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उत्तराखंड: आपदाग्रस्त मोरी में DM Prashant Arya का एक्शन, बचाव और पुनर्निर्माण कार्य तेज

DM Prashant Arya ने रविवार को मोरी विकासखंड के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का गहन निरीक्षण किया. क्षेत्रीय विधायक दुर्गेश्वर लाल के साथ, उन्होंने भूस्खलन से प्रभावित गांवों का दौरा किया और क्षतिग्रस्त सड़कों, बिजली-पानी की लाइनों और खेतों का जायजा लिया.

प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण और सड़कों को बहाल करने के निर्देश

बता दें कि लगातार बारिश के कारण मोरी के पर्वत और बंगाण क्षेत्रों को जोड़ने वाली कई सड़कें भूस्खलन और भू-धसाव से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं. DM Prashant Arya ने अधिकारियों के साथ इन सड़कों का निरीक्षण किया और उन्हें जल्द से जल्द यातायात के लिए खोलने के निर्देश दिए. DM Prashant Arya ने बद्रासु गांव में हुए भूस्खलन का भी निरीक्षण किया और बिजली-पानी की आपूर्ति बहाल करने के लिए जल संस्थान और विद्युत विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए.

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किसानों और बागवानों को राहत

बता दें कि अतिवृष्टि से क्षेत्र के किसानों और बागवानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है. इस पर DM Prashant Arya ने मुख्य उद्यान अधिकारी और मुख्य कृषि अधिकारी को निर्देश दिए कि वे नुकसान का जल्द से जल्द आकलन करें, ताकि प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा दिया जा सके.

आवासीय भवनों की सुरक्षा पर जोर

भूस्खलन के कारण कई आवासीय भवनों को खतरा पैदा हो गया है. DM Prashant Arya ने लोक निर्माण विभाग (PWD) को सुनकुंडी गांव में आवासीय भवनों और खेतों को भू-धसाव से बचाने के लिए सुरक्षात्मक कार्य करने के निर्देश दिए. उन्होंने जखोल-फिताड़ी-लिवाड़ी मोटर पुल से बैंचा तक क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत के लिए भी सिंचाई विभाग से प्रस्ताव मांगा.

ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और उनके समाधान के निर्देश दिए

जखोल गांव में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य और विधायक दुर्गेश्वर लाल ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं. ग्रामीणों ने शिक्षकों की तैनाती, कंप्यूटर की उपलब्धता और जर्जर स्कूल भवनों के पुनर्निर्माण की मांग की. जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को इन समस्याओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. ग्रामीणों ने सेब के बागानों और गांव की बस्तियों को भू-कटाव से बचाने के लिए भी सुरक्षात्मक कार्य की मांग की.

पुनर्निर्माण कार्य सरकार की प्राथमिकता

इस मौके पर विधायक दुर्गेश्वर लाल ने कहा कि आपदा से क्षतिग्रस्त हुई परिसंपत्तियों का पुनर्निर्माण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने बताया कि मोरी-नैटवाड़-शांकरी सड़क के लिए धनराशि स्वीकृत हो चुकी है और जल्द ही इस पर काम शुरू होगा. उन्होंने कहा कि पुरोला विधानसभा क्षेत्र में भी आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों का भू-वैज्ञानिक सर्वे भी कराया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचा जा सके.

इस मौके पर एसडीएम मुकेश रमोला, ब्लॉक प्रमुख मोरी रणदेब सिंह राणा सहित कई अधिकारी, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे.

Criminal Committed Suicide: दरोगा को गोली मारकर फरार हुए बदमाश ने दून में खुद को मारी गोली!

Criminal Committed Suicide: हरियाणा पुलिस के दरोगा को गोली मारकर फरार हुए बदमाश ने आखिरकार देहरादून में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। यह घटना देहरादून के लक्ष्मण चौक इलाके में हुई, जहाँ वह अपने एक परिचित के घर छिपा हुआ था। इस पूरी घटना ने हरियाणा और उत्तराखंड पुलिस के बीच एक गंभीर चुनौती पेश की है। पुलिस इस मामले की गहनता से जाँच कर रही है।

देहरादून में बदमाश ने की आत्महत्या

हरियाणा पुलिस के दारोगा को गोली मारने वाला फरार बदमाश (Criminal) सुनील कुमार उर्फ सुनील कपूर, जिसे हरिद्वार में हुई वारदात के बाद से ही पुलिस ढूँढ रही थी, ने देहरादून के लक्ष्मण चौक में अपने एक परिचित के घर खुद को गोली मारकर अपनी जान ले ली। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पुलिस के बढ़ते दबाव और गिरफ्तारी के डर से उसने यह कदम उठाया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची, शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फॉरेंसिक टीम भी घटनास्थल पर सबूत जुटाने में लगी है।

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हरिद्वार में पुलिस से हुई थी मुठभेड़

यह घटना हरिद्वार में हुई थी, जहाँ हरियाणा क्राइम ब्रांच की टीम एक मामले की जाँच के लिए पहुँची थी। शनिवार की शाम टीम की मुठभेड़ बदमाश (Criminal) सुनील कुमार से हुई, जिसने अपने लाइसेंसी पिस्तौल से एक दारोगा को गोली मार दी। दारोगा को तुरंत एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया, जहाँ उनकी हालत अब स्थिर है। इस जानलेवा हमले के बाद बदमाश (Criminal) फरार हो गया था। पुलिस ने उसके खिलाफ जानलेवा हमला और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।

Criminal Sunil Kumar ने पुलिस कप्तान को भी दी थी धमकी

बदमाश सुनील कुमार के खिलाफ कई गंभीर आरोप थे। उसने न केवल हरियाणा पुलिस के दरोगा पर हमला किया, बल्कि एक पुलिस कप्तान को भी जान से मारने की धमकी दी थी। इन गंभीर अपराधों के कारण पुलिस उसकी तलाश में थी। हरियाणा एसटीएफ की एक टीम भी हरिद्वार पहुँची थी और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर उसकी तलाश कर रही थी।

उत्तराखंड और हरियाणा पुलिस का था ज्वाइंट ऑपरेशन

यह मामला उत्तराखंड और हरियाणा पुलिस का ज्वाइंट ऑपरेशन था। इस पूरे मामले ने हरियाणा और उत्तराखंड पुलिस के बीच एक समन्वय की चुनौती को उजागर किया है। हरिद्वार में मुठभेड़ के बाद बदमाश (Criminal) का देहरादून भाग जाना और वहाँ खुद को गोली मार लेना इस बात का संकेत है कि वह लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। अब पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है कि क्या उसे देहरादून में किसी स्थानीय व्यक्ति ने शरण दी थी और क्या उसके किसी अन्य अपराधी से भी संपर्क थे।

पुलिस की गहन जाँच जारी

घटना के बाद से ही पुलिस इस मामले की गहन जाँच में जुटी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बदमाश (Criminal) को देहरादून में किसने पनाह दी और क्या उसका कोई आपराधिक नेटवर्क था। पुलिस के उच्च अधिकारियों ने भी इस मामले की जाँच के आदेश दिए हैं। हरिद्वार से एक पुलिस टीम भी देहरादून के लिए रवाना हो गई है ताकि जाँच में मदद मिल सके।

लाइसेंसी पिस्टल का इस्तेमाल

पुलिस की शुरुआती जाँच में यह सामने आया है कि बदमाश (Criminal) सुनील कुमार ने दारोगा पर हमला करने के लिए अपनी लाइसेंसी पिस्तौल का इस्तेमाल किया था। वह हरिद्वार से फरार होने के दौरान पिस्तौल अपने साथ ले गया था। यही पिस्तौल उसके शव के पास भी बरामद हुई है, जिससे यह साबित होता है कि उसने उसी से खुद को गोली मारी। यह घटना अपराधियों के लिए एक सबक है कि कानून की पकड़ से बचना मुश्किल है। पुलिस ने साफ कर दिया है कि वे हर पहलू की जाँच करेंगे और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देंगे।

कुट्टू के आटे में मिलावट लेकर अलर्ट मोड पर एजेंसियां, बेचने वालों को लेना होगा लाइसेंस

पिछले कुछ सालों से राज्य में मिलावटी कुट्टू के आटे की सप्लाई की घटनाओं को देखते हुए उत्तराखंड सरकार इस बार त्योहारी सीजन से पहले ही एक्शन में आ गई है। सीएम धामी के निर्देश के बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफ़डीए) को अलर्ट कर दिया गया है। इसके साथ कुट्टू के आटे की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरे प्रदेश में विशेष अभियान चलाने की तैयारी है। वहीं कुट्टे का आटा बेचने के लिए लाइसेंस भी लेना होगा।

कुट्टे का आटा बेचने के लिए लेना होगा लाइसेंस

नवरात्र और त्योहारी सीजन को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने उपभोक्ताओं की सेहत को प्राथमिकता देते हुए बड़ा कदम उठाया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफ़डीए) अलर्ट मोड पर आ गया है। विभाग की ओर से प्रदेशभर में कुट्टू के आटे की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। एफ़डीए आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि नवरात्र के दौरान उपवास में व्यापक रूप से प्रयुक्त होने वाले कुट्टू के आटे को अब बिना लाइसेंस और पंजीकरण के नहीं बेचा जा सकेगा। कुट्टू का आटा केवल पैकिंग में ही बेचा जाएगा, ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित व मानक के अनुरूप उत्पाद मिल सके। नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी।

करना होगा मानकों का पालन

आयुक्त डॉ. कुमार ने एफ़डीए के सभी प्रभारियों, सहायक आयुक्त और अभिहित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि नवरात्र अवधि में उपभोक्ताओं द्वारा उपयोजित खाद्य सामग्री – विशेषकर कुट्टू का आटा निर्माण, पैकिंग, भंडारण, वितरण और विक्रय के दौरान खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006, नियम 2011 और संबंधित विनियमों का सख़्ती से पालन कराया जाए।

चरणबद्ध अभियान की कार्ययोजना
पहला चरण :- कुट्टू के आटे के भंडारण, संग्रहण, वितरण और विक्रय करने वाले थोक विक्रेता, डिपार्टमेंटल स्टोर और फुटकर विक्रेताओं को चिन्हित किया जाएगा। उनके यहाँ उत्पाद की जांच के साथ-साथ रखरखाव, भंडारण व लेबलिंग की शर्तों पर बैठकें आयोजित होंगी। ये बैठकें नवरात्र से पहले ही संपन्न कर ली जाएंगी।

दूसरा चरण :- नवरात्र के प्रारंभ होने से पूर्व और नवरात्र अवधि के दौरान चिन्हित प्रतिष्ठानों का आकस्मिक व सामान्य निरीक्षण किया जाएगा।

कड़े पैकेजिंग नियम

बिना वैध खाद्य लाइसेंस-पंजीकरण के कुट्टू के आटे का निर्माण, पैकिंग, संग्रह व विक्रय प्रतिबंधित होगा। खुले में बेचे जा रहे कुट्टू के आटे पर विशेष निगरानी रखी जाएगी और खुले विक्रय को जनस्वास्थ्य के दृष्टिगत हतोत्साहित किया जाएगा। कुट्टू का आटा केवल सीलबंद पैकेट में ही बेचा जाएगा। सीलबंद पैकेट पर पैकिंग तिथि, अवसान तिथि, निर्माता/रिपैकर का पूरा पता, प्रतिष्ठान का नाम और लाइसेंस नंबर अंकित करना अनिवार्य होगा।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और रिकॉर्ड की निगरानी

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म द्वारा खाद्य कारोबारी और उपभोक्ताओं को आपूर्ति व विक्रय पर भी विशेष निगरानी रखी जाएगी। प्रत्येक खाद्य कारोबारकर्ता को कुट्टू के बीज अथवा आटे के क्रय व विक्रय का रिकॉर्ड लिखित रूप में रखना होगा। सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने पर सम्बन्धित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

क्विक रिस्पॉन्स टीम और त्वरित कार्रवाई

आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक जिले में मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय के आईडीएसपी सेल से समन्वय करते हुए कुट्टू के आटे के सेवन से बीमार होने संबंधी सूचनाओं पर क्विक रिस्पॉन्स टीम गठित की जाए। यह टीम ऐसी घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई करेगी। नवरात्र अवधि में जनपदों से प्राप्त खाद्य नमूनों की जांच खाद्य एवं औषधि विश्लेषणशाला स्तर पर प्राथमिकता से की जाएगी और जांच रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध कराई जाएगी।

उपभोक्ताओं की सेहत सर्वोपरि

अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के नेतृत्व में राज्य सरकार त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं को सुरक्षित व शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आयुक्त (एफ़डीए) डॉ. आर. राजेश कुमार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विभाग ने स्पष्ट रूप से यह संकल्प लिया है कि नवरात्र जैसे पर्वों के दौरान मिलावटी, घटिया या असुरक्षित खाद्य सामग्री की बिक्री को हर हाल में रोका जाएगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं बल्कि एक समन्वित, चरणबद्ध व सख्त कार्रवाई है, जिसमें निर्माण, पैकिंग, भंडारण, वितरण से लेकर फुटकर विक्रय और ऑनलाइन आपूर्ति तक हर स्तर पर निगरानी रखी जाएगी। विभागीय टीमें मिलावटी उत्पादों की पहचान, नमूना परीक्षण, आकस्मिक निरीक्षण और दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई के लिए 24×7 अलर्ट मोड में रहेंगी। जग्गी ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन करने वाले बड़े या छोटे किसी भी कारोबारी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने उपभोक्ताओं से भी अपील की कि यदि उन्हें कहीं मिलावटी या संदिग्ध खाद्य सामग्री की बिक्री का संदेह हो तो तत्काल विभाग को सूचित करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

NDMA की उत्तराखंड को ‘बिल्ड बैक बेटर’ की सलाह, प्रदेश के आपदा प्रबंधन का किया मूल्यांकन

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देहरादून। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के विभागाध्यक्ष एवं सदस्य, राजेंद्र सिंह ने उत्तराखंड में आपदा राहत और पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने राज्य को ‘बिल्ड बैक बेटर’ की थीम पर एक आपदा-सुरक्षित राज्य बनाने के लिए हर स्तर पर सहयोग देने की बात कही। राजेंद्र सिंह ने कहा कि आपदा प्रबंधन सिर्फ एक संकट से निपटना नहीं है, बल्कि यह एक अवसर है जिससे टिकाऊ और पर्यावरण-संवेदनशील विकास को सुनिश्चित किया जा सकता है।

NDMA सदस्य ने हाल ही में राज्य में आई इंटर मिनिस्टीरियल सेंट्रल टीम (आईएमसीटी) के दौरे और जल्द होने वाले पोस्ट-डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (पीडीएनए) पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आपदा के बाद होने वाला व्यवस्थित आकलन बहुत ज़रूरी है, क्योंकि इससे क्षति, प्रभावित लोगों की संख्या, और बुनियादी ढांचे पर पड़े प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा सकता है। राजेंद्र सिंह ने बताया कि जल्द ही एक पीडीएनए टीम उत्तराखंड आएगी, जिसके आकलन के आधार पर केंद्र सरकार अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्रदान करेगी।

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राहत कार्यों की सराहना और दस्तावेज़ीकरण का निर्देश

NDMA के विभागाध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने राज्य में चल रहे राहत एवं बचाव अभियानों की सराहना करते हुए कहा कि 24 से 72 घंटों के भीतर प्रभावित लोगों तक राहत राशि पहुँचाना प्रशासन की तत्परता और संवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने आपदा प्रबंधन सचिव, श्री विनोद कुमार सुमन को निर्देश दिया कि राहत और बचाव कार्यों में आई चुनौतियों और अनुभवों का व्यवस्थित दस्तावेज़ीकरण किया जाए। उनके अनुसार, इससे भविष्य की नीतियों, प्रशिक्षण, और तकनीकी सुधारों में मदद मिलेगी, और यह अन्य राज्यों के लिए भी एक उपयोगी मॉडल बन सकता है।

NDMA के विभागाध्यक्ष ने नदी किनारे के कस्बों की मैपिंग और जोखिम मूल्यांकन पर दिया जोर

जोशीमठ में चल रहे कार्यों की जानकारी लेते हुए NDMA के विभागाध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन, ग्लेशियर झीलों के फटने और अतिवृष्टि जैसी आपदाओं की चुनौतियों पर बात की। उन्होंने नदी किनारे बसे कस्बों की मैपिंग करके जोखिम का मूल्यांकन करने की सलाह दी ताकि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की जा सके और समय रहते सुरक्षात्मक कदम उठाए जा सकें।

पलायन रोकना और शोध संस्थानों से समन्वय

राजेंद्र सिंह ने कहा कि आपदाओं के कारण होने वाले पलायन को रोकने के लिए व्यापक कार्य योजना बनाई जानी चाहिए, क्योंकि यह सिर्फ़ आजीविका का सवाल नहीं बल्कि सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, उन्होंने राज्य में मौजूद वैज्ञानिक शोध संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया। राजेंद्र सिंह ने कहा कि इन संस्थानों के अनुभव और तकनीकी डेटा का उपयोग करके आपदा की पूर्व तैयारी को और मज़बूत किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि सुरक्षित पर्यटन और चारधाम यात्रा को आपदा जोखिम से मुक्त बनाना राज्य की प्राथमिकता होनी चाहिए क्योंकि पर्यटन उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

आजीविका बहाली के लिए व्यापक सहयोग की उम्मीद

सचिव आपदा प्रबंधन, विनोद कुमार सुमन ने बताया कि इस वर्ष आपदा से लोगों की आजीविका पर भी गहरा प्रभाव पड़ा है। उन्होंने आजीविका को फिर से पटरी पर लाने, पुनर्निर्माण और न्यूनीकरण कार्यों के लिए NDMA से व्यापक सहयोग की उम्मीद जताई। बैठक में अपर सचिव आनंद स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजकुमार नेगी, जेसीईओ मो. ओबैदुल्लाह अंसारी और यूएसडीएमए के अन्य विशेषज्ञ भी उपस्थित थे।

सड़क से जल तक, CM Dhami ने ₹146.19 करोड़ की परियोजनाओं को दी हरी झंडी

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उत्तराखंड के CM Dhami ने राज्य में कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाई है। इसमें नैनीताल के कालाढूंगी में सड़क चौड़ीकरण, बागेश्वर में एक पंपिंग योजना, और हरिद्वार में अभियोजन निदेशालय के लिए कार्यालय और मालखाने का निर्माण शामिल है। कालाढूंगी की सड़क के लिए ₹3.81 करोड़, बागेश्वर की पंपिंग योजना के लिए ₹4.73 करोड़, और हरिद्वार के कार्यालय के लिए ₹7.07 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने कुंभ मेला-2027 के लिए भी ₹1.13 अरब की धनराशि को मंज़ूरी दी है, जिसमें से इस वित्तीय वर्ष में ₹10 करोड़ टोकन राशि के रूप में जारी किए जाएंगे।

पेयजल और स्वच्छता पर विशेष ध्यान

CM Dhami ने राज्य में पेयजल और स्वच्छता को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाओं को नाबार्ड (NABARD) के तहत स्वीकृति दी है। इसमें उत्तराखंड जल संस्थान की 3 योजनाएँ और उत्तराखंड पेयजल निगम की 17 योजनाएँ शामिल हैं, जिनकी कुल लागत ₹17.58 करोड़ है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य राज्य के विभिन्न हिस्सों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करना और ग्रिड सोलर योजनाओं के माध्यम से ऊर्जा की दक्षता बढ़ाना है।

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लोकतंत्र सेनानी सम्मान पेंशन को मिली स्वीकृति

CM Dhami ने लोकतंत्र सेनानियों और उनके आश्रितों के सम्मान में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। CM Dhami ने देवकी देवी को ‘लोकतंत्र सेनानी सम्मान पेंशन’ देने का अनुमोदन किया है।देवकी देवी, जो कि उधम सिंह नगर के किच्छा की निवासी हैं, को 14 जून 2017 से ₹16,000 प्रति माह और 14 अक्टूबर 2022 से ₹20,000 प्रति माह की दर से बकाया राशि सहित पेंशन मिलेगी। यह निर्णय लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वालों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

आर्थिक और सामाजिक विकास की दिशा में अहम कदम– CM Dhami

CM Dhami द्वारा लिए गए ये सभी निर्णय उत्तराखंड के समग्र आर्थिक और सामाजिक विकास को गति देने के उद्देश्य से हैं। इन परियोजनाओं और योजनाओं से न केवल राज्य में बुनियादी ढाँचा मजबूत होगा, बल्कि आम जनता के जीवन स्तर में भी सुधार होगा। सड़कों के चौड़ीकरण से कनेक्टिविटी बढ़ेगी, पेयजल योजनाओं से स्वास्थ्य में सुधार होगा और पेंशन योजना से लोकतंत्र सेनानियों के परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। यह सब उत्तराखंड को एक प्रगतिशील और विकसित राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

उत्तरकाशीः DM Prashant Arya के कड़े निर्देश: 20 सितंबर से बिना एसटीपी वाले प्रतिष्ठानों पर होगी कार्रवाई!

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उत्तरकाशी के DM Prashant Arya की अध्यक्षता में हाल ही में जिला गंगा समिति (नमामि गंगे) की बैठक हुई। इस दौरान, DM Prashant Arya ने गंगोत्री से चिन्यालीसौड़ और डामटा से जानकीचट्टी तक सीवर और एफएसटीपी से संबंधित परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने गंगा स्वच्छता मिशन को गति देने के लिए अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का एसटीपी से जुड़ाव

DM Prashant Arya ने पर्यटन विभाग को निर्देश दिए हैं कि 20 से 30 सितंबर तक एक विशेष अभियान चलाकर उन सभी होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए जो अभी तक एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) से नहीं जुड़े हैं। वर्तमान में, 20 से अधिक कमरों वाले 123 पंजीकृत होटलों में से 104 एसटीपी से जुड़ चुके हैं और बाकी पर काम चल रहा है।

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गंगोत्री में सीवर लाइन विस्तार पर जोर

बैठक में DM Prashant Arya ने परियोजना प्रबंधक (निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई) को गंगोत्री धाम में बचे हुए घरों को सीवर सुविधा से जोड़ने के लिए जल्द से जल्द डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार करने का निर्देश दिया। इससे गंगा स्वच्छता मिशन को और मजबूती मिलेगी।

गंगा और उसकी सहायक नदियों की स्वच्छता

DM Prashant Arya ने गंगा और उसकी सहायक नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए व्यापक स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष जोर दिया। सभी नगर निकायों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन को नियमित करने, कचरे को अलग-अलग करके उसका उचित निस्तारण करने और आम जनता को गीले और सूखे कचरे के प्रति जागरूक करने के लिए भी निर्देशित किया।

पहाड़ी क्षेत्रों के लिए पर्यटन मंत्री Satpal Maharaj की अनूठी पहल: संरक्षित क्षेत्रों के लिए उठाई ये मांग

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देहरादून/दिल्ली: उत्तराखंड के पर्यटन, धर्मस्व, संस्कृति, और लोक निर्माण मंत्री Satpal Maharaj ने केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात की। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के तहत आने वाले संरक्षित क्षेत्रों की प्रतिबंधित दूरी (prohibited distance) कम करने का अनुरोध किया। उनका कहना है कि पहाड़ी और शहरी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियाँ अलग होती हैं, और 100 मीटर की मौजूदा दूरी से पर्वतीय राज्यों में लोगों को काफी दिक्कतें आती हैं।

पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप बदलाव की मांग

पर्यटन मंत्री Satpal Maharaj ने केंद्रीय मंत्री से लिखित में अनुरोध किया कि पर्वतीय क्षेत्रों में जगह की कमी के कारण 100 मीटर की परिधि में बड़ी संख्या में लोगों के घर बने हुए हैं। उन्होंने जोर दिया कि जनहित में इस दूरी को 100 मीटर से घटाकर 30-40 मीटर किया जाना चाहिए ताकि स्थानीय लोगों को असुविधा का सामना न करना पड़े। उनका तर्क है कि मौजूदा नियम इन क्षेत्रों की विशिष्ट भौगोलिक स्थितियों के अनुकूल नहीं हैं।

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मूर्तिविहीन मंदिरों में मूर्तियाँ स्थापित करने का अनुरोध

इस मुलाकात में Satpal Maharaj ने एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। Satpal Maharaj ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित कटारमल सूर्य मंदिर समेत देश के कई मंदिर मूर्तिविहीन हैं, जो हमारी सांस्कृतिक परंपरा के विपरीत है। उन्होंने अनुरोध किया कि ब्रिटिश काल से चले आ रहे मूर्तिविहीन मंदिरों में मूर्तियों की स्थापना करना अनिवार्य किया जाए, ताकि इन मंदिरों की सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता को बहाल किया जा सके।

सार्वजनिक शौचालयों में स्वच्छता और सुविधाओं की अपील

Satpal Maharaj ने पर्यटकों की सुविधा से जुड़ा एक और विषय भी उठाया। उन्होंने कहा कि देशभर के होटलों और पेट्रोल पंपों पर बने शौचालयों में अक्सर स्वच्छता का ध्यान नहीं रखा जाता। उन्होंने अनुरोध किया कि होटलों के बाहर एक साइनबोर्ड लगाया जाए जिस पर ‘वेस्टर्न कमोड उपलब्ध’ लिखा हो, और पेट्रोल पंपों पर आम नागरिकों और विशिष्ट व्यक्तियों (वीआईपी) के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि इन शौचालयों में स्वच्छता नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिल सके।

Weather Alert: IMD ने जारी किया अगले 7 दिन तक बारिश का अलर्ट, पढ़िये कहां है भू-स्खलन का ज्यादा खतरा

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देहरादून: IMD ने जाते हुए मानसून को लेकर होने वाली बारिश को लेकर उत्तराखंड के लिए अलर्ट जारी किया है। उत्तराखंड में मानसून का अंतिम चरण सक्रिय बना हुआ है, जिसके चलते अगले सात दिनों तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक का दौर जारी रहेगा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार, 12 सितंबर, 2025 से 18 सितंबर, 2025 तक प्रदेश के कई जिलों में वर्षा होने की संभावना है, जिससे पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और सड़कों के अवरुद्ध होने का खतरा बना हुआ है।

इन प्रमुख जिलों में देखिये मौसम की स्थिति

  • 12 से 14 सितंबर: देहरादून, पौड़ी और कुमाऊं मंडल के अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक की संभावना है। राज्य के बाकी हिस्सों में भी कई जगहों पर बारिश हो सकती है।
  • 15 सितंबर: देहरादून, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और नैनीताल जिलों में अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक की संभावना है।
  • 16 से 18 सितंबर: राज्य के कुछ जिलों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक की संभावना है।

IMD ने यात्रा और सुरक्षा के लिए दी सलाह

IMD ने इस दौरान लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़कों के अवरुद्ध होने की संभावना को देखते हुए, यात्रियों को सावधानी बरतनी चाहिए। IMD ने स्थिति पर लगातार निगरानी रखने और किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने का आग्रह किया है।

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मानसून का अंतिम चरण

यह मौसम पूर्वानुमान राज्य में चल रहे मानसून के अंतिम चरण का संकेत देता है, जहां सितंबर के मध्य तक हल्की बारिश जारी रहने की उम्मीद है। हालांकि, कुछ दिनों में बारिश की तीव्रता बढ़ सकती है, जिससे कुछ जिलों में जनजीवन प्रभावित हो सकता है।

IMD द्वारा जारी अगले सात दिनों का ये है पूर्वानुमान

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 12 से 14 सितंबर तक देहरादून, पौड़ी और कुमाऊं मंडल के अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। इसके बाद, 15 सितंबर को देहरादून, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और नैनीताल जैसे जिलों में बारिश की तीव्रता बढ़ सकती है, जहां तेज गरज-चमक के साथ वर्षा हो सकती है। 16 से 18 सितंबर के बीच भी राज्य के कुछ हिस्सों में छिटपुट बारिश का सिलसिला बना रहेगा।

यात्रियों के लिए विशेष चेतावनी

लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और चट्टानें गिरने का खतरा बढ़ गया है। कई स्थानों पर सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रशासन ने लोगों, खासकर चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्हें अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम की जानकारी के बिना यात्रा न करने की अपील की गई है। संबंधित विभागों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

मानसून का प्रभाव और राहत कार्य

यह वर्षा राज्य में चल रहे मानसून के अंतिम चरण का हिस्सा है। पिछले कुछ हफ्तों में हुई भारी बारिश ने प्रदेश में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है, जिससे जान-माल का काफी नुकसान हुआ है। प्रधानमंत्री द्वारा हाल ही में घोषित 1200 करोड़ रुपये का राहत पैकेज इसी आपदा से निपटने के लिए है। यह अनुमान लगाया गया है कि बारिश के कारण बंद हुई 288 सड़कों में से अभी भी 187 मार्ग बंद हैं। ऐसे में, आगामी बारिश राहत और बचाव कार्यों में बाधा डाल सकती है, जिससे स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

उत्तरकाशीः जिलाधिकारी Prashant Arya के नेतृत्व में ‘सेवा पखवाड़ा’ का आगाज़

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उत्तरकाशी-जिलाधिकारी Prashant Arya के निर्देश पर, उत्तरकाशी में 17 सितंबर से 02 अक्टूबर तक ‘सेवा पखवाड़ा’ के तहत एक बड़ा स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान, 17 सितंबर को सभी ब्लॉकों में बहुउद्देशीय शिविर भी आयोजित होंगे।

जिलाधिकारी Prashant Arya ने यह सुनिश्चित किया है कि आगामी 17 सितंबर से 02 अक्टूबर तक, उत्तरकाशी जिले में ‘सेवा पखवाड़ा’ के अंतर्गत एक विशाल स्वच्छता अभियान और पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस वृहद पहल का उद्देश्य न केवल जिले को स्वच्छ बनाना है, बल्कि आम जनता को पर्यावरण के महत्व के प्रति जागरूक करना भी है। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को इस पूरे कार्यक्रम का प्रभारी और संबंधित खंड विकास अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। यह अभियान सरकार की जन-कल्याणकारी नीतियों को जन-जन तक पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

बहुउद्देशीय शिविरों का आयोजन: जन-सेवा का अनूठा मॉडल

‘सेवा पखवाड़ा’ का शुभारंभ 17 सितंबर को जिले के सभी ब्लॉकों में बहुउद्देशीय शिविरों के आयोजन के साथ होगा। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं और सेवाओं को सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाना है। मोरी, नौगांव, चिन्यालीसौड़, डुंडा, और भटवाड़ी जैसे विकासखंडों में ये शिविर मुख्यालयों पर आयोजित किए जाएंगे, जबकि पुरोला में शिविर तहसील परिसर में लगेगा। इन शिविरों में विभिन्न विभागों के अधिकारी एक ही छत के नीचे मौजूद रहेंगे, जिससे नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में आसानी होगी। यह पहल सरकार और जनता के बीच की दूरी को कम करने का एक प्रभावी प्रयास है।

जिलाधिकारी Prashant Arya ने जनभागीदारी और जन-जागरूकता पर दिया जोर

जिलाधिकारी Prashant Arya ने इस अभियान की सफलता के लिए जनभागीदारी को सबसे महत्वपूर्ण बताया है। जिलाधिकारी Prashant Arya ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन कार्यक्रमों में न केवल सरकारी कर्मचारी, बल्कि जन-प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, गणमान्य नागरिकों, और आम लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाए। जिलाधिकारी Prashant Arya का मानना है कि जब तक समाज का हर वर्ग इस पहल का हिस्सा नहीं बनता, तब तक किसी भी बड़े अभियान को सफल बनाना मुश्किल है। इस दौरान लोगों को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम जैसे रैली, नुक्कड़ नाटक और कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी।

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सरकार की योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार

जिलाधिकारी Prashant Arya ने ‘सेवा पखवाड़ा’ के दौरान, अधिकारियों को राज्य सरकार के विकास कार्यों और जन-कल्याणकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया है। बहुउद्देशीय शिविरों में योजनाओं से संबंधित जानकारी, पात्रता मानदंड और आवेदन प्रक्रियाओं को सरल तरीके से समझाया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र व्यक्ति योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। यह प्रचार-प्रसार डिजिटल और पारंपरिक दोनों माध्यमों से किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई जा सके।

अधिकारियों को जिम्मेदारी: कार्य की भव्यता सुनिश्चित करना

जिलाधिकारी Prashant Arya ने सभी संबंधित अधिकारियों को कार्यक्रम की भव्यता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियों को पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसमें स्थल चयन, लॉजिस्टिक की व्यवस्था, आवश्यक सामग्री की उपलब्धता और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय शामिल है। उन्होंने यह भी कहा है कि सभी अधिकारी अपनी-अपनी जिम्मेदारियों को समझें और उन्हें पूरी निष्ठा के साथ निभाएं। इस तरह का व्यवस्थित दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करेगा कि कार्यक्रम सुचारू रूप से संचालित हो और अपने उद्देश्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त करे।

पर्यावरण संरक्षण: भविष्य की पीढ़ी के लिए एक प्रतिबद्धता

स्वच्छता अभियान के साथ-साथ, ‘सेवा पखवाड़ा’ का एक और महत्वपूर्ण पहलू पर्यावरण संरक्षण है। इस दौरान वृक्षारोपण, सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और जल संरक्षण जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह कार्यक्रम न केवल वर्तमान की चुनौतियों को संबोधित करेगा, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। जिलाधिकारी की यह पहल दर्शाती है कि जिले का प्रशासन विकास के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति भी पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

सारा साईं प्राइवेट को मिला स्टार परफार्मर अवार्ड, अब नई ऊंचाइयों की ओर देख रही कंपनी

देहरादून: ऑयलफील्ड उपकरण निर्माण में वैश्विक अग्रणी कंपनी सारा साईं प्राइवेट लिमिटेड को वर्ष 2023–24 के लिए ब्राइट बार्स एवं अन्य विविध उत्पाद – मध्यम उद्यम श्रेणी में स्टार परफॉर्मर अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित 56वें ईईपीसी इंडिया राष्ट्रीय निर्यात उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह में प्रदान किया गया, जो ईईपीसी इंडिया की 70वीं प्लेटिनम जुबली समारोह का हिस्सा था।

इस समारोह में भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई और आर्थिक विकास, तकनीकी प्रगति और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने में इंजीनियरिंग क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। यह पुरस्कार केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, केंद्रीय वाणिज्य, उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद, ईईपीसी इंडिया के अध्यक्ष पंकज चड्ढा और ईईपीसी इंडिया के उपाध्यक्ष आकाश शाह द्वारा प्रदान किया गया।

ये सम्मान गर्व का क्षण

परफॉर्मर अवार्ड से सम्मानित किए जाने के बाद सारा एसएई प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सुमित धवन ने इसे कर्मचारियों की कड़ी मेहनत और हमारे वैश्विक ग्राहकों के विश्वास का प्रतीक बताया है। सुमित धवन ने कहा है कि, ये सम्मान हमारे लिए गर्व का क्षण है। चार दशकों से हमारा उद्देश्य वैश्विक तेल एवं गैस उद्योग को उत्कृष्ट इंजीनियरिंग समाधान उपलब्ध कराना और उच्चतम गुणवत्ता मानकों का पालन करना रहा है।

उन्होंने विशेष रूप से अपनी पत्नी श्रुति धवन के योगदान को सराहा और कहा कि चुनौतियों से उबरकर कंपनी को इस मुकाम तक पहुँचाने में उनकी अहम भूमिका रही है। उन्होंने आगे बताया कि उनकी बड़ी बेटी, सुहानी धवन, नेतृत्व की तीसरी पीढ़ी के सदस्य के रूप में कंपनी में शामिल हो चुकी हैं, जबकि उनकी छोटी बेटी, गौरीसा धवन, विदेश में अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद, कंपनी में शामिल होने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने आगे कहा, “ये सब साईं बाबा की कृपा और आशीर्वाद से ही संभव हो पाया है।”

मध्य पूर्व के बाजारों पर नजर, लगातार बढ़ा रही मौजूदगी

सुमित धवन के मुताबिक कंपनी आने वाले समय में सऊदी अरब, कुवैत, अल्जीरिया और ओमान जैसे प्रमुख मध्य-पूर्व बाजारों में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है और हाल ही में कुवैत में 3,000 एचपी टेंडर सहित कई नए ऑर्डर प्राप्त किए हैं। अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के बाद कंपनी ने रणनीतिक रूप से अमेरिकी बाजार से ध्यान हटाकर मध्य-पूर्व पर फोकस किया है।
कंपनी उत्तराखंड से एक मजबूत आधार सहित 25 से अधिक फील्ड सर्विस इंजीनियरों की एक समर्पित वैश्विक टीम भी तैनात करती है, जो दुनिया भर के ग्राहकों को सहायता प्रदान करती है।

सतत विकास पर फोकस

सतत विकास की दिशा में, कंपनी ने पिछले तीन वर्षों में अपने सभी उत्पादन संयंत्रों को एकीकृत कर पूरी तरह सौर ऊर्जा आधारित संचालन में परिवर्तित कर दिया है। वर्ष 1980 में स्थापित सारा साए प्राइवेट लिमिटेड दुनिया की सबसे पुरानी सक्रिय अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) 16D लाइसेंस धारक कंपनी है (लाइसेंस संख्या 16D-0003), जिसने अब तक विश्वभर में 2,000 से अधिक बीओपी कंट्रोल यूनिट्स की आपूर्ति की है।