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World Cancer Day : ‘Be the Lala’ से फैलेगी जागरुकता, कैन प्रोटेक्ट फाउंडेशन की नई पहल

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देहरादून। विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर कैन प्रोटेक्ट फाउंडेशन ने महिलाओं में स्तन कैंसर की रोकथाम और शुरुआती पहचान के महत्व को उजागर करने के लिए “बी द लाला” नामक एक एनिमेटेड जागरुकता फिल्म लॉन्च की है। यह फिल्म एक रचनात्मक और प्रभावी तरीके से स्तन कैंसर के प्रति जागरुकता बढ़ाने का प्रयास है।

देर से चलता है पता, बढ़ता है खतरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और ग्लोबोकैन 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 2 लाख से अधिक नए स्तन कैंसर के मामले सामने आते हैं, जिनमें से अधिकांश का पता देर से चलता है। इस वजह से इलाज प्रभावी नहीं हो पता है, जिससे मृत्यु दर बढ़ती जा रही है।

नियमित जांच है जरूरी

फाउंडेशन की अध्यक्षा डॉ. सुमिता प्रभाकर के अनुसार, स्तन कैंसर से जुड़ी जागरुकता की कमी, नियमित जांच न कराना और शुरुआती लक्षणों की अनदेखी इसके बढ़ते मामलों के मुख्य कारण हैं। यदि महिलाएं नियमित रूप से स्वयं स्तन परीक्षण (Breast Self-Examination) करें और किसी भी असामान्य बदलाव पर चिकित्सकीय सलाह लें, तो इस बीमारी का इलाज जल्दी और प्रभावी रूप से किया जा सकता है।

“बी द लाला” – जागरूकता बढ़ाने की अनूठी पहल

“बी द लाला” नामक एनिमेटेड फिल्म यूट्यूब पर उपलब्ध है। यह फिल्म सरल, रोचक और प्रभावशाली तरीके से महिलाओं को स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षण पहचानने और समय पर जांच कराने के लिए प्रेरित करती है।

इस फिल्म की कहानी “लाला” नामक एक छोटी मधुमक्खी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने आसपास के बदलावों को बारीकी से देखती और समझती है। यह रूपक महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले छोटे-छोटे परिवर्तनों पर ध्यान देने का संदेश देता है ताकि वे स्तन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को शुरुआती चरण में पहचान सकें।

फिल्म का उद्देश्य स्तन कैंसर से जुड़े मिथकों को दूर करना, महिलाओं को स्वयं स्तन परिक्षण की आदत डालना और उन्हें शीघ्र चिकित्सकीय परामर्श लेने के लिए प्रेरित करना है।

स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षण जिन पर ध्यान देना ज़रूरी (Early symptoms of Breast Cancer)

  • स्तन या बगल में गांठ का महसूस होना
  • त्वचा में गड्ढे पड़ना या खिंचाव आना
  • निप्पल से असामान्य स्त्राव या रंग बदलना
  • स्तनों के आकार या बनावट में असामान्य बदलाव
  • स्तन की सभी गाँठ कैंसर नहीं होती परन्तु इन्हे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए और तुरंत चिकित्सीय परामर्श लेना चाहिए।

कैन प्रोटेक्ट फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. सुमिता प्रभाकर ने कहा, “स्तन कैंसर को लेकर महिलाओं में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। ‘बी द लाला’ फिल्म के माध्यम से हमने यह संदेश देने की कोशिश की है कि महिलाएं अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और नियमित रूप से स्तन परीक्षण करें। जागरूकता और समय पर जांच से कई महिलाओं की जान बचाई जा सकती है।”

कैन प्रोटेक्ट फाउंडेशन महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए निःशुल्क स्तन एवं सर्वाइकल कैंसर जांच शिविरों, स्क्रीनिंग अभियानों और जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन करता आ रहा है।
इस विश्व कैंसर दिवस पर, कैन प्रोटेक्ट फाउंडेशन सभी महिलाओं से अपील करता है कि वे अपना ध्यान रखें, नियमित जांच कराएं और स्तन कैंसर को रोकने के लिए एक जागरूक कदम उठाएं।

📺 फिल्म देखने के लिए यूट्यूब पर सर्च करें: ‘Be the Lala’
यहां देखें फिल्म –

उत्तराखंड में बंपर तबादले, इस विभाग में जारी हुआ आदेश

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उत्तराखंड सरकार ने सिंचाई विभाग में व्यापक स्तर पर प्रशासनिक बदलाव करते हुए अभियंताओं के बंपर तबादले किए हैं। सचिव सिंचाई डॉ. आर. राजेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि विभागीय कार्यप्रणाली को अधिक सुचारू, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यह स्थानांतरण किए गए हैं।

सचिव सिंचाई ने बताया कि तबादलों का यह निर्णय राज्य में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने, विकास परियोजनाओं में तेजी लाने और जल संसाधन प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए लिया गया है। सचिव ने बताया कि स्थानांतरण नीति के तहत निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई है, जिससे सभी क्षेत्रों में अभियंताओं की समान भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, स्थानांतरित अभियंताओं को जल्द से जल्द नई तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम राज्य के सिंचाई ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

सीएम धामी ने की बजट की तारीफ, उत्तराखंड को फायदा होने की जताई उम्मीद

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने सालाना 12 लाख रुपए तक की आय को कर मुक्त करते हुए देश के मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकासोन्मुखी और जनकल्याणकारी बजट प्रस्तुत किया गया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को शानदार और संतुलित बजट के लिए बधाई देते हुए कहा कि केंद्रीय बजट से, उत्तराखंड को कई योजनाओं से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ होगा।


शनिवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से पेश बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस वर्ष के संशोधित अनुमान में केन्द्रीय करों में राज्य का हिस्सा लगभग 14387 रुपए करोड होगा। इससे मौजूदा वित्तीय वर्ष में प्रदेश को 444 करोड़ रुपए अतिरिक्त मिलने का रास्ता साफ हो गया है। आगामी वर्ष हेतु यह राशि लगभग 15902 करोड़ रुपए तक जा सकती है। राज्य के लिए यह राशि अत्यन्त महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ बजट-पूर्व सम्मेलन में 11 बिन्दुओं का निवेदन किया था। जिसका समावेश भी बजट में दिख रहा है। इसके लिए, उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री का आभार व्यक्त किया है।

जल जीवन मिशन की समय सीमा बढ़ी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने केंद्र से अपने राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) व साइबर सुरक्षा से संबंधित उत्कृष्टता केन्द्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) स्थापित किये जाने का निवेदन किया था। इस बजट में देश में 5 नेशनल सेंटर ऑफ एक्सिलेंस एवं सरकारी स्कूलों में 50,000 अटल टिंकरिंग लैब बनाने की घोषणा की गई है। इसी तरह सभी सरकारी स्कूलों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी की घोषणा प्रदेश के लिए भी अत्यन्त महत्वपूर्ण है। नॉलेज इकॉनोमी के लिए यह एक मजबूत नीव होगी। इसी तरह केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन योजना के अवशेष कार्यों को पूर्ण करने की समय-सीमा 2028 तक बढ़ाने के लिए राज्य का अनुरोध स्वीकार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय बजट में राज्यों के पूंजीगत विकास के लिए 1.5 लाख करोड रुपए कर्ज का प्रावधान किया गया है। यह इस वर्ष के संशोधित अनुमान 1,25,000 करोड से 25,000 करोड़ रुपए अधिक है। विगत दो वर्षों में इस ब्याजमुक्त योजना से हमारे राज्य को बड़ा लाभ मिला है।

जिलों में होगा कैंसर मरीजों का उपचार

मुख्यमंत्री ने कहा कि 125 शहरों के लिए नई उडान योजना शुरु किए जाने का लाभ उत्तराखण्ड को भी मिलेगा। अगले 3 साल में देश के सभी जिलों में कैंसर सेंटर बनाए जाने से प्रदेश में चिकित्सा सेवा को विस्तार मिलेगा। देश के 100 जिलों में धन धान्य योजना की शुरुआत से प्रदेश के किसान के भी लाभान्वित होने की आशा है। इसी तरह किसान क्रेडिट कार्ड के तहत ऋण सीमा को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किये जाने की घोषणा से प्रदेश के किसानों को भी फायदा होगा। इंडिया पोस्ट को एक बड़े सार्वजनिक लॉजिस्टिक्स संगठन में परिवर्तित करने से उत्तराखण्ड के दूर-दराज क्षेत्रों में पोस्ट आफिस के माध्यम से आर्थिक गतिशीलता बढेगी।

उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजन: पहाड़ों के बेहतरीन स्वाद का अनोखा संगम

उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की झलक उसके खान-पान में भी देखने को मिलती है। पहाड़ी इलाकों की जलवायु और वहां मिलने वाली सामग्री के आधार पर यहाँ के व्यंजन तैयार किए जाते हैं। उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजन (Traditional dishes of Uttarakhand) में पोषण, स्वाद और स्वास्थ्य का अद्भुत मेल होता है। आइए जानते हैं उत्तराखंड के कुछ प्रसिद्ध व्यंजनों के बारे में।


1. आलू के गुटके

उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल दोनों क्षेत्रों में बेहद लोकप्रिय यह व्यंजन मसालेदार आलू की एक खास डिश है। इसे सरसों के तेल और पहाड़ी मसालों के साथ बनाया जाता है, और धनिया पत्ती से सजाया जाता है। यह अक्सर पूरी या रोटी के साथ खाया जाता है।


2. भट की चुड़कानी

भट (काले सोयाबीन) से तैयार की जाने वाली यह पारंपरिक डिश प्रोटीन से भरपूर होती है। इसे धीमी आंच पर पकाया जाता है और चावल के साथ परोसा जाता है। पहाड़ों में सर्दियों के मौसम में इसे बहुत पसंद किया जाता है।


3. झोली

यह एक तरह का पारंपरिक कढ़ी व्यंजन है, जिसे चावल के साथ खाया जाता है। इसे बेसन या दाल के मिश्रण से तैयार किया जाता है और छौंक लगाकर इसका स्वाद बढ़ाया जाता है। झोली पाचन के लिए भी अच्छी मानी जाती है।

उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजन पहाड़ के उत्पादों से बने और स्वाद में बेहतरीन होते हैं। यही वजह है कि पर्यटक अक्सर उत्तराखंड में लोकल कुजीन को पंसद करते हैं।


4. सिसौंण (बिच्छू घास) की सब्जी

बिच्छू घास, जिसे स्थानीय भाषा में सिसौंण कहा जाता है, उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में पाई जाती है। इससे तैयार सब्जी बेहद पौष्टिक होती है और इसमें आयरन और अन्य जरूरी पोषक तत्व होते हैं।


5. गहथ (कुल्थ) की दाल

यह उत्तराखंड का पारंपरिक दाल व्यंजन है, जिसे विशेष रूप से ठंडे इलाकों में शरीर को गर्म रखने के लिए खाया जाता है। यह पथरी और किडनी से जुड़ी समस्याओं के लिए भी लाभदायक मानी जाती है।


6. अरसा

यह उत्तराखंड की एक पारंपरिक मिठाई है, जो गुड़ और चावल के आटे से तैयार की जाती है। खासतौर पर त्योहारों और विवाह समारोहों में इसे बनाया जाता है। इसका स्वाद मीठा और कुरकुरा होता है।


7. चैंसू

चैंसू एक खास पहाड़ी व्यंजन है, जो उड़द दाल से बनाया जाता है। इसे धीमी आंच पर पकाया जाता है और इसमें पहाड़ी मसालों का तड़का लगाया जाता है। यह चावल के साथ बेहद स्वादिष्ट लगता है।


8. सिंगलड़ी की सब्जी

सिंगलड़ी एक प्रकार की जंगली सब्जी होती है, जो उत्तराखंड के पहाड़ों में प्राकृतिक रूप से उगती है। यह पौष्टिक होने के साथ-साथ बेहद स्वादिष्ट भी होती है।


9. मंडुए (रागी) की रोटी

मंडुए (रागी) की रोटी उत्तराखंड के पहाड़ों में रहने वाले लोगों के मुख्य भोजन में से एक है। यह प्रोटीन, फाइबर और कैल्शियम से भरपूर होती है, जो हड्डियों को मजबूत बनाती है और शरीर को ऊर्जा देती है।


10. बाड़ी

बाड़ी उत्तराखंड की एक पारंपरिक डिश है, जिसे मंडुआ (रागी) और चावल के आटे से तैयार किया जाता है। इसे दाल और घी के साथ परोसा जाता है और यह बहुत स्वादिष्ट होती है।


उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजन न केवल स्वाद में लाजवाब होते हैं, बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद होते हैं। इनमें इस्तेमाल किए जाने वाले प्राकृतिक और जैविक उत्पाद इन व्यंजनों को और भी खास बनाते हैं। अगर आप उत्तराखंड घूमने जाते हैं, तो इन पारंपरिक पकवानों का स्वाद लेना न भूलें।


क्या आप इनमें से कोई डिश बनाना चाहेंगे? हमें कमेंट में जरूर बताएं! 😊

उत्तराखंड में भूकंप, एक महीने में पांच बार हिली धरती, किसी बड़े खतरे की आहट तो नहीं ?

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उत्तराखंड में भूकंप कोई नई बात नहीं है। यूं तो पूरा उत्तराखंड ही भूकंप की द्ष्टि से बेहद संवेदनशील है लेकिन कुछ ऐसे इलाके हैं जहां भूकंप आने की आशंका अधिक है। इन्हीं में से एक है उत्तरकाशी। उत्तरकाशी में पिछले कुछ दिनों से लगातार आ रहे भूकंप ने लोगों को दहशत में डाल दिया है। उत्तरकाशी इसके पहले भी भूकंप की विभीषिका झेल चुका है।

एक महीने में पांच बार आए भूकंप

उत्तरकाशी पिछले कुछ दिनों से भूकंप की गतिविधियों को महसूस कर रहा है। यहां लगातार भूकंप आ रहे हैं। बुधवार की दोपहर में भी उत्तरकाशी में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। दोपहर 3.28 बजे आए इस भूकंप की रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 2.7 आंकी गई है। इसका केंद्र भटवाड़ी तहसील के साल्ड उपरिकोट गांव में जमीन में पांच किलोमीटर नीचे था।

उत्तरकाशी में पिछले हफ्ते भी भूकंप आया था जिसके चलते लोगों में दहशत फैल गई थी। सुबह आए इस भूकंप के कई आफ्टर शॉक भी महसूस किए गए थे। लोग घरों से बाहर निकल आए थे।

वैसे उत्तराखंड में पिछले एक महीने में पांच बार भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए हैं। उत्तरकाशी के साथ साथ बागेश्वर में भी भूकंप ने लोगों को डरा दिया था।

वहीं राज्य में पिछले महीने भी कई बार भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। नेशनल सेंटर ऑफ सिस्मोलॉजी के मुताबिक राज्य में दिसंबर में भी उत्तराखंड में पांच भूकंप के झटके महसूस किए गए थे।

क्यों आ रहे हैं बार-बार उत्तराखंड में भूकंप

सवाल उठता है कि आखिर उत्तराखंड में बार बार भूकंप क्यों आ रहे हैं ? दरअसल उत्तराखंड का बड़ा हिस्सा पृथ्वी की फॉल्ट लाइन पर बसा हुआ है। यही वजह है कि यहां बड़े भूकंप आने की आशंका हमेशा बनी रहती है। इसे देखते हुए उत्तराखंड को भूकंप के लिहाज से अति संवेदनशील जोन, जोन चार और पांच में रखा गया है। पृथ्वी की प्लेट्स में हो रही टकराहट से बार बार भूकंप महसूस किए जा रहे हैं।

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भारत का सिस्मिक जोन का नक्शा

उत्तरकाशी में 1991 में आया था भीषण भूकंप

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में 1991 में भीषण भूकंप आया था। इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.6 आंकी गई थी। इस भीषण भूकंप में हजारों लोग मारे गए थे।

महाकुंभ में भगदड़, कई लोगों की मौत की खबर, अखाड़ों ने रद्द किया स्नान

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प्रयागराज के दूसरे अमृत स्नान मौनी अमावस्या के मौके पर महाकुंभ में भारी भीड़ उमड़ी, जिससे भगदड़ मच गई। इस घटना में दर्जनों श्रद्धालु घायल हो गए और कई परिवार एक-दूसरे से बिछड़ गए। घटना में कई लोगों की मौत की खबर है। हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। पुलिस और प्रशासन ने तुरंत हालात संभालने की कोशिश की, लेकिन भीड़ का दबाव इतना ज्यादा था कि लोगों को संभालना मुश्किल हो गया।

10 से अधिक की मौत की आशंका

महाकुंभ में भगदड़ से कितनी मौतें हुईं हैं इसे लेकर आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है लेकिन माना जा रहा है कि 10 से अधिक लोगों की मौत हुई है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, भगदड़ में 14 लोगों की मौत खबर सामने आ रही है। हालांकि, अभी तक अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मौनी अमावस्या के दिन संगम में 10 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु पवित्र स्नान करने पहुंचे। त्रिवेणी संगम पर स्नान के दौरान अचानक भीड़ अनियंत्रित हो गई, जिससे श्रद्धालुओं के बीच अफरा-तफरी मच गई। इस भगदड़ में कई लोग घायल हो गए, जबकि कुछ अपने परिवार से बिछड़ गए।

अखाड़ों का शाही स्नान रद्द

इस अप्रिय घटना के बाद अखाड़ा परिषद ने मौनी अमावस्या पर होने वाले ‘अमृत (शाही) स्नान’ में भाग न लेने का फैसला किया है। प्रशासन लगातार श्रद्धालुओं से अपील कर रहा है कि स्नान के बाद जल्द से जल्द घाटों को खाली करें ताकि भीड़ नियंत्रित की जा सके।

महाकुंभ में क्या हुआ ?

कर्नाटक से आईं श्रद्धालु सरोजिनी ने बताया कि वे 60 लोगों के एक समूह के साथ आई थीं। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि धक्का-मुक्की शुरू हो गई और उनका समूह फंस गया। उन्होंने बताया कि कई लोग गिर पड़े, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। हालांकि, प्रशासन ने अभी तक घायलों की सही संख्या की पुष्टि नहीं की है, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार 30 से 40 लोग घायल हुए हैं। प्रशासन ने किए कड़े इंतजाम, फिर भी क्यों हुई भगदड़? उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले ही भीड़ नियंत्रण के लिए कड़े नियम लागू किए थे। नो-व्हीकल ज़ोन और सेक्टर-वार प्रतिबंध लगाए गए थे, ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारू रूप से हो। लेकिन उम्मीद से ज्यादा लोगों के आने और श्रद्धालुओं की अधीरता के कारण यह स्थिति बन गई।

Pranav Singh Champion 14 दिन न्यायिक हिरासत में भेजे गए जेल, MLA उमेश शर्मा को मिली जमानत

Pranav Singh Champion और खानपुर से विधायक उमेश कुमार के बीच विवाद के बाद गिरफ्तार किए गए चैंपियन को आज कोर्ट में पेश किया गया। सुनवाई के बाद चैंपियन को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया।

इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट परिसर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। गौरतलब है कि, पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन और खानपुर विधायक उमेश कुमार के कार्यालय पर फायरिंग के मामले में यह कार्रवाई हुई है। पुलिस ने पूर्व विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन की गाड़ियां अपने कब्जे में ले ली हैं। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल की गई गाड़ियों को रुड़की कोतवाली में लाकर खड़ा करा दिया है।

खानपुर विधायक उमेश कुमार को कोर्ट से मिली जमानत

खानपुर विधायक उमेश शर्मा को भी पुलिस ने हरिद्वार के रोशनाबाद कोर्ट में पेश किया। सुनवाई के बाद उमेश कुमार को सीजेएम कोर्ट से जमानत मिल गई। करीब 15 मिनट तक चली सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने जमानत दे दी। 40-40 हजार के दो मुचलके भरे गए।

कोर्ट परिसर के आसपास उमड़ी Pranav Singh Champion के समर्थकों की भीड़

कोर्ट में पेशी के दौरान पूर्व विधायक Pranav Singh Champion के सैकड़ो समर्थकों की भीड़ उमड़ पड़ी। जिसके बाद कोर्ट परिसर को भी छावनी में तब्दील कर दिया गया। एसपी देहात शेखर सियाल चंद्र खुद मौके पर व्यवस्था संभाल रहे थे। कई थाने की फोर्स के अलावा पीएसी भी कोर्ट परिसर और आसपास लगा दी गई थी।

हत्या के प्रयास का मुकदमा हआ था दर्ज

बता दें कि कुंवर Pranav Singh Champion को खानपुर विधायक उमेश कुमार के आवास पर फायरिंग और मारपीट के मामले में गिरफ्तार किया गया था। हत्या के प्रयास सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। इस मामले से पूरे क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

Read Also: Pranav Singh Champion: कौन हैं विवादों के चैंपियन ‘प्रणव सिंह’? अब तक इतने विवादों से जुड़ चुका है नाम…

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि रविवार को पूर्व विधायक Pranav Singh Champion की ओर से विधायक उमेश के कैंप कार्यालय पर गोली चलाने के बाद माहौल गर्मा गया था। इसके बाद विधायक उमेश कुमार Pranav Singh Champion के कार्यालय पर हाथ में पिस्टल ले जाते हुए दिखाए दिए थे। पुलिस ने किसी तरह उन्हें रोका था।

इस मामले में दोनों के समर्थकों में टकराव की स्थिति बन गई थी। जिसके बाद दोनों के कैंप कार्यालय पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। इस बीच पुलिस चैंपियन को गिरफ्तार करते हुए देहरादून के नेहरू कालोनी थाने में ले गई उसके बाद देर रात पुलिस चैंपियन और उनके समर्थकों को लेकर रुड़की पहुंची थी। इस मामले में पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया था।

Pranav Singh Champion: कौन हैं विवादों के चैंपियन ‘प्रणव सिंह’? अब तक इतने विवादों से जुड़ चुका है नाम…

Pranav Singh Champion वही हैं जिन्होंने खानपुर के विधायक उमेश कुमार के घर अंधाधुंध फायरिंग की। दरअसल प्रणव सिंह चैंपियन का विवादों के साथ चोली-दामन का साथ है। हथियारों की प्रदर्शनी से लेकर मगरमच्छ से शिकार और कैबिनेट मंत्री के घर पार्टी के दौरान फायरिंग का आरोप भी उन पर लग चुका है। आइए जानते हैं आखिर कौन हैं Pranav Singh Champion?

गणतंत्र दिवस का खत्म होते-होते उत्तराखंड में सरेआम गोलीबारी और गुंडागर्दी की तस्वीरें और वीडियो वायरल हो गए। सोशल मीडिया पर भड़की बयानबाजी ने साक्षात लड़ाई का रूप ले लिया। बीजेपी के पूर्व विधायक प्रणव सिंह चैंपियन (Pranav Singh Champion) और मौजूदा निर्दलीय विधायक उमेश कुमार आमने-सामने आ गए। पिस्टल और राइफल से फायरिंग की घटना देख लोग हैरत में पड़ गए। वो भी दो माननीयों के बीच।

चर्चा होने लगी कि ये प्रणव सिंह चैंपियन आखिर है कौन? जो विधायक के दफ्तर में घुसकर दनादन फायरिंग करते नजर आ रहे हैं। बता दें कि बीते विधानसभा चुनाव में खानपुर सीट से उमेश कुमार ने Pranav Singh Champion को हराकर चुनाव जीता था।

2002 से लेकर 2022 तक चार बार विधायक बने Pranav Singh Champion

लंढौरा के गुर्जर राज परिवार से आने वाले कुंवर Pranav Singh Champion साल 2002 से लेकर 2022 तक चार बार विधायक रहे। उत्तराखंड की पहली निर्वाचित कांग्रेस सरकार के समय से ही वह सुर्खियों में रहे। नारायण दत्त तिवारी के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान चैंपियन को पूरी उम्मीद थी कि निर्दलीय विधायक के रूप में कांग्रेस को समर्थन देने के कारण उन्हें मंत्री बनाया जाएगा। वह पूरी तैयारी के साथ आए थे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। तब नाम न आने पर उन्होंने खासी नाराजगी जताई थी।

Pranav Singh Champion पर मगरमच्छ के शिकार के आरोप लगे थे

साल 2003 में Pranav Singh Champion पर लक्सर में मगरमच्छ के शिकार के आरोप लगे थे। इस पर वन विभाग ने मुकदमा भी दर्ज किया था। 2009 में चैंपियन पर मंगलौर में हवाई फायरिंग का मामला दर्ज हुआ, लेकिन कोई कारवाई नहीं हुई। 2011 में रुड़की के एक होटल के मालिक पर फायरिंग करने का भी आरोप लगा। चैंपियन पर तत्कालीन विधायक और मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के समर्थकों ने मारपीट का मुकदमा दर्ज कराया था।

2015 में हवाई फायरिंग के लगे थे आरोप

साल 2015 में कांग्रेस सरकार के दौरान तत्कालीन कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के देहरादून में यमुना कॉलोनी स्थित आवास पर एक पार्टी के दौरान Pranav Singh Champion पर हवाई फायरिंग के आरोप लगे थे। भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल से छिड़ी जुबानी जंग में चैंपियन ने नैतिकता को ताक पर रख दिया था।

Pranav Singh Champion का बंदूकों के साथ डांस वायरल हुआ था

2017 चुनाव के दौरान उन पर नामांकन में हथियारबंद समर्थकों को ले जाने का आरोप लगा। बंदूकों के साथ डांस करने और अभद्र टिप्पणी के लिए भाजपा ने उन्हें निष्कासित कर दिया था।

गौरतलब है कि मौजूदा समय में खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार के कैंप कार्यालय पर दिनदहाड़े फायरिंग और तोड़फोड़ हुई। खानपुर से विधायक रह चुके भाजपा नेता कुंवर प्रणव चैंपियन ने साथियों के साथ पहुंचकर फायरिंग की। चैंपियन ने अपने फेसबुक पेज पर मारपीट का एक वीडियो भी डाला है। चुनाव में हार-जीत के नतीजे आने के बाद यह सारा मामला सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्णियों से शुरू हुआ।

Pranav Singh Champion

सोशल मीडिया पर दोनों ‘माननीयों’ ने शुरू कीं अभद्र टिप्पणियां, हुआ हंगामा

ये मामला शनिवार से शुरू हुआ, जब प्रणव सिंह ने उमेश कुमार को लेकर सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणियां कीं। इसके बाद देर रात को ही उमेश कुमार ने भी सोशल मीडिया पर लाइव आकर पूर्व विधायक को जमकर खरी-खोटी सुनाई। वह Pranav Singh Champion के राजमहल पहुंच गए और बाहर निकलने की धमकी दी। यह सुनकर प्रणव सिंह उमेश कुमार के लंढौरा स्थित घर पर पहुंच गए। वो वहां नहीं मिले तो अपने लाव-लश्कर के साथ प्रणव सिंह उमेश कुमार के कैंप कार्यालय पहुंचे। यहां जमकर गोलियां चलीं। जिसके बाद गिरफ्तारियां हुईं।

खानपुर के विधायक उमेश कुमार को कोर्ट से जमानत मिल गई

फिलहाल  खानपुर के विधायक उमेश कुमार को कोर्ट से जमानत मिल गई है, सुनवाई के बाद कोर्ट ने 40-40 हजार के दो जमानती लेकर जमानत दे दी है। बता दें कि भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उमेश कुमार को रोशनाबाद कोर्ट में पेश किया गया था जहां सीजेएम अविनाश कुमार श्रीवास्तव ने सुनवाई के बाद जमानत दे दी।

Pranav Singh Champion 14 दिन की न्यायिक हिरासत में

तो वहीं कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन को हरिद्वार पुलिस ने कोर्ट में पेश करने के बाद अब जेल भेज दिया है आपको बता दें कि कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन को 14 दिन की न्यायिक हिरासत के तहत सीजेएम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए जेल भेजा है.

UCC In Uttarakhand: दूसरे धर्म के बच्चे को गोद लेने पर रोक… पढ़िये UCC से उत्तराखंड में क्या-क्या बदला?

UCC यानि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता आज सोमवार से लागू हो गया है. अब राज्य के सभी नागरिकों (हर धर्म, जाति, लिंग) पर एक ही कानून लागू होगा. उत्तराखंड अब देश में UCC (Uniform Civil Code) लागू करने वाला पहला राज्य बन गया है.

UCC धर्म या पंत के खिलाफ नहीं है: सीएम धामी

CM Pushkar Singh Dhami ने कहा है कि समान नागरिक संहिता किसी भी धर्म या पंत के खिलाफ नहीं है. इसमें किसी को टार्गेट करने का कोई कारण नहीं है. यह समाज में समानता लाने का कानूनी प्रयास है. इसमें किसी प्रथा को नहीं बदला गया है बल्कि कुप्रथा को खत्म किया गया है.’ आइए जानते हैं अब उत्तराखंड में क्या-क्या बदल जाएगा?

60 दिन के अंदर विवाह को करना होगा रजिस्टर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि यह UCC कानून सभी पर एकसमान अधिकार और जिम्मेदारियों को सुनिश्चित करते हुए समाज में एकरूपता लेकर आएगा. UCC में बहुविवाह और हलाला की अनुमति नहीं है. साथ ही 2010 से हुई शादियों का रजिस्ट्रेशन करवाना होगा और एक्ट लागू होने के बाद होने वाली शादियों को 60 दिन के अंदर रजिस्टर करवाना होगा. सभी धर्मों के लिए तलाक का कानून भी एक जैसा होगा. 

ट्रांसजेंडर की परंपराओं में कोई बदलाव नहीं है

ट्रांसजेंडर की परंपराओं में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है. संविधान के अनुच्छेद-342 में वर्णित अनुसूचित जनजातियों को यूसीसी से बाहर रखा गया है. इन जनजातियों को रीति-रिवाजों के संरक्षण के लिहाज से इन्हें यूसीसी से बाहर रखा गया है.

लिव-इन रिलेशनशिप के लिए जरूरी है रजिस्ट्रेशन

उत्तराखंड UCC कानून विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप और इनसे संबंधित अन्य विषयों को रेगुलेट करेगा. यूसीसी में सभी धर्मों में पुरुषों और महिलाओं के लिए समान शादी की उम्र, तलाक के आधार और प्रक्रियाएं तय की गईं हैं, जबकि बहुविवाह और हलाला पर बैन लगाया गया है.

लिव-इन में जन्मा बच्चा होगा लीगल

लिव-इन में पैदा हुए बच्चे को लीगल माना जाएगा. रिलेशनशिप टूटने पर महिला गुजारा-भत्ता मांग सकती है. सीएम धामी ने कहा कि लिव इन में रहने के दौरान जन्मे बच्चे को उस कपल का बच्चा माना जाएगा और उसे सभी अधिकार प्राप्त होंगे. उन्होंने कहा, ‘हमारा उद्देश्य किसी की निजता का हनन करना नहीं है बल्कि उनकी सुरक्षा हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है. 

हलाला-बहु-विवाह पर रोक

इस्लाम में प्रचलित हलाला प्रथा पर यूसीसी में रोक लगा दी गई है. उत्तराखंड में रहने वाले मुस्लिम लोग हलाला प्रथा का पालन नहीं कर सकते हैं. साथ ही बहुविवाह पर भी रोक है.

शादी के बाद तलाक का रजिस्ट्रेशन 

इस कानून के जरिए शादी की तरह विवाह-विच्छेद का पंजीकरण भी जरूरी है, जो वेब पोर्टल के जरिए किया जा सकेगा.

दूसरे धर्म का बच्चा गोद लेने पर रोक

यूसीसी के तहत सभी धर्मों को बच्चा गोद लेने का अधिकार है, लेकिन अपने ही धर्म का बच्चा गोद ले सकते हैं. दूसरे धर्म का बच्चा गोद लेने पर रोक है.

बेटा और बेटी को संपत्ति में बराबर का हक

यूसीसी के तहत सभी समुदायों में बेटा और बेटी को पिता की संपत्ति में बराबर का हक मिलेगा. प्राकृतिक संबंधों, सहायक विधियों या लिव-इन रिलेशनशिप में जन्मे बच्चों का भी संपत्ति में अधिकार माना जाएगा. 

माता-पिता को भी संपत्ति में अधिकार

किभी व्यक्ति की मृत्यु के बाद पत्नी और बच्चों के साथ माता-पिता को भी संपत्ति में हक मिलेगा. अगर संपत्ति को लेकर कोई मतभेद की स्थिति पैदा होती है तो मृतक की संपत्ति में से पत्नी, बच्चों और माता-पिता को समान अधिकार मिलेगा.

बता दें कि 27 जनवरी को UCC लागू किए जाने की तारीख पहले से तय की गई थी. सीएम धामी ने यूसीसी पोर्टल ucc.uk.gov.in का शुभारंभ भी किया और UCC लागू करते हुए कहा कि इस कानून से समाज में एकरूपता आएगी और सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और दायित्व तय होंगे. समान नागरिक संहिता के अंतर्गत जाति, धर्म, लिंग आदि के आधार पर भेद करने वाले व्यक्तिगत नागरिक मामलों से संबंधित सभी कानूनों में एकरूपता लाने की कोशिशि की गई है.

2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने को प्रमुख चुनावी वादे में रखा था. सीएम की कुर्सी पर दोबारा बैठते ही पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में कैबिनेट की पहली ही बैठक में यूसीसी प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए उसका मसौदा तैयार करने के लिए विशेषज्ञ कमेटी के गठन पर मुहर लगा दी गई थी.

Uttarakhand Nikay Chunav 2024: बैलेट पेपर से मतदान में न करें ये गलतियां नहीं तो वोट हो जाएगा अवैध

Uttarakhand Nikay Chunav 2024: उत्तराखंड में निकाय चुनाव के लिए प्रचार का शोर थम गया है. आज प्रत्याशी घर घर जाकर वोट की अपील कर सकते हैं. किसी भी चुनावी सबा की अनुमति नहीं है. इस दौरान मतदाताओं के लिए ये जानना ज़रूरी है कि किस गलती की वजह से उनका वोट अवैध घोषित हो सकता है. आइए जानते हैं अपने वोट को अवैध होने से बचने के लिए आपको क्या सावधानी बरतनी होगी.

बैलेट पेपर को गलत ढंग से मोड़ने के कारण वोट हो जाता है खराब

बैलेट पेपर से मतदान में अक्सर वोटर जल्दबाजी में कुछ गलतियां करते हैं और इस कारण उनका वोट अवैध हो जाता है. मसलन, बैलेट पेपर में गलत जगह स्याही लगना, गलत जगह ठप्पा लगाना या बैलेट पेपर को गलत ढंग से मोड़ने के कारण स्याही का फैल जाना. ऐसे कुछ कारणों से वोट खराब हो जाता है. Uttarakhand Nikay Chunav में वोटर को सका खास ध्यान रखना होगा.

Uttarakhand Nikay Chunav: चुनाव चिन्ह के सामने लगानी होती है मुहर

Uttarakhand Nikay Chunav: मतदान के समय फोल्डेड यानी मुड़ा हुआ बैलेट पेपर यानी मतपत्र वोटर को दिया जाता है. इस मतपत्र में विभिन्न दलों के प्रत्याशियों के चुनाव चिन्ह और नाम होते हैं. हर प्रत्याशी के बीच में एक डॉटेड स्टार वाली लाइन होती है. निर्वाचन अधिकारियों के मुताबिक, मतदाता को जिसको भी वोट देना है, उसी के सामने स्याही वाली मुहर से मध्य में ठप्पा लगाया जाता है.

अलग करने वाली लाइन में लगेगा ठप्पा तो वोट अवैध

ठप्पा अगर दो प्रत्याशियों के नाम अलग करने वाली लाइन में लगेगा तो वोट अवैध हो जाएगा. अगर वो बैलेट पेपर के बाहरी किसी हिस्से में लगाया जाता है तो भी वो अनवैलिड हो जाएगा. ऐसे में हमेशा प्रत्याशी के नाम और चुनाव चिन्ह के बीच निर्धारित जगह पर ही मुहर लगाएं.

Uttarakhand Nikay Chunav: बैलेट पेपर को ऐसे मोड़ें 

मुहर लगाने के बाद भी अक्सर मतदाता बैलेट पेपर को गलत ढंग से मोड़ देते हैं. ऐसे में स्याही कई जगह गलत ढंग से लग जाने पर भी वोट रद्द हो जाता है. लिहाजा वोट डालने के बाद भी गोपनीयता बरतते हुए मतपत्र जिस ढंग से मोड़ा हुआ मिला था, उसी तरह मोड़कर सुरक्षित मतदान पेटी में डालें. 

इन कारणों से भी रद्द हो जाता है वोट

निर्वाचन आयोग के नियमों के मुताबिक, अगर आप बैलेट पेपर पर वोट डालने के बाद उसे किसी को सार्वजनिक भी करते हैं तो भी आपका वोट रद्द किया जा सकता है. ऐसे में पूरी गोपनीयता भी मतदान के दौरान बनाए रखें. विशेष परिस्थितियों में ही कुछ लोगों को किसी अन्य की मदद से मतदान करने की अनुमति होती है.