होम ब्लॉग पेज 43

धामी कैबिनेट ने ले लिया ये बड़ा फैसला, भर्ती की राह देख रहे युवा ये खबर जरूर देखें

बुधवार को देहरादून स्थित सचिवालय में धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में कुल 12 प्रस्तावों में मुहर लगाई गई है। पर्यटन विभाग और परिवहन विभाग के तमाम प्रस्तावों के साथ ही अब कैबिनेट ने फैसला किया है कि कांस्टेबल पद पर होने वाली वर्दीधारियों की भर्ती की प्रारंभिक परीक्षा केंद्रीयकृत तौर पर कराई जाएगी। आइए देखते हैं धामी कैबिनेट के फैसले विस्तार से –

कैबिनेट ने लिए ये अहम फैसले

1 – श्री बद्रीनाथ धाम परिक्षेत्रान्तर्गत Artwork for Sudarshan Chakra Sculpture at Arrival Plaza in Badrinath के निर्माण एवं स्थापना के कार्य की अनुमति प्रदान किये जाने के सम्बन्ध में कैबिनेट द्वारा दी गई अनुमति।

राज्य सरकार के द्वारा प्रधानमंत्री जी के दिशा-निर्देशों पर श्री बद्रीनाथ धाम में मास्टर प्लान के अन्तर्गत पुनर्निर्माण कार्य किये जा रहे हैं। उक्त के क्रम में श्री बद्रीनाथ धाम में एराईवल प्लाजा पर प्रधानमंत्री जी भारत सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट के अन्तर्गत अति विशिष्ट प्रकार की Artwork for Sudarshan Chakra Sculpture का स्ट्रक्चर बनाया जाना है। उक्त कार्य में अति विशिष्ट प्रकार की कलाकृति बनाये जाने की अनुमति कैबिनेट द्वारा प्रदान की गयी है।

2 – श्री बद्रीनाथ धाम परिक्षेत्रान्तर्गत Art work for Sheshnetra Lotus wall at Lakefront area Badrinath के निर्माण एवं स्थापना के कार्य कराये जाने के सम्बन्ध में कैबिनेट ने लिया निर्णय।

श्री बद्रीनाथ धाम में एराईवल प्लाजा पर प्रधानमंत्री जी भारत सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट के अन्तर्गत अति विशिष्ट प्रकार की Art work for Sheshnetra Lotus wall at Lakefront area Badrinath का स्ट्रक्चर बनाया जाना है। उक्त अति विशिष्ट प्रकार की कलाकृति के निर्माण हेतु कैबिनेट द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई।

3 – श्री बद्रीनाथ धाम परिक्षेत्रान्तर्गत Artwork for Sudarshan Chowk Kalakruti at Tourism management Centre Building in Arrival Plaza in Badrinath के निर्माण एवं स्थापना के कार्य कराये जाने का कैबिनेट ने लिया निर्णय।

श्री बद्रीनाथ धाम में एराईवल प्लाजा पर प्रधानमंत्री जी भारत सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट के अन्तर्गत अति विशिष्ट प्रकार की Artwork for Sudarshan Chowk Kalakruti at Tourism management Centre Building in Arrival Plaza in Badrinath पर कराया जाना है। उक्त अति विशिष्ट प्रकार के कार्य के निर्माण हेतु कैबिनेट की मंजूरी।

4 – श्री बद्रीनाथ धाम परिक्षेत्रान्तर्गत Tree and River Sculpture at Badrinarayan Chowk के निर्माण एवं स्थापना के कार्य कराये जाने के सम्बन्ध में कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय।

श्री बद्रीनाथ धाम में एराईवल प्लाजा पर प्रधानमंत्री जी भारत सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट के अन्तर्गत अति विशिष्ट प्रकार की Tree and River Sculpture at Badrinarayan Chowk पर बनाया जाना है। उक्त अतिविशिष्ट प्रकार की कालाकृति के निर्माण हेतु कैबिनेट ने दी मंजूरी।

5 – उत्तराखण्ड विधि विज्ञान प्रयोगशाला विभाग में विभागाध्यक्ष घोषित किये जाने का निर्णय।

राज्य की विधि विज्ञान प्रयोगशाला को अधिसूचना दिनांक-27.12.2024 के द्वारा गृह विभाग के सीधे नियन्त्रण में लाये जाने के फलस्वरूप विधि विज्ञान प्रयोगशाला विभाग का आय-व्ययक सम्बन्धी समस्त कार्य प्रभावित होने के दृष्टिगत निदेशक, विधि विज्ञान प्रयोगशाला को शासकीय अभिलेखों में विभागाध्यक्ष घोषित किये जाने हेतु वित्तीय हस्तपुस्तिका खण्ड-1 (वित्तीय अधिकारों का प्रतिनिधायन) वर्ष 2018 के अध्याय-1 में विभागाध्यक्षों की सूची सम्मिलित किये जाने के प्रस्ताव पर मंत्रिमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है।

6 – उत्तराखण्ड मानव अधिकार आयोग के वर्तमान संरचनात्मक ढांचे का पुनर्गठन।

उत्तराखण्ड मानव अधिकार आयोग का गठन वर्ष, 2011 में किया गया है, तत्समय आयोग के संरचनात्मक ढांचे में कुल-47 पद सृजित किये गये थे। आयोग के वर्तमान संरचनात्मक ढांचे का विगत 11 वर्षों में कार्य आवश्यकता के आधार पर पुनर्गठन नहीं किया जा सका है, जिससे आयोग के दैनिक कार्य प्रभावित होने के कारण वर्तमान परिदृश्य के अनुरूप आयोग के कार्यों के सुचारू संचालन हेतु पूर्व से सृजित ढांचे में 12 नवीन पदों को सृजित करते हुये उत्तराखण्ड मानवाधिकार आयोग के वर्तमान संरचनात्मक ढांचे को पुनर्गठित किये जाने के प्रस्ताव पर मंत्रिमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है।

7 – राज्यांतर्गत राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) से आच्छादित कार्मियों की पूर्व सेवाओं को उपादान (Gratuity) की देयता हेतु जोडे जाने का निर्णय।

भारत सरकार के आदेश संख्या-7/5/2012 पी एंड पी डब्ल्यू (एफ)/बी दिनांक 12 फरवरी 2020 के क्रम में राज्यांतर्गत राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) से आच्छादित कार्मियों की सेवा को उपादान की देयता हेतु जोडने (संगणनित) के संबंध में भारत सरकार के समरूप व्यवस्था प्रतिपादित किये जाने का कैबिनेट द्वारा निर्णय लिया गया।

8 – उत्तराखण्ड वर्दीधारी सिपाही पदों पर सीधी भर्ती की चयन प्रक्रिया नियमावली, 2025 एवं उत्तराखण्ड वर्दीधारी उप निरीक्षक पदों पर सीधी भर्ती की चयन प्रक्रिया नियमावली, 2025 के प्रख्यापन को मंजूरी।

राज्य सरकार के साधनों का समुचित एवं विवकेपूर्ण उपयोग किये जाने तथा अभ्यर्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं में सुविधाजनक स्थिति प्रदान किये जाने के लिए सम्बन्धित विभागों एवं चयन संस्था / आयोग के साथ विचारोपरान्त वर्दीधारी पदों (सिपाही एवं उप निरीक्षक) पर सीधी भर्ती की चयन प्रक्रिया में एकरूपता लाये जाने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड वर्दीधारी सिपाही पदों पर सीधी भर्ती की चयन प्रक्रिया नियमावली, 2025 एवं उत्तराखण्ड वर्दीधारी उप निरीक्षक पदों पर सीधी भर्ती की चयन प्रक्रिया नियमावली, 2025 के प्रख्यापन किये जाने का कैबिनेट द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है।

9 – वन टाइम सेटेलमेंट के तहत विनियमित हुए पर्यावरण मित्रों के सेवाकाल के दौरान मृत्यु के उपरान्त उनके आश्रितों को मृतक आश्रित नियमावली, 1974 का लाभ प्रदान किये जाने हेतु कैबिनेट द्वारा अनुमोदन।

शहरी विकास विभाग के अन्तर्गत स्थानीय निकायों में विनियमितीकरण नियमावली, 2013 के अन्तर्गत 859 पर्यावरण मित्रों को वन टाईम सेटलमेंट के तहत विनियमित किया गया था। उक्त विनियमितीकरण विषयक शासनादेश संख्या-1282, दिनांक 22.11.2016 में प्राविधानित था कि एक बार के लिए विनियमित किये जाने वाले उक्त कार्यरत कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति अथवा अन्य किसी दशा में उक्त पद रिक्त होने पर स्वतः आउटसोर्स में परिवर्तित हो जायेंगे। उक्त प्राविधान के कारण सम्बन्धित कार्मिकों के आश्रितों को मृतक आश्रित नियमावली का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उक्तानुसार वन टाइम सेटेलमेंट के तहत विनियमित हुए पर्यावरण मित्रों के सेवाकाल के दौरान मृत्यु के उपरान्त उनके आश्रितों को मृतक आश्रित नियमावली, 1974 का लाभ प्रदान किये जाने हेतु विनियमितीकरण विषयक शासनादेश संख्या-1282, दिनांक 22.11.2016 में संशोधन किये जाने का कैबिनेट द्वारा निर्णय लिया गया है।

10 – उत्तराखण्ड स्वच्छ गतिशीलता परिवर्तन नीति, 2024 में संशोधन।

परिवहन विभागान्तर्गत उत्तराखण्ड स्वच्छ गतिशीलता परिवर्तन नीति, 2024 के प्रस्तर-09 के बिन्दु (2) में यह व्यवस्था थी कि नीति के तहत दिए जाने वाले विभिन्न प्रोत्साहनों के लिए धन विभिन्न अनुमन्य स्रोतों से प्राप्त किया जाएगा और एक गैर व्यपगत फंड के रूप में उत्तराखण्ड क्लीन मोबिलिटी ट्रांजिशन फंड के नाम से एक एस्क्रो खाते में जमा किया जायेगा। बैंको द्वारा उक्त एस्क्रो खातों को खोलने हेतु कतिपय समस्यायें इंगित की गई है। इसके अतिरिक्त शासन के वित्त विभाग के शासनादेश दिनांक 05 जुलाई, 2023 के अनुसार बजटीय अनुदानों हेतु एस०एन०ए० खाता खोलकर उसे आई०एफ०एम०एस० से इंटीग्रेटड किया जाना अनिवार्य है। अतः एस्क्रो खाते के स्थान पर उत्तराखण्ड क्लीन मोबिलिटी ट्रांजिशन फंड के नाम से एस०एन०ए० खाता खोले जाने का कैबिनेट द्वारा निर्णय लिया गया है।

11 – उत्तराखण्ड मोटरयान कराधान सुधार अधिनियम, 2003 के अन्तर्गत निर्गत अधिसूचना में संशोधन।

उत्तराखण्ड मोटरयान कराधान सुधार अधिनियम, 2003 के अन्तर्गत जारी अधिसूचना दिनांक 02 जनवरी, 2019 में विद्युत बैटरी अथवा सोलर पॉवर अथवा सी०एन०जी० से चलित यानों पर एक बारीय कर की दरें निर्धारित हैं। उक्त अधिसूचना में केन्द्रीय मोटरयान (नवां संशोधन) नियम, 2023 के नये नियम 125 ‘‘एम’’ के अन्तर्गत केवल प्लग इन हाईब्रिड इलेक्ट्रिक यान एवं स्ट्रांग हाईब्रिड इलेक्ट्रिक यान को भी देय मोटरयान कर से छूट दिए जाने का कैबिनेट द्वारा निर्णय लिया गया है। उक्त निर्णय का उददेश्य वाहन स्वामियों को उक्त श्रेणी के वाहन क्रय एवं उसके उपयोग करने हेतु प्रोत्साहित करना एवं प्रदूषण में कमी लाना भी है। उक्त कर छूट वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में केवल एक बार के लिये ही वैध होगी।

12 – उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, देहरादून के संरचनात्मक ढांचे का पुनर्गठन करते हुए नवीन पदों का सृजन।

उत्तराखण्ड राज्य में विभिन्न विभागों के अन्तर्गत उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग की परिधि के बाहर के समूह-ग के पदों पर चयन किये जाने हेतु अधिसूचना दिनांक 17-08-2014 के द्वारा उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग अधिनियम 2014 की धारा 5 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का गठन किया गया है, तदोपरान्त उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का ढांचा शासनादेश सं0 441 दिनांक 25 नवम्बर, 2014 के द्वारा 64 अस्थायी पदों का सृजन किया गया। जिसमें 02 पद डाइंग कैडर होने के दृष्टिगत वर्तमान में 62 पद ही सृजित है।

वर्तमान में विभिन्न विभागों में कार्मिकों के भर्तियों के अधियाचनों की अधिकता के दृष्टिगत आयोग के कार्यों के सुचारू सम्पादन हेतु आयोग के संरचनात्मक ढांचे का पुनर्गठन करते हुए अतिरिक्त पदों के सृजन की आवश्यकता के दृष्टिगत उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के संरचनात्मक ढ़ाचे में पूर्व सृजित 62 पदों के अतिरिक्त उप सचिव का 01 नियमित पद तथा विधि अधिकारी 01 पद, संविदा/आउटसोर्स, डाटा एंट्री ऑपरेटर के 02 पद आउटसोर्स, कम्प्यूटर प्रोग्रामर का 01 पद आउटसोर्स, स्वागती का 01 पद आउटसोर्स, वाहन चालक के 03 पद आउटसोर्स तथा सुरक्षा कार्य हेतु 06 सुरक्षा कर्मियों आउटसोर्स के माध्यम से, इस प्रकार कुल 15 (01 नियमित पद तथा 14 आउटसोर्स के) नवीन पदों के सृजन का कैबिनेट द्वारा निर्णय लिया गया है।

IPL 2025 Winner : RCB बनी चैंपियन, PBSK को मिली मायूसी, यहां देखिए स्कोरबोर्ड

0

RCB अब IPL 2025 की चैंपियन (IPL 2025 Winner) है। अहमदाबाद में हुए फाइनल मैच में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू ने पंजाब किंग्स को हरा दिया है। आईपीएल में 18 साल बाद एक नई टीम चैंपियन बनी है।

RCB को 17 साल बाद मिली जीत

आखिरकार RCB ने 17 साल बाद आईपीएल के 18वें संस्करण में जीत का स्वाद चख लिया है। आरसीबी ने 17 साल बाद कप उठाया है। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला गया फाइनल अंतिम गेंद तक शानदार रहा। पंजाब ने मैच जीतने की पूरी कोशिश की। पहले बल्लेबाजी करते हुए आरसीबी ने पंजाब को 191 रनों का लक्ष्य दिया। इस लक्ष्य का पीछा करने उतरी पंजाब की टीम की शुरुआत अच्छी रही लेकिन लगातार गिरते विकेट के चलते पंजाब अपने लक्ष्य से छह रन दूर रह गई। पंजाब की टीम बीस ओवरों में 184 रन ही बना सकी।

नहीं चले श्रेयस, कोहली ने रंग जमाया

IPL 2025 के फाइनल में पंजाब ने टॉस जीता और आरसीबी को पहले बल्लेबाजी का न्यौता दिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए आरसीबी ने नौ विकेट खोकर 190 रन बनाए। विराट कोहली ने 35 गेंदों में 43 रन बनाए। वहीं पंजाब की शुरुआत अच्छी रही लेकिन मिडिल ओवर्स में उसके विकेट लगातार गिरते रहे। वहीं पंजाब के कप्तान श्रेयस अय्यर आज कोई कमाल नहीं कर पाए। श्रेयस महज एक रन बना कर आउट हो गए। हालांकि शंशाक ने शानदार बैटिंग करते हुए 30 गेंदों में 61 रन बनाए और नॉट आउट रहे लेकिन वो भी अपनी टीम को जीत नहीं दिला पाए।

हरिद्वार में क्यों सस्पेंड हो गए DM, SDM समेत 12 अधिकारी ?, आखिर क्या है पूरी कहानी, पढ़िए यहां

उत्तराखंड का हरिद्वार मंगलवार को खबरों में बना रहा। यहां शासन और खास तौर पर सीएम पुष्कर सिंह धामी की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ ने पूरे प्रशासन अमले को हिला कर रख दिया। हरिद्वार के डीएम, एसडीएम समेत दस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है जबकि दो का सेवा विस्तार खत्म कर दिया गया है।

क्या है हरिद्वार का जमीन घोटाला ? नगर निगम के अधिकारियों ने खेला खेल

हरिद्वार में अधिकारियों ने जमीन घोटाले को अंजाम दिया। दरअसल हरिद्वार नगर निगम ने कूड़े को डंप करने के लिए 2.3 हेक्टेयर जमीन की खरीद की गई। इस जमीन में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं बरती गईं। खरीद से पहले विक्रेताओं से मिल कर जमीन का उपयोग बदला गया। इसके बाद जमीन की कीमत बढ़ गई। इसके बाद नगर निगम ने 13 करोड़ की जमीन 53 करोड़ रुपए में खरीद लिया। आरोप है कि जमीन की बढ़ी हुई कीमत भेजी तो विक्रेताओं के खाते में गई लेकिन बाद में घूम कर वो अधिकारियों के पास आई।

चुनावों के दौरान खेल, चुनाव के बाद पर्दाफाश

दरअसल जमीन का ये पूरा खेल उस वक्त खेला गया जब राज्य में नगर निगमों का कार्यकाल खत्म हो चुका था और वहां प्रशासकों का राज था। नगर निगम का काम डीएम देख रहे थे। ऐसे में अधिकारियों ने मनमानी की। लेकिन नगर निगम का चुनाव हुआ और हरिद्वार में किरन जैसल मेयर बन कर आईं। मेयर बनने के बाद उन्होंने इस जमीन घोटाले की शिकायत सीएम धामी से की। सीएम ने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए आईएएस रणवीर सिंह चौहान को जांच सौंप दी। प्रारंभिक जांच में ही इस घोटाले की बू मिल गई।

होगी विजिलेंस जांच, रिकवरी के भी आदेश

हरिद्वार जमीन घोटाले को सीएम धामी ने बेहद गंभीरता से लिया। यही वजह है कि मुख्यमंत्री ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच सतर्कता विभाग (Vigilance Department) से कराए जाने के निर्देश दे दिए हैं ताकि दोषियों की पूरी श्रृंखला का खुलासा हो सके और पारदर्शिता बनी रहे।

यही नहीं हरिद्वार भूमि घोटाले से संबंधित विक्रय पत्र (Sale Deed) को निरस्त करते हुए भूस्वामियों को दिए गए धन की रिकवरी सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश भी दिए गए हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने तत्कालीन नगर आयुक्त श्री वरुण चौधरी के कार्यकाल के दौरान नगर निगम हरिद्वार में हुए सभी कार्यों का विशेष ऑडिट कराए जाने के निर्देश दिए हैं ताकि वित्तीय अनियमितताओं की समुचित जांच की जा सके।

इन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई, कोई सस्पेंड तो किसी का सेवा विस्तार खत्म

कर्मेन्द्र सिंह – जिलाधिकारी और तत्कालीन प्रशासक नगर निगम हरिद्वार (निलंबित)
वरुण चौधरी – तत्कालीन नगर आयुक्त, नगर निगम हरिद्वार (निलंबित)
अजयवीर सिंह- तत्कालीन, उपजिलाधिकारी हरिद्वार (निलंबित)
निकिता बिष्ट – वरिष्ठ वित्त अधिकारी, नगर निगम हरिद्वार (निलंबित)
विक्की – वरिष्ठ वैयक्तिक सहायक (निलंबित)
राजेश कुमार – रजिस्ट्रार कानूनगो, तहसील हरिद्वार (निलंबित)
कमलदास –मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, तहसील हरिद्वार (निलंबित)

पूर्व में हो चुकी कार्रवाई
रविंद्र कुमार दयाल- प्रभारी सहायक नगर आयुक्त (सेवा समाप्त)
आनंद सिंह मिश्रवाण- प्रभारी अधिशासी अभियंता (निलंबित)
लक्ष्मी कांत भट्ट्- कर एवं राजस्व अधीक्षक (निलंबित)
दिनेश चंद्र कांडपाल- अवर अभियंता (निलंबित)
वेदपाल- सम्पत्ति लिपिक (सेवा विस्तार समाप्त)

ये बने हरिद्वार के नए DM, धामी की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ के बाद मिली जिम्मेदारी

हरिद्वार में नए डीएम की तैनाती हो गई है। मयूर दीक्षित हरिद्वार के नए डीएम (Haridwar DM) बनाए गए हैं। आपको बता दें कि सुबह ही हरिद्वार के डीएम कर्मेंद सिंह को शासन ने सस्पेंड किया है।

हरिद्वार में हुई धामी की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

आपको बता दें कि सुबह ही हरिद्वार में प्रशासनिक अमला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से दहल गया था। हरिद्वार में जमीन घोटाले की प्रारंभिक जांच की रिपोर्ट मिलने के बाद सीएम धामी ने हरिद्वार के डीएम कर्मेंद सिंह को सस्पेंड कर दिया। इसके साथ ही एसडीएम और कथित घोटाले के दौरान नगर आयुक्त रहे वरुण चौधरी भी सस्पेंड कर दिए गए। यही नहीं सीएम धामी ने इस मामले में कुल 12 लोगों को सस्पेंड कर साफ कर दिया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ न सिर्फ लड़ाई सख्ती से लड़ी जा रही है बल्कि प्रभावशाली अधिकारियों को भी नहीं बख्शा जा रहा है।

कथित घोटाले की विजिलेंस जांच भी होगी।

आपको बता दें कि हरिद्वार नगर निगम में हुई इस कथित जमीन घोटाले की विजिलेंस जांच के भी आदेश दिए गए हैं। शासन ने अधिकारियों से इस पैसों की रिकवरी का भी आदेश दिया है।

Ankita Bhandari Murder Case : अंकिता भंडारी मामले में तीनों आरोपी दोषी करार, मिली उम्र कैद

2 साल 8 महीने की सुनवाई के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड में आखिरकार कोर्ट का फैसला आ गया है. सुनवाई के बाद हत्या के आरोपियों को कोर्ट ने दोषी करार दिया है और तीनों ही आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है.

Ankita Bhandari Murder Case: पुलकित आर्या पर लगे सभी आरोप सही

उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कोटद्वार कोर्ट का फैसला आ गया है. मामले में कोर्ट ने तीनों ही आरोपियों को दोषी करार दिया है और उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई है. इस मामले में मुख्य साजिश कर्ता पुलकित आर्या पर लगाए गए चारों आरोप सही पाए गए हैं.

Ankita Bhandari Murder Case: सुनवाई के दौरान सुरक्षा का खास इंतजाम

कोर्ट की सुनवाई के दौरान सुरक्षा का खास ध्यान रखा गया. सुरक्षा के मध्य नजर कोर्ट परिसर के 200 मीटर के दायरे को पुलिस ने सील कर दिया था. सिर्फ वकील और इस केस से जुड़े हुए पक्ष और जरूरी स्टाफ को ही अंदर जाने की अनुमति दी गई थी. कोटद्वार की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में यह फैसला सुनाया है. और तीनों ही आरोपियों पुलकित आर्य, सौरभ, और अंकित गुप्ता को दोषी करार दिया है

2022 में हुई इस हत्या में ऋषिकेश के करीब वनंतरा रिसोर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता की रिसोर्ट के संचालक पुलकित आर्या ने अपने दो अन्य कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर चीला नहर में धक्का देकर उसकी हत्या कर दी थी.

सरकार पर आरोपी को बचाने के लगे थे आरोप!

आरोप है कि अंकिता हत्याकांड के मामले को दबाने की कोशिश हर स्तर पर की गई. पुलकित आर्या के पिता विनोद आर्य भारतीय जनता पार्टी से जुड़े थे. उत्तराखंड में रसूखदार नेताओं में उनका नाम शामिल था. इस कारण आरोपी के बचने की आशंका जताई जाने लगी. सरकार पर आरोपी को बचाने की कोशिश के आरोप विरोधियों ने लगाए.

18 सितंबर 2022 को की गई थी Ankita Bhandari की हत्या

18 सितंबर 2022 को यमकेश्वर के वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट का काम करने वाली अंकित भंडारी की हत्या कर दी गई थी. इस हत्याकांड में कई तरह के सवाल उठे थे. यह मामला रसूखदार लोगों का मामला माना जा रहा था. आरोप लगा कि रसूखदार आरोपी को सजा से बचाने के लिए इस प्रकरण में जांच की प्रक्रिया को धीमा करने की कोशिश की जा रही है लेकिन, जांच की प्रक्रिया जब आगे बढ़ी तो जांच सही तरीके से हुई और कोर्ट ने आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई.

Ankita Bhandari Murder Case में उत्तराखंड की जनता का भी आक्रोश साफ नजर आ रहा था. कोर्ट ने आखिरकार अब रसूखदार आरोपियों को कानूनी दोषी करार दे दिया है. उत्तराखंड के लोग इसे अब सच की जीत के रूप में देख रहे हैं. इस हत्याकांड ने उन मध्यम, निम्न मध्यम और गरीब वर्ग को झकझोर दिया था जिनके घरों की बेटियां बड़े-बड़े सपने लेकर शहर की ओर नौकरी करने के लिए निकल जाती हैं.

कोटद्वार कोर्ट के इस फैसले के बाद लोगों में कानून के प्रति एक सकारात्मक उम्मीद जरूर जग गई है. लोगों का यह मानना है कि अपराध करने वाला कितना भी बड़ा क्यों ना हो आखिरकार कानून के द्वारा उसे सजा मिल ही गई.

धामी कैबिनेट की बैठक में लगी इन प्रस्तावों पर मुहर, यहां देखिए विस्तार से

बुधवार को देहरादून स्थित सचिवालय में धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न हुई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कैबिनेट ने कुल 11 प्रस्तावों पर अपनी मुहर लगाई है। आइए जानते हैं धामी कैबिनेट के फैसले विस्तार से –

1- उत्तराखण्ड अधिप्राप्ति (प्रोक्योरमैन्ट) नियमावली, 2024 के प्रख्यापन के संबंध में निर्णय।

वित्त विभाग, उत्तराखण्ड शासन की अधिसूचना दिनांक 14 जुलाई, 2017 के द्वारा राज्य में अवस्थापना एवं सेवा परियोजनाओं के लिए सामग्री, निर्माण कार्य, सेवाओं की अधिप्राप्ति और लोक निजी सहभागिता की व्यवस्था करने के प्रयोजन और उनसे सम्बन्धित या अनुषांगिक विषयों के विनियमन के लिए उत्तराखण्ड अधिप्राप्ति नियमावली, 2017 प्रख्यापित की गई है।

भारत सरकार द्वारा अपने अधीनस्थ कार्यालय व अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं यथा-विश्व बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक आदि द्वारा पोषित योजनाओं में सामग्री, निर्माण, सेवाओं एवं कन्सल्टेन्ट आदि के प्रोक्योरमेंट के सम्बन्ध में समय-समय पर ‘सामान्य वित्तीय नियम-2017’ में संशोधन किये गये हैं। इसी क्रम में राज्य की भौगोलिक परिस्थिति तथा व्यवहारिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उत्तराखण्ड अधिप्राप्ति नियमावली, 2017 में संशोधन की आवश्यकता पाये जाने के दृष्टिगत अधिप्राप्ति के ढांचे एवं पारदर्शिता को मजबूत किये जाने के उददेश्य से राज्य सरकार द्वारा उत्तराखण्ड अधिप्राप्ति (प्रोक्योरमैन्ट) नियमावली, 2024 को प्रख्यापित किये जाने का निर्णय लिया गया है।

कैबिनेट के द्वारा उत्तराखंड अधिप्राप्ति (प्रोक्योरमेंट) नियमावली में संशोधन का अनुमोदन करते हुए राज्य के स्थानीय निवासियों के सशक्तिकरण और उनके रोजगार के अवसरों में वृद्धि करने के लिए विभिन्न विभागों में रू. 10 करोड़ तक की लागत के कार्य स्थानीय व्यक्तियों या स्थानीय पंजीकृत फर्मों के माध्यम से ही कराए जाने का निर्णय लिया गया है। अभी तक स्थानीय लोगों के लिए यह सीमा रू. 05 करोड़ तक थी। इसके साथ ही राज्य के विभागों में विभिन्न श्रेणियों में पंजीकृत ठेकेदारों के लिए कार्य की सीमा को भी बढाने का निर्णय लिया गया है।

कैबिनेट के द्वारा स्वयं सहायता समूहों एवं एमएसएमई को प्रोत्साहित करने तथा स्थानीय उत्पादों को बढावा देने के उद्देश्य से स्वयं सहायता समूहों एवं एवं एमएसएमई को क्रय वरीयता प्रदान करने के लिए भी नीति का अनुमोदन प्रदान किया गया है। स्वयं सहायता समूहों के लिए पहले इस तरह की कोई विशेष व्यवस्था नहीं थी। अभी तक स्थानीय स्तर पर स्वयं सहायता समूहों को रू. 05 लाख तक की लागत के कार्य दिए जा सकते थे। क्रय वरीयता की नीति लागू होने से राज्य के सरकारी विभागों की निविदा प्रक्रिया में स्वयं सहायता समूहों एवं एमएसएमई को न्यूनतम दर की निविदा से 10 प्रतिशत की सीमा तक क्रय वरीयता मिलेगी। निविदा प्रक्रिया में अर्नेस्ट मनी को भौतिक रूप में जमा किये जाने की व्यवस्था को समाप्त कर अब निविदाओं के साथ ऑनलाईन प्रक्रिया से ई.बी.जी. (इलेक्ट्रॉनिक बैंक गारंटी) लिए जाने का निर्णय लिया गया है। कैबिनेट के द्वारा प्रोक्योरमेंटी में संबंध में शिकायतों के निस्तारण के लिए आईएफएमएस पोर्टल पर ग्रीवांस रिड्रेसल यूटिलिटी को भी संचाालित किए जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

2- उत्तराखण्ड मेगा इण्डस्ट्रियल एवं इन्वेस्टमेंट नीति-2025 (मेगा पॉलिसी-2025) के प्राख्यापन के सम्बन्ध में कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय।

राज्य में वृहत उद्यमों हेतु वर्तमान में लागू मेगा इण्डस्ट्रियल एवं इन्वेस्टमेंट नीति-2021 के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के उपादान हेतु बार-बार आवेदन की जटिल प्रक्रिया एवं उक्त नीति दिनांक 30 जून, 2025 को समाप्त होने तथा केन्द्र सरकार द्वारा राज्य के लिये लागू औद्योगिक विकास योजना -2017 के वर्ष 2022 में समाप्त होने के कारण वृहत उद्यमों हेतु पूंजीगत उपादान की अन-उपलब्धता के दृष्टिगत पूर्व नीति में प्रावधानित सभी प्रकार के उपादानों को सम्मिलित कर पूंजीगत उपादान का प्रावधान करते हुये उत्तराखण्ड मेगा इण्डस्ट्रियल एवं इन्वेस्टमेंट नीति-2025 (मेगा पॉलिसी-2025) प्रस्तावित की गयी है।

इस योजना का उद्देश्य उत्तराखण्ड को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पूंजी निवेश हेतु प्रतिस्पर्धी गंतव्य के रूप में स्थापित करने तथा वृहत श्रेणी के विनिर्माणक उद्यम में पूंजी निवेश के लिये अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करते हुये राज्य का आर्थिक विकास एवं अतिरिक्त रोजगार अवसरों का सृजन करना है।

यह नीति जारी होने की तिथि से प्रभावी होकर आगामी 05 वर्ष तक प्रवृत्त रहेगी। उक्त अवधि में सिंगल विण्डो पोर्टल पर कैफ ( सी.ए.एफ ) आवेदन करते हुये, नीति के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने का आशय व्यक्त करने वाली इकाईयों को, वृहत उद्यम निवेश श्रेणी के अनुरूप अनुमन्यतानुसार वित्तीय प्रोत्साहन का लाभ देय होगा।

इस नीति के अंतर्गत स्थायी पूंजी निवेश (भूमि को छोड़कर) के आधार पर वृहत उद्यमों को 04 श्रेणी – लार्ज (रू. 50 करोड़ से अधिक, रू. 200 करोड़ तक), अल्ट्रा लार्ज (रू. 200 करोड़ से अधिक, रू. 500 करोड़ तक), मेगा (रू. 500 करोड़ से अधिक, रू. 1000 करोड़ तक) तथा अल्ट्रा मेगा (रू. 1000 करोड़ से अधिक) के अंतर्गत वर्गीकृत करते हुये इनके लिये क्रमशः 50, 150, 300 तथा 500 न्यूनतम स्थायी रोजगार की सीमा निर्धारित की गयी है। उक्त निवेश के लिये कैफ आवेदन की तिथि से 03 से 07 वर्ष की समय-सीमा निर्धारित की गयी है।

इस नीति के अंतर्गत स्थापित होने वाले उद्यमों द्वारा भूमि क्रय विलेख/ लीज डीड के निष्पादन पर देय स्टॉम्प ड्यूटी में 50 प्रतिशत (अधिकतम रू. 50 लाख) की प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है।

इस नीति के अंतर्गत लार्ज, अल्ट्रा लार्ज, मेगा, अल्ट्रा मेगा निवेश श्रेणी के वृहत उद्यमों को स्थायी पूंजी निवेश के सापेक्ष क्रमशः 10 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 15 प्रतिशत तथा 20 प्रतिशत के पूंजीगत उपादान का प्रावधान किया गया है, जो क्रमशः 08, 10, 12 तथा 15 वर्षों में उद्यमों को वाणिज्यिक उत्पादन में आने के उपरान्त वार्षिक किश्तों में देय होगा।

पर्वतीय क्षेत्रों में वृहत उद्यमों की स्थापना के प्रोत्साहन हेतु इस नीति के अंतर्गत श्रेणी-ए व बी के जनपदों में क्रमशः 02 एवं 01 प्रतिशत का अतिरिक्त पूंजीगत उपादान प्रावधानित किया गया है।

03- उत्तराखण्ड विष (कब्जा और विक्रय) नियमावली, 2023 की अनुसूची में संशोधन किये जाने का कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय।

मा० सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा रिट याचिका संख्या-129/2006, लक्ष्मी बनाम भारत संघ में पारित निर्णय दिनांक 18.07.2013 के अनुपालन में भारत सरकार द्वारा निर्गत Model Poisons Possession and sales Rule, 2013 को अधिग्रहित कर प्रत्येक राज्य द्वारा Poisons Rules निर्गत किये जाने के दृष्टिगत उत्तराखण्ड राज्य में भी उत्तराखण्ड विष (कब्जा और विक्रय) नियमावली, 2023 का प्रख्यापन किया गया है।

वर्तमान में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रख्यापित उत्तराखण्ड विष (कब्जा एवं विक्रय) नियमावली, 2023 की सूची में मिथाईल एल्कोहॉल को विष की श्रेणी में अधिसूचित नहीं किया गया है, जिस कारण मिथाईल अल्कोहॉल का प्रयोग करने वाली इकाईयों का निरीक्षण करने में कठिनाई होती है तथा इकाईयों का नवीनीकरण आसानी से हो जाता है। उल्लेखनीय है कि मिथाईल एल्कोहॉल एक रंगहीन, ज्वलनशील एवं जहरीला तरल रसायन है, जिसका 30 मिली० सेवन करने से व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है तथा इसके सेवन से अंधापन होना आम बात है।

अतः विष अधिनियम, 1919 (अधिनियम संख्या-12 वर्ष 1919) की धारा-2 एवं 8 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये उत्तराखण्ड विष (कब्जा एवं विक्रय) नियमावली, 2023 की अनुसूची में उल्लिखित विष की सूची में मिथाईल एल्कोहॉल को सम्मिलित किया जाने का निर्णय लिया गया है।

04- राजकीय विभाग अधीनस्थ लेखा संवर्ग (अराजपत्रित) सेवा नियमावली, 2019 के राजकीय विभाग अधीनस्थ लेखा संवर्ग (अराजपत्रित सेवा नियमावली, 2019 के लागू होने से पूर्व कोषागार विभाग में कार्यरत सहायक लेखाकारों / लेखाकारों के सम्बन्ध में विद्यमान वेतन विसंगति का निराकरण किये जाने के संबंध में कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय।

राजकीय विभाग अधीनस्थ लेखा संवर्ग (अराजपत्रित) सेवा नियमावली, 2019 के लागू होने की तिथि से पूर्व कोषागार विभाग (निदेशालय कोषागार, पेंशन एवं हकदारी के अधीन आने वाले समस्त कार्यालय यथा-कैम्प कार्यालय, कोषागार, पेंशन एवं हकदारी तथा राज्य के कोषागार / उपकोषागार) में कार्यरत सहायक लेखाकार / लेखाकार इस नियमावली के लागू होने की तिथि से ठीक पूर्व उन्हें अनुमन्य वेतनमान / वेतन लेवल पाते रहेंगे तथा ऐसे सहायक लेखाकार, जो कि मा० न्यायालय के आदेशों के अनुक्रम में तत्समय वेतन मैट्रिक्स रू0 44900-142400, लेवल 7 (ग्रेड वेतन रू0 4600) प्राप्त कर रहे थे, उन्हें लेखाकार के पद पर पदोन्नत होने पर अगला वेतन मैट्रिक्स रू0 47600-151100, लेवल 8 (ग्रेड वेतन रू0 4800) अनुमन्य होगा, के सम्बन्ध में कार्यालय ज्ञाप निर्गत किये जाने का कैबिनेट द्वारा निर्णय लिया गया है।

05- राज्य बांध सुरक्षा संगठन, उत्तराखण्ड द्वारा तैयार वार्षिक प्रतिवेदन 2023-24 को मा० विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत किये जाने के सम्बन्ध में लिया गया निर्णय।

बांध की निगरानी, निरीक्षण, संचालन और रख-रखाव प्रदान करने हेतु भारत सरकार द्वारा अधिसूचित बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के प्राविधानों के आलोक में उत्तराखण्ड में गठित राज्य बांध सुरक्षा संगठन के द्वारा उनके अधिकार क्षेत्र में निर्मित 21 बाधों की सुरक्षा स्थिति के सम्बन्ध में बांध सुरक्षा संगठन, उत्तराखण्ड द्वारा तैयार वार्षिक प्रतिवेदन 2023-24 को मा० विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत किये जाने हेतु मा० मंत्रिमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है।

06- राज्य में उत्तराखण्ड निबन्धन लिपिक वर्गीय कर्मचारी सेवा नियमावली, 2025 प्रख्यापित किये जाने के सम्बन्ध में निर्णय।

वर्तमान में राज्य में स्टाम्प एयं निबन्धन विभागान्तर्गत लिपिक वर्ग संवर्ग हेतु पैतृक राज्य उत्तरप्रदेश से ग्राह्य की गयी लिपिक वर्ग सेवा नियमावली, 1978 ही लागू है. जिसमें उत्तराखण्ड राज्य में तात्कालिक परिस्थितियों के अनुसार मात्र भर्ती प्रक्रिया निर्धारित करते हुए वर्ष 2008 में कतिपय संशोधन किये गये थे, जो कि वर्तमान परिस्थितियों में प्रासंगिक नहीं हैं। साथ ही उक्त नियमावली में रिकार्ड कीपर के पदों पर भर्ती हेतु पदोन्नति के संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं की गयी है।

उक्त को दृष्टिगत रखते हुये स्वीकृत विभागीय ढाँचे के अनुरूप लिपिक वर्ग संवर्ग (मुख्य निबन्धन लिपिक, निबन्धन लिपिक एवं रिकार्ड कीपर) के पदों हेतु भर्ती / पदोन्नति प्रकिया निर्धारित किये जाने के परिप्रेक्ष्य में उत्तराखण्ड निबन्धन लिपिक वर्गीय कर्मचारी सेवा नियमावली-2025 प्रख्यापित किये जाने का कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय।

उक्त नियमावली के लागू होने से लिपिकीय पदों पर भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्पष्टता सुनिश्चित होगी। उक्त नियामवली कर्मचारियों को पदोन्नति, वेतन वृद्धि और स्पष्ट कार्य नीति प्रदान करेगी।

07- उत्तराखण्ड सेवा क्षेत्र नीति 2024 में किये गये कतिपय संशोधनों को कैबिनेट द्वारा दी गई मंजूरी।
नियोजन विभाग, उत्तराखण्ड शासन के शासनादेश, दिनाक 15 मार्च, 2024 द्वारा उत्तराखण्ड सेवा क्षेत्र नीति, 2024 प्रख्यापित की गयी है जिसके अन्तर्गत चिन्हित सेवा क्षेत्र यथा स्वास्थ्य देखभाल, वेलनेस एवं पारम्परिक चिकित्सा, शिक्षा, फिल्म और मीडिया, खेल, आई.टी.ई.एस., डाटा सेंटर, कौशल विकास में निवेश को प्रोत्साहित कर उनका विकास करना है। इस नीति की क्रियान्वयन एजेंसी उत्तराखण्ड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (यू०आई०आई०डी०बी0) है।

उत्तराखण्ड राज्य की विशेष भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुये राज्य के पर्वतीय एवं कम विकसित क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर अधिक गुणवत्तापूर्ण एवं सन्तुलित निवेश एवं विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य उत्तराखण्ड सेवा क्षेत्र नीति-2024 में कतिपय संशोधन नियोजन विभाग द्वारा प्रस्तावित किया गया था जिस पर मा० मंत्रिमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया।

उक्त संशोधन के द्वारा जहां राज्य के कतिपय विकसित क्षेत्रों यथा ऋषिकेश एवं देहरादून नगर निगम तथा मसूरी एवं मुनि की रेती नगरपालिका क्षेत्र, नैनीताल तहसील क्षेत्र आदि को इस नीति के दायरे से बाहर किया गया है, वहीं शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण निवेश को आकर्षित किये जाने हेतु कतिपय मानदण्ड यथा- महाविद्यालय / विश्वविद्यालय की उच्च रैकिंग का होना, छात्रों की न्यून्तम पंजीकरण संख्या का निर्धारण, न्यूनतम पाठ्यक्रम अवधि, एक जिले में क्षेत्र-विशेष की केवल एक प्रस्तावित परियोजना को लाभ दिया जाना आदि को सम्मिलित किया गया है। उक्त संशोधन के फलस्वरूप राज्य के कम विकसित क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर अधिक गुणवत्तापूर्ण एवं सन्तुलित निवेश एवं विकास प्रोत्साहित होगा।

08- उत्तराखण्ड चाय विकास बोर्ड के ढाँचें में 11 अतिरिक्त पद सृजित किये जाने के सम्बन्ध में लिया गया निर्णय।

राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में चाय विकास की अपार संभावनाओं को देखते हुए चाय विकास उत्पादन के समुचित विकास, वित्तीय व्यवस्था, निवेश एवं सयंत्र आदि की उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने हेतु वर्ष 2004 में उत्तराखण्ड चाय विकास बोर्ड का गठन करते हुए बोर्ड का मुख्यालय जनपद अल्मोड़ा में स्थापित किया गया था।

वर्तमान में बोर्ड द्वारा पुराने चाय बागानों का जीर्णाेद्वार, नये चाय बागानों की स्थापना, नये क्षेत्रों में चाय की खेती की सम्भावनाओं का सर्वेक्षण, निष्प्रोज्य पड़ी भूमि में चाय प्लान्टेशन कर स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने तथा कृषकों की आय में वृद्धि करने एवं काश्तकारों से लीज पर ली गई भूमि में चाय बागान विकसित किये जाने के दृष्टिगत विभागीय कार्यहित में 11 अतिरिक्त पद (04 नियमित एवं 07 आउटसोर्स) सृजित किये जाने के प्रस्ताव को कैबिनेट द्वारा मंजूरी प्रदान की गई है।

09- उत्तराखंड योग नीति 2025 को मिली कैबिनेट की मंजूरी।

उत्तराखंड को भारत की अध्यात्मिक और योग परंपरा की भूमि माना जाता है, जो सदियों से ऋषियों, मुनियों और साधकों की साधना स्थली रही है। आज भी ऋषिकेश, कौसानी, चम्पावत जैसे स्थल कई दशकों से योग साधना के प्रमुख केन्द्र है। इस ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को सहेजते हुए उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2025 में एक महत्वाकांक्षी पहल के तहत उत्तराखंड योग नीति 2025 की घोषणा की है। यह देश की प्रथम योग नीति है जो राज्य को योग और वेलनेस की वैशिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। जिसे राज्य कैबिनेट द्वारा मंजूरी प्रदान की गई है।

इस नीति का सबसे बड़ा उद्देश्य है कि योग को केवल एक आध्यात्मिक या व्यक्तिगत साधना तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसे एक सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और पर्यटन-आधारित मॉडल के रूप में विकसित किया जाए। नीति का विज़न अत्यंत स्पष्ट है – उत्तराखंड को योग और वेलनेस का वैश्विक केंद्र बनाना।

इस योग नीति के तहत सरकार का उद्देश्य कई स्तरों पर काम करना है। सबसे पहले तो राज्य में योग पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि उत्तराखंड को अंतरराष्ट्रीय योग और आध्यात्मिकता के केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सके। इसके साथ ही गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए योग संस्थानों के लिए नियम और दिशा-निर्देश बनाए जाएंगे। जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से योग को जन-जन तक पहुँचाया जाएगा और इसे स्कूलों तथा कॉलेजों के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाएगा। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सहयोग कर के योग के क्षेत्र में क्षमता निर्माण किया जाएगा। साथ ही, विश्वस्तरीय योग केंद्रों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाएगा।

नीति के तहत कुछ विशिष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। जैसे कि वर्ष 2030 तक उत्तराखंड में कम से कम पांच नए योग हब स्थापित किए जाएंगे। मार्च 2026 तक राज्य के सभी आयुष हेल्थ और वेलनेस सेंटर्स में योग सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। समुदाय-आधारित माइंडफुलनेस कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे, जो अलग-अलग आयु, लिंग और वर्ग की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए जाएंगे।

इसके अतिरिक्त, योग संस्थानों का शत प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित किया जाएगा, एक विशेष ऑनलाइन योग प्लेटफार्म शुरू किया जाएगा, योग पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रचार अभियान और अंतरराष्ट्रीय योग सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा तथा मार्च 2028 तक 15 से 20 राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ भागीदारी विकसित करने का लक्ष्य है।

नवीन स्थापित होने वाले तथा एक्सपेंशन करने वाले केंद्रों को पहाड़ी क्षेत्रों में परियोजना लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम ₹20 लाख तक तथा मैदानी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत या अधिकतम ₹10 लाख तक का अनुदान दिया जाएगा। कुल वार्षिक अनुदान की सीमा ₹5 करोड़ तक होगी।

जागेश्वर, मुक्तेश्वर, व्यास घाटी, टिहरी झील और कोलीढेक झील को योग हब के रूप में विकसित किए जाने का लक्ष्य है अतः इन क्षेत्रों में विकसित होने वाले योग केंद्रों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।

योग, ध्यान और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में शोध को प्रोत्साहित करने के लिए ₹10 लाख तक प्रति परियोजना का अनुदान दिया जाएगा। यह सुविधा विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, स्वास्थ्य संगठनों, आयुष संस्थाओं और एनजीओ के लिए होगी। कुल मिलाकर नीति अवधि में ₹1 करोड़ तक की राशि अनुसंधान हेतु निर्धारित की गई है।

राज्य में पहले से चल रहे होमस्टे, रिसॉर्ट, होटल, स्कूल, कॉलेज आदि में यदि योग केंद्र स्थापित किए जाते है तो नियोजित होने वाले योग अनुदेशक हेतु प्रत्ति सत्र ₹250 तक की प्रतिपूर्ति उक्त संस्था को दी जाएगी, प्रति केंद्र में एक अनुदेशक हेतु प्रति माह 20 सत्रों की प्रतिपूर्ति की जाएगी।

उत्तराखंड सरकार द्वारा योग और प्राकृतिक चिकित्सा निदेशालय की स्थापना की जायेगी, जो इस पूरी नीति के सचालन, नियमन, अनुदान वितरण और विभिन्न गतिविधियों की निगरानी करेगा। निदेशालय में एक निदेशक, संयुक्त निदेशक, उपनिदेशक, योग विशेषज्ञ, रजिस्ट्रार और अन्य आवश्यक स्टाफ शामिल होंगे। निदेशालय का कार्य योग केंद्रों की गुणवत्ता को सुनिश्चित करना, योग संस्थानों का पंजीकरण और योग प्रमाणन बोर्ड के अंतर्गत मान्यता प्राप्त करवाना, योग केंद्रों की रेटिंग प्रणाली बनाना और एम.ओ.यू. के माध्यम से राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सहयोग स्थापित करना होगा।

नीति की समीक्षा और निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय राज्य समिति का गठन किया जाएगा। नीति के सफल कार्यान्वयन के लिए सरकार द्वारा आगमी 5 वर्षों में लगभग ₹35 करोड़ का व्यय होगा, इसमें से योग केंद्रों के लिए ₹25 करोड़, अनुसंधान के लिए ₹1 करोड़, शिक्षक प्रमाणन हेतु ₹1.81 करोड़ और मौजूदा संस्थानों में योग सत्रों के लिए संचालन में सहयोग हेतु ₹7.5 करोड़ के व्यय होने का आकलन है।

इस नीति से राज्य को कई प्रकार के सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे। एक ओर यह राज्य में लगभग 13,000 से अधिक रोजगार सृजित करेगी, 2500 योग शिक्षकों के लिए योगा सर्टिफिकेशन बोर्ड से प्रमाणित होंगे और 10,000 से अधिक योग अनुदेशकों को होमस्टे, होटल आदि में रोजगार मिलने की संभावना है। योग पर्यटन को बढ़ावा मिलने से राज्य की अर्थव्यवस्था को एक नया आयाम मिलेगा, जन सामान्य में स्वास्थ्य संवर्धन के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, योग शिक्षा में सकारात्मक परिवर्तन आएगा और राज्य को योग परिक्षेत्र में वैश्विक पहचान मिलेगी।

10- राजकीय मेडिकल कॉलेज देहरादून व हल्द्वानी के समीप रोगियों के तीमारदारों के लिये विश्रामगृहों की स्थापना का निर्णय।

राजकीय मेडिकल कॉलेजों में प्रदान की जानी वाली द्वितीयक एवम् तृतीयक श्रेणी की चिकित्सा सेवा/सुविधा में आई०पी०डी० रोगियों के साथ तीमारदार भी आवश्यक रूप से प्रवास करते हैं, की संख्या भी लगभग रोगियों / मरीजों के बराबर ही रहती है। उक्त तीमारदारों के विश्राम हेतु चिकित्सालय के समीप ही विश्राम गृह की व्यवस्था न होने के कारण रोगियों के परिजन चिकित्सालय की गैलरी, वार्ड के बाहर अथवा चिकित्सालय परिसर के आस पास ही ठहरते / रात्रि विश्राम करते हैं, जिससे चिकित्सालयों में कार्यरत् स्टाफ को मरीजों के चिकित्सकीय परीक्षण एवं देखभाल में असुविधा होती है साथ ही रोगियों के परिजन भी परेशान होते हैं। अतः उक्त चिकित्सालयों के समीप रोगी के तीमारदारों के स्वास्थ्य एवम् सुरक्षा की दृष्टि से मूलभूत सुविधाओं वाले साफ-सुथरे, सुरक्षित विश्राम गृह होना अत्यन्त आवश्यक है। राज्य के सीमित संसाधनों के दृष्टिगत राजकीय मेडिकल कॉलेज, देहरादून एवं हल्द्वानी के सम्बद्ध चिकित्सालयों में सुदूरवर्ती पर्वतीय / मैदानी क्षेत्रों से आने वाले रोगियों के तीमरदारों की सुविधा हेतु चिकित्सालयों के समीप विश्राम गृह की स्थापना एवं संचालन इच्छुक गैर लाभकारी संस्था/सी०एस०आर० मद / बाह्य सहायतित योजनाओं के माध्यम से किये जाने का कैबिनेट द्वारा निर्णय लिया गया।

11- प्रदेश में संचालित अटल आयुष्मान योजना और राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना के तहत अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज में लंबित देनदारियों की प्रतिपूर्ति हेतु 75 करोड़ रुपए स्वास्थ विभाग को लोन के रूप में किया आवंटन।

दर्दनाक। देहरादून के सात लोगों ने पंचकुला में की आत्महत्या, मरने वालों में तीन बच्चे भी

देहरादून के एक परिवार के सात लोगों ने पंचकुला में जहर खाकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि परिवार कर्ज में डूबा हुआ था और इसी वजह से परिवार के लोगों ने आत्महत्या कर ली। मरने वालों में बच्चे भी शामिल हैं।

‘कार में सवार आत्महत्या कर रहे हैं’

मिली जानकारी के मुताबिक पंचकुला के सेक्टर 27 में सोमवार की रात पुलिस को सूचना मिली कि एक घर के बाहर कुछ लोग कार में बैठे हैं और आत्महत्या कर रहे हैं। इस सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस को कार में छह लोग सवार मिले। इसके साथ ही जिस घर के पास कार खड़ी थी उस घर के सामने एक और शख्स तड़पता हुआ मिला। पुलिस ने सभी सात लोगों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। हालांकि उन्हे बचाया नहीं जा सकता।

सभी सात लोगों की मौत से सनसनी

इस दर्दनाक घटना में सभी सात लोगों की मौत हो गई। पुलिस की छानबीन में दो मृतकों की पहचान हो पाई। इनके नाम देशराज मित्तल और प्रवीन मित्तल हैं। अन्य लोग उनके परिवार के सदस्य हैं। मरने वालों में तीन बच्चे भी शामिल हैं। बच्चों में 12 से 13 साल की दो लड़कियां जबकि 14 साल के करीब का एक लड़का शामिल है।

बिजनेस में घाटा बनी आत्महत्या की वजह !

पुलिस की शुरुआती छानबीन में पता चला है कि प्रवीण मित्तल देहरादून में टूर एंड ट्रैवल्स का काम करते थे। इस बिजनेस में उन्हे खासा घाटा हुआ और उनके ऊपर काफी कर्ज हो गया। इसके बाद से ही वो परेशान रहने लगे। उधर बताया जा रहा है कि पूरा परिवार पिछले कुछ वक्त से पंचकुला में शिफ्ट हो गया था।

पुलिस को जिस कार से लोगों के शव बरामद हुए हैं वो देहरादून में रजिस्टर्ड है। इस कार में बच्चों के बैग और सामान भी मिले हैं। फोरेंसिक टीम ने कार की जांच की है।

उत्तराखंड में कोविड को लेकर अलर्ट मोड पर स्वास्थ महकमा, अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह

देशभर में कोविड-19 के मामलों में हालिया वृद्धि को देखते हुए उत्तराखंड सरकार सतर्क हो गई है। राज्य के सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, डॉ. आर. राजेश कुमार ने विभागीय उच्च अधिकारियों के साथ कोविड-19 प्रबंधन को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखने और किसी भी स्तर पर कोताही न बरतने के निर्देश दिए। डॉ. कुमार ने कहा कि कोविड-19 प्रबंधन की सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह से सक्रिय और दुरुस्त रहनी चाहिए। बैठक में महानिदेशक चिकित्सा डॉ सुनीता टम्टा, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ आशुतोष सयाना, असिस्टेंट डारेक्टर डॉ पंकज सिंह, सीएमओ देहरादून डॉ मनोज शर्मा, सीएमएस दून मेडिकल कॉलेज डॉ आरएस बिष्ट, सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

स्वास्थ्य सचिव बोले, हर संभावित चुनौती के लिए हम तैयार

“कोविड-19 के मामलों में देशभर में आई हालिया वृद्धि को देखते हुए उत्तराखंड राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क है। राज्य में अभी स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन हमें किसी भी संभावित चुनौती के लिए तैयार रहना चाहिए। इस समय घबराने की नहीं, बल्कि सतर्कता बरतने और सजग रहने की आवश्यकता है। हमारा प्रयास है कि राज्य के हर अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र और मेडिकल कॉलेज में कोविड-19 से संबंधित सभी आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित रहे — चाहे वह आइसोलेशन बेड हों, ऑक्सीजन सप्लाई की व्यवस्था हो या प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता। इसके अलावा हम यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि सर्विलांस सिस्टम मजबूत हो, जांच व्यवस्था में कोई कमी न हो और जरूरत पड़ने पर तेजी से कार्रवाई की जा सके। हमारी रैपिड रिस्पांस टीमें प्रशिक्षित और तैयार हैं। मैं राज्य के नागरिकों से अपील करता हूं कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों से दूर रहें और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। कोविड-19 से बचाव के लिए मास्क पहनना, हाथों की स्वच्छता बनाए रखना, भीड़भाड़ से बचना और लक्षण होने पर समय पर डॉक्टर से परामर्श लेना बेहद जरूरी है।

हम सभी को एकजुट होकर जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभानी है ताकि हम न केवल खुद को, बल्कि अपने परिवार और समाज को भी सुरक्षित रख सकें। यह समय अनुशासन और सहयोग का है, न कि लापरवाही का। राज्य सरकार हर स्तर पर आपके स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”

चिकित्सालयों और मेडिकल कॉलेजों में पूर्ण व्यवस्थाओं के निर्देश

राज्य के सभी सरकारी और निजी चिकित्सालयों व मेडिकल कॉलेजों को निर्देशित किया गया है कि वे कोविड मरीजों के उपचार के लिए आइसोलेशन बेड, ऑक्सीजन सिलेंडर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, बाइपैप मशीन, वेंटिलेटर, ICU बेड, ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट और आवश्यक दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करें।

सर्विलांस और जांच व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश

सभी जिलों को कोविड-19 के संभावित मामलों की निगरानी को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सभी जांच केंद्रों में रैपिड टेस्ट किट और आरटी-पीसीआर किट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

ILI (इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षण), SARI (गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण) और कोविड मामलों की अनिवार्य रिपोर्टिंग की जाएगी और इस पर निरंतर निगरानी रखी जाएगी। सभी सरकारी और निजी अस्पतालों एवं लैब को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि वे प्रतिदिन इन मामलों की रिपोर्ट इंटीग्रेटेड हेल्थ इन्फॉर्मेशन पोर्टल (IHIP) पर साझा करें।

रैपिड रिस्पांस टीम पूरी तरह तैयार रहे

IDSP कार्यक्रम के अंतर्गत गठित रैपिड रिस्पांस टीमों को किसी भी असामान्य परिस्थिति के लिए प्रशिक्षित और तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। कोविड लक्षणों वाले सभी रोगियों की जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी और कोविड पॉजिटिव नमूनों को Whole Genome Sequencing (WGS) के लिए संबंधित प्रयोगशालाओं में भेजा जाएगा।

जनजागरूकता और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी

सभी स्वास्थ्य कर्मियों को कोविड-19 प्रबंधन और प्रतिक्रिया के लिए पुनः प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही, जनता को सतर्क करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिसमें कोविड-19 से बचाव के लिए अपनाए जाने वाले व्यवहार (Do’s & Don’ts) के बारे में जानकारी दी जाएगी। राज्य सरकार कोविड-19 से बचाव के लिए पूरी तरह सतर्क और तैयार है, और जनता से अपील करती है कि वह जिम्मेदारी से उचित व्यवहार अपनाएं तथा अफवाहों से बचें।

कोविड-19 से बचाव हेतु क्या करें और क्या न करें :-

क्या करें:

  1. छींकते/खांसते समय नाक और मुंह को रूमाल या टिश्यू से ढकें।
  2. भीड़-भाड़ वाले स्थानों से बचें।
  3. हाथों को साबुन-पानी से बार-बार धोएं।
  4. पर्याप्त मात्रा में पानी व पौष्टिक आहार लें।
  5. लक्षण होने पर चिकित्सकीय परामर्श लें और उसी अनुसार दवा लें।
  6. संक्रमित होने की आशंका पर दूसरों से दूरी बनाए रखें।
  7. बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर रोगियों का विशेष ध्यान रखें।

क्या न करें :

  1. प्रयोग किए गए टिश्यू या रूमाल का दोबारा उपयोग न करें।
  2. हाथ मिलाने से बचें।
  3. लक्षणग्रस्त लोगों के संपर्क में न आएं।
  4. बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें।
  5. बार-बार आंख, नाक और मुंह न छुएं।
  6. सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से बचें।

IPL 2025 : पंजाब किंग्स ने मुंबई इंडियंस को हराया, 10 साल बाद क्वालिफायर में पहुंची

0

आईपीएल 2025 का रोमांच अपने चरम पर पहुंच चुका है। सोमवार को जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में एक अहम मैच खेला गया. सीजन के 69वें मुकाबले में मुंबई इंडियंस और पंजाब किंग्स की टीमें आमने-सामने हुईं. इस मैच में पंजाब ने बाजी मारी और पॉइंट्स टेबल में पहला स्थान हासिल कर लिया. वहीं, मुंबई ने लीग स्टेज चौथे स्थान पर खत्म किया है. जोश इंग्लिश और प्रियांश आर्या की अर्धशतकीय पारियों के दम पर पंजाब किंग्स ने मुंबई इंडियंस (mumbai indians vs punjab kings match) को सात विकेट से हराकर क्वालिफायर-1 में प्रवेश कर लिया। अब दूसरी टीम का फैसला मंगलवार को लखनऊ सुपर जाएंट्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच मैच से होगा।

सोमवार को खेले गए मुकाबले में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी मुंबई ने 20 ओवर में सात विकेट खोकर 184 रन बनाए। जवाब में पंजाब ने 18.3 ओवर में तीन विकेट खोकर 187 रन बनाए और मुकाबला अपने नाम कर लिया। पंजाब किंग्स ने 10 साल बाद क्वालिफायर में प्रवेश किया है। इससे पहले टीम 2014 में क्वालिफायर में पहुंची थी। श्रेयस अय्यर की अगुआई वाली टीम ने लीग चरण का समापन 14 मैचों में नौ जीत और चार शिकस्त के साथ किया। उसने गुजरात टाइटंस को धकेल कर 19 अंक और 0.372 के नेट रन रेट के साथ पहला स्थान हासिल किया। वहीं, मुंबई आठ जीत और छह हार के साथ चौथे स्थान पर रही।

फिलहाल तीसरे स्थान पर आरसीबी है जिसे मंगलवार को लखनऊ सुपर जाएंट्स के खिलाफ मैच खेलना है। इस मैच में अगर रजत पाटीदार के नेतृत्व वाली आरसीबी जीत दर्ज करती है तो वह दूसरे स्थान पर पहुंच जाएगी और पंजाब के खिलाफ 29 मई को क्वालिफायर-1 मैच खेलेगी।

185 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पंजाब को पहला झटका 34 के स्कोर पर लगा था। जसप्रीत बुमराह ने प्रभसिमरन सिंह को पवेलियन की राह दिखाई। वह सिर्फ 13 रन बना पाए। हालांकि, पंजाब के बल्लेबाजों ने हार नहीं मानी और प्रियांश आर्या ने जोश इंग्लिश के साथ मिलकर टीम को जीत के करीब पहुंचा दिया। दोनों के बीच दूसरे विकेट के लिए 59 गेंदों में 109 रनों की विशाल साझेदारी हुई। दोनों ने अर्धशतकीय पारियां खेलकर मुंबई के गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा। सलामी बल्लेबाज प्रियांश ने नौ चौके और दो छक्के की मदद से 62 रन बनाए। वहीं, इंग्लिश ने 42 गेंदों में 73 रनों की धमाकेदार पारी खेली। इसके बाद श्रेयस अय्यर ने टीम को जीत दिलाई। वह 16 गेंदों में 26 और नेहाल वढेरा दो रन बनाकर नाबाद रहे। मुंबई के लिए मिचेल सैंटनर ने दो और बुमराह ने एक विकेट लिया।

उत्तराखंड को केंद्र ने दी ये बड़ी सौगात, इस परियोजना को मिल गई मंजूरी, सीएम धामी की कोशिश रंग लाई

उत्तराखंड को केंद्र से एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है। केंद्र ने पिथौरागढ़ जनपद में गौरीगंगा नदी पर प्रस्तावित 120 मेगावाट क्षमता की सिरकारी भ्योल रूपसियाबगड जल विद्युत परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस परियोजना की मंजूरी के लिए पिछले काफी वक्त से लगे थे। आखिरकार सीएम धामी की कोशिशें रंग लाई हैं।

सोमवार को दिल्ली स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन में हुई बैठक में पिथौरागढ़ जनपद में गौरीगंगा नदी पर प्रस्तावित 120 मेगावाट क्षमता की सिरकारी भ्योल रूपसियाबगड जल विद्युत परियोजना को लेकर चर्चा हुई। इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए 29.997 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव पर वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की वन सलाहकार समिति (Forest Advisory Committee) द्वारा विचार किया गया। चर्चा के बाद पर्यावरण भवन में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में परियोजना को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई।

पर्यावरण के लिहाज से डिजाइन हुई योजना

यह परियोजना पर्यावरण की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील रूप से डिजाइन की गई है। लगभग एक किलोमीटर सुरंग निर्माण और अधिकांश संरचनाएं भूमिगत होने के कारण वनभूमि पर प्रभाव नगण्य रहेगा। परियोजना क्षेत्र में कोई राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभ्यारण्य या ईको-सेंसिटिव जोन नहीं है, और न ही इससे किसी प्रकार का विस्थापन होगा।

होगा हरित उर्जा का उत्पादन, मिलेगा रोजगार भी

परियोजना से प्रतिवर्ष अनुमानित 529 मिलियन यूनिट हरित ऊर्जा का उत्पादन होगा, जिससे उत्तराखण्ड की विद्युत आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ राज्य को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। साथ ही स्थानीय लोगों को स्थायी एवं अस्थायी रोजगार, आधारभूत ढांचे का विकास और पलायन पर नियंत्रण जैसे अनेक लाभ होंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परियोजना को स्वीकृति मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “यह परियोजना उत्तराखण्ड के सीमांत क्षेत्र के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और समर्थन से राज्य को ऊर्जा और रोजगार के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धि मिली है। राज्य सरकार जनकल्याण के प्रति पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। यह परियोजना उत्तराखण्ड के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बनेगी।”