बिजनेस डेस्क: भारत के शेयर बाजार में राजेश एक्सपोर्ट्स घोटाले (Rajesh Exports scam) की गूंज है। पूरा बाजार इस कथित घोटाले से सहमा हुआ है। बाजार के जानकारों की माने तो इस कथित घोटाले के सामने आने के बाद अगले कुछ दिनों तक बाजार में असमंजस की हालत बनी रहेगी। राजेश एक्सपोर्ट्स के ऊपर बैन लगाए जाने के बाद ही एलआईसी LIC के शेयरों में भी मंदी आई है। दरअसल एलआईसी ने राजेश एक्सपोर्ट्स में पैसा लगा रखा है। आइए समझते हैं कि राजेश एक्सपोर्ट्स घोटाला क्या है और राजेश एक्सपोर्ट्स पर सेबी ने बैन क्यों लगाया है ?
SEBI के कदम से दहला बाजार
भारतीय शेयर बाजार और कॉर्पोरेट जगत इस वक्त एक ऐसी खबर से दहल उठा है जिसने निवेशकों के पैरों तले जमीन खिसका दी है। देश की सबसे बड़ी सोना निर्यातक कंपनियों में से एक, Rajesh Export और इसके प्रमोटर राजेश मेहता पर मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। सेबी ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए राजेश मेहता के शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने पर अगले 3 साल के लिए पूरी तरह रोक लगा दी है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद गूगल पर Rajesh Export लगातार ट्रेंड कर रहा है।
क्या है राजेश एक्सपोर्ट्स का पूरा मामला ?
बाजार नियामक सेबी (SEBI) की शुरुआती जांच में जो बातें सामने आई हैं, वे किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं हैं। सेबी के मुताबिक, कंपनी ने वित्त वर्ष 2021 से लेकर वित्त वर्ष 2025 के बीच अपने वित्तीय बही-खातों (Financial Accounts) में कथित तौर पर ₹15.15 लाख करोड़ की भारी हेराफेरी की है।
आरोप है कि Rajesh Export ने अपनी बैलेंस शीट को मजबूत और आकर्षक दिखाने के लिए अपने कंसोलिडेटेड रेवेन्यू (Consolidated Revenue) को बहुत ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। सेबी के 109 पन्नों के आदेश के अनुसार, कंपनी ने जो टर्नओवर दिखाया था, उसका लगभग 99.8% हिस्सा कथित रूप से भ्रामक या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया था।
सेबी की जांच में सामने आए 4 बड़े बिंदु:
- विदेशी कंपनियों का मायाजाल: कंपनी ने दावा किया था कि उसका अधिकांश बिजनेस स्विट्जरलैंड स्थित सब्सिडियरी ‘वैलकैम्बी’ (Valcambi) और अन्य विदेशी इकाइयों से आता है। हालांकि, जांच में इन दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर पाया गया।
- निजी ट्रेडिंग को बताया कंपनी का टर्नओवर: रिपोर्ट के अनुसार, प्रमोटर राजेश मेहता ने अपने पर्सनल अकाउंट से किए गए करीब ₹11,487 करोड़ के डेरिवेटिव सौदों को कंपनी की खरीद-बिक्री के रूप में दर्ज कर दिया था।
- फंड डाइवर्जन का आरोप: रेगुलेटर ने कंपनी के पैसों को प्रमोटर से जुड़ी अन्य संस्थाओं में ट्रांसफर करने (गबन) के भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
- डेटा छिपाने की कोशिश: फोरेंसिक ऑडिट के दौरान कंपनी प्रबंधन ने डेटा प्रोटेक्शन कानूनों की आड़ लेकर जरूरी दस्तावेज और वित्तीय डेटा शेयर करने से मना कर दिया था।
LIC और आम निवेशकों की अटकी सांसें
इस बड़ी कार्रवाई का सीधा असर Rajesh Export के शेयरों पर पड़ा है। जैसे ही यह खबर बाजार में फैली, स्टॉक में 5% का लोअर सर्किट लग गया और शेयर की कीमत गिरकर ₹103.92 के स्तर पर आ गई।
इस गिरावट से सबसे बड़ा झटका देश की दिग्गज सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी (LIC) को लगा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, Rajesh Export में LIC की करीब 10.8% की बड़ी हिस्सेदारी है। एलआईसी के साथ-साथ देश के हजारों रिटेल निवेशकों (Retail Investors) की गाढ़ी कमाई भी इस स्टॉक में फंसी हुई है, जिससे निवेशकों में भारी चिंता का माहौल है।
कंपनी ने दी सफाई: “यह सिर्फ कम्युनिकेशन गैप है”
इस बड़े विवाद और सेबी की कार्रवाई पर Rajesh Export प्रबंधन और राजेश मेहता की ओर से भी बयान जारी किया गया है। कंपनी ने वित्तीय धोखाधड़ी और आंकड़ों की हेराफेरी के सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि यह पूरा मामला सेबी और उनके बीच केवल एक ‘कम्युनिकेशन गैप‘ (बातचीत की कमी) की वजह से खड़ा हुआ है। वे जल्द ही नियामक के समक्ष सभी सही और पुख्ता दस्तावेज पेश कर अपनी स्थिति साफ करेंगे।
भारत का नया ‘सत्यम घोटाला’ है?
यदि सेबी की अंतिम जांच में ये आरोप शत-प्रतिशत सही साबित होते हैं, तो इसे भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में गिना जाएगा। फिलहाल बाजार के जानकारों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कंपनी आने वाले दिनों में अपने खातों को कैसे री-स्टेट (दुरुस्त) करती है और कोर्ट या सेबी से उसे क्या राहत मिलती है।
Rajesh Exports controversy in short
This downturn has hit India’s leading public insurance giant, LIC, pretty hard, with recent figures showing LIC holds about 10% in Rajesh Export. Amidst this major controversy and SEBI’s actions, the Rajesh Export management and Rajesh Mehta have issued statements, completely denying all allegations of financial fraud and data manipulation.
They insist this whole issue is just a result of a communication gap with SEBI and plan to present all the correct documents to clear things up soon. If SEBI’s final investigation substantiates these claims, it could be marked as one of the biggest financial scandals in Indian corporate history. Now, everyone’s watching closely to see how the company plans to rectify its accounts and if it gets any relief from the court or SEBI.

