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उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज की तबियत बिगड़ी, एम्स में कराया गया भर्ती

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उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार, उन्हें सांस लेने में कुछ परेशानी महसूस हो रही थी।

स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की एक टीम उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। फिलहाल उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है और आवश्यक इलाज दिया जा रहा है।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने जाना हालचाल

कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के अस्पताल में भर्ती होने की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी ऋषिकेश एम्स पहुंचे। उन्होंने अस्पताल में सतपाल महाराज से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना।

इसके अलावा, सीएम धामी ने इलाज कर रहे डॉक्टरों की टीम से भी बातचीत की और महाराज के स्वास्थ्य के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री को उपचार की प्रगति के बारे में अवगत कराया।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कर रही निगरानी

ऋषिकेश एम्स में सतपाल महाराज को विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम की देखरेख में रखा गया है। अस्पताल के अनुसार, उनकी लगातार निगरानी की जा रही है और सभी जरूरी जांचें की जा रही हैं। फिलहाल, उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टर उपचार प्रक्रिया पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

उत्तराखंड बीजेपी का ये नेता लेगा सन्यास!, सोशल मीडिया की इस पोस्ट से मची सनसनी

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उत्तराखंड बीजेपी में बढ़ते असंतोष की झलक अब पार्टी लाइन से उठ कर सोशल मीडिया में भी दिखने लगी है। हालात यहां तक बिगड़ गए हैं कि पार्टी के एक नेता ने राजनीतिक सन्यास का लगभग मन बना लिया है। ये नेता हैं बद्री केदार मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष अजेंद्र अजय। अजेंद्र अजय पिछले कुछ दिनों से पार्टी की मौजूदा राजनीति से असहज महसूस कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर लिखी पोस्ट

अजेंद्र अजय ने फेसबुक पर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपने मन की बात लिख कर सनसनी फैला दी है। अजेंद्र अजय ने लिखा, ‘

उत्तराखंड में वर्तमान में जिस प्रकार का राजनीतिक परिदृश्य देखने को मिल रहा है, उससे राजनीति के प्रति मोहभंग सा होता जा रहा है। मोदी जी ने कहा था कि “तीसरा दशक उत्तराखंड का होगा।”
Narendra Modi जी तीसरा दशक ऐसा होगा, हम जैसे कार्यकर्ताओं और देवभूमिकी जनता ने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
छात्र जीवन से राष्ट्रवाद और सनातन के प्रति अगाध आस्था, विश्वास और समर्पण के कारण कई बार कई आरोप भी झेले। इन आरोपों से कभी व्यथित नहीं हुआ।
व्यथित होने की परिस्थितियां तब उत्पन्न हो रही हैं, जब हम विपरीत कार्यों के साथ दिखाई पड़ रहे हैं और उनके प्रति हमारा मौन समर्थन प्रकट हो रहा है।
ऐसी परिस्थितियों में राजनीतिक जीवन से संन्यास लेने के अतिरिक्त कोई अन्य विकल्प नहीं दिखाई पड़ता है।

BKTC में नहीं हुई थी वापसी, हेमंत द्विवेदी को मिला पद

अजेंद्र अजय बीकेटीसी के अध्यक्ष हुआ करते थे। लंबे समय तक उन्होंने बीकेटीसी को अपनी सेवाएं दीं। हालांकि कुछ समय पहले जब उनका कार्यकाल खत्म हुआ तब धामी सरकार ने उनको अध्यक्ष पद पर पुन: तैनाती नहीं दी और हेमंत द्विवेदी को बीकेटीसी का अध्यक्ष बना दिया। अजेंद्र अजय पिछले कुछ वक्त से सरकार की आलोचना से भी संकोच नहीं करते हैं। बीकेटीसी के मौजूदा अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के साथ भी उनके रिश्ते बहुत अच्छे नहीं लगते हैं।

Dehradun : DM की चेतावनी, LPG की कालाबाजारी पर जाओगे जेल

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देहरादून में (Dehradun) एलपीजी गैस की कालाबाजारी, अवैध संग्रहण और घरेलू गैस के व्यावसायिक उपयोग पर अब कड़ी कार्रवाई होगी। जिलाधिकारी सविन बंसल ने चेतावनी दी है कि अगर किसी ने एलपीजी की कालाबाजारी की कोशिश की तो उसे सीधा जेल भेजा जाएगा।

अधिकारियों के साथ बैठक के बाद दिए निर्देश

गुरुवार को देहरादून कलेक्ट्रेट स्थित ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित बैठक में डीएम ने तेल कंपनियों और गैस एजेंसी संचालकों को सख्त निर्देश दिए कि गैस वितरण में किसी भी तरह की अनियमितता, अवैध स्टॉक, बिचौलियों की संलिप्तता या अवैध रिफिलिंग मिलने पर संबंधित गैस एजेंसी को सील किया जाएगा। डीएम सविन बंसल ने साफ किया है कि ऐसे मामलों में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत मुकदमा दर्ज कर दोषियों को सीधे जेल भेजा जाएगा।

प्रशासन ने जारी किया Helpline no.

डीएम के निर्देश पर एलपीजी गैस से जुड़ी शिकायतों के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। नागरिक 1077, 0135-2626066, 0135-2726066 और व्हाट्सएप नंबर 7534826066 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। एडीएम के निर्देशन में जिला पूर्ति अधिकारी और तेल कंपनियों के प्रतिनिधि प्रतिदिन एक घंटे कंट्रोल रूम में बैठकर शिकायतों और सोशल मीडिया इनपुट का निस्तारण करेंगे।बैठक में बताया गया कि एक बार गैस बुकिंग के बाद 25 दिन का लॉक-इन समय रहेगा और इसके बाद ही दूसरी बुकिंग संभव होगी। डीएम ने एजेंसियों को उपभोक्ताओं को बल्क एसएमएस और फ्लेक्सी के माध्यम से इसकी जानकारी देने के निर्देश दिए।
डीएम ने सभी उपजिलाधिकारियों को पुलिस अधिकारियों और पूर्ति निरीक्षकों के साथ गैस एजेंसियों पर छापेमारी करने के निर्देश भी दिए हैं। जिले की सभी 72 गैस एजेंसियों के गोदाम प्रशासन की निगरानी में रखे गए हैं।
जिलाधिकारी ने आम जनता से अपील की है कि गैस को लेकर किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और समस्या होने पर कंट्रोल रूम में शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने आश्वस्त किया कि जिले में गैस की पर्याप्त उपलब्धता है और प्रशासन पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

विकल्प रहित संकल्प के साथ कार्य कर रही सरकार – सीएम धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य सरकार “विकल्प रहित संकल्प” के साथ उत्तराखंड को समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर राज्य बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराडीसैंण) में स्थित विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए सीएम धामी ने सरकार की उपलब्धियों, नीतियों और भविष्य की योजनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत देवभूमि के देवी-देवताओं, देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों और उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले आंदोलनकारियों के त्याग और संघर्ष के कारण ही आज उत्तराखंड विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है।

गैरसैंण को बताया उम्मीदों का प्रतीक

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के लिए गैरसैंण केवल भौगोलिक स्थान नहीं बल्कि ये पहाड़ की आकांक्षाओं, उम्मीदों और स्वाभिमान का प्रतीक है। गैरसैंण उस संकल्प का प्रतीक है जिसके लिए उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन चला था। इसलिए सरकार ने अपने कार्यकाल में न केवल गैरसैंण को अपने हृदय में बसाए रखा, बल्कि ये भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि हमारी सरकार की प्रत्येक रीति और नीति में गैरसैंण की छाप हो।

सपने को कर रहे हैं साकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के गठन का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को जाता है, जिन्होंने इस राज्य की नींव रखी। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में राज्य को नई दिशा और गति मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2021 में बाबा केदार की पावन धरा से कहा था कि “21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा।” उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस संकल्प को साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और विकास की योजनाओं को धरातल पर उतारने में जुटी है।

बजट को बताया ऐतिहासिक

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस बार प्रस्तुत बजट कई मायनों में ऐतिहासिक है। यह वर्तमान विधानसभा का अंतिम पूर्णकालिक बजट होने के साथ-साथ राज्य के आगामी विकास की दिशा तय करने वाला दस्तावेज भी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत बजट का आकार 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपये है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं है, बल्कि राज्य के सवा करोड़ लोगों की आकांक्षाओं और उम्मीदों का प्रतिबिंब है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में मातृशक्ति के सम्मान, युवाओं के उत्थान, किसानों के कल्याण, विज्ञान एवं नवाचार के विकास, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पर्यटन के विस्तार जैसे सभी क्षेत्रों में संतुलित विकास का प्रयास किया गया है।

सिर्फ घोषणाएं नहीं, जमीन पर उतरेंगी योजनाएं

मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उनकी सरकार केवल घोषणाएं नहीं करती बल्कि उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा भी करती है। उन्होंने बताया कि मुख्यसेवक के रूप में की गई 3885 घोषणाओं में से 2408 घोषणाओं को धरातल पर उतारा जा चुका है और शेष पर तेजी से काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं बल्कि उन्हें परिणामों में बदलना है, ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।

तेज हुई आर्थिक प्रगति की रफ्तार

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राज्य की जीएसडीपी में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और प्रति व्यक्ति आय में लगभग 41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य बजट का आकार भी 60 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इसके साथ ही निवेश, उद्योग और पर्यटन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

उद्योगों की संख्या में इजाफा

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार ने रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए 30 से अधिक नई नीतियां लागू की हैं। इसके परिणामस्वरूप राज्य में 20 हजार से अधिक नए उद्योग स्थापित हुए हैं और स्टार्टअप की संख्या 700 से बढ़कर लगभग 1750 हो गई है। उन्होंने कहा कि पर्यटन, होटल और होमस्टे क्षेत्र में भी तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। हेली सेवाओं और हेलीपोर्ट की संख्या बढ़ने से भी पर्यटन और कनेक्टिविटी को नई गति मिली है।

नकल माफिया, भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने राज्य में नकल माफिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है, जिसके बाद भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार के मामलों में आईएएस और पीसीएस स्तर के अधिकारियों सहित 200 से अधिक लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

UCC से मिले अधिकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने कई ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय लिए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की गई है। उन्होंने कहा कि इस कानून के माध्यम से महिलाओं को समान अधिकार मिले हैं और समाज में समानता तथा न्याय की भावना को मजबूती मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने राज्य की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए सख्त भू-कानून और धर्मांतरण विरोधी कानून जैसे कदम भी उठाए हैं।

किसानों और महिलाओं के लिए नई योजनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। किसानों को तीन लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है और कृषि उपकरणों पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं और प्रदेश की करीब 1 लाख 70 हजार महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं। युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए भी कई योजनाएं लागू की गई हैं।

पर्यटन और संस्कृति को मिल रहा बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए धार्मिक, साहसिक, ईको-टूरिज्म और वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि केदारखंड और मानसखंड मंदिरों के विकास, शीतकालीन यात्रा, फिल्म पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से राज्य की पहचान वैश्विक स्तर पर मजबूत हो रही है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन स्थापित करते हुए उत्तराखंड का समग्र और सतत विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि सरकार का “विकल्प रहित संकल्प” है कि अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचे, युवाओं को रोजगार मिले, किसानों की आय बढ़े और उत्तराखंड देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि जनता के सहयोग और सरकार की प्रतिबद्धता के बल पर उत्तराखंड आने वाले वर्षों में विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।

कैन प्रोटेक्ट फाउंडेशन ने 150 महिलाओं को किया कैंसर के प्रति जागरूक

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देहरादून। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, देश की विख्यात महिला रोग विशेषज्ञ और कैन प्रोटेक्ट फाउंडेशन (Can Protect Foundation) की अध्यक्षा डॉ. सुमिता प्रभाकर (Dr. Sumita Prabhakar) के नेतृत्व में महिलाओं के स्वास्थ्य को समर्पित दो विशेष वेबिनार आयोजित किए गए। इन सत्रों का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को जानलेवा बीमारियों, विशेष रूप से स्तन कैंसर (Breast Cancer) और गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (Cervical Cancer) के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना था।

cancer awareness webinar dr sumita prabhakar participants breast cancer awareness webinar by dr sumita prabhakar

कैंसर से बचाव का मूल मंत्र: डॉ. सुमिता प्रभाकर

वेबिनार को संबोधित करते हुए डॉ. सुमिता प्रभाकर ने कहा कि जागरूकता ही कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने विस्तार से जानकारी दी कि कैसे महिलाएं अपने शरीर में होने वाले शुरुआती परिवर्तनों को पहचान कर समय पर उपचार ले सकती हैं। डॉ. प्रभाकर ने ‘स्वयं स्तन परीक्षण’ (SBE) की सही तकनीक सिखाई और महिलाओं को नियमित अंतराल पर अपनी जांच करने के लिए प्रेरित किया।

गर्भाशय ग्रीवा कैंसर और टीकाकरण पर विशेष चर्चा

सत्र के दौरान डॉ. सुमिता प्रभाकर ने गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (Cervical Cancer) के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि यह कैंसर उचित टीकाकरण (Vaccination) और नियमित पैप स्मीयर (Pap Smear) जांच के जरिए पूरी तरह से रोका जा सकता है। महिलाओं को अपनी व्यक्तिगत स्वच्छता और समय-समय पर डॉक्टरी परामर्श की अहमियत समझाई गई।

CanApp: डिजिटल तकनीक से स्वास्थ्य की निगरानी

कैन प्रोटेक्ट फाउंडेशन की ओर से उनके विशेष डिजिटल टूल ‘CanApp’ के उपयोग पर भी प्रकाश डाला गया। डॉ. प्रभाकर ने बताया कि:

  • यह मोबाइल एप्लीकेशन महिलाओं को स्तन परीक्षण की विधि स्टेप-बाय-स्टेप सिखाता है।

  • इसके माध्यम से महिलाएं किसी भी असामान्य लक्षण की पहचान स्वयं कर सकती हैं और समय पर जरूरी चिकित्सकीय कदम उठा सकती हैं।

participants breast cancer awareness webinar by dr sumita prabhakar

150 महिलाओं की सक्रिय भागीदारी

इस डिजिटल स्वास्थ्य अभियान में कुल 150 महिलाओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में संचालित किया गया ताकि अधिक से अधिक महिलाओं तक यह जानकारी पहुँच सके। प्रतिभागियों ने डॉ. सुमिता प्रभाकर से सीधे संवाद किया और अपने स्वास्थ्य संबंधी सवालों के संतोषजनक जवाब प्राप्त किए।

कैन प्रोटेक्ट फाउंडेशन का यह प्रयास महिलाओं को न केवल जागरूक कर रहा है, बल्कि उन्हें अपने स्वास्थ्य की जिम्मेदारी स्वयं उठाने के लिए सशक्त भी बना रहा है।

Kharmas 2026: शुभ कार्यों पर ‘ब्रेक’: जानें कब से लग रहा है खरमास?

Kharmas 2026: हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में समय की गणना का विशेष महत्व है। इन्हीं गणनाओं में से एक है ‘खरमास’, जिसे मलमास भी कहा जाता है। साल 2026 में खरमास का आगाज़ होने वाला है, जिसके साथ ही सभी मांगलिक कार्यों पर कुछ समय के लिए विराम लग जाएगा। इस लेख में खरमास 2026 की तिथियों, नियमों और इसके पीछे की पौराणिक कथा का विस्तृत विवरण दिया गया है:

Kharmas 2026: थमेंगे मांगलिक कार्य, जानें नियम और पौराणिक रहस्य

भारतीय संस्कृति में किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले ‘शुभ मुहूर्त’ देखने की प्राचीन परंपरा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहों की स्थिति हमारे जीवन और कार्यों की सफलता को गहराई से प्रभावित करती है। साल 2026 में 15 मार्च से एक ऐसी अवधि शुरू हो रही है, जिसे शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है। इसे हम ‘खरमास’ या ‘मलमास’ के नाम से जानते हैं।

Kharmas 2026: मुख्य तिथियां और समय

इस वर्ष मार्च के महीने में सूर्य अपनी राशि परिवर्तन करेंगे, जिससे खरमास का प्रारंभ होगा।

  • प्रारंभ तिथि: 15 मार्च, 2026
  • समाप्ति तिथि: 13 अप्रैल, 2026
  • कुल अवधि: पूरे 30 दिन
  • 13 अप्रैल को जब सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे (जिसे मेष संक्रांति कहा जाता है), तब खरमास समाप्त होगा और पुनः विवाह व अन्य मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त शुरू होंगे।

साल में दो बार लगता है खरमास का ‘ब्रेक’

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य देव जब भी बृहस्पति की राशियों—धनु और मीन—में प्रवेश करते हैं, तब खरमास लगता है। पूरे एक वर्ष में दो बार ऐसा मौका आता है:

  • प्रथम खरमास: यह मध्य दिसंबर से शुरू होकर मध्य जनवरी (मकर संक्रांति) तक रहता है।
  • द्वितीय खरमास: यह मध्य मार्च से शुरू होकर मध्य अप्रैल (मेष संक्रांति) तक रहता है।

मांगलिक कार्यों पर प्रतिबंध: क्या न करें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरमास (Kharmas) के दौरान सूर्य की स्थिति कमजोर और ‘मलिन’ हो जाती है, इसलिए इस अवधि में किए गए मांगलिक कार्य शुभ फल प्रदान नहीं करते। इस दौरान निम्नलिखित कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है:

  • विवाह और सगाई: Kharmas की इस अवधि में विवाह करना वर्जित है क्योंकि माना जाता है कि इससे वैवाहिक जीवन में भावनात्मक और शारीरिक सुख की कमी रह सकती है।
  • गृह निर्माण और प्रवेश: नए घर की नींव रखना या नए घर में प्रवेश (Griha Pravesh) करना इस महीने में अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसे घर में रहने वालों को सुख-शांति नहीं मिल पाती।
  • मुंडन और संस्कार: बच्चों के मुख्य संस्कार जैसे मुंडन, नामकरण और यज्ञोपवीत (जनेऊ) Kharmas में नहीं किए जाते।
  • व्यापार और निवेश: नए व्यापार का आरंभ या बड़े वित्तीय निवेश के लिए Kharmas का समय उपयुक्त नहीं है।
  • संपत्ति और वाहन खरीद: नई कार, जमीन या सोने-चांदी की बड़ी खरीदारी से बचना चाहिए।

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क्यों रुक जाते हैं शुभ कार्य? (ज्योतिषीय विश्लेषण)

देवगुरु बृहस्पति को शुभ कार्यों का मुख्य कारक माना जाता है। जब सूर्य अपने मित्र गुरु की राशि (मीन या धनु) में आते हैं, तो वे गुरु के प्रभाव को दबा देते हैं। इसे ‘गुरु का आदित्य दोष’ भी कहा जाता है। इस स्थिति में सूर्य का स्वभाव उग्र हो जाता है और उनकी सकारात्मक ऊर्जा कम हो जाती है। चूंकि किसी भी शुभ कार्य के लिए सूर्य और गुरु दोनों का मजबूत होना अनिवार्य है, इसलिए खरमास में इन कार्यों पर पाबंदी लग जाती है।

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साधना और पूजा का विशेष महत्व

भले ही kharmas का यह समय मांगलिक कार्यों के लिए ठीक न हो, लेकिन आध्यात्मिक प्रगति के लिए यह महीना सर्वश्रेष्ठ है। शास्त्रों में कहा गया है कि Kharmas में की गई पूजा का फल कई गुना बढ़कर मिलता है।

  • सूर्य उपासना: इस पूरे माह में सूर्य देव को तांबे के पात्र से जल (अर्घ्य) देना अत्यंत लाभकारी होता है।
  • मंत्र जाप: ‘ओम सूर्याय नमः’ या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से कुंडली में सूर्य मजबूत होता है।
  • दान-पुण्य: जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र और गुड़ का दान करना चाहिए।

Kharmas की पौराणिक कथा: सूर्य के रथ और गधों का रहस्य

खरमास के पीछे एक बहुत ही रोचक पौराणिक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि भगवान सूर्य देव अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड की निरंतर परिक्रमा करते हैं। सूर्य को कहीं भी रुकने की अनुमति नहीं है।

एक बार निरंतर दौड़ने के कारण उनके घोड़े थक गए और प्यास से व्याकुल हो गए। घोड़ों की दयनीय हालत देख सूर्य देव का मन द्रवित हो गया। वे उन्हें एक तालाब के किनारे ले गए, लेकिन उन्हें यह आभास हुआ कि यदि रथ रुक गया तो सृष्टि में अनहोनी हो जाएगी। तभी उन्होंने देखा कि तालाब के पास दो खर (गधे) खड़े थे। सूर्य देव ने घोड़ों को विश्राम के लिए छोड़ा और रथ में उन गधों को जोड़ दिया।

गधों की गति घोड़ों जैसी नहीं थी, जिस कारण रथ की रफ्तार बहुत धीमी हो गई। पूरे एक माह तक गधों ने रथ खींचा और इस दौरान घोड़ों ने अपनी थकान मिटाई। गधों के कारण रथ की इस धीमी और सुस्त गति की अवधि को ही ‘खरमास’ कहा गया। जब एक माह बाद चक्र पूरा हुआ, तो घोड़े पुनः रथ में लौटे और सूर्य की गति फिर से तेज हो गई।

खरमास का महीना हमें रुकने, सोचने और आत्म-चिंतन करने का अवसर देता है। यह बाहरी चमक-धमक और उत्सवों के बजाय आंतरिक शुद्धि और ईश्वर भक्ति का समय है। 15 मार्च से 13 अप्रैल 2026 तक संयम का पालन करना और सूर्य देव की आराधना करना सुखद भविष्य की नींव रख सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर काशी विश्वनाथ धाम की खास पहल: महिलाओं को मिलेगी वीआईपी सुविधा

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वाराणसी: धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च, 2026) को बेहद खास तरीके से मनाया जा रहा है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने नारी शक्ति के सम्मान में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए महिला श्रद्धालुओं के लिए ‘विशेष दर्शन’ की घोषणा की है। मंदिर प्रशासन का उद्देश्य इस पावन अवसर पर बाबा विश्वनाथ के दरबार में आने वाली महिलाओं को सुगम, सुरक्षित और गरिमापूर्ण अनुभव प्रदान करना है।

गेट नंबर 4-बी से ‘फ्री एंट्री’ की सौगात

श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, विश्व भूषण द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, 8 मार्च को मंदिर आने वाली सभी महिला श्रद्धालुओं को विशेष सुविधा दी जाएगी। महिलाओं को मंदिर परिसर के गेट नंबर 4-बी से प्रवेश दिया जाएगा।

निशुल्क प्रवेश: इस विशेष व्यवस्था के तहत महिलाओं को किसी भी प्रकार का ‘सुगम दर्शन’ टिकट या शुल्क देने की आवश्यकता नहीं होगी।

समान अधिकार: यह सुविधा केवल वाराणसी की निवासियों के लिए ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया के किसी भी कोने से आने वाली हर महिला श्रद्धालु के लिए उपलब्ध रहेगी।

‘दिव्य नारी शक्ति’ का सम्मान

मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस पहल का मूल उद्देश्य ‘नारी शक्ति’ के महत्व को स्वीकार करना और उन्हें महादेव के दरबार में वीआईपी अनुभव प्रदान करना है। आमतौर पर त्योहारों और विशेष दिनों में होने वाली भारी भीड़ को देखते हुए, महिलाओं के लिए अलग कतार और मुफ्त प्रवेश का यह निर्णय उनके दर्शन को बाधा रहित बनाएगा।

माताओं और नन्हे बच्चों के लिए विशेष प्राथमिकता

इस वर्ष की व्यवस्था में संवेदनशीलता का खास ध्यान रखा गया है। मंदिर प्रशासन ने उन महिलाओं को प्राथमिकता (Priority) देने का निर्णय लिया है जो अपनी गोद में छोटे बच्चों को लेकर दर्शन के लिए आएंगी।

चाहे बच्चा लड़का हो या लड़की, यदि मां के साथ छोटा शिशु है, तो उन्हें कतार में प्रतीक्षा किए बिना सीधे प्रवेश और दर्शन में वरीयता दी जाएगी। यह कदम उन माताओं की सुविधा के लिए उठाया गया है जिन्हें लंबी लाइनों में खड़े होने में कठिनाई होती है।

स्थानीय निवासियों के लिए समय सारणी यथावत

जहाँ एक ओर महिलाओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है, वहीं वाराणसी के स्थानीय निवासियों के लिए पहले से निर्धारित ‘आरक्षित दर्शन’ के समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है। स्थानीय लोगों के लिए तय समय सीमा निम्नलिखित रहेगी:

सुबह: 4:00 बजे से 5:00 बजे तक।

शाम: 4:00 बजे से 5:00 बजे तक। इन निर्धारित घंटों में केवल वाराणसी के आधार कार्ड धारक स्थानीय निवासियों को ही प्रवेश दिया जाता है, और महिला दिवस के दिन भी यह व्यवस्था सुचारू रूप से जारी रहेगी।

प्रशासन की तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था

मुख्य कार्यकारी अधिकारी के आदेश के बाद, मंदिर परिसर में सुरक्षा कर्मियों और स्वयंसेवकों (Volunteers) को विशेष निर्देश दिए गए हैं। गेट नंबर 4-बी पर अतिरिक्त महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई है ताकि भीड़ प्रबंधन सही ढंग से हो सके। 6 मार्च 2026 को जारी किए गए इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने इस घोषणा के साथ ही समस्त विश्व की महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। प्रशासन ने प्रार्थना की है कि भगवान विश्वनाथ का आशीर्वाद और दिव्य नारी शक्ति की कृपा संपूर्ण मानवता पर बनी रहे। काशी की यह पहल अन्य धार्मिक स्थलों के लिए भी एक मिसाल पेश करती है, जहाँ आस्था और सम्मान का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।

“जब जाएंगे भाजपाई, तभी घटेगी महंगाई”: अखिलेश यादव का केंद्र पर तीखा प्रहार, रूस को बताया..

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लखनऊ/नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए एक नया नारा बुलंद किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश में बढ़ती महंगाई का एकमात्र समाधान सत्ता परिवर्तन है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत की भूमिका की चर्चा करते हुए उन्होंने रूस के साथ भारत के पुराने संबंधों को याद किया।

आज ही LPG पर 60 रुपये और बढ़ गए- अखिलेश यादव

अखिलेश यादव ने अपने संबोधन की शुरुआत एक तुकबंदी वाले नारे से की— “जब जाएंगे भाजपाई, तभी घटेगी महंगाई।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने आम जनता की जेब पर डाका डाला है। उन्होंने कहा, “जहां सरकार एक तरफ टैक्स लगा रही है, वहीं दूसरी तरफ महंगाई बढ़ती चली जा रही है. आज ही LPG पर 60 रुपये और बढ़ गए. उन्होंने कहा कि कुछ परिस्थितियों की वजह से महंगाई करनी पड़ रही है, बाद में कम करेंगे, लेकिन एक बार जो चीज महंगी हो गई वह बाद में कम नहीं होती.”

  • ईंधन की कीमतें: उन्होंने तर्क दिया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम आम आदमी की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं।
  • खाद्य पदार्थ: दाल, तेल और सब्जियों की बढ़ती कीमतों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ‘डबल इंजन’ की सरकार मध्यम वर्ग और गरीबों की थाली से भोजन छीन रही है।

रूस के साथ ऐतिहासिक संबंधों की बात

विदेश नीति के मुद्दे पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने रूस (पूर्व सोवियत संघ) के साथ भारत के रिश्तों को एक नई दिशा में परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि रूस भारत का एक “पुराना और भरोसेमंद मित्र” है जिसने कठिन समय में हमेशा भारत का साथ दिया है।

“रिश्ते रातों-रात नहीं बनते, बल्कि दशकों के भरोसे पर टिके होते हैं। भारत और रूस की दोस्ती सामरिक और सांस्कृतिक रूप से बहुत गहरी है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि अखिलेश का यह बयान उस समय आया है जब वैश्विक स्तर पर गुटबाजी तेज है और भारत अपनी ‘स्वतंत्र विदेश नीति’ पर कायम रहने की कोशिश कर रहा है। सपा प्रमुख ने संकेत दिया कि वर्तमान सरकार को ऐतिहासिक मित्रों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।

मौजूदा आर्थिक परिदृश्य और बेरोजगारी का मुद्दा

अखिलेश यादव ने केवल महंगाई ही नहीं, बल्कि बेरोजगारी को भी भाजपा की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि:

  • पेपर लीक और भर्ती: उत्तर प्रदेश में हाल के समय में हुए पेपर लीक मामलों को उन्होंने युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया।
  • औद्योगिक विकास: उन्होंने दावा किया कि निवेश के नाम पर केवल बड़े आयोजन हो रहे हैं, लेकिन धरातल पर कारखाने और रोजगार नजर नहीं आ रहे हैं।

विपक्ष की एकजुटता और 2027 की रणनीति

अखिलेश यादव का यह हमला केवल तात्कालिक नहीं है, बल्कि यह आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी का हिस्सा भी है। वे लगातार पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर जोर दे रहे हैं। उनका मानना है कि यदि सामाजिक न्याय और आर्थिक राहत को मुख्य मुद्दा बनाया जाए, तो भाजपा के “विकास के दावों” की हवा निकल जाएगी।

फाल्गुन Purnima 2026: भूलकर भी 3 मार्च को न रखें पूर्णिमा व्रत! शास्त्र सम्मत सही तिथि यहाँ देखें

Purnima 2026: हिंदू धर्म में फाल्गुन मास की पूर्णिमा का विशेष आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इसी दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक ‘होलिका दहन’ किया जाता है और अगले दिन रंगों का त्योहार होली मनाई जाती है। हालांकि, वर्ष 2026 में तिथियों के फेर और चंद्र ग्रहण के चलते फाल्गुन पूर्णिमा के व्रत और होली की तारीखों को लेकर भक्तों के बीच काफी भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

शास्त्रों और पंचांग की गणना के अनुसार, इस बार पूर्णिमा तिथि दो अलग-अलग कैलेंडर दिनों में व्याप्त हो रही है। आइए विस्तार से समझते हैं कि व्रत कब रखना है और चंद्र ग्रहण का इस पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

तिथियों का गणित: कब शुरू और कब समाप्त होगी Purnima?

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 2 मार्च 2026 को शाम 05:56 बजे से होगा और इसका समापन 3 मार्च 2026 को शाम 05:08 बजे पर होगा।

शास्त्रों का नियम कहता है कि पूर्णिमा का व्रत उसी दिन रखा जाना चाहिए, जिस दिन सूर्यास्त के बाद पूर्णिमा तिथि में चंद्रमा का उदय हो रहा हो। चूंकि 3 मार्च की शाम को पूर्णिमा तिथि चंद्रमा निकलने से पहले ही समाप्त हो रही है, इसलिए 2 मार्च 2026 को ही व्रत रखना सबसे उचित और शास्त्रसम्मत माना गया है। इसी रात चंद्र दर्शन करना भी फलदायी होगा।

चंद्र ग्रहण और सूतक काल का साया

इस वर्ष असमंजस का एक बड़ा कारण 3 मार्च 2026 को लगने वाला चंद्र ग्रहण है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, ग्रहण के कारण सूतक काल मान्य होगा। सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और किसी भी प्रकार के मांगलिक या धार्मिक अनुष्ठान वर्जित होते हैं। यही कारण है कि विद्वानों ने 3 मार्च के बजाय 2 मार्च को ही धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करने की सलाह दी है। तिथियों के इसी बदलाव का सीधा असर होली के उत्सव पर भी पड़ा है।

होलिका दहन और रंगों वाली होली की सटीक तारीख

  • होलिका दहन (2 मार्च 2026): चूंकि पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम को शुरू हो रही है, इसलिए होलिका दहन इसी रात किया जाएगा।
  • धुलेंडी/रंगों वाली होली (4 मार्च 2026): आमतौर पर होलिका दहन के अगले दिन होली खेली जाती है, लेकिन 3 मार्च को चंद्र ग्रहण और सूतक काल होने के कारण रंगों का उत्सव 4 मार्च 2026 को मनाया जाएगा।

फाल्गुन पूर्णिमा का धार्मिक महत्व और लाभ

  • फाल्गुन पूर्णिमा केवल एक तिथि नहीं, बल्कि सौभाग्य प्राप्ति का द्वार मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा का विधान है।
  • आर्थिक स्थिरता: मां लक्ष्मी की कृपा से घर में धन-धान्य की कमी नहीं होती और कर्ज से मुक्ति मिलती है।
  • मानसिक शांति: चंद्रमा मन का कारक है। इस दिन व्रत और चंद्र पूजन करने से कुंडली में ‘चंद्र दोष’ शांत होता है और मानसिक तनाव दूर होता है।
  • पारिवारिक उन्नति: संतान सुख और परिवार की खुशहाली के लिए महिलाएं यह व्रत विशेष रूप से रखती हैं।
  • अधूरी इच्छाओं की पूर्ति: मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से किया गया फाल्गुन व्रत हर अधूरी मनोकामना को पूर्ण करता है।

कैसे करें पूजा? जानें संपूर्ण विधि (Puja Vidhi)

  • यदि आप फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत रख रहे हैं, तो इन चरणों का पालन करें:
  • संकल्प: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिले पानी से स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
  • स्थापना: एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें तिलक, पीले फूल, फल और नैवेद्य अर्पित करें।
  • मंत्र और कथा: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें और फाल्गुन पूर्णिमा की व्रत कथा सुनें।
  • चंद्र पूजन: रात में जब चंद्रमा उदय हो, तब एक लोटे में जल, कच्चा दूध और अक्षत (चावल) मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें।
  • पारण: होलिका दहन के बाद या चंद्र पूजन के पश्चात सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत खोलें। अगले दिन जरूरतमंदों को दान देना न भूलें, क्योंकि इसके बिना व्रत पूर्ण नहीं माना जाता।

भले ही कैलेंडर में तारीखें उलझी हुई नजर आएं, लेकिन शास्त्र स्पष्ट हैं। 2 मार्च भक्ति और व्रत का दिन है, 3 मार्च ग्रहण के संयम का और 4 मार्च उल्लास के रंगों का। इस प्रकार योजना बनाकर आप न केवल अपनी पूजा को सफल बना सकते हैं, बल्कि ग्रहण के दोषों से भी बच सकते हैं।

40 के बाद महिलाओं को जरूर करवाने चाहिए ये हेल्थ चेकअप, देख लीजिए पूरी लिस्ट

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40 की उम्र पार करना जीवन का एक नया पड़ाव है। इस समय तक महिलाएं परिवार, करियर और सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाते-निभाते अक्सर अपनी सेहत को पीछे छोड़ देती हैं। लेकिन सच यह है कि 40 के बाद शरीर में हार्मोनल बदलाव, मेटाबॉलिज्म की धीमी गति और हड्डियों की कमजोरी जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं। आइए समझते हैं कि क्या हैं 40 के बाद महिलाओं के लिए जरूरी हेल्थ चेकअप ?

इसीलिए इस उम्र में नियमित हेल्थ चेकअप करवाना बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि किसी भी बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सके और सही इलाज शुरू किया जा सके।

1. ब्लड प्रेशर और हार्ट चेकअप

दिल की बीमारियां महिलाओं में तेजी से बढ़ रही हैं, खासकर 40 के बाद।

क्यों जरूरी है?

  • हाई ब्लड प्रेशर अक्सर बिना लक्षण के होता है।
  • कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है।

कौन से टेस्ट करवाएं?

  • ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग
  • लिपिड प्रोफाइल
  • ECG
  • जरूरत पड़ने पर 2D Echo

साल में एक बार हार्ट चेकअप जरूर करवाएं।

2. ब्लड शुगर टेस्ट (डायबिटीज जांच)

40 के बाद टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।

जरूरी टेस्ट:

  • फास्टिंग ब्लड शुगर
  • HbA1c

अगर परिवार में डायबिटीज का इतिहास है तो हर 6 महीने में जांच बेहतर है।महिलाओं में थायरॉइड की समस्या आम है।

लक्षण:

  • वजन का अचानक बढ़ना या घटना
  • बाल झड़ना
  • थकान

टेस्ट:

  • TSH
  • T3
  • T4

4. मैमोग्राफी (ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग)

40 की उम्र के बाद ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

  • हर 1–2 साल में मैमोग्राफी करवाना चाहिए।
  • हर महीने सेल्फ-ब्रेस्ट एग्जाम की आदत डालें।

शुरुआती जांच से इलाज आसान और सफल हो सकता है।

5. पैप स्मीयर और पेल्विक एग्जाम

सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए यह जांच बेहद जरूरी है।

  • हर 3 साल में पैप स्मीयर टेस्ट
  • जरूरत पड़ने पर HPV टेस्ट

6. बोन डेंसिटी टेस्ट

मेनोपॉज के बाद हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।

DEXA स्कैन से हड्डियों की मजबूती की जांच होती है।
कैल्शियम और विटामिन D की कमी का पता भी लगाया जाता है।

7. लिवर और किडनी फंक्शन टेस्ट

अनहेल्दी लाइफस्टाइल और दवाइयों के कारण इन अंगों पर असर पड़ सकता है।

  • LFT
  • KFT

साल में एक बार ये टेस्ट करवाना बेहतर है।

8. विटामिन और न्यूट्रिएंट्स जांच

महिलाओं में अक्सर इनकी कमी पाई जाती है:

  • विटामिन D
  • विटामिन B12
  • आयरन

इनकी कमी से कमजोरी और एनीमिया हो सकता है।

9. आंखों और दांतों की जांच

  • 1–2 साल में एक बार आंखों की जांच
  • साल में एक बार डेंटल चेकअप

ग्लूकोमा और मसूड़ों की बीमारी का खतरा उम्र के साथ बढ़ सकता है।

10. फुल बॉडी चेकअप

साल में एक बार फुल बॉडी चेकअप करवाना समझदारी है। इससे शरीर की संपूर्ण स्थिति का आकलन हो जाता है।

40 के बाद हेल्थ चेकअप क्यों हैं जरूरी?

  • बीमारियों की समय रहते पहचान
  • इलाज में आसानी
  • मेडिकल खर्च में कमी
  • जीवन की बेहतर गुणवत्ता

हेल्दी रहने के लिए अतिरिक्त टिप्स

  • रोज 30 मिनट एक्सरसाइज
  • संतुलित आहार
  • पर्याप्त नींद
  • तनाव कम करने के लिए योग और मेडिटेशन

40 की उम्र के बाद खुद को लेकर रहें सतर्क

40 की उम्र के बाद महिलाओं को अपनी सेहत को प्राथमिकता देनी चाहिए। नियमित हेल्थ चेकअप सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक सुरक्षा कवच है जो आपको आने वाले वर्षों में स्वस्थ और सक्रिय जीवन जीने में मदद करता है।