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अरविंद पांडेय ने वायरल लेटर पर तोड़ी चुप्पी, गणेश गोदियाल को लेकर दिया ये बड़ा बयान

उधम सिंह नगर के गदरपुर से बीजेपी के विधायक अरविंद पांडेय ने अपने कथित वायरल लेटर पर चुप्पी तोड़ी है। अरविंद पांडेय ने कहा है कि जो लेटर वायरल हो रहा है वो उन्होंने लिखा ही नहीं है। अरविंद पांडेय ने इन वायरल पत्रों को दिखाते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल पर भी निशाना साधा है।

मैंने लिखा ही नहीं- अरविंद पांडेय

उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से वायरल हो रहे है बीजेपी विधायक अरविंद पांडेय के पत्र पर अब खुद उनका ही बयान सामने आया है। सोमवार को देहरादून स्थित बीजेपी के प्रदेश मुख्यालय में अरविंद पांडेय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। अरविंद पांडेय ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि जो पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है वो उन्होंने लिखा ही नहीं है।

गणेश गोदियाल पर निशाना

यही नहीं अरविंद पांडेय ने इन पत्रों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल पर निशाना साधा है। अरविंद पांडेय ने कहा है कि गणेश गोदियाल ने फर्जी पत्रों के सहारे आरोप लगाए हैं जो निराधार हैं।

क्या लिखा था वायरल पत्रों में

दरअसल हाल हां में सोशल मीडिया में दो पत्र वायरल हो रहे थे। इन पत्रों को अरविंद पांडेय के लेटर हेड पर लिखा गया था। इन दो पत्रों में कथित रूप से अरविंद पांडेय ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर दुर्भावना से काम करने का आरोप लगाया था। हालांकि ये पत्र किसे लिखा गया इसकी जानकारी नहीं मिल पाई थी। इन वायरल पत्रों को गणेश गोदियाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाया था और इन पत्रों के बहाने बीजेपी में चल रही अंदरूनी खींचतान पर निशाना साधा था।

गणेश गोदियाल बोले, मुकदमा करा दें

वहीं अरविंद पांडेय की प्रेस कॉन्फ्रेंस और वायरल पत्रों को फर्जी बताए जाने के बाद गणेश गोदियाल की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। गणेश गोदियाल ने कहा है कि अगर ये पत्र फर्जी हैं तो अरविंद पांडेय को चाहिए कि वो मेरे खिलाफ मुकदमा करा दें। इसके बाद जांच में सामने आ जाएगा कि पत्र सही है या गलत।

नामधारी पर साधी चुप्पी

वहीं अरविंद पांडेय ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुखदेव सिंह नामधारी पर चुप्पी साध ली। अरविंद पांडेय ने कहा कि इस मामले में संगठन अपना काम करेगा और नामधारी से जवाब मांगेगा। आपको बता दें कि गणेश गोदियाल के वायरल लेटर दिखाए जाने के बाद सुखदेव सिंह नामधारी ने अरविंद पांडेय को पार्टी से निकालने की मांग की थी।

Doon Handicraft Bazaar 2026: Art, Culture और Women Empowerment का भव्य संगम

देहरादून, 3 मई 2026: हर्षल फाउंडेशन द्वारा आयोजित “Doon Handicraft Bazaar” में रविवार को विभिन्न सामाजिक और रचनात्मक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस उत्सव ने देहरादून के स्थानीय कलाकारों और महिलाओं को एक बेहतरीन Platform प्रदान किया।

Doon Handicraft Bazaar: महिला सशक्तिकरण पर रहा जोर

कार्यक्रम में कैंट विधायक सविता कपूर ने Chief Guest के रूप में शिरकत की। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर समारोह की सराहना की और कहा कि इस तरह के Events महिलाओं और बच्चों के Skill Development और आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक होते हैं।

Creative Competitions: बच्चों की प्रतिभा का प्रदर्शन

दिन की शुरुआत बच्चों की Creativity और रंगों के साथ हुई:

  • Drawing Competition: सुबह 10 बजे आयोजित इस प्रतियोगिता में नन्हे कलाकारों ने शानदार प्रदर्शन किया।
  • Mehndi & Face Art: सुबह 11 बजे प्रतिभागियों ने अपनी Artistic Skills का परिचय दिया
  • Ramp Walk Competition: दोपहर 3 बजे आयोजित यह कार्यक्रम दिन का मुख्य Highlight रहा
  • Dance Competition: शाम 5 बजे बच्चों की Cultural Performances ने पूरे माहौल को उत्साह से भर दिया।

Doon Handicraft Bazaar: “नारी वंदन अधिनियम” पर चर्चा

Doon Handicraft Bazaar में दोपहर 12 बजे “Nari Shakti Vandan Adhiniyam” विषय पर एक Seminar (संगोष्ठी) आयोजित की गई। इसमें रुचि भट्ट, विनय रोहेला और श्याम अग्रवाल जैसे गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने महिलाओं के Legal Rights, समान अवसर और Social Participation पर जोर देते हुए इसे देश के विकास की आधारशिला बताया।

Fashion Show और Open Mic Doon Handicraft Bazaar के रहे मुख्य आकर्षण

Doon Handicraft Bazaar Faishion Show

Read Also: देहरादून के डाट काली मंदिर का महत्व, क्यों बेहद खास है यहां पूजा करना

  • Saree Fashion Show: दोपहर 3 बजे आयोजित यह कार्यक्रम दिन का मुख्य Highlight रहा। इसमें महिलाओं ने Traditional Attire (साड़ी) में Ramp Walk कर अपने आत्मविश्वास की झलक पेश की।
  • Open Mic Session: कार्यक्रम का समापन शाम 7:30 बजे Open Mic के साथ हुआ, जहाँ प्रतिभागियों ने Poetry, Singing और अपनी अन्य Talents का प्रदर्शन किया।

Highlights at a Glance

TimeEvent NameFocus Area
10:00 AMDrawing CompetitionCreativity
12:00 PMSeminar (Nari Vandan)Awareness
03:00 PMSaree Fashion ShowConfidence
05:00 PMDance CompetitionPerformance
07:30 PMOpen MicExpression

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उत्तराखंड में यहां पकड़ा गया सेक्स रैकेट, आपत्तिजनक सामग्री मिली, मचा हड़कंप, पुलिस पहुंची तो भागने लगे…

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उत्तराखंड में स्पा सेंटर्स और मसाज पार्लर्स की आड़ में सेक्स रैकेट का काम रुकने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसा ही एक सेक्स रैकेट का खुलासा उधम सिंह नगर के रुद्रपुर में हुआ है। यहां स्पा सेंटर की आड़ में सेक्स रैकेट चलाया जा रहा था। पुलिस ने छापा मारकर यहां से कई लड़कियों को बरामद किया है।

छापा पड़ते ही मचा हड़कंप, भागने लगे युवक

उधमसिंह नगर के रुद्रपुर की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को आवास-विकास तिराहे के पास स्थित सन सिटी कॉम्प्लेक्स की दूसरी मंजिल पर कोहिनूर स्पा सेंटर में अनैतिक देह व्यापार के बारे में सूचना मिली। इस सूचना पर टीम ने छापा मारा। छापा पड़ते ही सेंटर में मौजूद युवक और अन्य भागने लगे। हालांकि पुलिस ने तीन व्यक्तियों को पकड़ लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विकास कुमार (22 वर्ष), ओम विजय (28 वर्ष) और स्पा संचालक हरीश साह (39 वर्ष) के रूप में की गई है। इस दौरान तलाशी में स्पा सेंटर में कई कमरे पाए गए, जहां महिलाओं को रखा गया था। पुलिस ने कुल चार महिलाओं का रेस्क्यू किया।

आपत्ति जनक सामग्री बरामद, महिलाएं भी मिलीं

इस छापे के दौरान पुलिस को मौके से चार महिलाएं मिली हैं। पूछताछ में महिलाओं ने बताया कि वे पिछले कई महीनों से यहां काम कर रही थीं और स्पा के नाम पर उन्हें देह व्यापार के लिए मजबूर किया जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि संचालक हरीश साह और उसका सहयोगी विकास कुमार उन्हें लालच और दबाव में इस काम के लिए मजबूर करते थे। मौके से पुलिस ने कस्टमर एंट्री रजिस्टर और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की है।

अब केदारनाथ में प्रशासन करा रहा है योग, शुरू हुआ शिविर

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केदारनाथ में अब स्थानीय प्रशासन योग भी कराएगा। इसके लिए प्रशासन ने बाकायदा शिविर लगवा दिया है। प्रशासन का मानना है कि इस योग शिविर से श्रद्धाुलुओं को सांस लेने में कठिनाई, हाई बीपी जैसी परेशानियों में राहत मिलेगी।

समुद्र तल से 3000 मीटर की ऊंचाई पर योग शिविर

केदारनाथ में समुद्र तल से 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित इस धाम में श्रद्धालुओं को अक्सर सांस लेने में कठिनाई, अत्यधिक थकान और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में योग और प्राणायाम उनके लिए संजीवनी का कार्य कर रहे हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन इस शिविर में भाग लेकर इसका लाभ उठा रहे हैं और अपने स्वास्थ्य को बेहतर बना रहे हैं।

रोजाना लग रहा है निशुल्क शिविर

प्रत्येक दिन प्रातः 10 से 11 बजे के बीच केदारनाथ मंदिर के पीछे निर्धारित स्थल पर प्रशिक्षित योग प्रशिक्षकों द्वारा निःशुल्क योगाभ्यास कराया जा रहा है। इस दौरान श्रद्धालु न केवल शारीरिक रूप से खुद को सशक्त बना रहे हैं, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का भी अनुभव कर रहे हैं।

निभाते हैं अहम भूमिका

जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. आर. एस. पाल ने बताया, “ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी के कारण शरीर पर अचानक दबाव पड़ता है। ऐसे में प्राणायाम और योगाभ्यास शरीर को अनुकूल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यूनानी चिकित्सा पद्धति भी संतुलित जीवनशैली और श्वास नियंत्रण पर विशेष जोर देती है, जिससे रक्तचाप और सांस संबंधी समस्याओं में प्रभावी राहत मिलती है। हमारा प्रयास है कि श्रद्धालु स्वस्थ रहें और उनकी यात्रा सुरक्षित व सुखद बने।”

देहरादून में पुलिस ने किया इनकाउंटर, एक बदमाश ढेर, थानाध्यक्ष को भी लगी गोली

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देहरादून में बुधवार और गुरुवार की दरम्यानी रात में पुलिस और बदमाशों के बीच हुई एक मुठभेड़ में एक बदमाश की मौत हो गई है जबकि थाना प्रभारी घायल हुए हैं। वहीं इस मुठभेड़ में शामिल रहे दो बदमाश मौके से फरार होने में कामयाब रहे हैं।

देहरादून में इनकाउंटर, एक बदमाश को मार गिराया

एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल के सख्त तेवरों के बाद मानों देहरादून पुलिस ने अपनी बंदूकों की नाल को साफ कर दिया और उनका मुंह खोल दिया। शायद यही वजह रही कि आमतौर पर सरकारी पिस्तौलें जो सिर्फ बदमाशों से पैरों में ही गोली का निशाना लगा पाती थीं अब वो बदमाशों को सीधा ऊपर का रास्ता दिखाने लगी हैं। देहरादून में बुधवार की देर रात पुलिस को सूचना मिली कि पौंधा रोड पर एक व्यक्ति को गोली मारकर बदमाशों ने उसकी चेन और नकदी लूट ली और मौके से भाग गए। पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए घेराबंदी की और बदमाशों को पकड़ने की कोशिश की तो उन्होंने पुलिस पर फायरिंग कर दी। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश को मार गिराया, जबकि दो फरार हो गए। इस इनकाउंटर में प्रेमनगर थाना प्रभारी नरेश राठौर को गोलियां लगी हैं। उन्हे अस्पताल में एडमिट कराया गया है।

व्यापारी भी अस्पताल में एडमिट

उधर लूट की वारदात को अंजाम देने के लिए बदमाशों ने जिस व्यापारी को गोली मारी थी उसेे भी अस्पताल में एडमिट कराया गया है। व्यापारी की हालत स्थिर बताई जा रही है। वहीं दूसरी तरफ पुलिस ने मौके से कार बरामद की है। फरार बदमाशों की तलाश में पुलिस ने पूरी ताकत झोंक रखी है। पुलिस की कोशिश है कि बदमाश राज्य की सीमा से बाहर न जा पाएं।

धामी कैबिनेट की बैठक खत्म, इन फैसलों पर लगा दी मुहर

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देहरादून स्थित सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में गुरुवार को धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में कैबिनेट ने कुल 18 प्रस्तावों पर मुहर लगाई है। इसमें आबकारी विभाग, परिवहन विभाग और वन विभाग जैसे विभागों के साथ ही कार्मिकों की प्रतीक्षा अवधि को लेकर भी नए नियम बनाए गए हैं।

धामी कैबिनेट बैठक में इन फैैसलों पर मुहर

  • परिवहन विभाग में परिवर्तन पर्यवेक्षक एवं सिपाहियों के वर्दी निर्धारण किया गया
  • कुंभ मेले में 1 करोड़ रु तक के कार्य मेला अधिकारी स्वीकृत कर सकते है, 5 करोड़ तक के कार्य गढ़वाल आयुक्त स्वीकृत कर सकते हैं, उससे अधिक शासन स्तर पर होंगे स्वीकृत
  • उद्योकि विभाग में 7 रु प्रति कुंटल को बढ़ाकर 8 रु प्रति कुंटल किया गया
  • वित्त विभाग में आबकारी नीति के तहत 6% था जिसको अब राज्यकर विभाग ने एडॉप्ट किया
  • परिवहन विभाग में 250 बसों क्रय करने का अनुमोदन कैबिनेट द्वारा दिया गया
  • परिवहन विभाग अब 100 की जगह 109 बसे खरीदे क्योंकि GST कम हुई

कैबिनेट ने वन विभाग को लेकर भी लिया फैसला

  • वन विभाग में 2 संशोधन, वन दरोगा की आयु सीमा बढ़ाकर 21 से 35 वर्ष की गई, वही वन आरक्षी की 18 से 25 वर्ष की गई
  • वित्त विभाग में सूचीबद्ध D श्रेणी ठेकेदार को काम करने के लिए 1 करोड़ से बढ़कर 1.50 करोड़ किया गया
  • वन विभाग में वन क्षेत्र की सीमा के लिए मौन पालन को लेकर करवाई की जाएगी, नीति को मंत्रिमंडल द्वारा मिली सहमति
  • उत्तराखंड अल्पसंख्यक अधिनियम 2025 को अधिसूचित किया गया था जिसमें कक्षा 1 से 12 तक के बच्चों के लिए मदरसों को उत्तराखंड बोर्ड से मान्यता लेनी थी। सरकार को जानकारी मिली है कि 452 मदरसे 8वीं तक की पढ़ाई करा रहे हैं। लिहाजा, इसकी मान्यता जिला स्तर से ही लेनी होगी। केवल 9वीं से 12 तक के लिए ही उत्तराखंड बोर्ड जाना होगा। ऐसे करीब 52 मदरसे हैं।
  • कार्मिक – प्रतीक्षा सूची एक साल तक ही वैध होती है। तय किया गया है कि एक वर्ष के भीतर प्रतीक्षा सूची मिल गई तो उसे वैलिड माना जाए
  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत….विशेष शिक्षा शिक्षकों की अर्हता तय की गई थी। इसकी विशेष शिक्षक शिक्षा नियमावली को मंजूर
  • शैक्षिक संवर्ग नियमावली को मंजूरी। सहायक अध्यापक के 62 पद थे, सेवा नियमावली नहीं थी। आज एक नियमावली को मंजूरी
  • लोनिवि – हाई कोर्ट के आदेश के तहत 2023 में जब जेई की 2010 पदों पर भर्ती हुई थी। 60 पद दिव्यांग के खाली रहने की वजह से अन्य से भरी गई थी। 2023 से जो प्रस्ताव 6 पड़ सृजन का प्रस्ताव था। उसे मंजूरी
  • वित्त – 1 जनवरी 2026 में कैबिनेट के निर्णय था वर्कचार्ज कर्मियों का। इस पर हाई कोर्ट के स्टे की जानकारी कैबिनेट को संज्ञान में लाया गया
  • निविदा में अब डी श्रेणी के ठेकेदारों को 1 के बजाय 1.5 करोड़ के काम मिलेंगे
  • मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना का लाभ अब 21 अशासकीय कॉलेजों में भी मिलेगा, जहां स्थायी प्रिंसिपल हैं
  • वन क्षेत्र की सीमा पर अब मधुमक्खी पालन होगा। इसकी नीति को मंजूरी मिली। मौन पालन से बढ़ेगी आय। मानव और हाथी संघर्ष भी इससे कम होगा। स्थानीय लोगों की मदद से होगा। वन सीमा मौन पालन मधुमक्खी आधारित आजिविका एवं मानव वन्य जीव संघर्ष नियमावली 2026 को मंजूरी।

(ध्यान दें – ये समाचार अभी शुरुआती जानकारी के साथ प्रकाशित किया गया है, कुछ देर में विस्तृत जानकारी के साथ इसी पोस्ट को अपडेट किया जाएगा। )

Big Breaking: उत्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, कई IAS और PCS अधिकारियों के Transfer, देखें पूरी लिस्ट

उत्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: कई IAS और PCS अधिकारियों के तबादले, देखें पूरी लिस्टदेहरादून: उत्तराखंड शासन ने प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए एक बड़ा फेरबदल किया है। कार्मिक एवं सतर्कता विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, राज्य में तैनात कई वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) अधिकारियों के कार्यभार में तत्काल प्रभाव से बदलाव किया गया है।

प्रमुख IAS अधिकारियों की नई जिम्मेदारी

शासन द्वारा जारी सूची के अनुसार, कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के विभागों में कटौती या वृद्धि की गई है:

  • आनन्द स्वरूप (IAS-2010): इन्हें ‘आयुक्त, खाद्य’ के पदभार से मुक्त कर दिया गया है।
  • रुचि मोहन रयाल (IAS-2016): इन्हें ‘अपर आयुक्त-खाद्य नागरिक आपूर्ति’ के पद से मुक्त किया गया है।
  • बंशी लाल राणा (IAS): इन्हें ‘आयुक्त, खाद्य’ का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
  • IAS-2023 बैच के प्रशिक्षु: गौरी प्रभात को रानीखेत से पौड़ी गढ़वाल और दीक्षिता जोशी को पौड़ी गढ़वाल से रानीखेत में संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद पर भेजा गया है।

PCS अधिकारियों के तबादलों की सूची

राज्य सिविल सेवा के अधिकारियों में भी व्यापक बदलाव देखे गए हैं, जिनमें मुख्य रूप से जिला प्रशासन और विकास प्राधिकरणों के पद शामिल हैं:

देहरादून और हरिद्वार में बदलाव

  • सन्तोष कुमार पाण्डे: उप नगर आयुक्त, नगर निगम देहरादून से हटाकर उप सचिव, उत्तराखंड सूचना आयोग बनाया गया है।
  • कुश्म चौहान: सिटी मजिस्ट्रेट, हरिद्वार से हटाकर महाप्रबंधक, गढ़वाल मंडल विकास निगम नियुक्त किया गया है।
  • हर गिरि: डिप्टी कलेक्टर, देहरादून से डिप्टी कलेक्टर, हरिद्वार भेजे गए हैं।

कुमाऊं और अन्य जिलों में तैनाती

  • सौरभ असवाल: डिप्टी कलेक्टर, हरिद्वार से अब अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व), नैनीताल की जिम्मेदारी संभालेंगे।
  • अनुराग आर्या: डिप्टी कलेक्टर, चम्पावत से डिप्टी कलेक्टर, नैनीताल बनाए गए हैं।
  • हिमांशु कफल्टिया: इन्हें अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से हटाकर डिप्टी कलेक्टर, ऊधमसिंह नगर तैनात किया गया है।

अन्य महत्वपूर्ण विभागों में फेरबदल

  • शिवकुमार बरनवाल: इन्हें अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के सचिव पद से हटाकर कुलसचिव (रजिस्ट्रार), उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय बनाया गया है।
  • नन्दन सिंह डुंगरियाल: शासन में संयुक्त सचिव से अब सचिव, उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की जिम्मेदारी संभालेंगे।
  • वैभव गुप्ता: संयुक्त निदेशक, शहरी विकास निदेशालय से अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व), हरिद्वार बनाए गए हैं।

तत्काल कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश

शासन की ओर से संयुक्त सचिव राजेन्द्र सिंह पटियाल द्वारा जारी इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित सभी अधिकारी अपने वर्तमान पदभार से तत्काल कार्यमुक्त होकर नवीन तैनाती के पद पर कार्यभार ग्रहण करेंगे। कार्यभार ग्रहण करने के बाद इसकी सूचना कार्मिक एवं सतर्कता विभाग को अनिवार्य रूप से उपलब्ध करानी होगी।

Delhi-Dehradun express way : पीएम मोदी ने किया दिल्ली – देहरादून एक्सप्रेस वे का उद्घाटन, रोड शो में उमड़ी भीड़

दिल्ली – देहरादून एक्सप्रेस वे (Delhi-Dehradun express way) का उद्घाटन हो गया है। मंगलवार को पीएम मोदी ने देहरादून में इकोनॉमिक कॉरिडोर का औपचारिक उद्घाटन किया। इसके साथ ही पीएम मोदी ने देहरादून में लगभग 12 किमी लंबा रोड शो भी किया। इस दौरान उन्हे देखने के लिए लोगों की लंबी कतारें दिखीं।

दिल्ली – देहरादून एक्सप्रेस वे विकास का ऐतिहासिक क्षण

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने मंगलवार को दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे का उद्घाटन किया, जो उत्तराखंड और व्यापक क्षेत्र के विकास में एक ऐतिहासिक क्षण है। प्रधानमंत्री ने देवभूमि की पवित्र भूमि को नमन करते हुए उल्लेख किया कि यमुनात्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ सहित चार धाम यात्रा आगामी दिनों में आरंभ होने वाली है, जिसका देश भर में लाखों लोग आतुरता से प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने पंच बद्री, पंच केदार, पंच प्रयाग और इस क्षेत्र के पूजनीय देवी-देवताओं, जिनमें मां संतला और मां डाट काली शामिल हैं, की भी पूजा की, जिनके मंदिर में उन्होंने कार्यक्रम से पहले दर्शन किए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “मां डाट काली का आशीर्वाद इस विशाल परियोजना को पूरा करने में बहुत बड़ी शक्ति रहा है।”

UCC ने पूरे देश को राह दिखाई

प्रधानमंत्री ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जयंती के अवसर पर पूरे देश की ओर से बाबासाहेब को श्रद्धांजलि अर्पित की। निर्धनों और वंचितों के लिए न्याय के प्रति अंबेडकर के आजीवन समर्पण को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में सरकार की नीतियों ने संवैधानिक मूल्यों को कायम रखने का प्रयास किया है, जिसमें अनुच्छेद 370 का निरसन और दर्जनों जिलों में माओवाद और नक्सलवाद का उन्मूलन शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता की संवैधानिक आकांक्षा को आगे बढ़ाकर पूरे देश को मार्ग दिखाया है।”

उत्तराखंड के विकास को मिलेगी नई गति

उत्तराखंड राज्य के छब्बीसवें वर्ष में प्रवेश करने की यात्रा का उल्‍लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने अपनी उस पूर्व घोषणा को याद किया जिसमें उन्होंने कहा था कि इस शताब्दी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार की नीतियों और जनता के परिश्रम से यह युवा राज्य अपने विकास में नए आयाम जोड़ रहा है। मोदी ने कहा, “यह एक्सप्रेसवे उत्तराखंड के विकास को नई गति प्रदान करेगा।”

2.25 लाख करोड़ रुपए की योजनाओं पर काम जारी

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसकी सड़कों, राजमार्गों, एक्सप्रेसवे, हवाई मार्गों, रेल मार्गों और जलमार्गों में निहित होता है। देश में अवसंरचना विकास की अभूतपूर्व गति को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि जहां 2014 से पहले अवसंरचना पर व्‍यय प्रति वर्ष 2 लाख करोड़ रुपये से कम था, वहीं अब यह छह गुना से अधिक बढ़कर प्रति वर्ष 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। पीएम मोदी ने कहा, “अकेले उत्तराखंड में ही वर्तमान में 2.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की अवसंरचना परियोजनाएं जारी हैं।”

12000 करोड़ का निवेश, अब खुलेगी रोजगार की राह

प्रधानमंत्री ने दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे के परिवर्तनकारी लाभों का विस्तार से उल्‍लेख करते हुए, इस परियोजना से क्षेत्र पर पड़ने वाले बहुआयामी प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे से यात्रियों के यात्रा समय और लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे ईंधन की भारी बचत होगी और माल ढुलाई शुल्क में भी कमी आएगी। इसके निर्माण में पहले ही 12,000 करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है और यह परियोजना रोजगार का एक प्रमुख स्रोत बनकर उभरी है। इससे हजारों इंजीनियरों, श्रमिकों और परिवहन कर्मचारियों को आजीविका मिल रही है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि इससे किसानों और पशुपालकों को भी लाभ होगा क्योंकि उनकी उपज तेजी से बड़े बाजारों तक पहुंच सकेगी। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद, बागपत, बरौत, शामली और सहारनपुर से गुजरने वाला यह गलियारा उत्तर प्रदेश के इन शहरों को भी पुनर्जीवित करने के लिए तैयार है। पीएम मोदी ने कहा, “यह सिर्फ एक सड़क नहीं है; यह समस्‍त क्षेत्र में व्यापार, उद्योग, भंडारण और लॉजिस्टिक्‍स के नए रास्ते खोलेगी।”

शीतकालीन यात्रा को मिली गति

प्रधानमंत्री ने नए एक्सप्रेसवे की पर्यटन क्षमता पर बल देते हुए कहा कि देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, मसूरी और चार धाम यात्रा मार्ग अब अधिक सुगम्‍य हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड शीतकालीन पर्यटन, शीतकालीन खेलों और डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए एक प्रमुख गंतव्य बनता जा रहा है। उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिए साल भर के पर्यटन के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि शीतकालीन तीर्थयात्राओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है; आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा करने वालों की संख्या कुछ सौ से बढ़कर 2025 में 36,000 से अधिक हो गई है, जबकि शीतकालीन चार धाम यात्रा में भागीदारी 2024 में 80,000 से बढ़कर 2025 में 1.5 लाख से अधिक हो गई है। पीएम मोदी ने कहा, “पर्यटन बढ़ने से सभी को लाभ होता है; होटल, ढाबे, टैक्सी, होमस्टे, पूरी स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।”

प्रधानमंत्री ने प्रकृति और संस्कृति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए, एक्सप्रेसवे के हिस्से के रूप में लगभग 12 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड वन्यजीव गलियारे के निर्माण का उल्लेख किया। इसे हाथियों सहित पशुओं की आवाजाही में किसी भी तरह की बाधा न आए, यह सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने देवभूमि के पहाड़ों और जंगलों में आने वाले पर्यटकों एवं तीर्थयात्रियों से इन पवित्र स्थलों को साफ-सुथरा और प्लास्टिक कचरे से मुक्त रखने का आग्रह किया। श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा, “हमारा प्रयास है कि बुनियादी ढांचा लोगों की सेवा करे, साथ ही इन क्षेत्रों के वन्यजीवों और प्राकृतिक धरोहर की भी रक्षा की जाए।”

Delhi-Dehradun express way – आज पीएम मोदी करेंगे दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस वे का उद्घाटन, डाटकाली में करेंगे दर्शन पूजन

Delhi-Dehradun express way inauguration : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार 14 अप्रैल को दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस वे का उद्घाटन करेंगे। इसके पहले पीएम मोदी उत्तराखंड और यूपी की सीमा पर बने डाट काली मंदिर में दर्शन पूजन भी करेंगे।

डाट काली में दर्शन, फिर होगा रोड शो

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 14 अप्रैल 2026 को उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री सुबह लगभग 11 :15 बजे उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे के ऊंचे खंड पर बने वन्यजीव गलियारे की समीक्षा करेंगे। प्रधानमंत्री सुबह लगभग 11:40 बजे देहरादून के पास स्थित जय मां डाट काली मंदिर में दर्शन और पूजा करेंगे। इसके बाद, प्रधानमंत्री दोपहर लगभग 12:30 बजे देहरादून में एक सार्वजनिक समारोह में दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे का उद्घाटन करेंगे और इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित भी करेंगे।

दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस वे से 2.5 घंटे में राजधानी

213 किलोमीटर लंबा, छह लेन वाला और एक्सेस कंट्रोल्ड दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा 12,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया गया है। यह गलियारा दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों से होकर गुजरता है और दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा का समय वर्तमान में छह घंटे से अधिक से घटकर लगभग ढाई घंटे हो जाएगा।

इस परियोजना के कार्यान्वयन में निर्बाध उच्च गति कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए 10 इंटरचेंज, तीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी), चार प्रमुख पुल और सड़क किनारे 12 जन सुविधाओं का निर्माण भी शामिल है। यात्रियों के लिए सुरक्षित और अधिक कुशल यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए यह गलियारा उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली (एटीएम) से सुसज्जित है।

विशेष रूप से किया गया डिजाइन

इस क्षेत्र की पारिस्थितिक संवेदनशीलता, समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीवों को ध्यान में रखते हुए, इस गलियारे को कई विशेषताओं के साथ डिजाइन किया गया है जिनका उद्देश्य मानव-वन्यजीव संघर्ष में अत्यधिक कमी लाना है। जंगली जानवरों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए, परियोजना में वन्यजीव संरक्षण के लिए कई विशेष सुविधाएं शामिल की गई हैं। इनमें 12 किलोमीटर लंबा वन्यजीव एलिवेटेड कॉरिडोर शामिल है, जो एशिया के सबसे लंबे कॉरिडोर में से एक है। कॉरिडोर में आठ पशु मार्ग, 200 मीटर लंबे दो हाथी अंडरपास और दात काली मंदिर के पास 370 मीटर लंबी सुरंग भी शामिल है।

दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा प्रमुख पर्यटन और आर्थिक केंद्रों के बीच संपर्क बढ़ाकर और पूरे क्षेत्र में व्यापार और विकास के नए रास्ते खोलकर क्षेत्रीय आर्थिक विकास को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह परियोजना प्रधानमंत्री के उस विजन को दर्शाती है जिसमें अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे का विकास करना शामिल है, जो उच्च गति संपर्क को पर्यावरणीय स्थिरता और नागरिकों के जीवन की बेहतर गुणवत्ता के साथ जोड़ता है।

देहरादून के डाट काली मंदिर का महत्व, क्यों बेहद खास है यहां पूजा करना

देहरादून का डाट काली मंदिर का महत्व (daat kali temple )बहुत अधिक है। यहां पूजा करना बेहद खास माना जाता है। देहरादून का डाट काली मंदिर केवल एक पूजा स्थल ही नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम भी है, जो हर साल हजारों- लाखों भक्तों और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। देहरादून के डाट काली मंदिर को देहरादून की ईष्ट देवी के तौर पर भी मान्यता है। यानी देहरादून के लोग इस मंदिर में हर शुभ कार्य से पहले पूजा करते हैं।

डाट काली मंदिर का महत्व और भौगोलिक स्थिति

डाट काली मंदिर देहरादून-सहारनपुर मार्ग पर स्थित है, जो देहरादून शहर से लगभग 14 किलोमीटर दूर है। अगर आप दिल्ली से सहारनपुर होते हुए आ रहे हैं तो एक तरह से यही देहरादून का प्रवेश द्वार भी है। यानी देहरादून में प्रवेश से पहले आप मां डाट काली के मंदिर में शीश झुकाना होगा। शिवालिक पहाड़ियों के बीच एक सुरम्य घाटी में स्थित यह मंदिर, अपनी शांत और आध्यात्मिक ऊर्जा से मन को मोह लेता है। इस स्थान को स्थानीय लोग “डाट” कहते हैं, जिसका अर्थ एक प्रकार का द्वार या दर्रा होता है, क्योंकि यह मंदिर देहरादून घाटी और बाहरी दुनिया के बीच एक प्राकृतिक प्रवेश द्वार पर स्थित है।

डाट काली मंदिर का इतिहास और किंवदंतियां

डाट काली मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है और यह कई लोक कथाओं और किंवदंतियों से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि यह मंदिर देवी काली को समर्पित है, जो शक्ति और विनाश की देवी हैं। एक प्रमुख किंवदंती के अनुसार, जब देवी काली ने राक्षसों का संहार किया और उनका क्रोध शांत नहीं हुआ, तो भगवान शिव उनके सामने लेट गए। जब देवी ने शिव को देखा, तो वे शांत हो गईं और उनकी जीभ बाहर आ गई। कहा जाता है कि इस स्थान पर देवी काली का डाट (मुंह) पड़ा था, जिससे इस मंदिर का नाम डाट काली पड़ा।

अंग्रेज अफसर को सपने में दिखीं मां काली

मां डाट काली को लेकर जो सबसे अधिक प्रचलित किवदंती है वो इस मंदिर के पास सहारनपुर – देहरादून मार्ग पर बनी एक सुरंग से जुडी़ है। दरअसल सन 1804 में ब्रिटिश हुकूमत ने सहारनपुर से देहरादून के सड़क मार्ग का काम शुरू कराया। देहरादून में प्रवेश से पहले एक पहाड़ी ने पूरे मार्ग का रास्ता रोक रखा था। अंग्रेज अफसरों ने फैसला किया कि पहाड़ में एक सुरंग बना कर मार्ग निकाला जाएगा। इंजीनियरों की देखरेख में मजदूरों ने टनल बनाने का काम शुरू किया। मजदूर दिन भर सुरंग के लिए पहाड़ को खोदते और रास्ता बनाते। रात में सुरंग में मलबा भर जाता। सुबह मजदूर और इंजीनियर आते तो उन्हे पूरी सुरंग मलबे से भरी मिलती।

ये सिलसिला कई दिन चलता रहा। इंजीनियर और मजदूर दोनों परेशान हो गए। इसी दौरान इस सुरंग के काम में लगे एक इंजीनियर को रात में मां काली ने सपने में दर्शन दिए। कहते हैं कि मां काली ने इंजीनियर को बताया कि मलबे में उनकी पिंडी स्वरूप मूर्ति दबी हुई है। उसे निकाल कर मंदिर की स्थापना करें और उसमें पिंडी को स्थापित करें। इंजीनियर ने ये बात अपने साथियों को बताई। इसके बाद वहां तलाश की गई तो मां काली की पिंडी स्वरूप मूर्ति मिली। इस चमत्कार ने सबको हैरान कर दिया। ब्रिटिश हुकूमत ने तुरंत वहां एक मंदिर की स्थापना के निर्देश और पिंडी को स्थापित करने और पूजा पाठ की व्यवस्था भी कराई गई।

कहते हैं कि मां काली के इस मंदिर की स्थापना के बाद सुरंग के काम में कोई बाधा नहीं आई और इंजीनियरों ने सफलता पूर्वक टनल का निर्माण पूरा किया। चूंकि मां काली के इस मंदिर ने इस मार्ग के सबके बड़े अवरोध या ‘डाट’ को खोल दिया था इसीलिए इस मंदिर को ‘डाट काली’ भी कहा जाने लगा। तभी से इस मंदिर की प्रसिद्धि आसपास के पूरे इलाके में फैल गई। मां डाट काली देहरादून की ईष्ट देवी भी मानी जाती हैं।

अफसर को मां काली ने दिए सपने में दर्शन। Image created by google gemini

मंदिर का विस्तार

डाट काली मंदिर की वास्तुकला बहुत ही साधारण लेकिन प्रभावशाली है। बताते हैं कि साल 1804 में मंदिर की स्थापना के बाद कुछ वर्षों तक मंदिर की इमारत साधारण ही रही लेकिन कुछ सालों बाद इस मंदिर को और भव्य और विशाल रूप दिया गया। मंदिर का विस्तार हुआ और लोगों की आस्था इस मंदिर में बढ़ती गई। वर्तमान में देहरादून में कोई भी नया वाहन खरीदता है तो उसे सर्वप्रथम मां डाट काली मंदिर में पूजा के लिए लाया जाता है।

मां डाट काली मंदिर में आरती का समय

डाट काली मंदिर में प्रतिदिन दो बार आरती की जाती है:

  • प्रातःकालीन आरती: सुबह लगभग 6:00 बजे
  • सायंकालीन आरती: शाम लगभग 7:00 बजे

भक्तों के लिए विशेष महत्व

डाट काली मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह श्रद्धालुओं के लिए एक चमत्कारिक मंदिर के रूप में भी पूजनीय है। ऐसी मान्यता है कि यहाँ मांगी गई सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से नए वाहन खरीदने वाले लोग अपनी यात्रा को सुरक्षित बनाने और देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यहाँ पूजा करने आते हैं। सड़क मार्ग पर स्थित होने के कारण, कई यात्री अपनी यात्रा शुरू या समाप्त करने से पहले देवी का आशीर्वाद लेने के लिए रुकते हैं।

मां डाट काली की पुरानी सुरंग अब इतिहास की बात

जिस डाट काली की पुरानी सुरंग ने लगभग 200 सालों तक लोगों को आने जाने का रास्ता दिया अब वो इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर रह जाएगी। दिल्ली – देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर बनने के बाद इस सुरंग से आवागमन की जरूरत नहीं रह जाएगी। ऐसे में अब ये सुरंग किस्से कहानियों में बताई जाएगी। हालांकि कहा ये भी जा रहा है कि सरकार इस सुरंग को संरक्षित करने की तैयारियों में लगी है।

डाट काली की पुरानी सुरंग जिसे अंग्रेजों ने बनवाया था। ये सुरंग आज भी मौजूद है। हालांकि अब इस मार्ग से सामान्य आवागमन नहीं होता है। image enhanced by google gemini