यमुनोत्री विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर उत्तरकाशी जिले की इस महत्वपूर्ण सीट पर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय संजय डोभाल ने कांग्रेस के दीपक बिजल्वाण को 6,639 वोटों से हराकर जीत दर्ज की थी। लेकिन 2027 से पहले यहां के राजनीतिक समीकरणों में बदलाव आया है। 2022 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले दीपक बिजल्वाण अब बीजेपी में शामिल हो चुके हैं, जबकि पूर्व विधायक केदार सिंह रावत ने भी 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी सार्वजनिक रूप से जाहिर की है। दूसरी ओर वर्तमान विधायक संजय डोभाल ने क्षेत्र के विकास और बजट आवंटन को लेकर सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं। ऐसे में यमुनोत्री विधानसभा चुनाव 2027 में उम्मीदवारों की भूमिका, दलों की रणनीति और स्थानीय मुद्दों पर नजर रहेगी।
यमुनोत्री विधानसभा सीट: एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| विधानसभा क्षेत्र | यमुनोत्री |
| वर्तमान विधानसभा सीट संख्या | 2 |
| जिला | उत्तरकाशी |
| सीट की श्रेणी | सामान्य (अनारक्षित) |
| लोकसभा क्षेत्र | टिहरी गढ़वाल |
| वर्तमान विधायक | संजय डोभाल |
| वर्तमान विधायक की राजनीतिक स्थिति | निर्दलीय |
| 2022 के चुनाव में विजेता | संजय डोभाल |
| 2022 में दूसरे स्थान पर | दीपक बिजल्वाण, कांग्रेस |
| 2022 में जीत का अंतर | 6,639 वोट |
| अगला विधानसभा चुनाव | 2027 |
यमुनोत्री उत्तरकाशी जिले की तीन विधानसभा सीटों में से एक है। वर्तमान परिसीमन के अनुसार इस विधानसभा क्षेत्र में चिन्यालीसौड़ तहसील, बड़कोट क्षेत्र और डुंडा तथा राजगढ़ी तहसीलों के कुछ राजस्व क्षेत्र शामिल हैं। यमुनोत्री धाम, बड़कोट और यमुना घाटी से जुड़ी आर्थिक गतिविधियां इस क्षेत्र की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
यह सीट सामान्य श्रेणी में आती है। वर्तमान विधानसभा क्षेत्र का क्रमांक 2 है। निर्वाचन आयोग के 2008 के परिसीमन आदेश में यमुनोत्री की नई सीमाओं का विवरण दिया गया है।
यमुनोत्री विधानसभा चुनाव 2022 का परिणाम: निर्दलीय संजय डोभाल ने दर्ज की जीत
2022 के विधानसभा चुनाव में यमुनोत्री सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार संजय डोभाल ने जीत हासिल की थी। उन्हें 22,952 वोट मिले। कांग्रेस के दीपक बिजल्वाण 16,313 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि बीजेपी के केदार सिंह रावत को 10,620 वोट प्राप्त हुए।
संजय डोभाल ने कांग्रेस प्रत्याशी दीपक बिजल्वाण को 6,639 वोटों से हराया था।
यमुनोत्री विधानसभा चुनाव परिणाम 2022
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट |
|---|---|---|
| संजय डोभाल | निर्दलीय | 22,952 |
| दीपक बिजल्वाण | कांग्रेस | 16,313 |
| केदार सिंह रावत | बीजेपी | 10,620 |
| मनोज कोहली श्याम | आम आदमी पार्टी | 583 |
| जगवीर सिंह | बसपा | 343 |
| विशाल सिंह | राष्ट्रीय उत्तराखंड पार्टी | 295 |
| रमेश चंद्र रामोला | उत्तराखंड क्रांति दल | 264 |
| विपिन | सत्य बहुमत पार्टी | 218 |
| NOTA | इनमें से कोई नहीं | 565 |
जीत का अंतर: 6,639 वोट।
2022 के चुनाव में निर्दलीय संजय डोभाल को कांग्रेस और बीजेपी दोनों से अधिक वोट मिले। यह परिणाम इस सीट पर स्थानीय उम्मीदवारों की भूमिका और चुनावी विकल्पों की विविधता को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
यमुनोत्री विधानसभा चुनाव 2017: बीजेपी के केदार सिंह रावत की जीत
2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के केदार सिंह रावत ने यमुनोत्री सीट पर जीत दर्ज की थी। उन्हें 19,800 वोट प्राप्त हुए थे। कांग्रेस के संजय डोभाल 13,840 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे।
यमुनोत्री विधानसभा चुनाव परिणाम 2017
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट |
|---|---|---|
| केदार सिंह रावत | बीजेपी | 19,800 |
| संजय डोभाल | कांग्रेस | 13,840 |
| प्रकाश चंद्र रमोला | निर्दलीय | 7,061 |
| रणवीर सिंह | निर्दलीय | 4,613 |
| राजबहादुर सिंह बौद्ध | बसपा | 530 |
| जयप्रकाश | सर्व विकास पार्टी | 342 |
| धर्मानंद बिजल्वाण | निर्दलीय | 248 |
| पुरुषोत्तम उनियाल | उत्तराखंड क्रांति दल | 246 |
| NOTA | इनमें से कोई नहीं | 424 |
जीत का अंतर: 5,960 वोट।
2017 में केदार सिंह रावत ने कांग्रेस के संजय डोभाल को हराया था। पांच साल बाद 2022 में यही संजय डोभाल निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरे और जीत दर्ज करने में सफल रहे।
2002 से 2022 तक यमुनोत्री विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
उत्तराखंड गठन के बाद यमुनोत्री विधानसभा सीट पर हुए चुनावों में अलग-अलग राजनीतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। इस सीट पर उत्तराखंड क्रांति दल, कांग्रेस, बीजेपी और निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव जीत चुके हैं।
यमुनोत्री विधानसभा चुनाव: पिछले पांच चुनावों का रिकॉर्ड
| चुनाव वर्ष | विजेता | पार्टी | प्राप्त वोट | उपविजेता | उपविजेता के वोट | जीत का अंतर |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 2002 | प्रीतम सिंह पंवार | उक्रांद | 9,498 | केदार सिंह | 7,013 | 2,485 |
| 2007 | केदार सिंह | कांग्रेस | 14,484 | प्रीतम सिंह पंवार | 11,156 | 3,328 |
| 2012 | प्रीतम सिंह पंवार | उक्रांद (पंवार) | 15,909 | केदार सिंह रावत | 13,313 | 2,596 |
| 2017 | केदार सिंह रावत | बीजेपी | 19,800 | संजय डोभाल | 13,840 | 5,960 |
| 2022 | संजय डोभाल | निर्दलीय | 22,952 | दीपक बिजल्वाण | 16,313 | 6,639 |
इस चुनावी रिकॉर्ड में दो बातें ध्यान देने योग्य हैं। पहली, पांचों चुनावों में विजेता उम्मीदवारों की राजनीतिक पहचान अलग-अलग रही। दूसरी, 2002 और 2007 के चुनाव पुराने परिसीमन के तहत हुए थे। उस समय यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र का क्रमांक 3 था। वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद इसकी संख्या 2 हुई और क्षेत्र की सीमाओं में बदलाव आया।
इसलिए 2002 और 2007 के परिणाम ऐतिहासिक संदर्भ के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनकी तुलना 2012, 2017 और 2022 के परिणामों से करते समय परिसीमन का यह अंतर ध्यान में रखना जरूरी है।
यमुनोत्री में पिछले चुनावों में किस पार्टी ने जीत दर्ज की?
| राजनीतिक दल/विकल्प | 2002–2022 के बीच जीत |
|---|---|
| उत्तराखंड क्रांति दल | 2 |
| कांग्रेस | 1 |
| बीजेपी | 1 |
| निर्दलीय | 1 |
यहां उत्तराखंड क्रांति दल की 2002 और 2007 की अलग-अलग चुनावी स्थिति तथा 2012 के उक्रांद (पंवार) गुट को संबंधित चुनावी रिकॉर्ड के अनुसार दर्ज किया गया है। यह तालिका केवल इन पांच विधानसभा आम चुनावों के विजेताओं को दर्शाती है।
संजय डोभाल कौन हैं? यमुनोत्री के वर्तमान विधायक का राजनीतिक रिकॉर्ड
संजय डोभाल यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान निर्दलीय विधायक हैं। उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में 22,952 वोट प्राप्त कर कांग्रेस और बीजेपी के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ा था।
संजय डोभाल का राजनीतिक आधार यमुनोत्री क्षेत्र की स्थानीय राजनीति से जुड़ा है। 2017 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था और 13,840 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। 2022 में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और विधायक बने।
संजय डोभाल का चुनावी सफर
| चुनाव वर्ष | पार्टी | परिणाम |
|---|---|---|
| 2017 | कांग्रेस | दूसरे स्थान पर, 13,840 वोट |
| 2022 | निर्दलीय | विजेता, 22,952 वोट |
PRS Legislative Research के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, 19 फरवरी 2025 से 20 अगस्त 2025 के बीच दर्ज विधानसभा गतिविधि में संजय डोभाल ने 17 प्रश्न पूछे थे। उसी अवधि के लिए PRS द्वारा दिया गया उत्तराखंड विधायकों का औसत 2.8 प्रश्न था। यह आंकड़ा केवल उपलब्ध रिपोर्टिंग अवधि का है, पूरे कार्यकाल का नहीं।
अगस्त 2026 में संजय डोभाल ने जिला योजना में यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र के लिए पर्याप्त बजट आवंटित नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए उत्तरकाशी जिला मुख्यालय में प्रदर्शन किया था। उन्होंने जिला योजना में पारदर्शिता और क्षेत्र के लिए बजट बढ़ाने की मांग उठाई थी। यह उनका और प्रदर्शनकारियों का आरोप था।
2027 से पहले यमुनोत्री की राजनीति में बदले समीकरण
यमुनोत्री विधानसभा चुनाव 2027 से पहले इस सीट से जुड़े कुछ नेताओं की राजनीतिक स्थिति में बदलाव आया है। 2022 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर लड़ने वाले दीपक बिजल्वाण अब बीजेपी में हैं। वहीं पूर्व विधायक केदार सिंह रावत ने चुनाव लड़ने की तैयारी का सार्वजनिक बयान दिया है।
दीपक बिजल्वाण: कांग्रेस के प्रत्याशी से बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति तक
2022 के विधानसभा चुनाव में दीपक बिजल्वाण कांग्रेस के उम्मीदवार थे। उन्होंने 16,313 वोट हासिल किए थे और दूसरे स्थान पर रहे थे।
अगस्त 2025 में दीपक बिजल्वाण ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की। इसके बाद अगस्त 2026 में घोषित बीजेपी की नई प्रदेश कार्यसमिति में भी उनका नाम शामिल किया गया। बीजेपी की कार्यसमिति सूची में उन्हें उत्तरकाशी संगठनात्मक जिले का प्रतिनिधित्व दिया गया है।
दीपक बिजल्वाण की राजनीतिक पृष्ठभूमि में छात्र राजनीति और जिला पंचायत की भूमिका भी शामिल रही है। वे उत्तरकाशी जिला पंचायत के अध्यक्ष रह चुके हैं।
2027 में उनकी राजनीतिक भूमिका पर नजर रहेगी, लेकिन बीजेपी ने यमुनोत्री विधानसभा के लिए उन्हें आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है या नहीं, यह पार्टी की आगामी घोषणा से ही स्पष्ट होगा।
केदार सिंह रावत: 2027 का चुनाव लड़ने की तैयारी
यमुनोत्री के पूर्व विधायक केदार सिंह रावत ने 1 फरवरी 2026 को बड़कोट में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा था कि वे 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं।
केदार सिंह रावत वर्ष 2007 में कांग्रेस के टिकट पर यमुनोत्री से विधायक बने थे। 2017 में उन्होंने बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतकर फिर विधानसभा में जगह बनाई। 2022 में बीजेपी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उस चुनाव में वे तीसरे स्थान पर रहे।
अगस्त 2026 में घोषित बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की सूची में केदार सिंह रावत को उत्तरकाशी संगठनात्मक जिले से विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में भी शामिल किया गया था।
उनकी ओर से चुनाव लड़ने की तैयारी का बयान सामने आया है, लेकिन 2027 के लिए किसी पार्टी के टिकट की आधिकारिक घोषणा अलग विषय है।
2027 के लिए अब तक सामने आई राजनीतिक स्थिति
| नेता/राजनीतिक दल | उपलब्ध जानकारी |
|---|---|
| संजय डोभाल | वर्तमान निर्दलीय विधायक |
| दीपक बिजल्वाण | 2022 में कांग्रेस उम्मीदवार, अगस्त 2025 में बीजेपी में शामिल |
| केदार सिंह रावत | पूर्व विधायक; फरवरी 2026 में चुनाव लड़ने की तैयारी का बयान |
| बीजेपी | दीपक बिजल्वाण और केदार सिंह रावत प्रदेश संगठन की सूची में शामिल |
| कांग्रेस | 2027 के आधिकारिक उम्मीदवार की घोषणा का इंतजार |
| अन्य दल/निर्दलीय | उम्मीदवारों की आगामी घोषणाओं पर नजर |
अभी इन राजनीतिक गतिविधियों को संभावित दावेदारी और संगठनात्मक स्थिति के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी नेता को 2027 का आधिकारिक प्रत्याशी तभी कहा जा सकता है, जब संबंधित पार्टी या चुनाव प्राधिकरण की ओर से औपचारिक पुष्टि हो।
यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र में विकास और बजट का सवाल
2027 के चुनाव में यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्य और बजट आवंटन भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकते हैं।
23 अगस्त 2026 को टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, विधायक संजय डोभाल ने जिला मुख्यालय में प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया था कि जिला योजना के तहत उनके विधानसभा क्षेत्र को पर्याप्त धनराशि नहीं दी जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने बजट आवंटन में पारदर्शिता और क्षेत्र के साथ कथित असमान व्यवहार का मुद्दा उठाया।
यह विधायक का राजनीतिक आरोप था। इसके साथ प्रशासन और संबंधित विभागों से जिला योजना में स्वीकृत धनराशि, खर्च और परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति की जानकारी लेना जरूरी है।
जल जीवन मिशन: चिन्यालीसौड़ के गांवों में पेयजल योजनाओं का सवाल
पेयजल की उपलब्धता यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है। 2 नवंबर 2026 को टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में उत्तरकाशी जिले में जल जीवन मिशन की 100 से अधिक पेयजल परियोजनाओं के फंड की कमी के कारण प्रभावित होने की बात सामने आई।
रिपोर्ट के अनुसार, चिन्यालीसौड़ के नागणी और हिटारा गांवों के लिए प्रस्तावित लिफ्ट-पंपिंग योजना का लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा होने के बावजूद यह करीब पांच साल से लंबित थी। इस योजना से एक हजार से अधिक लोगों को लाभ मिलने की बात कही गई।
यमुनोत्री विधायक संजय डोभाल ने भी आरोप लगाया कि जिले के 50 से अधिक गांवों में जल जीवन मिशन का काम शुरू नहीं हो पाया है और कई ठेकेदारों का भुगतान लंबित है। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने रिपोर्ट में कहा कि केंद्र से धनराशि मिलने की उम्मीद है और उसके बाद लंबित काम पूरा कराया जाएगा।
यमुनोत्री धाम का रोपवे और यात्रा मार्ग: 2027 में उठेंगे ये सवाल
यमुनोत्री धाम चारधाम यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। जानकीचट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक लगभग छह किलोमीटर का पैदल मार्ग है, जिस पर पैदल यात्रियों के साथ घोड़े-खच्चर, डंडी और कंडी भी चलते हैं।
20 जून 2026 को अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, यमुनोत्री के तीर्थपुरोहितों ने स्वीकृत रोपवे परियोजना का निर्माण जल्द पूरा करने की मांग उठाई थी। इसके साथ खरसाली गांव से गरुड़ गंगा तक वैकल्पिक पैदल मार्ग विकसित करने की मांग भी सामने आई थी।
स्थानीय लोगों और यात्रा से जुड़े पक्षों का कहना है कि यात्रा सीजन में बढ़ती भीड़ के कारण मौजूदा पैदल मार्ग पर दबाव बढ़ता है। रोपवे और वैकल्पिक रास्ते को लेकर उनका तर्क है कि इससे बुजुर्गों और अस्वस्थ श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सकती है तथा पैदल मार्ग पर भीड़ कम करने में मदद मिलेगी।
सितंबर 2026 में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने यमुनोत्री धाम तक लगभग पांच किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान क्षतिग्रस्त रेलिंग, दीवारों, शौचालय, सफाई, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और यात्रा मार्ग की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए थे।
2 नवंबर 2026 को अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, शीतकालीन यात्रा से पहले स्वास्थ्य विभाग यमुनोत्री मार्ग के अस्पतालों और मेडिकल रिलीफ पोस्ट की व्यवस्थाएं सुधारने में जुटा है।
ऐसे में 2027 के चुनाव में यह सवाल महत्वपूर्ण हो सकता है कि यमुनोत्री धाम की यात्रा व्यवस्था, रोपवे परियोजना और स्थानीय पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे में कितना सुधार हुआ।
यमुनोत्री को अलग जिला बनाने की मांग भी चुनावी मुद्दा
उत्तरकाशी जिले के बड़कोट और आसपास के क्षेत्रों में यमुनोत्री को अलग जिला बनाने की मांग भी लंबे समय से उठती रही है।
3 मई 2026 को अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, यमुनोत्री पृथक जनपद संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन सौंपकर अलग जिले के गठन की मांग की थी।
ज्ञापन में कहा गया था कि वर्ष 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने यमुनोत्री सहित चार नए जिलों के गठन की घोषणा की थी, लेकिन वे जिले अब तक अस्तित्व में नहीं आ सके हैं।
अलग जिला बनने से प्रशासनिक सुविधाएं, सरकारी कार्यालयों की उपलब्धता और दूरस्थ क्षेत्रों तक प्रशासनिक पहुंच बेहतर होने की उम्मीद जताई जाती रही है। इस मांग पर सरकार का रुख और आगे की कार्रवाई भी 2027 से पहले राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकती है।
स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार: यमुनोत्री के ग्रामीण क्षेत्रों की प्राथमिकताएं
यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र का बड़ा हिस्सा पर्वतीय और ग्रामीण है। यहां के दूरस्थ गांवों तक स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और अन्य सरकारी सुविधाएं पहुंचाना हमेशा महत्वपूर्ण रहा है।
यात्रा मार्ग पर चिकित्सा सुविधाओं के साथ-साथ बड़कोट, चिन्यालीसौड़ और आसपास के क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता, आपातकालीन सेवाएं और अस्पतालों की सुविधाएं भी स्थानीय लोगों के लिए अहम हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में उच्च शिक्षा संस्थानों, कॉलेजों, तकनीकी प्रशिक्षण और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों का विस्तार चुनावी चर्चा में शामिल हो सकता है।
पर्यटन के अलावा कृषि, बागवानी, पशुपालन, स्थानीय उत्पादों और छोटे कारोबार से रोजगार के अवसर बढ़ाने का सवाल भी महत्वपूर्ण है। यमुनोत्री धाम और आसपास के पर्यटन स्थलों से जुड़ी अर्थव्यवस्था का लाभ स्थानीय युवाओं, व्यापारियों और सेवा प्रदाताओं तक पहुंचना क्षेत्र के विकास का एक अहम पहलू है।
यमुनोत्री विधानसभा चुनाव 2027: बीजेपी, कांग्रेस और निर्दलीय विधायक के सामने सवाल
यमुनोत्री का चुनावी इतिहास बताता है कि इस सीट पर अलग-अलग चुनावों में अलग-अलग दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। 2022 में संजय डोभाल की निर्दलीय जीत के बाद राजनीतिक समीकरणों में एक नया अध्याय जुड़ा।
अब दीपक बिजल्वाण का बीजेपी में शामिल होना, केदार सिंह रावत का चुनाव लड़ने की तैयारी का बयान और संजय डोभाल की मौजूदा विधायक के रूप में राजनीतिक स्थिति 2027 के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
| राजनीतिक पक्ष | 2027 से पहले उससे जुड़े प्रमुख सवाल |
|---|---|
| निर्दलीय विधायक संजय डोभाल | क्षेत्र में विकास कार्यों, बजट और स्थानीय मुद्दों पर उनका रिकॉर्ड क्या रहा? |
| बीजेपी | उम्मीदवार चयन और स्थानीय संगठन की रणनीति क्या होगी? |
| कांग्रेस | 2022 के बाद पार्टी किस चेहरे के साथ आगे बढ़ेगी? |
| दीपक बिजल्वाण | बीजेपी में उनकी संगठनात्मक भूमिका आगे क्या होगी? |
| केदार सिंह रावत | क्या वे 2027 में फिर चुनाव मैदान में उतरेंगे और किस भूमिका में? |
| अन्य दल | क्या क्षेत्रीय दल और निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी मुकाबले में सक्रिय होंगे? |
2027 में इन सवालों के जवाब उम्मीदवारों की घोषणा, राजनीतिक दलों की रणनीति और क्षेत्र में विकास कार्यों की स्थिति स्पष्ट होने के साथ सामने आएंगे।
यमुनोत्री विधानसभा चुनाव 2027 से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल-जवाब
यमुनोत्री विधानसभा सीट किस जिले में है?
यमुनोत्री विधानसभा सीट उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित है।
यमुनोत्री विधानसभा सीट का नंबर क्या है?
वर्तमान परिसीमन के अनुसार यमुनोत्री उत्तराखंड की विधानसभा सीट संख्या 2 है।
क्या यमुनोत्री विधानसभा सीट आरक्षित है?
नहीं, यमुनोत्री विधानसभा सीट सामान्य (अनारक्षित) श्रेणी में आती है।
यमुनोत्री के वर्तमान विधायक कौन हैं?
संजय डोभाल यमुनोत्री के वर्तमान निर्दलीय विधायक हैं।
2022 में यमुनोत्री विधानसभा सीट से कौन जीता था?
2022 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार संजय डोभाल ने जीत दर्ज की थी।
संजय डोभाल ने 2022 में कितने वोटों से जीत हासिल की थी?
संजय डोभाल ने कांग्रेस के दीपक बिजल्वाण को 6,639 वोटों से हराया था।
2022 में यमुनोत्री से कांग्रेस का उम्मीदवार कौन था?
2022 में कांग्रेस ने दीपक बिजल्वाण को उम्मीदवार बनाया था। वे 16,313 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे।
दीपक बिजल्वाण किस पार्टी में हैं?
दीपक बिजल्वाण अगस्त 2025 में बीजेपी में शामिल हुए थे। अगस्त 2026 में उन्हें बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति में भी शामिल किया गया।
2017 में यमुनोत्री से कौन विधायक बना था?
2017 में बीजेपी के केदार सिंह रावत ने कांग्रेस के संजय डोभाल को हराकर जीत दर्ज की थी।
2012 में यमुनोत्री विधानसभा सीट से कौन जीता था?
2012 में उत्तराखंड क्रांति दल (पंवार) के प्रीतम सिंह पंवार ने जीत दर्ज की थी।
यमुनोत्री विधानसभा चुनाव 2027 में बीजेपी का उम्मीदवार कौन होगा?
बीजेपी के आधिकारिक उम्मीदवार की घोषणा होने के बाद ही नाम स्पष्ट होगा। दीपक बिजल्वाण और केदार सिंह रावत से जुड़ी संगठनात्मक गतिविधियों को टिकट की घोषणा नहीं माना जाना चाहिए।
यमुनोत्री विधानसभा चुनाव 2027 में कांग्रेस का उम्मीदवार कौन होगा?
कांग्रेस के उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही नाम स्पष्ट होगा।
यमुनोत्री विधानसभा चुनाव 2027 के प्रमुख मुद्दे क्या हो सकते हैं?
पेयजल, सड़क और पुल, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, रोजगार, यमुनोत्री धाम का विकास, रोपवे परियोजना और अलग यमुनोत्री जिला बनाने की मांग चुनावी बहस के प्रमुख विषय हो सकते हैं।
यमुनोत्री विधानसभा चुनाव 2027 में मौजूदा विधायक का कामकाज, राजनीतिक दलों में बदलती स्थितियां और क्षेत्र के स्थानीय विकास से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण रहेंगे। उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा और चुनावी प्रचार शुरू होने के साथ इस सीट की राजनीतिक तस्वीर और स्पष्ट होगी। खबर देवभूमि पर यमुनोत्री विधानसभा चुनाव 2027 से जुड़ी खबरों, संभावित उम्मीदवारों और चुनावी घटनाक्रम का नियमित अपडेट पढ़ते रहें।

