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Uttarkashi: Ramesh Chauhan की अध्यक्षता में जिला पंचायत की पहली बैठक, जिलाधिकारी ने दिया ‘जनहित सर्वोपरि’ का संदेश

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नव-निर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष Ramesh Chauhan की अध्यक्षता में शनिवार को जिला पंचायत की पहली बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य की मौजूदगी ने इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया। जिला पंचायत सभागार में आयोजित इस सभा में, नवनिर्वाचित सदस्यों और अधिकारियों ने एक-दूसरे का परिचय लिया और साथ ही जिले में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों और योजनाओं पर चर्चा की।

जनहित सर्वोपरि: समावेशी विकास का आह्वान

बैठक में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने सभी नवनिर्वाचित सदस्यों का संवैधानिक व्यवस्था में स्वागत किया और उनके सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि एक बार जब आप निर्वाचित होकर संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ते हैं, तो पक्ष-विपक्ष का भेद खत्म हो जाता है। उन्होंने सभी सदस्यों से जनहित को सर्वोपरि रखने और अपने क्षेत्र के साथ-साथ पूरे जिले के समावेशी विकास में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। जिलाधिकारी ने सभी के साथ समान व्यवहार करते हुए जनसमस्याओं के समाधान पर जोर दिया।

योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए, जिलाधिकारी ने जिला पंचायत की विभिन्न समितियों के गठन का निर्देश भी दिया।

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जनप्रतिनिधि और अधिकारियों के बीच संवाद की आवश्यकता-Ramesh Chauhan

जिला पंचायत अध्यक्ष Ramesh Chauhan ने पहली बैठक में उपस्थित सभी अधिकारियों और सदस्यों का आभार व्यक्त किया। Ramesh Chauhan ने जिले की भौगोलिक संवेदनशीलता और आपदा के प्रति इसकी भेद्यता का जिक्र किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के लिए जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच नियमित संवाद स्थापित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम करने की अपेक्षा की।

बैठक में प्रमुख उपस्थिति

इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला पंचायत उपाध्यक्ष अंशिका जगूड़ी, सभी नवनिर्वाचित जिला पंचायत सदस्य, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. बी.एस. रावत, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पी.एस. पोखरियाल, परियोजना निदेशक अजय सिंह, और जिला समाज कल्याण अधिकारी सुधीर जोशी सहित कई अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

CM Dhami ने 15 सहायक अध्यापकों को सौंपे नियुक्ति पत्र, 15 करोड़ की योजनाओं का किया शिलान्यास

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CM Dhami ने मुख्यमंत्री आवास में जनजाति कल्याण विभाग के तहत 15 सहायक अध्यापकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए और ₹15 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि ये परियोजनाएं जनजातीय समुदायों के लिए बेहतर सुविधाएं और मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार करेंगी।

शिक्षा और रोज़गार के अवसर

CM Dhami ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा और रोज़गार के माध्यम से जनजातीय समाज को सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने नए शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि वे नई पीढ़ी के भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। राज्य में 16 राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय चल रहे हैं और बच्चों को प्राइमरी से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक छात्रवृत्ति दी जा रही है। शिक्षित बेरोज़गार युवाओं के लिए तकनीकी शिक्षा हेतु तीन आईटीआई संस्थान भी संचालित किए जा रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए छात्रों को निःशुल्क कोचिंग और छात्रवृत्ति की सुविधा भी प्रदान की जा रही है।

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प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आदिवासी समाज का विकास- CM Dhami

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में जनजातीय समाज के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाना एक महत्वपूर्ण निर्णय है। केंद्र सरकार ने जनजातीय विकास के लिए बजट को तीन गुना बढ़ाया है और एकलव्य मॉडल स्कूल, प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान, वन धन योजना और प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन जैसी कई योजनाएं शुरू की हैं। उत्तराखंड के 128 जनजातीय गांवों को ‘प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान’ के तहत चुना गया है।

जनजातीय संस्कृति का संरक्षण और विकास

CM Dhami ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय परंपराओं और संस्कृति को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून और उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता (UCC) में जनजातीय समुदायों की परंपराओं और रीति-रिवाजों को संरक्षित रखने के लिए उन्हें इससे बाहर रखा गया है। इसके अलावा, उन्होंने जनजातीय शोध संस्थान में सौंदर्यीकरण और हाई-टेक शौचालय ब्लॉक के निर्माण, और ‘आदि लक्ष्य संस्थान’ में एक डाइनिंग हॉल के निर्माण की भी घोषणा की।

भविष्य की योजनाएं और प्रमुख परियोजनाएं

CM Dhami ने उत्तराखंड में चार एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों (कालसी, मेहरावना, बाजपुर और खटीमा) का उल्लेख किया, जहां जनजातीय छात्रों को निःशुल्क शिक्षा और छात्रावास की सुविधा मिल रही है। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में पिथौरागढ़ में भोटिया और राजी जनजातियों के लिए एक और एकलव्य विद्यालय खोलने का अनुरोध केंद्र सरकार से किया गया है। ये सभी पहलें सरकार की जनजातीय समाज के समग्र विकास की दिशा में एक स्पष्ट संकेत हैं।

चंद्र ग्रहण और भाद्रपद Purnima Vrat एक साथ: व्रत रखना शुभ है या अशुभ? जानें नियम और पूजा विधि

Purnima Vrat रखने और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से घर में सुख-समृद्धि, धन-धान्य और मानसिक शांति का वास होता है। यह दिन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह प्रकृति और खगोलीय घटनाओं से भी जुड़ा है। इस बार, यह पवित्र दिन एक विशेष खगोलीय घटना के साथ आ रहा है। इस बार इसी दिन चंद्रग्रहण पड़ने से यह संशय हो रहा है कि Purnima Vrat रखें या नहीं! इस आर्टिकल में पढ़िये पूरी जानकारी…

भाद्रपद Purnima Vrat: सुख और समृद्धि का पर्व

हिंदू धर्म में पूर्णिमा का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। हर महीने आने वाली पूर्णिमा का अपना विशेष महत्व होता है। भाद्रपद माह की पूर्णिमा को, जिसे भाद्रपद पूर्णिमा भी कहते हैं, भगवान सत्यनारायण की पूजा की जाती है।

7 सितंबर 2025: एक दुर्लभ खगोलीय संयोग

सितंबर 2025 में भाद्रपद पूर्णिमा का पर्व रविवार, 7 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन पूर्णिमा तिथि का आरंभ सुबह 09:27 बजे होगा और इसका समापन अगले दिन, 8 सितंबर को सुबह 07:30 बजे होगा। यह तिथि अपने आप में पवित्र है, लेकिन इस वर्ष इसका महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि इसी रात को चंद्र ग्रहण भी लगने जा रहा है।

यह एक दुर्लभ संयोग है जब एक ही दिन Purnima Vrat और चंद्र ग्रहण जैसी खगोलीय घटना एक साथ घटित हो रही हैं। यह संयोग कई लोगों के मन में शंकाएं पैदा कर सकता है कि क्या इस दिन पूजा-पाठ और व्रत करना उचित है।

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पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण का समय

इस विशेष संयोग के सभी महत्वपूर्ण समय-बिंदुओं को जानना आवश्यक है।

  • पूर्णिमा तिथि आरंभ: 7 सितंबर, रविवार – सुबह 09:27 बजे
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 8 सितंबर, सोमवार – सुबह 07:30 बजे
  • चंद्र ग्रहण आरंभ: 7 सितंबर की रात 09:58 बजे
  • चंद्र ग्रहण समाप्त: 8 सितंबर की रात 01:26 बजे
  • ग्रहण की कुल अवधि: 3 घंटे 29 मिनट
  • सूतक काल आरंभ: 7 सितंबर को दोपहर 12:58 बजे (ग्रहण से 9 घंटे पहले)
  • सूतक काल समाप्त: 8 सितंबर की रात 01:26 बजे (ग्रहण की समाप्ति के साथ)

सूतक काल के दौरान कई धार्मिक और सामाजिक कार्यों को वर्जित माना जाता है, इसलिए इस दौरान विशेष सावधानी बरतना जरूरी है।

ग्रहण के दिन Purnima Vrat: क्या करें और क्या न करें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण के दिन Purnima Vrat रखा जा सकता है, लेकिन पूजा-पाठ और कथा का आयोजन सूतक काल और ग्रहण काल में नहीं करना चाहिए।

  • क्या करें: Purnima Vrat का संकल्प ग्रहण से पहले, यानी दोपहर 12:58 बजे से पहले ही ले लें। ग्रहण समाप्त होने के बाद, स्नान करके स्वयं को और अपने घर को शुद्ध करें। इसके बाद ही भगवान सत्यनारायण की पूजा, कथा और आरती करें। इस अवधि में मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
  • क्या न करें: सूतक काल आरंभ होते ही मंदिरों के द्वार बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान भोजन करना, पूजा करना, और अन्य धार्मिक कार्य वर्जित होते हैं। सूतक काल में गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और उन्हें ग्रहण के दर्शन से बचना चाहिए।

भाद्रपद Purnima Vrat की सही विधि

ग्रहण के कारण Purnima Vrat की विधि में थोड़ा बदलाव करना होगा।

  1. प्रातःकाल: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान सत्यनारायण का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  2. सूतक से पहले: सूतक काल आरंभ होने से पहले ही भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें और सभी पूजन सामग्री जैसे गंगाजल, दीपक, कलश, तुलसीदल, पुष्प, फल और पंचामृत तैयार करके रख लें।
  3. ग्रहण के बाद: ग्रहण समाप्त होने पर पुनः स्नान करके स्वयं को शुद्ध करें। इसके बाद, सभी तैयार सामग्रियों से विधिपूर्वक भगवान सत्यनारायण का पूजन करें।
  4. कथा और आरती: पूजा के बाद, भगवान सत्यनारायण की व्रत कथा का पाठ करें और आरती करें।
  5. पारण: व्रत में फलाहार करें और अगले दिन, पूर्णिमा तिथि समाप्त होने के बाद ही पारण करें।

चंद्र ग्रहण के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें

सूतक काल में भोजन और पानी का सेवन वर्जित होता है। हालांकि, बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए यह नियम शिथिल हो सकता है। ग्रहण के बुरे प्रभावों से बचने के लिए, सूतक काल शुरू होने से पहले ही सभी खाने-पीने की चीजों में तुलसी का पत्ता डाल देना चाहिए। ग्रहण काल में भगवान के नाम का जाप और मंत्रों का उच्चारण करते रहना चाहिए। यह समय साधना और आत्मचिंतन के लिए बहुत उत्तम माना जाता है।

Chandra Grahan 2025: 7 सितंबर को कब लगेगा चंद्र ग्रहण! शनिवार को ही निपटा लें तुलसी से जुड़े ये काम

Chandra Grahan 2025: इस साल का चंद्र ग्रहण धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भाद्रपद की पूर्णिमा को, यानी रविवार, 7 सितंबर 2025 को पड़ रहा है। इस दिन ग्रहण के साथ-साथ रविवार का संयोग बन रहा है, जिससे तुलसी से जुड़े कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य हो जाता है। इस आर्टिकल में जानिये चंद्रग्रहण की तिथि, समय और तुलसी से जुड़े जरूरी नियम।

चंद्र ग्रहण 2025: तिथि, समय और तुलसी से जुड़े जरूरी नियम

1. Chandra Grahan काल में तुलसी का महत्व

हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण को एक अशुभ समय माना जाता है। नकारात्मक ऊर्जा और दुष्प्रभावों से भोजन और पानी को बचाने के लिए इनमें तुलसी की पत्तियां डालने की परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि तुलसी में दैवीय गुण होते हैं, जो Chandra Grahan के नकारात्मक प्रभावों से खाद्य पदार्थों की रक्षा करते हैं।

2. ग्रहण और रविवार: तुलसी को न करें स्पर्श

Chandra Grahan के दौरान तुलसी के पौधे को छूना या पूजा करना वर्जित माना जाता है। संयोगवश, यह चंद्र ग्रहण रविवार को है, और शास्त्रों के अनुसार रविवार को भी तुलसी के पत्ते तोड़ना या पौधे को स्पर्श करना मना होता है। यह विशेष स्थिति धार्मिक नियमों के पालन को और भी महत्वपूर्ण बना देती है।

3. शनिवार को ही करें आवश्यक तैयारी

चूंकि ग्रहण के दिन और रविवार को तुलसी को स्पर्श करना वर्जित है, इसलिए ग्रहण के लिए जरूरी तुलसी की पत्तियां शनिवार, 6 सितंबर 2025 को ही तोड़कर रख लें। इन पत्तियों को धोकर किसी साफ कपड़े में लपेटकर सुरक्षित रखा जा सकता है। ग्रहण के दौरान इन्हीं पत्तियों का इस्तेमाल भोजन और जल को शुद्ध रखने के लिए किया जा सकता है।

4. शास्त्रीय प्रमाण: तुलसी तोड़ने के नियम

पद्मपुराण में तुलसी के पत्ते तोड़ने के संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। श्लोक के अनुसार, “शाम के समय, रविवार को, संक्रांति के दिन, और द्वादशी तिथि में तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित होता है।” इन नियमों का पालन न करने पर धार्मिक दोष और पुण्य में कमी आ सकती है।

5. गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानी

ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उन्हें ग्रहण के दौरान घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए और किसी भी नुकीली या तेज वस्तु का उपयोग नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इन सावधानियों से गर्भस्थ शिशु पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को रोका जा सकता है।

6. ग्रहण के बाद क्या करें?

Chandra Grahan समाप्त होने के बाद, सभी लोगों को स्नान करके खुद को शुद्ध करना चाहिए। इसके बाद, घर की साफ-सफाई करें और ताजे जल से पूजा करें। ग्रहण से पहले रखे गए भोजन और पानी में से तुलसी की पत्तियां निकालकर उनका सेवन किया जा सकता है।

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कब लगेगा 2025 का Chandra Grahan ?

इस साल भाद्रपद की पूर्णिमा को, यानी 7 सितंबर 2025 को एक पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा। ग्रहण का समय इस प्रकार है:

  • ग्रहण शुरू: रात 09:58 बजे
  • ग्रहण समाप्त: देर रात 01:26 बजे
  • सूतक काल: दोपहर 12:58 बजे से

सूतक काल के दौरान सभी धार्मिक कार्यों पर रोक लग जाती है।

ग्रहण के समय तुलसी के नियम

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के अशुभ प्रभावों से भोजन और पानी को बचाने के लिए उनमें तुलसी के पत्ते डाले जाते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से खाद्य पदार्थ दूषित नहीं होते और ग्रहण के बाद उनका सेवन किया जा सकता है।

रविवार को क्यों न तोड़ें तुलसी के पत्ते?

यह Chandra Grahan रविवार के दिन पड़ रहा है। शास्त्रों के अनुसार, रविवार को तुलसी के पौधे को स्पर्श करना या पत्ते तोड़ना वर्जित माना जाता है। साथ ही, ग्रहण काल में भी तुलसी का स्पर्श नहीं करना चाहिए। पद्मपुराण में एक श्लोक है जिसका अर्थ है कि शाम के समय, रविवार, संक्रांति और द्वादशी को तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।

इसलिए, इस बार आप ग्रहण में इस्तेमाल करने के लिए शनिवार, 6 सितंबर को ही तुलसी के पत्ते तोड़कर रख सकते हैं। उन्हें धोकर एक साफ कपड़े में लपेटकर रखने से कोई दोष नहीं लगेगा।

पूजा में तुलसी को देख क्यों क्रोधित हो जाते हैं भगवान Ganesh Ji! पूजा का फल रह जाता है अधूरा

हिंदू धर्म में हर पूजा-पाठ के कुछ विशेष नियम होते हैं, और Ganesh Ji की पूजा में तुलसी का वर्जित होना भी इन्हीं में से एक है। हिंदुओं के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है गणेश चतुर्थी । देश भर में यह त्यौहार धूमधाम से मनाया जाता  है। लोग अपने घरों में  गणपति बप्पा को विराजमान करते हैं उनकी सेवा करते हैं। लेकिन बहुत से लोग इस बात से अनजान हैं कि गणपति बप्पा को तुलसी अर्पित नहीं की जाती। इसे शास्त्रों में वर्जित माना गया है। आइए जानते हैं आखिर ऐसा क्यों है?

गणेश चतुर्थी: भक्ति और उत्सव का महापर्व

गणेश चतुर्थी हिंदुओं के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है, यह भगवान Ganesh Ji के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान, भक्त अपने घरों में गणपति बप्पा की सुंदर प्रतिमा स्थापित करते हैं, जिसे गणेश स्थापना भी कहते हैं। 10 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में लोग उनकी दिन-रात सेवा करते हैं, उनकी प्रिय वस्तुएं जैसे मोदक और दूर्वा अर्पित करते हैं।

इस पर्व का मुख्य उद्देश्य भगवान गणेश से सुख, समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त करना है। Ganesh Ji को विघ्नहर्ता माना जाता है, यानी वे सभी बाधाओं को दूर करने वाले हैं। यही वजह है कि किसी भी शुभ कार्य से पहले उनकी पूजा की जाती है।

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Ganesh Ji की पूजा में तुलसी क्यों वर्जित है?

गणेश जी की पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा है, जो बताती है कि कैसे तुलसी और गणेश जी के बीच एक श्राप का आदान-प्रदान हुआ था। यह कहानी न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि हमें यह भी सिखाती है कि हर वस्तु का अपना एक विशेष स्थान होता है। आइए जानते हैं उस कथा के बारे में..

गणेश और तुलसी की कथा:

यह कहानी उस समय की है जब भगवान Ganesh Ji युवावस्था में थे और अपने ब्रह्मचर्य व्रत का पालन कर रहे थे। एक दिन वे गंगा नदी के किनारे ध्यान कर रहे थे, तभी वहां से तुलसी देवी गुज़रीं, जो भगवान विष्णु की परम भक्त थीं। गणेश जी के सौम्य रूप और तपस्या से वे इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने गणेश जी के सामने विवाह का प्रस्ताव रख दिया।

लेकिन, Ganesh Ji ने अपने ब्रह्मचर्य व्रत का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने विनम्रता से तुलसी से कहा कि वे विवाह के बंधन में नहीं बंध सकते। गणेश जी के इस उत्तर से तुलसी को बहुत दुःख हुआ और क्रोध में आकर उन्होंने गणेश जी को श्राप दे दिया कि उनका विवाह दो बार होगा।

इस पर, Ganesh Ji ने भी तुलसी को जवाब में श्राप दिया कि उनका विवाह एक असुर से होगा। इस श्राप को सुनकर तुलसी बहुत भयभीत हुईं और उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने तुरंत गणेश जी से क्षमा मांगी।

तुलसी की पश्चाताप भरी विनती को सुनकर गणेश जी का क्रोध शांत हो गया। उन्होंने तुलसी को आशीर्वाद देते हुए कहा, “हे तुलसी! तुम्हारा विवाह शंखचूड़ नामक असुर से अवश्य होगा, लेकिन तुम भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय रहोगी और कलियुग में तुम जगत के लिए जीवन और मोक्ष प्रदान करने वाली बनोगी। तुम्हारी महिमा अपरंपार होगी, लेकिन मेरे श्राप के कारण मेरी पूजा में तुम्हारा उपयोग नहीं किया जाएगा।”

इसी घटना के बाद से यह माना जाता है कि Ganesh Ji की पूजा में तुलसी का प्रयोग नहीं किया जाता।

धार्मिक मान्यता और पूजा के नियम

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, Ganesh Ji की पूजा में तुलसी अर्पित करने से वे प्रसन्न नहीं होते, बल्कि इससे पूजा का फल भी अधूरा रह जाता है। इसलिए, भक्त इस नियम का सख्ती से पालन करते हैं।

गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए कुछ विशेष वस्तुएं हैं, जिन्हें उनकी पूजा में बहुत शुभ माना जाता है:

  • दूर्वा: यह गणेश जी को सबसे प्रिय है। दूर्वा की 21 गांठें बनाकर चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है।
  • मोदक: गणेश जी को मोदक बहुत पसंद है, इसलिए इसे भोग में अवश्य चढ़ाया जाता है।
  • लाल फूल: गणेश जी को लाल रंग के फूल जैसे गुड़हल का फूल बहुत प्रिय है।
  • लाल चंदन और सिंदूर: ये दोनों वस्तुएं भी उनकी पूजा में विशेष रूप से उपयोग की जाती हैं।

इन सभी वस्तुओं को अर्पित करने से गणेश जी अत्यंत प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

गणेश चतुर्थी का त्योहार केवल गणेश जी की पूजा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह हमें धार्मिक नियमों और मान्यताओं के महत्व को भी समझाता है। गणेश जी की पूजा में तुलसी का वर्जित होना इसी का एक उदाहरण है। यह कथा हमें बताती है कि हर पूजा-पाठ के पीछे कोई न कोई विशेष कारण या कहानी छिपी होती है, जो हमारी आस्था को और भी गहरा बनाती है।

देहरादून में Emergency Siren का ट्रायल: घबराएं नहीं, यह सिर्फ एक परीक्षण है

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शनिवार की शाम, देहरादून में अचानक Emergency Siren की गूंज सुनाई देगी। यह आवाज किसी हमले या आपदा की चेतावनी नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रणाली के परीक्षण का हिस्सा होगी। यह पहल उत्तराखंड को आपदा और आपात स्थितियों के लिए और अधिक तैयार बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। शहरवासियों से जिला प्रशासन ने अपील की है कि वे इस आवाज को सुनकर घबराएं नहीं, क्योंकि यह प्रणाली की प्रभावशीलता की जांच के लिए बजाई जा रही है।

आपदा प्रबंधन के लिए आधुनिक Emergency Siren

देहरादून में आपदा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समय पर चेतावनी देने के लिए, 13 आधुनिक लंबी दूरी (long range) के Emergency Siren स्थापित किए गए हैं। ये सायरन दो श्रेणियों में विभाजित हैं: चार सायरन जिनकी आवाज 16 किलोमीटर तक 4 सायरन ( rishikesh, premnagar, clementown, raipur) सुनाई देगें और नौ सायरन और सुनाई देंगे जिनकी आवाज 8 किलोमीटर तक पहुंचेगी। इन सायरनों को शहर के महत्वपूर्ण और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में रणनीतिक रूप से लगाया गया है, जैसे कि पुलिस स्टेशन, चौकियाँ और प्रमुख सरकारी इमारतें।

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मुख्यमंत्री धामी करेंगे उद्घाटन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस आधुनिक Emergency Siren का उद्घाटन करेंगे। उद्घाटन के बाद ही इन सायरनों का परीक्षण किया जाएगा। यह कदम राज्य सरकार की आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस प्रणाली से भविष्य में किसी भी आपात स्थिति के दौरान लोगों को समय रहते सतर्क किया जा सकेगा।

शहर के इन हिस्सों में स्थापित किये गए हैं Emergency Siren

जिला मजिस्ट्रेट और जनपद आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष, सविन बंसल द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, इन Emergency Siren को देहरादून के विभिन्न हिस्सों में स्थापित किया गया है। 16 किलोमीटर की रेंज वाले चार सायरन थाना ऋषिकेश, थाना प्रेमनगर, थाना क्लेमेंटाउन और थाना रायपुर में लगाए गए हैं। वहीं, 8 किलोमीटर की रेंज वाले नौ सायरन थाना कोतवाली पल्टन बाजार, पुलिस चौकी बिन्दाल, थाना राजपुर, थाना पटेल नगर, थाना नेहरू कॉलोनी, पुलिस लाइन रेसकोर्स, थाना डालनवाला, थाना कैंट और थाना बसंत विहार में स्थापित किए गए हैं।

घबराएं नहीं, सहयोग की अपील

जिला प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे इस परीक्षण के दौरान सायरन की आवाज सुनकर किसी भी तरह की अफवाह न फैलाएं और न ही घबराएं। यह केवल एक तकनीकी जांच है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यह चेतावनी प्रणाली सही ढंग से काम कर रही है। नागरिकों से सहयोग की अपेक्षा की गई है ताकि यह प्रणाली किसी भी आपदा की स्थिति में प्रभावी ढंग से काम कर सके।

सौंदर्यीकरण और अन्य परियोजनाओं का लोकार्पण

सायरन के उद्घाटन के साथ ही, मुख्यमंत्री शहर की अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं का भी लोकार्पण करेंगे। इसमें घंटाघर के सौंदर्यीकरण का कार्य और देहरादून कलेक्ट्रेट, कोरोनेशन अस्पताल, गुच्चूपानी और आईएसबीटी पर स्थापित चार आधुनिक हिलांस कैंटीन का उद्घाटन शामिल है।

टीचर्स को शैलेश मटियानी पुरस्कार से किया गया सम्मानित, गवर्नर बोले, मेहनत और तपस्या का प्रतीक

शिक्षक दिवस के अवसर पर शुक्रवार को राजभवन में ‘‘शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार’’ सम्मान समारोह आयोजित हुआ। समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि), मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने वर्ष-2024 में शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कारों के लिए चयनित 16 शिक्षक एवं शिक्षिकाओं को सम्मानित किया। वर्ष-2024 में चयनित 09 प्रारम्भिक शिक्षक, 05 माध्यमिक शिक्षक, 01 शिक्षक प्रशिक्षक एवं 01 संस्कृत शिक्षक को यह सम्मान प्रदान किया गया है।

‘समाज की मेहनत और तपस्या का प्रतीक’

राज्यपाल ने पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान पूरे शिक्षक समाज की मेहनत और तपस्या का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले ही नहीं, बल्कि चरित्र, नैतिकता और जीवन मूल्यों के निर्माता होते हैं। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार तक सीमित नहीं होना चाहिए, अध्यापक बच्चों को संस्कारवान, जिम्मेदार और राष्ट्रभक्त नागरिक बनाने में योगदान दें।

विश्वगुरू बनाने में योगदान

राज्यपाल ने कहा कि माता-पिता के बाद गुरु ही बच्चों के सच्चे मार्गदर्शक होते हैं और बच्चों का भविष्य सही दिशा में ले जाने में उनकी सबसे बड़ी भूमिका होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2047 तक भारत को विश्वगुरु बनाने में शिक्षकों का योगदान निर्णायक रहेगा। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड शिक्षा का एक प्रमुख केन्द्र रहा है, इसलिए हमारी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि हम इस परंपरा को और मजबूत बनाएं।

राज्यपाल ने कहा कि आज के इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में बच्चों को भटकाव से बचाने, उनमें विवेक और सही जीवन-दृष्टि विकसित करने का कार्य भी शिक्षक ही कर सकते हैं। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे बच्चों में किताबें पढ़ने की आदत विकसित करें और उन्हें खेल, संस्कृति तथा रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ें।

‘पहाड़ की संवेदनाओं को समझते थे शैलेश मटियानी’

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अपने अनुभव, ज्ञान और परिश्रम से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और भविष्य को संवारने की शिक्षकों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। मुख्यमंत्री ने शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक उत्कृष्टता पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि शैलेश मटियानी पहाड़ के दर्द और संवेदनाओं को गहराई से समझने वाले कथाकार थे। उन्होंने कथा-साहित्य के साथ-साथ गद्य और सामयिक चिंतन में भी अपनी गहरी छाप छोड़ी। शैलेश मटियानी जी ने भी अपनी कहानियों और उपन्यासों में उत्तराखण्ड के पर्वतीय इलाकों और ग्रामीणों के संघर्ष को शब्दों के माध्यम से पिरोया।

सीएम बोले, भूमिका हुई और महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी प्राचीन परंपरा से ही गुरु को केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पथ प्रदर्शक माना जाता है। वे शिष्यों में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, नैतिकता और संस्कारों के बीज को रोपित करने का कार्य करते हैं। आज इस डिजिटल युग के बदलते दौर में शिक्षकों की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई है, जो हमारे बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ संस्कृति, संस्कार और नैतिक मूल्यों से परिचित कराते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। शिक्षकों के प्रशिक्षण और कौशल विकास के लिए भी विशेष योजनाएं प्रारंभ की हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने का कार्य देश में सबसे पहले उत्तराखण्ड ने किया। राज्य सरकार ने वर्ष 2022 में ‘बाल वाटिका’ की शुरुआत कर प्रदेश में शैक्षिक क्रांति प्रारम्भ की। उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बन गया है जहाँ बुनियादी शिक्षा के लिए ‘राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा’ तैयार की गई है। बच्चों में कौशल, उद्यमिता और भारतीय ज्ञान परंपरा को विकसित करने के लिए ’कौशलम कार्यक्रम’ भी प्रारंभ किया गया है।

950 स्कूलों में शुरू हुई स्मार्ट क्लासेज

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने शिक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों एवं नवाचारों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश के 1340 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासें और 950 विद्यालयों में स्मार्ट क्लासें शुरू कर दी हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष सभी जिलों में स्पोर्टस कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं। इस वर्ष 550 स्कूलों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू कर दिया गया और प्रदेश के 22 हजार प्राथमिक शिक्षकों को टेबलेट प्रदान किए गए है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस वर्ष शिक्षा विभाग में लगभग 9500 भर्तियां की जा रही है।

कार्यक्रम में सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रामन ने सम्मान समारोह में उपस्थित लोगों का स्वागत किया और सम्मान समारोह की विस्तृत जानकारी दी। अपर सचिव विद्यालयी शिक्षा रंजना राजगुरु ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में स्वर्गीय शैलेश मटियानी के सुपुत्र राकेश मटियानी एवं श्रीमती गीता मटियानी, शिक्षा विभाग के अन्य उच्च अधिकारीगण और पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

Raid on Govt Ration Shops: आखिर सरकारी राशन की 19 दुकानों पर प्रशासन की अचानक छापेमारी क्यों! पढ़िये ये ख़बर

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Ration Shops: सरकारी राशन की दुकानों पर खराब गुणवत्ता वाले नमक की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद, जिला प्रशासन ने आज एक बड़ी कार्रवाई की। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर, देहरादून जनपद की 19 दुकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। इस छापेमारी का उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या वास्तव में राशन की दुकानों पर गुणवत्ता विहीन नमक वितरित किया जा रहा है।

Ration Shops: डीएम के निर्देश पर बड़े स्तर पर कार्रवाई

जिला प्रशासन को पिछले कुछ समय से यह शिकायतें मिल रही थीं कि सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों (Ration Shops) पर जो नमक बेचा जा रहा है, उसकी गुणवत्ता खराब है। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए, जिलाधिकारी सविन बंसल ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) को इस मामले की पूरी जांच करने और उप जिलाधिकारी (सदर, चकराता, विकासनगर, मसूरी) और तहसीलदार (ऋषिकेश) को अपने-अपने क्षेत्रों में छापेमारी करने का आदेश दिया। इसी के अनुपालन में, इन सभी अधिकारियों ने एक ही समय पर अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली कुल 19 दुकानों पर छापा मारा।

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Ration Shops के नमूने जांच के लिए भेजे गए, रिपोर्ट का इंतजार

छापेमारी के दौरान, प्रशासन की टीम ने इन Ration Shops से नमक के नमूने एकत्रित किए। इन नमूनों को तुरंत जांच के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पास भेज दिया गया है। जिला प्रशासन ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी को जल्द से जल्द जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

इस रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय हो पाएगा कि शिकायतें सही थीं या नहीं। यदि जांच में नमक की गुणवत्ता खराब पाई जाती है, तो संबंधित दुकानदारों और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई यह सुनिश्चित करने के लिए की गई है कि आम जनता को मिलने वाले राशन की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।

Roorkee: करोड़ों की लागत से बनी सड़क में गड्ढा या सिस्टम में छेद? रुड़की में ‘करप्शन रेस्टोरेंट’ बना चर्चा का विषय

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Roorkee में एक अनोखे विरोध प्रदर्शन ने सोशल मीडिया पर सुर्खियाँ बटोरी हैं, जहाँ एक व्यक्ति ने सड़क के बीचों-बीच बने एक बड़े गड्ढे को “भ्रष्टाचार का रेस्टोरेंट” बताते हुए उस पर भाजपा के झंडे लगाकर विरोध दर्ज कराया है। यह घटना Roorkee के केएल डीएवी डिग्री कॉलेज मार्ग पर हुई, जहाँ सड़क के खराब होने और प्रशासन की लापरवाही को उजागर करने के लिए यह प्रतीकात्मक विरोध किया गया।

सड़क पर अनोखा प्रदर्शन: ‘भ्रष्टाचार का रेस्टोरेंट’

रुड़की के एक व्यक्ति ने सड़क के गड्ढे को लेकर एक रचनात्मक और व्यंग्यात्मक तरीका अपनाया। उन्होंने गड्ढे के बीच दो स्टूल और एक कैनोपी (अस्थायी छत) लगा दी। इस “रेस्टोरेंट” को और भी प्रतीकात्मक बनाने के लिए, उन्होंने इसके चारों ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के झंडे लगा दिए।

इसके बाद, वे वहीं बैठकर चाय-समोसे खाने लगे, मानो वे किसी रेस्टोरेंट में आराम फरमा रहे हों। इस अनोखे प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लोगों का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर खींचा। समाज सेवी दीपक लखवान का कहना है कि यह रेस्टोरेंट “करप्शन का रेस्टोरेंट” है, जो नेताओं और ठेकेदारों के बीच की मिलीभगत और कमीशनखोरी को दर्शाता है।

करोड़ों की लागत और कुछ ही महीनों में गड्ढे!

इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण Roorkee की उस सड़क की खराब गुणवत्ता है, जिसे कुछ ही महीनों पहले करोड़ों रुपये की लागत से बनाया गया था। दीपक लखवान ने बताया कि Roorkee की यह सड़क इतनी जल्दी कैसे धंस गई, यह इस बात का प्रमाण है कि निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएँ हुई हैं। एक सड़क जो जनता के पैसों से बनाई गई थी, उसका इतनी जल्दी टूट जाना न सिर्फ पैसे की बर्बादी है, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा है।

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Roorkee की इस सड़क के बीचो-बीच बना यह विशाल गड्ढा कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है, जिससे लोगों की जान जा सकती है। यह घटना स्थानीय लोगों के बीच गहरा रोष पैदा कर रही है, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके पैसे का दुरुपयोग किया गया है और उनकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

शिकायतों के बावजूद प्रशासन की चुप्पी

दीपक लखवान और अन्य स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस गड्ढे के बारे में Roorkee प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन किसी ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया। उनकी शिकायतों को बार-बार नजरअंदाज किया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अधिकारी इस मामले में आँखें मूंदे बैठे हैं। यह न सिर्फ अधिकारियों की लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वे जनता की समस्याओं के प्रति कितने उदासीन हैं। लखवान ने इसे “केवल लापरवाही नहीं, बल्कि नेताओं और ठेकेदारों की मिलीभगत का जीता-जागता सबूत” बताया है। उनका मानना है कि इस तरह के भ्रष्टाचार के कारण ही विकास परियोजनाएं विफल होती हैं और आम जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।

जनता की सुरक्षा पर खतरा और विरोध का संदेश

Roorkee में यह विरोध प्रदर्शन केवल एक गड्ढे के बारे में नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा, जवाबदेही और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक शक्तिशाली संदेश है। सड़क पर बना यह गड्ढा न सिर्फ पैदल चलने वालों और वाहन चालकों के लिए खतरा है, बल्कि यह व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार का प्रतीक भी बन गया है। दीपक लखवान का यह अनोखा तरीका लोगों को इस मुद्दे पर सोचने और सवाल उठाने के लिए प्रेरित कर रहा है।

यह विरोध दर्शाता है कि जब अधिकारी और नेता अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभाते हैं, तो जनता को खुद अपनी आवाज उठाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होने से, अब यह मुद्दा स्थानीय स्तर से बढ़कर एक राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है, जो शायद अधिकारियों को इस पर कार्रवाई करने के लिए मजबूर करेगा। यह घटना यह भी दिखाती है कि रचनात्मक और व्यंग्यात्मक विरोध कैसे एक गंभीर मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करने का प्रभावी तरीका हो सकता है।

Dhami Government का तोहफा: दिव्यांगों की शादी अनुदान राशि बढ़ी, हर जिले में बनेंगे वृद्धाश्रम

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Dhami Government ने उत्तराखंड में आज दिव्यांग शादी अनुदान और राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना का सॉफ्टवेयर लॉन्च किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज ‘मुख्य सेवक संवाद’ कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘मुख्य सेवक संवाद’ कार्यक्रम के तहत वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के साथ संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने दिव्यांग शादी अनुदान और राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना का सॉफ्टवेयर लॉन्च किया। साथ ही, समाज कल्याण विभाग द्वारा दी जाने वाली विभिन्न पेंशन योजनाओं की इस वित्तीय वर्ष की पांचवीं किश्त का ऑनलाइन भुगतान भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संवाद का उद्देश्य लोगों की समस्याओं को सीधे तौर पर समझना और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाना है।

Dhami Government की प्रमुख घोषणाएँ और योजनाएँ

मुख्यमंत्री Dhami ने कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं:

  • दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन राशि: दिव्यांग युवक-युवती से विवाह करने पर दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि ₹25,000 से बढ़ाकर ₹50,000 की जाएगी।
  • दिव्यांग छात्रवृत्ति: कक्षा 1 से 8 तक के दिव्यांग छात्रों की छात्रवृत्ति के लिए आय सीमा को समाप्त किया जाएगा।
  • वृद्धाश्रम: प्रदेश के सभी जनपदों में एक-एक वृद्धाश्रम की व्यवस्था की जाएगी।

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प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सशक्तिकरण के प्रयास- CM Dhami

मुख्यमंत्री Dhami ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने “विकलांग” की जगह “दिव्यांग” शब्द का उपयोग करके आत्मसम्मान की भावना को बढ़ाया। CM Dhami ने दिव्यांग सशक्तिकरण अधिनियम 2016, सुगम्य भारत अभियान और अन्य कई योजनाओं का उल्लेख किया, जिनके माध्यम से दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

विभिन्न पेंशन योजनाएँ और अन्य सहायता

  • दिव्यांगजन पेंशन: प्रदेश में 96,000 से अधिक दिव्यांगजनों को पेंशन दी जा रही है। 18 वर्ष से अधिक आयु के 86,000 से अधिक लोगों को ₹1500 मासिक पेंशन और 18 वर्ष से कम आयु के 8,000 से अधिक बच्चों को ₹700 मासिक सहायता दी जा रही है।
  • अन्य पेंशन: तीलू रौतेली पेंशन योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्य के दौरान दिव्यांग हुए लोगों को ₹1200 मासिक और बौने व्यक्तियों को भी ₹1200 मासिक पेंशन दी जा रही है।
  • वृद्धजन पेंशन: लगभग 6 लाख वृद्धजनों को DBT के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में पेंशन राशि ट्रांसफर की जा रही है।

नवनिर्मित सुविधाएं और कानूनी अधिकार

दिव्याशा केंद्र: देहरादून में प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र का शुभारंभ किया गया है, जो विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों के लिए है। सरकार ऐसे केंद्र सभी जनपदों में खोलने का प्रयास कर रही है।

  • वृद्धाश्रमों की स्थिति: वर्तमान में बागेश्वर, चमोली और उत्तरकाशी में सरकारी वृद्धाश्रम संचालित हैं, जबकि देहरादून, अल्मोड़ा और चम्पावत में नए भवनों का निर्माण चल रहा है।
  • वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार: माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम लागू किया गया है, जिससे वरिष्ठ नागरिक अपने बच्चों से कानूनी रूप से भरण-पोषण की मांग कर सकते हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

इस कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक खजानदास और सविता कपूर, देहरादून के मेयर सौरभ थपलियाल, और समाज कल्याण विभाग के सचिव श्रीधर बाबू अदह्यांकी सहित कई अधिकारी और विशिष्टजन उपस्थित थे।