पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी का देहरादून में निधन, उत्तराखंड ने खोया अपना ‘ईमानदार चेहरा’

उत्तराखंड की राजनीति से मंगलवार को एक ऐसा नाम हमेशा के लिए विदा हो गया, जिसे लोग सादगी, ईमानदारी और अनुशासन का प्रतीक मानते थे। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे बीसी खंडूरी का देहरादून में निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

बीसी खंडूरी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वह उन नेताओं में गिने जाते थे जिन्होंने राजनीति को सेवा का माध्यम माना। सेना से लेकर संसद और मुख्यमंत्री पद तक का उनका सफर अनुशासन, स्पष्ट सोच और जनसेवा की मिसाल रहा। उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद जिन नेताओं ने राज्य की राजनीति को दिशा दी, उनमें बीसी खंडूरी का नाम सबसे प्रमुख नेताओं में लिया जाता है।

सेना से राजनीति तक का सफर

भुवन चंद्र खंडूरी का जन्म 1 अक्टूबर 1934 को पौड़ी गढ़वाल में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा उत्तराखंड में प्राप्त की और बाद में भारतीय सेना में शामिल हुए। सेना में उन्होंने इंजीनियरिंग कोर में अपनी सेवाएं दीं और मेजर जनरल के पद तक पहुंचे। सेना में बिताए गए वर्षों ने उनके व्यक्तित्व को अनुशासन और स्पष्ट प्रशासनिक दृष्टि प्रदान की।

सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े। धीरे-धीरे वह राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा का एक बड़ा चेहरा बन गए। गढ़वाल लोकसभा सीट से कई बार सांसद चुने गए और केंद्र सरकार में सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।

राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास में अहम भूमिका

बीसी खंडूरी को देश में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने वाले नेताओं में भी याद किया जाता है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री रहते हुए उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को गति दी। माना जाता है कि उनके कार्यकाल में सड़क निर्माण और कनेक्टिविटी पर विशेष फोकस किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए।

उनकी कार्यशैली का अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है कि वह फाइलों के निस्तारण और परियोजनाओं की मॉनिटरिंग को लेकर बेहद सख्त माने जाते थे। अधिकारियों के बीच उनकी छवि एक अनुशासित और परिणाम देने वाले मंत्री की थी।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में पहचान

बीसी खंडूरी पहली बार वर्ष 2007 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने। उस समय राज्य में भ्रष्टाचार, प्रशासनिक सुस्ती और विकास की चुनौतियां प्रमुख मुद्दे थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने प्रशासनिक सुधारों पर जोर दिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया।

उनकी सरकार ने पारदर्शिता को बढ़ावा देने और सरकारी कार्यों में जवाबदेही तय करने की कोशिश की। यही कारण था कि आम जनता के बीच उनकी छवि एक साफ-सुथरे नेता की बनी। हालांकि, उनकी कार्यशैली को लेकर पार्टी के भीतर कई बार मतभेद भी सामने आए, लेकिन उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।

वर्ष 2011 में भाजपा ने एक बार फिर उन्हें राज्य की कमान सौंपी। दूसरे कार्यकाल में उन्होंने विकास परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के प्रयास किए गए।

ईमानदारी बनी सबसे बड़ी पहचान

भारतीय राजनीति में जहां नेताओं पर अक्सर भ्रष्टाचार और निजी हितों के आरोप लगते रहे हैं, वहीं बीसी खंडूरी की छवि हमेशा एक ईमानदार नेता की रही। वह सादगीपूर्ण जीवनशैली के लिए जाने जाते थे। राजनीतिक विरोधी भी उनकी व्यक्तिगत ईमानदारी की तारीफ करते थे।

उनकी कार्यशैली में सैन्य अनुशासन की झलक दिखाई देती थी। समय की पाबंदी, निर्णय लेने की क्षमता और प्रशासनिक नियंत्रण उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती थी। यही कारण है कि उत्तराखंड के लोग उन्हें आज भी सम्मान के साथ याद करते हैं।

जनता से जुड़ा हुआ नेता

बीसी खंडूरी का जनता से जुड़ाव हमेशा मजबूत रहा। गढ़वाल क्षेत्र में उनका विशेष प्रभाव था। गांवों और दूरदराज के इलाकों में लोग उन्हें अपना नेता मानते थे। वह अक्सर जनसभाओं में कहते थे कि राजनीति का उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान होना चाहिए, न कि केवल सत्ता प्राप्त करना।

उनके कार्यकाल में पर्वतीय क्षेत्रों के विकास को लेकर कई योजनाएं बनाई गईं। पलायन की समस्या, सड़क संपर्क और रोजगार जैसे मुद्दों पर उन्होंने गंभीरता से काम करने की कोशिश की। हालांकि, सीमित संसाधनों और पहाड़ी राज्य की चुनौतियों के कारण कई योजनाएं अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकीं, लेकिन उनकी मंशा और प्रयासों को हमेशा सकारात्मक रूप में देखा गया।

राजनीतिक विरासत और परिवार

बीसी खंडूरी की राजनीतिक विरासत आज भी उत्तराखंड की राजनीति में दिखाई देती है। उनकी पुत्री ऋतु खंडूरी वर्तमान में उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष के रूप में सक्रिय राजनीति में हैं। परिवार ने भी उनकी राजनीतिक और सामाजिक सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।

बीसी खंडूरी ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में जिस तरह की राजनीति की, वह आज के दौर में दुर्लभ मानी जाती है। उन्होंने कभी आक्रामक बयानबाजी या व्यक्तिगत हमलों की राजनीति नहीं की। उनकी राजनीति विकास, प्रशासन और अनुशासन के इर्द-गिर्द रही।

उत्तराखंड की राजनीति में एक युग का अंत

बीसी खंडूरी का निधन उत्तराखंड की राजनीति में एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है। राज्य निर्माण के बाद जिन नेताओं ने उत्तराखंड को नई पहचान देने की कोशिश की, उनमें उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा। वह उन चुनिंदा नेताओं में शामिल थे जिनकी स्वीकार्यता पार्टी की सीमाओं से परे थी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित कई नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड ने एक दूरदर्शी और ईमानदार नेता खो दिया है। आज जब उत्तराखंड और देश के लोग उन्हें याद कर रहे हैं, तब उनकी सादगी, अनुशासन और जनसेवा का भाव सबसे ज्यादा चर्चा में है। बीसी खंडूरी भले ही अब हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनकी राजनीतिक शैली, प्रशासनिक सोच और साफ छवि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।

एमएस गैलेक्सी मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल देहरादून में नि:शुल्क फाइब्रोस्कैन शिविर

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लिवर रोगों की शुरुआती जांच के लिए विशेषज्ञों की पहल

देहरादून। बढ़ती लिवर संबंधी समस्याओं और फैटी लिवर के मामलों को देखते हुए देहरादून में मंगलवार, 19 मई 2026 को नि:शुल्क फाइब्रोस्कैन शिविर आयोजित किया जाएगा। यह शिविर MS Galaxy Multispeciality Hospital,  कारगी चौक देहरादून में प्रातः 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक आयोजित होगा।

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार फाइब्रोस्कैन एक अत्याधुनिक, दर्द रहित एवं बिना चीरा या सुई वाली जांच तकनीक है, जो सामान्यतः बड़े महानगरों के चुनिंदा अस्पतालों में ही उपलब्ध होती है। अब यही आधुनिक जांच सुविधा एमएस गैलेक्सी मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में कल एक दिन के लिए नि:शुल्क उपलब्ध रहेगी। इस जांच के माध्यम से मात्र 10 मिनट में लिवर में फैट की मात्रा तथा डैमेज की स्थिति का पता लगाया जा सकता है। इसमें न तो बायोप्सी की आवश्यकता होती है और न ही किसी इंजेक्शन की।

गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट एवं हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. दीपक पुरोहित ने बताया कि फैटी लिवर प्रारंभिक अवस्था में प्रायः बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ता रहता है। उन्होंने कहा कि अनियमित खानपान, मोटापा, मधुमेह, मदिरापान तथा खराब लाइफस्टाइल के कारण लिवर संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में समय रहते जांच कराना अत्यंत आवश्यक है।

विशेषज्ञों के अनुसार मधुमेह, मोटापा, उच्च रक्तचाप, थायरॉइड, पीसीओएस, हेपेटाइटिस बी या सी, नियमित मदिरापान करने वाले लोगों तथा जिनके परिवार में लिवर रोग का इतिहास रहा हो, उन्हें विशेष रूप से यह जांच करानी चाहिए।

अस्पताल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जांच से 3 से 4 घंटे पूर्व कुछ भी न खाएं और खाली पेट शिविर में पहुंचें। इच्छुक लोग पूर्व पंजीकरण के लिए 97603 16002, 0135-2979611 एवं 0135-2979311 पर संपर्क कर सकते हैं।

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Delhi-NCR Property Price 2026: दिल्ली-गुरुग्राम में घर खरीदने के लिए अब कितनी सैलरी चाहिए? जानिए EMI और खर्च का पूरा गणित

दिल्ली-एनसीआर में अपना घर खरीदना अब पहले के मुकाबले काफी मुश्किल होता जा रहा है। बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों और महंगी EMI ने मध्यम वर्ग के सपनों पर बड़ा असर डाला है। “Delhi-NCR Property Price 2026” इस समय इंटरनेट पर सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाले विषयों में शामिल है, क्योंकि दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा में घरों की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। खासतौर पर नौकरीपेशा लोगों के बीच यह सवाल तेजी से पूछा जा रहा है कि आखिर दिल्ली-एनसीआर में घर खरीदने के लिए कितनी सैलरी चाहिए?

रियल एस्टेट मार्केट में पिछले कुछ वर्षों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा जैसे शहरों में फ्लैट और अपार्टमेंट की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। कई इलाकों में घरों के दाम इतने ऊपर पहुंच चुके हैं कि अब 15 से 20 लाख रुपये सालाना कमाने वाले लोग भी बजट और EMI को लेकर चिंता में हैं।

Delhi Property News: क्यों बढ़ रही हैं घरों की कीमतें?

दिल्ली-एनसीआर में प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। नए एक्सप्रेसवे, मेट्रो कनेक्टिविटी, कॉर्पोरेट ऑफिस, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और लग्जरी हाउसिंग प्रोजेक्ट्स ने बाजार को तेजी दी है। कोरोना महामारी के बाद लोगों में बड़े और बेहतर घर खरीदने की मांग भी बढ़ी है।

इसके अलावा निर्माण सामग्री की लागत, जमीन की कीमत और श्रम खर्च में बढ़ोतरी ने भी प्रॉपर्टी रेट्स को ऊपर पहुंचा दिया है। यही वजह है कि अब मध्यम वर्ग के लिए दिल्ली-एनसीआर में घर खरीदना पहले जितना आसान नहीं रह गया।

घर खरीदने के लिए कितनी सैलरी चाहिए?

रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति दिल्ली-एनसीआर में आराम से घर खरीदना चाहता है, तो उसकी सालाना आय कम से कम 20 से 25 लाख रुपये होनी चाहिए। यह आंकड़ा लोकेशन और प्रॉपर्टी के प्रकार पर भी निर्भर करता है।

मान लीजिए आप 1 करोड़ रुपये का फ्लैट खरीदना चाहते हैं। ऐसे में आमतौर पर बैंक कुल कीमत का लगभग 80 प्रतिशत तक लोन देते हैं। यानी खरीदार को करीब 20 लाख रुपये डाउन पेमेंट के रूप में खुद देने होंगे। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन, इंटीरियर और अन्य खर्च अलग से होते हैं।

यदि कोई व्यक्ति 80 लाख रुपये का होम लोन लेता है, तो 20 से 25 साल की अवधि में उसकी EMI लगभग 65 हजार से 80 हजार रुपये प्रति माह तक पहुंच सकती है। ऐसे में अच्छी सैलरी होने के बावजूद वित्तीय दबाव बढ़ना तय है।

EMI बना सबसे बड़ा तनाव

आज के समय में घर खरीदने वालों के लिए सबसे बड़ी चुनौती EMI है। बैंक ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के कारण कई लोगों की मासिक किस्तें बढ़ चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यक्ति की कुल मासिक आय का 35 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा EMI में नहीं जाना चाहिए।

लेकिन दिल्ली-एनसीआर में महंगे घरों के कारण कई लोग अपनी सैलरी का 45 प्रतिशत तक EMI में खर्च कर रहे हैं। इससे बचत, निवेश और अन्य जरूरी खर्चों पर असर पड़ रहा है।

उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति की मासिक आय 2 लाख रुपये है और उसकी EMI 75 हजार रुपये है, तो बच्चों की पढ़ाई, मेडिकल खर्च, गाड़ी, इंश्योरेंस और रोजमर्रा की जरूरतों के बाद बचत करना मुश्किल हो सकता है।

Gurgaon Property Price 2026: क्यों तेजी से महंगे हो रहे हैं फ्लैट?

गुरुग्राम में पिछले कुछ वर्षों में Dwarka Expressway, Golf Course Road और New Gurgaon जैसे इलाकों में प्रॉपर्टी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है। कई प्रोजेक्ट्स में फ्लैट की कीमतें 2 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी हैं। यही वजह है कि अब अच्छी सैलरी वाले प्रोफेशनल्स भी EMI और बजट को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।

गुरुग्राम में बड़ी आईटी कंपनियों और मल्टीनेशनल ऑफिसों की मौजूदगी ने भी हाउसिंग डिमांड को तेजी से बढ़ाया है। लग्जरी अपार्टमेंट्स और हाई-एंड सोसाइटियों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी कारण यहां प्रॉपर्टी कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई हैं।

मध्यम वर्ग के लिए क्यों बढ़ रही मुश्किलें?

सबसे बड़ी समस्या यह है कि जितनी तेजी से घरों की कीमतें बढ़ रही हैं, उतनी तेजी से लोगों की सैलरी नहीं बढ़ रही। पिछले पांच वर्षों में कई इलाकों में प्रॉपर्टी कीमतों में 40 से 60 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई है, जबकि नौकरीपेशा लोगों की आय में उतना बड़ा बदलाव नहीं आया।

इस कारण कई परिवार अब किराए के घर में रहना ज्यादा बेहतर विकल्प मान रहे हैं। कई युवा प्रोफेशनल्स का मानना है कि लंबे समय तक भारी EMI देने के बजाय किराए पर रहकर निवेश करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

क्या नोएडा और ग्रेटर नोएडा बेहतर विकल्प हैं?

दिल्ली और गुरुग्राम की तुलना में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र अभी भी कुछ हद तक किफायती माने जाते हैं। यहां अपेक्षाकृत कम कीमत में बड़े फ्लैट मिल जाते हैं। यही वजह है कि कई मध्यम वर्गीय परिवार अब इन इलाकों की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।

हालांकि इन क्षेत्रों में भी पिछले कुछ वर्षों में तेजी से कीमतें बढ़ी हैं। भविष्य में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पूरे होने के बाद यहां भी प्रॉपर्टी और महंगी हो सकती है।

घर खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?

यदि आप 2026 में दिल्ली-एनसीआर में घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:

  • अपनी आय और खर्च का सही विश्लेषण करें
  • डाउन पेमेंट के लिए पर्याप्त बचत रखें
  • बहुत बड़ी EMI लेने से बचें
  • केवल लोकेशन देखकर जल्दबाजी में फैसला न लें
  • बैंक ब्याज दरों की तुलना जरूर करें
  • भविष्य की नौकरी स्थिरता को ध्यान में रखें

क्या भविष्य में स्थिति सुधरेगी?

रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले वर्षों में भी दिल्ली-एनसीआर में प्रॉपर्टी की मांग बनी रह सकती है। हालांकि यदि आय में तेजी से वृद्धि होती है और सरकार अफोर्डेबल हाउसिंग योजनाओं पर फोकस बढ़ाती है, तो मध्यम वर्ग को कुछ राहत मिल सकती है।

इसके अलावा होम लोन ब्याज दरों में कमी आने पर भी घर खरीदना थोड़ा आसान हो सकता है। फिलहाल बाजार में तेजी बनी हुई है और प्रॉपर्टी निवेशकों की रुचि लगातार बढ़ रही है।

FAQs

दिल्ली-NCR में घर खरीदने के लिए कितनी सैलरी होनी चाहिए ?

विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली-NCR में आराम से घर खरीदने के लिए कम से कम 20 से 25 लाख रुपये सालाना आय होना बेहतर माना जाता है।

क्या 2026 में गुरुग्राम में प्रॉपर्टी और महंगी होगी ?

रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और कॉर्पोरेट डिमांड बढ़ने के कारण गुरुग्राम में कीमतें आगे भी बढ़ सकती हैं।

क्या किराए पर रहना घर खरीदने से बेहतर है ?

यदि आपकी नौकरी स्थिर नहीं है या डाउन पेमेंट के लिए पर्याप्त बचत नहीं है, तो किराए पर रहना फिलहाल बेहतर विकल्प हो सकता है।

दिल्ली-एनसीआर में घर खरीदना अब केवल सपना नहीं बल्कि एक बड़ा वित्तीय निर्णय बन चुका है। बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों, महंगी EMI और सीमित बचत के कारण मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा दबाव में दिखाई दे रहा है। अच्छी सैलरी पाने वाले लोग भी अब घर खरीदने से पहले कई बार सोचने को मजबूर हैं।

ऐसे में सही फाइनेंशियल प्लानिंग, सही लोकेशन और संतुलित EMI ही भविष्य में सुरक्षित निवेश का आधार बन सकती है।

नोट करें – ये लेख एक सामान्य अध्ययन के अनुसार लिखा गया है।

DA Hike Latest Update 2026: कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत, DA को लेकर सरकार ने लिया बड़ा फैसला

केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए साल 2026 की शुरुआत बड़ी खुशखबरी लेकर आई है। लंबे समय से महंगाई भत्ते (Dearness Allowance – DA) में बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को आखिरकार राहत मिल गई है। ताजा अपडेट के अनुसार सरकार ने डीए को बढ़ाकर 60% कर दिया है। इस फैसले से केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में अच्छा खासा इजाफा देखने को मिलेगा, वहीं पेंशनर्स की मासिक पेंशन भी बढ़ जाएगी।

महंगाई लगातार बढ़ रही है और रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च पहले की तुलना में काफी अधिक हो चुका है। ऐसे में सरकार द्वारा डीए में वृद्धि को कर्मचारियों के लिए आर्थिक राहत के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में इसका असर कर्मचारियों की खरीद क्षमता और जीवन स्तर पर भी दिखाई देगा।

क्या होता है DA?

डीए यानी Dearness Allowance एक प्रकार का भत्ता होता है जो सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को महंगाई से राहत देने के लिए दिया जाता है। इसका उद्देश्य बढ़ती महंगाई के कारण कर्मचारियों की आय पर पड़ने वाले असर को कम करना होता है।

सरकार हर साल दो बार डीए की समीक्षा करती है। सामान्य तौर पर जनवरी और जुलाई से लागू होने वाली बढ़ोतरी की घोषणा मार्च और सितंबर-अक्टूबर के आसपास की जाती है। डीए की गणना मुख्य रूप से AICPI Index यानी All India Consumer Price Index के आधार पर की जाती है।

60% DA होने का क्या मतलब है?

यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 30,000 रुपये है और डीए 60% हो गया है, तो उसे हर महीने 18,000 रुपये केवल महंगाई भत्ते के रूप में मिलेंगे। पहले यदि डीए 55% था तो कर्मचारी को 16,500 रुपये मिल रहे थे। यानी हर महीने 1,500 रुपये का अतिरिक्त लाभ होगा।

इसी प्रकार पेंशनर्स को भी उनकी बेसिक पेंशन के अनुसार बढ़ा हुआ डीआर (Dearness Relief) मिलेगा। इससे लाखों रिटायर्ड कर्मचारियों को आर्थिक मजबूती मिलेगी।

किसे मिलेगा फायदा?

डीए में हुई यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से इन लोगों को फायदा पहुंचाएगी:

  • केंद्रीय सरकारी कर्मचारी
  • केंद्र सरकार के पेंशनर्स
  • रेलवे कर्मचारी
  • डाक विभाग के कर्मचारी
  • रक्षा सेवाओं से जुड़े कर्मचारी
  • कुछ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) के कर्मचारी

राज्य सरकारों के कर्मचारी भी इस फैसले के बाद उम्मीद कर रहे हैं कि उनके राज्यों में भी जल्द डीए बढ़ाया जा सकता है।

कर्मचारियों की सैलरी में कितना होगा इजाफा?

डीए बढ़ने के बाद अलग-अलग वेतनमान वाले कर्मचारियों को अलग-अलग लाभ मिलेगा। उदाहरण के तौर पर:

बेसिक सैलरी55% DA पर राशि60% DA पर राशिमासिक बढ़ोतरी
₹18,000₹9,900₹10,800₹900
₹25,000₹13,750₹15,000₹1,250
₹40,000₹22,000₹24,000₹2,000
₹56,100₹30,855₹33,660₹2,805

इस बढ़ोतरी का असर सीधे कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी पर पड़ेगा। वहीं एरियर मिलने की स्थिति में कर्मचारियों को एकमुश्त बड़ी रकम भी मिल सकती है।

पेंशनर्स को भी मिलेगी राहत

सरकार के इस फैसले से केवल नौकरी कर रहे कर्मचारियों को ही नहीं बल्कि पेंशनर्स को भी बड़ा फायदा होगा। Dearness Relief (DR) में बढ़ोतरी होने से रिटायर्ड कर्मचारियों की मासिक पेंशन बढ़ जाएगी।

महंगाई के इस दौर में बुजुर्ग पेंशनर्स के लिए यह फैसला काफी राहत भरा माना जा रहा है। दवाइयों, इलाज और घरेलू खर्चों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच अतिरिक्त राशि उनके लिए सहायक साबित होगी।

DA बढ़ाने के पीछे क्या है वजह?

विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कुछ समय में महंगाई दर में लगातार वृद्धि देखी गई है। खाने-पीने की चीजों, पेट्रोल-डीजल, गैस सिलेंडर और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों में तेजी आई है। इसी को देखते हुए सरकार ने कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए डीए में बढ़ोतरी का फैसला लिया है।

AICPI Index के आंकड़े भी लगातार ऊपर जा रहे थे, जिससे यह लगभग तय माना जा रहा था कि इस बार डीए में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

क्या 8वें वेतन आयोग की तैयारी भी शुरू?

डीए के 60% तक पहुंचने के बाद अब कर्मचारियों के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। आमतौर पर जब डीए एक निश्चित स्तर तक पहुंच जाता है तो नए वेतन आयोग की मांग जोर पकड़ने लगती है।

हालांकि सरकार की ओर से अभी तक 8वें वेतन आयोग को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन कर्मचारी संगठनों का कहना है कि आने वाले समय में इस पर विचार किया जा सकता है।

राज्य सरकारों पर भी बढ़ेगा दबाव

केंद्र सरकार द्वारा डीए बढ़ाने के बाद अब राज्य सरकारों पर भी अपने कर्मचारियों का डीए बढ़ाने का दबाव बढ़ सकता है। कई राज्य पहले ही केंद्र के बराबर डीए देने की दिशा में कदम उठा चुके हैं।

यदि राज्यों द्वारा भी डीए में बढ़ोतरी की जाती है तो करोड़ों कर्मचारियों और पेंशनर्स को इसका लाभ मिलेगा।

अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर?

विशेषज्ञ मानते हैं कि कर्मचारियों की सैलरी बढ़ने से बाजार में खर्च बढ़ेगा। लोग ज्यादा खरीदारी करेंगे जिससे उपभोक्ता मांग में सुधार हो सकता है। इसका फायदा व्यापार और बाजार दोनों को मिलेगा।

हालांकि दूसरी ओर सरकार पर वित्तीय बोझ भी बढ़ेगा क्योंकि डीए बढ़ने से सरकारी खजाने से हजारों करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होंगे। फिर भी सरकार इसे कर्मचारियों की जरूरत और महंगाई से राहत के तौर पर देख रही है।

कर्मचारियों में खुशी का माहौल

डीए बढ़ने की खबर सामने आते ही कर्मचारियों और पेंशनर्स में खुशी का माहौल देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह फैसला समय की जरूरत था और इससे लाखों परिवारों को राहत मिलेगी।

कई कर्मचारियों का मानना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में डीए वृद्धि से घरेलू बजट संभालने में मदद मिलेगी। खासतौर पर मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह निर्णय काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

घर में पैसा क्यों नहीं टिकता ? जानिए 7 बड़े कारण और आसान उपाय

क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि पैसा आता तो है लेकिन महीने के अंत तक बचता नहीं? पैसे की तंगी महीने के अंत में आपको परेशान करने लगती है। कई लोग मेहनत तो बहुत करते हैं, लेकिन फिर भी आर्थिक परेशानियां उनका पीछा नहीं छोड़तीं। ऐसे में लोग अक्सर सोचते हैं — घर में पैसा क्यों नहीं टिकता ? तो चलिए आपको आज बताते हैं कि आखिर घर में पैसा टिके इसके लिए क्या करना चाहिए।

हिंदू धर्म, वास्तु और ज्योतिष शास्त्र में ऐसे कई कारण बताए गए हैं जो धन के रुकने में बाधा बनते हैं। अच्छी बात यह है कि कुछ छोटी आदतों और उपायों से आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है।

इस लेख में हम आपको बताएंगे कि –

  • घर में धन न रुकने के कारण क्या हो सकते हैं ?
  • वास्तु से जुड़े दोष
  • पैसा बचाने के आसान उपाय

1. गलत खर्च करने की आदत

पैसा न टिकने का सबसे बड़ा कारण अनियंत्रित खर्च है।
अगर व्यक्ति बिना योजना के खर्च करता है, तो चाहे कितनी भी कमाई हो, बचत नहीं हो पाती।

क्या करें?

  • हर महीने बजट बनाएं
  • अनावश्यक खरीदारी कम करें
  • income का कुछ हिस्सा saving में रखें

आज के समय में financial discipline बेहद जरूरी है।

2. घर का वास्तु दोष

कई बार वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की गलत दिशा और अव्यवस्था धन के प्रवाह को प्रभावित करती है। आपके लिए ये समझना भी जरूरी है कि कहीं आपकी मेहनत का पैसा आपके घर के गलत वास्तु दोष की वजह से पानी की तरह बह तो नहीं जा रहा है।

ये गलतियां न करें:

  • घर में टूटी चीजें रखना
  • मुख्य द्वार के पास गंदगी
  • उत्तर दिशा बंद रखना
  • खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान जमा करना

वास्तु उपाय :

  • घर साफ रखें
  • उत्तर-पूर्व दिशा हल्की और खुली रखें
  • तिजोरी दक्षिण की दीवार से सटाकर रखें

धन बढ़ाने के वास्तु नियम आज भी काफी लोग अपनाते हैं।

3. घर में नकारात्मक ऊर्जा

अगर घर में रोज़ झगड़े, तनाव और नकारात्मक माहौल रहता है, तो उसका असर आर्थिक स्थिति पर भी पड़ता है।

सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के उपाय:

  • सुबह दीपक जलाएं
  • कपूर या धूप का प्रयोग करें
  • घर में नियमित पूजा करें
  • सकारात्मक बातें करें

मानसिक शांति और धन का गहरा संबंध माना जाता है।

4. धन का सम्मान न करना

हिंदू धर्म में धन को देवी माँ लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। इसलिए ये जरूरी है कि अगर आप हिंदू धर्म को मानने वाले हैं तो धन का सम्मान करना सीखें। यूं भी हमारे बड़े – बुजुर्गों ने भी हमेशा धन का सम्मान करने की सीख हमें दी है। तो आपको फिर एक बार उसी सीख को याद करना है और धन का सम्मान करना है।

अगर व्यक्ति:

  • पैसे को इधर-उधर फेंकता है
  • अन्न की बर्बादी करता है
  • या धन का अपमान करता है

तो इसे अशुभ माना जाता है।

क्या करें?

  • पैसे को व्यवस्थित रखें
  • बटुए को साफ रखें
  • अन्न का सम्मान करें

5. सुबह की गलत आदतें

सुबह देर तक सोना और आलस्य भी आर्थिक प्रगति में बाधा माना गया है।

अच्छी सुबह की आदतें:

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठें
  • सूर्य को अर्घ्य दें
  • सकारात्मक सोच रखें
  • सुबह ध्यान या प्रार्थना करें

सफल लोगों की सुबह की आदतें उनकी productivity बढ़ाने में मदद करती हैं। हमने इसपर एक डिटेल आर्टिकल लिखा है। आप चाहें तो उसे भी देख सकते हैं कि सुबह उठकर सबसे पहले क्या करें ?

6. ज्योतिषीय कारण

कई बार कुंडली में ग्रह दोष भी आर्थिक समस्याओं का कारण बनते हैं। विशेष रूप से

  • शनि दोष
  • राहु-केतु की स्थिति
  • कमजोर धन योग

आसान उपाय :

  • शनिवार को दान करें
  • पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं
  • नियमित मंत्र जाप करें

हालांकि किसी भी उपाय से पहले विशेषज्ञ सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

7. दिखावे की जीवनशैली से दूर रहें

आज सोशल मीडिया के दौर में लोग अक्सर दिखावे के लिए जरूरत से ज्यादा खर्च करने लगते हैं। कई बार आपको जिन चीजों की जरूरत नहीं भी है आप उनपर खर्च करने लगते हैं। यही आदत धीरे-धीरे आर्थिक दबाव बढ़ाती है।

क्या करें?

  • जरूरत और इच्छा में फर्क समझें
  • long-term financial goals बनाएं
  • emergency fund तैयार रखें

घर में पैसा टिकाने के आसान उपाय

  • घर साफ रखें
  • रोज़ पूजा करें
  • धन का सम्मान करें
  • बचत की आदत डालें
  • वास्तु नियमों का पालन करें
  • नकारात्मक सोच से दूर रहें

घर में पैसा टिके इसके लिए कुछ जरूरी बातें ध्यान रखें

  • घर में पैसा क्यों नहीं टिकता?

गलत खर्च, वास्तु दोष, नकारात्मक ऊर्जा और खराब financial habits इसके मुख्य कारण हो सकते हैं।

  • धन बढ़ाने के लिए कौन सा वास्तु उपाय करें?

उत्तर दिशा साफ रखें और घर में टूटी चीजें न रखें।

  • क्या सुबह जल्दी उठने से आर्थिक लाभ होता है ?

सुबह जल्दी उठना discipline और productivity बढ़ाने में मदद करता है, जिससे सफलता की संभावना बढ़ती है।

नोट करें – ये वास्तु टिप्स पब्लिक डोमेन में उपलब्ध सामान्य वास्तु उपायों के आधार पर लिखे गए हैं। ये वेबसाइट इन उपायों को लेकर किसी भी प्रकार का दावा नहीं करती है। इन्हे अपनाना आपके अपने विवेक पर निर्भर है।

नीट परीक्षा रद्द करने का निर्णय छात्र हित में, राजनीति न करे कांग्रेस: मनवीर चौहान

देहरादून। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र द्वारा नीट की परीक्षा को रद्द करने का फैसला छात्रों के हित मे है और कांग्रेस को इस पर राजनीति से बाज आना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए यह आवश्यक कदम है।

कड़ी कार्रवाई के लिए संकल्पबद्ध

चौहान ने कहा कि भाजपा पेपर लीक माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए संकल्पबद्ध है और दोषियों को दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि देश भर मे फैले रेकैट को नेश्तानाबूत करने के लिए जांच एजेंसी कई राज्यों मे छापेमारी कर रही है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की आशंका की भनक लगते ही परीक्षा रद्द और सीबीआई जांच की संस्तुति की गयी जिससे स्पष्ट है कि सरकार की मंशा साफ है।

जल्द होगी परीक्षा

चौहान ने कहा कि दोषपूर्ण परीक्षा का परिणाम घोषित होने से बेहतर है कि परीक्षा ही रद्द की गयी है और शीघ्र ही पारदर्शी तरीके से परीक्षा होगी। उन्होंने कहा कि मामले मे मुख्य आरोपी को पकड़ा गया है, लेकिन जाँच एजेंसी इसकी तह तक पहुँचकर हर अपराधी को कानून के दायरे मे लेने को जुटी है। उन्होंने कहा कि जो नाम भी मामले मे आये है उनका कोई राजनैतिक कनेक्शन सामने नही आया है और कांग्रेस एक एजेंडे के तहत आरोप प्रत्यारोप की राजनीति कर रही है।

माफिया को बख्शा नहीं जाएगा

चौहान ने कहा कि छात्र हित मे इस संवेदनशील मुद्दे पर कांग्रेस सहित सभी दलों को राजनीति से बाज आना चाहिए। उन्होंने कहा कि उतराखंड मे भी नकल माफिया की कमर तोड़ने के लिए धामी सरकार ने न केवल कानून बनाया, बल्कि माफिया पर कड़ी कार्यवाही की है। लेकिन माफिया अगर, किसी तरह से पारदर्शिता मे अवरोध उत्पन्न करता है तो उसे बख्शा नही जायेगा। उन्होंने युवाओं को आश्वस्त किया कि प्रदेश या देश मे उनके साथ अन्याय नही होने दिया जायेगा और नकल माफिया के गठबंधन को तोड़ने के लिए हर संभव कदम उठाये जा रहे है। केंद्र सरकार माफिया पर लगाम कसने के लिए प्रतिबद्ध है और कांग्रेस को इस पर राजनीति करने की जरूरत नही है।

NEET पेपर लीक पर कांग्रेस का हमला, बताया भाजपा की कारस्तानी

कांग्रेस ने NEET पेपर लीक पर भाजपा को निशाने पर लिया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा ने कहा है कि ये पेपर लीक नहीं बल्कि नीलामी है। इसमें बीजेपी की सरकारें सीधे तौर पर शामिल हैं।

अबकी बार पेपर लीक सरकार

गुरुवार को देहरादून में कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय में राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा ने नीट परीक्षा पेपर लीक को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला, उन्होंने कहा कि हमारे आने वाली पीढ़ी का भविष्य अंधकार में डालने का काम कर रही है सरकार, पहले तो ये समझना होगा की एनटीए क्या है ये कोई सरकारी एजेंसी नहीं है ये सिर्फ एक एनजीओ है सरकार के द्वारा बनायी गई टेस्टिंग एजेंसी नहीं है,ये २०१७ में मोदी सरकार ने बनायी थी बड़ी बड़ी बातें की थी मोदी सरकार ने पर अबकी बार पेपर लीक सरकार मिली है जनता को,२०१४ के बाद से केंद्र और राज्य सरकारों में लगभग ८९ पेपर्स लीक हुए हैं,जिसमे से लगभग ५८ पेपर दुबारा से करवाए गए।

भाजपा और RSS ने मिलकर बनाई NTA

राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा ने कहा की महत्वपूर्ण प्रश्न ये है की किसने बनायी ये एनटीए, ये एनटीए भाजपा और आरएसएस के कुछ लोगों ने मिलकर बनायी और अपने चहेते लोगों को उसमे रख लिए, जब ये एजेंसी २०१७ में बनी तभी इस पर कई सवाल खड़े हुए थे २०१७ से पहले ये एग्जाम सीबीएसई कराया करती थी पर इन लोगो ने जो व्यापम घोटाले वाले हैं जिसमे ६० से ज़्यादा जाने चली गई थी मध्य प्रदेश का घोटाला तो ये व्यापम पार्ट २ चल रहा है,२०१५ से २०१७ तक इन्होंने देखा की इस तरीक़े से तो हम बैक एंट्री से इन्हें नहीं ले पाएंगे तब जाकर ये षड्यंत्र रचा गया,२०१७ में एसएससी का पहल पेपर लीक हुआ ठंड में एसएससी के बाहर बच्चे बैठे थे, फिर एनटीए बनी और इसने १४ पेपर कंडक्ट कराए जिसमे ६ पेपर लीक हुए जो रिपोर्टेड है सामने आए।

किसने दी पॉवर, किसी को नहीं पता

आलोक शर्मा ने कहा कि अब समझना ये है कि एनटीए को किसने पॉवर दी इतनी बड़ी बड़ी परीक्षाएं आयोजित करने की क्या इन्हें एमएचआरडी ने पॉवर दी केंद्र की सरकार ने पॉवर दी किसने पॉवर दी आज तक देश को नहीं पता, २१ में नीट कनपटी आउट २४ में आउट, २६ में आउट और जो लोग सम्मिलित है वो मुख्यतः भाजपा के नेता है जिनका पूरा परिवार पिछले साल सेलेक्ट हुआ है तो तथ्य ये सामने आ रहा है की पिछले साल भी पेपर लीक हुआ है,नीट जैसा एग्जाम जिसमे २४ से ३० लाख बच्चे परीक्षा देते हैं माता पिता पैसे लगाते हैं, इस बार भी ये पेपर पिछले १५ दिनों से वॉट्स ऐप ग्रुप पर सर्कुलेट हो रहा था कई लोगों ने शिकायत की पर कोई कार्यवाही नहीं हुआ पेपर ३ को हुआ और चार दिन लग गए सच सामने आने में और एनटीए को एक्शन लेने में जबसे एनटीए का गठन हुआ है तबसे ये एजेंसी संदेह के घेरे में रही है उसके बावजूद कोई भी अधिकारी जेल के पीछे नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में हो जांच

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि  नीट परीक्षा को रद्द करते हुए पेपर लीक मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी मे कराई जाय। मानव संसाधन विकास मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफा दें तथा मामले में जेपीसी गठित की जाय साथ ही 2024  की  नीट परीक्षा की भी जांच कराई जाय। 

पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए बाबा केदार के दर्शन, 64 टन से अधिक सॉलिड वेस्ट निस्तारण के लिए भेजा

श्री केदारनाथ धाम यात्रा-2026 के सफल एवं सुव्यवस्थित संचालन को लेकर जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन पूरी तत्परता के साथ कार्य कर रहे हैं। इसी क्रम में गुरुवार को जिला कार्यालय सभागार में जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग विशाल मिश्रा एवं पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग नीहारिका तोमर द्वारा संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित कर यात्रा व्यवस्थाओं एवं अब तक की प्रगति की विस्तृत जानकारी मीडिया प्रतिनिधियों को दी गई।

पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

जिलाधिकारी ने बताया कि 22 अप्रैल 2026 से प्रारंभ हुई श्री केदारनाथ धाम यात्रा में अब तक 5 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा एवं सुगम आवागमन हेतु प्रशासन द्वारा सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखी गई हैं। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्ग से लेकर धाम तक विभिन्न विभाग आपसी समन्वय के साथ निरंतर कार्य कर रहे हैं, जिससे यात्रा सुचारु रूप से संचालित हो रही है।

60 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को दी OPD और इमरजेंसी सेवाएं

स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी देते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि अब तक 60 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को ओपीडी एवं इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ दिया जा चुका है, जबकि 51,939 श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की गई है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों में त्वरित कार्रवाई करते हुए हेली रेस्क्यू के माध्यम से 26 श्रद्धालुओं तथा दंडी-कंडी के माध्यम से 70 यात्रियों को सुरक्षित रेस्क्यू कर उच्च चिकित्सालयों तक पहुंचाया गया है।

64 टन से अधिक सॉलिड वेस्ट निकाला

स्वच्छता व्यवस्थाओं पर जानकारी देते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि जिला पंचायत, नगर पालिका, नगर पंचायत एवं सुलभ इंटरनेशनल द्वारा यात्रा मार्ग पर लगातार सफाई अभियान संचालित किया जा रहा है। पैदल यात्रा मार्ग पर 412 पर्यावरण मित्र एवं 30 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। इसके अतिरिक्त यात्रा मार्ग पर 350 से अधिक शौचालय एवं 600 से अधिक डस्टबिन स्थापित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि कॉम्पैक्टर मशीनों के माध्यम से कूड़े को वैज्ञानिक निस्तारण एवं रीसाइक्लिंग सुनिश्चित करने हेतु भेजा जा रहा है तथा अब तक 64 टन से अधिक ठोस अपशिष्ट निस्तारण हेतु भेजा जा चुका है।

हेली सेवाओं के संबंध में जिलाधिकारी ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। मौसम प्रतिकूल होने की स्थिति में हेली सेवाओं को अस्थायी रूप से रोका जाता है तथा मौसम अनुकूल होने पर ही संचालन किया जा रहा है। अब तक 18,840 से अधिक श्रद्धालु हेली सेवाओं के माध्यम से बाबा केदार के दर्शन हेतु धाम पहुंचे हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि केदारनाथ धाम एवं यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं के ठहरने हेतु पर्याप्त आवासीय व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। वहीं पेयजल, विद्युत, स्वास्थ्य, संचार एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं को सुचारु बनाए रखने हेतु संबंधित विभाग निरंतर निगरानी बनाए हुए हैं।

जारी है लगातार चेकिंग

यात्रियों की सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को लेकर पुलिस एवं परिवहन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से लगातार चेकिंग अभियान संचालित किया जा रहा है। अप्रैल माह में नियमों का उल्लंघन करने वाले 409 वाहनों के चालान किए गए, जिनसे 11.03 लाख रुपये प्रशमन शुल्क वसूला गया। यात्रा मार्ग एवं केदारनाथ क्षेत्र में 14 सेक्टर मजिस्ट्रेट सहित पर्याप्त संख्या में पुलिस बल, फायर सर्विस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ एवं म्यूल टास्क फोर्स की तैनाती की गई है।

जिलाधिकारी ने बताया कि घोड़ा-खच्चर संचालन को भी व्यवस्थित एवं सुरक्षित बनाए रखने के लिए लगातार चिकित्सा परीक्षण कराए जा रहे हैं तथा पशुओं हेतु यात्रा मार्ग पर गर्म पानी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

पुलिस भी लगातार कर रही मॉनिटरिंग

पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर ने प्रेस वार्ता के दौरान जानकारी देते हुए बताया कि धाम क्षेत्र एवं यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने हेतु पर्याप्त पुलिस बल एवं आपदा प्रबंधन टीमें तैनात हैं। पुलिस एवं परिवहन विभाग द्वारा वाहनों की संयुक्त चेकिंग के साथ-साथ यात्रियों के सामान एवं बैगों की भी गहन जांच की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की संदिग्ध सामग्री यात्रा में न लाई जा सके।

उन्होंने बताया कि पुलिस द्वारा यात्रा मार्ग पर 07 खोया-पाया केंद्र स्थापित किए गए हैं। अब तक 180 श्रद्धालुओं को उनके बिछड़े परिजनों से मिलाया गया है। इसके अतिरिक्त 5 खोए हुए मोबाइल फोन तथा 60 पर्स एवं बैग यात्रियों को वापस लौटाए गए हैं। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ सहित प्रशासन की टीमें भी लगातार सक्रिय रहकर यात्रियों को आपात स्थितियों में त्वरित सहायता प्रदान कर रही हैं।

सीएम धामी ने 370 अभ्यर्थियों को सौंपे नियुक्ति पत्र, जन सेवा के संकल्प की दिलाई याद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में कुल 307 नव नियुक्त अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। जिसमें 243 चिकित्सा अधिकारियों, 42 फार्मासिस्ट, उद्यान विभाग के अन्तर्गत 22 प्रयोगशाला सहायकों एवं मशरूम पर्यवेक्षकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी चयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह नियुक्ति पत्र केवल रोजगार का दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रदेश की सवा करोड़ जनता की सेवा का संकल्प पत्र है।

समर्पण और सेवा दायित्वों का करें निर्वहन

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैसे भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण राज्य में स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में संकट की घड़ी में जनता की पहली उम्मीद स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्मिक ही होते हैं। उन्होंने नव नियुक्त चिकित्सा अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों से कहा कि वे संवेदनशीलता, समर्पण और सेवा भावना के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। आयुष्मान योजना के माध्यम से लाखों परिवारों को उपचार का लाभ मिल रहा है। प्रदेश में अब तक 62 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड वितरित किए जा चुके हैं तथा लगभग 12 लाख मरीजों का 2200 करोड़ रुपये से अधिक का कैशलेस उपचार किया जा चुका है।

मेडिकल कॉलेजों का निर्माण तेजी से

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए मेडिकल कॉलेजों का निर्माण और संचालन तेजी से किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश में 5 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं, जबकि 2 निर्माणाधीन हैं। इसके साथ ही 9 नर्सिंग कॉलेज और 3 नर्सिंग स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। देहरादून, हल्द्वानी और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है तथा हल्द्वानी में आधुनिक कैंसर संस्थान का निर्माण प्रगति पर है। दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए टेलीमेडिसिन एवं हेली एंबुलेंस सेवाएं भी संचालित की जा रही हैं।

किसानों की आय बढ़ाने की कोशिश जारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कृषि एवं उद्यानिकी को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है। कीवी, ड्रैगन फ्रूट, हाई डेंसिटी एप्पल, मशरूम उत्पादन तथा मधुमक्खी पालन जैसी उच्च मूल्य फसलों को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि नव नियुक्त युवा प्रदेश को कृषि नवाचार और आधुनिक उद्यानिकी के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सभी भर्ती प्रक्रियाएं पूर्ण पारदर्शिता से हो रही है। प्रदेश में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। इसका परिणाम है कि पिछले साढ़े चार वर्षों में 32 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिली हैं।


उत्तराखंड में जनगणना का काम संतोषजनक, महा रजिस्ट्रार ने खुद परखी व्यवस्थाएं

भारत के महा रजिस्ट्रार और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने उत्तराखंड में जनगणना कार्य की प्रगति पर संतोष प्रकट किया है। उन्होंने बृहस्पतिवार को देहरादून के देहराखास इलाके के कुछ घरों में पहुंचकर जनगणना कार्य की प्रक्रिया को करीब से देखा और फील्ड स्टाॅफ से जानकारी हासिल की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सहित पूरे देश में जनगणना कार्य को लेकर लोग जिस तरह से उत्साह दिखा रहे हैं, वह उल्लेखनीय है।

जनगणना के कार्य में पहली बार डिजिटल प्रयोग

मीडिया से बातचीत में महा रजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त ने कहा कि आजाद भारत के इतिहास में यह पहला अवसर है, जबकि जनगणना की प्रक्रिया को डिजिटल फॉर्मेट पर लाया जा रहा है। इससे आंकड़ों की गुणवत्ता बेहतर रहेगी और गलतियों को आसानी से सुधारा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि पहली बार स्वगणना का विकल्प दिया गया है। पूरे देश में स्वगणना के विकल्प का इस्तेमाल करने वालों की संख्या का करोड़ में पहुंचना बताता है कि नए प्रयोग को लोग स्वीकार रहे हैं। भविष्य में उम्मीद की जा सकती है कि जनगणना के कार्य में स्वगणना और मजबूत भूमिका निभाएगी।

चुनौतीपूर्ण, लेकिन जल्द नतीजे निकलने की उम्मीद

महा रजिस्ट्रार एवं आयुक्त जनगणना मृत्युंजय कुमार नारायण ने एक सवाल के जवाब में कहा कि डिजिटल माध्यम से जनगणना बेहद चुनौतीपूर्ण है। इसके बावजूद, इस अभियान में सभी लोग उत्साहपूर्वक जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि ऑफलाइन डाटा एकत्रित करने का विकल्प भी फील्ड स्टाफ के पास है, लेकिन इसे अनिवार्य रूप से डिजिटल फॉर्मेट में लाया जा रहा है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि देश में कहीं भी कानून-व्यवस्था या फिर तकनीकी वजह से जनगणना कार्य में दिक्कत आने की कोई सूचना नहीं है। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यम से जनगणना के चलते इसके परिणाम जल्द निकलने की उम्मीद की जा सकती है।

‘कोई दिक्कत तो नहीं, अच्छे से समझा रहे हो ना! ‘

देहराखास में जनगणना कार्य में व्यस्त सुपरवाइजर भूपेंद्र सिंह बिष्ट और प्रगणक हसीना जैदी से महा रजिस्ट्रार ने पूछा-कोई दिक्कत तो नहीं आ रही। लोगों को अच्छे से समझा रहे हो कि उनकी सूचनाओं को गोपनीय रखा जाएगा। फील्ड स्टॉफ ने उन्हें सब कुछ सुचारू ढंग से चलने की जानकारी ही। महा रजिस्ट्रार ने आज देहराखास में जनगणना के कार्य को नजदीक से देखा। स्थानीय निवासी हर्षिता तिवारी और अर्पणा शुक्ला ने कहा कि जनगणना कार्य में सहयोग जरूरी है। यह देश हित का मामला है।

जनगणना के नए कार्यालय भवन का उद्घाटन

महा रजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने देहराखास में जनगणना कार्य निदेशालय के नए कार्यालय भवन का उद्घाटन किया। अभी तक जनगणना निदेशालय का कार्य मातावाला बाग स्थित किराये के भवन से चल रहा था। इस मौके पर जनगणना कार्य सचिव दीपक कुमार, निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव, संयुक्त निदेशक शैलेंद्र सिंह नेी, उपनिदेशक तान्या सेठ, प्रवीण कुमार, आरके बनवारी, सहायक निदेशक संजीव कुमार व अरविंद कुमार सिंह उपस्थित थे।