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उत्तराखंड में शुरू हुआ जनगणना 2027, राज्यपाल और सीएम धामी ने ऐसे की शुरुआत

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उत्तराखंड में शुक्रवार से ‘जनगणना 2027’ के प्रथम चरण का औपचारिक शुभारंभ हो गया है। इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रि) गुरमीत सिंह तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने डिजिटल माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) प्रक्रिया की शुरुआत की।

डिजिटल इंडिया में पहली बार मिल रही ये खास सुविधा

कार्यक्रम के तहत आज से प्रदेश में ‘मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (House listing & Housing Census)’ का कार्य प्रारंभ हो गया है। डिजिटल इंडिया के अंतर्गत पहली बार नागरिकों को यह सुविधा प्रदान की गई है कि वे जनगणना अधिकारी के घर आने से पूर्व स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल (se.census.gov.in) पर दर्ज कर सकते हैं। यह स्व-गणना सुविधा 10 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 तक उपलब्ध रहेगी। इसके पश्चात 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक गणना कर्मी घर-घर जाकर डेटा संकलन करेंगे।

‘राज्य के विकास की आधारशिला’

इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि राज्य के विकास की आधारशिला है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे स्व-गणना के माध्यम से इस महत्वपूर्ण अभियान में सक्रिय सहभागिता करें, जिससे डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना से प्राप्त सटीक आंकड़े राज्य सरकार को बेहतर नीतियां बनाने और अंतिम छोर तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में सहायक होंगे। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे जनगणना शुभंकर ‘प्रगति’ और ‘विकास’ के साथ जुड़कर इस अभियान को सफल बनाएं। कैबिनेट मंत्री, जनगणना, उत्तराखंड शासन ने भी प्रदेश की जनता से इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य में बढ़-चढ़कर भागीदारी करने की अपील की।

जनगणना 2027 में क्या क्या पूछा जाएगा ?

प्रथम चरण में नागरिकों को मकानों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं (जैसे बिजली, पानी, शौचालय आदि) तथा संपत्तियों से संबंधित 33 प्रश्नों के उत्तर देने होंगे। स्व-गणना करने वाले नागरिकों को एक विशेष SE ID प्राप्त होगी, जिसे गणना कर्मी के आगमन पर साझा करना अनिवार्य होगा। इस कार्य के लिए प्रदेश भर में लगभग 30,000 प्रगणक एवं पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं। उत्तराखंड शासन ने सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे जनगणना कार्य में लगे अधिकारियों का पूर्ण सहयोग करें तथा स्व-गणना सुविधा का अधिकतम उपयोग करते हुए राज्य के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

इस अवसर पर भारत सरकार, गृह मंत्रालय की जनगणना निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव, उत्तराखंड शासन से जनगणना सचिव दीपक कुमार, संयुक्त निदेशक एस. एस. नेगी, उप निदेशक प्रवीण कुमार, तान्या सेठ, आर. के. बनवारी तथा देवाशीष सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

चार धाम यात्रा में स्वास्थ्य महकमा रहेगा अलर्ट, मंत्री सुबोध उनियाल ने अधिकारियों को दिए निर्देश

उत्तराखंड की चार धाम यात्रा में स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त रखने के लिए इस बार सरकार पूरी तैयारी में लगी है। खुद मंत्री सुबोध उनियाल चार धाम यात्रा में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। इस बार मंत्री सुबोध उनियाल ने व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने में असफल रहने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

चार धाम यात्रा के मद्देनजर बैठक

सूबे के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने आगामी चारधाम यात्रा के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ गहन समीक्षा बैठक की है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य परीक्षण हेतु स्थापित परीक्षण केन्द्रों का निरीक्षण कर उन्हें उचित सुविधाओं से परिपूर्ण किया जाए साथ ही इन केन्द्रों पर स्थित एम्बुलेंस की फिटनेस का भी परीक्षण कर लिया जाए। उन्होंने चारधाम कन्ट्रोल रूम पर ईसीजी की व्यवस्था हेतु पोर्टेबल मशीनों की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिये। मंत्री ने कहा कि, इस चारधाम यात्रा से हम श्री बद्रीनाथ तथा श्री केदारनाथ स्थित हॉस्पिटल का परिचालन शुरू करने जा रहे हैं। मंत्री ने जांच केन्द्रों की संख्या बढ़ाने के भी निर्देश दिये साथ ही सीएमओ को एलर्ट मोड पर रहकर कार्य करने के निर्देश दिये।

‘रेफरल वाला खेल अब खत्म करना होगा’

मंत्री सुबोध उनियाल ने जिलेवार स्वास्थ्य उपकरणों की भी जानकारी प्राप्त की। उन्होंने सभी जिलों के सीएमओ को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सफाई के मामले में कोई कोताही नहीं बरती जायेगी। किसी भी तरह की कमी पायी जाने पर सीएमओ की जवाबदेही तय की जायेगी। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल को रेफरल अस्पताल का तगमा खत्म करना होगा। इस संबंध में भी कड़ी कार्यवाही करने की जरूरत हैै। गुणवत्ता के मामले में कोई समझौता नहीं किया जायेगा। मंत्री ने जनपदवार विशेषज्ञ डॉक्टरों की जानकारी प्राप्त करते हुए कहा कि विशेषज्ञ डॉक्टर अपनी विशेषज्ञता के अनुसार अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करें।

मशीनों का दुरुपयोग किया तो होगा एक्शन

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मशीनों का सदुपयोग हो तथा सरकारी पैसे के दुरूपयोग न हो इसके लिए भी कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता मरीज का सम्पूर्ण ईलाज करना है। उन्होंने सभी डॉक्टरों को बेहतर कार्य कर उदाहरण प्रस्तुत करने हेतु निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्गों पर तीर्थयात्रियों को सम्पूर्ण स्वास्थ्य प्रदान करना हमारी प्राथमिकता है।

इस अवसर पर सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे, महानिदेशक सुनीता टम्टा, एमडी मनोज गोयल, निदेशक शिखा जंगपांगी तथा सभी जिलों के सीएमओ एवं अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

CM Dhami news : सीएम धामी ने इन विधानसभाओं में हुए कामकाज का देखा रिपोर्ट कार्ड, अधिकारियों को दी चेतावनी, विकास कार्यों में हीलाहवाली पड़ेगी भारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर राज्य के अलग अलग विधानसभाओं के लिए की गई घोषणाओं की खुद ही समीक्षा कर रहे हैं। सीएम धामी ने सचिवालय में पांच विधानसभाओं के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड देखा है। सीएम ने मीटिंग के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट रूप से संदेश दिया है कि काम में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पांच विधानसभाओं की समीक्षा, समन्वय बनाने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री घोषणाओं के अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र थराली, कर्णप्रयाग, केदारनाथ, रुद्रप्रयाग और देवप्रयाग की समीक्षा की। इस दौरान सीएम धामी (CM Dhami news) ने कहा कि जन समस्याओं का समाधान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जनप्रतिनिधियों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखते हुए अधिकारी आमजन की समस्याओं का समाधान करें। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए। हेली एंबुलेंस की समय पर उपलब्धता और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किए जाएं। निर्माण से संबंधित कार्यों में यदि किसी विभाग द्वारा प्रस्ताव किसी अन्य विभाग को हस्तांतरित किया जाना है, तो उसे शीघ्र भेजा जाए। विलंब करने पर संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय की जाए।

वन विभाग के लंबित प्रकरण अलग से निपटाएं

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विधायकगणों द्वारा बैठक में उठाई गई समस्याओं का संबंधित विभागीय सचिव प्राथमिकता के आधार पर समाधान करें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाओं से संबंधित वन विभाग के स्तर पर लंबित प्रकरणों की अलग से समीक्षा की जाए। उन्होंने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि मानसून से पहले वर्षाकाल की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए व्यापक समीक्षा बैठक आयोजित की जाए। बाढ़ नियंत्रण से संबंधित कार्य समय पर पूर्ण किए जाएं।

चार धाम यात्रा की हो पूरी तैयारी

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगामी चारधाम यात्रा के दृष्टिगत सभी तैयारियां समय पर पूर्ण कर ली जाएं। वाणिज्यिक सिलेंडरों के संबंध में होटल एसोसिएशन के साथ समय-समय पर बैठक कर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए। यात्रा के लिए सभी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाया जाए।

बैठक में कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी, विधायक कर्णप्रयाग अनिल नौटियाल, विधायक थराली भूपाल राम टम्टा, केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल, देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, समेत कई अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तराखंड में IPS अधिकारियों के तबादले, लेडी सिंघम की फील्ड में वापसी

उत्तराखंड में शासन ने IPS अधिकारियों के तबादले किए हैं। शासन ने चार आईपीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। इसमें लेडी सिंघम कही जाने वाली श्वेता चौबे भी शामिल हैं। श्वेता चौबे को लंबे समय के बाद फिर एक बार फील्ड में तैनाती दे दी गई है। श्वेता चौबे को टिहरी जिले का एसएसपी बनाया गया है। फिलहाल वो आरआरबी सेकेंड की सेनानायक का पद संभाल रही थीं। अब इस पद पर विशाखा भदाणे की तैनाती की गई है।

वहीं टिहरी के एसएसपी पद का काम देख रहे आयुष अग्रवाल को एसएसपी कुंभ मेला का काम सौंपा गया है। वहीं योगेंद्र सिंह रावत को पुलिस महानिरीक्षक, कुंभ मेला बनाया गया है।

 

उत्तराखंड में IPS अधिकारियों के तबादले

 

देहरादून गोलीकांड: SSP का सच से सामना, लोग सुनाते रहे, अधिकारी चुप खड़े सुनते रहे

देहरादून के मालसी – जोहड़ी मार्ग पर हुए गोलीकांड में रिटायर्ड ब्रिगेडियर की मौत के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है वहीं लोगों की नाराजगी भी चरम पर है। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल के सामने ही नाराजगी जाहिर की। लोग बोलते रहे और एसएसपी खड़े सुनते रहे।

सीने पर लगी गोली से गई जान

मिली जानकारी के मुताबिक तकरीबन सुबह 6.30 के आसपास रिटायर्ड ब्रिगेडियर वीके जोशी मार्निंग वॉक कर रहे थे। इसी बीच पास से फार्च्यूनर और स्कार्पियो एन गाड़ियां बेहद तेजी से गुजरीं। स्कार्पियो एन में सवार लोगों ने जो गोली फार्च्यूनर के टायर पर मारी वो पास से गुजर रहे वीके जोशी को जाकर लगी। आनन फानन में स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और वीके जोशी को पास के अस्पताल ले गए। वहां डाक्टरों ने उन्हे मृत घोषित कर दिया। उन्हे अस्पताल ले जाने वाले लोगों की माने तो वीके जोशी को सीने में गोली लगी थी और वहां से खून निकल रहा था।

कोई पुलिस वाला झांकने नहीं आता

रिटायर्ड ब्रिगेडियर वीके जोशी को घायल अवस्था में लेकर पास के अस्पताल ले जाने वाले स्थानीय लोगों से मिलने के लिए एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल भी अस्पताल में पहुंचे। यहां उन्हे स्थानीय लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने एसपी और एसएसपी के सामने ही पुलिस की पोल खोल कर रख दी। हॉस्पिटल में चश्मदीदों और पुलिस अधिकारियों के बीच का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इस वीडियो में स्थानीय लोगों की नाराजगी साफ देखी जा सकती है। चश्मदीद बताते हैं कि पूरे इलाके में कभी भी कोई पुलिस वाला नहीं आता। कुछ समय पहले तक एक इंस्पेक्टर आया करते थे लेकिन उनके ट्रांसफर के बाद कोई नहीं दिखा। न ही कोई पिकेट है और न ही कोई जांच होती है।

खुलेआम बिकता है ड्रग्स, दस साल से सत्यापन नहीं

स्थानीय लोगों की माने तो पूरे इलाके में पुलिस की सक्रियता शून्य है। हालात ये हैं कि पूरे इलाके में खुले आम ड्रग्स बेची जा रही है लेकिन पुलिस रोक नहीं पा रही है। यही नहीं चश्मदीद ने एक ऐसी बात बोली कि पुलिस के दावे सिर के बल खड़े हो गए। दरअसल स्थानीय लोगों की माने तो पूरे देहरादून में सबसे अधिक अपार्टमेंट्स उसी इलाके में हैं लेकिन पुलिस ने कोई पिछले दस साल से कोई सत्यापन अभियान ही नहीं चलाया। न ये पता करने की कोशिश की उस इलाके में कौन रह रहा है कौन नहीं।

जिसे चीन की गोली का डर नहीं था वो घर के पास मारा गया

स्थानीय लोगों की माने तो रिटायर्ड ब्रिगेडियर वीके जोशी पीएमओ में भी अपनी सेवाएं दे चुके थे। वो चीन सीमा पर भी तैनात रहे। आर्मी इंटेलीजेंस में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दीं लेकिन कभी उनका बाल बांका नहीं हुआ लेकिन आखिरकार घर के पास ही वो मनबढ़ युवकों की गोली का शिकार हो गए।

देहरादून ब्रेकिंग : सुबह – सुबह आई खौफनाक खबर, रोड रेज में रिटायर्ड ब्रिगेडियर की मौत

देहरादून ब्रेकिंग न्यूज। देहरादून से सुबह – सुबह खौफनाक खबर आई है। देहरादून के राजपुर थाना क्षेत्र के मालसी  इलाके में दो कारों में ओवरटेक करने के दौरान हुए विवाद में हुई फायरिंग में वहां मार्निंग वॉक पर निकले रिटायर्ड ब्रिगेडियर वीके जोशी की मौत हो गई है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। लोगों में गहरी नाराजगी है।

गाड़ी ओवरटेक करने के चक्कर में विवाद, होने लगी फायरिंग

मिली जानकारी के मुताबिक ये पूरा मामला रोड रेज से जुड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि दो एसयूवी कारें स्कॉर्पियो और फॉर्च्यूनर मसूरी मार्ग से मालसी के पास से गुजर रही थीं। इन दोनों कारों में ओवरटेक करने को लेकर विवाद हुआ। इसके बाद एक कार में सवार लोगों ने आगे चल रही दूसरी कार के टायरों को निशाना बना कर गोली चला दी। ये गोली वहां से गुजर रहे मार्निंग वॉक पर निकले रिटायर्ड ब्रिगेडियर वीके जोशी को लगी और वो गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

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घटना के बाद हड़कंप

इस घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। मौके पर पुलिस के आला अधिकारी भी पहुंचे। खुद एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल ने भी मौके का मुआयना किया। हादसे के बाद इस रोड रेज मेंफॉर्च्यूनर कार वहीं पास की एक इमारत के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई जबकि स्कॉर्पियो N कार सवार मय गाड़ी वहां से भागने में कामयाब रहे। पुलिस ने इस घटना के बाद पूरे शहर में नाकाबंदी शुरू कर दी है। कार को तलाश करने की कोशिश की जा रही है।

धामी कैबिनेट में विभागों का हुआ बंटवारा, देखिए आबकारी और खनन किसके पास

उत्तराखंड में हाल ही में धामी कैबिनेट का विस्तार हुआ है। धामी कैबिनेट में पांच नए मंत्रियों को शामिल किया गया है। इसके बाद अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैबिनेट में मंत्रियों के विभागों का बंटवारा कर दिया है। सीएम धामी के पास अब तक तकरीबन 35 विभागों का कामकाज था। नए मंत्री बनने के बाद सीएम के कंधों से विभागों का बोझ कम हो जाएगा।

आबकारी और सूचना, सीएम के पास

सीएम धामी ने राज्य में बेहद अहम माने जाने वाले विभागों को अपने पास ही रखा है। सीएम धामी के पास वित्त विभाग भी बना रहेगा। इसके साथ ही ऊर्जा विभाग, खनन विभाग, और सूचना विभाग भी रहेगा। सीएम धामी ने इसे किसी अन्य मंत्री को नहीं दिया है।

मदन कौशिक को आपदा प्रबंधन, बत्रा को परिवहन

वहीं नए बने मंत्रियों में से मदन कौशिक को आपदा प्रबंधन विभाग दिया गया है। इसके साथ ही उन्हे पंचायती राज का कामकाज भी दिया गया है। इसके साथ ही प्रदीप बत्रा को परिवहन जैसा विभाग दिया गया है।

देखिए विभागवार बंटवारा

टीम धामी में धामी समेत कुल 12 मंत्री हैं। इनमें से अधिकतर बड़े विभाग सीएम के पास हैं। खास बात ये है कि नए मंत्री बनने के बाद सीएम धामी ने पहले से चले आ रहे अधिकतर विभागों के मंत्रियों को नहीं बदला है।

  1. पुष्कर सिंह धामी (मुख्यमंत्री) – मंत्रिपरिषद, कार्मिक एवं सतर्कता, सचिवालय प्रशासन, नियोजन, राज्य सम्पत्ति, सूचना, गृह, राजस्व, औद्योगिक विकास (खनन सहित), श्रम, पेयजल, ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा, आबकारी, न्याय, नागरिक उड्डयन, वित्त, आवास।
  2. सतपाल महाराज – लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण निर्माण, संस्कृति, धर्मस्व, पर्यटन, भारत-नेपाल उत्तराखण्ड नदी परियोजनाएं, सिंचाई, लघु सिंचाई, सामान्य प्रशासन विभाग।
  3. गणेश जोशी – कृषि, कृषि शिक्षा, कृषि विपणन, उद्यान एवं कृषि प्रसंस्करण, उद्यान एवं फलोद्योग, रेशम विकास, सैनिक कल्याण।
  4. (डा०) धन सिंह रावत –  विद्यालयी शिक्षा (बेसिक व माध्यमिक), संस्कृत शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, सहकारिता।
  5. सुबोध उनियाल – वन, निर्वाचन, विधायी एवं संसदीय कार्य, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा।
  6. रेखा आर्य – महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, खेल, युवा कल्याण।
  7. सौरभ बहुगुणा – पशुपालन, दुग्ध विकास, मत्स्य पालन, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग, प्रोटोकॉल, कौशल विकास एवं सेवायोजन।
  8. खजान दास – समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, छात्र कल्याण, भाषा।
  9. भरत सिंह चौधरी –  ग्राम्य विकास, लघु एवं सूक्ष्म मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग।
  10. मदन कौशिक – पंचायतीराज, आपदा प्रबन्धन एवं पुनर्वास, आयुष एवं आयुष शिक्षा, पुनर्गठन, जनगणना।
  11. प्रदीप बत्रा – परिवहन, सूचना प्रौद्योगिकी एवं सुराज, विज्ञान प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी।
  12. राम सिंह कैड़ा –  शहरी विकास, पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन, जलागम प्रबन्धन।

वो विधायक जो मंत्री बनने से चूके, आखिर कैसे बदला सियासत का खेल ?

उत्तराखंड में धामी कैबिनेट विस्तार में पांच विधायकों की लॉटरी लगी है और उन्हे मंत्री पद दिया गया है। जो पांच मंत्री बनाए गए हैं उनमें से दो ऐसे हैं जो पहले भी मंत्री रह चुके हैं। हालांकि इस बीच राजनीतिक गलियारों में उन नामों की चर्चाएं भी खूब हो रही हैं जिनका नाम लिस्ट में था लेकिन उन्हे मंत्री पद की शपथ लेने का बुलावा नहीं आया।

अमित शाह के दौरे ने बदली कहानी !

उत्तराखंड बीजेपी में पिछले काफी वक्त से कैबिनेट मंत्रियों के नामों की लिस्ट को फाइनल किया जा रहा था। हालात ये थे कि तकरीबन 12 से 18 पहले भी बीजेपी नेताओं ने ये बयान दिए कि लिस्ट फाइनल हो गई है और जल्द ही कैबिनेट विस्तार हो जाएगा। खुद मुख्यमंत्री भी एक-दो मौके पर इस बात का इशारा कर चुके थे कि नए बनाए जाने वाले कैबिनेट मंत्रियों की लिस्ट फाइनल हो चुकी है और जल्द ही ऐलान हो जाएगा। पिछले कुछ दिनों से बीजेपी में हलचल तेज हो गई थी। अरविंद पांडेय नाराज थे तो त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार पर सीधा निशाना साध रहे थे। इससे साफ हो गया था कि बीजेपी के अंदर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। हालात ये हुए कि बात दिल्ली तक पहुंच गई। इसी बीच राज्य में अमित शाह का दौरा हो गया। बताते हैं कि अमित शाह तक बीजेपी के अंदरूनी कलह की खबरें पहुंची। अमित शाह ने बंद कमरे में बुलाकर पार्टी के कई नेताओं से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की और उनसे रिपोर्ट ली। अमित शाह के हरिद्वार दौरे के दो हफ्ते के भीतर ही कैबिनेट विस्तार हो गया। ऐसा लगता है मानों अंत समय में अमित शाह ने हस्तक्षेप किया और इसके बाद पहले से तय कुछ नामों को हटाकर नए नाम लिखे गए।

फिर चूके चौहान, चमोली की भी झोली खाली

कैबिनेट में शामिल होने वाले संभावित लोगों की लिस्ट में तीन ऐसे विधायक थे जो प्रबल दावेदार माने जा रहे थे। विकासनगर से मुन्ना सिंह चौहान, धर्मपुर विधानसभा से विनोद चमोली और पुरोला से दुर्गेश्वर लाल। ये तीनों विधायक लगभग हर संभावित लिस्ट में शामिल दिख रहे थे। इसके साथ ही बिशन सिंह चुफाल और बंशीधर भगत का नाम भी संभावित मंत्रियों की लिस्ट में शामिल था। हालांकि जब लिस्ट फाइनल हुई तो इन सभी संभावितों की उम्मीदों पर पानी फिर गया।

क्षेत्रीय, जातीय के साथ गुट संतुलन भी

दरअसल सियासी जानकार मान रहे हैं कि धामी कैबिनेट विस्तार में संगठन ने खासी मेहनत की और मुख्यमंत्री को गुट संतुलन के लिए राजी किया है। आमतौर पर उत्तराखंड में कैबिनेट में दो समीकरण महत्वपूर्ण होते हैं। एक है जातीय समीकरण और दूसरा क्षेत्रीय समीकरण। कुमाऊं और गढ़वाल में संतुलन बनाने के साथ मुख्य रूप से ब्राह्मण और क्षत्रीय प्रतिनिधित्व को देखा जाता है। इसके साथ ही महिला और दलित फैक्टर भी कैबिनेट में अहम होता है। लेकिन बदली राजनीतिक परिस्थितियों में इस बार सरकार और संगठन को गुट संतुलन के समीकरण भी बैठाने पड़ गए।

2027 के लिए धामी ने सबको मनाया ?

कैबिनेट विस्तार के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुटबाजी की आग को ठंडा करने और विधायकों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए अपनी राजनीतिक जिद से तौबा किया है। यही वजह रही कि उन्होंने त्रिवेंद्र के करीबी रहे मदन कौशिक को कैबिनेट में शामिल किया है। इसके साथ ही प्रदीप बत्रा को भी मौका दिया है। धामी कैबिनेट विस्तार से भी ये साफ हो गया है कि न सिर्फ उत्तराखंड बीजेपी में चले आ रहे मनमुटाव को खत्म करने की गंभीर कोशिश हो रही है बल्कि पूरी पार्टी एकजुट होकर 2027 की ओर बढ़ रही है। हालांकि सच ये भी है कि इस कैबिनेट विस्तार को राज्य की जनता कैसे लेती है ये वक्त बताएगा।

धामी कैबिनेट विस्तार। इस चेहरे ने चौंकाया तो कुछ की बहुप्रतिक्षित इंट्री, क्या 2027 की राह होगी आसान ?

उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट का बहुप्रतिक्षित विस्तार आखिरकार हो गया है। धामी कैबिनेट में पांच विधायकों को शामिल किया गया है। इनमें से दो विधायक पहले भी कैबिनेट मंत्री का पद संभाल चुके हैं।

इन विधायकों को मिला मंत्री पद

धामी कैबिनेट में पांच विधायकों को मंत्री पद दिया गया है। ये इस तरह हैं –

खजान दास — देहरादून की राजपुर सीट से दो बार विधायक, संगठन और सरकार दोनों का अनुभव रखते हैं। पहले भी कैबिनेट मंत्री पद संभाल चुके हैं।

प्रदीप बत्रा — रुड़की से तीन बार के विधायक, पहले कांग्रेस में रह चुके, बाद में बीजेपी में शामिल हुए।

मदन कौशिक — हरिद्वार से पांच बार विधायक, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी का बड़ा ब्राह्मण चेहरा। त्रिवेंद्र गुट का अहम हिस्सा माने जाते रहे हैं। त्रिवेंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं।

राम सिंह कैड़ा — भीमताल से विधायक, पहले निर्दलीय और कांग्रेस पृष्ठभूमि से जुड़े रहे लेकिन बाद में बीजेपी से करीबियां बढ़ीं। अब कैबिनेट में शामिल।

भरत चौधरी — रुद्रप्रयाग से विधायक, चार दशक का राजनीतिक अनुभव। लंबे समय से संगठन में सक्रिय।

संतुलन साधने की कोशिश

उत्तराखंड में धामी कैबिनेट विस्तार में सरकार और संगठन ने कई तरह से तालमेल बनाने की कोशिश की है। दो प्रमुख चुनौतियां थीं, क्षेत्रीय और जातीय समीकरण को साधना लेकिन पिछले कुछ दिनों में पार्टी में बदले माहौल में पार्टी के अलग – अलग गुटों में तालमेल साधना भी सरकार और संगठन के लिए अहम हो गया था।

मुख्यमंत्री ने मदन कौशिश और प्रदीप बत्रा को शामिल करके साफ किया है कि पार्टी में सभी को बराबर मौका दिया जाएगा।

बड़ा सवाल, 2027 में क्या होगा ?

चुनाव के तकरीबन एक साल पहले कैबिनेट विस्तार करके धामी सरकार ने हैरानी में डाला है इसके साथ ही विधानसभा चुनावों के लिए भी साफ इशारा किया है। दरअसल धामी कैबिनेट का विस्तार काफी समय से टल रहा था। अब जब चुनावों में सिर्फ एक साल का वक्त बचा है तो धामी सरकार ने कैबिनेट विस्तार करके 2027 के चुनावों में वापसी का सपना भी देखेगी। धामी कैबिनेट विस्तार से बने चुनावी समीकरण अब 2027 के चुनावी समीकरण को भी प्रभावित करेंगे।

आज होगा धामी कैबिनेट का विस्तार, सियासी और जातीय समीकरण साधने की होगी चुनौती

उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट का आज विस्तार हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट में पांच नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। सुबह दस बजे लोकभवन में राज्यपाल नए मंत्रियों को शपथ दिलाएंगे।

लंबे इंतजार के बाद कैबिनेट विस्तार

पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट का विस्तार लंबे इंतजार के बाद हो रहा है। धामी सरकार का कार्यकाल चार साल का हो चुका है। विधानसभा चुनावों को एक साल का वक्त बचा है। ऐसे में अब जाकर कैबिनेट विस्तार होने जा रहा है। नई कैबिनेट में उन्ही विधायकों को लिए जाने की खबर हैं जिनका अब तक का कार्यकाल अच्छा रहा है। विवादित छवि वाले विधायकों को कैबिनेट से दूर रखा गया है।

जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधना होगा चुनौती

खबरों के मुताबिक धामी कैबिनेट में नए मंत्रियों की ताजपोशी में जातीय समीकरण और क्षेत्रीय समीकरण को भी साधने की कोशिश की गई है। माना जा रहा है कि कैबिनेट में उन जिलों को प्राथमिकता दी गई है जिनसे अब तक कोई मंत्री नहीं बना है।

चुनावी से एक साल पहले

धामी कैबिनेट का ये विस्तार अपने आप में बेहद अहम हो सकता है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक विस्तार से पहले खासा होमवर्क करना पड़ा है। दरअसल पिछले कुछ दिनों में पार्टी में गुटबाजी की खबरें आम हुई हैं। यही वजह है कि सभी गुटों को संतुष्ट करने के लिए कैबिनेट विस्तार में होमवर्क करना पड़ा है। धामी कैबिनेट का ये विस्तार आने वाले विधानसभा चुनावों के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है। इस विस्तार का असर पार्टी के चुनावी परिणाम पर भी पड़ेगा।