मई को बद्रीनाथ धाम

सरकार चारधाम यात्रा की तैयारी में जुटी हुई है। उत्तराखंड की यात्रा व्यवस्था ने देश दुनिया के श्रद्धालुओं को आकर्षित किया है और उनका भरोसा बढ़ा है। प्रधानमंत्री जी ने चारधाम यात्रा का भरपूर प्रमोशन किया है। हम यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए संकल्पबद्ध हैं – पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

उत्तराखंड में अवैध मदरसों की फंडिंग जांच के दायरे में, सरकार  ने लिया ये बड़ा फैसला

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उत्तराखंड सरकार अवैध मदरसों पर सख्त कार्रवाई के बाद अब उनकी फंडिंग की गहन जांच करने जा रही है। जिसकी रिपोर्ट अधिकारी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपेंगे।

मदरसों के लिए कहां से आ रहा पैसा ?

बीते एक माह से प्रदेश में अवैध मदरसों के खिलाफ व्यापक स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। अब तक पूरे प्रदेश में 136 मदरसों को कागजात पूरे न होने पर सील किया जा चुका है जबकि, रिपोर्ट के अनुसार पूरे प्रदेश में 500 से अधिक अवैध मदरसे संचालित हो रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि इन मदरसों को संचालित करने और कर्मियों के वेतन के लिए पैसा कहां से आ रहा है? क्या इसके पीछे धर्म की आड़ में कोई सुनियोजित साजिश तो नहीं? जांच के बाद यह साफ हो सकेगा कि देवभूमि में संचालित हो रहे इन मदरसों को कहीं दूसरे देशों से फडिंग तो नहीं हो रही।

जिला स्तर पर जांच की तैयारी

राज्य में करीब 450 पंजीकृत मदरसे हैं, जो शासन को अपने दस्तावेज, बैंक खाते और आय-व्यय का पूरा ब्योरा देते हैं। लेकिन दूसरी ओर, 500 से अधिक मदरसे बिना किसी मान्यता के संचालित हो रहे हैं। इन मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों का सत्यापन और आर्थिक स्रोतों की जांच के लिए शासन ने जिला प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए हैं। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि इन अवैध मदरसों को किस स्रोत से धन मिल रहा है और उसका उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है।

सीमावर्ती इलाकों में खुल रहे हैं मदरसे

पिछले कुछ समय में यूपी से सटे कस्बों जैसे जसपुर, बाजपुर, किच्छा, काशीपुर, रुद्रपुर, गदरपुर, पछवादून और हरिद्वार जिले में बिना पंजीकरण के कई मदरसे खुलने की सूचना मिली है। इन क्षेत्रों में अवैध रूप से मदरसों की बढ़ती संख्या सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है। सरकार इन मदरसों के स्रोतों और उद्देश्यों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई कर रही है।

देहरादून में सील हुआ मदरसा

देहरादून जिला प्रशासन की टीम ने आज सहसपुर के एक बड़े मदरसे को अवैध निर्माण मामले में पूर्व में दिए नोटिस के बाद सील कर दिया। उक्त मदरसे ने बिना प्राधिकरण की अनुमति के एक मंजिल का अवैध रूप से निर्माण कर लिया था।

उत्तराखंड में अवैध मदरसों के खिलाफ कार्रवाई

जिला अवैध मदरसों की संख्या
ऊधम सिंह नगर 64
देहरादून 44
हरिद्वार 26
पौड़ी गढ़वाल 02

प्रदेश में अवैध मदरसों, मजार और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। अवैध रूप से बड़े पैमाने पर मदरसों का संचालन गंभीर विषय है। जिसकी जांच के लिए अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैंसीएम धामी

सीएम धामी का बड़ा बयान, अवैध कब्जों और अतिक्रमण के खिलाफ जारी रहेगा अभियान

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सीएम धामी के दूसरे कार्यकाल के तीन साल पूरे हो गए हैं। ऐसे में सीएम धामी ने बड़ा बयान दिया है। सीएम धामी ने कहा है कि उत्तराखंड में भ्रष्टाचार, अतिक्रमण और अवैध कब्जों पर सरकार का प्रहार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों के कार्यकाल के दौरान अनेक चुनौतियों सामने आईं, लेकिन उनका जनता के बीच खडे़ होकर सामना किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केे कथन के अनुसार ही उत्तराखण्ड प्रगति कर रहा है। निश्चित तौर पर यह दशक उत्तराखण्ड का होगा।

सरकार की वापसी का नहीं लग रहा था अनुमान

तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के अवसर पर मुख्यमंत्री ने शनिवार कोे सीएम आवास स्थित मुुख्य सेवक सदन में पत्रकारोें से बातचीत की। उन्होंने राज्य सरकार की उपलब्धियों का जिक्र किया और भविष्य के लिए अपनी प्राथमिकताओं को भी साझा किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि भाजपा की सरकार वापसी नहीं कर पाएगी। क्योंकि इस तरह की परिपाटी नहीं रही है। मगर जनता ने भाजपा को आशीर्वाद देकर फिर से राज सौंप दिया। उन्होंने कहा कि तीन वर्ष में सरकार के सामने कई तरह की चुनौतियां आईं, लेकिन सरकार ने धरातल पर जाकर उसका सामना किया। रैणी, सिलक्यारा, केदार घाटी से लेकर हाल ही में माणा की आपदा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि संकट के समय पीछे रहकर काम नहीं किया जाता।

जारी रहेगा अभियान, अंतिम अतिक्रमण तक तोडेंगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 में जिस विकसित भारत का संकल्प लिया है, उसमेें अपनी भूमिका निभाने के लिए उत्तराखण्ड पूरी सार्मथ्य से काम कर रहा है। उन्होंने कनेक्टिविटी के विस्तार की बात करते हुए कई उदाहरण दिए और कहा कि उत्तराखण्ड अपनी क्षमताओं का आंकलन करते हुए इसी अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित कर रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में अवैध निर्माण, कब्जों, अतिक्रमण केे खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। भ्रष्टाचार पर और सख्त प्रहार किए जाएंगेे।

मसलों को ठंडे बस्ते में नहीं डालते

यूसीसी, भू-कानून, नकल विरोेधी जैसे कानूनों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार महत्वपूर्ण मसलों को ठंडे बस्ते में डालने में यकीन नहीं करती। इसलिए प्रमुख मुद्दों पर फैसले किए गए हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए 30 फीसदी आरक्षण समेत लखपति दीदी जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन से मातृ शक्ति के कल्याण के लिए ठोस कदम आगे बढ़ाए गए हैं। आंदोलनकारियों के लिए दस फीसदी क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की गई है। प्रवासी उत्तराखण्डियों के सम्मेलन केे माध्यम सेे प्रवासियों को राज्य के साथ जोड़ा गया।

बजट का आकार एक लाख करोड़ से ऊपर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रति व्यक्ति आय के मामले में राज्य का पूरे देश में 13 वां स्थान पर आना सुखद संकेत है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट हो या जी-20 बैठकों का आयोजन उत्तराखण्ड को इन आयोजनों से दूरगामी लाभ मिला है। सतत विकास लक्ष्यों के इंडेक्स में देश में पहला स्थान महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा है। उन्होंने कहा कि रजत जयंती वर्ष मेें राज्य का सालाना बजट एक लाख करोड़ को पार कर जाना बताता है कि चुनौतियों के बावजूद हम सही राह पर आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2027 में कुंभ और इसके बाद नंदा राजजात का भी जिक्र किया और कहा कि सरकार इसके लिए तैयारी कर रही है। उन्होंने राष्ट्रीय खेलो के आयोजन से जुड़ी सफलता की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने चारधाम यात्रा, शीतकालीन यात्रा समेेत राज्य के कई स्थानों पर पहुंचकर पर्यटन विकास में अभूतपूर्व योगदान किया।

इस अवसर पर विधायक खजान दास, महंत दिलीप रावत, राजकुमार पोरी और महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी उपस्थित थे।