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Smart Meter: जानिए अब किन घरों में लगेंगे स्मार्ट मीटर? CM Dhami ने दिए ये निर्देश

Smart Meter: स्मार्ट मीटर लगाए जाने को लेकर सीएम धामी ने अहम फैसला लिया है. बता दें कि अब तक 24 हजार उपभोक्ताओं के घर पर स्मार्ट मीटर लग चुके हैं. स्मार्ट बिजली मीटर पर राजनीतिक सरगर्किमियां भी तेज़ है गईं हैं. आइए जानते हैं कि सीएम धामी ने क्या फैसला लिया है!

स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग छिड़ चुकी है. दरअसल सीएम धामी ने उत्तराखंड में सभी मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों के घरों पर स्मार्ट मीटर लगाए जाने के निर्देश दिए हैं. प्रमुख सचिव ऊर्जा ने इस संबंध में जानकारी दी है.

Smart Meter का हो रहा विरोध

जब किच्छा के कांग्रेस विधायक ने smart meter तोड़कर अपने विरोध इजहार किया तो कांग्रेस के कई नेता उनके समर्थन में उतर आए. उधर भाजपा ने भी कांग्रेस पर पलटवार कर दिया. पार्टी ने कहा कि कांग्रेस का स्मार्ट मीटर विरोधी रवैया बिजली चोरी रोकने में बाधक बन रहा है. जबकि हिमाचल सहित कांग्रेस शासित राज्यों में भी स्मार्ट बिजली मीटर लगे हैं.

तो वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि smart meter से उपभोक्ताओं को बिजली खपत से जुड़ी सूचनाओं की ऑनलाइन उपलब्धता, पल-पल के बिजली के उपयोग की जानकारी, सभी जरूरी सूचनाओं के संदेश, बिजली के उपयोग की तुलना आदि सहित आसानी से भुगतान के कई विकल्प मिलेंगे. बता दें कि देश भर में लगभग 20 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाया जाना स्वीकृत किया गया है और 55 लाख से अधिक स्मार्ट कनेक्शन लगाए जा चुके हैं.

38th National Games : बड़ी लकीर खींच गया उत्तराखंड, सफल आयोजन से बढ़ा राज्य का सम्मान

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उत्तराखंड में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेल (38th national games) इस बार व्यवस्थाओं से लेकर आयोजन तक  लेकर लंबी लकीर खींचने वाले साबित हुए हैं। इस बार के राष्ट्रीय खेल पर्यावरण हितैषी कदमों से लेकर खिलाड़ियों की सुविधाओं और स्वास्थ्य की देखभाल को लेकर चर्चाओं मे रहे।

नेशनल गेम्स में उत्तराखंड का रहा शानदार प्रदर्शन

38 वें राष्ट्रीय खेलों से पहले इस आयोजन में उत्तराखंड का इतना शानदार प्रदर्शन कभी नहीं रहा। राज्य स्थापना के बाद जब-जब उत्तराखंड ने राष्ट्रीय खेलों में भाग लिया, तब-तब उसे मिलने वाले पदकों की संख्या दस से लेकर 19 तक रही है। इसी तरह, पदक तालिका में वह 13 वें स्थान से लेकर 26 वें स्थान के बीच में कहीं रहा है। यही हाल स्वर्ण पदकों का भी रहा है, जिसकी संख्या एक से लेकर अधिकतम पांच तक रही है। अब 38 वें राष्ट्रीय खेलों की बात कर लें, तो क्या कुल पदक, क्या स्वर्ण और क्या पदक तालिका की स्थिति, सभी में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है। पदकों की कुल संख्या 103 पर पहुंची है। पदकों का सैकड़ा जड़ कर उत्तराखंड ने सबको चकित कर दिया है। इसी तरह, स्वर्ण पदकों की संख्या 24 रही है। पदक तालिका में सातवें स्थान पर आना, सचमुच कमाल का अनुभव है। पश्चिम बंगाल, पंजाब, ओडिसा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, आंध्र, जम्मू कश्मीर जैसे बडे़ राज्य पदक तालिका में उत्तराखंड से पीछे हैं।

मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से मिली इरादों को उड़ान

उत्तराखंड जैसे अपेक्षाकृत छोटे राज्य को राष्ट्रीय खेलों की तैयारी के लिए बहुत कम समय मिला। सफल आयोजन किसी चुनौती से कम नहीं था, क्योंकि उत्तराखंड को राज्य बने सिर्फ 25 वर्ष हुए हैं। जिस पड़ोसी पर्वतीय राज्य हिमाचल के मॉडल को अपनाने की अक्सर बातें होती हैं, उसे राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी कभी नहीं मिली। मणिपुर और असम के बाद उत्तराखंड राष्ट्रीय खेल कराने वाला तीसरा हिमालयी राज्य बन गया है। वर्ष 2000 में उत्तराखंड के साथ राज्य का दर्जा हासिल करने वाले झारखंड ने वर्ष 2011 में राष्ट्रीय खेल कराए हैं, जबकि छत्तीसगढ़ मेजबानी मिलने के बावजूद इसका आयोजन नहीं करा पाया था। उत्तराखंड ने 38 वें राष्ट्रीय खेलों के लिए मजबूत आधारभूत ढांचा तैयार किया। अत्याधुनिक उपकरण मंगवाए। इस वजह से कई रिकार्ड भी टूटे। दस हजार खिलाड़ियों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई।

ग्रीन गेम्स की थीम बड़ी उपलब्धि

राष्ट्रीय खेलों में सबसे अहम हरित पहल रही। ग्रीन गेम्स की थीम को अमल में लाने के लिए कई कदम उठाए गए। रायपुर में 2 .77 हेक्टेयर जमीन पर खेल वन तैयार किया गया, जहां पर पदक विजेताओं के नाम के 1600 पौधे लगाए जा रहे हैं। खेलों में जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए पदक हों या मेहमानों के लिए आमंत्रण पत्र, सभी ई-वेस्ट से तैयार कराए गए। शुभंकर राज्य पक्षी मोनाल को बनाया गया। हरित जागरूकता के लिए स्पोर्ट्स वेस्ट मटीरियल के प्रतीक चिन्ह आयोजन स्थल पर प्रदर्शित किए गए। आयोजन स्थल पर एक स्थान से दूसरे स्थान तक आवाजाही के लिए ई-रिक्शे, साइकिल प्रयोग किए गए। इसके अलावा, सोलर पैनल के प्रयोग से लेकर पानी के लिए रीयूसबल वाटर बॉटल की व्यवस्था की गई। हरित पहल से इतर महिला स्वास्थ्य का संदेश देने के लिए महिला खिलाड़ियों को वैलकम किट में सेनेटरी नैपकीन व अन्य जरूरी सामान दिए गए। तीन बार इस्तेमाल किए जा चुके 250 लीटर तेल को बायो डीजल बनाने के लिए भेजा गया।

सीएम धामी ने दी बधाई

38 वें राष्ट्रीय खेलों की सफल मेजबानी पर सीएम धामी ने समूची टीम को बधाई दी है। सीएम धामी ने कहा है कि, को हमने पहले ही दिन से अपने लिए बड़ी उपलब्धि माना। इस आयोजन को भव्य रूप देने के लिए पूरे प्रयास किए गए। आधारभूत ढांचा तैयार किया गया और उच्चस्तरीय सुविधाएं जुटाई गईं। निश्चित तौर पर उत्तराखंड राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के बाद खेल के क्षेत्र में मजबूत होकर उभरा है। मै सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई देता हूं।

38th National Games : भव्य समापन समारोह में पहुंचे अमित शाह, थपथपा गए सीएम धामी की पीठ

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में अन्तरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स स्टेडियम गोलापार, हल्द्वानी में 38वें राष्ट्रीय खेल (38th National Games) का समापन समारोह आयोजित किया गया। भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी ऊषा ने 38वें राष्ट्रीय खेल के समापन की घोषणा की। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह मंत्री ने प्रथम तीन स्थान प्राप्त करने वाले सर्विसेज, महाराष्ट्र और हरियाणा को सम्मानित किया। 

उत्तराखंड के हर जिले में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तराखण्ड के चारों धामों के देवी देवताओं को प्रणाम करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड के हर जिले में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो गया है। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री ने देवभूमि को राष्ट्रीय खेलों के नक्शे पर 25वें स्थान से 7वें स्थान पर लाने का कार्य किया है। राष्ट्रीय खेलों में उत्तराखंड के विजेता खिलाड़ियों ने देवभूमि को खेल भूमि बनाया है। केंद्रीय गृह मंत्री ने सभी उत्तराखंड के विजेता खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

उत्तराखंड की मेजबानी का देशभर में गुणगान

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड की आयोजन समिति एवं खेल संगठनों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के लिए पूरे देश में उत्तराखंड की तारीफ हो रही है। पूरा देश उत्तराखंड द्वारा की गई शानदार व्यवस्थाओं के गुणगान कर रहा है। भौगोलिक कठिनाइयों के बावजूद उत्तराखंड राज्य ने मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में इस कार्य को कुशलतापूर्वक सम्पन्न किया है। उन्होंने 38वें राष्ट्रीय खेल के सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हार और जीत का खेल से मतलब नहीं है। जीत का जज्बा और हार से निराश न होना, ये खेल का संदेश है। हारने वाले खिलाड़ियों के लिए अगली बार मेडल लाने का मौका है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री धामी के नेतृत्व में 38वें राष्ट्रीय खेलों में इको- फ्रेंडली प्रैक्टिसेज एवं इको फ्रेंडली गेम को धरातल में उतारा गया है। खिलाड़ियों के नाम पर पौधारोपण किया गया। राष्ट्रीय खेलों में खिलाड़ियों द्वारा कई नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए गए हैं, इन रिकॉर्डों से अंतरराष्ट्रीय खेलों में भी भारत के लिए पदक की उम्मीद जगी है। उन्होंने कहा राष्ट्रीय खेलो की यह मशाल उत्तराखंड से अब मेघालय जाएगी। मेघालय के मुख्यमंत्री श्री कॉनराड संगमा ने यह निर्णय लिया है कि नॉर्थ ईस्ट के सभी राज्यों में कुछ खेलों के आयोजन से पूरे नॉर्थ ईस्ट को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने मेघालय के मुख्यमंत्री श्री संगमा को आगामी राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के लिए शुभकामनाएं दी।

National Games: उत्तराखंड के पदक विजेता खिलाड़ियों को मिलेगी कितनी पुरस्कार धनराशि! नौकरी का भी तोहफा देने को सरकार तैयार

National Games: राष्ट्रीय खेलों में मेजबान उत्तराखंड ने शानदार प्रदर्शन कर नया कीर्तिमान बनाया है. बता दें कि अंतिम दिन एक स्वर्ण और दो रजत पदक मिलने से राज्य ने पदकों का शतक लगाने में सफलता पाई है. 24 स्वर्ण, 35 रजत और 42 कांस्य पदक के साथ उत्तराखंड राज्य ने इस बार शानदार प्रदर्शन किया है.

National Games मेजबान  उत्तराखंड ने पहली बार 101 पदक जीतने का कीर्तिमान बनाया है. वुशु में राज्य की बेटी ज्योति ने पहला पदक दिलाया. जिसके बाद बॉक्सिंग, एथलेटिक्स, मॉडर्न पेंटाथलाॅन, जूडो, कैनोइंग और कयाकिंग, योगासन, लाॅनबाल और कुश्ती में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर धमाल मचाया. पदक विजेताओं को सरकार अब पुरस्कार के रूप में तय धनराशि और नौकरी देगी.

मॉडर्न पेंटाथलाॅन में रहा उत्तराखंड का बेहतरीन प्रदर्शन

National Games में उत्तराखंड का सबसे शानदार प्रदर्शन मॉडर्न पेंटाथलाॅन में रहा. जिसमें ममता खत्री, मोनिका, मंजू गोस्वामी, सक्षम सिंह, नीरज नेगी, लाल सिंह ने स्वर्ण पदक जीता. इसमें राज्य को छह स्वर्ण सहित सबसे अधिक 14 पदक मिले. कैनोइंग और कयाकिंग में पांच, बॉक्सिंग में तीन, एथलेटिक्स, ताइक्वांडो और जूड़ो में दो-दो स्वर्ण पदक मिले.

एथलेटिक्स में अंकिता ने दिखाया कमाल

बॉक्सिंग में राज्य के कपिल पोखरिया, निवेदिता कार्की और नरेंद्र सिंह ने अपने पंच से सोना जीता. वहीं, एथलेटिक्स में अंकिता का सबसे बेहतर प्रदर्शन रहा. इस स्पर्धा में राज्य को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाली अंकिता ध्यानी ने महिला वर्ग की 3000 और 5000 मीटर रेस में एक-एक स्वर्ण पदक जीता. जबकि 10 हजार मीटर रेस में रजत पदक दिलाया.

उत्तराखंड की खेल मंत्री रेखा आर्या का कहना है कि- “सरकार राष्ट्रीय खेलों के पदक विजेता खिलाड़ियों को प्रति पदक तय धनराशि पुरस्कार के रूप में देगी. उन्हें नौकरी भी मिलेगी. इसके लिए पहले से नीति बनी हुई है।”

National Games के स्वर्ण पदक विजेताओं को मिलेंगे प्रति पदक 12 लाख

जानकारों का कहना है कि राज्य के खिलाड़ियों ने उम्मीद से भी शानदार प्रदर्शन किया है. राष्ट्रीय खेलों में पदक विजेता खिलाड़ियों को तय धनराशि के रूप में छह से लेकर 32 लाख रुपये तक मिलेंगे. कांस्य पदक विजेता को छह लाख रुपये की धनराशि पुरस्कार के रूप में दी जाएगी. जबकि स्वर्ण पदक विजेता को प्रति स्वर्ण पदक 12 लाख रुपये मिलेंगे.

Bimla Bahuguna: पर्यावरणविद सुंदर लाल बहुगुणा की पत्नी विमला बहुगुणा का निधन, सीएम धामी ने जताया दुःख

Bimla Bahuguna: चिपको आंदोललन एवं गांधीवादी विचारों के रूप में अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने वाले स्वर्गीय सुंदरलाल बहुगुणा की पत्नी बिमला बहुगुणा का निधन हो गया है. 93 साल की उम्र में बिमला बहुगुणा ने अंतिम सांस ली. स्वर्गीय सुंदरलाल बहुगुणा के बेटे राजीव नयन बहुगुणा ने सोशल मीडिया पर मां के निधन की जानकारी साझा की है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बिमला बहुगुणा के निधन पर शोक व्यक्त किया है.

बिमला बहुगुणा, अपनी साफ समझ, कड़ी मेहनत और समर्पण की भावना के लिए जानी जाती थीं. लक्ष्मी आश्रम जिसकी स्थापना महात्मागांधी की नजदीकी शिष्या सरला बेन ने की थी. बिमला बहुगुणा उस आश्रम की सबसे प्रिय छात्राओं में एक गिनी जाती थीं.

बिमला बहुगुणा भूदान आंदोलन में अपने बेहतर काम के लिए भी जानी जाती रहीं. विनोबा भावे के मंत्री दामोदर ने बिमला को “वन- देवी” की उपाधि दी थी और कहा था कि ऐसी लड़की उन्होंने पहले कभी नहीं देखी, जो बहुत आसानी और मजबूती से नौजवानों का सही मार्गदर्शन करती हैं.

Bimla Bahuguna Passed Away

Bimla Bahuguna ने शादी के लिए रखी थी अनोखी शर्त

बहुत ही कम लोग जानते हैं कि बिमला बहुगुणा और सुंदर लाल बहुगुणा की शादी की कहानी बड़ी रोचक है. साल 1954 में बिमला बहुगुणा ने शादी के लिए सुंदर लाल के सामने शर्त रखी थी. जिसके बाद ही उन्होंने विवाह के लिए हां किया था.

दरअसल बिमला को पिता की एक चिट्ठी के जरिए मालूम चला कि उनका विवाह सुंदर लाल के साथ तय हुआ है. इस चिट्ठी में आदेश दिया गया था कि अमुक दिनांक,अमुक माह में उनका विवाह सुंदर लाल के साथ तय कर दिया गया है. अब बिमला बहुत ही दुविधा में थीं वो शादी नहीं करना चाहती थीं लेकिन अपनी छोटी बहनों की पढ़ाई बीच में ना छूट जाए और पिता जी नाराज ना हो जाए, ये भी डर उनको सता रहा था. तो उन्होंने विवाह से पहले एक शर्त रखी.

शादी के लिए शर्त ये थी कि सुंदरलाल राजनीतिक कामों को छोड़कर एक आश्रम की स्थापना करें. जिस पर सुंदरलाल भी तैयार हो गए और तब सड़क से मीलों दूर सिलयारा आश्रम की शुरुआत की गई. विवाह ठक्कर बाबा आश्रम में संपन्न हुआ था.

CM Pushkar Singh Dhami ने जताया दुःख

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और ‘चिपको’ आंदोलन के नेता स्वर्गीय सुंदर लाल बहुगुणा की पत्नी विमला बहुगुणा के निधन पर अपनी संवेदना व्यक्त की . एक्स पर एक पोस्ट में, सीएम धामी ने लिखा, ” स्वर्गीय सुंदर लाल बहुगुणा जी की पत्नी बिमला बहुगुणा जी, जिन्होंने अपना पूरा जीवन सामाजिक उत्थान के लिए समर्पित कर दिया और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दिया, के निधन की खबर अत्यंत दुखद है. ईश्वर पुण्य आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें.”

शाबाश। उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने रचा इतिहास, नेशनल गेम्स में लगाया पदकों का शतक

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उत्तराखंड में आयोजित 38 वें राष्ट्रीय खेलों के समापन से कुछ घंटे पूर्व ही उत्तराखंड ने पदकों का शतक लगाकर इतिहास रच दिया है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। कभी इतने पदक उत्तराखंड की झोली में आकर नहीं गिरे थे। उत्तराखंड का यह प्रदर्शन चमत्कारिक है और खेलों की दुनिया में असल वसंत खिलने का आभास करा रहा है। गोवा में आयोजित 37 वें राष्ट्रीय खेलों में सिर्फ 24 पदक उत्तराखंड ने जीते थे और पदक तालिका में वह 25 वें स्थान पर रहा था। इस बार पदकों की संख्या और पदक तालिका में उत्तराखंड की स्थिति दोनों में ही जबरदस्त उछाल आ गया है। गुरूवार की शाम को पदक तालिका में उत्तराखंड कुल 101 पदकों के साथ सातवें नंबर पर नजर आया।

पदकों का शतक, गोल्ड मेडल भी बढ़े

अपने घरेलू मैदान में मेजबान उत्तराखंड के खिलाड़ियोें ने शानदार प्रदर्शन किया है। पिछले राष्ट्रीय खेलों में जहां सिर्फ तीन स्वर्ण पदक उत्तराखंड ने देखे थे, वहीं इस बार स्वर्णिम सफलता की बयार चली है। उत्तराखंड ने 24 स्वर्ण पदक झटके हैं। इसके अलावा, 25 रजत और 42 कांस्य पदकों के साथ कुल 101 पदक अपने खाते में डाल दिए हैं। पदकों के मामले में देखा जाए, तो तालिका में उत्तराखंड से सिर्फ सर्विसेज, महाराष्ट्र, हरियाणा ही आगे हैं। इस लिहाज से उत्तराखंड का चौथा नंबर है, लेकिन स्वर्ण पदकों की कुल संख्या से होने वाले आंकलन के चलते उसका सातवां नंबर बना है। स्वर्ण पदक ज्यादा होने के कारण कर्नाटक, मध्य प्रदेश व तमिलनाडू जैसे राज्य पदक तालिका में उत्तराखंड से आगे हैं।

उत्साह शिखर पर, संकल्प से मिली सफलता

इस प्रदर्शन से उत्तराखंड का उत्साह सातवें आसमान पर है। खिलाड़ियों की अथक मेहनत और सरकार के प्रयासों ने मिलकर ऐसा रंग जमाया, कि उत्तराखंड में खेलों का असल वसंत अब दिखाई दे रहा है। पदकों के लिहाज से उत्तराखंड ने इतिहास रच दिया है। उत्तराखंड के खिलाड़ियों को उसके घरेलू मैदान के अलावा सरकार की तमाम उन योजनाओं ने आगे बढ़ने में मदद की, जो उनके कल्याण से सीधे जुड़ी हैं।

सीएम धामी ने थपथपाई पीठ

उत्तराखंड के खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने राज्य का भी सिर सम्मान से और ऊंचा कर दिया है। सीएम धामी ने भी राज्य के खिलाड़ियों की पीठ थपथपाई है। सीएम ने कहा है कि, खिलाड़ियों के दमदार प्रदर्शन ने उत्तराखंड का मान बढ़ाया है। 101 पदक जीतकर उत्तराखंड ने इतिहास रच दिया है। इससे पहले कभी उत्तराखंड पदकों के शतक तक नहीं पहुंचा था। निश्चित तौर पर यह उत्तराखंड के खेलभूमि बनने की तरफ ऊंची छलांग है। हम खेल विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। मैं देशभर से आए खिलाड़ियों और अन्य मेहमानों के प्रति भी आभार प्रकट करता हूं, जिन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में योगदान किया है।

उत्तराखंड में जंगल की आग रोकेगा शीतलाखेत मॉडल, सीएम धामी ने दिए निर्देश

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड में वनाग्नि पर प्रभावी नियंत्रण के लिए शीतलाखेत मॉडल को आदर्श मॉडल बताया।  उन्होंने कहा कि वनों को बचाने में समुदाय किस प्रकार अपना रचनात्मक व सकारात्मक योगदान दे सकते हैं, शीतलाखेत मॉडल इसका उत्कृष्ट उदाहरण हैं और धीरे-धीरे सभी जनपद इसे अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के बेशकीमती वनों को अग्नि से बचाने के लिए स्थानीय समुदायों, ग्रामीणों और विशेषकर महिलाओं की सहभागिता जरूरी है।

समय पर मिले सूचना तो कम हो खतरा

उन्होंने कहा कि समुदाय ही सबसे पहले किसी भी आपदा का सामना करते हैं और यदि वे समय पर इसकी सूचना प्रशासन को दें तथा राहत और बचाव दलों के पहुंचने से पहले छोटे-छोटे प्रयास प्रारंभ कर दें तो काफी हद तक आपदाओं के खतरों को कम किया जा सकता है।

सीएम धामी ने परखी तैयारियां

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को उत्तराखण्ड में वनाग्नि नियंत्रण को लेकर पीएमओ कार्यालय के निर्देश पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण गृह मंत्रालय, भारत सरकार और उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मॉक ड्रिल का जायजा लिया। यह मॉक ड्रिल राज्य में वनाग्नि के दृष्टिकोण से सबसे अधिक प्रभावित छह जनपदों, अल्मोड़ा, चम्पावत, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी और देहरादून के 16 स्थानों पर की गई। यह देश की पहली मॉक ड्रिल है जो वनाग्नि नियंत्रण में समुदायों की सहभागिता पर केन्द्रित है।

यूएसडीएमए स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से उन्होंने बारी-बारी सभी छह जनपदों के जिलाधिकारियों से मॉक ड्रिल को लेकर जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह मॉक ड्रिल केवल एक अभ्यास नहीं है बल्कि यह जानने और समझने का अवसर भी है कि क्या हमारी स्ट्रेंथ है और क्या कमियां हैं ताकि उनमें सुधार किया जा सके। इससे तैयारियों को परखने के साथ ही आने वाले दिनों में वनाग्नि की घटनाओं में त्वरित नियंत्रण पाने में भी मदद मिलेगी। साथ ही चुनौतियों का धरातल पर परीक्षण होगा और समाधान के रास्ते निकलेंगे।  

समूचे तंत्र की है जिम्मेदारी

सीएम धामी ने कहा कि हमारे राज्य का 71 प्रतिशत भूभाग घने वनों से अच्छादित है और यह जैव विविधता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हर वर्ष हमें वनाग्नि की चुनौतियों से जूझना पड़ता है और इसके कारण न सिर्फ वन संपदा को नुकसान पहुंचता है, बल्कि वन्य जीवों के साथ पर्यावरण तथा स्थानीय समुदायों की आजीविका भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि वनाग्नि से प्रभावी तरीके से निपटने में सभी विभागों के साथ ही स्थानीय समुदायों को फ्रंटफुट में आकर कार्य करना पड़ेगा। वनाग्नि हो या कोई अन्य आपदा, यह विषय एक विभाग का नहीं है बल्कि समूचे तंत्र का है और सभी को इसमें ओनरशिप लेनी होगी।

उन्होंने कहा कि युवक मंगल दल, महिला मंगल दल, एनसीसी और एनएसएस कैडेट्स, स्थानीय ग्रामीण और विशेषकर महिलाएं, आपदा मित्र, भारत स्काउट एंड गाइड, फायर वाचर्स, रेड क्रास, एनजीओ, पंचायत प्रतिनिधि, ग्राम प्रधान और विद्यार्थियों को भी जागरूक और प्रशिक्षित किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य में वनाग्नि की चुनौतियों से समाधान के लिए वनाग्नि की पिछली घटनाओं में आई समस्याओं का ध्यान में रखते हुए आगे की योजनाएं बनाई जाएं। उन्होंने प्रमुख सचिव  आर.के. सुधांशु को निर्देश दिये कि वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए सभी विभागों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पत्र जारी किया जाए। वनाग्नि को रोकने के लिए चाल-खाल, तलैया और अन्य प्रभावी उपायों पर कार्य किए जाएं ताकि जमीन में नमी बनी रहे। इसके लिए जलागम विभाग का भी सहयोग लिया जाए।  

आधुनिक तकनीक का प्रयोग करने के निर्देश  मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने वनाग्नि नियंत्रण में आधुनिक तकनीकों, जैसे सैटेलाइट मॉनिटरिंग, ड्रोन सर्विलांस, रिमोट सेंसिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फायर डिटेक्शन सिस्टम का उपयोग बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने गृह मंत्रालय का भी वनाग्नि नियंत्रण में सहयोग प्रदान करने के लिए आभार जताया। साथ ही वायु सेना द्वारा समय-समय पर वनाग्नि पर नियंत्रण के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने के लिए आभार जताया। उन्होंने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की भूमिकाओं को भी सराहा।

राष्ट्रीय खेलों में उत्तराखण्ड की ऐतिहासिक उपलब्धि, समापन समारोह में शामिल होंगे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

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उत्तराखण्ड में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेलों का आयोजन ऐतिहासिक सफलता की ओर बढ़ रहा है। राज्य की खेल संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं मैदान में उतरकर खिलाड़ियों का हौसला बढ़ा रहे हैं।

मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड ने खेलों में बेहतर प्रदर्शन किया है। वर्तमान में प्रदेश 23 गोल्ड, 34 सिल्वर और 42 ब्रॉन्ज मेडल के साथ अंकतालिका में 7वें स्थान पर है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 37वें राष्ट्रीय खेलों (गोवा) में उत्तराखण्ड 25वें स्थान पर था।

राष्ट्रीय खेलों के समापन समारोह में शामिल होंगे केंद्रीय गृह मंत्री

राष्ट्रीय खेलों के समापन समारोह में 14 फरवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। इस मौके पर विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री धामी का संकल्प: देवभूमि को बनाएंगे खेलभूमि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य में खेल सुविधाओं का व्यापक विकास हुआ है, जिससे प्रदेश के खिलाड़ी बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “उत्तराखण्ड अब सिर्फ देवभूमि ही नहीं, बल्कि खेलभूमि के रूप में भी स्थापित होगा। खिलाड़ियों के व्यक्तित्व का विकास होगा और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन अवसर मिलेंगे।”

मुख्यमंत्री लगातार खेल आयोजनों का निरीक्षण कर रहे हैं। हाल ही में वे वंदना कटारिया स्टोर्स स्टेडियम पहुंचे, जहां उन्होंने खुद हॉकी खेलकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने मलखंब और कुश्ती प्रतियोगिताओं का भी अवलोकन किया और साइकिल चलाकर मैदान का जायजा लिया।

उत्तराखण्ड सरकार खेलों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और राष्ट्रीय खेलों की सफलता इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश का भविष्य खेलों के क्षेत्र में उज्ज्वल है।

DM Savin Bansal: अव्यवस्थाओं की शिकायत पर एक्शन में डीएम, उप जिला चिकित्सालय में बिठाई जांच

DM Savin Bansal लगातार एक्शन में नज़र आ रहे हैं . लापरवाही बरतने पर किसी भी अधिकारी या कर्मचारी पर कार्रवाई का सिलसिला तेज़ है. इस बार मामला उप जिला चिकित्सालय का है.

दरअसल उप जिला चिकित्सालय में 78 वर्षीय महिला के उपचार में लापरवाही बरतने की शिकायत पर DM Savin Bansal ने एसडीएम ऋषिकेश एवं मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी को चिकित्सालय का निरीक्षण कर जांच आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. जिसके क्रम में आज एसडीएम ऋषिकेश एवं सीएमओ ने उप जिला चिकित्सालय ऋषिकेश का निरीक्षण किया.

शिकायत में सफाई कर्मचारी वार्ड में स्वच्छता बनाए रखने के लिए नहीं आए, नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही व अमानवीय व्यवहार, 3 दिनों से पट्टी नहीं बदलने की शिकायत, वार्ड में बिखरा मेडिकल वेस्ट, वार्ड में बहुत दयनीय स्थिति, सीएमएस का अपने नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं आदि शिकायत DM Savin Bansal को प्राप्त हुई. जिस पर डीएम ने एसडीएम, सीएमओ को जांच हेतु रवाना कर जांच आख्या मांगी है.

DM Savin Bansal ने जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए

DM Savin Bansal ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम ऋषिकेश एवं प्रभारी सीएमओ को चिकित्सालय का निरीक्षण करते हुए शिकायती पत्र में वर्णित बिन्दुओं पर जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए. एसडीएम एंव प्रभारी सीएमओ द्वारा जल्द डीएम को प्रस्तुत की जाएगी जांच रिपोर्ट.

एसडीएम ऋषिकेश एवं प्रभारी सीएमओ ने निरीक्षण के दौरान चिकित्सालय में सफाई व्यवस्था ठीक नहीं पाए जाने पर सीएमस को नियमित वार्ड, ओटी, लेबररूम, आईसीयू का निरीक्षण कर सफाई व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए. कर्मचारियों को ड्रेस में रहने को निर्देशित किया गया. सफाई व्यवस्था चाक चौबंद बनाने के निर्देश.

इसके साथ ही ये भी निर्देशित किया गया कि अस्पताल में भीड़ न रहे, एक मरीज के साथ अटैंडेंट के साथ अधिक तीमारदार न रहे. अनाधिकृत व्यक्ति चिकित्सालय में प्रवेश न करे, इसके लिए चिकित्सालय में स्टॉप ड्रेस एवं आईकार्ड के साथ रहने के निर्देश दिए गए हैं. चारधाम यात्रा के लिए भी व्यवस्थाएं पूर्व में ही बनाए रखने के निर्देश दिए गए.

Uttarakhand Cabinet: 33 प्रस्तावों पर लगी मुहर, पूर्व विधायकों की बढ़ी पेंशन और पेट्रोल भत्ता, पढ़ें अहम फैसले

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Uttarakhand Cabinet: CM Dhami की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 33 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति बनी. इस बैठक के दौरान बजट प्रस्तावों और सड़क सुरक्षा नियमावली को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है. दरअसल, उत्तराखंड राज्य में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए परिवहन विभाग ने रोड सेफ्टी पॉलिसी तैयार की है, जिस पर मंत्रिमंडल ने सहमति जता दी है. साथ ही निर्वाचन विभाग का ढांचा पुनर्गठन किये जाने पर भी मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है.

वनाग्रि रोकने के लिए गठित समिति को 30 हजार रुपए मिलेंगे

मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान केदारनाथ और हेमकुंड साहिब में रोपवे बनाए जाने संबंधित डीपीआर को भारत सरकार को भेजने पर सहमति बन गई है. वनाग्नि को रोकने के लिए वन विभाग की ओर से गठित समिति को 30 हजार रुपए प्रति समिति दिए जाने पर सहमति बनी है.

इसके अलावा, खुरपिया फार्म की जमीन को आवासीय भूमि के रूप में इस्तेमाल करने पर सहमति Uttarakhand Cabinet ने दी है. यही नहीं, सैनिक कल्याण विभाग के लिए निशुल्क भूमि उपलब्ध कराए जाने पर भी मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है.

Uttarakhand Cabinet: पूर्व विधायकों की पेंशन

पूर्व विधायकों की पेंशन 40,000 रुपए से बढ़ाकर 60,000 रुपए कर दी गई है. साथ ही, हर साल पेंशन में 3,000 रुपए की वार्षिक वृद्धि की जाएगी, जबकि पहले यह 2,500 रुपए थी.

विधायकों को मिलने वाले पेट्रोल भत्ते में भी वृद्धि

विधायकों के लिए पेट्रोल भत्ता– सदन की कार्यवाही में शामिल होने के लिए विधायकों को मिलने वाले पेट्रोल भत्ते में भी वृद्धि की गई है. उत्तराखंड में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए परिवहन विभाग द्वारा तैयार की गई रोड सेफ्टी पॉलिसी को Uttarakhand Cabinet ने मंजूरी दी.

uttarakhand cabinet decisions

Uttarakhand Cabinet: ये रहे अहम फैसले

  • उच्च न्यायालय उत्तराखंड के नियंत्रण अधीन अधीनस्थ न्यायालय में आशुलिपि के 63 और डिपोजिशन राइटर के 74 पर आउटसोर्स माध्यम से भरे जाने पर मिली मंजूरी.
  • उपनल कार्यालय के लिए निशुल्क भूमि सैनिक कल्याण विभाग को दी जाएगी. देहरादून के ब्राह्मण गांव परगना पछुआ दून कृषि योग्य बंजर भूमि पर बनेगा उपनल कार्यालय. ₹1 प्रतिवर्ष की दर से 90 सालों के लिए लीज पर दी गई भूमि.
  • ई डिस्टिक सेंटर और सीएससी के जारी दी जाने वाली सेवा के लिए 40 रुपए शुल्क निर्धारित.
  • पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ़ उत्तराखंड लिमिटेड के वित्तीय वर्ष 2023-24 के वार्षिक वित्तीय प्रतिवेदन को विधानसभा के पटल पर रखे जाने को मंजूरी.
  • परिवहन विभाग के तहत संरचनात्मक ढांचे में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी के 10 नए पद सृजन को मिली मंजूरी.
  • उत्तराखंड कारागार मुख्यालय तथा अधीनस्थ कार्यालय वैयक्तिक सहायक / सहायक लेखाकार / वाहन चालक संवर्गीय कर्मचारी सेवा एकीकरण नियमावली 2024 को मिली मंजूरी.
  • उत्तराखंड सामान्य औद्योगिक विकास नियंत्रण अधिनियम, 2022 में किया गया संशोधन.

रोपवे परियोजना

Uttarakhand Cabinet बैठक में केदारनाथ और हेमकुंड साहिब में रोपवे बनाए जाने संबंधी डीपीआर (Detailed Project Report) को भारत सरकार को भेजने की मंजूरी दी गई।

सैनिक कल्याण विभाग

सैनिक कल्याण विभाग को निशुल्क भूमि उपलब्ध कराने संबंधी प्रस्ताव को भी Uttarakhand Cabinet बैठक में मंजूरी दी गई।

खुरपिया फार्म की जमीन

खुरपिया फार्म की जमीन को आवासीय भूमि के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई।

बजट प्रस्ताव

मंत्रिमंडल की बैठक संपन्न होने के बाद कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि Uttarakhand Cabinet की बैठक के दौरान 33 से अधिक प्रस्तावों पर चर्चा की गयी है. इसमें आगामी वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट प्रस्तावों पर मंजूरी मिल गई है. 

Uttarakhand Cabinet में ये फैसले भी लिए गए

  • राज्य में नेचुरल गैस (पीएनजी और सीएनजी) पर वर्तमान में लागू 20% वैट की दर को किया गया कम। ऐसे में अब प्रदेश में पीएनजी पर वेट 5% और सीएनजी पर वैट 10% किया गया.
  • राज्य सरकार की सरकारी सेवकों को अनुमान ने अवकाश यात्रा सुविधा में किया गया संशोधन.
  • उत्तराखंड सेवा का अधिकार का अष्टम वार्षिक प्रतिवेदन 2022-23 को विधानसभा के पटल पर रखने को मिली मंजूरी.
  • स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ़ होटल मैनेजमेंट कैटरिंग टेक्नोलॉजी एंड एंप्लाईड न्यूट्रिशन, नई टिहरी संस्थान की शैक्षणिक सेवा नियमावली, 2024 को मिली मंजूरी.
  • रुद्राक्ष एविएशन के जरिए नवंबर 2024 से एमआई- 17 हेलीकॉप्टर द्वारा 90 दिवसीय शीतकालीन आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा के लिए हेली सेवा संचालित करने का निर्णय लिया गया है. जिस पर मंत्रिमंडल की मिली मंजूरी.
  • कृषि उत्पादन मंडी समिति, रुद्रपुर के तमाम भूमि के भू उपयोग में किया गया बदलाव. इन भूमि का आवासीय रूप में किया जाएगा इस्तेमाल.
  • उत्तराखंड पेयजल संस्थान विकास एवं निर्माण निगम की वित्तीय वर्ष 2021-22 के वार्षिक लेखे को विधानसभा के पटल पर रखे जाने को मिली मंजूरी.

Uttarakhand Cabinet के अन्य फैसले

  • राज्य सेक्टर की मधुमक्खी पालन योजना के तहत दी जाने वाली राज्य सहायता में वृद्धि की गई. राज्य में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए मौनपलकों को दी जा रही राज्य सहायता 350 रुपए को बढ़ाकर 750 रुपए किया गया.
  • सेब की अति सघन बागवानी योजना (राज्य सेक्टर) को लेकर सरकार ने लिए निर्णय. तीन किस्तों में दी जाएगी धनराशि.
  • पेराई सत्र 2024-25 के लिए प्रदेश की सहकारी एवं सार्वजनिक क्षेत्र की चीनी मिलों को बैंक से लोन लिए जाने के लिए 388.01 करोड़ रुपए शासकीय प्रत्याभूति को मिली मंजूरी.
  • ब्रिज, रोपवे, टनल एण्ड अदर इन्फास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लि० (ब्रिडकुल) में प्रबन्ध निदेशक और मुख्य महाप्रबन्धक (परियोजना) के पद पर शैक्षिक अर्हता/अनुभव और आयु सीमा में संशोधन के लिए निगम की सेवा नियमावली (संशोधित), 2008 में संशोधन को मिली मंजूरी.
  • निर्वाचन विभाग उत्तराखंड के विभागीय ढांचे को संशोधित करने को मिली मंजूरी. संशोधित विभागीय ढांचे में कुल 387 पद प्रस्तावित किए गए हैं जिसमें से पदेन 28, नियमित अधिष्ठान 195 और बाहर स्रोत के 164 पद शामिल हैं.
  • ग्राम पंचायत के क्लस्टर स्तर पर वन अग्नि सुरक्षा प्रबंधन समितियां के गठन को मंजूरी. वन विभाग की ओर से इंसेंटिव के रूप में हर समिति को 30 हज़ार रुपए प्रति साल दिया जाएगा. हर समिति को लगभग 500 से 600 हेक्टेयर वन क्षेत्र आवंटित की जाएगी.